
टोक्यो/नई दिल्ली (शोर संदेश)। बजरंग पूनिया ने 65 किग्रा भार वर्ग में ईरान के घियासी चेका मुर्तजा को 2-1 से पटखनी देकर कर सेमीफाइनल में जगह पक्की की। बजरंग को फाइनल में जगह बनाने के लिए अजरबैजान के अलीयेव हाजी से भिड़ना होगा। अलीयेव तीन बार के विश्व चैंपियन और रियो खेलों के कांस्य विजेता हैं। बजरंग ने इससे पहले किर्गीस्तान के अर्नाजार अकमातालिएव को हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह पक्की की थी। अगर मैच की बात करें तो पहले दौर में ईरान के पहलवान ने एक अंक हासिल करते हुए बजरंग पर 1-0 की बढ़त बना ली। वहीं, बजरंग ने दूसरे दौर में शानदार वापसी करते हुए दो अंक हासिल कर 2-1 की बढ़त बना ली और मैच जीत लिया।


टोक्यो/नई दिल्ली (शोर संदेश)। ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम को कांस्य पदक के मुकाबले में ग्रेट ब्रिटेन के हाथों 3-4 से करारी हार का सामना करना पड़ा। गुरुवार को भारतीय पुरुष टीम ने जर्मनी को हराकर कांस्य पदक अपने नाम किया था। महिला टीम के पास भी आज इतिहास रचने का मौका था, लेकिन वह ऐसा करने में कामयाब नहीं हो पाई।हालांकि, भारतीय टीम ने ब्रिटेन को कड़ी टक्कर दी। 2016 के रियो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली ग्रेट ब्रिटेन को भारत के खिलाफ मैच जीतने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। एक वक्त 3-2 पिछड़ रही ब्रिटेन आखिरी क्वार्टर में बढ़त बना पाई। इसलिए भारत मैच हारकर भी लोगों का दिल जीतने में कामयाब रहा।टीम इंडिया भले ही कांस्य पदक नहीं जीत पाई हो, लेकिन उसने टोक्यो में अपने अभियान का अंत चौथे स्थान पर रहकर किया। इससे पहले 1980 में भी भारतीय महिला हॉकी टीम चौथे स्थान पर रही थी। उस वक्त मुकाबले राउंड रोबिन आधार पर हुए थे और टॉप की दो टीमों के बीच फाइनल खेला गया था।कांस्य पदक के मुकाबले में शुरुआती 15 मिनट के खेल में भारतीय टीम अपनी लय पाने की कोशिश करती दिखी। इस वजह से टीम इंडिया खराब डिफेंस एक फिर सामने आया।इसका पूरा फायदा ब्रिटेन ने उठाया और 2-0 की बढ़त के साथ टीम इंडिया को दबाव में डाल दिया।इसके बाद टीम इंडिया ने शानदार वापसी की और हाफ टाइम में 3-2 की बढ़त के साथ ब्रिटेन को बैकफुट पर ला दिया। इसके बावजूद ब्रिटेन ने लगातार अपने अटैक के जरिए भारत की परीक्षा ली। यहीं, टीम इंडिया की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी जीत के रास्ते में रोड़ बन गई। आइए जानते हैं भारत की हार के 5 कारण...
