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नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और पॉपकॉर्न स्टेटस से बाहर निकलने की आवश्यकता है - रमेन डेका

06-Jun-2026
रायपुर (शोर संदेश) राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि डिजिटल एडिक्शन आज की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बनती जा रही है। यह केवल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर रहा है। नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस‘ से बाहर निकलने की आवश्यकता है, क्योंकि इससे सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है और केवल कृत्रिम संतुष्टि प्राप्त होती है।
राज्यपाल रमेन डेका ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह के अध्यक्षीय उद्बोधन  में उक्त बातें कही। समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। समारोह में मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथिक, मेडिकल बायोटेक, बीपीपी, एमपीटी, नर्सिंग, बीएएसएलपी सहित अन्य संकायों में 7545 स्नातक और 1645 स्नातकोत्तर एवं 5 सुपर स्पेशयलिटी उपाधि प्रदान की गई तथा विभिन्न संकायों में सर्वाेच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियांे को विभिन्न स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।
राज्यपाल ने कहा कि यदि दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास किया जाए तो 30 दिनों के भीतर डिजिटल एडिक्शन से काफी हद तक मुक्ति पाई जा सकती है। बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखते हुए खेल-कूद और बाहरी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। आज के बच्चे सीमित दायरे में रह रहे हैं, जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है।
राज्यपाल ने नवस्नातक चिकित्सकों से कहा कि जिस प्रकार वे राज्यपाल होने के नाते प्रदेश की जनता के हित के बारे में सोचते हैं, उसी प्रकार आपका दायित्व मरीजों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति समर्पित रहना है। चिकित्सकों के सफेद कोट पर कभी कोई दाग नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि आप सभी ने मानवता की सेवा के उद्देश्य से इस क्षेत्र का चयन किया है। कठिन परिश्रम के बाद प्राप्त यह डिग्री आपके जीवन की दूसरी पारी की शुरुआत है। जहां भी कार्य करें, मरीज के हित को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें और ऐसा कार्य करें जो देश, प्रदेश और समाज में मिसाल बने।
डेका ने कहा कि वर्तमान समय में नेबरहुड डॉक्टरों की सबसे अधिक आवश्यकता है। पहले फैमिली फिजिशियन की परंपरा थी, जो मरीज और उसके परिवार की परिस्थितियों को भलीभांति समझते थे। चिकित्सा क्षेत्र में उस आत्मीयता को पुनर्जीवित करने की जरूरत है। किसी भी मरीज के लिए गोल्डन ऑवर अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे समय में चिकित्सकों की त्वरित निर्णय क्षमता मरीज का जीवन बचा सकती है। राज्यपाल ने कहा कि आज के छात्र इंटरनेट युग के विद्यार्थी हैं। विज्ञान निरंतर आगे बढ़ रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रही है। टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकों का उपयोग दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने सभी विद्यार्थियों और नागरिकों से ‘एक पेड़ मां के नाम‘ अभियान के तहत पौधारोपण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पशु, मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है और इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपना योगदान देना चाहिए।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि का दिन केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं है बल्कि समाज और मानवता के प्रति नई दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का अवसर है। विद्यार्थियों की सफलता उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के प्रगति और विश्वविद्यालयों की प्रतिष्ठा को दर्शाता है।
साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल खनिज और कृषि आधारित राज्य के रूप में ही नहीं बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करें यह हमारा लक्ष्य होना चाहिए। साय ने छत्तीसगढ़ में स्वास्थ अधोसंरचना विस्तार, साथ ही बस्तर में नक्सल उन्मूलन के पश्चात विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्याे का भी उल्लेख किया।
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य करना लोगों की सेवा का बड़ा अवसर और महती जिम्मेदारी है। उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर विस्तृत जानकारी दी।
अध्यक्ष, राष्ट्रीय विशेषज्ञ पैनल, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, नई दिल्ली एवं दीक्षांत समारोह अभिभाषक डॉ वेदप्रकाश मिश्रा ने भी अपना संबोधन दिया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. के. पात्रा ने स्वागत उद्बोधन एवं अकादमिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा सहित विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद के सदस्य, अधिष्ठाता, प्राध्यापकगण, विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित थे।

 

समाज, संगठन और योग के प्रति समर्पित था रूपनारायण सिन्हा जी का जीवन : मुख्यमंत्री साय

