ब्रेकिंग न्यूज

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आवासीय कॉलोनी के अनुमोदन की प्रक्रिया और हुई आसान, 100 दिन के भीतर मिलेगी सभी अनुमतियां,सीएम भूपेश बघेल के निर्देश पर

22-May-2020

रायपुर (शोर सन्देश) मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश में आवासीय कालोनियों के विकास की प्रक्रिया को सरलीकरण करने के निर्देश दिए थे। जिसके तहत आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा आवासीय कॉलोनी के अनुमोदन की प्रक्रिया में तेजी लाने और इसे सुगम बनाने के लिए एकल खिड़की प्रणाली `सी.जी. आवास` विकसित किया गया है। एकल खिड़की प्रणाली से अब समस्त अनुमति 100 दिवस के अंदर पूर्ण कर ली जाएगी। कॉलोनाईजर-आवेदक द्वारा अपने स्वामित्व की भूमि की चर्तुसीमा के अंतर्गत खसरे को एकीकृत कर प्रस्तुत नहीं किये जाने पर खसरा एकीकरण हेतु 40 दिन का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत् आवेदक को अब बार-बार किसी भी दफ्तर में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। पहले आवासीय कॉलोनी के विकास की अनुज्ञा प्राप्त करने के लिए जहां डेढ़ से दो साल का समय लग जाता था, वहीं अब इसकी समय-सीमा तय कर दी गई है और आवेदकों को 100 दिन के भीतर विकास अनुज्ञप्ति मिल जाएगी। इसके तहत भू-व्यपवर्तन प्रमाण पत्र, अनुमोदित अभिन्यास, कॉलोनी विकास की अनुमति की स्वीकृति सभी एकल खिड़की के माध्यम से प्राप्त होगी। आवेदक को पोर्टल पर एवं एस.एम.एस. के माध्यम से आवेदन की स्थिति की जानकारी समय-समय पर प्राप्त होती रहेगी। इस प्रणाली से जहां प्रक्रिया की पुनर्रावृत्ति नहीं होगी वहीं अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और नयी तकनीक से लागों के समय में बचत होगी।
सी.जी.आवास के तहत अब 21 मई 2020 से इस प्रक्रिया से जुड़े सभी संबंधित विभाग अपने कार्यालय में आवासीय कॉलोनी की अनुज्ञा से संबंधित कोई भी आवेदन नहीं लेंगे। इन विभागों में अब सी.जी. आवास के माध्यम से ही आवेदन जमा कराया जाना है। इसके तहत अब कॉलोनी के विकास के लिए आवेदन छत्तीसगढ़ के किसी भी स्थान से सर्विस प्लस पोर्टल के माध्यम से सी.जी. आवास द्वारा किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश में कॉलोनी विकास की प्रक्रिया को सरलीकृत किये जाने के लिए एकल खिड़की प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए थे तथा इसके लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग को इन अनुमतियो की प्रक्रिया को पारदर्शी और सरलीकृत बनाये जाने हेतु नोडल विभाग बनाया था। मुख्यमंत्री के निर्देश के पश्चात् शासन द्वारा समिति का गठन कर वर्तमान प्रणाली का अध्ययन कर सुधारात्मक उपयुक्त प्रणाली विकसित करने हेतु सुझाव दिये गये थे। समिति के सुझाव के आधार पर आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा एन.आई.सी. के माध्यम से सॉफ्टवेयर तैयार किया गया मुख्यमंत्री श्री बघेल द्वारा बीते 25 नवम्बर को एकल खिड़की प्रणाली के संचालन के लिए सीजी आवास( C.G.automated work flow and approval system ) सॉफ्टवेयर का उद्घाटन किया गया। तत्पश्चात् एकल खिड़की प्रणाली के सुचारू संचालन के लिए संबंधित विभागों द्वारा अधिनियम-नियमों में चाहे गये वांछित संशोधनों को संशोधित कर इसमें समाहित किया गया है।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा एक खिड़की प्रणाली के सुव्यवस्थित संचालन के लिए प्रत्येक जिले के अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। प्रत्येक आवेदन एडीएम के माध्यम से संबंधित विभागों को अग्रिम कार्यवाही के लिए अग्रेषित किया जाएगा तथा संबंधित विभागों से अनुमति प्राप्त होने पर एडीएम के माध्यम से ही सभी विभागों की अनुमतियों की अंतिम स्वीकृति प्रदान की जाएगी। जिले के संबंधित कलेक्टर द्वारा उपरोक्त प्रक्रियां के तहत् प्राप्त आवेदनों की समीक्षा जिले में हर सप्ताह होने वाली समय-सीमा की बैठक में की जाएगी।  


