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तस्वीरों ने ताजा कीं मुख्यमंत्री विष्णुदेवसाय की पुरानी यादें: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ‘दृश्य संवाद 2026’ के समापन समारोह में हुए शामिल

24-Aug-2026
रायपुर (शोर संदेश) । तस्वीरें बीते हुए समय को वर्तमान से जोड़ती हैं। कभी वे इतिहास का दस्तावेज बनती हैं तो कभी जीवन के भूले-बिसरे पलों को फिर से जीवंत कर देती हैं। राजधानी रायपुर में आज कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपनी वर्षों पुरानी तस्वीरों के माध्यम से सार्वजनिक जीवन के लंबे सफर को एक बार फिर जिया। कहीं पहली बार विधायक बनने की स्मृतियां थीं, तो कहीं गांव, खेत और मिट्टी से जुड़े जीवन की झलक। इस दौरान मुख्यमंत्री का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। उन्होंने स्वयं कैमरा संभाला और एक फोटो पत्रकार की तस्वीर खींचकर इस अवसर को यादगार बना दिया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज रायपुर प्रेस क्लब द्वारा विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट ‘दृश्य संवाद 2026’ के समापन समारोह में शामिल हुए। 19 अगस्त से आयोजित इस फेस्ट में मुख्यमंत्री ने फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया और फोटो पत्रकारों तथा ओपन कैटेगरी के प्रतिभागियों द्वारा खींची गई तस्वीरों की सराहना की।
प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए मुख्यमंत्री साय ने जब अपने राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी पुरानी तस्वीरें देखीं तो उनके साथ जुड़ी अनेक स्मृतियां भी ताजा हो गईं। वर्षों पुराने चित्रों को देखते हुए उन्होंने अपने साथ मौजूद लोगों से कई रोचक संस्मरण साझा किए। अपनी पहली बार विधायक बनने के समय की एक तस्वीर देखकर मुख्यमंत्री ने बताया कि उस समय उन्होंने विशेष रूप से सफारी सूट सिलवाया था। इस छोटे से संस्मरण ने वहां मौजूद लोगों के बीच सहज और आत्मीय माहौल बना दिया।
प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री साय के ग्रामीण जीवन और खेती-किसानी से जुड़ी तस्वीरें भी प्रदर्शित की गई थीं। हल चलाते हुए अपनी तस्वीर देखकर उन्होंने खेती के दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि गांव और खेती-किसानी से जुड़ी तस्वीरें उन्हें अपनी मिट्टी, खेत-खलिहान और पुराने दिनों की याद दिलाती हैं। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण जीवन से जुड़े अपने अनुभव भी फोटो पत्रकारों के साथ साझा किए।
प्रदर्शनी के दौरान एक दिलचस्प क्षण तब आया, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने खुद कैमरा थाम लिया। उन्होंने फोटो पत्रकार की भूमिका निभाते हुए एक फोटो जर्नलिस्ट को कैमरे में कैद किया। आमतौर पर मुख्यमंत्री की गतिविधियों और भाव-भंगिमाओं को अपने कैमरे में दर्ज करने वाले फोटो पत्रकार के सामने इस बार स्वयं मुख्यमंत्री कैमरे के पीछे थे। यह सहज और आत्मीय पल ‘दृश्य संवाद 2026’ के खास आकर्षणों में शामिल रहा।
मुख्यमंत्री साय ने फोटो पत्रकारों के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि तस्वीरें केवल किसी घटना या क्षण को दर्ज करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे समय, समाज और स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजती हैं। कई बार एक तस्वीर बिना शब्दों के पूरी कहानी कह देती है। फोटो पत्रकार कठिन परिस्थितियों में भी घटनास्थल पर पहुंचकर समाज और इतिहास के महत्वपूर्ण क्षणों को कैमरे में दर्ज करते हैं। उनका काम पत्रकारिता का महत्वपूर्ण और प्रभावशाली पक्ष है।
मुख्यमंत्री ने रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित ‘दृश्य संवाद 2026’ की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन फोटोग्राफी और फोटो पत्रकारिता की रचनात्मकता को मंच प्रदान करते हैं। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को अनुभवी फोटो पत्रकारों के काम को देखने, समझने और सीखने का अवसर भी मिलता है। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी फोटो पत्रकारों, प्रतिभागियों और रायपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों को सफल आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित पांच दिवसीय ‘दृश्य संवाद 2026’ में प्रेस फोटो पत्रकारों के साथ ओपन कैटेगरी के प्रतिभागियों की तस्वीरों को भी स्थान दिया गया। प्रकृति एवं पर्यावरण, संस्कृति एवं परंपरा तथा समाचार एवं जनसरोकार सहित विभिन्न विषयों पर प्रदर्शित तस्वीरों ने छत्तीसगढ़ के जीवन, समाज और परिवेश के विविध रंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। पांच दिनों के दौरान बड़ी संख्या में पत्रकारों, विद्यार्थियों, फोटोग्राफी प्रेमियों और नागरिकों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
समापन अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू एवं भूपेश जांगड़े उपस्थित थे। इस अवसर पर फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट के संयोजक दीपक पांडे, वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट गोकुल सोनी, प्रदीप डडसेना राजकुमार चतुर्वेदी, रुपेश यादव,नरेंद्र बंगाले, सुधीर सागर,रमन हलवाई, किशन लोखंडे मनोज देवांगन, विजय देवांगन, विनय घाड़गे, पंकज चौहान,हीरा मानिकपुरी, त्रिलोचन मानिकपुरी, हेमंत गोस्वामी, जय गोस्वामी, पंकज सिंह सहित बड़ी संख्या में फोटो जर्नलिस्ट एवं गणमान्यजन उपस्थित थे। 
 

‘कोहरा’ जैसी रचनाएं समाज को सजग करने और सच सामने लाने का सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

