

बेमेतरा (शोर सन्देश)। स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से बेहिचक कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने टीकाकरण करने की अपील की है। विभाग ने यह भी कहा कि इसके कोई दुष्प्रभाव की खबरें नही आयी है, अत: अफवाहों पर ध्यान न देें। जैसा कि आप सभी जनते हैं कि कोरोना वायरस का संक्रमण विश्वव्यापी महामारी के रुप मे सामने आया है। आम जनता का जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है, साथ ही विभिन्न आयामों में असंतुलन की स्थिति निर्मित हो गई है। आमजन अपने घर की ओर लौटने लगे। गाड़ी, घोड़ा, हवाईजहाज, रेलगाड़ी मोटर सभी का मार्ग अवरुद्ध हो गया। आर्थिक, सामाजिक, व्यवहारिक दृष्टिकोण बदल गया है। हम सभी को दो गज दूरी मास्क है जरुरी हाथों को धोना, हैण्ड सेनेटाईज के लिए प्ररित किया गया। कलेक्टर शिव अनंत तायल ने भविष्य मे आम नागरिको से टीकाकरण कार्य मे सहयोग करने की अपील की है। भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर इस बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इस कार्यक्रम का शुभारंभ दिवस 16 जनवरी को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस के शर्मा भी टीका लगवाकर सहभागी बने। उन्होने कहा कि मेरी आयु 65 वर्ष है, मुझे टीका लगने के बाद किसी भी प्रकार का दुष्प्रभाव सामने नही आया है, मैं पूर्णतया सुरक्षित व स्वस्थ्य हूं। 28 दिवस के पश्चात टीके की दूसरे डोज लगाई जाएगी, जिसके पश्चात् शरीर मे कोविड-19 से लडने के लिए रोध प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने में समय लगता है। इसलिए कोविड संक्रमण से बचने हेतु उचित व्यवहार का पालन हमें करना ही होगा। मेरे साथ जिला सर्वेलेंस अधिकारी डॉ. ज्योति जसाठी भी यह टीका लगवाया गया है, जो कि पूर्व मे संक्रमित होकर पूर्णतया स्वस्थ हो चुंकी है। टीकाकरण के पश्चात पूर्णत: सुरक्षित और स्वस्थ है। बेमेतरा जिले मे कोविन पोर्टल मे पंजीकृत स्वास्थ्य अधिकारी/कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिनें और अन्य विभाग से पंजीकृत अधिकारी-कर्मचारियों से अपील है कि यह टीका अवश्य लगवायें। सुरक्षा ही बीमारी से बचने का मूल मंत्र है। दो गज की दूरी मास्क है जरुरी।

