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सऊदी अरब के रियाद और दम्माम के लिए एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ानें 7 नवंबर तक निलंबित

25-Oct-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  भारतीय दूतावास ने शनिवार को बताया कि एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की रियाद और दम्माम आने-जाने वाली उड़ानें 7 नवंबर तक निलंबित रहेंगी। वहीं, जेद्दा के लिए दोनों एयरलाइंस की सेवाएं 31 अक्टूबर तक बंद रहेंगी। दूतावास के अनुसार, रियाद और दम्माम के लिए उड़ान सेवाओं का निलंबन जारी रहेगा, जबकि जेद्दा के लिए उड़ानें भी फिलहाल निर्धारित तिथि तक संचालित नहीं होंगी। यह फैसला सऊदी अरब में नागरिक बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से रियाद और दम्माम के हवाई अड्डों पर लगातार हो रहे हमलों के मद्देनजर लिया गया है।

इस बीच, भारत सरकार ने कहा कि सऊदी अरब में फंसे भारतीय उमराह यात्रियों की वापसी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास संबंधित एयरलाइंस और टूर ऑपरेटरों के संपर्क में हैं, ताकि यात्रियों की जल्द वापसी सुनिश्चित की जा सके। नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में लगभग 3,000 फंसे हुए उमराह यात्री सऊदी अरब से भारत लौट चुके हैं। इसके अलावा 10,000 से ज्यादा सामान्य उमराह यात्री भी भारत वापस आए हैं।

उन्होंने कहा कि बाकी बचे यात्रियों की जल्द वापसी के लिए व्यवस्थाओं पर चर्चा जारी है। भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास लगातार फंसे हुए लोगों के संपर्क में हैं और सामुदायिक स्वयंसेवकों के सहयोग से उनकी हर संभव मदद कर रहे हैं। प्रवक्ता ने बताया कि रियाद और जेद्दा में भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए 24 घंटे कंट्रोल रूम भी संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही, जमीनी स्थिति की जानकारी देने के लिए नियमित सलाह (एडवाइजरी) जारी की जा रही है।

बता दें कि भारत ने हाल ही में सऊदी अरब में नागरिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की निंदा की थी। इनमें किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और अरामको के शायबा तेल क्षेत्र पर हुए हमले शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दम्माम हवाई अड्डे पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य भारतीय घायल हुए थे। वहीं, शायबा तेल क्षेत्र पर हुए हमले में भी एक भारतीय नागरिक घायल हुआ था। भारत ने उम्मीद जताई है कि क्षेत्र में जल्द ही शांति और सामान्य स्थिति बहाल होगी।

पीएम मोदी पहुंचे काशी, अरविंद टेक्सटाइल्स मिल का करेंगे लोकार्पण, नमो घाट पर देखेंगे एयर शो

25-Oct-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर पहुंचे। उनके इस दौरे में औद्योगिक विकास, महिला रोजगार और भारतीय वायुसेना के शौर्य की झलक देखने को मिलेगी। प्रधानमंत्री मिर्जामुराद के खोचवां में अरविंद टेक्सटाइल्स मिल का लोकार्पण करेंगे। इसके बाद नमो घाट पर आयोजित एयर शो में वायुसेना के विमानों की कलाबाजियां देखेंगे। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई प्रमुख नेता मौजूद रहेंगे।

प्रधानमंत्री के खोचवां पहुंचने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल ने उनकी अगवानी की। अरविंद टेक्सटाइल्स मिल के लोकार्पण को लेकर कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। एयरपोर्ट से लेकर कार्यक्रम स्थल और नमो घाट तक सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।
प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर वाराणसी में उत्साह का माहौल है। नमो घाट पर एयर शो देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। घाट तक जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है और लोगों को निर्धारित मार्ग से कतारबद्ध होकर आगे बढ़ाया जा रहा है। शहर के कई हिस्सों में यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए रूट डायवर्जन भी लागू किया गया है।

प्रधानमंत्री के आगमन को देखते हुए बाबतपुर एयरपोर्ट से लेकर नमो घाट तक शहर के प्रमुख चौराहों, पार्कों और सड़कों को सजाया गया है। एयरपोर्ट से पुलिस लाइन होते हुए नमो घाट तक सरकार की उपलब्धियों और विभिन्न योजनाओं को दर्शाने वाले होर्डिंग और बैनर लगाए गए हैं। भाजपा की योजना के तहत पुलिस लाइन में युवा प्रधानमंत्री का स्वागत करेंगे।
काशी में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक और सुरक्षा तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। औद्योगिक परियोजना के लोकार्पण के साथ एयर शो इस दौरे के प्रमुख आकर्षण होंगे। नमो घाट पर होने वाले प्रदर्शन में भारतीय वायुसेना के विमान अपनी हवाई कलाबाजियों से लोगों को रोमांचित करेंगे। 
 

