ब्रेकिंग न्यूज

जनप्रतिनिधि

Previous123456789...107108Next

मुख्यमंत्री निवास में विराजे विघ्नहर्ता गणेश, CM साय ने विधि-विधान से की पूजा-अर्चना

15-Sep-2026
रायपुर: गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में भगवान श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने परिवारजनों के साथ पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाज से विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की मंगलकामना की।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को गणेश चतुर्थी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्री गणेश बुद्धि, और विवेक के प्रतीक हैं। किसी भी शुभ कार्य का प्रारंभ भगवान गणेश की आराधना से करने की हमारी प्राचीन परंपरा रही है। गणेशोत्सव हमारी आस्था का पर्व होने के साथ ही समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और एकजुटता को सुदृढ़ करने वाला उत्सव भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में तीज-त्योहारों और उत्सवों का विशेष महत्व है। हमारे पर्व हमें अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ परिवार और समाज को भी एक सूत्र में पिरोते हैं। गणेशोत्सव का उल्लास भी हमें सामूहिकता, सद्भाव और लोकमंगल की भावना से जोड़ता है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के परिवारजन, मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. धीरेंद्र तिवारी, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी आलोक सिंह तथा मुख्यमंत्री निवास कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वैश्विक मंच पर सशक्त हुई भारत की भूमिका : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

14-Sep-2026
रायपुर (शोर संदेश) मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत आज विश्व पटल पर एक विश्वसनीय और प्रभावशाली शक्ति के रूप में उभरा है। वर्ष 2026 में BRICS की अध्यक्षता और 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और नेतृत्व क्षमता का परिचायक है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह प्रत्येक भारतवासी के लिए गौरव का अवसर है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आज न केवल अपने राष्ट्रीय हितों को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है, बल्कि विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को भी वैश्विक मंचों पर सशक्त स्वर दे रहा है।
उन्होंने कहा कि “Building Resilience, Innovation, Cooperation, and Sustainability” की थीम के साथ भारत की BRICS अध्यक्षता वैश्विक सहयोग, नवाचार और सतत विकास को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण अवसर है। भारत का दृष्टिकोण सदैव दुनिया को साथ लेकर चलने और साझा प्रगति के नए मार्ग तैयार करने का रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक मंचों पर सदैव स्पष्ट और दृढ़ रुख रखा है। साथ ही डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय समावेशन और तकनीक के माध्यम से जनसामान्य के जीवन में बदलाव का भारत का मॉडल आज दुनिया के लिए प्रेरणा बन रहा है। BRICS जैसे मंच इन अनुभवों और विकास की संभावनाओं को साझा करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका देश और राज्यों के लिए निवेश, प्रौद्योगिकी, नवाचार और रोजगार के नए अवसर भी लेकर आ रही है। विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भारत की BRICS अध्यक्षता के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि भारत का नेतृत्व वैश्विक सहयोग को मजबूत करने, ग्लोबल साउथ की आवाज को सशक्त बनाने और साझा समृद्धि के नए मार्ग प्रशस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 


जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ने का सबसे सशक्त माध्यम है शिक्षा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

14-Sep-2026
रायपुर (शोर संदेश)  शिक्षा व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा आवश्यक है और इस पूरी प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। शिक्षक बच्चों को केवल किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व को गढ़ते हैं, उन्हें संस्कार और सही दिशा देते हैं तथा उनके माध्यम से समाज एवं राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव तैयार करते हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बेमेतरा के बेसिक स्कूल मैदान में आयोजित जिला स्तरीय शिक्षक सम्मान एवं प्रतिभावान विद्यार्थी सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। 
मुख्यमंत्री साय ने समारोह में जिले के 81 सेवानिवृत्त शिक्षकों को शॉल, श्रीफल, स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर बोर्ड एवं महाविद्यालयीन परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिले के 42 मेधावी छात्र-छात्राओं को भी विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की ओर से गोल्ड मेडल एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री ने सम्मानित शिक्षकों और विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारे देश में गुरु के सम्मान की गौरवशाली परंपरा रही है। शिक्षक अपने ज्ञान, अनुभव और संस्कारों से पीढि़यों का निर्माण करते हैं। एक शिक्षक द्वारा दी गई शिक्षा का प्रभाव केवल एक विद्यार्थी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके परिवार, समाज और आने वाली पीढि़यों तक पहुंचता है। इसीलिए शिक्षक को राष्ट्र निर्माता कहा गया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा ज्ञान का वह प्रकाश है, जो अज्ञानता के अंधकार को दूर करता है। शिक्षा व्यक्ति को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाने के साथ उसमें आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करती है। शिक्षित और संस्कारित नागरिक ही सशक्त समाज तथा विकसित राष्ट्र का निर्माण करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत प्राचीन काल से ज्ञान और शिक्षा की भूमि रहा है। तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्व प्रसिद्ध शिक्षा केंद्रों में दुनिया के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थी ज्ञान अर्जित करने आते थे। हमारी यह समृद्ध ज्ञान परंपरा आज भी हमें प्रेरणा देती है। बदलते समय और नई तकनीकों के दौर में शिक्षा के स्वरूप में भी तेजी से बदलाव आ रहा है। ऐसे में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ उन्हें भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना जरूरी है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में अधोसंरचना और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष ध्यान दे रही है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ का कोई भी बच्चा संसाधनों या अवसरों के अभाव में पीछे न रहे। गांव हो या शहर, गरीब हो या संपन्न परिवार - हर बच्चे को अपनी प्रतिभा निखारने, अच्छी शिक्षा प्राप्त करने और अपने सपनों को साकार करने के समान अवसर मिलें।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए आईआईटी, आईआईएम, एम्स और ट्रिपल आईटी जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संस्थाएं स्थापित हैं। इससे प्रदेश के युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के नए अवसर सृजित हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को बेहतर वातावरण और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए नालंदा परिसर जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। यहां विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर लाइब्रेरी, स्टडी मटेरियल और आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। नई दिल्ली में भी छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
उन्होंने कहा कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभावान विद्यार्थी की शिक्षा और उसके सपनों के रास्ते में बाधा न बनें, इसके लिए राज्य सरकार छात्रवृत्ति, शिक्षा ऋण और विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को सहयोग प्रदान कर रही है। हमारा उद्देश्य केवल शिक्षित युवा तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे आत्मविश्वासी, कुशल और सक्षम युवा तैयार करना है जो विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर बेमेतरा जिले के विकास के लिए दो महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने बेमेतरा शहर में गौरव पथ के निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत किए जाने तथा ग्राम पंचायत तिवरिया में नवीन विद्युत सब-स्टेशन के निर्माण की घोषणा की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा के साथ-साथ सड़क, बिजली, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शहरों और गांवों में बेहतर अधोसंरचना का निर्माण विकास की गति को तेज करने के साथ नागरिकों के जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाएगा।
समारोह में “मोर गांव मोर पानी” महाअभियान के अंतर्गत जल संरक्षण एवं भू-जल स्तर में सुधार के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों को भी सम्मानित किया गया। बेमेतरा जिले को क्रिटिकल जोन से सेमी-क्रिटिकल जोन की दिशा में लाने के लिए किए गए प्रयासों के लिए जनपद पंचायत बेमेतरा, बेरला एवं नवागढ़ को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री साय ने जल संरक्षण को भविष्य की पीढि़यों से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। शासन के प्रयासों के साथ जनभागीदारी जुड़ने पर बड़े बदलाव संभव होते हैं। उन्होंने जल संरक्षण के क्षेत्र में जिले में किए गए प्रयासों की सराहना की।
समारोह में प्रबुद्ध नागरिकों एवं समाजसेवी संस्थाओं द्वारा प्रकाशित “शिक्षक स्मृति” पत्रिका का भी विमोचन किया गया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के साथ गरीब, किसान, महिला और युवा सहित समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों के पक्के आवास का सपना पूरा किया जा रहा है। महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक संबल मिला है। वहीं तकनीक के उपयोग से शासन की सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सरल और नागरिक-केंद्रित बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अटल मॉनिटरिंग पोर्टल, सेवा सेतु और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी पहलों के माध्यम से शासन और नागरिकों के बीच की दूरी कम करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि योजनाओं और सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक सरलता और समयबद्धता के साथ पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कुशल युवा शक्ति तथा सशक्त गांवों और शहरों से तैयार होगी।
मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर का उल्लेख करते हुए प्रदेशवासियों से 17 सितंबर की शाम अपने घरों में एक दीप प्रज्ज्वलित कर सेवा, विकास और जनकल्याण के संकल्प को और मजबूत करने का आह्वान किया।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु का स्थान सदैव सर्वाेपरि रहा है। शिक्षक अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं और नई पीढ़ी को सही दिशा प्रदान करते हैं। शिक्षक केवल विद्यार्थी का ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करते हैं।
उन्होंने सम्मानित शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षकों का ज्ञान, अनुभव और मार्गदर्शन आने वाली पीढि़यों के लिए अमूल्य धरोहर है।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयाल दास बघेल ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की शक्ति पैदा करती है। शिक्षक विद्यार्थियों को शिक्षा देने के साथ उन्हें संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक दीपक की तरह ज्ञान का प्रकाश फैलाकर बच्चों का भविष्य संवारते हैं।
मंत्री बघेल ने सम्मानित सभी शिक्षकों एवं मेधावी विद्यार्थियों को बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर विधायक दीपेश साहू, विधायक ईश्वर साहू, रजककार विकास बोर्ड के अध्यक्ष प्रहलाद रजक, छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष स्वामी राजीव लोचन दास, तेलघानी बोर्ड के अध्यक्ष जितेन्द्र साहू, कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं, जिला पंचायत अध्यक्ष कल्पना योगेश तिवारी सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
 