24-Aug-2026
रायपुर (शोर संदेश) । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय सभागृह में युवा साहित्यकार करुणा सागर पण्डा के उपन्यास ‘कोहरा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि साहित्य केवल समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि उसे सजग करने और सही दिशा दिखाने का भी सशक्त माध्यम है। ‘कोहरा’ जैसे उपन्यास सामाजिक विषयों को विमर्श के केंद्र में लाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। 
मुख्यमंत्री साय ने युवा साहित्यकार करुणा सागर पण्डा को उनके उपन्यास के प्रकाशन पर बधाई देते हुए कहा कि संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण विषय पर लेखन के लिए साहस की आवश्यकता होती है। रचनाकार जब समाज की समस्याओं और वास्तविकताओं को अपनी लेखनी का विषय बनाते हैं, तो साहित्य सामाजिक चेतना का माध्यम बनता है।
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की धरती ने देश को अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार दिए हैं। विनोद कुमार शुक्ल जैसे मूर्धन्य रचनाकार को साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ मुक्तिबोध की सृजनभूमि रही है और पदुमलाल पन्नालाल बख्शी जैसे साहित्यकारों ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के रचनाकार इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और समकालीन विषयों को साहित्य के माध्यम से समाज के सामने ला रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सिनेमा और साहित्य ने समय-समय पर समाज के संवेदनशील विषयों को सामने लाने का काम किया है। उन्होंने ‘द केरल स्टोरी’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन और मार्मिक विषयों को उठाने पर मतभेद और विरोध के स्वर भी सामने आते हैं, लेकिन रचनाकार का दायित्व है कि वह अपनी दृष्टि और संवेदना के साथ समाज के सामने विषय रखे। उन्होंने ‘कोहरा’ के लेखक के साहसिक प्रयास की सराहना की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अच्छी पुस्तकें अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपने घरों में छोटी-सी लाइब्रेरी बनाने और बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि घर की समृद्धि केवल उसकी भव्यता में नहीं, बल्कि वहां उपलब्ध पुस्तकों और अध्ययन की संस्कृति में भी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि पुस्तकें पीढ़ियों के बीच ज्ञान, संस्कार और अनुभव का सेतु बनती हैं। इसलिए हर परिवार को अपनी रुचि के अनुसार पुस्तकों का संग्रह अवश्य रखना चाहिए।
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर नक्सलवाद का उल्लेख करते हुए साहित्यकारों और रचनाकारों से इससे प्रभावित लोगों की पीड़ा और संघर्ष को भी अपनी रचनाओं का विषय बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने लंबे समय तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और राज्य सरकार के सतत प्रयासों से प्रदेश में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है और बस्तर शांति एवं विकास के नए दौर की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की हिंसा में अनेक निर्दोष लोगों ने अपने परिजनों को खोया, बच्चों की शिक्षा और भविष्य प्रभावित हुआ तथा दशकों तक अनेक क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से दूर रहे। नक्सलवाद की इस मानवीय त्रासदी और इसके कारण समाज पर पड़े प्रभावों को भी व्यापक रूप से सामने लाने की आवश्यकता है। साहित्यकार अपनी संवेदनशील लेखनी के माध्यम से उन परिवारों की पीड़ा, संघर्ष और बदलते बस्तर की कहानी को देश-दुनिया तक पहुंचा सकते हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सुनील गंगाराम गर्ग ने कहा कि भारत की संस्कृति विविधता और विशिष्टता के साथ सहअस्तित्व को स्वीकार करती है। उन्होंने करुणा सागर पण्डा की लेखनी की सराहना करते हुए ‘कोहरा’ को समकालीन विषय पर लिखी गई प्रासंगिक कृति बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय विचारों के संवाद का समय है और साहित्य इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक प्रश्नों पर सार्थक विमर्श पैदा करने वाली रचनाएं समाज को आत्ममंथन का अवसर देती हैं। ‘कोहरा’ भी अपने विषय के माध्यम से पाठकों को विचार करने के लिए प्रेरित करता है।
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने कहा कि ‘कोहरा’ केवल समस्या को सामने नहीं रखता, बल्कि समाधान की दिशा में भी सोचने के लिए प्रेरित करता है। बीबीजे के स्वतंत्र निदेशक जगन्नाथ पाणिग्रही ने कहा कि नई पीढ़ी को देश की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक वास्तविकताओं से परिचित कराने में साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका है।
वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज ने ‘कोहरा’ को साहसिक लेखन का उदाहरण बताते हुए कहा कि रचनाकार को समाज के ज्वलंत प्रश्नों पर अपनी बात रखने का साहस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उपन्यास में सामाजिक विषयों के साथ नक्सलवाद की समस्या को भी अभिव्यक्ति दी गई है। साहित्य समाज में वैचारिक चेतना और सकारात्मक प्रतिरोध का स्वर मजबूत करता है।
इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, राज्य गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन महाराज, जलज कुमार अनुपम सहित जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।

शिक्षा समाज के विकास का मूल मंत्र, भावी पीढ़ी को शिक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

23-Aug-2026
रायपुर : शिक्षा समाज के विकास का मूल मंत्र है। किसी भी समाज की प्रगति उसकी भावी पीढ़ी को मिलने वाली शिक्षा, संस्कार और अवसरों पर निर्भर करती है। समाज का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और प्रत्येक बच्चे की प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर मिले, यह हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित छत्तीसगढ़ प्रदेश कंवर समाज विकास समिति के प्रदेश अध्यक्ष सहित नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि कंवर समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है। संत गहिरा गुरु जैसे महान संतों और समाज के पुरोधाओं ने शिक्षा, संस्कार, सेवा और सामाजिक एकता का जो मार्ग दिखाया है, उसी पर आगे बढ़ते हुए नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए मिलकर काम करना होगा।
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को सामाजिक सेवा और अपने दायित्वों के निष्ठापूर्वक निर्वहन की शपथ दिलाई। कार्यक्रम के प्रारंभ में उन्होंने प्रकृति शक्ति तथा कंवर समाज के पुरोधाओं को नमन किया। इस अवसर पर समाज के युवक-युवतियों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
मुख्यमंत्री साय ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि समाज द्वारा सौंपा गया दायित्व समाज को आगे ले जाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि सभी पदाधिकारी निष्ठा, समर्पण और सामूहिक भावना के साथ समाज के शैक्षणिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक उत्थान के लिए कार्य करें।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कंवर समाज के पदाधिकारियों का पूरा निर्वाचन निर्विरोध और सर्वसम्मति से संपन्न होना समाज की एकता और संगठन की मजबूती का प्रमाण है। समाज की यही एकजुटता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और इसे आने वाली पीढ़ियों तक और मजबूत बनाकर पहुंचाना होगा। उन्होंने स्मरण किया कि एक समय कंवर समाज अलग-अलग इकाइयों में बंटा हुआ था, लेकिन वरिष्ठजनों और समाज के पुरोधाओं के प्रयासों से सभी को एक सूत्र में जोड़ा गया। उन्होंने महाराष्ट्र से आए कंवर समाज के प्रतिनिधियों और सगा-बंधुओं का भी छत्तीसगढ़ में आत्मीय स्वागत किया।
मुख्यमंत्री साय ने समाज के प्रबुद्धजनों से शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शासकीय नौकरी प्राप्त करना नहीं है। एक सफल उद्यमी, व्यापारी, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि, उद्योगपति और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए भी अच्छी शिक्षा आवश्यक है। शिक्षा व्यक्ति को निर्णय लेने की क्षमता देती है और समाज को प्रगति की दिशा दिखाती है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बच्चों और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध करा रही है। प्रदेश में 17 प्रयास विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। समाज के सक्षम और प्रबुद्ध लोगों की भी जिम्मेदारी है कि वे जरूरतमंद परिवारों के बच्चों की शिक्षा में सहयोग करें और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अंतर्गत किए गए वादों को तेजी से पूरा करने का प्रयास किया है। सरकार गठन के दूसरे ही दिन 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई। प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1600 आवास बनाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों से किए गए वादे के अनुरूप 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी की जा रही है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है और अब तक 19 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि उनके खातों में अंतरित की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में चरण पादुका योजना पुनः प्रारंभ की गई है और तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक 4 हजार रुपए से बढ़ाकर 5 हजार 500 रुपए प्रति मानक बोरा किया गया है। प्रदेश के लगभग भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपए की सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना से बुजुर्गों की तीर्थयात्रा की इच्छा पूरी की जा रही है। रामलला दर्शन योजना के माध्यम से पिछले ढाई वर्षों में 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या में प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर जनजातीय समाज की बेटी द्रौपदी मुर्मु का राष्ट्रपति के रूप में विराजमान होना पूरे जनजातीय समाज के लिए गौरव का विषय है। पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ने जनजातीय समाज के विकास को नई दिशा देने के लिए अलग जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया। छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण का श्रेय भी श्रद्धेय अटल जी को जाता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय अंचलों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और जनजातीय परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के लिए अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के 6 हजार 661 गांवों को शामिल किया गया है।
विशेष पिछड़ी जनजातियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से सड़क, आवास, बिजली, राशन कार्ड और नल से जल जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम जनमन के अंतर्गत देशभर में बन रही लगभग 4 हजार किलोमीटर सड़कों में से 2 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कें छत्तीसगढ़ में बन रही हैं। विशेष पिछड़ी जनजातियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 57 एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार की सुविधा दे रही हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर का एक बड़ा भू-भाग चार दशकों से अधिक समय तक नक्सलवाद की त्रासदी के कारण विकास की मुख्यधारा से पीछे रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्रीअमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक सफलता मिली है। जिन क्षेत्रों में कभी विकास कार्य चुनौतीपूर्ण थे, आज वहां सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं।
उन्होंने कहा कि नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से ढाई वर्षों में 500 से अधिक गांवों तक बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। बस्तर में व्यापक स्वास्थ्य अभियान के तहत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और गंभीर अथवा लंबे समय से बीमार 40 हजार से अधिक लोगों को बेहतर उपचार के लिए रेफर किया गया है। शांति और विश्वास के नए वातावरण के साथ बस्तर में शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी खुल रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज, वन और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर राज्य है। प्रदेश में आयरन ओर, कोयला, बॉक्साइट, लिथियम, टिन, सोना और हीरा जैसे बहुमूल्य खनिज संसाधन उपलब्ध हैं। बस्तर की वनोपज के वैल्यू एडिशन पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों की आय बढ़े और रोजगार के नए अवसर तैयार हों।
उन्होंने कहा कि कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में भी तेजी से अधोसंरचना का विस्तार किया जा रहा है। किसानों के खेतों तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने के लिए पिछले ढाई वर्षों में 11 हजार करोड़ रुपए से अधिक की नई सिंचाई परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है और इस अभियान में समाज के प्रत्येक वर्ग का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने कंवर समाज से शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और सेवा के साथ प्रदेश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व राज्यसभा सांसद नंदकुमार साय ने कहा कि कंवर समाज छत्तीसगढ़ की जनजातीय समाज व्यवस्था का महत्वपूर्ण घटक है। शिक्षा समाज और प्रदेश की प्रगति का आधार है। कोई भी बालक-बालिका शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए समाज को सामूहिक प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि कंवर समाज सहित प्रदेश की 42 जनजातियों का छत्तीसगढ़ के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। समाज को शैक्षणिक, आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ाने के लिए संगठित होकर कार्य करने की आवश्यकता है।
कंवर समाज विकास समिति के अध्यक्ष हरवंश सिंह मिरी ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पद के साथ समाज की एकता, सेवा, शिक्षा, संस्कार और उत्थान की बड़ी जिम्मेदारी जुड़ी होती है। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को समाज के नवनिर्माण और विकास की नई संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि निर्माणाधीन कंवर भवन भविष्य में समाज के शैक्षणिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और संगठनात्मक विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में कंवर समाज के विभिन्न सामुदायिक भवनों के निर्माण, विकास और जीर्णोद्धार के लिए 1 करोड़ 55 लाख रुपए से अधिक की राशि प्रदान करने की घोषणा की। इनमें रायपुर के लाभांडी में नवनिर्माणाधीन कंवर भवन के विकास एवं आवश्यक अधोसंरचना के लिए 70 लाख रुपए, राजनांदगांव के छुरिया परिक्षेत्र में कंवर समाज भवन के लिए 25 लाख रुपए, कंवर पैंकरा समाज सर्कल तमोरा में सामुदायिक शेड के लिए 10 लाख रुपए, ग्राम खैरझिटी में आदिवासी कंवर (पैंकरा) समाज के सामाजिक भवन के लिए 10 लाख रुपए, महासमुंद जिले के पथरी परिक्षेत्र के ग्राम नरतोरा में सामाजिक भवन के लिए 10 लाख रुपए, ग्राम झलप में सामाजिक भवन के निर्माण एवं जीर्णोद्धार के लिए 20 लाख रुपए तथा गरियाबंद जिले के ग्राम जोजरा में कंवर समाज भवन निर्माण के लिए 10 लाख रुपए शामिल हैं।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लाभांडी स्थित कंवर समाज के नवनिर्माणाधीन सामुदायिक भवन परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत सिंदूर का पौधा लगाया। मुख्यमंत्री के साथ समाज के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों, वरिष्ठ सगा-जनों और प्रबुद्धजनों ने भी पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संदेश दिया।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर, महासचिव शिव कुमार कंवर, कार्यकारी अध्यक्ष थान सिंह दीवान, महिला प्रभाग की अध्यक्ष सविता साय, कोषाध्यक्ष प्रेम सिंह कंवर, आर.के. साय, भीम सिंह कंवर सहित कंवर समाज के वरिष्ठजन, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।