00 पहले क्वार्टर से ही डिफेंस कमजोर दिखा
पहले क्वार्टर में टीम इंडिया का कमजोर डिफेंस मुश्किलें खड़ी करता रहा। हालांकि, ग्रेट ब्रिटेन के खिलाड़ी इसका फायदा नहीं उठा सके। भारतीय खिलाड़ी की खराब डिफेंस का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पहले क्वार्टर में ब्रिटेन के खिलाड़ी भारतीय टीम के डी में बॉल पहुंचाने में कामयाब हो रहा था।
00 ब्रिटेन के अटैक का तोड़ नहीं निकाल पाए
पहले क्वार्टर के बाद ब्रिटेन ने अपना अटैकिंग खेल दिखाया और एक के बाद एक कई गोल शॉट लगाए। इस क्वार्टर के शुरू होने के तुरंत बाद 16वें मिनट में ब्रिटेन ने अपना पहला गोल किया। इससे पहले भारत इसे बराबर करने की कोशिश करता, ब्रिटेन ने 24वें मिनट में गोल दागकर अपनी बढ़त दोगुनी कर दी। जब भारत ने ब्रिटेन पर बढ़त ली, उसके बाद उनका अटैक और तेज हो गया। भारत के पास इस अटैक का कोई जवाब नहीं था और मुकाबला ब्रिटेन के पक्ष में रहा।
00 अहम मौकों पर पैनल्टी कॉर्नर पर स्कोर नहीं कर पाए
टीम इंडिया को मैच में वापसी करने के कई मौके मिले, लेकिन भारत उन्हें भुना नहीं पाया। इस मैच में भारत को कुल 8 पैनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन भारत सिर्फ 2 को गोल में तब्दील कर पाया। मैच में तब 8 मिनट बचे थे, तब भारत को ब्रिटेन की बराबरी का मौका मिला था, लेकिन टीम पैनल्टी कॉर्नर को स्कोर में बदलने में कामयाब नहीं हो सकी।
00 अटैक करने में पीछे रही टीम
ग्रेट ब्रिटेन के सामने भारत का अटैक फीका नजर आया। टीम इंडिया ज्यादातर ब्रिटेन के प्रहारों को बचाने का प्रयास करती नजर आई। इसकी अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ब्रिटेन के मुकाबले आधे गोल शॉट ही लगाए। ब्रिटेन ने मैच में कुल 19 गोल शॉट लगाए, जबकि भारत की ओर से सिर्फ 11 गोल शॉट लगे।
00 सविता पुनिया को टीम का साथ नहीं मिला
भारत की ओर डिफेंस का जिम्मा एक बार सिर्फ गोलकीपर सविता पुनिया के कंधों पर रहा। सविता ने 11 गोल शॉट में से 7 का बचाव किया। उन्होंने दीवार की तरह ब्रिटेन के अटैक का सामना किया, लेकिन उन्हें किसी और डिफेंडर का साथ नहीं मिला। टीम इंडिया को इसी का खामियाजा हार के साथ चुकाना पड़ा।

टोक्यो/नई दिल्ली (शोर संदेश)। भारतीय हॉकी टीम ने 41 साल बाद ओलंपिक में पदक हासिल कर लिया है। भारत ने टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक के मुकाबले में जर्मनी को हरा दिया। मैच में शुरुआत में पिछड़ने के बाद भारत ने जोरदार वापसी की और जर्मनी के खिलाफ मैच को 5-4 से जीत लिया। इससे पहले आखिरी बार हॉकी में टीम इंडिया ने 1980 में ओलंपिक मेडल जीता था।जर्मनी ने मैच के दूसरे ही मिनट में अपना खाता खोल लिया था। जर्मनी की तरफ से तिमूर ओरुज ने पहला गोल दागा। इसके साथ ही जर्मनी ने 1-0 की बढ़त ले ली थी। इसके बाद भारतीय टीम ने 17वें मिनट में वापसी की, जब सिमरनजीत सिंह ने जोरदार खेल दिखाते हुए जर्मन गोलकीपर को छकाया और गोल करने में सफल रहे। इस गोल के साथ ही दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर आ गई।