 


प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी में नई कपड़ा विनिर्माण इकाई का उद्घाटन किया

25-Oct-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को वाराणसी में अरविंद लिमिटेड की नई कपड़ा विनिर्माण इकाई का उद्घाटन किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने कपड़ा विनिर्माण इकाई में काम कर रही महिलाओं से संवाद भी किया। प्रधानमंत्री के साथ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी थे।
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह इकाई आधुनिक विनिर्माण व्यवस्था पर केंद्रित है और इससे खासतौर पर महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों का सृजन होगा एवं यह इकाई इस क्षेत्र की आर्थिक प्रगति में योगदान करेगी। बयान में कहा गया है कि इस इकाई से वाराणसी में विनिर्मित कपड़ों का अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात करने में मदद मिलेगी। यह उद्घाटन औद्योगिक निवेश और विनिर्माण आधारित वृद्धि के स्थल के तौर पर उत्तर प्रदेश की बढ़ती भूमिका रेखांकित करता है।

अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस पर बानबरद में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

25-Oct-2026
रायपुर ।( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ लोककला और संस्कृति की समृद्ध धरती है। हमारी लोककलाएं हमारे इतिहास, जीवन-मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। इन्हें सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार लोककलाओं के संरक्षण-संवर्धन के साथ कलाकारों को प्रोत्साहन और व्यापक मंच उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस के अवसर पर दुर्ग जिले के अहिवारा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बानबरद में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने प्रदेशभर से आए लोक कलाकारों का अभिनंदन करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी ने अनेक महान कलाकार दिए हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और साधना से प्रदेश की लोकसंस्कृति को देश-दुनिया में प्रतिष्ठित किया है।
मुख्यमंत्री साय ने पंडवानी की महान लोक कलाकार पद्म विभूषण तीजन बाई का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी अद्वितीय कला-साधना से छत्तीसगढ़ की पंडवानी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई। पंडवानी एक अनूठी लोकविधा है, जिसमें कलाकार महाभारत की कथा और उसके विभिन्न पात्रों को अपने गायन, अभिनय और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से जीवंत कर देता है। तीजन बाई ने इस अद्भुत लोकविधा को दुनिया के अनेक मंचों तक पहुंचाकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजन बाई की स्मृतियों और उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार महत्वपूर्ण पहल कर रही है। उनके गृह ग्राम गनियारी को कला ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा तथा वहां के हाईस्कूल का नामकरण तीजन बाई के नाम पर करने की पहल की जाएगी। उन्होंने बताया कि तीजन बाई के नाम पर लोककला अलंकरण इसी वर्ष से राज्योत्सव के अवसर पर प्रदान किया जाएगा। यह अलंकरण उनकी अनुपम कला-साधना के प्रति सम्मान के साथ प्रदेश के लोक कलाकारों को अपनी परंपरागत कलाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा।

मुख्यमंत्री साय ने ज्ञानश्रोत कला मंच के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि किसी संस्था का लगातार 46 वर्षों तक लोककला और संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। इस मंच ने छत्तीसगढ़ की लोककलाओं को जीवंत रखने, कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने पद्मश्री डॉ. उषा बारले एवं ज्ञानश्रोत लोककला मंच से जुड़े सभी लोगों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के कलाकारों और फिल्म जगत को भी नई संभावनाओं से जोड़ रही है। छत्तीसगढ़ी सिनेमा और स्थानीय कलाकारों को व्यापक मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ फिल्म विकास बोर्ड का गठन किया गया है। नवा रायपुर में फिल्म सिटी विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे छत्तीसगढ़ी सिनेमा के साथ अन्य फिल्म निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश के कलाकारों तथा युवाओं के लिए रोजगार एवं रचनात्मक अवसरों के नए द्वार खुलेंगे।

मुख्यमंत्री साय ने आयोजकों की मांग पर पंडवानी महासम्मेलन में शामिल 70 दलों को 25-25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की घोषणा की। इनमें पंडवानी कलाकारों के साथ चार पंथी एवं तीन आदिवासी नृत्य दल भी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की शिक्षा और अधोसंरचना से जुड़ी मांगों को पूरा करते हुए मिडिल स्कूल बानबरद को हाईस्कूल में उन्नयन करने तथा अहिवारा रेलवे क्रॉसिंग से अटल परिसर तक बीटी रोड निर्माण की भी घोषणा की।