06-Jun-2026
रायपुर, (शोर संदेश) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सिन्हा का संपूर्ण जीवन समाजसेवा, संगठन निर्माण और योग के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित रहा। उनका निधन न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
मुख्यमंत्री साय ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा एक कुशल संगठनकर्ता, सरल, सौम्य और मृदुभाषी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने अपने व्यवहार, कार्यशैली और समर्पण से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विशेष पहचान बनाई थी। योग के प्रति उनकी निष्ठा और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें विशिष्ट बनाती थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष का दायित्व संभालने के बाद सिन्हा ने पूरे समर्पण और ऊर्जा के साथ योग आंदोलन को नई दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने योग को केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनाने के लिए अनेक नवाचार किए। उनके प्रयासों से प्रदेश में योग गतिविधियों को नई पहचान और व्यापक जनस्वीकृति मिली।
मुख्यमंत्री साय ने स्वर्गीय सिन्हा के साथ बिताए गए क्षणों को स्मरण करते हुए कहा कि उनसे नियमित मुलाकात होती थी और हर मुलाकात में वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए योग आधारित नए विचार साझा करते थे। उनकी सोच सदैव रचनात्मक और जनहितकारी होती थी। वे योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर सक्रिय रहते थे और इसी उद्देश्य को अपने जीवन का मिशन बना चुके थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष जशपुर के रणजीता स्टेडियम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम की सफलता में सिन्हा की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। सीमित समय में उन्होंने जिस कुशलता और प्रतिबद्धता के साथ उस आयोजन को भव्य स्वरूप दिया, वह उनकी संगठन क्षमता और कार्यकुशलता कावो उत्कृष्ट उदाहरण है। उस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता ने योग के प्रति जनजागरूकता को नई ऊंचाई प्रदान की थी। उनका जीवन समाज के प्रति समर्पण, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक था, जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरणा देता रहेगा।
मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
श्रद्धांजलि सभा में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, वन मंत्री केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, विधायक अमर अग्रवाल, विधायक धरमलाल कौशिक, विधायक अजय चंद्राकर, महापौर  मीनल चौबे, रमेश बैस, राम प्रताप, पवन साय, डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना, राम दत्त, राजीव लोचन महाराज सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, योग साधक एवं योग जगत से जुड़े लोगों ने उपस्थित होकर स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को श्रद्धासुमन अर्पित किया।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

 


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जारी की महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त

05-Jun-2026
रायपुर (शोर संदेश) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिलासपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त जारी करते हुए प्रदेश की 68 लाख 54 हजार महिलाओं के बैंक खातों में 642 करोड़ 27 लाख 77 हजार 950 रुपये की राशि अंतरित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं का सम्मान, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा महतारी वंदन योजना इस दिशा में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी पहल के रूप में सामने आई है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी समाज और राज्य की प्रगति तब तक पूर्ण नहीं हो सकती, जब तक महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और सामाजिक रूप से सम्मानित न किया जाए। महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना प्रदेश की माताओं और बहनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का आधार बन रही है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 1 मार्च 2024 से प्रारंभ हुई महतारी वंदन योजना के अंतर्गत पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। योजना से प्राप्त राशि का उपयोग महिलाएं परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, पोषण तथा छोटे-छोटे स्वरोजगार कार्यों में कर रही हैं। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ महिलाओं की सामाजिक भागीदारी भी बढ़ी है।
जून 2026 में जारी 28वीं किस्त के साथ ही योजना के अंतर्गत अब तक प्रदेश की महिलाओं को कुल 18 हजार 165 करोड़ 19 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है। यह राशि महिलाओं के जीवन में आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसी सोच के अनुरूप सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर और नारायणपुर में संचालित नियद नेल्लानार अभियान के माध्यम से 7 हजार 770 नई महिलाओं को महतारी वंदन योजना से जोड़ा गया है। इससे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों की महिलाओं को भी आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा का लाभ प्राप्त हो रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना आज केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह महिलाओं के सम्मान, विश्वास और आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक बन चुकी है। योजना से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे परिवार तथा समाज में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महिलाओं की सहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रदेश की हर महिला सशक्त, स्वावलंबी और सम्मानपूर्ण जीवन जी सके।
महतारी वंदन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की नई धारा प्रवाहित हुई है और लाखों परिवारों के जीवन में खुशहाली तथा आर्थिक स्थिरता का नया अध्याय जुड़ा है।

