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आयुष्मान भारत योजना : निजी अस्पतालों में रोज़ाना 1,600+ मरीजों को मिल रही निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएँ

12-Sep-2025
रायपुर  ( शोर संदेश ) आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पंजीकृत निजी अस्पतालों द्वारा आयुष्मान कार्डधारक मरीजों का उपचार लगातार किया जा रहा है। वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 1,600–1,700 दावे प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिनकी राशि प्रतिदिन 4 करोड़ रुपये से अधिक है।
वित्तीय वर्ष 2025–26 में राज्य सरकार द्वारा अब तक रु. 375 करोड़ जारी किए जा चुके हैं। इस राशि से जुलाई 2025 तक के लगभग रु. 280 करोड़ के दावे भुगतान कर दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार से रु. 130 करोड़ इस सप्ताह प्राप्त होने की संभावना है, जिससे निरंतर अस्पतालों के दावे भी भुगतान किये जाएंगे।
स्वास्थ्य विभाग लगातार इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के साथ परामर्श कर रहा है और सभी पंजीकृत अस्पताल लाभार्थियों को सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। कोई भी गरीब अथवा कमजोर वर्ग का परिवार आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत नि:शुल्क उपचार से वंचित न हो, यह सुनिश्चित किया गया है। सभी पैनल में शामिल अस्पतालों को निर्देशित किया गया है कि मान्य आयुष्मान कार्डधारकों को कैशलेस उपचार उपलब्ध कराएं और किसी भी प्रकार का शुल्क न लें।
स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक योजना के नियमों का उल्लंघन करने वाले 118 अस्पतालों के विरुद्ध कार्रवाई की जा चुकी है, जिसमें 24 अस्पतालों का डी-एम्पैनलमेंट तथा 11 अस्पतालों का निलंबन शामिल है। भविष्य में भी नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
राज्य सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध है कि इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे और उन्हें गुणवत्तापूर्ण उपचार बिना किसी आर्थिक बोझ के प्राप्त हो।
योजना के बेहतर क्रियान्वयन हेतु राज्य सरकार शीघ्र ही एक स्टेकहोल्डर्स कार्यशाला आयोजित करने जा रही है, जिसमें सभी संबंधित पक्षों के साथ योजनागत मुद्दों और उनके समाधान पर चर्चा की जाएगी।
डा. सुरेंद्र शुक्ला, चेयरमैन, हॉस्पिटल बोर्ड ऑफ इंडिया छत्तीसगढ़ ने बताया कि विभागीय मंत्री की पहल पर 375 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों ने आज यह भी जानकारी दी कि इसके अतिरिक्त 130 करोड़ रुपये केंद्र से आबंटित किए जा चुके हैं, जो इस सप्ताह प्राप्त हो जाएंगे। इस प्रकार लगभग 505 करोड़ रुपये निजी अस्पतालों के लंबित बकाया भुगतान हेतु उपलब्ध हो जाएंगे।
राज्य एवं जिला शाखाओं के प्रतिनिधियों ने मरीजों के हित में लिए गए इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब शासन द्वारा बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जा चुका है, तो ऐसी स्थिति में मरीजों का निःशुल्क इलाज किसी भी परिस्थिति में बंद नहीं किया जाएगा।
आयुष्मान भारत योजना का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुँचे और कोई भी नागरिक आर्थिक तंगी के कारण इलाज से वंचित न रहे, इसके लिए राज्य सरकार दृढ़ संकल्पित है। पारदर्शी भुगतान व्यवस्था, सख्त निगरानी और निरंतर सुधार के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि प्रदेश में निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सभी नागरिकों को उपलब्ध हो।
 