महतारी वंदन से सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति : मुख्यमंत्री साय

23-Aug-2026
रायपुर(शोर संदेश) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पत्रकार निशा द्विवेदी द्वारा लिखित पुस्तक ‘महतारी वंदन अभिनंदन’ का विमोचन किया। दो भागों में प्रकाशित इस पुस्तक में महतारी वंदन योजना से लाभान्वित महिलाओं के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों, उनके अनुभवों और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमों को संकलित किया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पुस्तक के प्रकाशन पर पत्रकार निशा द्विवेदी को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना ने प्रदेश की महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल देने के साथ उनके आत्मविश्वास और परिवार के निर्णयों में उनकी भूमिका को भी मजबूत किया है। यह योजना महिला सशक्तीकरण की दिशा में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि  महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं को प्रतिमाह मिलने वाली राशि उनकी छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करने में सहायक बन रही है। अनेक महिलाएं इस राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, पोषण, स्वास्थ्य, घरेलू आवश्यकताओं और बचत के लिए कर रही हैं। नियमित रूप से अपने खाते में राशि मिलने से महिलाओं में आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का भाव मजबूत हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी जनकल्याणकारी योजना की वास्तविक सफलता उसके लाभार्थियों के जीवन में दिखाई देने वाले परिवर्तन से मापी जाती है। ‘महतारी वंदन अभिनंदन’ में योजना से जुड़ी महिलाओं के अनुभवों को सामने लाने का प्रयास किया गया है। इस तरह की पुस्तकें शासन की योजनाओं के सामाजिक प्रभाव को समझने के साथ भविष्य के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बनती हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अनुरूप छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना प्रारंभ की गई। योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जा रही है। योजना की 30 किश्तों के माध्यम से अब तक लगभग 19 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में अंतरित की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल विकास और आजीविका के माध्यम से उनके सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि इसमें महतारी वंदन योजना से लाभान्वित महिलाओं के अनुभवों और उनकी संवेदनाओं को शब्द दिए गए हैं। किसी योजना का वास्तविक प्रभाव जानने के लिए हितग्राहियों के बीच जाकर उनसे संवाद करना और उनके जीवन में आए बदलावों को समझना आवश्यक होता है।
रजवाड़े ने कहा कि गांव-गांव जाकर महिलाओं से मिलना, उनके अनुभवों को समझना, योजना से उनके जीवन में आए परिवर्तन का आकलन करना और फिर उन अनुभवों को पुस्तक के रूप में संजोना चुनौतीपूर्ण कार्य है। पत्रकार निशा द्विवेदी ने इस पुस्तक के माध्यम से महतारी वंदन योजना के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव को जमीनी स्तर पर सामने लाने का सार्थक प्रयास किया है। उन्होंने लेखिका को पुस्तक के प्रकाशन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
पुस्तक की लेखिका पत्रकार निशा द्विवेदी ने बताया कि ‘महतारी वंदन अभिनंदन’ के दोनों भागों में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की ऐसी महिलाओं की कहानियों और अनुभवों को स्थान दिया गया है, जिन्हें महतारी वंदन योजना से आर्थिक संबल मिला है। पुस्तक में यह बताने का प्रयास किया गया है कि नियमित आर्थिक सहायता ने महिलाओं की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ उनके आत्मविश्वास और आर्थिक निर्णय लेने की क्षमता को किस प्रकार प्रभावित किया है।
इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, रायपुर महापौर मीनल चौबे, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार कृष्णा दास, जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल, गौरी शंकर श्रीवास, शताब्दी पांडेय सहित बड़ी संख्या में महिला पत्रकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
