35 वर्षों का इंतजार हुआ खत्म : सपेरा बस्ती में साकार हो रहा पक्के घरों का सपना

05-Jun-2026
रायपुर  (शोर संदेश) सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड स्थित ग्राम भीखमपुरा पहुंचे, जहां उन्होंने सपेरा बस्ती में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माणाधीन आवासों का निरीक्षण कर विकास कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री  साय ने वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवनयापन कर रहे सवरा (सपेरा) जनजाति के परिवारों से आत्मीय संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री साय ने निर्माणाधीन आवासों का अवलोकन करते हुए कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि विकास और जनकल्याण का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र परिवार को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को सभी स्वीकृत आवासों और अन्य निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को बताया कि वे पिछले लगभग 35 वर्षों से कच्चे घरों में रहकर जीवनयापन कर रहे थे।प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से अब उनका पक्के घर का सपना साकार हो रहा है। हितग्राहियों ने कहा कि पहली बार उन्हें अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक आवास में रहने की उम्मीद मिली है। मुख्यमंत्री साय ने ग्रामीणों की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए जाति प्रमाण पत्र सहित अन्य आवश्यक प्रकरणों के त्वरित निराकरण के निर्देश अधिकारियों को दिए।
इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने दिव्यांग हितग्राही रमाबाई सिदार को बैसाखी प्रदान कर उनकी सहायता की तथा बच्चों को चॉकलेट वितरित कर उनसे आत्मीय बातचीत की। मुख्यमंत्री की सहजता और अपनत्व से ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
उल्लेखनीय है कि भीखमपुरा की सपेरा बस्ती में 68 परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास, सीसी रोड तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। यहां प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, जल जीवन मिशन सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक पहुंचाया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में 25 आवास, वर्ष 2025-26 में 14 आवास तथा मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 14 आवास स्वीकृत किए गए हैं। वहीं 10 अन्य पात्र परिवारों को आवास प्लस 2.0 सर्वे में शामिल किया गया है।
कार्यक्रम के दौरान ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कदम का पौधा तथा वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बरगद का पौधा रोपित किया। परिसर में कुल पांच पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का संदेश दिया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

खेती केवल आजीविका नहीं, हमारी संस्कृति और पहचान का आधार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

04-Jun-2026
रायपुर (शोर संदेश) आधुनिक तकनीकों, नवाचारों और किसान हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और सम्मानजनक बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायपुर में आयोजित ‘मुख्यमंत्री किसान संवाद’ में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसानों के साथ आत्मीय चर्चा करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने खेती-किसानी से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए तथा किसानों के प्रश्नों और सुझावों पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और कम उम्र में ही खेती-किसानी तथा परिवार की जिम्मेदारियां संभालने का अवसर मिला। इसी कारण वे किसानों की जरूरतों, चुनौतियों और उनके संघर्ष को निकटता से समझते हैं। उन्होंने कहा कि पहले खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थी, आधुनिक तकनीकों और सुविधाओं का अभाव था, लेकिन आज कृषि क्षेत्र में बड़े परिवर्तन आए हैं। मशीनों, वैज्ञानिक पद्धतियों और नई तकनीकों के उपयोग से उत्पादकता बढ़ी है तथा किसानों के लिए नई संभावनाएं खुली हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण, उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाएं तथा कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं ने किसानों को आर्थिक संबल प्रदान किया है 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान गांवों में किसानों से सीधे संवाद के दौरान यह अनुभव हुआ है कि विभिन्न योजनाओं का लाभ किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों के चेहरे पर दिखाई देने वाला आत्मविश्वास ही सरकार की योजनाओं की वास्तविक सफलता है।
कार्यक्रम में शामिल ड्रोन दीदियों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक की उपयोगिता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ड्रोन के माध्यम से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का छिड़काव कम समय, कम लागत और अधिक प्रभावशीलता के साथ किया जा सकता है। इससे खेती आधुनिक, वैज्ञानिक और लाभकारी बन रही है तथा महिलाओं के लिए भी रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और जैविक खेती को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इनके उपयोग से लागत कम होती है, उत्पादन क्षमता बढ़ती है तथा मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने का आह्वान किया।
किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद और उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। राज्य और केंद्र सरकार द्वारा आगामी खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है तथा कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त निगरानी की जा रही है।
कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों ने अमरूद, ड्रैगन फ्रूट, मौसंबी, पपीता और आम जैसी फसलों की उन्नत खेती के अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है तथा बदलते समय के अनुरूप किसानों को परंपरागत खेती के साथ-साथ बागवानी, प्राकृतिक कृषि, जैविक खेती और अन्य नवाचारों को अपनाना चाहिए।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज का युवा खेती को केवल परंपरा नहीं बल्कि आधुनिक उद्यम के रूप में देख रहा है। यह परिवर्तन कृषि क्षेत्र के लिए अत्यंत सकारात्मक है। राज्य सरकार कृषि आधारित कौशल विकास, ड्रोन संचालन, कृषि मशीनरी, जैविक खेती और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित कर रही है।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने किसानों से आह्वान किया कि वे नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाने में संकोच न करें। समय के साथ बदलती तकनीकों को अपनाकर सीमित लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, वैज्ञानिक सोच और आधुनिक तकनीक ही किसानों की समृद्धि का आधार बनेंगे।

दुर्गम बस्तर को मिली नई रफ्तार, कोण्डापल्ली बेली ब्रिज का मुख्यमंत्री ने किया निरीक्षण