बलौदाबाजार जिला अस्पताल की लैब का होगा राष्ट्रीय गुणवत्ता आकलन

11-Sep-2025
रायपुर  ( शोर संदेश ) जिला अस्पताल बलौदाबाजार में संचालित इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब(आईपीएचएल) के स्टैंडर्ड का आकलन एवं परीक्षण करने 11 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन स्टैंडर्ड की विशेषज्ञ टीम आएगी। टीम के आकलन एवं परीक्षण में तय मानकों पर खरा उतरने पर  एनक्यूएएस सर्टिफिकेट प्राप्त होगा जो जिला व राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। सर्टिफिकेट प्राप्त होने पर जिला अस्पताल में संचालित आईपीएचएल देश का पहला एनक्यूएएस सर्टिफाइड सरकारी लैब होगा। कलेक्टर दीपक सोनी ने  जिला अस्पताल पहुंचकर आईपीएचएल का निरीक्षण एवं व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने पब्लिक सुविधाओं के साथ ही हाइजिन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश अधिकारियों को दिये।
बताया गया कि जिला अस्पताल में संचालित इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब का एनक्यूएएस  सर्टिफिकेशन के लिए पहली बार आवेदन किया है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा मानक पर खरा उतरने सभी सुविधाएं व व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में इस लैब में लगभग 103 प्रकार की जांच सुविधा उपलब्ध है। इसमें हिमेटोलॉज़ी अंतर्गत 16 टेस्ट, क्लिनिकल पैथोलॉजी अंतर्गत 14 टेस्ट, क्लिनिकल बायोकेमिस्ट्री अंतर्गत 30 टेस्ट,सिरोलॉजी अंतर्गत 8 टेस्ट,इम्युनोलॉजी अंतर्गत 28 टेस्ट एवं माइक्रोबायोलॉजी अंतर्गत 7 टेस्ट शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि  राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक, भारत सरकार स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा स्थापित एक कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बढ़ाना और सुनिश्चित करना है। ये मानक विशिष्ट आवश्यकताओं और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं पर आधारित हैं।प्रमाण-पत्र प्रदान करने के पूर्व विशेषज्ञों की टीम द्वारा अस्पताल की सेवाओं और संतुष्टि स्तर का कई मानकों पर परीक्षण किया जाता है। इन कड़े मानकों पर खरा उतरने वाले अस्पतालों को ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा गुणवत्ता प्रमाण-पत्र जारी किये जाते हैं। 
















 

अबूझमाड़ से निकलकर मासूम संजय को मिली नई जिंदगी

10-Sep-2025
रायपुर।  ( शोर संदेश )अबूझमाड़ के परपा गांव का नन्हा बालक संजय लंबे समय से कुष्ठ रोग एवं अन्य जटिल बीमारियों से जूझ रहा था। लेकिन पहुंच विहीन क्षेत्र में रहने के कारण संजय के माता पिता ने कभी उसे अस्पताल ले जाने के बारे में नहीं सोचा और जंगल में ही उपचार करते रहे। बीमारी से कष्ट और दर्द झेल रहे इस 5 साल के मासूम के बारे में ग्रामीणों ने  जिला प्रशासन को इसकी जानकारी दी। कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई के निर्देश पर स्वास्थ्य अमले ने बच्चे को जंगल से सुरक्षित निकालने और उपचार की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी उठाई। 
संजय को पहले नारायणपुर जिला अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ प्रारंभिक उपचार के बाद डॉक्टरों की सलाह पर उसे बेहतर इलाज के लिए रायपुर के डीकेएस अस्पताल रेफर किया गया। 
रायपुर डीकेएस में मासूम संजय को भर्ती कर उसका मेडिकल टेस्ट किया गया और अब उसका इलाज शुरू कर दिया गया है। ग्रामीणों ने इस संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन की सराहना की है। नारायणपुर कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगई ने कहा कि अबूझमाड़ के हर बच्चे और ग्रामीण तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पहुँचाना मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री की प्राथमिकता है। संजय के इलाज में किसी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिला प्रशासन संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से काम कर रहा है।

 