1000 करोड़ की मदद का ऐलान ,अम्फान ने मचाई पं. बंगाल में तबाही, मोदी ने किया

22-May-2020

पश्चिम बंगाल में चक्रवाती तूफान अम्फान की वजह से भीषण तबाही मची है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अम्फान प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। सर्वे करने के बाद पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल के लिए 1000 करोड़ रुपये की शुरुआती मदद का ऐलान किया है।
हवाई सर्वे के बाद पीएम मोदी ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार दोनों ने इस तूफान को लेकर तैयारी की थी, लेकिन इसके बावजूद 80 लोगों की जान हम नहीं बचा पाए हैं। इस तूफान की वजह से काफी संपत्ति का नुकसान हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरुआती तौर पर 1000 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद का ऐलान किया है। इसके अलावा मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे का ऐलान किया गया है। पीएम मोदी ने मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है। इसके अलावा घायलों को 50 हजार रुपये की मदद की जाएगी।


83 दिनों बाद दिल्ली से बाहर निकलेे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी...करेंगे तूफान पीडि़त राज्यों का हवाई दौरा

22-May-2020

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज शुक्रवार को 83 दिनों बाद दिल्ली से बाहर निकले। वे तूफान पीडि़त राज्य पश्चिम बंगाल और ओडिशा राज्य के दौरे पर जाएंगे। बता दें कि पश्चिम बंगाल में अम्फान तूफान के चलते अब तक 72 लोगों की मौत हो चुकी है। अकेले कोलकाता में 19 लोगों की मौत हुई है।
कोरोना संकट के कारण देश में लॉकडाउन जारी है। पीएम मोदी 83 दिन बाद राजधानी दिल्ली से बाहर निकले हैं। इससे पहले पीएम मोदी ने 29 फरवरी को प्रयागराज औऱ चित्रकूट का दौरा किया था। खबरों में बताया जा रहा है कि हवाई सर्वे के बाद पीएम सीएम ममता के साथ समीक्षा बैठक भी करेंगे। इसके बाद वह दोपहर 1.30 बजे ओडिशा के लिए रवाना हो जाएंगे।

 


कोरोना संकट पर उपजे हालत को लेकर विपक्ष दिखाएगा एकजुटता, सोनिया गांधी की अध्यक्षता में होगी वीडियो कांफ्रेंसिंग से बैठक

22-May-2020

वैश्विक महामारी कोरोना को लेकर पूरे विश्व सहित भारत में भी ऐहतियात बरते जा रहे हैं। लगातार लॉकडाउन का चौथा चरण इन दिनों चल रहा है। वहीं कोरोना संकट से उपजे हालातों पर मोदी सरकार को घेरने के लिए विपक्षी दल एकजुट हो रहा है। देश के मौजूदा हालात को देखते हुए कांग्रेस ने सोनिया गांधी की अध्यक्षता में शुक्रवार को तीन बजे समान विचारधारा वाले विपक्षी दलों की बैठक बुलाई है। कोरोना संकट के बाद विपक्षी दलों की यह पहली बार बैठक होने जा रही है, जो काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बैठक में कोरोना संकट के बहाने मोदी सरकार को घेरने की संयुक्त रणनीति पर मंथन किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सोनिया गांधी की अगुवाई में होने वाली बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, एनसीपी नेता शरद पवार, डीएमके नेता एमके स्टालिन समेत राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के अध्यक्ष अजित सिंह और लेफ्ट की ओर सीताराम येचुरी शामिल होंगे. इसके अलावा जनता दल (सेक्युलर) से एचडी देवगौड़ा और नेशनल कॉन्फ्रेंस से फारुख अब्दुल्ला या उमर अब्दुल्ला में से कोई एक शामिल हो सकता है।