03-Jun-2026
 रायपुर( शोर संदेश  जहां कभी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां विकास की राह में चुनौती बनती थीं, वहां आधुनिक अधोसंरचना नए अवसरों के द्वार खोल रही है। प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचकर बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर निर्मित बेली ब्रिज का निरीक्षण किया। उन्होंने पुल की निर्माण तकनीक, उपयोगिता और क्षेत्र के विकास में उसकी भूमिका की जानकारी लेते हुए इसे बदलते बस्तर की नई तस्वीर का प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सड़क, पुल और अन्य आधारभूत सुविधाएं केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि वे दूरस्थ क्षेत्रों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाले मजबूत माध्यम हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास की पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक हो।
भारतीय सीमा सड़क संगठन द्वारा निर्मित यह बेली ब्रिज बीजापुर-पूवर्ती सड़क परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बेली ब्रिज पारंपरिक पुलों की तुलना में अधिक किफायती, मजबूत और टिकाऊ होते हैं। इनका निर्माण सामान्य पुलों की अपेक्षा लगभग पांच गुना कम लागत में किया जा सकता है तथा इन्हें मात्र एक माह के भीतर तैयार किया जा सकता है। दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित कनेक्टिविटी स्थापित करने के लिए यह तकनीक अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है।
उल्लेखनीय है कि बीजापुर जिले में अब तक 21 बेली ब्रिजों का निर्माण किया जा चुका है। इन पुलों के निर्माण से दूरस्थ गांवों तक आवागमन सुगम हुआ है तथा लोगों को आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच में बड़ी राहत मिली है। इन संरचनाओं ने क्षेत्र में विकास और जनसेवाओं के विस्तार को नई गति प्रदान की है।
मुख्यमंत्री ने श्रमिकों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के श्रमिक और युवा ही विकास यात्रा के वास्तविक निर्माणकर्ता हैं। उन्होंने श्रमिकों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके अनुभव भी साझा किए।
’बदलते बस्तर की नई पहचान’
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर में अधोसंरचना विकास के माध्यम से नई संभावनाओं का निर्माण हो रहा है। कोण्डापल्ली का यह बेली ब्रिज केवल एक पुल नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और सुशासन का सशक्त प्रतीक है। यह उस नए बस्तर की पहचान है, जहां विकास अब दूरस्थ गांवों और दुर्गम अंचलों तक मजबूती से पहुंच रहा है तथा लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।

 

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना केवल बिजली बिल कम करने की योजना नहीं, बल्कि सामान्य परिवारों को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का एक व्यापक अभियान : मुख्यमंत्री साय

02-Jun-2026
रायपुर ( शोर संदेश सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कोंडागांव जिले के ग्राम बड़ेकनेरा पहुंचे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के हितग्राही आनंद कुमार पवार से उनके निवास पर आत्मीय मुलाकात कर योजना से आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली। 
मुख्यमंत्री साय ने परिवार से संवाद कर जाना कि किस प्रकार एक जनकल्याणकारी योजना ने उनके जीवन में आर्थिक राहत, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद जगाई है।मुख्यमंत्री साय से चर्चा के दौरान आनंद कुमार पवार ने बताया कि पहले उनके घर का मासिक बिजली बिल लगभग 1200 से 1500 रुपये तक आता था, जो सीमित आय वाले परिवार के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ था। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत घर में सोलर सिस्टम स्थापित होने के बाद बिजली बिल पूरी तरह समाप्त हो गया और अब परिवार को बिजली खर्च की चिंता से पूरी तरह मुक्ति मिल गई है।
पवार ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री को बताया कि पहले उनका परिवार केवल बिजली का उपभोक्ता था, लेकिन अब वे स्वयं बिजली उत्पादन भी कर रहे हैं। इससे न केवल आर्थिक बचत बढ़ी है, बल्कि परिवार में आत्मनिर्भरता का भाव भी मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि हर महीने होने वाली बचत अब परिवार की अन्य जरूरतों और बच्चों के  भविष्य पर खर्च की जा रही है।
मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान पवार ने यह भी बताया कि योजना के लिए आवेदन करने के लगभग एक माह के भीतर उन्हें सब्सिडी प्राप्त हो गई। साथ ही बैंक से सरल प्रक्रिया के तहत ऋण भी उपलब्ध कराया गया, जिससे सोलर संयंत्र लगाने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं आई। शेष राशि का भुगतान आसान मासिक किश्तों में किया जा रहा है, जिससे परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव भी नहीं पड़ा।
आनंद कुमार पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उनके परिवार को केवल बिजली बिल से राहत ही नहीं दी, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी दिया है। उन्होंने कहा कि अब उनका परिवार स्वच्छ ऊर्जा से जुड़कर भविष्य की ओर अधिक भरोसे के साथ देख रहा है।
उल्लेखनीय है कि आनंद कुमार पवार, पिता चमन लाल पवार का घर बस्तर संभाग का पहला ऐसा प्रधानमंत्री आवास है, जहां प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर सिस्टम स्थापित किया गया है। यह आवास ग्रामीण विकास, स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भरता और सरकारी योजनाओं के प्रभावी समन्वय का प्रेरक मॉडल बनकर सामने आया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना केवल बिजली बिल कम करने की योजना नहीं, बल्कि सामान्य परिवारों को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का एक व्यापक अभियान है। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से परिवारों को आर्थिक राहत मिलने के साथ-साथ स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी नई मजबूती मिल रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचे और आमजन के जीवन में वास्तविक परिवर्तन दिखाई दे। बड़ेकनेरा के आनंद कुमार पवार की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जब योजनाएं संवेदनशीलता और प्रभावशीलता के साथ जमीनी स्तर तक पहुंचती हैं, तो वे केवल सुविधा नहीं देतीं, बल्कि जीवन की दिशा बदलने वाली नई संभावनाएं भी लेकर आती हैं।