तुलसी के बीज: वजन घटाने से डायबिटीज कंट्रोल तक के अद्भुत फायदे

08-Sep-2025
वजन घटाने में असरदार- तुलसी के बीज मोटापे से ग्रसित लोगों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करने चाहिए। इन्हें खाने से काफी देर तक पेट भरा रहता है और आपको खाने की क्रेविंग कम होती है। भूख को कंट्रोल करने से वजन भी कम होता है। साथ ही फाइबर से भरपूर होने की वजह से तुलसी के बीज फैट को बर्न करने में मदद करते हैं।
गैस की समस्या में राहत- तुलसी के बीज तासीर में ठंडे होते हैं। इसलिए गर्मियों में इसे खाने से पेट ठंडा रहता है। इससे गैस एसिडिटी और जलन की समस्या कम होती है। 1 चम्मच सब्जा सीड्स को आप दूध में डालकर पी लें। गैस एसिडिटी से छुटकारा मिल जाएगा।
डायबिटीज में फायदेमंद- दूध के साथ सब्जा सीड्स यानि तुलसी के बीज खाने से शुगर को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। डायबिटीज के रोगियों के लिए तुलसी के बीज अच्छे माने जाते हैं। दिन में 1 बार इनका सेवन जरूर करें।
शरीर को ठंडक पहुंचाने में असरदार- गर्मियों में तुलसी के बीज का सेवन जरूर करें। इन्हें खाने से पेट ठंडा रहता है। सब्जा सीड्स में प्राकृतिक रूप से शरीर को ठंडा करने वाले गुण पाए जाते हैं। इन्हें जूस, मिल्कशेक या पानी में डालकर आप पी सकते हैं।
























 

स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा कदम : राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज में अत्याधुनिक मशीनरी का शुभारंभ

07-Sep-2025
रायपुर, ( शोर संदेश ) विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह तथा लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा विभाग मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज भारतरत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय राजनांदगांव परिसर में 12 करोड़ 5 लाख 92 हजार 500 रूपए की लागत के सीटी स्कैन मशीन का लोकार्पण किया। उल्लेखनीय है कि शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय राजनांदगांव परिसर में सीटी स्कैन मशीन लगने से जनसामान्य के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ोत्तरी होगी। इस मशीन से मरीजों को त्वरित एवं सटीक जांच सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। 
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष एवं स्वास्थ्य मंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए मॉडल का अवलोकन किया। जिसमें तुरंत ओपीडी के लिए ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन के संबंध में जानकारी दी गई। इसके साथ ही सीटी स्कैन मशीन, एक्स-रे मशीन, सोनोग्राफी मशीन, स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं अन्य विभाग द्वारा रूचिकर मॉडल के माध्यम से नागरिकों को जानकारी प्रदान की गई।     
इस दौरान महापौर मधुसूदन यादव, अध्यक्ष सीजीएमएससी दीपक मस्के सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, चिकित्सा महाविद्यालय के डॉक्टर्स एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

इम्यूनिटी बढ़ाएँ और संक्रमण से बचें : मानसून डायबिटीज गाइड

05-Sep-2025
इम्यूनिटी बढ़ाने वाला खाना खाएं- बारिश के दौरान स्ट्रीट फूड लोगों को अच्छा लगता है, लेकिन ये खाना खराब होने का खतरा भी कहीं ज्यादा होता है। ऐसे में डायबिटीज के रोगियों को संक्रमण को रोकना कठिन हो सकता है। खाने में घर की बनी चीजें, एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीजें, पकी सब्जियां, खाएं। फल सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाएं।
पैरों की खास देखभाल करें- मधुमेह पीड़ितों को इस समय अपने पैरों की खास देखभाल करनी चाहिए। पैर गीले होने पर फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। इस मौसम में चोट लगने से भी बचाएं। पैरों को सूखा रखें। गीले सॉक्स न पहनें। पैरों के नाखून साफ और कटे हुए रखें। नंगे पैर चलने से बचें। आरामदायक जूते ही चुनें।
नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच- मानसून में नियमित रूप से अपने ब्लड शुगर की जांच रखें। खाने, व्यायाम या तनाव के स्तर में ग्लूकोज लेवल प्रभावित कर सकता है। मौसम में नमी और तापमान में परिवर्तन भी इंसुलिन संवेदनशीलता को प्रभावित कर सकते हैं। जिससे ब्लड शुगर कम या ज्यादा हो सकता है। इसलिए समय समय पर ब्लड शुगर की जांच करते रहें।
घर में कोई न कोई व्यायाम करें- इस मौसम में भी अपनी फिटनेस दिनचर्या को कम न होने दें, भले ही आपको घर के अंदर ही क्यों न व्यायाम करना पड़े। बारिश न हो तो बाहर जाकर वॉक करें। घर के अंदर लो इंटेंसिटि वाली एक्सरसाइज कर सकते हैं। जैसे 30 मिनट की छोटी कसरत या घर के अंदर रोजाना सुबह की वॉक कर लें इससे ब्लड शुगर मेंटेन रहेगा।

