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रायगढ़ में रोशनी की क्रांति 11 लाख से अधिक लोगों का नेत्र सर्वेक्षण

14-Aug-2025
रायपुर, शोर संदेश )14अगस्त 2025 राष्ट्रीय अंधत्व एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के प्रभावी संचालन से कभी धुंधलेपन और अंधेरे में घिरा जीवन, अब चमकती रोशनी और नई उम्मीदों से भरा हुआ है। यह बदलाव कलेक्टर रायगढ़ के मार्गदर्शन में जिले में सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि 29 नेत्र सहायक अधिकारियों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और मितानिनों के सहयोग से राष्ट्रीय अंधत्व एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सत्र 2025-26 में जिले के 11 लाख 56 हजार 970 लोगों का सर्वेक्षण किया गया। इस व्यापक अभियान में 3925 मोतियाबिंद के मरीजों की पहचान हुई, जिनमें 314 दोनों आंखों से, 3604 एक आंख से और 7 बच्चे जन्मजात मोतियाबिंद से पीड़ित पाए गए। जुलाई 2025 तक 1002 मरीजों के सफल ऑपरेशन हुए, जिनमें 183 दोनों आंखों के, 815 एक आंख के और 4 जन्मजात मोतियाबिंद के बच्चे शामिल रहे। प्रत्येक ऑपरेशन ने किसी न किसी के जीवन में फिर से उजाला भर दिया।
दूरस्थ अंचलों के बच्चों की दृष्टि के लिए विशेष प्रयासः-
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए यूनिक आईडी कार्ड और दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने हेतु विशेष शिविर आयोजित किए गए, इसमें बाकारूमा और घरघोड़ा के बच्चों के माता-पिता को ऑपरेशन के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया गया, जिसके सफल इलाज के बाद उनकी आंखों की ज्योति लौट आई। स्कूल हेल्थ प्रोग्राम के तहत माह जुलाई तक 136 शासकीय माध्यमिक विद्यालयों के 6586 विद्यार्थियों का नेत्र परीक्षण किया गया, इनमें 318 बच्चे दृष्टिदोष से पीड़ित पाए गए और उन्हें आवश्यकता अनुसार निःशुल्क चश्में प्रदान किए गए। कार्यक्रम के तहत विशेष रूप से दूरस्थ विकासखंडों और जनजातीय एवं पिछड़े क्षेत्र के बच्चों का नेत्र परीक्षण किया गया। इनमें धरमजयगढ़ के ग्राम सूपकोना के 13 वर्षीय अनूप प्रकाश राठिया, रैरूमाखुर्द की 6 वर्षीय पूर्णिमा राठिया, घरघोड़ा के ग्राम बटूराकछार के 11 वर्षीय परदेशी यादव और रायगढ़ के कबीर चौक की 13 वर्षीय कुमारी दृष्टि राय का सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन हुआ। अब ये बच्चे पहले की तरह साफ-साफ देख पा रहे हैं और पढ़ाई में अपना भविष्य संवार रहे हैं। 
माता-पिता ने कहा-यह सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि हमारे बच्चों को नया जीवन दियाः-
रायगढ़ की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब संवेदनशील नेतृत्व, संगठित टीमवर्क और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता मिलती है, तो हजारों जीवन में उजाला फैलाया जा सकता है। यह सिर्फ एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि दृष्टि, विश्वास और भविष्य लौटाने की कहानी है। इस मुहिम में जिला नोडल अधिकारी डॉ. मीना पटेल, जिला कार्यक्रम प्रबंधक रंजना पैकरा, डॉ. आर. एम. मेश्राम, डॉ. पी. एल. पटेल, डॉ. उषा किरण भगत, निजी नेत्र रोग विशेषज्ञों और स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। जन्मजात मोतियाबिंद के बच्चों के माता-पिता ने कहा-यह सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि हमारे बच्चों को नया जीवन देने जैसा है। उन्होंने शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। ज्ञातव्य है कि वर्ष 2024-25 में मोतियाबिंद ऑपरेशन के क्षेत्र में शासकीय जिला चिकित्सालय रायगढ़ ने राज्य ने प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया और रायगढ़ को राज्य के 11 मोतियाबिंद फ्री जिलों में शामिल किया गया।
 

