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दो गांवों के किसानों की फसलों को मिला भरपूर पानी, दोहरी फसल के साथ लगा रहे सब्जी-बाड़ी

16-Oct-2024
जांजगीर-चांपा।  ( शोर संदेश )  महात्मा गांधी नरेगा से ग्राम पंचायतों में बहने वाले नालों की तस्वीर सुधरने लगी हैं। इन बरसाती नालों से किसानों को मिली सिंचाई सुविधा से उनके माथे पर आई सिलवटे गायब हुई है। मनरेगा योजना से नाला की साफ-सफाई और खुदाई होने के बाद खैजा ग्राम पंचायत के नाले में बारिश का पानी संग्रहित होने लगा है और दोहरी फसल के साथ ही सब्जी बाड़ी लगाकर किसान खुशहाल जिंदगी जीने लगे हैं।
जांजगीर-चांपा जिले के विकासखण्ड बलौदा के अंतर्गत आता है ग्राम पंचायत खैजा। इस ग्राम पंचायत के मोहल्ला सोहनपुर से होकर ग्राम पंचायत बोकरामुड़ा में लगभग 03 कि.मी. लंबाई तक नाला में पानी बहता है। ग्राम पंचायत खैजा एवं बोकरामुड़ा के किसान इस नाले पर ही अपनी खेती एवं बाड़ी करते आ रहे थे, लेकिन धीरे-धीरे इस नाले के भीतर में सील्ट (गाद) बहुत अधिक मात्रा में जमा होने के कारण पानी का बहाव बहुत ही कम हो गया था और साथ ही नाला में बड़ी-बडी घास उग आई थी। जिससे नाला के पानी का बहाव कम हो गया था और नाला अच्छे से दिख नहीं रहा था। जिसके कारण किसान के खेत में लगे धान का फसल की सिंचाई के लिये पानी समय पर खेत में नहीं पहुंचता था, इस समस्या से परेशान किसानों ने इसके लिए उचित समाधान ढूंढने का काम किया। तब उन्हें ग्राम रोजगार सहायक ने महात्मा गांधी नरेगा के माध्यम से जल संरक्षण के तहत नाला सफाई के कार्य से अवगत कराया। फिर क्या था एक पल की देरी किये बगैर ही सभी ने मिलकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत ग्राम पंचायत खैजा के नाला का सफाई का कार्य का प्रस्ताव तैयार कराकर उसे जनपद से जिला पंचायत प्रशासकीय स्वीकृति के लिये भेजा गया। 
कार्य की मांग को देखते हुए जिला पंचायत के माध्यम से 5.20 लाख रूपए की मंजूरी दी गई। मंजूरी मिलने के बाद महात्मा गांधी नरेगा के पंजीकृत जॉबकार्डधारी परिवारों ने मिलकर कार्य प्रारंभ किया। नाला के भीतर जमा हुआ सील्ट (गाद) को साफ किया गया, जिससे नाला के भीतर की जमीन एक परत में हो जाने से पानी का बहाव तीव्र गति से होने लगा। पानी का बहाव तीव्र गति से होने से ग्राम पंचायत खैजा एवं ग्राम पंचायत बोकरामुड़ा के लगभग 100 एकड़ खेत में धान के फसल के लिये नाला के पानी से सिंचाई होने लगी। नाला के पानी से किसानों के खेत में सिंचाई होने के कारण धान का फसल की पैदावार बहुत अच्छी हुई। वहीं इस बार किसान पानी की सुविधा होने के कारण धान की फसल इस बार और अधिक होने की उम्मीद लगाए हैं। नाला का पानी खेत में सिंचाई होने के अतिरिक्त पानी बहकर चौतरिया नाला से होकर हसदेव नदी में चला जाता है। नाला का सफाई कार्य होने से वाटर रिचार्ज एवं नमी अधिक समय तक बनी रहेगी। इसके अलावा मवेशियों एवं अन्य जीव जंतुओं को नाला में पर्याप्त मात्रा में पानी मिलने लगा है। किसानों के खेत में नाला का पानी से सिंचाई होने से धान का फसल हरा भरा है एवं धान का पैदावार में वृद्धि होने से उनके चेहरे की रौनक फिर से लौट आई है और उनकी समृद्धि के रास्ते खुल गए हैं। मनरेगा न केवल नाले की तस्वीर बदलेगी बल्कि दो गांवों के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराया है। योजना के तहत मनरेगा के मजदूरों को काम  भी गांव में ही मिल गया।