00 दूसरे क्वार्टर में स्कोर बराबर
हालांकि, यह बढ़त ज्यादा देर नहीं टिक सकी और जर्मनी की तरफ से निकलास वेलेन ने 24वें मिनट में अपना पहला और टीम के लिए दूसरा गोल कर जर्मनी 2-1 से आगे कर दिया। इसके बाद जर्मनी ने एक मिनट के अंदर एक और गोल दागा और अपनी लीड को 3-1 कर दिया। उसकी तरफ से तीसरा गोल फुर्क बेनेडिक्ट ने 25वें मिनट में किया।
मैच के 27वें मिनट में भारत को पैनल्टी कॉर्नर मिला और हार्दिक सिंह ने उसे गोल में तब्दील कर जर्मनी की बढ़त को कम कर दिया। सिमरनजीत सिंह की ओर से लिए गए पैनल्टी कॉर्नर को जर्मनी के गोलकीपर ने रोका, लेकिन गेंद रिफ्लेक्ट हुई और हार्दिक ने उसे गोल पोस्ट में भेज दिया। इसी के साथ स्कोर 3-2 हो गया।
इसके बाद भारत ने और आक्रामक खेल दिखाया और मैच का तीसरा गोल कर दिया। इसी के साथ दोनों ही टीम 3-3 की बराबरी पर पहुंच गईं। दूसरे क्वार्टर के खत्म होने से पहले 29वें मिनट में हरमनप्रीत ने यह शानदार गोल किया।
00 भारत ने तीसरे क्वार्टर में पलटा मैच
भारत ने तीसरे क्वार्टर में शानदार शुरुआत की। भारत को पैनल्टी स्ट्रोक मिला और रुपिंदर ने कोई गलती नहीं की। रुपिंदर ने गेंद को सीधा गोलपोस्ट में डाला और भारत को 4-3 की अहम और मजबूत बढ़त दिला दी। इसके बाद 34वें मिनट में सुमित के पास पर सिमरनजीत सिंह ने शानदार गोल दागा और भारत को 5-3 ये आगे कर कांस्य पदक के और करीब ले आए।
00 चौथे क्वार्टर में जर्मनी को रोकने में भारत कामयाब
चौथा क्वार्टर शुरू होने के साथ ही जर्मनी ने आक्रामक खेल दिखाया और गोल करने की हर संभव कोशिश की। मैच के 48वें मिनट में जर्मनी को पैनल्टी कॉर्नर के रूप में मौका मिला और विंडफेडर ने उसे गोल में तब्दील कर दिया। इसी के साथ स्कोर 5-4 हो गया।
इसके बाद भारत ने शानदार डिफेंस दिखाया और जर्मनी को गोल नहीं करने दिया। मैच आखिरी पलों में रोमांचक मोड़ तब आया, जब जर्मनी को एक और पैनल्टी कॉर्नर दिया गया। हालांकि, भारतीय गोलकीपर श्रीजेश ने उसे बचाकर भारत की जीत सुनिश्चित की।


टोक्यो/ नई दिल्ली (शोर सन्देश)। भारत की महिला हॉकी टीम ने टोक्यो ओलंपिक में सबको चौंकाते हुए इतिहास रच दिया है। महिला हॉकी टीम ने ऑस्ट्रेलिया को 1-0 से हराकर पहली बार सेमीफाइनल में पहुंच गई है। इस मैच में गुरजीत कौर के गोल और रक्षापंक्ति के बेहतरीन प्रदर्शन से भारतीय महिला हॉकी टीम ने तीन बार सोना जीतने वाली ऑस्ट्रेलिया को 1-0 से हराकर पहली बार ओलंपिक के सेमीफाइनल में जगह बनाकर नया इतिहास रच दिया।गुरजीत ने 22वें मिनट में पेनल्टी कार्नर पर यह महत्वपूर्ण गोल किया। इसके बाद भारतीय टीम ने अपनी पूरी ताकत गोल बचाने में लगा दी जिसमें वह सफल भी रही। गोलकीपर सविता ने बेहतरीन खेल दिखाया और बाकी रक्षकों ने उनका अच्छा साथ दिया। भारतीय महिला टीम का अब तक का श्रेष्ठ प्रदर्शन भी इसी ओलंपिक में रहा, जब वह छह टीमों में चौथे स्थान पर रही।
00 सेमीफाइनल में भारतीय टीम का सामना अर्जेंटीना से