गैर-संचारी रोगों की रोकथाम के लिए प्रदेश में विशेष आयुष अभियान

14-Aug-2025
रायपुर,  शोर संदेश  14अगस्त 2025 प्रदेश के 28 जिला अस्पतालों में एलोपैथिक चिकित्सकों के साथ-साथ आयुर्वेद चिकित्सकों द्वारा भी राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम का हो रहा है संचालन राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के अंतर्गत राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NPCDCS) के प्रभावी संचालन के लिए प्रदेश में विशेष पहल की जा रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर, स्ट्रोक जैसे गंभीर गैर-संचारी रोगों की शीघ्र पहचान, रोकथाम और नियंत्रण सुनिश्चित करना है।
प्रदेश के 28 जिला अस्पतालों में एलोपैथिक चिकित्सकों के साथ-साथ आयुर्वेद चिकित्सकों द्वारा भी राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत 13 आयुष पॉलीक्लिनिक और 5 जिला अस्पतालों में आयुर्वेद-आधारित लाइफस्टाइल क्लिनिक स्थापित किए गए हैं।
राज्य के 400 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 32 योगा और वेलनेस सेंटर्स में योग, ध्यान, आहार एवं औषधियों के माध्यम से रोगों की रोकथाम के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। वहीं, स्क्रीनिंग शिविरों के माध्यम से मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कैंसर की समय पर जांच की जा रही है।
स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें समुदाय में स्वास्थ्य शिक्षा और रोग-निरोधी सेवाएं प्रदान करने के लिए सक्षम बनाया गया है। इस पहल से जनस्वास्थ्य में सुधार, रोगों का बोझ कम करने और आयुर्वेद पद्धति के प्रति जन-विश्वास में वृद्धि हो रही है।
 

चावल और टमाटर से पाएं स्किन पर नेचुरल ग्लो

13-Aug-2025
नई दिल्ली।   ( शोर संदेश ) आज हम आपको चावले के दो ऐसे घरेलू उपाय बताएंगे, जिसे आपकी स्किन पर प्राकृतिक रूप से निखार आएगा।
चावल का फैसपैक
एक बोल में दो टी-स्पून चावल का आटा लें और इसमें चार चम्मच गुलाब जल मिलाएं। अब इसमें एक टी-स्पून पिघला हुआ घी मिलाएं। इसे अच्छे से मिक्स करें और पैक को डाउन स्ट्रोक के साथ चेहरे पर लगाएं। 15 मिनट पर इसे हल्के गरम पानी से धो लें। इस पैक से स्किन की ड्राईनेस की समस्या दूर हो जाएगी और स्किन का निखार बढ़ जाएगा।
टेनिंग दूर करेगा टमाटर
एक टमाटर को कद्दूकस कर लें और उसके जूस को छान लें। इस रस में एक चम्मच चावल का आटा मिलाएं। यह मिक्स थोड़ा गाढ़ा बनेगा। इसे चेहरे पर 15-20 मिनट लगा रहने दें और फिर चेहरा साफ कर लें। इससे चेहरा साफ दिखने लगेगा। फेस धोने के बाद चाहे, तो चावल का पानी बतौर टोनर लगा सकते हैं, जो रंगत को और निखारेगा।
 