 

 


कोंडागांव के विकास का नया स्वर्णिम अध्याय: मुख्यमंत्री ने दी 152 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात

02-Jun-2026
रायपुर, ( शोर संदेश ) सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कोंडागांव जिले के ग्राम बड़े कनेरा में आयोजित समाधान शिविर में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया, हितग्राहियों से संवाद किया तथा शासन की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी किया।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 44-45 डिग्री की भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में दूर-दूर से पहुंचे ग्रामीणों का उत्साह इस बात का प्रमाण है कि जनता का सरकार पर विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने उपस्थित नागरिकों का अभिनंदन करते हुए कहा कि यह जनसहभागिता सुशासन की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य केवल योजनाओं की समीक्षा करना नहीं, बल्कि जनता के बीच पहुंचकर यह जानना है कि योजनाओं का लाभ वास्तव में लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं। रायपुर में बैठकर जमीनी हकीकत का आकलन नहीं किया जा सकता, इसलिए सरकार गांव-गांव जाकर लोगों से सीधे संवाद कर रही है।
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि 1 मई से प्रारंभ हुआ सुशासन तिहार 10 जून तक चलेगा और इस दौरान प्राप्त आवेदनों का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बड़े कनेरा का यह शिविर प्रदेश का 19वां जिला स्तरीय समाधान शिविर है, जहां लोगों का उत्साह और सहभागिता उल्लेखनीय रही।
छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल बस्तर संभाग में बुनियादी सुविधाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कोंडागांव जिले के विकास का एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख दिया है। सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित समाधान शिविर में मुख्यमंत्री ने जिले को 152 करोड़ 18 लाख 84 हजार रुपये की लागत वाले 43 महत्वपूर्ण निर्माण एवं विकास कार्यों की सौगात दी।
इन कार्यों में जनता को त्वरित लाभ पहुंचाने वाले 96 करोड़ 30 लाख 63 हजार रुपये की लागत के 14 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 55 करोड़ 88 लाख 21 हजार रुपये की लागत के 29 नए विकास कार्यों का भूमिपूजन शामिल है।
समाधान शिविर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इन घोषणाओं से सड़क, पर्यटन, सामाजिक अधोसंरचना और धार्मिक स्थलों के विकास को नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने नारंगी नदी स्थित स्टॉप डेम सह पुलिया के जीर्णोद्धार के लिए 2 करोड़ रुपये की स्वीकृति की घोषणा की। इसके साथ ही केशकाल–बांसकोट–माकड़ी–एरला मार्ग के 53 किलोमीटर लंबे मार्ग के मजबूतीकरण कार्य को मंजूरी दी गई।
उन्होंने बड़े कनेरा से बड़ेबेंद्री, बाईकापदर और चिपावंड तक पुल-पुलियों सहित 12 किलोमीटर सड़क निर्माण तथा बड़े कनेरा से नवागुड़ा तक पुल-पुलियों सहित 5 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य की घोषणा की।
स्थानीय व्यापार और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बड़े कनेरा में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स भवन का निर्माण कराया जाएगा। वहीं कोसारटेडा में पर्यटन विकास कार्य किए जाएंगे, जिससे क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं को नई पहचान मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने विश्रामपुरी में गोंडवाना भवन तथा केशकाल में सर्व आदिवासी समाज भवन निर्माण की घोषणा भी की। इसके अलावा बड़े कनेरा स्थित प्राचीन शिव मंदिर के जीर्णोद्धार की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े कनेरा एक जागरूक गांव के रूप में उभरकर सामने आया है। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही चमन लाल और पीएम सूर्य घर योजना के लाभार्थी आनंद कुमार पवार से मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां के लोग योजनाओं का लाभ लेकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जिस घर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान बना है, उसी घर में पीएम सूर्य घर योजना के तहत सोलर पैनल भी स्थापित किया गया है। इससे बिजली बिल शून्य हो गया है और परिवार ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में  हमने "मोदी की गारंटी" के नाम से जो वादे किए थे, उनमें से अधिकांश को मात्र ढाई वर्षों के भीतर पूरा कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि पिछली सरकार के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित रहे 18 लाख गरीब परिवारों के लिए सरकार ने सत्ता संभालते ही आवास स्वीकृत किए। आज छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन लगभग 1600 प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण हो रहा है और इस मामले में राज्य देश में अग्रणी स्थान पर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदा जा रहा है तथा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। साथ ही दो वर्षों का लंबित बोनस भी किसानों को प्रदान किया गया है। उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। आने वाले समय में 10 लाख लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण की दर को 4000 रुपये से बढ़ाकर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा किया गया है। तेंदूपत्ता संग्राहकों के बच्चों को छात्रवृत्ति एवं प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है। वन आधारित आजीविका को मजबूत करने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीणों को अपनी आवश्यक सेवाओं के लिए शहरों या कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। अटल डिजिटल सुविधा केंद्रों के माध्यम से 400 से अधिक सेवाएं गांव स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इन केंद्रों में बैंकिंग सेवाएं, प्रमाण पत्र, भुगतान सेवाएं तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं से जुड़ी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं। आने वाले समय में मोबाइल एप के माध्यम से भी लोग घर बैठे आवेदन और प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जून माह से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शुरू की जाएगी। इसके माध्यम से नागरिक घर बैठे अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे। प्रत्येक शिकायत के निराकरण के लिए समय-सीमा निर्धारित होगी और तय अवधि में समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने नागरिकों से मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना का लाभ लेने की अपील करते हुए कहा कि कोरोना काल के दौरान बढ़े बिजली बिलों से राहत देने के लिए सरकार ने विशेष योजना शुरू की है। इसके तहत बकाया राशि में छूट और आसान किस्तों की सुविधा प्रदान की जा रही है। प्रदेश में लगभग 757 करोड़ रुपये की राहत दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार हर घर जल, हर घर बिजली, हर घर शौचालय और हर घर बैंक खाता अभियान सफल हुए हैं, उसी प्रकार अब हर घर सोलर लगाने का लक्ष्य लेकर सरकार आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार मिलकर लाखों परिवारों को सब्सिडी प्रदान कर रही हैं, जिससे लोग ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि विकास और सुशासन का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और इसी उद्देश्य से सुशासन तिहार के माध्यम से शासन स्वयं जनता के द्वार तक पहुंच रहा है।
इस अवसर पर बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं कोंडागांव विधायक  लता उसेंडी, केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल, कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।
 