बलौदाबाजार (शोर सन्देश)। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को समझना और उनका निराकरण करना वर्तमान समय में बहुत जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए बलौदाबाजार के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं लोगों तक पहुंचाई जा रही हैं I दिसंबर 2020 तक जिले के 172 लोगों की काउंसिलिंग कर मानसिक विकारों को दूर करने का प्रयास किया गया। साथ ही आत्महत्या रोकथाम (सुसाइड प्रीवेंशन) के लिए गेटकीपर ट्रेनिंग के लिए जिला कार्यक्रम सलाहकार को नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज (निम्हांस) की ओर से विशेष प्रशिक्षण दिया गया।सभी विकासखंडों में परामर्श- बलौदाबाजार के सभी विकासखंडों में आत्महत्या के लिए परामर्श दिया जा रहा है। आत्महत्या परामर्श के तहत (अप्रैल से दिसंबर 2020 तक) कुल 172 लोगों को परामर्श दिया गया। इनमें बलौदाबाजार, बिलाईगढ़,सिमगा, पलारी, भाटापारा शामिल हैं जिनकी काउंसलिंग हुई। हालांकि जिले में मानसिक अवसाद, तनाव की वजह से आत्महत्या की कोशिश करने वालों की संख्या भी काफी रही जिनको चिकित्सकों दवारा काउंसिलिंग प्रदान की गई। डॉ. राकेश कुमार प्रेमी मनो चिकित्सक (एनएमएचपी) ने बताया जिले में मानसिक रोग को लेकर लोगों में जागरूकता आई है और मानसिक बीमार व्यक्तियों को इसका लाभ भी मिल रहा है। मानसिक रोगों की पहचान करने और ऐसे लोगों को चिकित्सकीय सुविधा और मदद करने के लिए गेट कीपर ट्रेनर विशेष रूप से मदद पहुंचा रहे हैं। उल्लेखनीय है राज्य सरकार भी अब प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात डॉक्टरों को मानसिक बीमारियों और मानसिक रोगियों की पहचान करने तथा ऐसे रोगियों को इलाज सुविधा मुहैय्या कराए जाने का प्रयास कर रही है। सरकारी प्रयास की बदौलत ही जिले के सभी ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य केन्द्रों में मानसिक रोगियों को परामर्श प्रदान किया जा रहा है।
जिला सलाहकार मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम डॉ सुजाता पाण्डेय ने बताया “समाज का हर तीसरा व्यक्ति मानसिक व्याधियों से पीड़ित है। परंतु लोग इसे न स्वीकार करते हैं ना ही इलाज करना चाहते हैं। मानसिक अवसाद, तनाव की वजह से लोग आत्महत्या तक कर बैठते हैं। जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बलौदाबाजार भाटापारा में आत्महत्या रोकथाम (सुसाइड प्रिवेंशन) के लिए व्यापक कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज (निमहांस) द्वारा गेटकीपर ट्रेनिंग दी गई। जिले में गेटकीपर ट्रेनिंग में सफलतापूर्वक सर्टिफिकेट कोर्स भी निम्हांस की ओर से किया गया और अभी हाल में चाइल्ड एंड मेंटल हेल्थ और सुसाइड प्रीवेंशन के लिए भी प्रशिक्षण हुआ जिसमें जिसमें हिस्सा लेने का अवसर मिला।

रायपुर (शोर सन्देश)। छत्तीसगढ़ में कोरोना वैैैक्सीनेशन के तीसरे दिन आज डाॅ भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के आई सी यू के प्रमुख डाॅ ओ पी सुंदरानी और पल्मोनरी मेडिसिन के प्रमुख चिकित्सक डा्ॅ आर के पांडा ने आज कोरोना का वैक्सीन लगवाया । दोनो चिकित्सक स्वस्थ हैं और टीका लगाने के बाद वापस अस्पताल कार्य पर आ गए। दोनो ने चिकित्सा कर्मियों से आग्रह किया कि वे अवश्य टीका लगवाएं क्योंकि यह पूरी तरह सुरक्षित है और आम जनता के सामने मिसाल रखें। छत्तीसगढ़ मे कोरोना की दस्तक के साथ ही दोनों डाॅक्टर लगातार बिना रूके कोरोना मरीजों के इलाज में मेकाहारा के अन्य चिकित्सकों और स्टाफ के साथ जुटे रहे। इसके अलावा रिफरल केन्द्र होने के कारण प्रदेश के अन्य अस्पतालों के चिकित्सकों को भी मार्गदर्शन देते रहे। चिकित्सकों को आन लाइन प्रशिक्षण भी दिया । मरीजों की सेवा करने और उनके ठीक होकर घर जाने पर उन्हे, मरीजों के परिजनों के बराबर ही खुशी होती थी। डाॅ सुंदरानी ने कहा कि कोरोना काल के दौरान उन्होने कोई अवकाश नही लिया। डाॅ पांडा ने कहा कि त्योहारों में भी वे ड्यूटी करते रहे ताकि मरीज स्वस्थ हो सकें । इसी से उन्हे अत्यंत खुशी मिलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन लगाने के बाद भी सभी को कोविड अनुकूल व्यवहार का पालन करना मास्क लगाना ,सुरक्षित दूरी रखना और हाइजिन का ध्यान रखना होगा और वे रख भी रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार वैक्सीन की दूसरी डोज के 14 दिन के बाद ही शरीर में प्रतिरक्षात्मक तंत्र विकसित होता है। विशेषज्ञ अभी भी इसीलिए कह रहे हैं कि संक्रमण कम होने का अर्थ यह नही है कि यह और नही फैल सकता। सबको सचेत रहने की जरूरत है अभी भी ,तभी कोरोना के संक्रमण से बच सकते हैं। प्रदेश में कोरोना वैैक्सीनेशन मंगलवार,शुक्रवार और रविवार को छोड़कर बाकी सभी दिन प्रातः 9 बजे से शाम 5 बजे तक पूर्व निर्धारित सेशन साइट में होगा।