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति को आगे बढ़ाने में यहां के कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पंडवानी, पंथी, भरथरी, ददरिया और सुवा जैसी लोकविधाएं हमारे जीवन और सामाजिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा हैं। ये केवल गीत और नृत्य नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा हैं। उन्होंने कलाकारों से इस महासम्मेलन की परंपरा को आगे भी इसी उत्साह के साथ जीवंत बनाए रखने का आह्वान किया।
कार्यक्रम को विधायक रिकेश सेन ने भी संबोधित किया। पद्मश्री डॉ. उषा बारले ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कलाकारों से जुड़ी विभिन्न मांगों की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट किया।

इस अवसर पर विधायक दुर्ग ग्रामीण ललित चंद्राकर, विधायक साजा ईश्वर साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे, प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोक कलाकार एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

आदिवासी समाज की परंपरागत व्यवस्था सामाजिक एकता, न्याय और सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

24-Oct-2026
रायपुर।( शोर संदेश ) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के अंतर्गत आयोजित मुरिया दरबार में आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपरागत सामाजिक व्यवस्था और सामूहिक निर्णय प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि आदिवासी समाज की परंपरागत व्यवस्था सामाजिक एकता, न्याय, आपसी सहयोग और सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि समय के साथ शासन व्यवस्था, नीतियां और कानून बदलते रहते हैं, लेकिन आदिवासी समाज ने अपनी परंपराओं, सामाजिक नियमों और अलिखित संविधान को पीढ़ियों से जीवित रखा है। यह व्यवस्था समाज में सुख-शांति, प्रेम, सद्भाव और सामूहिकता बनाए रखने का महत्वपूर्ण आधार है।
राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने मुरिया दरबार में उपस्थित आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों और पारंपरिक प्रमुखों को संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी ने मुझे एक बार फिर अपनी संस्कृति और परंपराओं से रूबरू होने का अवसर दिया है। इसके लिए मैं आप सभी की आभारी हूं। उन्होंने कहा कि मैं भी इसी आदिवासी संस्कृति और परंपरा से आती हूं। मेरे दादाजी मांझी थे, मेरे पिताजी भी मांझी थे और मेरे भाई भी मांझी हुआ करते थे। मैं एक मांझी की बेटी हूं, गांव के मुखिया की बेटी हूं। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के सदस्य आज भले ही उनके बीच नहीं हैं, लेकिन अपनी संस्कृति, सामाजिक व्यवस्था और परंपराओं के प्रति उनका जुड़ाव आज भी उतना ही गहरा है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि देश में पहले राजाओं का शासन था, इसके बाद अंग्रेजों का शासन आया और आज भारत में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था है। समय के साथ शासन व्यवस्था और कानूनों में परिवर्तन हुआ है, लेकिन आदिवासी समाज की अपनी पारंपरिक व्यवस्था आज भी विद्यमान हैं जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा गया है, लेकिन समाज के लोग पीढ़ियों से इसका पालन करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज में लोग मिल-जुलकर पूजा-अर्चना करते हैं, विवाह एवं अन्य सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं तथा सामूहिक रूप से पर्व-त्यौहार मनाते हैं। नृत्य, गीत-संगीत और सामूहिक उत्सवों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हैं। उन्होंने इस समृद्ध विरासत को संरक्षित रखने के लिए समाज के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रपति ने कहा कि संस्कृति, परंपरा, संविधान और लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था का मूल उद्देश्य समाज में सुख-शांति, आनंद और प्रेम बनाए रखना है। इस दृष्टि से आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्था अत्यंत सुंदर और उत्कृष्ट है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने आदिवासी समाज की पारंपरिक न्याय व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि गांवों में मांझी और अन्य पारंपरिक प्रमुखों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। परिवारों के बीच विवाद, जमीन-जायदाद से संबंधित समस्याएं अथवा आपसी मतभेद होने पर लोग मांझी के पास जाते हैं। मांझी गांव के लोगों को एकत्रित कर सभी पक्षों की बात सुनते हैं और आपसी सहमति से समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करते हैं।  उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज में गांव के प्रमुख व्यक्तियों और बुजुर्गों की सहभागिता से सामूहिक निर्णय लेने की समृद्ध परंपरा रही है। इस व्यवस्था में पीड़ परगना और देश परगना जैसी पारंपरिक संस्थाओं का भी विशेष महत्व रहा है। गांव स्तर पर समाधान नहीं होने पर समस्याओं को पीड़ परगना और आवश्यकता पड़ने पर देश परगना के समक्ष रखा जाता था।
राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने कहा कि पहले लगभग 50 से 52 गांवों को मिलाकर एक पीड़ की व्यवस्था हुआ करती थी। बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए समाज के लोग कई दिनों तक सामूहिक बैठकें करते थे। कभी-कभी सात से आठ दिनों तक लगातार विचार-विमर्श चलता था और समाधान निकलने तक प्रयास जारी रहते थे। यह परंपरा आदिवासी समाज की एकता, सामूहिक जिम्मेदारी और आपसी विश्वास को दर्शाती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक न्यायिक व्यवस्था में समस्याओं के समाधान के लिए पुलिस, थाना और न्यायालयों का सहारा लिया जाता है। कई मामलों में न्याय प्राप्त करने की प्रक्रिया लंबी हो जाती है और इसमें समय तथा धन दोनों खर्च होते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ विवादों के समाधान में दस-बीस या तीस वर्ष तक लग जाते हैं। उन्होंने आग्रह किया कि जहां संभव हो और कानून के अनुरूप हो, वहां समाज के लोग आपसी बातचीत, सहमति और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था के माध्यम से विवादों का समाधान करने का प्रयास करें। उन्होंने मुरिया दरबार की इस ऐतिहासिक परंपरा को बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई। राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका के अलग-अलग दायित्व हैं, जबकि आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्था में मांझी सामाजिक नेतृत्व, विवाद समाधान और सामुदायिक निर्णयों से जुड़ी अनेक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति में आध्यात्मिकता, सामूहिकता और प्रकृति के प्रति आस्था का विशेष स्थान है। गांवों में ग्राम देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की प्राचीन परंपरा रही है। समाज के लोग एकजुट होकर गांव की सुख-समृद्धि, खुशहाली, स्वास्थ्य और कल्याण की कामना करते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के पर्व-त्यौहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि सामाजिक एकता, आपसी सहयोग और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। समाज के लोग सामूहिक रूप से नाचते-गाते हैं, उत्सव मनाते हैं और खुशियां बांटते हैं। यही सामूहिकता आदिवासी संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि अंग्रेजी शासन और राजाओं के समय आदिवासी समाज ने अपने अधिकारों, सम्मान और अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। 