मिर्च की खेती से किसान सायो को मिला रोजगार का बेहतर अवसर

15-Oct-2024
जशपुर। ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कृषि के साथ अन्य फसलों को लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। उद्यानिकी विभाग के द्वारा जिले के किसानों को साग सब्जी की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ताकि उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सके और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि हो सके।जिला प्रशासन के अंतर्गत उद्यान विभाग के द्वारा किसानों को आधुनिक तकनीक से खेती करने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिले के किसानों को उद्यान विभाग द्वारा तकनीकी प्रशिक्षण देकर उन्नत फसल उत्पादन करने के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है। कलेक्टर डॉ रवि मित्तल के मार्गदर्शन और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के अभिषेक कुमार के दिशा-निर्देश में किसान सब्जी की खेती की ओर आगे बढ़ रहे है।
इसी कड़ी में मनोरा विकासखण्ड के ग्राम केराकोना निवासी किसान सायो ने उद्यानिकी विभाग से तकनिकी मार्गदर्शन लेकर मिर्च के पौध रोपण किया गया है। किसान सायो ने बताया कि उद्यानिकी विभाग के द्वारा उन्हें मिर्च के महत्व एवं लाभ के विषय के बारे में तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया एवं स्वयं के साधन से अपने बाड़ी में मिर्च का पौध रोपण किया। स्थानीय बाजार के साथ आस-पास के क्षेत्र में मिर्च का अच्छा मांग होने सीजन अनुसार उन्हें एक लाख रूपए का आमदनी प्राप्त हो गया है। वे खेती करके संतुष्ट हैं। किसान सायो के पास कुल 3.606 हे.भूमि है। जिनका सिंचित रकबा 0.3000हेक्टेयर है। वर्ष 2023-24 स्वयं के साधन से रकबा 0.3000 हे. में मिर्च का पौधा रोपण किया गया था।

सैकड़ों किसान हाथियों के उत्पात से परेशान, फसल बर्बाद

15-Oct-2024
रायगढ़।  ( शोर संदेश )  जिले में हाथियों का दल लगातार फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। हाथियों ने 3 दिन में करीब 34 गांव के 131 किसानों की फसलों को रौंद दिया है। नुकसान का आकलन विभाग की ओर से किया जा रहा है। जिले के 2 वन मंडल धरमजयगढ़ और रायगढ़ में 158 हाथियों का दल घूम रहा है।
हाथी रात और कभी-कभी दिन में जंगल से निकलकर खेतों तक पहुंच जा रहे हैं। वहीं इलाके के ग्रामीण दहशत में हैं। 12 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक हाथियों ने 34 गांव में फसलों को रौंदा है।
इसमें धरमजयगढ़ वन मंडल के सेमीपाली, मेडरमार, सिरकी, रैरूमा, सोनपुर, तेजपुर, बेहरामुड़ा, लामीखार, कुरोपहरी, ढोढ़गांव, खड़गांव, लाहड़ापानी, कटईपाली सी, ससकोबा, जबगा, चरखापारा, करवारजोर, कोयलार, खम्हार गांव शामिल हैं।
इसके अलावा रायगढ़ वन मंडल के चारमार, भेंगारी, छर्राटांगर, अमलीडीह, सामारूमा, सराईपाली, बरौद, बटुराकछार, चीमटापानी, दनौट, फूलीकुंडा, कया, कमतरा, खुरूजखोल, कांटाझरिया में भी हाथियों ने फसलों को रौंदा है।