स्वच्छता संगम में सीएम साय ने स्वच्छता दीदियों के पैर पखारकर किया सम्मान

13-Aug-2025
रायपुर  ( शोर संदेश )।  13 अगस्त 2025/ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को ‘स्वच्छता संगम’ में शहरों को स्वच्छ और सुंदर बनाने में अहम योगदान देने वाली स्वच्छता दीदियों के पैर पखारकर उनका सम्मान किया। बिलासपुर के बहतराई इंडोर स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वच्छ सर्वेक्षण-2024-25 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले नगरीय निकायों को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में 260 करोड़ रुपए से अधिक की लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया। उन्होंने घोषणा की कि स्वच्छता में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले नगरीय निकाय को एक करोड़ रुपए, दूसरा स्थान प्राप्त करने वाले को 50 लाख रुपए तथा तीसरा स्थान पाने वाले को 25 लाख रुपए की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। इस अवसर पर विधायकगण धरमलाल कौशिक, अमर अग्रवाल, धर्मजीत सिंह, दिलीप लहरिया और सुशांत शुक्ला, बिलासपुर की महापौर पूजा विधानी, छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष  राजा पाण्डेय, क्रेडा के अध्यक्ष भूपेन्द्र सवन्नी तथा जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी सहित अनेक जनप्रतिनिधि ‘स्वच्छता संगम-2025’ में उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘स्वच्छता संगम’ के सफल आयोजन के लिए नगरीय प्रशासन विभाग को बधाई देते हुए कहा कि स्वच्छता के क्षेत्र में हमारी सफाई दीदियों का योगदान अतुलनीय है, और आज उनके पैर पखारकर हमने उन्हें सम्मानित किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2014 में स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की थी। तब से हम निरंतर स्वच्छता के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए नई उपलब्धियां अर्जित कर रहे हैं और छत्तीसगढ़ ने इस दिशा में उल्लेखनीय सफलता पाई है। यह उपलब्धियां हमें और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा नागरिकों की सुविधा के लिए विभिन्न नवाचार लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस पर ‘हर घर तिरंगा’ लहराने और प्रदेश को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के लिए जनसहभागिता का आह्वान किया।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के इतिहास का गौरवशाली दिन है। प्रधानमंत्री ने 2014 में स्वच्छता का बीड़ा उठाया और आज यह जन आंदोलन का रूप ले चुका है। स्वच्छता में प्रगति करते हुए हमने राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बनाई है और राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री से पुरस्कार प्राप्त किए हैं। हमारे नगरीय निकायों को राष्ट्रीय स्तर पर छह पुरस्कार प्राप्त होना गर्व की बात है। रायपुर नगर निगम को गार्बेज-फ्री सिटी में सेवन-स्टार रेटिंग मिली है। 20 हजार से कम जनसंख्या वाले शहरों में अकेले छत्तीसगढ़ के 58 शहरों को थ्री-स्टार रेटिंग प्राप्त हुई है। सोर्स सेग्रीगेशन और अपशिष्ट प्रबंधन में भी हमारे शहरों ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां अर्जित की हैं। स्वच्छता के सभी मापदंडों पर छत्तीसगढ़ में तेजी से कार्य हो रहा है। हमारा उद्देश्य है कि हमारे शहर स्वच्छ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनें तथा स्वच्छता छत्तीसगढ़ की पहचान बने।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस. ने बताया कि स्वच्छ सर्वेक्षण-2024-25 में राज्य के 115 शहरों ने अपनी रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार किया है। स्वच्छ सर्वेक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सात नगरीय निकायों को नई दिल्ली में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के हाथों पुरस्कृत होने का गौरव प्राप्त हुआ है। कार्यक्रम में इन नगरीय निकायों के साथ ही संभाग स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 30 से अधिक नगरीय निकायों को भी सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री ने संपत्ति कर जमा करने का ऑनलाइन पोर्टल किया लॉन्च
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में तीन नगर निगम—बिरगांव, भिलाई-चरोदा और धमतरी—तथा 43 नगर पालिकाओं में ऑनलाइन संपत्ति कर जमा करने की सुविधा के लिए जीआईएस आधारित प्रॉपर्टी टैक्स लाइव पोर्टल का शुभारंभ किया। एक साथ 46 शहरों में ऑनलाइन संपत्ति कर भुगतान की यह सुविधा स्थानीय स्वशासन को आधुनिक बनाने और नागरिकों को घर बैठे सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे कर संग्रहण में भी तेजी आएगी।
‘स्वच्छता संगम’ में नगरीय निकायों में स्वच्छता और शहरी सौंदर्यीकरण के मानकों को ऊंचा उठाने के लिए राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का शुभारंभ भी किया गया। मुख्यमंत्री ने रिमोट का बटन दबाकर स्वच्छ सर्वेक्षण-2024-25 पर आधारित वीडियो का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री ने 63.57 करोड़ के 24 कार्यों का किया लोकार्पण, 197 करोड़ से अधिक के 25 कार्यों का किया भूमिपूजन
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘स्वच्छता संगम’ में 260 करोड़ रुपए से अधिक की लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। उन्होंने बिलासपुर जिले में विभिन्न विभागों के 63 करोड़ 57 लाख रुपए की लागत के 24 निर्माण एवं विकास कार्यों का लोकार्पण किया तथा 197 करोड़ रुपए से अधिक की लागत के 25 कार्यों का भूमिपूजन भी किया।
इस अवसर पर संभागायुक्त सुनील जैन, पुलिस महानिरीक्षक संजीव शुक्ला, कलेक्टर संजय अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह, सभी नगरीय निकायों के महापौर, सभापति, नगर पालिका एवं नगर पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, निगम आयुक्त, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगरीय निकायों के वरिष्ठ अभियंता, स्वच्छता दीदियां एवं स्वच्छता कमांडोज़ बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