रायपुर (शोर सन्देश)। सुप्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ व पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. ए.टी. दाबके ने आज पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय पहुंचकर स्वेच्छा से कोरोना वैक्सीन लगवाई। वैक्सीन लगाने के बाद 78 वर्षीय डॉ. दाबके ने कहा कि उन्हें टीका लगाने के बाद कोई परेशानी नहीं हुई। उन्हें आधे घंटे निगरानी कक्ष में रखा गया। उन्होंने कहा कि यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है और पूरे प्रोटोकॉल का पालन करके लगाया जा रहा है। यहां की वैक्सीनेशन टीम पूरी तरह अलर्ट है। आम जनता को इसे लगाने में कोई शंका, डर नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसमें इनएक्टिव वायरस का उपयोग किया गया है। टीका लगावाने के बाद भी कोरोना एप्रोप्रीएट बिहेवीयर जैसे मास्क लगाना, सुरक्षित दूरी बनाए रखना और हाथों की सफाई आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पहला डोज लगने के 28 दिन बाद दूसरा डोज लगाना भी उतना ही आवश्यक है। तभी वैक्सीन के सही परिणाम सामने आएंगे और संबंधित व्यक्ति में दूसरा डोज लगने के दो हफ्ते बाद इम्युनिटी विकसित होगी।

बलरामपुर (शोर सन्देश)। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम अंतर्गत टीबी की उच्च जोखिम समूहों में सघन खोज अभियान Óटीबी हारेगा देश जीतेगाÓ का आयोजन किया जाना है। जिसके तहत् स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले के सभी विकासखंडों में 11 जनवरी से 29 जनवरी तक टीबी के संभावित मरीज के लिए सघन खोज अभियान कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। इस संबंध में जिला क्षय नियंत्रण अधिकारी बलरामपुर ने जानकारी दी है, कि किसी आम नागरिक को टीबी से संबंधित शिकायत हो तो मुफ्त जांच, मुफ्त इलाज के तहत् जिले में संचालित किसी भी निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र में संपर्क कर सकते हैं।

महासमुन्द (शोर सन्देश)। महिला बाल विकास विभाग ने रेडी-टू-ईट खाद्य सामग्री के प्रदाय के लिए कुल 34 सेक्टरों के लिए महिला स्व-सहायता समूहों से 31 दिसम्बर तक आवेदन फॉर्म निर्धारित किया गया था। महिला बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि जिसे संशोधित कर 15 दिवस की अवधि तक और बढ़ा दी गई है। इनमें आवेदन फॉर्म वितरण की अंतिम तिथि 14 जनवरी 2021 व रजिस्टर्ड डाक और कोरियर के माध्यम से आवेदन फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 15 जनवरी निर्धारित की गई है।

भिलाई-3 (शोर सन्देश)। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भिलाई 3 व चरोदा शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम के बीईईटीओ व सुपरवाइजर सैय्यद असलम ने बताया कि प्रतिदिन प्रा स्वास्थ्य केंद्र भिलाई 3 व चरोदा शहरी स्वास्थ्य केंद्र में दो पालियों मे कोविड जांच किया जाता है। ओसत प्रतिदिन 22 से 25 सैम्पल लिए जा रहे है विगत दो सप्ताह से पाजिटिव मरीजों के मिलने मे कमी आ रही है आज दोनो पालियों मे रैपिड एंटिजन टेस्ट मे लगभग 23 सैम्पल लिए गये सभी की रिपोर्ट निगेटिव रही है। प्रभारी चिक अधिकारी डा देवेन्द्र बेलचंदन ने बताया कि बीते 9 महीने में दिसंबर के अंतिम दो सप्ताह मे पाजिटिव केसेस मे निरंतर कमी आ रही है जिसका प्रमुख कारण समुदाय में जागरूकता ओर सरकारी हेल्थ सेक्टर के सरकारी तंत्र की कुशल कार्य प्रणाली रही है। प्रभारी बीईईटीओ व सुपरवाइजर सैय्यद असलम ने बताया कि अभी आगे भी सचेत रहने की आवश्यकता है नियंत्रण व रोकथाम मे सभी ने अपने दायित्वों को ईमानदारी से पूरा किया है। सैय्यद असलम ने बताया कि बीते 7 महीनों मे हमने 3131 एंटिजन टेस्टिंग किऐ ओर 1021 आर टी पी सी आर सैम्पल लिए 366 टूर्नाट सैम्पल जांच मे भेजे जिसमे अब 566 कोरोना से संक्रमित मिले है जिसमे से 502 लोग स्वास्थ्य हो चुके है । आमजनता से अपील है कि स्वास्थ्य विभाग की जारी गाइड लाइन का पालन करते हुए स्वंय व परिवार के साथ क्षेत्र की जनता को स्वस्थ रखने मे अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा कर भिलाई 3 चरोदा क्षेत्र मे सहयोग करे।