 


समर्थन मूल्य पर धान-मक्का खरीदी के लिए किसानों का पंजीयन 31 तक

14-Oct-2024
रायपुर। ( शोर संदेश ) खरीफ विपणन 2024-25 में समर्थन मूल्य पर धान और मक्का की खरीदी के लिए किसानों का पंजीयन एक जुलाई से चल रहा है, जो 31 अक्टूबर तक चलेगा। पंजीयन के लिए सभी किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, सहकारी समिति प्रबंधक से संपर्क कर नया पंजीयन करा सकते हैं।
खाद्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार खरीफ विपणन 2024-25 में नया पंजीयन, फसल, रकबा संशोधन एवं कैरी फारवर्ड हेतु 1 जुलाई 2024 से किसानों का पंजीयन प्रारंभ किया गया है। सभी किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, समिति प्रबंधक से संपर्क कर नया पंजीयन, फसल, रकबा संशोधन एवं कैरी फारवर्ड शीघ्र पूर्ण करा सकते हैं एवं वारिसान पंजीयन हेतु तहसील कार्यालय में आवेदन जमा कर सकते हैं, ताकि धान विक्रय करने वाले किसान को कृषक उन्नति योजना का लाभ प्राप्त हो सके।
कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रदेश के किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं से लाभान्वित करने की दृष्टि से कृषक पंजीयन की प्रकिया के सरलीकरण हेतु एकीकृत किसान पोर्टल विकसित किया गया है। एकीकृत किसान पोर्टल के नवीन पंजीयन तथा पंजीकृत फसल और रकबे में संशोधन की कार्यवाही 31 अक्टूबर तक सहकारी समिति के माध्यम से पंजीयन की जाएगी।
एकीकृत किसान पोर्टल में धान एवं मक्का उपार्जन योजना को भी सम्मिलित किया गया है। धान एवं मक्का कृषक को समर्थन मूल्य पर विक्रय करने हेतु एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। विगत खरीफ वर्ष 2023-24 में पंजीकृत किसानों को आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए पंजीकृत माना जाए एवं इसके लिए विगत खरीफ वर्ष 2023-24 में पंजीकृत किसानों की दर्ज भूमि एवं धान के रकबे एवं खसरे को राजस्व विभाग के माध्यम से अद्यतन करा लिया जाए। यह कार्य एकीकृत किसान पंजीयन पोर्टल के माध्यम से की जाएगी।
खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में आधार आधारित प्रमाणीकरण प्रणाली के लिए किसान द्वारा धान विक्रय के समय धान खरीदी केन्द्र में स्वंय उपस्थित होकर या उनके द्वारा नामांकित नामिनी के द्वारा उपस्थित होकर बायोमेट्रिक आधारित खरीद प्रणाली के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान का विक्रय किया जा सकता है। इसके लिए किसान पंजीयन हेतु एकीकृत कृषक पंजीयन पोर्टल पर किसान का पंजीयन निर्धारित अवधि के दौरान किसान का एवं उसके एक नामिनी का आधार नंबर लिया जाएगा।
नामिनी के रूप में किसान के परिवार के नामित सदस्य में माता-पिता, पति-पत्नी, पुत्र-पुत्री, दामाद-पुत्रवधू, सगा भाई-बहन एवं अन्य करीबी रिश्तेदार को मान्य किया जाएगा। किसान यदि गत वर्ष पंजीकृत नॉमिनी में परिवर्तन करना चाहता है, तो समिति स्तर पर संशोधन की कार्यवाही की जाएगी। खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में नवीन पंजीयन कराने वाले किसान से नॉमिनी की जानकारी एकत्र किया जाएगा।