 

विशेष लेख : सौर सुजला योजना-किसानों के खेतों तक पहुंची सूरज की रोशनी, बढ़ी सिंचाई की ताकत

22-Aug-2026
रायपुर (शोर संदेश) छत्तीसगढ़ में किसानों की समृद्धि और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में सौर सुजला योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने, कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी सोच का परिणाम है कि सौर ऊर्जा का उपयोग अब खेतों की सिंचाई के लिए प्रभावी माध्यम बन रहा है।
प्रदेश में 01 नवंबर 2016 को प्रारंभ की गई सौर सुजला योजना का उद्देश्य कृषि भूमि की सिंचाई क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ऐसे क्षेत्रों में भी सिंचाई सुविधा पहुंचाना है, जहां विद्युत सुविधा उपलब्ध नहीं है। योजना के अंतर्गत किसानों के खेतों में 03 एचपी और 05 एचपी क्षमता के सोलर सिंचाई पंप स्थापित किए जा रहे हैं। इन पंपों में सोलर मॉड्यूल एवं कंट्रोलर शामिल होते हैं।
सौर सुजला योजना किसानों के लिए किफायती सिंचाई का मजबूत विकल्प बनकर सामने आई है। 03 एचपी क्षमता के सोलर पंप की औसत लागत लगभग 2.64 लाख रुपये तथा 05 एचपी क्षमता के पंप की औसत लागत लगभग 3.64 लाख रुपये है। योजना में किसानों की श्रेणी के अनुसार हितग्राही अंशदान निर्धारित किया गया है, जिससे किसान कम अंशदान में सौर सिंचाई सुविधा प्राप्त कर सकते हैं।
03 एचपी पंप के लिए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों का अंशदान 7 हजार रुपये, अन्य पिछड़ा वर्ग का 12 हजार रुपये तथा सामान्य वर्ग का 18 हजार रुपये है। इसी प्रकार 05 एचपी पंप के लिए क्रमशः 10 हजार, 15 हजार और 20 हजार रुपये हितग्राही अंशदान निर्धारित है। इसके अतिरिक्त निर्धारित प्रोसेसिंग शुल्क देय है।
सौर सिंचाई पंप किसानों को सिंचाई के लिए बिजली पर निर्भरता से राहत देते हैं। विशेषकर आदिवासी एवं दूरस्थ अंचलों में जहां विद्युत पहुंच सीमित है, वहां सोलर पंप किसानों के लिए बारहमासी सिंचाई सुविधा का आधार बन रहे हैं। सिंचाई की उपलब्धता से किसान केवल धान तक सीमित न रहकर मक्का, गेहूं, दलहन-तिलहन, गन्ना और विभिन्न प्रकार की साग-सब्जियों एवं बागवानी फसलों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं। इससे खेती में विविधता आने के साथ किसानों की आय बढ़ाने के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
योजना का एक महत्वपूर्ण पक्ष जल संरक्षण भी है। सौर सिंचाई पंपों के माध्यम से भूजल का दोहन निर्धारित समयावधि में होने से भूजल संरक्षण एवं संवर्धन में भी सहायता मिलती है। इस तरह सौर ऊर्जा और जल संरक्षण का समन्वय किसानों को टिकाऊ कृषि की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।
गौठानों एवं चारागाहों में पशुधन के पेयजल, सिंचाई तथा अन्य आवश्यक उपयोगों के लिए भी सोलर पंप स्थापित किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलने के साथ पशुधन एवं कृषि आधारित गतिविधियों को भी सहयोग मिल रहा है।
सौर सिंचाई पंप एवं स्थापित उपकरणों पर पांच वर्ष की निःशर्त ऑन-साइट वारंटी का प्रावधान है। साथ ही पांच वर्ष की बीमा सुविधा भी उपलब्ध है। चोरी, क्षति अथवा टूट-फूट की स्थिति में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार संयंत्र को सुधारने की व्यवस्था है। सोलर सिंचाई संयंत्रों के पांच वर्षीय संचालन-संधारण एवं रख-रखाव का भी प्रावधान किया गया है। क्रेडा के संबंधित जिला, क्षेत्रीय एवं जोनल कार्यालयों द्वारा स्थापित संयंत्रों का निरीक्षण किया जाता है।
हितग्राहियों की सुविधा के लिए सौर पंप से संबंधित शिकायत दर्ज कराने हेतु टोल फ्री नंबर 18001234591 उपलब्ध है। प्राप्त शिकायतों की ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से निगरानी की जाती है तथा संबंधित स्थापनाकर्ता इकाई द्वारा निर्धारित अवधि में शिकायत का निराकरण किया जाता है।
योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास स्वयं की कृषि भूमि तथा पर्याप्त जल स्रोत होना आवश्यक है। इच्छुक किसान संबंधित ग्राम सेवक, कृषि विभाग के कार्यालय अथवा क्रेडा कार्यालय से आवेदन प्राप्त कर सकते हैं। कृषि विभाग द्वारा आवेदनों की जांच एवं अनुशंसा के बाद क्रेडा द्वारा स्थल सर्वेक्षण, पंप की क्षमता एवं प्रकार का आकलन किया जाता है। निर्धारित हितग्राही अंश एवं प्रोसेसिंग शुल्क प्राप्त होने के बाद स्थापना की स्वीकृति जारी की जाती है और संबंधित इकाई द्वारा सोलर पंप स्थापित किया जाता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों का मूल उद्देश्य खेती को लाभकारी और मजबूत बनाना है। सौर सुजला योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सूरज की ऊर्जा को किसानों की समृद्धि की ऊर्जा में बदल रही है।
सिंचाई सुविधा मिलने से उत्पादन बढ़ रहा है, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन मिल रहा है और किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिल रहे हैं। इससे न केवल किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है, बल्कि गांवों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है। सौर सुजला योजना छत्तीसगढ़ में ऊर्जा, जल और कृषि के बेहतर समन्वय के माध्यम से आत्मनिर्भर और समृद्ध किसान की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बन रही है।
 

नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता के बाद बस्तर में विकास की नई गति : मुख्यमंत्री साय