सेमीफाइनल में भारत का सामना चार अगस्त को अर्जेंटीना से होगा, जिसने जर्मनी को 3-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई है। इस प्रदर्शन से 41 साल में पहली बार महिला हॉकी में पदक की उम्मीद जगी है। बता दें कि भारतीय टीम मास्को ओलंपिक 1980 में चौथे स्थान पर रही थी लेकिन केवल छह टीमों ने हिस्सा लिया था और मैच राउंड रोबिन आधार पर खेले गए थे। इस बार भारतीय महिला हॉकी टीम अपने पूल में दक्षिण अफ्रीका और आयरलैंड को हराकर चौथे स्थान पर रही थी जबकि आस्ट्रेलिया अपने पूल में शीर्ष पर रहा था। भारतीय पुरुष टीम पहले ही सेमीफाइनल में जगह बना चुकी है।

टोक्यो/नई दिल्ली (शोर संदेश)। भारतीय पुरुष हॉकी टीम टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने के और करीब पहुंच गई है। मनप्रीत सिंह की अगुवाई में टीम ने क्वार्टरफाइनल में ग्रेट ब्रिटेन को एकतरफा मुकाबले में 3-1 से पटखनी दी। इस जीत के साथ ही भारतीय टीम 49 साल बाद ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंचने में सफल रही। क्वार्टरफाइनल मुकाबले में भारत की तरफ से दिलप्रीत सिंह, गुर्जंत सिंह और हार्दिक सिंह ने एक-एक गोल दागे जबकि गोलकीपर श्रीजेश ने भी ब्रिटेन के कई शॉट्स को सफलतापूर्वक रोका।भारत की जीत के साथ ही अब सेमीफाइनलिस्ट का नाम भी तय हो गया है। भारत को जहां विश्व चैंपियन बेल्जियम से चुनौती मिलेगी वहीं अन्य मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी आमने-सामने होंगे। बात करें भारत के अब तक के सफर की तो उसने न्यूजीलैंड के खिलाफ अपना पहला मुकाबला 3-2 से जीता। हालांकि इसके बाद दूसरे मैच में उसे ऑस्ट्रेलिया के हाथों 1-7 से शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। लेकिन इसके बाद भारतीय टीम ने जोरदार वापसी की और फिर स्पेन को 3-0, अर्जेंटीना को 3-1 और जापान को 5-3 से हराया। इस के साथ भारतीय टीम ग्रुप ए में पांच में से चार मुकाबले जीतकर दूसरे स्थान पर रही।

टोक्यो/नई दिल्ली (शोर सन्देश)। टोक्यो ओलंपिक में बॉक्सिंग में भारत को जबरदस्त झटका लगा। बॉक्सर सतीश कुमार 91 किग्रा भार वर्ग में उजबेकिस्तान के बखोदिर जालोलोव से हार गए। जालोलोव ने उन्हें 5-0 से शिकस्त दी। इस हार के साथ सतीश का टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने का सपना टूट गया। प्री क्वार्टर फाइनल में लगी चोट के कारण वह सात टांके लगवाकर रिंग में उतरे थे। इस दौरान उन्होंने विश्व चैंपियन जालोलोव को कड़ी टक्कर देते हुए घायल भी किया। लेकिन यह उनकी बदकिस्मती रही कि सतीश मुकाबला जीत नहीं पाए। सेना के 32 वर्ष के बॉक्सर सतीश ने अपने दाहिए हाथ से भी प्रतिद्वंदी पर पंच जड़े। लेकिन विश्व चैंपियन जालोलोव इस मुकाबले में भारतीय मुक्केबाज पर हावी रहे। तीसरे दौर का मुकाबला जब शुरू हुआ तो सतीश के माथे का घाव घुल गया। वह खून से लथपथ हो गए लेकिन लेकिन मैदान नहीं छोड़ा। इस मुकाबले में सतीश ने घायल शेर की तरह अपने प्रतिद्वंदी का सामना किया। यही वजह थी कि जीतने के बाद खुद जालोलोव