राष्ट्रपति मुर्मु ने आदिवासी समाज से बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ समाज को आगे बढ़ना आवश्यक है। बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाएं, उन्हें पढ़ने-लिखने और जीवन में प्रगति करने का अवसर प्रदान करें। उन्होंने कहा कि समय के साथ सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाना और विकास के नए अवसरों को अपनाना जरूरी है, लेकिन इसका अर्थ अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक पहचान को त्यागना नहीं होना चाहिए। 
राष्ट्रपति ने कहा कि विकास और सांस्कृतिक संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। आधुनिक शिक्षा, नई सोच और विकास के अवसरों को अपनाते हुए अपनी सांस्कृतिक विरासत, रीति-रिवाजों और सामाजिक मूल्यों को सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने समाज के लोगों से अपनी जड़ों से जुड़े रहने, पारंपरिक संस्थाओं का सम्मान करने और आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति से परिचित कराने का आग्रह किया। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार आदिवासी समाज के विकास और कल्याण के लिए सहयोग कर रही है तथा आगे भी करती रहेगी। उन्होंने समाज के लोगों से शिक्षा, सामाजिक एकता और विकास के माध्यम से सशक्त बनने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति ने मुरिया दरबार जैसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज की पहचान उसकी संस्कृति, परंपराओं और सामूहिक मूल्यों से होती है। चाहे इन परंपराओं का उल्लेख सरकारी अभिलेखों में हो अथवा न हो, समाज के लोगों को अपनी सामाजिक संस्थाओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की परंपरागत व्यवस्था में आपसी भाईचारा, प्रेम, सद्भाव, सामाजिक न्याय और सुशासन की भावना निहित है। इन मूल्यों को बनाए रखना वर्तमान और भावी पीढ़ियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बस्तर के आदिवासी समाज से मिले स्नेह, सम्मान और आत्मीय स्वागत के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आप सभी के बीच आकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हुई है। अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति आपका समर्पण प्रेरणादायक है।इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को स्मृति चिह्न भेंट किया गया। 
इस गरिमामयी अवसर पर बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष व सांसद महेश कश्यप, उपाध्यक्ष  बलराम मांझी, फरसपाल के मांझी अर्जुन मांझी, हमीरगढ़ के मांझी शशिभूषण मांझी और किलेपाल के गंगाधर मांझी ने भी अपने विचार व्यक्त कर बस्तर दशहरा पर्व के ऐतिहासिक मुरिया दरबार में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति के प्रति कृतज्ञता प्रकट किया। इस दौरान बस्तर राज परिवार के सदस्य कमलचन्द्र भंजदेव, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, वन मंत्री  केदार कश्यप, कांकेर सांसद भोजराज नाग, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, महापौर संजय पाण्डे सहित मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी  बीएन मीणा, कलेक्टर आकाश छिकारा, एसपी शलभ सिन्हा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, पारंपरिक मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरिन, नाइक-पाइक और बस्तर दशहरा समिति के सदस्य एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर दशहरा की अनूठी परंपराओं और जनजातीय संस्कृति की सराहना की