राजस्व मंत्री बने सर्वेयर, जियो-रिफ्रेसिंग के जरिए किया खसरा का सत्यापन

25-Sep-2024
रायपुर।   ( शोर संदेश )  राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा बुधवार को बलौदाबाजार भाटापारा जिले के ग्राम सकरी में डिजिटल क्रॉप सर्वे का अवलोकन किया। उन्होंने पगडंडियों से चलकर बीच खेत में पहुंचकर मोबाईल के माध्यम से जियो-रिफ्रेंसिंग के जरिए एंट्री कर खसरा का सत्यापन किए। इसके लिए मंत्री वर्मा स्वयं सर्वेयर बने। उन्होंने ग्राम सकरी के किसान नेतराम साहू के खेत खसरा नंबर 1150,1151 एवं 1152 का सत्यापन कार्य पूर्ण किए. वर्मा ने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित भारत के रूप में विकसित करने का लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखा है जिसके तहत सभी सरकारी कामकाजों में डिजिटल टेक्नोलॉजी  का उपयोग सरकार कर रही है डिजिटल क्रॉप सर्वे भी उसका एक उदाहरण है। इससे फसल की सटीक जानकारी मुहैया होती है।
गौरतलब है की डिजिटल क्रॉप सर्वे में निजी सर्वेयर की भूमिका जियो-रिफ्रेंस के रूप में होती,जो डिजिटल रूप से फसल का सर्वे सभी खेतों में जाकर करेंगे। निजी सर्वेयर को प्रतिदिन 30 से 50 खसरों का टास्क दिए गए है। जिसे सर्वेयर खेत में जाकर लॉगिन करेंगे। उनसे तहसीलदार पूछेंगे क्या आप उपलब्ध हैं और हां में जवाब आएगा। वैसे ही एप में प्लॉट की स्थितिए खसरा नंबर ए एरिया ऑनर का नाम अपने आप फीड हो जायेगा। जो क्रॉप लगी है उसका तीन फोटो लॉन्गिट्यूट लैटिट्यूट के साथ तीन फोटो अपलोड करना है। इस प्रकार एक नंबर का कार्य पूर्ण होगा। जिसमें पटवारी की भूमिका पर्यवेक्षक और राजस्व निरीक्षक की भूमिका सत्यापनकर्ता तथा तहसीलदार व नायब तहसीलदार की भूमिका जांचकर्ता अधिकारी के रूप में की गई है। सर्वेक्षकों द्वारा संपादित सभी खसरे आरआई के पास नहीं आयेगा। सर्वेक्षकों द्वारा सर्वे किये गए खसरे पटवारी के पास आएंगे। पटवारी इसे अनुमोदन करेगा या रिसेंड करेगा। पटवारी द्वारा दो बार रिजेक्ट होने की स्थिति में आरआई के आईडी में आयेगा। ऐसे खसरों की संख्या बहुत कम होगी, जहां मौके में जाकर आवश्यकतानुसार सत्यापन किया जाएगा।
इसके साथ ही फिल्ड में क्या बोया गया है फसल की जिंस का नाम, मिश्रित फसल की स्थिति में सभी फसलों का अनुमानित रकबा, सिंचित-असिंचित फसल, एकवर्षीय या बहुवर्षीय, सीजनल फसल की जानकारी आदि भरी जायेगी। सर्वेयर द्वारा साफ्टवेयर में बोये गये जिंस व एकल व मिश्रित फसल की स्थिति में बोये गये फसल या पड़त रकबा की अनुमानित प्रविष्टि करेगा। यदि साफ्टवेयर में जियो-रिफ्रेंस्ड रकबा के अनुसार सर्वे किए गए रकबा का योग एक समान नहीं आयेगा। तब तक डेटा सेव नहीं होगा। सर्वेयर किसी भी खसरा नंबर की भूमि के मेड़ में खड़े होकर फोटो कैप्चर नहीं करेगा। यदि ऐसा वे करते हैं तो आसपास के खसरा नंबर के लॉन्गिट्यूट लैटिट्यूट मिस्डमैच होगा। इसलिए सर्वेयर प्रत्येक खसरा नंबर की भूमि के अंदर कम से कम मेड़ से 10 मीटर की दूरी पर जाकर प्रयोग संपादित करेगा। यदि पिक्चर में गेहूं फसल दिख रहा पर सर्वेक्षक ने धान प्रविष्ट किया हो अथवा प्लाट खाली है और फोटो गन्ना का अपलोड किया है, तो वही डेटा को पटवारी रिसेंड करेगा। सर्वेक्षक सुधार कर फिर से पटवारी को भेजेगा। यदि पटवारी पुनः रिजेक्ट करता है तब आरआई के आईडी में आयेगा। पटवारी द्वारा परंपरागत ढंग से की जाने वाली गिरदावरी से यह फिलहाल अलग है। धान खरीदी पटवारी द्वारा की गई गिरदावरी के आधार पर की जाएगी। डिजिटल क्राप सर्वे उन्हीं ग्रामों में की जायेगी, जहां जियोरिफ्रेंसिंग का सेकेंड लेवल कार्य का संपादन हो गया है। सभी ग्रामों के खसरा नंबरों में नहीं की जाएगी। यह शासन की बहुआयामी योजना है। सकारात्मक ढंग से इस कार्य का संपादन करना है। साफ्टवेयर बहुत ही आसान बनाया गया है। किसी भी वर्जन के एंड्रॉयड मोबाईल में प्रयोग किया जा सकता है, जिसमें ये सपोर्ट करें। इस अवसर पर उपाध्यक्ष राज्य स्काउट एवं गाइड विजय केसरवानी,एसडीएम बलौदाबाजार अमित गुप्ता,तहसीलदार राजू पटेल उपस्थित रहे।