हाइड्रेटेड रहें- ह्यूमिडिटी के मौसम में डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ जाती है। जिससे ग्लूकोज का लेवल भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए सुनिश्चित करें कि आप खूब पानी पीते रहें। भले ही आपको प्यास न लगे। हर्बल टी और इन्फ्यूज्ड पानी भी हाइड्रेशन में सहायता कर सकते हैं।

 

हेल्दी समझकर खा रहे हैं ड्राई फ्रूट्स? दिल और किडनी पर पड़ सकता है भारी असर

03-Sep-2025
शोर संदेश )  ड्राई फ्रूट्स सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन किसी भी चीज़ का अत्यधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है, और यह बात ड्राई फ्रूट्स पर भी लागू होती है। कुछ ड्राई फ्रूट्स ऐसे होते हैं जिनका ज़्यादा सेवन हार्ट से लेकर किडनी की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
इन ड्राई फ्रूट्स का ज़्यादा सेवन है खतरनाक:
अखरोट: अखरोट दिल और दिमाग के लिए फायदेमंद होते हैं। लेकिन इसमें कैलोरी बहुत ज़्यादा होती है। इसके ज़्यादा सेवन से वजन बढ़ता है। ज़्यादा अखरोट खाने से कुछ लोगों को पेट फूलना, गैस या पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोगों को अखरोट से एलर्जी हो सकती है, जिससे सूजन या सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
पिस्ता: पिस्ता भी प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर हैं। लेकिन अखरोट की तरह, पिस्ता में भी कैलोरी ज़्यादा होती है, जिससे वजन बढ़ सकता है। इसमें ऑक्सालेट होते हैं, जो किडनी स्टोन के जोखिम को बढ़ाते हैं। नमकीन पिस्ता खाने से शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ सकती है, जो हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए हानिकारक है।
काजू: काजू में हेल्दी फैट, प्रोटीन, विटामिन और मिनिरल्स होते हैं। लेकिन इनके ज़्यादा सेवन से वजन बढ़ सकता है जो हार्ट की हेल्थ के लिए अच्छा नहीं है। पिस्ता की तरह, काजू में भी ऑक्सालेट होते हैं जो किडनी स्टोन के जोखिम को बढ़ाते हैं। जिन लोगों को किडनी स्टोन की समस्या रह चुकी है, उन्हें इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।
चिलगोजा: चिलगोजा में कैलोरी बहुत ज़्यादा होती है। एक छोटी मुट्ठी भी काफी कैलोरी दे सकती है, इसलिए इसेक ज़्यादा सेवन से वजन बढ़ सकता है। फैट से भरपूर होने के कारण ज़्यादा चिलगोजा खाने से कुछ लोगों को अपच या पेट खराब हो सकता है।
एक दिन में कितना ड्राइफ्रूट्स खाएं?
किसी भी ड्राई फ्रूट का सेवन संयमित मात्रा में ही करना चाहिए। आमतौर पर, एक दिन में एक छोटी मुट्ठी (लगभग 20-30 ग्राम) मिश्रित ड्राई फ्रूट्स का सेवन पर्याप्त और सुरक्षित माना जाता है। अपनी डाइट में कोई बड़ा बदलाव करने से पहले हमेशा किसी एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर होता है।

 

 