 


संवेदनशील प्रशासन और जवाबदेही पर मुख्यमंत्री साय का जोर, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

01-Jun-2026
रायपुर( शोर संदेश  शासन-प्रशासन की सफलता का वास्तविक पैमाना जनता के प्रति उसकी संवेदनशीलता, जवाबदेही और कार्य के प्रति प्रतिबद्धता है। अधिकारी आमजन की समस्याओं को केवल सुनें ही नहीं, बल्कि उनका त्वरित और प्रभावी निराकरण भी सुनिश्चित करें, ताकि नागरिकों को शासकीय कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बेमेतरा प्रवास के दौरान जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक उनका वास्तविक लाभ पहुंचाना है और इसके लिए प्रशासन को अधिक सक्रिय, परिणामोन्मुखी तथा संवेदनशील बनना होगा।
बैठक में बेमेतरा, दुर्ग, राजनांदगांव, कबीरधाम तथा खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में विकास योजनाओं, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों, कानून-व्यवस्था तथा प्रशासनिक कार्यों की गहन समीक्षा की गई। प्रदेश के अन्य जिलों के अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद कर योजनाओं की प्रगति की जानकारी भी ली गई।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तभी सार्थक होगा, जब आम नागरिक को अपनी समस्या के समाधान के लिए भटकना न पड़े। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए प्रत्येक शिकायत, आवेदन और जनसमस्या का गंभीरता से निराकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जनता के प्रति संवेदनशीलता और जवाबदेही प्रशासनिक व्यवस्था की आत्मा है तथा जनसमस्याओं का समाधान केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन को एक मजबूत, प्रभावी और भरोसेमंद मंच के रूप में विकसित कर रही है, जहां नागरिक सरलता से अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायतों की निगरानी उच्च स्तर पर की जाएगी, जिससे अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी और शिकायतों का समयबद्ध निराकरण संभव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन प्रशासन और जनता के बीच दूरी कम करने का सशक्त माध्यम बनेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि शासन की योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक बिना किसी बाधा के पहुंचे।
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग के कार्यों को विशेष प्राथमिकता देते हुए समय-सीमा से बाहर तथा एक वर्ष से अधिक समय से लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और अभिलेख सुधार जैसे मामले सीधे नागरिकों के अधिकारों और जीवन से जुड़े होते हैं, इसलिए इनके निराकरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने राजस्व अभिलेखों में त्रुटियों के सुधार तथा जानबूझकर गलतियां करने वाले पटवारियों एवं संबंधित कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यभर में आयोजित सुशासन तिहार के माध्यम से शासन और जनता के बीच संवाद मजबूत हुआ है तथा योजनाओं का लाभ तेजी से लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक शिकायत और आवेदन का संवेदनशीलता के साथ समाधान सुनिश्चित किया जाए।
ग्रीष्मकालीन परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में पेयजल आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की और नागरिकों को पर्याप्त एवं नियमित पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानसून के आगमन के साथ मौसमी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए स्वास्थ्य विभाग आवश्यक दवाइयों, चिकित्सा दलों और संसाधनों की अग्रिम तैयारी सुनिश्चित करे, ताकि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का उल्लेख करते हुए डीजल और पेट्रोल के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता बताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में डीजल एवं पेट्रोल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है तथा किसी प्रकार की कमी नहीं है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ईंधन संकट संबंधी अफवाह फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने खाद एवं बीज की उपलब्धता, भंडारण और वितरण व्यवस्था की विस्तृत जानकारी ली तथा किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद-बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। डीएपी उर्वरक की सीमित उपलब्धता को देखते हुए उन्होंने एसएसपी, यूरिया, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के प्रति किसानों को जागरूक करने पर विशेष बल दिया।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिक संख्या में ‘ड्रोन दीदी’ तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाया जाए, जिससे कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी।
बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, आयुष्मान भारत योजना, जल जीवन मिशन, बिहान योजना तथा धान उठाव की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से अधिक से अधिक परिवारों को लाभान्वित कर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जाए। आयुष्मान भारत योजना की समीक्षा के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल कार्ड बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पात्र नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण उपचार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का वास्तविक लाभ भी मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री साय ने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस प्रयासों की आवश्यकता पर बल देते हुए स्कूलों में सीखने के स्तर को बेहतर बनाने, नियमित मॉनिटरिंग और नवाचार आधारित शिक्षा पद्धतियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। इसके साथ ही सड़क सुरक्षा, पुलिस व्यवस्था और देश में लागू तीन नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा कर कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया।
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी विभागों से बेहतर समन्वय, स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण और जवाबदेह कार्यसंस्कृति के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि अधिकारियों के समर्पित एवं समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी और विकसित राज्यों की श्रेणी में स्थापित किया जा सकता है।
बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, सांसद विजय बघेल, विधायक ईश्वर साहू,  मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, दुर्ग संभागायुक्त सत्यनारायण राठौर, पुलिस महानिरीक्षक अभिषेक शांडिल्य सहित बेमेतरा, दुर्ग, राजनांदगांव, कबीरधाम तथा खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

पत्रकार लोकतंत्र के सच्चे सेनानी, समाज को दिशा देने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