ने उनकी जमकर तारीफ की। सतीश ओलंपिक में सुपर हेवीवेट मुकाबले में क्वालीफाई करने वाले भारत के पहले मुक्केबाज थे। वहीं बखोदिर जालोलोव तीन बार एशियाई चैंपियन रह चुके हैं। सतीश कुमार की इस हार के बाद पुरुषों की मुक्केबाजी स्पर्धा में भारत की चुनौती समाप्त हो गई है। वहीं महिला वर्ग में एक मात्र उम्मीद लवलीना बोरगोहेन से है। वह बॉक्सिंग में भारत का पदक पक्का कर चुकी हैं। अब वह सेमीफाइनल में अपने प्रतिद्वंदी के खिलाफ भिड़ेंगीं। अब देखना होगा कि लवलीना भारत के लिए स्वर्ण जीतती हैं या फिर रजत। सेमीफाइनल में पहुंचते ही उन्होंने कांस्य पदक पक्का कर लिया था।

टोक्यो/नई दिल्ली (शोर संदेश)। टोक्यो ओलंपिक के नौवें दिन कमलप्रीत कौर ने देश को खुशी का मौका दिया। महिलाओं की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में कमलप्रीत कौर ने फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। क्वॉलिफिकेशन राउंड में ग्रुप बी से कौर ने तीसरे प्रयास में 64 मीटर का स्कोर हासिल किया और दूसरे स्थान पर रहीं। कमलप्रीत भारत की ओर से रिकॉर्ड स्कोर करने वाली खिलाड़ी बन गई हैं।कमलप्रीत के अलावा ग्रुप ए से सीमा पुनिया ने 60.57 मीटर का स्कोर किया और छठे स्थान पर रहीं लेकिन वह फाइनल में क्वालीफाई करने से चूक गईं।बात करें कमलप्रीत की तो उन्होंने पहले प्रयास में 60.29 मीटर, दूसरे में 63.97 और आखिरी प्रयास में 64 का स्कोर किया। फाइनल में पहुंचने के लिए 64 ही क्वॉलिफिकेशन मार्क था। अब कमलप्रीत दो अगस्त को फाइनल में भारत की तरफ से दावेदारी पेश करेंगी।


टोक्यो/नई दिल्ली (शोर संदेश)। भारत की बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रच दिया। वह सेमीफाइनल में पहुंच गई हैं। उनके सेमीफाइनल में पहुंचने के बाद भारत का एक और पदक पक्का हो गया है। क्वार्टर फाइनल में लवलीना ने महिलाओं की 69 किग्रा भार वर्ग में चीनी ताइपे की खिलाड़ी निएन चिन चेन को 4-1 से करारी शिकस्त दी। अब सेमीफाइनल में लवलीना का मुकाबला मौजूदा विश्व चैंपियन तुर्की की बुसानेज सरमेनेली से होगा। जिन्होंने क्वार्टर फाइनल में अन्ना लिसेंको को शिकस्त दी। दो बार की विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुकीं लवलीना बोरगोहेन ने मैच के दौरान गजब का प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिद्वंदी को हराया। मुकाबले के आखिरी के तीन मिनटों में उन्होंने अपना रक्षण भी नियंत्रित रखा और जवाबी हमले में अपने प्रतिद्वंदी पर भारी पड़ीं। बीते साल लवलीना कोरोना संक्रमण का शिकार गई थीं। जिसके चलते वह अभ्यास करने के लिए यूरोप नहीं जा पाईं। चीनी ताइपे की खिलाड़ी निएन चिन चेन को हराने के बाद जैसे ही रेफरी ने उनका हाथ ऊपर उठाया वह खुशी के मारे फूली नहीं समाई और जोर-जोर से चिल्लाने लगीं। इससे पहले बॉक्सिंग में भारत की खराब शुरुआत हुई और सिमरनजीत कौर को 60 किग्रा स्पर्धा में थाईलैंड की सुदापोर्न सीसोंदी से हार का सामना करना पड़ा। सीसोंदी ने सिमरनजीत को एकतरफा मुकाबले में 5-0 से शिकस्त दी थी।