जैविक खेती से करें मिट्टी का श्रृंगार,फसल चक्रण से उत्पादन होगा भरमार

23-Sep-2024
रायपुर।   ( शोर संदेश )  जैविक खेती को बढ़ावा देने वाले धमतरी जिले के ग्राम गाड़ाडीह के किसान रमन लाल साहू का सम्मान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विगत दिनों किया था। साहू जैविक खेती कर मिट्टी की उर्वरकता बढ़ाने में महती भूमिका निभा रहे है,वही फसल चक्रण करके जल संरक्षण का काम भी कर रहे है।
आज के आधुनिक दौर में  खेती किसानी के काम को उतना महत्व नहीं दिया जाता है, जितना की सरकारी या किसी अन्य नौकरी को दिया जाता है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के साथ-साथ समर्थन मूल्य पर धान खरीदी ने लोगों को खेती किसानी की ओर मुडऩे के लिए प्रोत्साहित किया है। प्रगतिशील किसान श्री रमनलाल साहू ने परम्परागत खेती को पीछे छोड़ आधुनिक खेती को अपनाया है। जैविक खेती को बढ़ावा देते हुए मृदा, जल एवं पर्यवरण संरक्षण की दिशा में भी सराहनीय काम किया है। श्री साहू बताते हैं कि विगत 8 सालों से वह 3 एकड़ से अधिक जमीन पर धान की जैविक खेती कर रहे हैं। जल संरक्षण की दिशा में रबी फसल में दलहन-तिलहन की  खेती कर रहे हैं। इससे जमीन की उर्वरकता बढऩे के साथ ही फसल का उत्पादन भी बढ़ा है।
साहू बताते है कि किसान होने के साथ-साथ वह पशु मित्र भी है, उन्होंने गली-मोहल्लों में आवारा घूमने वाले गौवंश  के लिए अपने खेत के समीप लगभग 25 डिस्मिल क्षेत्र में गौठान तैयार कर उनका संरक्षण कर रहे है। इन गौवंशो से प्राप्त होने वाले गोबर का उपयोग जैविक खेती करने में कर रहे हैं। वहीं दूध बेचकर हर माह 9 हजार रूपये की शुद्ध आमदनी भी प्राप्त कर रहे हैं। श्री साहू ने यह भी बताया कि उन्होंने खेत में छोटा सा तालाब बनाया है, जिससे गौवंश के लिए पानी की व्यवस्था की है, वहीं क्रेडा की ओर से सोलर पैनल भी लगवाया है। इसके साथ ही गोबर गैस संयंत्र लगाकर गौवंश के लिए चारा की व्यवस्था करते  हैं।
 