आयुर्वेदिक चमत्कार: तुलसी के पत्तों से मिलते हैं इन बीमारियों में जबरदस्त फायदे

07-Aug-2025
हिन्दू धर्म में तुलसी के पौधे की एक देवी के रूप में पूजा की जाती है। ज्यादातर घरों में आपको तुलसी मिल ही जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुबह उठकर तुलसी को जल चढ़ाने से भगवान विष्णु की कृपा बरसती है। तुलसी अपने आप में एक ऐसा पौधा है जो  अनगिनत फायदे पहुंचाता है। आयुर्वेद में कई बीमारियों के इलाज में तुलसी का उपयोग किया जाता है। आज हम आपको बताएंगे कि घर में लगी तुलसी का इस्तेमाल कर आप किन बीमारियों से बच सकते हैं।
आचार्य बालकृष्ण की मानें तो तुलसी के पत्तों से कई बीमारियों का इलाज होता है। इसके पत्तों में रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है जो आपको बुखार, दिल से जुड़ी बीमारियां, पेट दर्द, मलेरिया और बैक्टीरियल संक्रमण से बचाते हैं।
दिमाग के लिए फायदेमंद- तुलसी में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो दिमाग को शांत करने, कार्य क्षमता बढ़ाने, सिर दर्द, सिर के जूं और लीख से छुटकारा, नाइट ब्लाइंडनेस से आराम दिलाने का काम करते हैं। इसके लिए रोजाना 4- 5 तुलसी के पत्ते पानी के साथ खा लें। सिर में तुलसी के पत्तों का रस भी लगा सकते हैं।
कान और दांत के दर्द में आराम- बच्चों और बड़ों किसी को कान में दर्द हो तो तुलसी के पत्तों का रस डालने से आराम मिलता है। कान के दर्द में तुरंत राहत पाने के लिए तुलसी के 8-10 पत्तों को पीस लें और इससे निकलने वाले रस में से 2 से तीन बूंद कान में डालनी हैं दांत में दर्द हो तुलसी और काली मिर्च चबा लें। इससे फायदा मिलेगा।
पेट की बीमारियों में असरदार तुलसी- अगर आपको डायरिया, पेट की मरोड़, कब्ज, पीलिया, पथरी, डिलीवरी के बाद होने वाले दर्द से झुटकारा पाना है तो तुलसी के पत्तों का सेवन करें। डायरिया और पथरी से बचने के लिए 10 तुलसी की पत्तियां और 1 ग्राम जीरा दोनों को पीसकर शहद में मिलाकर उसका सेवन करें। अपच दूर करने के लिए तुलसी को नमक के साथ पीसकर दिन में 3 से 4 बार लें।
त्वचा के लिए फायदेमंद- आपके फेस को ग्लोइंग बनाने, सफेद दाग, मुंह के छालों, कालापन, कील मुंहासों, फोड़े सभी में तुलसी लाभदायक है। इसके लिए आपको तुलसी के पत्तों को 1 नींबू के साथ मिलाकर लेप बनाना है। इसे चेहरे पर लगा लें और सूखने पर धो लें।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए- तुलसी मलेरिया, टाइफाइड, बुखार, दाद और खुजली, मासिक धर्म की अनियमितता से बचाती हैं। तुलसी के पत्तों को काली मिर्च के साथ मिक्स करें और काढ़ा बनाकर पीने से मलेरिया, टाइफाइड, बुखार आराम मिलता है। दाद और खुजली के लिए आप इसका लेप बनाकर लगा सकते हैं। मासिक धर्म में आप तुलसी के बीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं। रोज तुलसी के पत्तों को खाने से डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, अस्थमा, जुकाम को कंट्रोल किया जा सकता है।
घाव भरने में मददगार- तुलसी चोट पर भी फायदा करती है। यहां तक की सांप काटने पर भी तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है। सांप काटने पर तुलसी की जड़ों को पीसकर सांप के काटने वाली जगह पर लेप लगाते हैं। इससे दर्द से आराम मिलता है। अगर रोगी बेहोश हो गया हो तो तुलसी का रस नाक में लगाया जाता है।