24-Oct-2026
रायपुर।( शोर संदेश ) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी की पावन भूमि जगदलपुर में आयोजित विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने बस्तर दशहरा की विशिष्ट धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं की सराहना करते हुए इसे छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव, सामूहिक आस्था, सामाजिक समरसता और जनजातीय विरासत का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि लगभग 75 दिनों तक चलने वाला यह अनूठा उत्सव विभिन्न समुदायों को एक सूत्र में बांधने और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को संरक्षित रखने का उत्कृष्ट उदाहरण है।
राष्ट्रपति ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि बस्तर दशहरा जैसे विश्वप्रसिद्ध उत्सव में शामिल होना उनके लिए विशेष प्रसन्नता का विषय है। इस उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें विभिन्न गोत्रों, समुदायों और समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता रहती है। रथ निर्माण से लेकर रथ खींचने, पूजा-अर्चना और विभिन्न अनुष्ठानों तक प्रत्येक समुदाय अपनी परंपरागत जिम्मेदारी का निर्वहन करता है। यह सामूहिक सहभागिता सामाजिक एकता, आपसी सहयोग और सांस्कृतिक निरंतरता का असाधारण उदाहरण है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने बस्तर दशहरा के अंतर्गत आयोजित होने वाले मुरिया दरबार की परंपरा को जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस परंपरा में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर जनसमस्याओं, आवश्यकताओं और सामाजिक विषयों पर विचार-विमर्श करते हैं। सामूहिक संवाद के माध्यम से निकाले गए समाधान समाज की खुशहाली और आपसी सहयोग का मार्ग प्रशस्त करते हैं। ऐसी परंपराएं भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करती हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों को नई प्रतिष्ठा प्रदान करती हैं।
उन्होंने कहा कि लगभग दो माह पूर्व राष्ट्रपति भवन में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से उनकी मुलाकात हुई थी। इसमें बस्तर पंडुम के विजेताओं के साथ बस्तर के परगना मांझी और चालकी भी शामिल थे। बस्तर पंडुम जैसे आयोजन जनजातीय युवाओं को अपनी संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समाज में अपार प्रतिभा और संभावनाएं हैं। उचित अवसर, प्रोत्साहन और संसाधन उपलब्ध होने पर जनजातीय समाज के बेटे-बेटियां जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ा सकते हैं। उन्होंने बस्तर ओलंपिक में जनजातीय युवाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि खेल प्रतिभाओं को उचित मंच मिलने से बस्तर के युवा भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं और ओलंपिक जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों में पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ा सकते हैं।
राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समस्या से मुक्ति और सुरक्षा एवं विकास के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों का उल्लेख करते हुए केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की पीड़ा से मुक्त होकर यह क्षेत्र प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर के युवा और जनजातीय समुदाय के लोग अपनी प्रतिभा, परिश्रम और सहभागिता से देश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
राष्ट्रपति मुर्मु ने बस्तर क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि रामायण में इस अंचल का संबंध दंडकारण्य से जोड़ा जाता है। भगवान श्रीराम के वनवास से संबंधित अनेक प्रसंग इस क्षेत्र की सांस्कृतिक स्मृतियों में विद्यमान हैं। माता शबरी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत भारतीय परंपरा का अभिन्न अंग है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों, माता सीता की पवित्रता और माता शबरी की भक्ति से प्रेरणा लेकर समाज को नैतिकता, मर्यादा और मानवीय मूल्यों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज की प्रकृति पूजा की परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि पेड़-पौधों, जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति सम्मान इस समाज की विशिष्ट पहचान है। जनजातीय परंपराओं में पेड़-पौधों को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवनदाता के रूप में देखा जाता है। प्रकृति हमें ऑक्सीजन, जल, फल, फूल, भोजन और औषधियां प्रदान करती है। इसलिए प्रकृति की पूजा के साथ-साथ उसका संरक्षण और संवर्धन भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जंगल, पहाड़ और प्राकृतिक संसाधन अमूल्य धरोहर हैं। इनका उपयोग आवश्यकता के अनुरूप करते हुए इनके संरक्षण और क्षतिपूर्ति की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। एक वृक्ष को विकसित होने में कई दशक लगते हैं, इसलिए वनों की रक्षा और अधिकाधिक पौधरोपण भविष्य की पीढ़ियों के लिए जरूरी है। उन्होंने सभी नागरिकों, विशेषकर जनजातीय समाज के लोगों से अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने और जंगलों को हरा-भरा बनाए रखने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास की नई संभावनाएं खुल रही हैं। जनजातीय उद्यमियों को वित्तीय सुविधाओं और बाजार से जोड़ने के प्रयास समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर उपलब्ध कराकर वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में जनजातीय समाज की भागीदारी और अधिक मजबूत होगी।
बस्तर दशहरा के पारंपरिक अनुष्ठानों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कुटुम्ब जात्रा के माध्यम से ग्राम देवी-देवताओं की विदाई तथा 27 अक्टूबर को माँ दंतेश्वरी और देवी मावली की डोली विदाई जैसे आयोजनों को इस उत्सव की विशिष्ट धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का परिचायक बताया। उन्होंने माँ दंतेश्वरी से बस्तरवासियों के उज्ज्वल भविष्य, छत्तीसगढ़ की प्रगति और समग्र विकास की कामना की।