 


जैविक खेती से करें मिट्टी का श्रृंगार,फसल चक्रण से उत्पादन होगा भरमार

22-Sep-2024
रायपुर।  ( शोर संदेश )   जैविक खेती को बढ़ावा देने वाले धमतरी जिले के ग्राम गाड़ाडीह के किसान रमन लाल साहू का सम्मान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विगत दिनों किया था। साहू जैविक खेती कर मिट्टी की उर्वरकता बढ़ाने में महती भूमिका निभा रहे है,वही फसल चक्रण करके जल संरक्षण का काम भी कर रहे है।
आज के आधुनिक दौर में  खेती किसानी के काम को उतना महत्व नहीं दिया जाता है, जितना की सरकारी या किसी अन्य नौकरी को दिया जाता है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के साथ-साथ समर्थन मूल्य पर धान खरीदी ने लोगों को खेती किसानी की ओर मुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया है। प्रगतिशील किसान रमनलाल साहू ने परम्परागत खेती को पीछे छोड़ आधुनिक खेती को अपनाया है। जैविक खेती को बढ़ावा देते हुए मृदा, जल एवं पर्यवरण संरक्षण की दिशा में भी सराहनीय काम किया है। साहू बताते हैं कि विगत 8 सालों से वह 3 एकड़ से अधिक जमीन पर धान की जैविक खेती कर रहे हैं। जल संरक्षण की दिशा में रबी फसल में दलहन-तिलहन की  खेती कर रहे हैं। इससे जमीन की उर्वरकता बढ़ने के साथ ही फसल का उत्पादन भी बढ़ा है।
साहू बताते है कि किसान होने के साथ-साथ वह पशु मित्र भी है, उन्होंने गली-मोहल्लों में आवारा घूमने वाले गौवंश  के लिए अपने खेत के समीप लगभग 25 डिस्मिल क्षेत्र में गौठान तैयार कर उनका संरक्षण कर रहे है। इन गौवंशो से प्राप्त होने वाले गोबर का उपयोग जैविक खेती करने में कर रहे हैं। वहीं दूध बेचकर हर माह 9 हजार रूपये की शुद्ध आमदनी भी प्राप्त कर रहे हैं। साहू ने यह भी बताया कि उन्होंने खेत में छोटा सा तालाब बनाया है, जिससे गौवंश के लिए पानी की व्यवस्था की है, वहीं क्रेडा की ओर से सोलर पैनल भी लगवाया है। इसके साथ ही गोबर गैस संयंत्र लगाकर गौवंश के लिए चारा की व्यवस्था करते  हैं।
रमनलाल साहू रासायनिक खेती के दुष्परिणामों के बारे में अन्य किसानों को अवगत कराते हुए जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। साथ ही अपने गौशाला से उत्पादित गोबर, गौ मूत्र को अपने खेतों में उपयोग करते हुए जहरमुक्त अन्न की पैदावार कर उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की व्यवस्था कर रहे हैं।