31-May-2026
रायपुर ( शोर संदेश  पत्रकार लोकतंत्र के सच्चे सेनानी हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर परिश्रम करते हुए सूचनाओं को जन-जन तक पहुंचाते हैं और समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मीडिया की सकारात्मक आलोचना केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि प्रशासन और सरकार को भी आत्ममंथन और बेहतर कार्य की दिशा प्रदान करती है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर परिसर के सुंदर सदन में आयोजित पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव को संबोधित करते हुए यह बात कही। यह आयोजन हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित किया गया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि माता कौशल्या की धरती और भगवान श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा पर आधारित ऐसा अद्भुत आयोजन निश्चित रूप से अभिनंदनीय है। उन्होंने आयोजन के लिए रायपुर प्रेस क्लब को बधाई देते हुए कहा कि रायपुर प्रेस क्लब देश के पुराने और प्रतिष्ठित प्रेस क्लबों में से एक है, जिसका इतिहास समृद्ध और प्रेरणादायी रहा है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता और पत्रकारों के सम्मान में आयोजित ऐसे कार्यक्रम प्रेस क्लब की प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता का सशक्त प्रमाण हैं।
मुख्यमंत्री साय ने रायपुर की पत्रकारिता परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस शहर ने पत्रकारिता जगत को अनेक शिखर पुरुष दिए हैं। उन्होंने मधुकर खेर, मायाराम सुरजन, ललित सुरजन, रमेश नैय्यर और बबन प्रसाद मिश्र सहित अनेक प्रतिष्ठित संपादकों और पत्रकारों का स्मरण करते हुए कहा कि इन विभूतियों ने पत्रकारिता की सशक्त और वैचारिक परंपरा को समृद्ध किया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र की आधारशिला है और देश के स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन तक पत्रकारिता ने हमेशा परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि 30 मई 1826 को कोलकाता से  जुगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित देश के प्रथम हिंदी समाचार पत्र उदंत मार्तंड ने भारतीय पत्रकारिता की मजबूत नींव रखी। हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों की यह गौरवशाली यात्रा देशवासियों के लिए गर्व का विषय है।
मुख्यमंत्री ने भारतीय सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देवर्षि नारद को आदि पत्रकार माना जाता है और इसी कारण पत्रकार बंधु नारद जयंती को सम्मानपूर्वक मनाते हैं। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत रोचक और प्रेरक तथ्य है कि उदंत मार्तंड का प्रकाशन भी नारद जयंती के दिन आरंभ हुआ, जो इस बात का प्रतीक है कि भारतीय पत्रकारिता की जड़ें हमारी सांस्कृतिक चेतना और सनातन मूल्यों से गहराई से जुड़ी रही हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय पत्रकारिता ने राष्ट्रवादी चेतना को स्वर देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महात्मा गांधी, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, माधवराव सप्रे और सुभाषचंद्र बोस सहित अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने पत्रकारिता को सामाजिक जागरण और राष्ट्रीय चेतना के माध्यम के रूप में उपयोग किया। उन्होंने कहा कि जब भी भारतीय पत्रकारिता का गौरवशाली इतिहास लिखा जाएगा, तब छत्तीसगढ़ का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगा। 