22-Aug-2026
रायपुर (शोर संदेश) लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण विकास की दौड़ में पीछे रहे बस्तर में अब शांति, विश्वास और विकास का नया दौर शुरू हुआ है। सुरक्षा के साथ-साथ सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, रोजगार और आजीविका के क्षेत्र में तेजी से काम किया जा रहा है। बस्तर की प्राकृतिक संपदा, संस्कृति और पर्यटन की संभावनाओं को विकास से जोड़कर क्षेत्र के लोगों के जीवन में स्थायी बदलाव लाना हमारी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री साय ने विगत दिवस मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पत्र सूचना कार्यालय, चेन्नई के निदेशक पी. अरुण कुमार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए चेन्नई के पत्रकारों के दल  से चर्चा के दौरान यह बात कही। 
मुख्यमंत्री साय ने पत्रकारों से छत्तीसगढ़ में विकास की बदलती तस्वीर, बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध मिली सफलता के बाद तेज हुई विकास गतिविधियों, राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति, निवेश एवं रोजगार की संभावनाओं तथा शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहे विस्तार पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लगभग चार दशकों तक नक्सलवाद ने बस्तर के विकास को गंभीर रूप से प्रभावित किया। दुर्गम क्षेत्रों में सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना बड़ी चुनौती थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। सुरक्षा बलों के साहस और स्थानीय लोगों के बढ़ते विश्वास से बस्तर तेजी से शांति और विकास की ओर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी नक्सलवाद के कारण शासन की पहुंच कठिन थी, वहां आज विकास की योजनाएं तेजी से पहुंच रही हैं। सुरक्षा कैंपों के आसपास के गांवों में ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। सड़क और मोबाइल कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, राशन, बैंकिंग और आजीविका की सुविधाओं में वृद्धि हुई है। सरकार का लक्ष्य केवल नक्सलवाद का अंत करना नहीं, बल्कि बस्तर में विकास और समृद्धि की ऐसी मजबूत नींव तैयार करना है, जिससे आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बेहतर हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में पर्यटन की भी अपार संभावनाएं हैं। यहां के प्राकृतिक सौंदर्य, जलप्रपातों, वन संपदा, जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं की विशिष्ट पहचान है। शांति स्थापित होने के साथ पर्यटन और स्थानीय उद्यमिता के लिए नए अवसर बन रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि बस्तर की विशिष्टताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले तथा पर्यटन से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अधिक अवसर सृजित हों।
मुख्यमंत्री साय ने पत्रकारों को राज्य में औद्योगिक विकास की संभावनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज, वन और कृषि संपदा से समृद्ध होने के साथ ऊर्जा के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर है। राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में रोजगार सृजन, स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन और नए एवं उभरते क्षेत्रों के उद्योगों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। सरल प्रक्रियाओं और उद्योग अनुकूल वातावरण के कारण देश-विदेश के निवेशकों का छत्तीसगढ़ के प्रति आकर्षण तेजी से बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि राज्य अब परंपरागत उद्योगों तक सीमित नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, फार्मास्युटिकल, टेक्सटाइल और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भी निवेश की संभावनाएं तेजी से विकसित हो रही हैं। पर्याप्त विद्युत उपलब्धता, मजबूत अधोसंरचना, देश के मध्य में भौगोलिक स्थिति और बेहतर कनेक्टिविटी छत्तीसगढ़ को निवेश के लिए अनुकूल बनाती है। सरकार का विशेष जोर ऐसे निवेश पर है, जिससे प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर तैयार हों।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि रायपुर और नवा रायपुर देश के महत्वपूर्ण एजुकेशन हब के रूप में विकसित हो रहे हैं।  उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के इन संस्थानों की उपलब्धता से छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बेहतर अवसर अपने ही राज्य में मिल रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के साथ स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार पर भी लगातार काम कर रही है। दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने, मेडिकल शिक्षा का विस्तार करने और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में अनेक कदम उठाए गए हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि विकास का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर पर बसे व्यक्ति तक पहुंचे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने चेन्नई से आए पत्रकारों को छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कोसा फैब के शॉल भेंट कर सम्मानित किया। पत्रकारों के दल ने मुख्यमंत्री को तमिलनाडु के प्रसिद्ध महाबलीपुरम मंदिर की प्रतिकृति स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी आलोक सिंह सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।
 

उत्कृष्ट शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों से संवर रहा छत्तीसगढ़ के बच्चों का भविष्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

20-Aug-2026
रायपुर(शोर संदेश)  शिक्षा किसी भी समाज और राज्य के विकास का मूल आधार है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर देती है और रोजगार उनके सपनों को साकार करने का मजबूत आधार बनता है। छत्तीसगढ़ सरकार उत्कृष्ट शिक्षा, आधुनिक तकनीक और रोजगार के नए अवसरों के माध्यम से प्रदेश के बच्चों और युवाओं का भविष्य संवारने के लिए प्रतिबद्ध है। गांवों से लेकर सुदूर वनांचलों तक बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य की तकनीक के लिए तैयार किया जा रहा है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने  राजधानी रायपुर के जोरा स्थित एक निजी होटल में आयोजित आईबीसी24 ‘स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप 2026’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय  ने टॉपर बेटियों को सम्मानित कर उन्हें स्कॉलरशिप प्रदान की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इन बेटियों की उपलब्धि उनके परिवार और विद्यालय के साथ पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर हमारी बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं।
कार्यक्रम में कक्षा बारहवीं की परीक्षा में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली बेमेतरा की ओमनी वर्मा को मुख्यमंत्री साय ने एक लाख रुपए का चेक और सम्मान पत्र प्रदान किया। उनके विद्यालय स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम कन्या विद्यालय, बेमेतरा को भी एक लाख रुपए की राशि का चेक प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्टजनों का सम्मान किया तथा बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित पुस्तक ‘मेधा’ का विमोचन भी किया।
मुख्यमंत्री साय ने प्रतिभावान विद्यार्थियों से संवाद करते हुए अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि होनहार बेटियों के बीच आकर उन्हें अपने बचपन के दिन याद आ रहे हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गृहग्राम बगिया की प्राथमिक शाला में हुई। पांचवीं बोर्ड की परीक्षा देने के लिए उन्हें अपने गांव से कुछ दूर दूसरे गांव जाना पड़ा था। उस समय गांव के स्कूल का भवन मिट्टी का था और उसकी मरम्मत में गांव के लोग मिलकर सहयोग करते थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने राज्य निर्माण के 25 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज प्रदेश में स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक संस्थानों का व्यापक नेटवर्क विकसित हुआ है। प्रत्येक विकासखंड में महाविद्यालय उपलब्ध हैं। आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान आज छत्तीसगढ़ में संचालित हैं। इससे प्रदेश के बच्चों को अपने राज्य में ही उच्च गुणवत्ता की शिक्षा के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति की स्थापना के साथ शिक्षा का नया अध्याय भी शुरू हो रहा है। जगरगुंडा और ओरछा जैसे क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी की शुरुआत की जा रही है। जिन इलाकों में कभी परिस्थितियों के कारण शिक्षा तक पहुंच चुनौतीपूर्ण थी, वहां अब बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक अधोसंरचना और अवसर विकसित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास केवल शैक्षणिक संस्थान स्थापित करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को उनकी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए आवश्यक सुविधाएं और वातावरण उपलब्ध कराना भी है। प्रदेश में 34 स्थानों पर नालंदा परिसर विकसित किए जा रहे हैं, जहां युवाओं को शांत और सुविधायुक्त वातावरण में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलेगा।
उन्होंने बताया कि देश की राजधानी नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के जनजातीय युवाओं के लिए 200 बिस्तरों वाला ट्राइबल यूथ हॉस्टल संचालित किया जा रहा है। यहां विद्यार्थियों को आवश्यक सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस वर्ष यहां रहकर तैयारी करने वाले 13 विद्यार्थियों ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की है। यह उपलब्धि बताती है कि सही अवसर और सुविधाएं मिलने पर छत्तीसगढ़ के युवा देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अपनी प्रतिभा सिद्ध कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है। राज्य के विद्यार्थी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित नई तकनीकों से परिचित हों और भविष्य की संभावनाओं का लाभ उठा सकें, इसके लिए छत्तीसगढ़ एआई मिशन शुरू किया जा रहा है। राज्य सरकार ने इसके लिए 500 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर उन्हें भविष्य के रोजगार और नवाचार के अवसरों के लिए तैयार करना है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय तक छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर के विकास में बड़ी बाधा रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ सुरक्षा बलों के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। इसके परिणामस्वरूप बस्तर में शांति और विश्वास का वातावरण मजबूत हुआ है तथा विकास की गति तेज हुई है।
उन्होंने कहा कि इस स्वतंत्रता दिवस पर बस्तर के 92 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया। यह बदलते बस्तर की नई तस्वीर है। नक्सलवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, राशन और अन्य बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और लगभग 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है। बस्तर मुन्ने और नियद नेल्लानार जैसी पहलों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। एक लाख से अधिक लोगों के राशन कार्ड भी बनाए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। चित्रकोट जलप्रपात, कुटुमसर गुफा सहित अनेक प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। बस्तर के धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों की सूची में शामिल किया जाना पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है।
उन्होंने कहा कि धुड़मारास में विदेशी पर्यटक होमस्टे में रहकर स्थानीय जनजातीय जीवन, संस्कृति, खान-पान और परंपराओं को करीब से जान रहे हैं। राज्य सरकार बस्तर सहित प्रदेश के पर्यटन क्षेत्रों में होमस्टे को प्रोत्साहित कर रही है और इसके लिए ऋण एवं सब्सिडी की सुविधा दी जा रही है। पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था का मजबूत माध्यम बनाने के उद्देश्य से नई औद्योगिक नीति में भी पर्यटन को शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा के साथ युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर तैयार करना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति 2024-30 को देश-विदेश में सकारात्मक प्रतिसाद मिल रहा है। नई नीति के अंतर्गत अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश के एमओयू हुए हैं और इन निवेश प्रस्तावों का प्रभाव धरातल पर भी दिखाई देने लगा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी औद्योगिक इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन दे रही है, जो स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराएंगी। एक हजार स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाले उद्यमियों के लिए बीस्पोक नीति के अंतर्गत विशेष इंसेंटिव का प्रावधान किया गया है। बारिश के मौसम के बाद प्रदेश में रोजगार मेलों का आयोजन भी किया जाएगा, जिनके माध्यम से युवाओं को विभिन्न उद्योगों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से सीधे जोड़ा जाएगा।
मुख्यमंत्री साय ने स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप से सम्मानित सभी छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि वे बड़े सपने देखें, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें और निरंतर मेहनत करें। राज्य सरकार उनके सपनों को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा, तकनीक और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, सांसद रूपकुमारी चौधरी, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन जी महाराज, गोयल ग्रुप एंड कंपनीज के चेयरमैन  सुरेश गोयल, राजीव गोयल,दिनेश गोयल, रविकांत मित्तल सहित जनप्रतिनिधिगण, शिक्षाविद्, विद्यार्थी, अभिभावक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