विष्णु भैया’ का घर बना बहनों का मायका, मुख्यमंत्री निवास में उल्लास से मना तीजा-पोरा तिहार

13-Sep-2026
रायपुर (शोर संदेश) नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास तीजा-पोरा तिहार के अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारिवारिक आत्मीयता और मातृशक्ति के उल्लास का साक्षी बना। प्रदेश के विभिन्न अंचलों से बड़ी संख्या में पहुंचीं माताओं, बहनों और बेटियों के स्वागत में मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी गांव और मायके की तरह सजाया गया था। पारंपरिक बैलगाड़ी, नंदिया-बइला, लोक शिल्प और ग्रामीण परिवेश की सजावट के बीच फुगड़ी, रस्साकशी, कुर्सी दौड़, मेहंदी और झूलों ने पूरे परिसर को उत्सव के रंग में रंग दिया। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच माताओं-बहनों ने पूरे उत्साह के साथ तीजा-पोरा की खुशियां साझा कीं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माताओं-बहनों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में तीजा पर बेटियों और बहनों के मायके आने की सुंदर परंपरा है। आज प्रदेशभर से आप सभी बहनें मेरे घर आई हैं, इसलिए मुख्यमंत्री निवास आज आप सभी का मायका है। अपने भाई के घर आपका आना मेरे लिए सौभाग्य और आनंद की बात है। मुख्यमंत्री के इस आत्मीय संबोधन के साथ पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तीजा-पोरा हमारी माटी, परिवार, रिश्तों, खेती-किसानी, पशुधन और लोकजीवन से जुड़ा जीवंत उत्सव है। हरेली से शुरू होने वाली छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहारों की सुंदर श्रृंखला हमारे सामाजिक और पारिवारिक जीवन को आत्मीयता के सूत्र में बांधती है। हमारी लोक परंपराएं पीढ़ियों को अपनी जड़ों और संस्कारों से जोड़ने का काम करती हैं।
शिव-पार्वती की पूजा कर मांगी प्रदेश की सुख-समृद्धि
कार्यक्रम के आरंभ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की और प्रदेश की माताओं-बहनों सहित सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजा का पर्व माता पार्वती की तपस्या, समर्पण और अटूट आस्था से जुड़ा हुआ है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। हमारी माताएं और बहनें आज भी इस महान परंपरा को श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती से प्रदेश की माताओं-बहनों के सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य के साथ छत्तीसगढ़ के निरंतर विकास और खुशहाली की प्रार्थना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पोरा का पर्व हमारी कृषि संस्कृति और पशुधन के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति में खेती-किसानी केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन पद्धति का अभिन्न हिस्सा है। तीजा और पोरा का यह संगम हमारी लोकसंस्कृति की उसी आत्मीयता और व्यापकता को अभिव्यक्त करता है।
सुपोषित छत्तीसगढ़ के लिए ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान
तीजा-पोरा के अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशव्यापी ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान का शुभारंभ किया और अभियान के लोगो का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुनगा पोषक तत्वों और आवश्यक मिनरल्स से भरपूर है। इसकी पत्तियां और फलियां पोषण की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं। विशेषकर महिलाओं और बच्चों के आहार में इसका उपयोग बेहतर पोषण में सहायक हो सकता है।
उन्होंने प्रदेशवासियों से अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि अपने घरों और आसपास मुनगा लगाएं और इसके पोषण गुणों को जन-जन तक पहुंचाएं। घर-घर मुनगा लगाने की यह पहल जनभागीदारी के माध्यम से सुपोषित छत्तीसगढ़ के संकल्प को और मजबूत करेगी।
राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ, सुपोषण रथ करेगा जागरूक
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर प्रदेश में राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ किया। उन्होंने राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के पोस्टर का विमोचन किया और उपस्थित माताओं-बहनों को सुपोषण की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री ने सुपोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक प्रदेशभर में पोषण माह आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान महिलाओं, बच्चों और परिवारों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। सुपोषण रथ भी अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर पोषण संबंधी जानकारी लोगों तक पहुंचाएगा।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ मां और सुपोषित बच्चा स्वस्थ समाज की मजबूत नींव हैं। केंद्र और राज्य सरकार महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण तथा बेहतर भविष्य के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी से पोषण के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव को और गति दी जा रही है।
नन्हे बच्चों को खीर खिलाकर कराया अन्नप्राशन
कार्यक्रम में आत्मीयता का एक विशेष दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री  साय ने नन्हे बच्चों को अपने हाथों से खीर खिलाकर उनका अन्नप्राशन कराया। उन्होंने बच्चों को स्नेह और आशीर्वाद देते हुए उनके स्वस्थ, खुशहाल और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
तीजा-पोरा के पारिवारिक उत्सव के बीच अन्नप्राशन संस्कार और पोषण से जुड़ी गतिविधियों ने कार्यक्रम को सुपोषण के संदेश से भी जोड़ा। मुख्यमंत्री ने बच्चों की माताओं से भी आत्मीय संवाद किया और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण की जानकारी ली।
महतारी वंदन से माताओं-बहनों को मिल रहा आर्थिक संबल
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिला सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को हर महीने एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। अब तक 31 किस्तों के माध्यम से 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि माताओं-बहनों के बैंक खातों में सीधे अंतरित की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रवास के दौरान माताओं-बहनों से मिलने पर इस योजना से उनके जीवन में आए बदलाव की अनेक प्रेरक कहानियां सामने आती हैं। कोई बहन महतारी वंदन की राशि को बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में जमा कर रही है, तो कोई सिलाई मशीन खरीदकर आजीविका का साधन तैयार कर रही है। अनेक माताएं-बहनें सब्जी-भाजी, किराना दुकान और छोटे व्यवसायों में इस राशि का उपयोग कर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं।
उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों के हाथ में अपनी राशि होने से उनमें आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ी है। सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि आजीविका, कौशल, स्वामित्व और उद्यमिता के अवसर भी उपलब्ध हों।
लखपति दीदी से ड्रोन दीदी तक - बदल रही मातृशक्ति की तस्वीर
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। छत्तीसगढ़ में 13 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जबकि निर्धारित लक्ष्य 8 लाख महिलाओं का था। यह उपलब्धि माताओं-बहनों की मेहनत, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि महिलाएं अब पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़कर अनेक नए क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे घरों के लिए निर्माण सामग्री की आपूर्ति से जुड़कर महिलाएं ‘डीलर दीदी’ बन रही हैं। निर्माण क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर महिलाएं ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में काम कर रही हैं। खेती में आधुनिक तकनीक अपनाते हुए ‘ड्रोन दीदी’ खेतों में उर्वरक और दवाइयों का छिड़काव कर आय के नए अवसर तैयार कर रही हैं। कई ड्रोन दीदियां एक दिन में 20 से 25 एकड़ खेतों में छिड़काव कर लगभग सात हजार रुपए तक की आय अर्जित कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम दानसरा की माताओं-बहनों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां महिलाओं ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को एकत्र कर भगवान श्रीराम का मंदिर बनाने का प्रेरणादायी संकल्प लिया है। उन्होंने इसे मातृशक्ति की आस्था, सामूहिकता और दृढ़ संकल्प का सुंदर उदाहरण बताया।
महिलाओं के नाम संपत्ति को प्रोत्साहन, स्वामित्व से बढ़ रहा आत्मविश्वास
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ उन्हें संपत्ति में स्वामित्व देने की दिशा में भी राज्य सरकार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। महिलाओं के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत तथा स्टांप शुल्क में एक प्रतिशत की छूट दी जा रही है। इससे महिलाओं के नाम पर संपत्ति के पंजीयन को प्रोत्साहन मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ महिलाओं को अवसर, सम्मान, आर्थिक स्वतंत्रता और निर्णय में भागीदारी देना है। सरकार इसी व्यापक सोच के साथ माताओं-बहनों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य कर रही है।
हर जरूरतमंद परिवार के सिर पर पक्की छत का संकल्प
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में प्रतिदिन 1,600 से अधिक आवासों का निर्माण हो रहा है। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए हैं और इनमें से साढ़े 11 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान प्रदेश के लिए 3 लाख 65 हजार नए प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति प्रदान की है। हमारा संकल्प है कि प्रदेश का कोई भी जरूरतमंद परिवार पक्के मकान से वंचित न रहे। केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार मिलकर हर जरूरतमंद परिवार के पक्के घर के सपने को तेजी से साकार कर रही है।
मुख्यमंत्री निवास में साकार हुआ छत्तीसगढ़ी गांव का परिवेश
तीजा-पोरा तिहार के लिए मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी गांव की थीम पर विशेष रूप से सजाया गया था। बैलगाड़ी, नंदिया-बइला, पारंपरिक खिलौनों और ग्रामीण परिवेश के बीच प्रदेश की लोकसंस्कृति की जीवंत झलक दिखाई दी। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने पूरे परिसर में छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग बिखेर दिए।
माताओं-बहनों ने फुगड़ी, रस्साकशी और कुर्सी दौड़ में उत्साह से भाग लिया। मेहंदी लगवाने और झूला झूलने के साथ उन्होंने तीजा के मायके वाले उल्लास का आनंद लिया। मुख्यमंत्री निवास का पूरा वातावरण ऐसा था मानो प्रदेश के अलग-अलग अंचलों की लोक परंपराएं एक ही आंगन में साकार हो उठी हों।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज मुख्यमंत्री निवास वास्तव में माताओं-बहनों के मायके में बदल गया है। हमारी कामना है कि प्रदेश की हर माता और बहन के सपनों को नई उड़ान मिले, उनके परिवारों में सुख-समृद्धि बनी रहे और मातृशक्ति की भागीदारी से छत्तीसगढ़ विकास के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे।
तीजा हमारी समृद्ध परंपराओं और मातृशक्ति का पर्व : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रदेश की माताओं-बहनों को तीजा-पोरा तिहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तीजा हमारी समृद्ध परंपराओं और मातृशक्ति से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार महिलाओं के कल्याण, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना की 31 किस्तें जारी की जा चुकी हैं। यह योजना माताओं-बहनों को आर्थिक संबल देने के साथ उनमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत कर रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण तथा समग्र विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा है।
मंत्री राजवाड़े ने ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान को पोषण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए माताओं-बहनों से अपने घरों और आसपास मूनगा लगाने तथा इसे नियमित आहार में शामिल करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मंत्री गजेंद्र यादव, मंत्री दयाल दास बघेल, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत, राज्य सभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, महापौर मीनल चौबे, वीणा सिंह, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, विभिन्न संस्थाओं की पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में माताएं-बहनें उपस्थित थीं।