उन्होंने मां भारती के सपूत माधवराव सप्रे का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने छत्तीसगढ़ से छत्तीसगढ़ मित्र का संपादन कर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों को जागृत और संगठित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पत्रकारिता की चर्चा जब भी होगी, तब भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण स्वाभाविक रूप से होगा। उन्होंने कहा कि अटल जी ने अपनी पत्रकारिता के माध्यम से राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय चेतना की जो अलख जगाई, उसने स्वतंत्र भारत में लाखों लोगों को प्रेरित किया। स्वदेश और राष्ट्रधर्म जैसे प्रकाशनों ने राष्ट्र चेतना और राष्ट्रीय अस्मिता को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने मोदी की गारंटियों को धरातल पर उतारने का कार्य किया है और प्रदेश की अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने विशेष रूप से नक्सलवाद उन्मूलन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस तथा जनसहभागिता के साथ-साथ पत्रकारों की महत्वपूर्ण भूमिका के कारण प्रदेश में शांति और विकास का वातावरण मजबूत हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंसा और भटकाव के रास्ते पर जाने वाले लोगों को शांति, विकास और मुख्यधारा की ओर प्रेरित करने में पत्रकारों ने बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आज जब मीडिया बस्तर में हो रहे सकारात्मक बदलाव, विकास, पर्यटन, प्राकृतिक सौंदर्य और बढ़ती संभावनाओं की खबरें सामने लाता है, तब देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ की नई पहचान बनती है। जो बस्तर कभी बंदूक और हिंसा की खबरों से पहचाना जाता था, आज वही बस्तर पर्यटन, प्रकृति और विकास की नई संभावनाओं का केंद्र बनकर उभर रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की यात्रा अत्यंत गौरवशाली रही है। उन्होंने कहा कि 1826 में जब उदंत मार्तंड की शुरुआत हुई, तब देश अंग्रेजी शासन के कठिन दौर से गुजर रहा था। ऐसे समय में पत्रकारिता ने अंधकार को सामने लाने के साथ समाज को उजाले की दिशा दिखाने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल धर्म समाज और राष्ट्र को सही दिशा प्रदान करना है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार एवं इंडिया हैबिटेट सेंटर के डायरेक्टर डॉ. के.जी. सुरेश ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर स्वतंत्र भारत तक पत्रकारिता ने राष्ट्रधर्म और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने समय के साथ बदलती तकनीकों के अनुरूप स्वयं को विकसित किया है, किंतु सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और नागरिक पत्रकारिता की अवधारणा ने कई नई चुनौतियां भी उत्पन्न की हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को शोधपरक, तथ्यात्मक और साक्ष्य आधारित बनाए रखना समय की आवश्यकता है, ताकि पत्रकारिता की विश्वसनीयता और सामाजिक भूमिका और मजबूत हो सके।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्टजनों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रकाशित नवप्रदेश के विशेष अंक, रायपुर प्रेस क्लब की पत्रकार डायरेक्टरी तथा दिनेश यदु की पुस्तक 'मैं अगहन हूं' का विमोचन भी किया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, मुख्यमंत्री के सलाहकार कृष्णा दास, विधायक पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय श्रीवास्तव, सीएसआईडीसी के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा, राम मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष सुनील रामदास, रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी, प्रेस क्लब के पदाधिकारीगण, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।


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