टोक्यो/नई दिल्ली (शोर संदेश)। भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी और रियो ओलंपिक की सिल्वर गर्ल पीवी सिंधु टोक्यो ओलंपिक के महिला सिंगल्स के क्वॉर्टर फाइनल में पहुंच गई हैं। सिंधु ने राउंड ऑफ 16 मुकाबले में डेनमार्क की मिया ब्लिचफेल्ट को सीधे गेमों में हराया।छठी वरीय सिंधु ने 41 मिनट चले प्री क्वॉर्टर फाइनल मुकाबले में मिया को 21-15, 21-13 से हराया। दुनिया की 12वें नंबर की डेनमार्क की खिलाड़ी के खिलाफ सिंधु की पिछले छह मैचों में यह पांचवीं जीत है। भारतीय खिलाड़ी को मिया के खिलाफ एकमात्र हार का सामना इसी साल थाईलैंड ओपन में करना पड़ा था।सिंधु का सामना अब क्वॉर्टर फाइनल में जापान की चौथी चरीय अकाने यामागुची और कोरिया की 12वीं वरीय किम गुएन के बीच होने वाले मुकाबले के विजेता से होगा।टोक्यो ओलंपिक में पीवी सिंधु ने अपने अभियान का आगाज रविवार को जीत के साथ किया था। वे इजराइल की क्सेनिया पोलिकारपोवा को हराकर अपने ग्रुप में प्री कॉर्टर फाइनल में पहुंची थीं। इसके बाद उन्होंने बुधवार को ग्रुप `जे` में हांगकांग की एनवाई चियुंग को हराकर प्री क्वॉर्टर फाइनल में प्रवेश किया था।

टोक्यो/नई दिल्ली (शोर संदेश)। भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने टोक्यो ओलंपिक में शानादर प्रदर्शन करते हुए तीसरे दौर (नॉकआउट) में जगह बना ली। ग्रुप जे के अपने दूसरे मुकाबले में सिंधु ने हांगकांग की च्युंग एनगान को 21-9 और 21-16 से शिकस्त दी। उन्होंने दूसरे मैच में अपने प्रतिद्वंदी पर 36 मिनट में जीत दर्ज की। टोक्यो ओलंपिक में बैडमिंटन स्पर्धा में भारत की एक मात्र उम्मीद पीवी सिंधु बची हैं। इस जीत के साथ दुनिया की नंबर 7 बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने च्युंग एनगान यी के खिलाफ अपनी जीत का रिकॉर्ड 6-0 कर लिया है। इससे पहले दोनों खिलाड़ियों के बीच पांच मुकाबले खेले गए और हर बार सिंधु जीतने में सफल रहीं। पीवी सिधु के आगे हांगकांग की खिलाड़ी की यह छठी हार है। इस दूसरे मुकाबले में सिंधु पूरी तरह से अपने प्रतिद्वंदी पर हावी रहीं और उसका नतीजा यह हुआ कि सिंधु ने पहला गेम सिर्फ 15 मिनट में जीत लिया। इस दौरान सिंधु के आगे एनगान की एक न चली। दूसरे गेम की शुरुआत में सिंधु ने एनगान को टिकने नहीं दिया और चार अंकों की बढ़त बना ली। लेकिन इस दरम्यान हांगकांग की खिलाड़ी ने शानदार वापसी की और 11-10 से आगे हो गई। सिंधु ने गेम अंतराल के बाद बेहतरीन वापसी करते हुए 13-12 की बढ़त बनाई। दूसरे गेम में सिंधु ने शानदार खेल दिखाते हुए लगातार पांच अंक अर्जित कर स्कोर 19-14 कर दिया। सिंधु ने दूसरा गेम 21 मिनट में जीता।पीवी सिधु की इस धमाकेदार जीत के बाद टोक्यो ओलंपिक में उनसे पदक की उम्मीद की जा रही है। इससे पहले साल 2016 रियो ओलंपिक के दौरान उन्होंने रजत पदक जीता था। कैरोलिना मारिन के ओलंपिक से हटने के बाद ऐसा कहा जा रहा है कि सिंधु अपने पदक का रंग बदलने में जरूरी सफल होंगी।