 


खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए संसाधनों और अवसरों की नहीं होगी कमी: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

12-Sep-2026
रायपुर(शोर संदेश)  छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। प्रदेश के गांवों, वनांचलों और दूरस्थ क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं। आवश्यकता है कि उनकी समय पर पहचान कर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाएं। राज्य सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है। प्रदेश में खेल अधोसंरचना का विस्तार करने के साथ खिलाडि़यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के खिलाडि़यों को आगे बढ़ने के लिए संसाधनों और अवसरों की कमी नहीं होने दी जाएगी।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के सिविल लाइन स्थित न्यू सर्किट हाउस में आयोजित छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की एग्जीक्यूटिव बॉडी मीटिंग एवं जनरल काउंसिल मीटिंग को संबोधित करते हुए यह बात कही। 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि खेल केवल प्रतियोगिता और पदक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और सकारात्मक ऊर्जा विकसित करने का सशक्त माध्यम हैं। प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को बेहतर मंच उपलब्ध कराना और उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं के अनुरूप तैयार करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए खेल अधोसंरचना के विकास के साथ प्रशिक्षण और प्रतिभा चयन की व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश के विभिन्न खेल संघों को उद्योग समूहों से जोड़ने की पहल में तेजी लाने की बात कही। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में अनेक बड़े उद्योग समूह कार्यरत हैं। इन समूहों के सहयोग को खेलों के विकास से जोड़ा जाए तो खिलाडि़यों के प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता, प्रतियोगिताओं के आयोजन और खेल अधोसंरचना के विस्तार में महत्वपूर्ण सहायता मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने उद्योग जगत और खेल गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय के सकारात्मक परिणामों को करीब से देखा है। यदि अलग-अलग उद्योग समूह विभिन्न खेलों और खेल संघों के साथ जुड़कर सहयोग करें, तो प्रदेश में खेलों के विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे और खिलाडि़यों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। उन्होंने इस दिशा में सुनियोजित ढंग से पहल करने को कहा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ और राज्य शासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। खेल संघों से जुड़े विषयों, उनकी आवश्यकताओं और शासन स्तर पर जरूरी प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को विशेष रूप से छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के साथ समन्वय की जिम्मेदारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे खेल संघों की आवश्यकताओं और विभिन्न प्रस्तावों पर शासन स्तर पर प्रभावी समन्वय सुनिश्चित हो सकेगा। उन्होंने कहा कि खेलों के विकास से जुड़े विषयों का समयबद्ध समाधान हो और खिलाडि़यों को योजनाओं तथा सुविधाओं का पूरा लाभ मिले, इसके लिए शासन और खेल संगठनों के बीच निरंतर संवाद आवश्यक है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना विकसित करने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। रायपुर, रायगढ़ और कुनकुरी में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा रहा है। रायपुर में लगभग 60 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक आर्चरी अकादमी का निर्माण भी किया जा रहा है। इन सुविधाओं के विकसित होने से प्रदेश के खिलाडि़यों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और अभ्यास की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसी खेल अधोसंरचना तैयार करने का प्रयास है, जहां प्रतिभाशाली खिलाड़ी आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ प्रशिक्षकों और आवश्यक संसाधनों के साथ अपनी क्षमता को निखार सकें। इससे प्रदेश के खिलाडि़यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री साय ने जशपुर अंचल में तीरंदाजी की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के युवाओं में तीरंदाजी की नैसर्गिक प्रतिभा है। विशेष रूप से पहाड़ी कोरवा समुदाय में यह खेल जीवन और परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है। इन प्रतिभाओं को आधुनिक प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराकर बड़े खेल मंचों तक पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि जशपुर के पंडरापाठ में लगभग 20 से 25 करोड़ रुपए की लागत से आर्चरी अकादमी की स्थापना की जा रही है। अकादमी के माध्यम से जशपुर सहित आसपास के वनांचल के प्रतिभाशाली खिलाडि़यों को अपने क्षेत्र में ही आधुनिक प्रशिक्षण की सुविधा मिलेगी। इससे ग्रामीण और जनजातीय अंचलों की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त होगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर और सरगुजा जैसे अंचलों में खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं हैं। बस्तर ओलंपिक ने दूरस्थ क्षेत्रों के हजारों युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का बड़ा मंच उपलब्ध कराया है। राज्य सरकार बस्तर ओलंपिक का आयोजन प्रत्येक वर्ष करेगी। सरगुजा ओलंपिक के माध्यम से भी क्षेत्र की प्रतिभाओं को आगे आने के अवसर मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति और विकास के नए वातावरण के बीच खेलों को भी नई गति देने का समय है। क्षेत्र के युवाओं में खेलों के प्रति स्वाभाविक रुचि और असाधारण क्षमता है। उन्हें उचित प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं। खेल युवाओं को सकारात्मक दिशा देने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का भी प्रभावी माध्यम हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल उत्कर्ष मिशन के माध्यम से प्रदेश की प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ी चाहे किसी बड़े शहर से हो या दूरस्थ गांव और वनांचल से, उसे आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों और खिलाडि़यों को अभूतपूर्व प्रोत्साहन मिला है। प्रधानमंत्री खिलाडि़यों से नियमित संवाद करते हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनके प्रदर्शन का उत्साहवर्धन करते हैं। इससे देश में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण बना है और खिलाडि़यों का आत्मविश्वास बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी भावना के साथ प्रदेश के खिलाडि़यों को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। राज्य में खेल अलंकरण समारोह की पुनः शुरुआत की गई है। उत्कृष्ट खिलाडि़यों को सम्मानित और प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें आवश्यक आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। खेल प्रतिभाओं को शासकीय सेवा में अवसर देने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
बैठक में 40वें नेशनल गेम्स का आयोजन छत्तीसगढ़ में कराने के विषय पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विस्तार के साथ अब बड़े राष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी की दिशा में भी गंभीरता से आगे बढ़ने का समय है। 40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी छत्तीसगढ़ को दिलाने के लिए शासन स्तर पर आवश्यक प्रयास किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि नेशनल गेम्स की मेजबानी छत्तीसगढ़ को मिलती है, तो इसके आयोजनों को बस्तर से भी जोड़ने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है। बस्तर में शांति, विकास और विश्वास का नया वातावरण बन रहा है। राष्ट्रीय स्तर का बड़ा खेल आयोजन यहां के युवाओं को प्रेरणा देने के साथ देश-दुनिया के सामने बदलते और आगे बढ़ते बस्तर तथा छत्तीसगढ़ की नई तस्वीर प्रस्तुत करने का अवसर भी बनेगा।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खेलों जैसे बड़े आयोजन से प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विकास को और गति मिलेगी, स्थानीय खिलाडि़यों को देश के श्रेष्ठ खिलाडि़यों को करीब से देखने और उनसे सीखने का अवसर मिलेगा तथा प्रदेश में खेल संस्कृति व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित होगी।
’वनांचल में तीरंदाजी और मलखम्ब की अपार संभावनाएं: वन मंत्री केदार कश्यप’
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। खेल अधोसंरचना के निर्माण और खिलाडि़यों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बजट में आवश्यक प्रावधान किए जा रहे हैं। लंबे अंतराल के बाद खेल अलंकरण समारोह आयोजित कर खिलाडि़यों को सम्मानित करने से प्रदेश की खेल प्रतिभाओं का उत्साह बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के वनांचलों में तीरंदाजी जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। यहां प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण और उचित मार्गदर्शन देने की है। बस्तर के जनजातीय युवा मलखम्ब में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। सामूहिक खेलों के साथ व्यक्तिगत खेलों में भी खिलाडि़यों की पहचान कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिए जाने की आवश्यकता है।
सांसद विजय बघेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेल गतिविधियों का तेजी से विस्तार हुआ है। प्रधानमंत्री अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाडि़यों से सीधे संवाद कर उनका उत्साहवर्धन करते हैं। इससे खिलाडि़यों का आत्मविश्वास बढ़ा है और भारतीय खिलाड़ी दुनिया के विभिन्न खेल मंचों पर देश का गौरव बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की इसी भावना के अनुरूप मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय भी छत्तीसगढ़ में खिलाडि़यों और खेल अधोसंरचना के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। खेल अलंकरण की पुनः शुरुआत और उत्कृष्ट खिलाडि़यों को शासकीय सेवा में अवसर प्रदान करने जैसे निर्णयों ने खिलाडि़यों का मनोबल बढ़ाया है। उन्होंने खेल संबंधी विषयों में बेहतर समन्वय के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी को जिम्मेदारी दिए जाने की पहल का स्वागत किया।