नदी बचेगी तो जल बचेगा और जल बचेगा तो जीवन बचेगा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

19-Aug-2026
रायपुर(शोर संदेश)  नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, कृषि और समृद्धि की जीवनधारा हैं। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा बनाने में प्रदेश की जीवनदायिनी नदियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जिन नदियों ने हमारी सभ्यता को पोषित किया और हमें समृद्धि दी, उनका संरक्षण हम सभी का साझा दायित्व है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के ओमाया गार्डन में आयोजित ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। 
मुख्यमंत्री साय ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेश की नदियों के उद्गम स्थलों एवं जलग्रहण क्षेत्रों की पहचान और संरक्षण, जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देने तथा नदी संरक्षण को व्यापक जन अभियान का स्वरूप देना है। कार्यशाला में जल संरक्षण, नदी पुनरुद्धार और जल प्रबंधन से जुड़े विषय विशेषज्ञों के साथ राज्य एवं जिला स्तरीय समितियों के सदस्य तथा विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों द्वारा मंथन किया गया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नदी बचेगी तो जल बचेगा और जल बचेगा तो जीवन बचेगा। इसी भावना के साथ राज्य सरकार नदियों के उद्गम स्थलों और कैचमेंट एरिया के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और जनभागीदारी के समन्वय से व्यापक कार्ययोजना पर आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान नदियों से गहराई से जुड़ी हुई है। महानदी सहित प्रदेश की अनेक नदियों ने कृषि, आजीविका और सामाजिक जीवन को समृद्ध किया है। नदियों का अस्तित्व उनके उद्गम स्थलों और कैचमेंट एरिया के स्वास्थ्य पर निर्भर है। इसलिए नदी संरक्षण का कार्य केवल उसके प्रवाह क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता। हमें नदी के स्रोत से लेकर उसके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को समझकर संरक्षण की समग्र योजना बनानी होगी।
उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण एवं पुनरुद्धार के कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। स्रोत महोत्सव में विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवों के आधार पर ऐसी ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसे धरातल पर समयबद्ध तरीके से लागू किया जा सके।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में नदी संरक्षण के लिए मानचित्रण, संरक्षण, पुनर्भरण, जनभागीदारी और कार्ययोजना के पांच प्रमुख स्तंभों पर काम किया जाएगा। प्रत्येक नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र का वैज्ञानिक तरीके से मानचित्रण किया जाएगा। नदी का उद्गम कहां है, उसके प्रवाह क्षेत्र की प्रकृति कैसी है, भू-उपयोग में किस प्रकार के बदलाव हुए हैं और किन कारणों से नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर प्रभाव पड़ रहा है - इन सभी पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक मानचित्रण और अध्ययन के आधार पर नदी के पूरे इकोसिस्टम के संरक्षण की योजना तैयार की जाएगी। इसमें वन एवं वनस्पति संरक्षण, मृदा क्षरण की रोकथाम, पारंपरिक जल संरचनाओं का संरक्षण एवं पुनर्जीवन, आवश्यकतानुसार नई जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण और भू-जल पुनर्भरण जैसे कार्य शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षाजल हमारे नदी तंत्र और भू-जल का मूल आधार है। इसलिए बारिश के पानी को तेजी से बहकर निकल जाने देने के बजाय उसे अधिक से अधिक मात्रा में धरती के भीतर पहुंचाने के उपाय करने होंगे। इससे भू-जल स्तर में सुधार होगा, जल स्रोतों को पुनर्जीवन मिलेगा और नदियों में लंबे समय तक जल प्रवाह बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जल संरक्षण का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। नदियों के किनारे बसे गांवों और वहां रहने वाले लोगों का नदी से सीधा संबंध है, इसलिए उन्हें नदी संरक्षण की प्रक्रिया का प्रमुख भागीदार बनाना होगा।
उन्होंने जिला स्तरीय समितियों के सदस्यों से कहा कि नदियों के किनारे बसे गांवों में स्थानीय समितियां गठित कर पंचायतों के सहयोग से नदी संरक्षण एवं पुनरुद्धार के कार्य आगे बढ़ाए जाएं। स्थानीय समुदाय को नदी की स्थिति, उसके महत्व और संरक्षण के उपायों की जानकारी दी जाए। जब समाज स्वयं अपनी नदी और जल स्रोतों के संरक्षण की जिम्मेदारी लेता है, तब ऐसे प्रयास अधिक प्रभावी और स्थायी होते हैं।
मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों से भी आग्रह किया कि जल संरक्षण से जुड़े वैज्ञानिक और तकनीकी ज्ञान को सरल एवं सहज भाषा में लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका लाभ धरातल पर दिखाई दे और आम नागरिक उसे समझकर अपने जीवन में अपना सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे हुआ है। नदियों ने पीढि़यों से मानव जीवन को जल, भोजन और आजीविका प्रदान की है। इसलिए एक सभ्य समाज के रूप में हमारा दायित्व है कि हम अपनी आने वाली पीढि़यों के लिए नदियों और जल स्रोतों को सुरक्षित रखें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्रोत महोत्सव 2026 से निकलने वाले निष्कर्ष छत्तीसगढ़ में नदी संरक्षण और जल सुरक्षा की दिशा में एक प्रभावी रोडमैप तैयार करने में महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।
कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण के क्षेत्र में राज्य की संस्थागत और तकनीकी क्षमता को मजबूत बनाने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण एमओयू किए गए। नेशनल वाटर एकेडमी, पुणे के साथ हुए एमओयू के माध्यम से जल संरक्षण एवं जल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों और मैदानी अमले के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। इससे आधुनिक जल प्रबंधन, नवीन तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
इसी प्रकार एंट्रिक्स कॉरपोरेशन, बेंगलुरु के साथ हुए एमओयू के माध्यम से इसरो की विशेषज्ञता और आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों का उपयोग जल संसाधनों के वैज्ञानिक विश्लेषण एवं निगरानी में किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में कुनकुरी तहसील के लगभग 1540 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में उन्नत भू-स्थानिक तकनीक के माध्यम से जल संसाधनों की स्थिति का अध्ययन, निगरानी और विश्लेषण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक तकनीक से प्राप्त वैज्ञानिक आंकड़ों को स्थानीय अनुभव और पारंपरिक ज्ञान के साथ जोड़कर जल संरक्षण की अधिक प्रभावी योजनाएं बनाई जा सकती हैं। इससे क्षेत्र विशेष की आवश्यकता के अनुरूप समाधान तैयार करने और उनके परिणामों की निगरानी करने में भी मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में जल संरक्षण पर आधारित ‘नीर-नारी-निधि’ पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक नीर की रक्षा, नारी की भागीदारी और जल संपदा के संरक्षण की अवधारणा को रेखांकित करती है। पुस्तक में जल प्रबंधन एवं जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न अनुभवों, प्रयासों और नवाचारों का दस्तावेजीकरण किया गया है।
सीगंगा के संस्थापक एवं आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. विनोद तारे ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नदियों के उद्गम और उन्हें पोषित करने वाले जल स्रोतों की पहचान एवं संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। बारिश का पानी ही नदियों और भू-जल का प्रमुख आधार है। वर्षाजल के तेज बहाव को नियंत्रित कर उसे अधिक से अधिक मात्रा में जमीन के भीतर पहुंचाना होगा, जिससे भू-जल स्तर बढ़े और भविष्य के लिए जल सुरक्षित किया जा सके।
डॉ. तारे ने कहा कि जल संरक्षण के लिए प्राचीन ज्ञान, स्थानीय एवं पारंपरिक अनुभव और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के बीच समन्वय जरूरी है। इन तीनों को एक साथ जोड़कर तैयार की गई कार्ययोजना ही जल स्रोतों के दीर्घकालिक संरक्षण और जल के सतत उपयोग का आधार बन सकती है।
जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो ने कहा कि स्रोत महोत्सव 2026 का उद्देश्य प्रदेश की नदियों के उद्गम और कैचमेंट एरिया के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक, व्यवहारिक और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करना है। नदी संरक्षण में केवल डाउनस्ट्रीम फ्लो का अध्ययन पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सोर्स एरिया, भूमि उपयोग, मिट्टी की नमी, भू-जल रिचार्ज, वनस्पति और मृदा क्षरण सहित नदी के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को एक साथ समझना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि कार्यशाला में नौ नदी समूहों पर अलग-अलग चर्चा की जा रही है। इन समूहों में क्षेत्र विशेष की परिस्थितियों के अनुरूप साइट स्पेसिफिक और साइंस बेस्ड समाधान तैयार किए जाएंगे। इसमें समस्या की स्पष्ट पहचान के साथ समाधान, क्रियान्वयन की जिम्मेदारी और परिणामों के आकलन की समय-सीमा भी निर्धारित करने पर जोर रहेगा।
टोप्पो ने कहा कि जल संरक्षण केवल अधोसंरचना निर्माण का विषय नहीं है। स्थानीय समुदाय की भागीदारी ही संरक्षण कार्यों की दीर्घकालिक सफलता और स्थायित्व की कुंजी है। कार्यशाला से प्राप्त सुझावों और निष्कर्षों के आधार पर छत्तीसगढ़ के लिए समयबद्ध रिवर सोर्स रेस्टोरेशन रोडमैप तैयार करने की दिशा में आगे कार्य किया जाएगा।
कार्यशाला में सीगंगा के संस्थापक एवं आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. विनोद तारे, नमामि गंगे मिशन से जुड़े विषय विशेषज्ञ, एनआईटी रायपुर के प्राध्यापक, राज्य एवं जिला स्तरीय समितियों के सदस्य, विभिन्न जिलों के कलेक्टर एवं अधिकारी तथा जल एवं नदी संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञ उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट का किया शुभारंभ, छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को नई मजबूती