लोहे के बर्तनों में भूलकर भी न पकाएँ ये चीजें, हो सकता है सेहत को नुकसान

03-Sep-2025
 शोर संदेश )  अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो मिट्टी के बर्तनों और लोहे के बर्तनों में खाना पकाएँ और खाएँ, क्योंकि आजकल खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले विभिन्न प्रकार के बर्तन, जैसे एल्युमीनियम, स्टील, नॉन-स्टिक कुकवेयर जानलेवा हो सकते हैं। नॉन-स्टिक बर्तनों में खाना पकाने से कुछ स्वास्थ्य समस्याएँ भी हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक नॉन-स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।
आजकल लोग बीमारियों के प्रति ज़्यादा जागरूक हो गए हैं। यही वजह है कि जो लोग स्वस्थ जीवनशैली अपनाना चाहते हैं, वे मिट्टी और लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल तेज़ी से कर रहे हैं। लेकिन लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां बरतना बेहद ज़रूरी हो गया है। खासकर, कुछ तरह के खाद्य पदार्थों को लोहे के बर्तनों में नहीं पकाना चाहिए।
खट्टे और अम्लीय खाद्य पदार्थ: नींबू, टमाटर, सिरका, दही और खट्टी कढ़ी जैसे अम्लीय चीजें लोहे के साथ प्रतिक्रिया कर सकती हैं। इससे न केवल व्यंजन में धातु जैसा स्वाद आ सकता है, बल्कि कुछ मामलों में एलर्जी भी हो सकती है। यदि आप इन व्यंजनों को लोहे के बर्तन में पकाने से बचें।
डेयरी उत्पाद: पनीर, दही और अन्य डेयरी उत्पादों को लोहे के बर्तनों में नहीं पकाना चाहिए। लोहे के साथ मिलने पर इनका स्वाद पूरी तरह बदल जाता है। इसके अलावा, जब डेयरी उत्पादों को लोहे के बर्तनों में पकाया जाता है, तो उनका रंग खराब हो जाता है और वे देखने में भी अच्छे नहीं लगते।
मछली: मछली परतदार और चिपचिपी बनावट के कारण लोहे के तवे पर चिपक सकते हैं। तेल या मक्खन का इस्तेमाल करने के बावजूद भी यह समस्या आ सकती है, जिससे मछली का स्वाद और बनावट प्रभावित हो सकती है। धीमी आंच पर लोहे की कढ़ाई में मछली पकाने से बचना ही बेहतर है।
मिठाइयाँ: भले ही भारतीय मिठाइयाँ कढ़ाई में बनती हों, लोहे की कढ़ाई का इस्तेमाल कम ही होता है। लोहे के बर्तन में पहले से पके हुए खाने की गंध रह सकती है, जिससे मिठाइयों का स्वाद और खुशबू बदल सकती है।
लोहे की कड़ाही में पका हुआ खाना तुरंत किसी दूसरे कांच या एनामेल के बर्तन में रख दें। कढ़ाई को तेज़ स्क्रबर या बहुत हल्के स्पंज से न रगड़ें। लोहे के बर्तन धोने के लिए हल्के डिटर्जेंट का इस्तेमाल करें। धोने के तुरंत बाद लोहे के बर्तनों को कपड़े से पोंछ लें। लोहे के बर्तनों को रखने से पहले उन पर सरसों के तेल की एक पतली परत लगाएँ। पके हुए खाने को लोहे के बर्तनों में घंटों तक न रखें, क्योंकि इससे धातु जैसा स्वाद या गंध आ सकती है। बर्तन को जंग लगने से बचाने और उसकी गंध को दूर करने के लिए हमेशा उपयोग के बाद गर्म रहते ही साफ कर लें।
 

 