क्या यूरिक एसिड बढ़ने पर चना खाना सुरक्षित है? जानिए सच

07-Aug-2025
रायपुर। शोर संदेश  हाई यूरिक की समस्या समय के साथ बेहद गंभीर रूप लेनी लगती है। आपको ये जानकर हैरानी हो सकती कि जब शरीर में यूरिक एसिड बढ़ता है तो इसकी पथरियां आपकी किडनी में जमा होने लगती है। इसके अलावा ये शरीर के तमाम अंगों को भी प्रभावित करने लगता है जैसे कि ये हड्डियों के बीच पथरियों के रूप में जमा हो जाता है और सूजन का कारण बनने लगता है। ऐसे में कोशिश करनी चाहिए कि आप हाई प्रोटीन वाले फूड्स के सेवन से बचें। तो, ऐसे में सवाल ये है कि हाई यूरिक में चना खाएं या नहीं।
क्या हाई यूरिक में चना खा सकते हैं?
नहीं, अगर किसी को हाई यूरिक एसिड की समस्या है तो उसे चना, चने की दाल और चने की बनी तमाम चीजों को खाने से बचना चाहिए। ऐसा इसलिए कि चने में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है जिससे यूरिक एसिड की समस्या तेजी से बढ़ती है। इतना ही नहीं अगर किसी को पहले से ही हाई यूरिक एसिड की समस्या है तो चना खाना सूजन को ट्रिगर कर सकता है और दर्द का कारण बन सकता है। तो, इन तमाम कारणों से आपको हाई यूरिक एसिड में चना खाने से बचना चाहिए।
अगर खाएं तो कैसे खाएं?
अगर आपका यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है तो आपको चने को बिलकुल कम मात्रा में खान चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि इसे अंकुरित करके या फिर इस उबालकर खाएं। इस तरह से चने में फाइबर की मात्रा बढ़ती है जो कि पाचन क्रिया को इतना तेज कर देता है कि चने में मिलने वाला प्रोटीन पच जाता है। साथ ही ये मल में थोक जोड़ने का काम करता है जिससे पेट साफ होता है, प्यूरिन मल के साथ बाहर निकल जाता है और यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
तो, पहले तो चना खाने से परहेज करें और अगर आप खा भी रहे हैं तो इन बातों का ख्याल रखें। ऐसे करना आपको यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है।  इसकी जगह आप मूंग जैसी दाल का सेवन कर सकते हैं।








 

अम्बेडकर अस्पताल के डॉक्टरों ने रचा इतिहास, निकाला फेफड़े और हार्ट से चिपका पांच किलो का ट्यूमर

25-Dec-2024
रायपुर।  ( शोर संदेश )  डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने 52 वर्षीय महिला के फेफड़े और हार्ट से चिपका लगभग पांच किलोग्राम वजनी मेडिस्टाइनल ट्यूमर को निकालकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सर्जरी इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि सर्जन की टीम इस कैंसरस ट्यूमर को सावधानीपूर्वक बाहर नहीं निकालती तो शरीर के वाइटल ऑर्गन हृदय और फेफड़े में चोट लगने का खतरा हो सकता था। अम्बेडकर अस्पताल के दक्ष सर्जन टीम की बदौलत इस जटिल सर्जरी के बाद मरीज स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो गई। इस तरह की मुश्किल सर्जरी को सफलता पूर्वक संपन्न करने पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अंबेडकर अस्पताल प्रबंधन को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि बहुत जल्द ओपन हार्ट सर्जरी और कोरोनरी बायपास सर्जरी की सुविधा भी लोगों को मिलने लगेगी।