17-Aug-2026
रायपुर।  (शोर संदेश) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के पचपेड़ी नाका स्थित रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल परिसर में अत्याधुनिक रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने नई कैंसर इकाई में उपलब्ध उपचार सुविधाओं एवं अत्याधुनिक मशीनरी का अवलोकन किया तथा अस्पताल प्रबंधन एवं चिकित्सकों को इस महत्वपूर्ण पहल के लिए शुभकामनाएं दीं। इस दौरान साय ने डॉ. संदीप दवे के भाई प्रदीप दवे को पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल पिछले 36 वर्षों से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि डॉ. संदीप दवे के भाई स्वर्गीय प्रदीप दवे का कैंसर से निधन हुआ था। इस व्यक्तिगत पीड़ा ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ व्यापक स्तर पर काम करने का संकल्प मजबूत किया। आज उसी संकल्प का परिणाम रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के रूप में सामने आया है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान आने वाले समय में हजारों-लाखों लोगों को बेहतर कैंसर उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ा है। कैंसर मरीजों को अब एक ही परिसर में जांच, उपचार और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने डॉ. संदीप दवे और उनकी पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि निजी क्षेत्र की ऐसी पहल से प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में स्वास्थ्य संस्थानों के विस्तार को गति मिली और वर्तमान सरकार भी पिछले ढाई वर्षों से प्रदेश के कोने-कोने तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेशवासियों को उपचार के लिए प्रदेश से बाहर न जाना पड़े और उन्हें आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं अपने ही प्रदेश में उपलब्ध हों।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के शुभारंभ को छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस संस्थान के पीछे सेवा और संवेदना की भावना जुड़ी हुई है। डॉ. दवे के भाई की कैंसर से मृत्यु ने उन्हें गहरा आघात दिया और संभवतः इसी पीड़ा ने कैंसर के उपचार के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने की प्रेरणा दी। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि कैंसर केवल मरीज की नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सामूहिक पीड़ा होती है। उन्होंने कैंसर की समय पर पहचान के लिए नियमित स्क्रीनिंग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में कैंसर की पहचान होने पर उपचार की संभावनाएं काफी बेहतर हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में पहले से उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं के साथ अब कैंसर उपचार की सुविधा जुड़ने से मरीजों को एक ही छत के नीचे व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के शुभारंभ से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में एक महत्वपूर्ण नई कड़ी जुड़ी है। इसका लाभ छत्तीसगढ़ सहित देश के अन्य हिस्सों के मरीजों को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ में केवल एक मेडिकल कॉलेज था। तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के प्रयासों से मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 10 हुई और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पिछले ढाई वर्षों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के बाद प्रदेश में अब 15 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इसी अवधि में प्रदेश में सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का भी विस्तार हुआ है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में दो नए सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों पर काम हो रहा है। बस्तर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की सुविधा शुरू होने से गंभीर मरीजों को उपचार के लिए एयरलिफ्ट कर रायपुर लाने की आवश्यकता में कमी आई है और जगदलपुर में हृदय जैसी जटिल सर्जरी भी संभव हो रही है। बिलासपुर में भी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का शुभारंभ हो चुका है।
इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक मोतीलाल साहू, चिकित्सक, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोग एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे।
 

 