राज्यपाल रमेन डेका ने बस्तर दशहरा और विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और लोकतांत्रिक मूल्य हमारी सभ्यता एवं संस्कारों में गहराई से रचे-बसे हैं। उन्होंने कहा कि सामूहिकता जनजातीय समाज की जीवन पद्धति का अभिन्न हिस्सा है। गांवों में सामाजिक निर्णय मिल-बैठकर लिए जाते हैं। बड़ों की बात सुनना और प्रत्येक व्यक्ति की आवाज को सम्मान देना जनजातीय समाज की सहज परंपरा रही है।
राज्यपाल ने कहा कि बस्तर दशहरा अपनी भव्यता के साथ समाज को साथ लेकर चलने की सीख भी देता है। रथ के लिए लकड़ी लाने से लेकर उसके निर्माण और संचालन तक विभिन्न गांवों एवं समुदायों के लोग अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। राजशाही की समाप्ति के बाद भी यह परंपरा निरंतर जारी रही और जनतांत्रिक संवाद के सशक्त मंच के रूप में विकसित हुई।
उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार यह संदेश देते हैं कि संवाद ही समाधान का मार्ग है। जब शासन और समाज आमने-सामने बैठकर चर्चा करते हैं, तब कठिन से कठिन समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने मांझी, मुखिया, पुजारी, कारीगरों, रथ निर्माताओं, कलाकारों और स्थानीय प्रशासन सहित उन सभी लोगों के योगदान की सराहना की, जिनके सामूहिक परिश्रम और श्रद्धा से यह विश्वप्रसिद्ध परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का माँ दंतेश्वरी की पावन भूमि जगदलपुर में आयोजित बस्तर दशहरा उत्सव में स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी का बस्तर की धरती से गहरा जुड़ाव रहा है। इसी वर्ष फरवरी में उन्होंने बस्तर पंडुम का शुभारंभ किया था। इसके बाद बस्तर पंडुम के विजेताओं को सम्मानित करने के साथ राष्ट्रपति भवन आमंत्रित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया। आज बस्तर दशहरा में उनकी उपस्थिति से समस्त बस्तरवासियों का उत्साह बढ़ा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुरिया दरबार जनजातीय संस्कृति और लोकतांत्रिक परंपराओं की सुंदर अभिव्यक्ति है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा बस्तर की लोक संस्कृति का आईना है। इसकी रस्में जनजातीय समाज में निहित समतामूलक विचारों, सामूहिक सहभागिता और आपसी विश्वास को प्रदर्शित करती हैं।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष बस्तर दशहरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक ओर राष्ट्रपति की गरिमामय उपस्थिति से उत्सव की प्रतिष्ठा बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर बस्तर हिंसक माओवाद से मुक्त होकर नवनिर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन इस परिवर्तन को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बस्तर पंडुम के माध्यम से यहां की समृद्ध जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को देश-विदेश तक पहुंचाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने बस्तर की समृद्धि और विकास के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और पीएम-जनमन योजना के तहत अंदरूनी बसाहटों को सड़क मार्ग से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। जहां सड़कें बन चुकी हैं, वहां मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के माध्यम से परिवहन सुविधाओं के विस्तार के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि रायपुर से रावघाट तक नई रेल सेवा प्रारंभ की गई है तथा रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन पर कार्य जारी है। रायपुर से विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा बस्तर क्षेत्र से गुजरता है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे की व्यवस्था हेतु विशेष प्रावधान किए गए हैं। वन धन केंद्रों के माध्यम से वनोपज संग्राहकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल प्रारंभ किया गया है तथा गीदम में मेडिकल कॉलेज इसी शैक्षणिक सत्र से शुरू हो गया है। ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित करने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से बस्तर को देश का अग्रणी संभाग बनाने तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को पूरा करने के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने माँ दंतेश्वरी, माँ मावली और बस्तर अंचल के समस्त ग्राम देवी-देवताओं को नमन करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा अपनी अवधि, विशिष्ट परंपराओं, आस्था और व्यापक जनभागीदारी के कारण देश के अन्य उत्सवों से अलग पहचान रखता है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाला यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की जीवंत सांस्कृतिक पहचान है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने परंपरागत प्रतिनिधियों के सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मांझियों का मासिक मानदेय 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये तथा चालकी का मानदेय 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये किया गया है। यह निर्णय बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने वाले परंपरागत प्रतिनिधियों के योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री राम विचार नेताम, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाडे़, बस्तर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, कांकेर सांसद भोजराज नाग, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, विधायक कोण्डागांव लता उसेंडी, महापौर संजय पाण्डे सहित अनेक जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी बीएन मीणा, कलेक्टर आकाश छिकारा, एसपी शलभ सिन्हा सहित पारंपरिक मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरिन, नाइक-पाइक और बस्तर दशहरा समिति के सदस्य एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे।

मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों को लेकर छत्तीसगढ़ में उच्च स्तरीय बैठक संपन्न

23-Oct-2026
रायपुर, 23 अक्टूबर 2026 मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ राज्य के प्रमुख विषयों और उत्कृष्ट पहलों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने के लिए आज मंत्रालय महानदी भवन में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पिछले राष्ट्रीय सम्मेलन से जुड़े विषयों पर चर्चा के साथ-साथ एक्शन ट्रैकिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से कार्यों की प्रगति और गुणात्मक सुधार की समीक्षा की गई।
’शिक्षा, स्वास्थ्य और नवाचारों पर विशेष जोर’
बैठक में मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों के सचिवों को निर्देश दिए कि आगामी राष्ट्रीय सम्मेलन में राज्य के नवाचारों और गुणात्मक सुधारों को प्रमुखता से रखा जाए। उन्होंने शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य और पोषण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किए गए उत्कृष्ट कार्यों की जानकारी निर्धारित समय-सीमा के भीतर तैयार करने के निर्देश दिए ताकि राज्य के प्रयासों और सकारात्मक परिणामों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।
’आंगनबाड़ी केंद्रों में खिलौना बैंक की अनूठी पहल’
बैठक के दौरान राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों में संचालित खिलौना बैंक की पहल की विशेष रूप से सराहना की गई। इस अभिनव योजना के तहत लोग अपने बच्चों के पुराने खिलौने जमा करते हैं, जिनका उपयोग आंगनबाड़ी के बच्चों के मानसिक विकास और उनके सुपोषण के प्रति जनजागुरूकेंट बढ़ाने के लिए किया जाता है। अब तक इस पहल के अंतर्गत एक लाख से अधिक खिलौने जमा किए जा चुके हैं।
’विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों पर केंद्रित सत्र’
बैठक में यह जानकारी दी गई कि राष्ट्रीय सम्मेलन में विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए मुख्य रूप से चार सत्र आयोजित किए जाएंगे। विकसित भारत के लिए विशिष्ट प्राथमिकताएं और उद्देश्य, आर्थिक विकास एवं राज्य के वित्त को मजबूत बनाने में खनन क्षेत्र की भूमिका, सुशासन में तकनीक का प्रभावी उपयोग, सड़क व अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूरा करने के लिए नए विचार और बेहतर कार्यप्रणाली पर विचार-विमर्श किया गया। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य एवं पोषण, गैर- कृषि कार्यों में उर्वरकों के दुरुपयोग पर नियंत्रण, प्राकृतिक गैस के उपयोग को बढ़ावा देने और अंतरराज्यीय प्रतिस्पर्धा से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, खाद्य विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले, मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, कौशल विकास विभाग के सचिव बसवराजू एस., राजस्व विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, आदिम जाति विभाग के सचिव भूवनेश यादव, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, गृह विभाग की सचिव नेहा, तथा मुख्यमंत्री के विशेष सचिव एवं आयुक्त जनसंपर्क रजत बंसल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

 


विशेष लेख : राज्योत्सव-2026 : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की जनहित में मजबूत पहल