’अन्य जिलों में भी गठित किए जाएंगे जिला ओलंपिक संघ’
छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव डॉ. विक्रम सिसोदिया ने पिछली एग्जीक्यूटिव बॉडी बैठक का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रदेश में खेलों के क्षेत्र में हासिल उपलब्धियों, संघ की गतिविधियों और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी।
बैठक में 23 जून को ओलंपिक दिवस के आयोजन, विभिन्न खेल गतिविधियों, नेशनल गेम्स, खेल संघों की आवश्यकताओं और आगामी गतिविधियों के लिए जरूरी बजटीय प्रावधानों पर चर्चा हुई। संघ की आय-व्यय की जानकारी भी प्रस्तुत की गई। प्रदेश में वर्तमान जिला ओलंपिक संघों के अतिरिक्त अन्य जिलों में भी जिला ओलंपिक संघ गठित करने के लिए समिति बनाए जाने पर सहमति प्रदान की गई। हैंडबॉल एसोसिएशन सहित विभिन्न खेल संघों से जुड़े विषयों तथा प्रदेश में खेल गतिविधियों के विस्तार पर भी विचार-विमर्श किया गया। बैठक में ओलम्पिक संघ के उपाध्यक्ष विजय बघेल, डॉ. हिमांशु द्विवेदी शरद शुक्ला रमेश कुमार श्रीवास्तव और सुनील कुमार अग्रवाल समेत छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के पदाधिकारी, विभिन्न खेल संघों के प्रतिनिधि एवं अन्य सदस्य उपस्थित थे।