रायपुर (शोर सन्देश)। कोरोना वैक्सीन की ताजा स्थिति पर आज प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने पत्रकारों से चर्चा की। मंत्री सिंहदेव ने बताया कि आज इंग्लैंड में एक कंपनी को वैक्सीन की अनुमति मिल गई है, यह अनुमति पहले चरण की अनुमति है। अब लगभग 7 से 10 दिन के भीतर वैक्सीन को पूरी तरह अप्रूव कर दिया जाएगा और जनसामान्य के लिए उपलब्ध कर दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ ने केंद्र सरकार को फ्रंट रो वॉरियर्स की सूची भेज दी है। मंत्री सिंहदेव ने बताया कि रिसर्च अभी लगातार आगे बढ़ रहा है। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में देश में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
मंत्री ने कहा, इसे देश के 30 करोड़ लोगों तक पहुंचाने के लिए 6 महीने का समय लगेगा। पहले फेस में वैक्सीन की 5
करोड़ डोज कम्पनी ने तैयार कर ली है। यह वैक्सीन दो डोज में पूर्ण होगा, पहले डोज के बाद दूसरे डोज की समयावधि निर्भर है। यह वायरस पर्यावरण में फैला हुआ है, हो सकता है यह जनरेशन तक रहे। वर्त्तमान में भारत में कोरोना के अब तक 4000 नुट्रेन्स की पहचान की जा चुकी है। देश में 80 करोड़ लोगों तक वैक्सीन पहुँचाने में लगभग 2 साल लग सकते हैं। प्रदेश में कोरोना का नया स्ट्रेन न फैले यही पहली प्राथमिकता है। नए स्ट्रेन के सैम्पल भेजे गए हैं, इसकी जानकारी अब तक लैब से नहीं आई है। पिछले दिनों की तुलना में प्रदेश में टेस्टिंग कम हुई है, जिसके कारन संक्रमित मरीजों की संख्या भी काम हुई है। फिर भी प्रदेश में संक्रमण की औसत संख्या 4 प्रतिशत से कम हो गई है। उन्होंने चिंता जताई है कि जब प्रदेश में 0 से लाखों मरीज मिल सकते हैं, तो नए स्ट्रेन से 10 हजार से सभी लोग संक्रमित हो सकते हैं।