23-Oct-2026
रायपुर, 23 अक्टूबर 2026। ( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ में सुशासन को सरल, पारदर्शी और जनसुलभ बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा सेवा सेतु का संचालन किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य आम नागरिकों को शासकीय सेवाओं के लिए कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने की परेशानी से मुक्ति दिलाना और सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं को आमजन की पहुंच में लाना है। डिजिटल तकनीक के माध्यम से शासन और जनता के बीच की दूरी कम करने वाली यह व्यवस्था नागरिक-केंद्रित प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सेवा सेतु के माध्यम से प्रदेश में 38 विभागों की 939 सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन सेवाओं के संचालन के लिए 16 हजार 773 सेवा केंद्रों का नेटवर्क तैयार किया गया है। अब तक सेवा सेतु में ऑनलाइन प्राप्त 55 लाख 13 हजार 672 आवेदनों पर कार्यवाही जारी है। इस व्यवस्था से 21 हजार 582 अधिकारी-कर्मचारी ऑनबोर्ड होकर सेवाओं के संचालन में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। ये आंकड़े प्रदेश में डिजिटल माध्यम से नागरिक सेवाओं को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने के प्रयासों को दर्शाते हैं।
सेवा सेतु की प्रमुख विशेषता यह है कि नागरिकों को अनेक आवश्यक शासकीय सेवाओं के लिए एक ही मंच उपलब्ध कराया जा रहा है। आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन तथा गुमास्ता लाइसेंस सहित विभिन्न सेवाओं के लिए इस व्यवस्था के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। इससे नागरिकों को अलग-अलग कार्यालयों में जाने की आवश्यकता कम होती है और आवेदन प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनती जा रही है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और दूरस्थ वनांचलों में रहने वाले नागरिकों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है, जहां छोटी-छोटी शासकीय प्रक्रियाओं के लिए भी लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
सेवा सेतु का उद्देश्य केवल ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि शासकीय सेवाओं के वितरण को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेही बनाना भी है। डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से आवेदनों की स्थिति पर नजर रखने, संबंधित अधिकारियों तक आवेदन पहुंचाने और सेवाओं के क्रियान्वयन को व्यवस्थित करने में सहायता मिलती है। इससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में मजबूती मिलती है।
राज्य सरकार की यह पहल डिजिटल सुविधाओं को आम नागरिकों तक पहुंचाने के साथ-साथ तकनीक के उपयोग को जनहित से जोड़ती है। सेवा केंद्रों के माध्यम से उन नागरिकों को भी आवेदन करने में सहायता मिल सकती है, जिन्हें ऑनलाइन प्रक्रियाओं की जानकारी या मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। इस प्रकार डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवा केंद्रों का समन्वय नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का प्रयास है कि सरकारी सेवाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। सेवा सेतु इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए शासन की प्रक्रियाओं को सरल बनाने, सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और प्रशासन को अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने का माध्यम बन रहा है। सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, आवेदनों के समयबद्ध निराकरण और नागरिकों में डिजिटल सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने से इस पहल की उपयोगिता और अधिक मजबूत हो सकती है। इसका मूल उद्देश्य है कि सुशासन का लाभ प्रदेश के जन-जन तक पहुंचे और सरकारी सेवाओं को आम नागरिक के लिए सरल, सुलभ एवं पारदर्शी बनाना है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने माँ दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर देशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

23-Oct-2026
रायपुर 23 अक्टूबर 2026 । ( शोर संदेश ) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज अपने बस्तर प्रवास के दौरान जगदलपुर स्थित बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। राष्ट्रपति ने माँ दंतेश्वरी से देशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की। राष्ट्रपति मुर्मु ने मंदिर में माँ दंतेश्वरी के दर्शन किए और श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में राष्ट्रपति का परंपरागत ढंग से स्वागत किया गया।
इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माँ दंतेश्वरी के दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के प्रति अंचल के लोगों की अटूट श्रद्धा है। माँ दंतेश्वरी बस्तर की आस्था और लोकजीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी का माँ दंतेश्वरी के दर्शन-पूजन के लिए आगमन बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का अवसर है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर अपनी अनुपम जनजातीय संस्कृति, प्राचीन परंपराओं और विशिष्ट जीवन मूल्यों के लिए देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है। यहाँ की परंपराओं में प्रकृति, आस्था और समाज के बीच गहरा संबंध दिखाई देता है। राष्ट्रपति जी के प्रवास से बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और सम्मान मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि माँ दंतेश्वरी बस्तर अंचल की आराध्य देवी हैं। माँ दंतेश्वरी के प्रति बस्तरवासियों की गहरी आस्था है और उनकी उपासना क्षेत्र की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा में विशेष स्थान रखती है। माँ दंतेश्वरी से जुड़ी आस्था बस्तर की सदियों पुरानी परंपराओं और यहां के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन में गहराई से रची-बसी है।












 

राष्ट्रपति मुर्मु का छत्तीसगढ़ आगमन पर हुआ आत्मीय स्वागत

22-Oct-2026
रायपुर, 22 अक्टूबर 2026 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास पर रायपुर पहुंची। राज्यपाल रमेन डेका ने स्वामी विवेकानंद विमानतल पर पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी उनका स्वागत किया।  इस अवसर पर जनप्रतिनिधि सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।


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