गुलाब की खेती से महक रहा है रजनी का जीवन

20-Sep-2024
रायपुर।  ( शोर संदेश )  आज के समय में पारंपरिक खेती की तुलना में बागवानी या फूलों की खेती किसानों के लिए अधिक मुनाफा देने वाली खेती साबित हो रही है। मुख्य रूप से गुलाब की खेती की तरफ किसानों का रुझान बढ़ रहा है। गुलाब की मांग पूरे वर्ष बनी रहती है। साथ ही त्योहारों, शादी समारोह व विभिन्न आयोजनों के समय इसकी मांग काफी बढ़ जाती है। धान की पैदावार के लिए पहचान रखने वाले छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा विकासखण्ड की कुमगरी की रहने वाली रजनी कंवर ने गुलाब की खेती करके एक मिसाल कायम की है और दूसरे किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनी है। रजनी ने विभागीय सहायता से डच रोज़ की खेती शुरू की और आज 30 हजार से अधिक की प्रतिमाह कमाई कर रही हैं। पिछले 5 माह में ही उसे 3 लाख से अधिक रूपए का शुद्ध मुनाफा हुआ है।
रजनी बताती हैं कि वर्तमान समय में किसान को बेमौसम बारिश, तूफान, अतिवृष्टि, सूखा जैसी कई प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है साथ ही विभिन्न प्रकार के कीटों व बीमारियों से अपनी फसलों की रक्षा करनी पड़ती है। इतनी परेशनियों के बाद भी किसान को अपेक्षाकृत अधिक लाभ नहीं होता। उनके द्वारा पूर्व में भी अपनी जमीन पर धान की फसल उगाया जाता था, जिससे उन्हें अधिक आमदनी नही होती थी। रजनी व उनके पति जय सिंह ने परम्परागत कृषि से अलग आधुनिक खेती कर अपने आय में वृद्धि करने की सोची। इसी दौरान लाभार्थी को नेशनल हार्टिकल्चर बोर्ड द्वारा डच रोज़ की खेती की जानकारी मिली। डच रोज़ कल्टीवेशन से लंबे समय तके होने वाले लाभ की सोच से उन्होंने इसका खेती करने का निश्चय किया और अपने जमीन पर पाली हॉउस तैयार कर गुलाब की खेती प्रारंभ की। उद्यानिकी विभाग द्वारा उनके हौसले को बढ़ाते हुए समय पर दस्तावेजों की पूर्ति कराई गई एवं नाबार्ड द्वारा 40 लाख का वित्तीय सहयोग प्रदान किया गया। जिसमें उन्हें 50 प्रतिशत अनुदान भी दिया जा रहा है। साथ ही पॉली हाऊस में ड्रिप, बोर, स्टोरेज रूम जैसी सुविधाएं भी प्रदान की गई है। समय समय पर विभाग द्वारा रजनी को आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाता है। रजनी द्वारा फरवरी 2024 में अपने 2600 वर्गमीटर लगभग 65 डिसमिल जमीन पर पॉली हाऊस का निर्माण कराकर डच रोज़ की खेती प्रारंभ की गई। जहां उन्होंने इसकी 22000 पौधे का प्लांटेशन किया। पॉली हाऊस के अंदर डच रोज़ की खेती करने से पौधों को सीधे सूर्य की रौशनी, बारिश, आंधी से सुरक्षा मिलती है। सूक्ष्म सिंचाई और टपक विधि से कम पानी में गुलाब की खेती में सफलता प्राप्त हो रही है। रजनी द्वारा किए गए गुलाब की खेती को देखने के लिए दूर-दूर से लोग भी आते हैं।
उनके फॉर्म में प्रतिदिन 40 से 50 किलो गुलाब कल्टीवेशन किए जाते है। मजदूरों द्वारा इन गुलाब को तोड़कर डिमांड अनुसार पैकेजिंग व सप्लाई किया जाता है। रजनी ने बताया कि इन पौधों की ठीक ढंग से देखभाल करने से इनसे 2-3 साल तक उत्पादन लिया जा सकता है। जिससे लंबे समय तक पौधों से लाभ मिलेगा।
गुलाब के उत्पादन के शुरुआत से ही बाजार में इसकी मांग आने से रजनी का उत्साह बढ़ा हुआ है। अपनी खुशी जाहिर करते हुए वे कहती है कि अपने पति जयसिंह के सहयोग व विभागीय मदद से उन्होंने डच रोज की खेती करने का बड़ा फैसला लिया है। जिसका अब उन्हें लाभ मिल रहा है। प्रतिमाह उसे मजदूरी भुगतान, दवाई, खाद सभी खर्चों के बाद भी औसतन 30-40 हजार तक का लाभ हो रहा है। वर्तमान में उनके द्वारा कोरबा, बिलासपुर, अम्बिकापुर में फूलो का विक्रय किया जा रहा है। साथ ही उनके द्वारा इवेंट ऑर्गेनाइजर, डेकोरेशन शॉप्स वालों से भी संपर्क किया जा रहा है। जिससे आगे चलकर बड़े पैमानों पर गुलाब का विक्रय किया जा सके। आने वाले त्यौहारों व शादी सीजन में बाजारों में फूलो की मांग बढ़ेगी जिससे उनके आय में और अधिक वृद्धि होगी।