अम्बेडकर अस्पताल के डॉक्टरों ने रचा इतिहास, निकाला फेफड़े और हार्ट से चिपका पांच किलो का ट्यूमर
अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में 52 वर्षीय महिला लेने में तकलीफ की शिकायत के साथ अम्बेडकर अस्पताल पहुंची। सीटी स्कैन एवं अन्य जांच कराने पर पता चला कि मरीज के छाती के अंदर और हार्ट से चिपका हुआ बहुत बड़ा ट्यूमर है। मरीज की हालत इतनी खराब थी कि वह ठीक से सांस भी नहीं ले पा रही थी इसलिए उसको हाईप्रेशर (बाईपेप) वेंटीलेटर में रखा गया। ट्यूमर इतना बड़ा था कि वह हार्ट को दबाकर दूसरे भाग में शिफ्ट कर दिया था एवं फेफड़े के साथ-साथ सांस नली भी दब गई थी। अन्य संस्थानों में मरीज को ऑपरेशन के लिए मना कर दिया गया था। योजना के अनुसार कैंसर सर्जन डॉ. आशुतोष गुप्ता एवं हार्ट और चेस्ट सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू की टीम के संयुक्त प्रयास से यह ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल लिया गया। इस ऑपरेशन के दौरान हार्ट लंग मशीन को भी तैयार करके स्टेंड बाई मोड में रखा गया था क्योंकि यदि किसी कारण से हार्ट या पल्मोनरी आर्टरी में चोट लग जाती है तो मशीन से सपोर्ट मिल जाता। ट्यूमर लगभग पांच किलोग्राम का था। बाद में बायोप्सी करने पर पता चला कि यह मैलिग्नेंट ट्यूमर है जिसको सार्कोमा कहा जाता है जो कि बहुत भयावह ट्यूमर होता है। ठीक होने के बाद मरीज को कीमोथेरेपी के लिए कैंसर विभाग में भेज दिया गया।

इस तरह से बनाएं आंवले की स्वादिष्ट चटनी

24-Dec-2024

नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  वैसे को आंवला खाना सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। यह विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरा होता है। आमतौर पर बच्चों को आंवला खाना पसंद नहीं होता है। लेकिन आप इस तरह से आंवले की टेस्टी चटनी बनाएंगे, तो आप इसे खाने के साथ खा सकते हैं। आइए आपको इसे बनाने की विधि बताते हैं।

आंवला सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है, डॉक्टर भी आंवला खाने की सलाह देते हैं। क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। सर्दियों में आंवला खाना काफी फायदेमंद माना जाता है। इसके सेवन से कई समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है। आंवले का स्वाद खट्टा होते है, जिस वजह से बच्चों को इसे खाना पसंद नहीं करते हैं। अगर आप घर पर आंवले की चटपटी चटनी बनाएंगे तो इसे सभी लोग खाना पसंद करेंगे। आइए आपको बताते हैं इसे बनाने का तरीका।

आंवले की चटनी बनाने के लिए सामग्री

- 1/2 किलो आंवला

- 1 बड़ा चम्मच तेल

- 1 बड़ा चम्मच पंचफोरन ( मेथी दाना, कलौंजी, जीरा, काली सरसों और सौंफ बीज का मिक्स)

- 1 चम्मच साबुत धनिया के बीज

- आधा चम्मच से भी कम हिंग पाउडर

- 1/2 कप गुड़

- 1 चम्मच मिर्च पाउडर

- 1 चम्मच हल्दी पाउडर

- 1 चम्मच धनिया पाउडर

- 1 चम्मच काला नमक

- 1 चम्मच अदरक कटा हुआ

कैसे बनाएं आंवला की चटनी

- सबसे पहले आंवला को मीडियम आंच पर 10-15 मिनट भाप में पकाएं। जब आंवले नरम हो जाएं तो इसके बीज निकालकर आंवले का गूदा को अलग कर लें। अब एक पैन में 1 बड़ा चम्मच तेल लें, उसमें 1 चम्मच मेथी दाना, कलौंजी, जीरा, काली सरसों और सौंफ बीज डालें।  इसके बाद 1 चम्मच साबुत धनिया के बीज और थोड़ा सा हींग पाउडर डालें। फिर आप इसमें उबले हुए आंवले डालें और 5 मिनट तक अच्छे से भून लें। अब आप इसमें आधा कप गुड़ डाल दें। इसको आप मध्यम आंच पर तब तक पकाएं जब तक गुड़ पिघल न जाए और मिक्स थोड़ा गाढ़ा न हो जाए। जब यह गाढ़ा हो जाएगा तो इसे धीमी आंच पर रखें। फिर आप इसमें मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर और काला नमक डालें। फिर बारीक कटा हुआ अदरक भी इसमें मिला दें। अच्छे से मिक्स के बाद आपकी आंवले की चटनी तैयार है। इसे रोटी, पराठा, चावल के साथ सर्व करें।