अमरूद के पत्तों में छिपे आयुर्वेदिक फायदे

29-Aug-2025
 शोर संदेश ) अमरूद का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं अमरुद के पत्तों भी आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर होते हैं। अमरुद के पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और मिनिरल्स होते हैं जो समग्र स्वास्थ्य का समर्थन कर सकते हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं अमरुद का सेवन करने से सेहत को कौन से फायदे होते हैं और इसका इस्तेमाल कैसे करें?
अमरुद के पत्तों से मिलते हैं ये फायदे:
पाचन होता है बेहतर: अमरूद के पत्ते एसिडिटी को कम करके और पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण को बढ़ावा देकर दस्त और सूजन जैसी पाचन समस्याओं में मदद कर सकते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है मजबूत: अमरूद के पत्तों में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट के उच्च स्तर प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और संक्रमण से बचाने में मदद कर सकते हैं।स्किन से जुड़ी परेशानियां होती हैं दूर: अमरूद के पत्तों का उपयोग उनके विरोधी भड़काऊ और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण मुँहासे, काले धब्बे और उम्र बढ़ने के संकेतों सहित विभिन्न त्वचा संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए किया जा सकता है।
दांतों के लिए फायदेमंद: अमरूद के पत्तों को चबाने से दांत दर्द और मसूड़ों की समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है। इसमें मौजूद जीवाणुरोधी गुण मसूड़ों की बीमारी, दांत दर्द और सांसों की बदबू को रोकने में मदद करते हैं।
हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी: अमरूद के पत्ते खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करके और संभावित रूप से रक्तचाप विनियमन का समर्थन करके हृदय स्वास्थ्य में योगदान दे सकते हैं।
रक्त शर्करा नियंत्रण: अमरूद के पत्ते रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं, संभावित रूप से मधुमेह वाले व्यक्तियों या जोखिम वाले लोगों को लाभ पहुंचा सकते हैं।
पीरियड्स के दर्द में फायदेमंद: अमरूद के पत्ते मासिक धर्म में ऐंठन के लिए भी लाभ प्रदान कर सकते हैं, संभावित रूप से दर्द की तीव्रता को कम करने के साथ-साथ वजन घटाने में भी सहायता कर सकते हैं।
कैसे करें अमरुद के पत्तों का इस्तेमाल?
ताजे या सूखे अमरूद के पत्तों को 5-10 मिनट तक पानी में उबालें फिर उसे छानकर पिएं। आप स्वाद के लिए शहद या नींबू मिला सकते हैं। अमरूद के पत्तों को पानी में उबालकर ठंडा होने दें। शैम्पू करने के बाद ठंडे पानी से बालों को धोएँ, इससे बाल मज़बूत होंगे और बालों का झड़ना कम होगा। आराम और सुगंधित स्नान के लिए अपने नहाने के पानी में अमरूद के पत्ते डालें।













 

गरियाबंद में रक्तदान शिविर: युवाओं ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा

23-Aug-2025
गरियाबंद । ( शोर संदेश ) शासकीय जिला अस्पताल में आज प्रजापति ब्रम्हकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय एवं गरियाबंद ब्लड डोनर ग्रुप द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर  बी. एस. उइके ने शिविर का निरीक्षण कर समस्त व्यवस्थाओं का अवलोकन किया और रक्तदाताओं से भेंटकर उनका उत्साहवर्धन किया।
कलेक्टर उइके ने इस अवसर पर कहा कि रक्तदान एक महान मानवीय सेवा है। प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर रक्तदान कर समाज में अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि रक्त की उपलब्धता से गंभीर रूप से बीमार मरीजों, प्रसवकालीन जटिलताओं से गुजर रही महिलाओं तथा दुर्घटना पीड़ितों का जीवन बचाया जा सकता है।
उन्होंने प्रजापति ब्रम्हकुमारी फाउंडेशन एवं बल्ड डोनर ग्रुप की पहल की सराहना करते हुए कहा कि समाज में सेवा एवं सहयोग की भावना को प्रोत्साहित करने के लिए इस प्रकार के आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं। साथ ही उन्होंने युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में रक्तदान करने की अपील की। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने अस्पताल प्रबंधन को निर्देशित किया कि रक्तदान शिविर में आने वाले सभी दाताओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर रक्त दान की प्रक्रिया पूर्ण करे। उन्होंने कहा कि रक्त संग्रहण एवं भंडारण की प्रक्रिया पूर्णत: सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से करे, ताकि भविष्य में जरूरतमंद मरीजों को इसका लाभ समय पर मिल सके।
जिला अस्पताल में आयोजित रक्तदान शिविर में बड़ी संख्या में रक्तदाताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कई युवाओं ने पहली बार रक्तदान कर समाज सेवा का संकल्प लिया। शिविर में जिला अस्पताल के चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम सक्रिय रूप से मौजूद रही। इस अवसर पर प्रजापति ब्रम्हकुमारी फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने कलेक्टर उइके को संस्था की गतिविधियों और सामाजिक योगदान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्था समय-समय पर स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता संबंधी कार्यक्रम आयोजित करती है। शिविर के दौरान वातावरण में उत्साह और सेवा भाव का संचार दिखाई दिया। रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए और उन्हें पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया गया। इस कार्यक्रम में सीएमएचओ डॉ. यू एस नवरत्न, सिविल सर्जन डॉ. वाय के ध्रुव, चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरीश चौहान सहित जिला अस्पताल के अधिकारी-कर्मचारी, प्रजापति ब्रम्हकुमारी फाउंडेशन के पदाधिकारी, स्वयंसेवक एवं बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।


















 



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