बलराम जयंती के उपलक्ष्य में 9 सितंबर को मनाया जाएगा किसान दिवस

08-Sep-2024
रायपुर।   ( शोर संदेश )   कृषि के देवता माने जाने वाले भगवान बलराम की जंयती के उपलक्ष्य में 9 सितम्बर को प्रदेश में किसान दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम करेंगे। किसान दिवस का आयोजन इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर, कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग तथा भारतीय किसान संघ छत्तीसगढ़ प्रान्त के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम कृषि महाविद्यालय, रायपुर के कृषि मण्डपम में दोपहर 12 बजे प्रारंभ होगी।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी होंगे। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक अनुज शर्मा, मोतीलाल साहू, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल एवं भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ प्रान्त के अध्यक्ष सुरेश चन्द्रवंशी भी उपस्थित रहेंगे।
किसान दिवस के अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में ‘‘प्राकृतिक एवं गौ आधारित कृषि’’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी, प्राकृतिक एवं गौ आधारित कृषि पर विषय विशेषज्ञों द्वारा किसानों को ‘‘प्राकृतिक एवं गौ आधारित कृषि’’ की संकल्पना, इसकी प्रविधि एवं इससे प्राप्त लाभों से अवगत कराया जाएगा। इस राज्य स्तरीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से 2 हजार से अधिक किसान शामिल होंगे। इसी दिन छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में संचालित 27 कृषि विज्ञान केन्द्रों में भी बलराम जयंती-किसान दिवस समारोह का आयोजन किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि भारतीय संस्कृति में आदिकाल से ही कृषि में गौ उत्पादों जैसे गोबर और गौमूत्र का प्रयोग होता रहा है। गौ आधारित खेती रसायन एवं कीटनाशक मुक्त कृषि की वह पद्धति है जिसमें परम्परागत तरीके से प्रकृति के नियमों का अनुसरण करते हुए देशी पद्धति खेती के सिद्धांत को अपनाकर खेती की जाती है। प्राकृतिक खेती से मिट्टी में पोषक तत्वों की वृद्धि के साथ-साथ जैविक गतिविधियों का विस्तार होता है, जिससे मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और खेती की लागत कम हो जाती है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि पंजीयन शिविर का होगा आयोजन

29-Aug-2024
कोण्डागांव। ( शोर संदेश )  उप संचालक कृषि विभाग द्वारा दिये गये जानकारी अनुसार विधायक एवं केबिनेट मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार कोण्डागांव विधानसभा क्षेत्र के नारायणपुर तहसील मर्दापाल अंतर्गत 29 अगस्त 2024 को ग्राम पंचायत हसलनार, 31 अगस्त 2024 ग्राम पंचायत मर्दापाल, 03 सितम्बर 2024 ग्राम पंचायत राजबेड़ा एवं 04 सितम्बर 2024 ग्राम पंचायत मयुरडोंगर में शिवर का आयोजन किया जायेगा। उक्त शिविर स्थलों में पंजीयन से वंचित कृषकों का प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजनान्तर्गत पंजीयन कराया जायेगा। सभी शिविरों का समय साड़े 10 बजे होगा।
 


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