सेहत के लिए वरदान नीम के पत्ते

24-Dec-2024

नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  आयुर्वेद के मुताबिक नीम के पत्ते आपकी ओवरऑल हेल्थ के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकते हैं। औषधीय गुणों से भरपूर ये पत्ते स्वाद में भले ही कड़वे होते हैं, लेकिन इनके कमाल के फायदों के आगे इनके कड़वे स्वाद को झेलना वर्थ इट साबित हो सकता है। नीम की पत्तियों को दादी-नानी के जमाने से सेहत से जुड़ी कई समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आइए इनके कुछ हेल्थ बेनिफिट्स के बारे में जानते हैं।

अगर आपको हर समय थकान और कमजोरी महसूस होती है तो नीम के पत्तों का सेवन करना शुरू कर दीजिए। नीम के पत्ते आपकी गट हेल्थ को काफी हद तक इम्प्रूव कर सकते हैं। पेट से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए नीम के पत्तों का सेवन किया जा सकता है। बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए हर रोज सुबह-सुबह नीम के 4-5 पत्तों को चबाएं।

अगर आप अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो आप नीम के पत्तों को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। नीम के पत्तों को रेगुलरली चबाने से आप खुद को बार-बार बीमार पड़ने से बचा सकते हैं। नीम के पत्ते आपकी बॉडी को डिटॉक्सिफाई करने में कारगर साबित हो सकते हैं। नीम के पत्तों को आंखों की सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नीम के पत्तों में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन सी, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, फॉस्फोरस, पोटैशियम जैसे पौष्टिक तत्वों की अच्छी खासी मात्रा पाई जाती है। इसके अलावा नीम की पत्तियां एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुणों से भरपूर होती हैं। इन तत्वों की वजह से ही आयुर्वेद एक्सपर्ट नीम की पत्तियों का सेवन करने की सलाह देते हैं।


अखरोट को भिगोकर खाने के फायदे

23-Dec-2024

नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) आजकल हेल्थ एक्सपर्ट भीगे हुए ड्राई फ्रूट्स खाने की सलाह देते हैं। सर्दियों में भी आप बादाम, किशमिश और अखरोट को पानी में भिगोकर खा सकते हैं। भिगोकर खाने से अखरोट के फायदे कई गुना बढ़ जाते हैं। अखरोट हमारे हार्ट और दिमाग के लिए एक सुपरहेल्दी ड्राई फ्रूट है। अखरोट की शेप दिमाग के जैसी होती है। इसलिए इसे दिमाग को ताकत देने वाला ड्राई फ्रूट माना जाता है। अखरोट में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं इसलिए रोजाना अखरोट खाने से आप अपनी सेहत को ठीक रख सकते हैं। जानिए अखरोट को भिगोकर खाने से क्या फायदा मिलता है।


कोई भी मेवा हो वो तसीर में गर्म होता है। अखरोट भी गर्म तासीर का ड्राई फ्रूट है इसलिए इसे भिगोकर खाना चाहिए। आप रात में 2 अखरोट की गिरी को पानी में भिगो दें। सुबह इसे दूसरे भीगे हुए नट्स के साथ या ऐसे ही सिर्फ 2 अखरोट खा लें। इससे अखरोट गर्मी नहीं करेगा और इसे पचाना भी आसान हो जाएगा। आप रात में दूध में भिगोकर भी अखरोट का सेवन कर सकते हैं। अखरोट के साथ आप दूसरे ड्राई फ्रूट्स भी खा रहे हैं। दिमाग और हार्ट के लिए अखरोट को सबसे अच्छा माना जाता है।

अखरोट में ओमेगा 3 फैटी एसिड की मात्रा काफी होती है.

अखरोट में विटामिन ई, विटामिन सी और विटामिन ए होता है.

अखरोट खाने से मैग्नीशियम की कमी पूरी की जा सकती है.

आयरन, कैल्शियम की कमी दूर करने के लिए भी अखरोट खा सकते हैं.

अखरोट खाने से विटामिन K की कमी को भी पूरा किया जा सकता है.

अखरोट में प्रोटीन, कार्ब, फाइबर, सैचुरेटेड फैट और अनसैचुरेटेड फैट होता है.

फोलेट, जिंक, कॉपर और सेलेनियम जैसे मिनरल भी अखरोट में होते हैं.

अखरोट में फास्फोरस और कोलीन जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं.

हार्ट को हेल्दी और दिमाग को स्वस्थ बनाने में अखरोट मदद करता है.




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