दुर्ग, (शोर सन्देश)। राष्ट्रीय कुष्ठ उन्नमूलन कार्यक्रम के तहत जिले के पाटन ब्लॉक को कुष्ठ मुक्त करने को कुष्ठ रोगी खोज अभियान चलाया जा रहा है । “मेरा ग्राम कुष्ठ मुक्त ग्राम” की परिकल्पना को साकार करने को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व मितानिन द्वारा गाँव के घर-घर सर्वे में कुष्ठ के स्ंदिग्ध मरीजों की पहचान की जा रही है । अभियान के अंतर्गत ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर पाटन, झिट व गाढ़ाडीह सेक्टर में 85 संभावित मरीजों की खोज की गई । इन संभावित मरीजों की तीनों नॉन मेडिकल अस्सिटेंट ( एनएमए) दल द्वारा जांच में 2 पीबी और 2 एमबी स्तर के कुल 4 नए कुष्ठ प्रभावित मरीज मिले हैं । बाँकी 81 लोगों के शरीर में दाद, खाज-खुजली, बेमची सहित अन्य प्रकार के चर्म रोग से प्रभावित मरीजों के लिए चर्म रोग निदान और उपचार शिविर का आयोजन किया जाएगा। नॉन मेडिकल अस्सिटेंट ( एनएमए) दल द्वारा रानी तराई, बटरेल, भिलाई-3 सेक्टर के 20-20 गांवों में संभावित मरीजों की सत्यापन कार्य अंतिम चरण में जारी है। बीएमओ डॉ आशीष शर्मा ने बताया, “पाटन ब्लॉक में घर-घर सर्वे के लिए 24 नॉन मेडिकल अस्सिटेंट ( एनएमए) व सेवानिर्वित्त एनएमए को जांच दल में सत्यापन के लिए लगाया गया है “मेरा ग्राम कुष्ठ मुक्त ग्राम” अभियान को सफल बनाने को पाटन ब्लॉक के 112 ग्राम पंचायतों के 146 गाँव स्तर पर ग्राम पंचायतों के स्थानीय जनप्रतिनिधि सरपंच, पंच, सामाजिक कार्यकर्ता मितानिन व आंगनबाड़ी कार्यकर्तायों का उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में 4,500 लोगों को ट्रेनिंग दिया गया था।“ डॉ शर्मा ने बताया, “महिलाओं की प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए कुष्ठ निदान उन्मूलन के इस कार्यक्रम में मितानिनों को भी लगाया गया है। इसके अलावा अभियान में सेवानिवृत्त एनएमए से उनके अनुभवों का लाभ लेने के लिए भी कुष्ठ खोज में सहयोग लिया जाएगा। इनकी मॉनिटरिंग के लिए एएनएम व सुपरवाइजरों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। दुर्ग जिले की प्रति 10,000 जनसंख्या पर 2.0 कुष्ठ प्रसार दर है। अभियान से इसे 01 से नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है ।“ इस अभियान के तहत मेरा ग्राम कुष्ठ मुक्त ग्राम की परिकल्पना को साकार करने की व्यापक योजना के तहत पुराने कुष्ठ प्रभावित लगभग 200 मरीजों के परिवार के सदस्यों को भी पीईपी के तहत कुष्ठ की दवाई की एक खुराक खिलाई गई। गाँव को कुष्ठ मुक्त बनाने की दिशा में जनप्रतिनिधियों से भी सहयोग मांगा जा रहा है। ग्राम पंचायतों को आधार बनाकर जनप्रतिनिधियों से भी अपील कराई जा रही है । इस अभियान में अधिक से अधिक लोगों को जुड़नें और सफल बनाने के लिए जागरूकता प्रचार रथ भी रवाना किया गया है। प्रत्येक परिवारों को कार्ड में कुष्ठ रोग के लक्षण व पहचान के बारे में जानकारियां देकर जागरूक किया जा रहा है। इस कार्ड में परिवार के मुखिया द्वारा परिवार के सदस्यों के शरीर में असामान्य दिखने वाले लक्षणों की पहचान कर तीन दिन बाद मितानिन दीदीयों को वापस दिया जा रहा है। कुष्ठ से मिलते जुलते किसी भी लक्षण नजर आने पर संबंधित परिवार के सदस्यों की जांच व स्क्रीनिंग स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा करते हुये निशुल्क इलाज़ और दवाई प्रदान किया जा रहा है । मितानिन व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के गृहभ्रमण करने के दौरान कोरोना संक्रमण से बचाव के दो गज दूरी और मास्क लगाना जरूरी के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है ।अभियान को सफल बनाने ट्रेनर एसडी बंजारे, अजय रावत, अल्का रावत, आरपी उपाध्याय , शारदा साहू , डिपी वर्मा, अजया देवांगन, माया कश्यप , टी आर साहू, के एस वर्मा, सी एल मैत्री , अंजाना शर्मा, पी आर साहू, जे डी मानिकपुरी , एमके देवांगन , बीएल माहेश्वरी, मोहनलाल देवांगन, पीआर बंजारे, एसके देवांगन , नर्द प्रसाद वर्मा, एस के वर्मा व जेके सबजई द्वारा ग्राम पंचायतों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।