देश की आजादी में छत्तीसगढ़ के वीर नायकों का योगदान नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारा दायित्व : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

16-Aug-2026
रायपुर(शोर संदेश)। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के योगदान, अमर सेनानियों के शौर्य एवं बलिदान, ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा और राज्य में सुशासन एवं विकास की उपलब्धियों को समेटे यह प्रदर्शनी अतीत के गौरव से वर्तमान की उपलब्धियों और भविष्य की आकांक्षाओं तक छत्तीसगढ़ की यात्रा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रही है।
मुख्यमंत्री साय ने प्रदर्शनी के विभिन्न खंडों का अवलोकन किया और वहां प्रदर्शित दुर्लभ छायाचित्रों, दस्तावेजों एवं सूचनात्मक सामग्री में विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के लिए छत्तीसगढ़ की धरती के अनेक वीर सपूतों ने संघर्ष और बलिदान किया। उनके योगदान और राष्ट्रभक्ति की प्रेरक गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारा दायित्व है। ऐसी प्रदर्शनियां युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने के साथ उनमें राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यबोध और देश के प्रति समर्पण की भावना को और मजबूत करती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रदर्शनी केवल इतिहास का स्मरण नहीं कराती, बल्कि विरासत से प्रेरणा लेकर विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को भी सुदृढ़ करती है। एक ओर इसमें स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की अमर गाथाएं हैं, तो दूसरी ओर जनकल्याणकारी योजनाओं, सुशासन, आधुनिक अधोसंरचना और नई तकनीक के माध्यम से बदलते छत्तीसगढ़ की तस्वीर भी दिखाई गई है।
प्रदर्शनी का विशेष आकर्षण राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर केंद्रित खंड है। इसमें ‘वंदे मातरम्’ की रचना से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन में इसके राष्ट्रजागरण के मंत्र के रूप में स्थापित होने तक की यात्रा को ऐतिहासिक संदर्भों और छायाचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ ने देशवासियों को एक सूत्र में बांधने और मातृभूमि के लिए त्याग एवं बलिदान की भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके स्वर ने स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों में नई ऊर्जा का संचार किया। 150 वर्ष की इस ऐतिहासिक यात्रा को प्रदर्शनी में विशेष स्थान देकर नई पीढ़ी को ‘वंदे मातरम्’ के राष्ट्रभाव और उसके ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराया गया है।
प्रदर्शनी में स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ की भूमिका को विस्तार से प्रदर्शित किया गया है। प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों, जननायकों और अमर बलिदानियों के योगदान से जुड़े दुर्लभ छायाचित्र, दस्तावेज और ऐतिहासिक प्रसंग यहां दर्शकों को स्वतंत्रता आंदोलन के उस दौर से रूबरू कराते हैं, जब छत्तीसगढ़ की धरती पर भी ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष और जनजागरण की आवाज बुलंद हुई थी।
महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास तथा यहां के सामाजिक एवं राष्ट्रीय आंदोलनों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को प्रदर्शनी में विशेष स्थान दिया गया है। इन ऐतिहासिक दस्तावेजों के माध्यम से नई पीढ़ी यह जान सकेगी कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ का योगदान कितना व्यापक और गौरवपूर्ण रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर की दो महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों - टाउन हॉल और शहीद स्मारक - के संरक्षण, साज-सज्जा एवं नवीनीकरण के लिए 50-50 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद स्मारक राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों की स्मृतियों को संजोए हुए है, जबकि ऐतिहासिक टाउन हॉल रायपुर की समृद्ध विरासत और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन धरोहरों का संरक्षण हमारी गौरवशाली विरासत के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘विरासत से विकास तक’ की सोच के साथ आगे बढ़ रही है। हमारा प्रयास है कि आधुनिक विकास की गति के साथ प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की गरिमा भी अक्षुण्ण रहे। इन स्थलों को बेहतर स्वरूप मिलने से नई पीढ़ी अपने इतिहास, संस्कृति और बलिदान की परंपरा को और निकटता से जान सकेगी।
प्रदर्शनी का एक महत्वपूर्ण खंड राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और उनसे आम नागरिकों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों पर केंद्रित है। इसमें महिलाओं, किसानों, युवाओं, श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों के जीवन को बेहतर बनाने वाली योजनाओं एवं पहलों को छायाचित्रों और सूचनात्मक सामग्री के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।
महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण, कृषक उन्नति योजना से किसानों को मिल रहे संबल तथा प्रधानमंत्री आवास योजना से जरूरतमंद परिवारों के पक्के घर के सपने के साकार होने की तस्वीर यहां दिखाई गई है। युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल, रोजगार एवं नए अवसरों के विस्तार और श्रमिकों सहित विभिन्न वर्गों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं को भी प्रमुखता से स्थान दिया गया है।
प्रदर्शनी यह संदेश देती है कि सुशासन का वास्तविक उद्देश्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाकर उसके जीवन में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाना है।
प्रदर्शनी में राज्य की विकास यात्रा को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। डिजिटल पंजीयन के माध्यम से प्रशासन में पारदर्शिता, सुशासन तिहार के माध्यम से जनसमस्याओं के समाधान, हरित छत्तीसगढ़ की दिशा में किए जा रहे प्रयास तथा शिक्षा और अधोसंरचना के विस्तार की झलक यहां देखने को मिलती है।
बेहतर सड़क एवं रेल संपर्क, औद्योगिक अधोसंरचना, निवेश और रोजगार के नए अवसरों सहित विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे बदलावों को भी प्रदर्शित किया गया है। इस प्रकार प्रदर्शनी छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत और तेजी से आकार लेते भविष्य को एक साथ प्रस्तुत करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष से हमें राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों की प्रेरणा मिलती है और यही प्रेरणा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में हमारी ऊर्जा बनती है।
प्रदर्शनी में आधुनिक तकनीक और छत्तीसगढ़ की विरासत का अभिनव संगम भी आकर्षण का केंद्र है। विशेष एआई आधारित पहल के माध्यम से आगंतुक प्रदेश के प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थलों की पृष्ठभूमि के साथ अपनी डिजिटल तस्वीर तैयार करा सकते हैं। विशेष रूप से बच्चों और युवाओं में इसे लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
इस पहल के माध्यम से तकनीक का उपयोग कर नई पीढ़ी को प्रदेश की पर्यटन, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से रोचक तरीके से जोड़ने का प्रयास किया गया है। आगंतुक इन डिजिटल तस्वीरों को प्रदर्शनी की स्मृति के रूप में भी प्राप्त कर सकते हैं।
प्रदर्शनी स्थल पर रखी गई विजिटर डायरी में आगंतुक स्वतंत्रता दिवस, राष्ट्रप्रेम और छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा से जुड़े अपने विचार एवं अनुभव दर्ज कर सकते हैं। राज्य की उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास यात्रा पर आधारित विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का भी प्रदर्शन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने विजिटर बुक में अपने विचार दर्ज करते हुए प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान और शासन की योजनाओं एवं उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का यह उपयोगी प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों, विशेषकर युवाओं और विद्यार्थियों से प्रदर्शनी देखने की अपील करते हुए कहा कि अपने इतिहास और विरासत को जानना हमें वर्तमान के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराता है और बेहतर भविष्य के निर्माण की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, विधायक पुरंदर मिश्रा, जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल, कलेक्टर गौरव सिंह, अपर संचालक उमेश मिश्रा, संजीव तिवारी, आलोक देव सहित जनसंपर्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में यह सात दिवसीय प्रदर्शनी 15 से 21 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10.30 बजे से रात 8 बजे तक आम नागरिकों के अवलोकन के लिए खुली रहेगी।


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