विकास को गति देने छत्तीसगढ़ में भूमि उपयोग नियमों में बड़ा बदलाव

12-Sep-2026
रायपुर: छत्तीसगढ़ में विकास गतिविधियों को गति देने और भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल, स्पष्ट एवं व्यावहारिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित संशोधन में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए Negative List आधारित व्यवस्था अपनाने का प्रावधान किया गया है। यह पहल केंद्र सरकार के डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ कम करने के व्यापक सुधारों के अनुरूप है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए तथा विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो। भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित संशोधन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बदलती जरूरतों के अनुरूप विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी तथा प्रदेश में निवेश, रोजगार और अधोसंरचना विकास को गति मिलेगी।
आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नियमन को समाप्त करना नहीं, बल्कि उसे अधिक स्पष्ट, सरल, लचीला और परिणामोन्मुख बनाना है। Negative List आधारित व्यवस्था के माध्यम से प्रतिबंधित गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाएगा, जबकि अन्य गतिविधियों के लिए अनावश्यक नियामकीय बाधाएं कम होंगी। इससे बदलती आर्थिक एवं सामाजिक जरूरतों के अनुरूप भूमि उपयोग व्यवस्था अधिक व्यावहारिक बनेगी।
मंत्री चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत विजन@2047 के अनुरूप और भारत सरकार के डीरिगुलेशन एवं ईज ऑफ लिविंग से जुड़े सुधारों की दिशा में छत्तीसगढ़ लगातार नीतिगत सुधार कर रहा है। आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों में ग्रामीण और शहरी विकास को गति देने के लिए अनेक सुधार किए गए हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव प्रदेश के आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक विकास को नई गति देगा।
उन्होंने कहा कि इस सुधार से मास्टर प्लान में निर्धारित विभिन्न भूमि उपयोगों को अधिक लचीला, व्यावहारिक और समयानुकूल बनाया जा सकेगा। इसका लाभ आम नागरिकों को भी मिलेगा और भूमि उपयोग से संबंधित प्रक्रियाओं में आने वाली कठिनाइयों को कम करने का मार्ग प्रशस्त होगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य विकास की संभावनाओं को बढ़ाने के साथ-साथ नियोजित विकास और आवश्यक प्रतिबंधों के बीच संतुलन स्थापित करना है।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों में केवल निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जाएगा। संबंधित भूमि उपयोग श्रेणी की Negative List में शामिल नहीं होने वाली गतिविधियों को अनुमत माना जाएगा। इससे वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में विकसित होने वाली नई गतिविधियों के लिए भी अधिक व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे।
प्रस्ताव में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन, आमोद-प्रमोद तथा कृषि भूमि उपयोग के लिए अलग-अलग निषिद्ध गतिविधियों की सूची निर्धारित की गई है। इससे प्रत्येक क्षेत्र की प्रकृति, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और विकास की जरूरतों के अनुरूप स्पष्ट नियामकीय व्यवस्था विकसित होगी।
आवासीय भूमि उपयोग के अंतर्गत प्रदूषणकारी उद्योगों, बड़े भंडारण, कबाड़खानों, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण, गैस गोदाम, पशुपालन एवं मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है। इससे आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा, पर्यावरणीय गुणवत्ता और बेहतर जीवन-परिस्थितियों को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
वाणिज्यिक भूमि उपयोग में नारंगी, लाल एवं नीली श्रेणी के उद्योगों, खतरनाक एवं विषाक्त रसायनों तथा विस्फोटक पदार्थों के भंडारण सहित पशुपालन, मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन गतिविधियों को निषिद्ध करने का प्रावधान किया गया है।
वहीं औद्योगिक भूमि उपयोग में पूर्णतः आवासीय टाउनशिप, अनुमत कर्मचारी आवास को छोड़कर छात्रावास एवं शयनागार, विद्यालय, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और असंगत गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है।
कृषि भूमि उपयोग में आवासीय अभिन्यास, किफायती जन आवास एवं एकीकृत उपनगर को छोड़कर बड़े वाणिज्यिक परिसर, खतरनाक वाणिज्यिक उपयोग, विभिन्न श्रेणी के उद्योग, उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाएं तथा बड़े मॉल जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है।
इसी प्रकार सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन तथा आमोद-प्रमोद भूमि उपयोग के लिए भी असंगत, प्रदूषणकारी, खतरनाक एवं अत्यधिक भारी गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निषिद्ध किया गया है। इससे निर्धारित भूमि उपयोग और संबंधित क्षेत्र की विकास आवश्यकताओं के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकेगा।
तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के साथ नई सेवाओं, संस्थाओं, व्यवसायों और तकनीकी गतिविधियों के स्वरूप भी लगातार विकसित हो रहे हैं। ऐसे में पहले से तय गतिविधियों की लंबी सूची के बजाय स्पष्ट रूप से निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों के आधार पर नियमन करने से नई और उभरती गतिविधियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
प्रस्तावित व्यवस्था से अनावश्यक अनुपालन बोझ कम होने के साथ विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही निवेशकों के लिए अधिक स्पष्ट और पूर्वानुमानित नियामकीय वातावरण तैयार होगा। इससे प्रदेश के शहरों और कस्बों में नियोजित विकास को बढ़ावा देने के साथ आवास, व्यापार, सेवाओं और अधोसंरचना से जुड़ी बदलती जरूरतों को पूरा करने में भी सुविधा होगी।
प्रस्तावित संशोधन पर नागरिकों एवं संबंधित पक्षों से आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 15 दिवस की अवधि में प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों पर शासन द्वारा विचार किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियमों में प्रस्तावित संशोधन को अंतिम रूप दिया जाएगा।
भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव छत्तीसगढ़ में सरल नियमन, कम अनुपालन बोझ, स्पष्ट नियोजन और विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार है। इससे प्रदेश की बदलती विकास आवश्यकताओं के अनुरूप नियोजन व्यवस्था को अधिक लचीला और भविष्य के लिए तैयार बनाने में मदद मिलेगी।
 

 


प्रधानमंत्री आवास योजना ने लाखों गरीब परिवारों के पक्के घर का सपना किया साकार : केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

12-Sep-2026
रायपुर : छत्तीसगढ़ में गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के पक्के आवास के सपने को साकार करने की दिशा में आज एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ा। सक्ती में आयोजित प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के राज्यस्तरीय गृह प्रवेश समारोह में 2 लाख नवनिर्मित आवासों का गृह प्रवेश कराया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में हितग्राहियों को प्रतीकात्मक रूप से उनके नए घरों की चाबी सौंपी गई।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 3.65 लाख अतिरिक्त आवासों की बड़ी सौगात दी। उन्होंने नवगठित सक्ती जिले में कृषि विज्ञान केंद्र खोलने तथा बस्तर संभाग में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के सर्वे की समय-सीमा 31 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाने की घोषणा भी की। केंद्रीय मंत्री चौहान ने अतिरिक्त आवासों की स्वीकृति संबंधी पत्र मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को सौंपा।
केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार गरीबों, किसानों, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण इसी संकल्प को जमीन पर साकार करने वाली महत्वपूर्ण योजना है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत आवास निर्माण का कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहा है और प्रतिदिन 1600 से अधिक आवास पूर्ण किए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा विकास कार्यों की सराहना की।
केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि सरकार जो कहती है, उसे पूरा करके दिखाती है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में विकास कार्यों को नई गति मिली है। ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के आवास, सड़क, पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के माध्यम से गरीब परिवारों को केवल पक्की छत ही नहीं मिल रही, बल्कि उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, निःशुल्क राशन, स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालय और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से उनके जीवन में व्यापक बदलाव लाने का कार्य किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि की अपार संभावनाओं वाला प्रदेश है। प्रदेश अब केवल धान के कटोरे के रूप में ही नहीं, बल्कि तेजी से सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी नई पहचान बना रहा है। किसानों की आय बढ़ाने, कृषि में आधुनिक तकनीक को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कार्य कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि सक्ती में कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना से क्षेत्र के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत खेती, फसल विविधीकरण और कृषि संबंधी वैज्ञानिक मार्गदर्शन स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की ओर से स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि चौहान का छत्तीसगढ़ के प्रति विशेष स्नेह रहा है और उनके प्रत्येक प्रवास से प्रदेश को विकास की नई सौगातें मिली हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आज अपने नए पक्के घर में प्रवेश कर रहे 2 लाख हितग्राही परिवारों को बधाई और शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गरीब परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। राज्य सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति देकर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी थी। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.50 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि आवास सर्वे-2011 और आवास प्लस सर्वे के अंतर्गत आवासों के लक्ष्य की स्वीकृति मिल चुकी है। अब आवास प्लस-प्लस सर्वे में शामिल शेष पात्र परिवारों के लिए भी आवास स्वीकृत करने का अनुरोध केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री से किया गया है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का कोई भी पात्र गरीब परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में हमारी माताओं-बहनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और बिहान के माध्यम से महिलाओं को आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रदेश में अब तक 13 लाख 85 हजार दीदियां लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह महिलाओं की मेहनत, आत्मविश्वास और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रहे बड़े बदलाव का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को लाभान्वित किया जा रहा है और अब तक 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि उनके खातों में अंतरित की जा चुकी है। महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने नागरिकों से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु पोर्टल का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की। उन्होंने बताया कि बिजली बिल समाधान योजना के अंतर्गत अब तक 750 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया बिजली बिल माफ किए जा चुके हैं।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत निर्मित 2 लाख आवासों के गृह प्रवेश के साथ ही विभिन्न ग्रामीण विकास अभियानों और नवाचारों का भी शुभारंभ किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के हितग्राहियों को प्रतीकात्मक रूप से गृह प्रवेश की चाबी प्रदान की गई।
मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत एआई आधारित जियो-टैग सत्यापन का शुभारंभ किया गया। विकसित भारत-जी राम जी के अंतर्गत ‘धार अपार’ और ‘सुघ्घर बाड़ी’ अभियान प्रारंभ किए गए। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 270 नवीन इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टरों का विमोचन किया गया। साथ ही इन्क्यूबेशन प्रोग्राम ‘अथ उद्यमिता की ओर’ के अंतर्गत चैलेंज फंड इवेंट का शुभारंभ हुआ।
कार्यक्रम में आजीविका के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली लखपति दीदियों एवं डीलर दीदियों तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली पंचायतों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।
केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का अंत्योदय का चिंतन सरकार के लिए मार्गदर्शक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में इसी भावना के अनुरूप गरीब, किसान, महिला और समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के लिए योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में विकास को नई गति मिली है और गांवों में बुनियादी सुविधाओं के साथ ही रोजगार एवं आजीविका के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि प्रदेश में सरकार बनने के बाद 11.50 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। राज्य सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे। गरीब परिवारों के साथ नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटे लोगों के आवास की भी चिंता की जा रही है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है। गांवों में शिक्षा, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत बनाने की दिशा में भी तेजी से कार्य हो रहा है। 26 जनवरी 2027 तक प्रदेश के प्रत्येक विद्यालय में बालिका शौचालय की सुविधा सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के मुक्तिधाम शेड और आवश्यक अधोसंरचना का निर्माण भी वीबी-जी राम जी योजना के अंतर्गत कराया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। पंचायतों में कराए जा रहे विकास कार्यों पर बारकोड लगाया जा रहा है। नागरिक इसे स्कैन कर संबंधित विकास कार्य की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे ग्रामीण विकास में पारदर्शिता बढ़ने के साथ आम नागरिक भी विकास कार्यों की निगरानी में सहभागी बनेंगे।
कार्यक्रम के अंत में जिले के प्रभारी मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सांसद कमलेश जांगड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष द्रौपती कीर्तन चंद्रा सहित जनप्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी, लखपति दीदियां, प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
 

मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल- शशिकांत को एम्स रायपुर में कराया भर्ती

10-Sep-2026
रायपुर, 10 सितंबर 2026 छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल से धमतरी जिले के ग्राम देवपुर निवासी 29 वर्षीय शशिकांत भरत को बेहतर इलाज की नई उम्मीद मिली है। सोशल मीडिया के माध्यम से शशिकांत की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री ने तुरंत संज्ञान लिया और उनसे दूरभाष पर बात कर कुशलक्षेम जाना।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शशिकांत को 9 सितंबर की शाम अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), रायपुर में भर्ती कराया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने उनके उपचार के लिए 4 लाख रुपये की सहायता राशि भी स्वीकृत की है।
वर्ष 2016 में एक सड़क दुर्घटना के दौरान शशिकांत को गंभीर चोटें आई थीं, जिसके कारण वे करीब 50 दिनों तक कोमा में रहे। दुर्घटना में सर्वाइकल की समस्या उत्पन्न होने से उनके हाथ-पांव की कार्यक्षमता प्रभावित हो गई थी। लंबे समय तक विभिन्न अस्पतालों में इलाज कराने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो पाया था।
मुख्यमंत्री से बातचीत और तुरंत मिली चिकित्सकीय सहायता के बाद शशिकांत ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं फोन कर हाल-चाल पूछना और एम्स में इलाज के साथ 4 लाख रुपये की सहायता देना उनके और उनके परिवार के लिए बहुत बड़ा संबल है।
 

 


सेवा संकल्प अभियान को लेकर प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम ने ली वर्चुअल बैठक

09-Sep-2026
रायपुर, 09 सितम्बर 2026 जिले के प्रभारी मंत्री एवं कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम ने 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले “सेवा संकल्प अभियान” की तैयारियों को लेकर आज वर्चुअल बैठक ली। बैठक में उन्होंने जिले में अभियान के अंतर्गत आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की तैयारियों की विस्तृत जानकारी ली और सभी विभागों, जनप्रतिनिधियों तथा सामाजिक एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर संतन देवी जांगड़े, जिला पंचायत सीईओ अंकिता सोम, पूर्व संसदीय सचिव एवं जिला अध्यक्ष चम्पा देवी पावले, नगर पालिका परिषद मनेन्द्रगढ़ की अध्यक्ष प्रतिमा यादव, जिला पंचायत सदस्य उजित नारायण, अपर कलेक्टर अनिल कुमार सिदार, डिप्टी कलेक्टर नेहा खलखो सहित समस्त एसडीएम, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि एवं संबंधित जिला अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम ने “सेवा संकल्प अभियान” के तहत 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियों की जानकारी लेते हुए नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत तथा ग्राम पंचायत स्तर तक अभियान को व्यापक रूप से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य सेवा, सहभागिता और जनभागीदारी को मजबूत करते हुए अधिक से अधिक लोगों को कार्यक्रमों से जोड़ना है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्यक्रम आयोजित करने तथा सभी संबंधित विभागों को आपसी तालमेल के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। साथ ही त्योहारों के दौरान अलग से समन्वय बनाकर कार्यक्रमों का बेहतर संचालन सुनिश्चित करने को कहा।
कलेक्टर संतन देवी जांगड़े ने जिले में अभियान के अंतर्गत की जा रही तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि 17 सितम्बर को “आशीर्वाद का दिया” कार्यक्रम के तहत जमीनी स्तर पर तथा हर घर में दीप प्रज्वलन का आयोजन किया जाएगा, जिसकी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। इसी क्रम में “25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत” कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय स्तर पर किया जाएगा, जिसके लिए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। “नमो सेवा गाथा” के अंतर्गत नुक्कड़ नाटकों का आयोजन ग्राम, नगर एवं विभिन्न संस्थानों में किया जाएगा, जिसके माध्यम से जनसेवा और सामाजिक सहभागिता का संदेश आमजन तक पहुंचाया जाएगा।
कलेक्टर ने बताया कि 25 सितम्बर को “आंगन का उत्सव” कार्यक्रम जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान बच्चों के वजन, टीकाकरण सहित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण एवं देखभाल को लेकर जागरूकता बढ़ाई जाएगी। “कहानी का बदलाव” कार्यक्रम जिला स्तर के साथ-साथ जिले के प्रत्येक क्लस्टर में आयोजित किया जाएगा, जिसमें सकारात्मक बदलाव और जनभागीदारी की प्रेरक कहानियों को सामने लाया जाएगा।
इसी तरह “विकसित भारत संकल्प यात्रा” के तहत तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। “सेवा ज्योति अभियान” के अंतर्गत ग्राम स्तर से जिला स्तर तक सेवा ज्योति यात्रा निकाली जाएगी। “सेवा मेरा योगदान” के माध्यम से नागरिकों एवं संस्थाओं की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। वहीं “सेवा सेतु अभियान-सरकार आपके द्वार” के माध्यम से शासन की योजनाओं एवं सेवाओं को आमजन तक पहुंचाने की दिशा में गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
अभियान के दौरान निर्धारित दिवस पर “रंगोली राष्ट्र” कार्यक्रम के तहत हर घर तथा चयनित नगरों में रंगोली बनाई जाएगी। राष्ट्रीय इनोवेशन चौलेंज के अंतर्गत पांच क्षेत्रीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वहीं अभियान के समापन अवसर पर 17 अक्टूबर को “जनसेवक महाकुंभ-पंचायत से पार्लियामेंट” का आयोजन किया जाएगा।
कलेक्टर ने बताया कि सभी कार्यक्रमों को ग्राम स्तर से जिला स्तर तक व्यापक रूप से आयोजित किया जाएगा। अभियान के दौरान लेखन, भाषण, नाटक, सफलता की कहानी, सेवा ज्योति, स्वच्छता अभियान, जिला स्तरीय कार्यक्रम, समिति सदस्यों की सहभागिता, जिले की कार्यशाला तथा मंडल स्तर की कार्यशाला सहित विभिन्न गतिविधियां आयोजित होंगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों एवं जनप्रतिनिधियों को अपने-अपने स्तर पर कार्यक्रमों की तैयारी समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रभारी मंत्री ने अभियान को जनभागीदारी और आपसी समन्वय के साथ सफल बनाने पर विशेष जोर देते हुए सभी से सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
 

कैबिनेट के बड़े फैसले: युवाओं के लिए 500 करोड़ का स्टार्टअप मिशन, सरकारी कर्मचारियों की आयु सीमा 45 वर्ष

09-Sep-2026
​रायपुर(शोर संदेश) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए -
1. मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास, उद्यमिता और नवाचार के नए अवसर सृजित करने हेतु महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं NIPUN मिशन’को मंजूरी दी है। मिशन के लिए आगामी पांच वर्षों हेतु 500 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत सभी 33 जिलों में उद्यमिता विकास केंद्र, 100 इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब और 5 इंडस्ट्री एक्सीलेंस सेंटर स्थापित किए जाएंगे तथा NIPUN JOB Engine के माध्यम से उद्योगों की जरूरत के अनुरूप कौशल विकास और औपचारिक रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा। 
इस मिशन का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर देने के साथ ही उन्हें जॉब-सीकर से जॉब-क्रिएटर बनाना और छत्तीसगढ़ को स्टार्टअप, नवाचार एवं नई तकनीक आधारित उद्योगों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।
2. मंत्रिपरिषद ने राज्य को देश के प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से *‘छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 को मंजूरी दी है। नई नीति के माध्यम से प्रदेश में मजबूत निर्यात इकोसिस्टम और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने, निर्यातकों को बेहतर बाजार पहुंच एवं व्यापार सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही कृषि एवं औद्योगिक क्षेत्रों में मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा। 
इस नीति के तहत ई-कॉमर्स, व्यापार मेलों एवं प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रदेश के उद्यमियों और निर्यातकों की अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच बढ़ाई जाएगी। इस नीति का लक्ष्य छत्तीसगढ़ के निर्यात में गुणात्मक एवं मात्रात्मक वृद्धि के साथ प्रदेश को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजारों से और मजबूती से जोड़ना है।
3. मंत्रिपरिषद ने नवा रायपुर अटल नगर में *नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट(NSTI) की स्थापना के लिए एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता निदेशालय को ग्राम तेंदुवा में 10 एकड़ भूमि निःशुल्क आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। 
लगभग 200 करोड़ रूपए की लागत से विकसित होने वाले इस संस्थान में आधुनिक शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं छात्रावास सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां दीर्घकालिक पाठ्यक्रमों में प्रतिवर्ष 1,000 तथा अल्पकालीन कार्यक्रमों में 3,000 प्रशिक्षुओं को आज के उद्योगों की जरूरत के अनुरूप आधुनिक तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना से प्रदेश के युवाओं के लिए उन्नत कौशल प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा नवा रायपुर को देश में कौशल एवं तकनीकी शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।
4. मंत्रिपरिषद ने राज्य शासन के अधीन कार्यरत स्थायी/अस्थायी शासकीय सेवकों, निगम-मंडल एवं स्वशासी संस्थाओं के कर्मचारियों, संविदाकर्मियों तथा नगर सैनिकों को अन्य शासकीय सेवाओं एवं उच्च पदों के लिए आवेदन करने में बड़ी राहत देते हुए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। 
इस निर्णय से शासकीय एवं संबद्ध संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को उच्च पदों एवं अन्य सेवाओं में आगे बढ़ने के अधिक और समान अवसर प्राप्त होंगे। इस संबंध में राज्य शासन द्वारा एकीकृत स्थायी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
5. मंत्रिपरिषद ने दुर्ग जिला न्यायालय के नवीन भवन निर्माण के लिए ग्राम तितुरडीह में बीआईटी कॉलेज के समीप 4 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके लिए भिलाई इस्पात संयंत्र के नाम दर्ज उक्त भूमि के बदले ग्राम पाहंदा, तहसील पाटन में 5.024 हेक्टेयर शासकीय भूमि भिलाई इस्पात संयंत्र को दी जाएगी। दोनों भूखंडों का वर्तमान मूल्य लगभग समान है। इस निर्णय से दुर्ग में जिला न्यायालय के लिए आधुनिक एवं सुव्यवस्थित नवीन न्यायालय परिसर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा और न्यायिक अधोसंरचना को और सुदृढ़ किया जा सकेगा।
 


Feedback/Enquiry



Log In Your Account