अमेरिका में कार्यरत छत्तीसगढ़ के नागरिक ने दी 50 हजार का योगदान

22-May-2020

रायपुर (शोर सन्देश) कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न संकटकालीन परिस्थितियों में जरूरतमंद लोगों की सहायता तथा विभिन्न राहत कार्यों के लिए समाज के हर वर्ग की ओर से मुख्यमंत्री सहायता कोष में लगातार योगदान दिया जा रहा है। इसी क्रम में अमेरिका में कार्यरत छत्तीसगढ़ निवासी पीयूष द्विवेदी और उनके परिवार ने मुख्यमंत्री सहायता कोष में 50 हजार रुपए की सहयोग राशि प्रदान की है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस सहयोग के लिए पीयूष द्विवेदी और उनके परिवार का आभार व्यक्त किया है। 


1 जून से 200 ट्रेनेें, चलने वाली है आज से ही शुरू हो गई बुकिंग

21-May-2020

रेलवे लॉकडाउन के बीच धीरे-धीरे यात्री सेवाओं की बहाली की तरफ बढ़ रही है। श्रमिक स्पेशल और राजधानी स्पेशल ट्रेनें चलाने के बाद एक जून से गैर वातानुकूलित विशेष ट्रेनें भी दौडऩे जा रही हैं। साथ ही स्पेशल शताब्दी ट्रेन चलाने की भी तैयारी चल रही है। लॉकडाउन में बढ़ती रियायत के साथ यात्रियों का दबाव भी बढऩे लगा है। इसे देखते हुए छोटी दूरी की शताब्दी ट्रेन एवं अन्य यात्री ट्रेन के संचालन पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

वहीं देश में जारी कोरोना संकट के बीच भारतीय रेलवे ने श्रमिक ट्रेनों के अलावे 1 जून से 200 ट्रेनों को चलाने का फैसला किया है, जिसकी बुकिंग आज से ऑनलाइन शुरू हो रही है। इन ट्रेनों के टिकटों की बुकिंग 21 मई यानी आज सुबह 10 बजे से शुरू हो गई है। पहले रेलवे ने सिर्फ नॉन एसी ट्रेनें चलाने की बात की थी, मगर अब इन ट्रेनों में एसी और जनरल डिब्बे भी होंगे। रेलवे ने कहा है कि ये ट्रेनें पूरी तरह आरक्षित होंगी, जिनमें एसी और गैर एसी श्रेणियां होंगी। सामान्य डिब्बों में भी बैठने के लिए आरक्षित सीटों की सुविधा होगी। रेलवे ने एक जून से चलने वाली 200 ट्रेनों की सूची जारी की। टिकट की बुकिंग 21 मई , सुबह 10 बजे से शुरू होगी।


चक्रवाती तूफान ने मचाई भयानक तबाई, प.बंगाल में हजारों घर तहस नहस, एयरपोर्ट पर चारों तरफ पानी ही पानी, 12 की मौत

21-May-2020

चक्रवाती तूफान अम्फान ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। इस तूफान का अब तक सबसे ज्यादा असर पश्चिम बंगाल में देखने को मिला है। वहीं ओडिशा में भी उस तूफान का असर दिख रहा है। इस तूफान से सबसे ज्यादा तबाही पश्चिम बंगाल में देखने को मिली है। यहां से खबर रही है कि यहां 12 लोगों की मौत हुई है। और पूरा एयरपोर्ट पानी से भर गया है। हजारों घरों को तहस-नहस कर दिया। इसके साथ-साथ हजार से अधिक पेड़ उखड़ गए और सैकड़ों बड़ी इमारतों को नुकसान पहुंचा है। बंगाल ने चक्रवात अम्फन का भारी खामियाजा उठाया. कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में हवा की रफ्तार 185 किलोमीटर प्रति घंटे की रही. जबकि दमदम में शाम 7 बजकर 20 मिनट पर हवा की रफ्तार 133 किमी प्रति घंटे रिकॉर्ड की गई।
आपको बता दें कि चक्रवात दोपहर में करीब ढाई बजे पश्चिम बंगाल में दीघा और बांग्लादेश में हटिया द्वीप के बीच तट पर पहुंचा। चक्रवात के कारण तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही हुई. चक्रवात की वजह से बड़ी संख्या में पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए वहीं कच्चे मकानों को भी खासा नुकसान हुआ. अधिकारियों के अनुसार चक्रवात आने से पहले पश्चिम बंगाल और ओडिशा में कम से कम 6.58 लाख लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था।


पॉकेटमार की थाने में जमकर हो रही थी धुनाई, निकला कोरोना पॉजिटिव तो सकते में आ गया पूरा थाना

19-May-2020

कोरोना संक्रमण को लेकर पूरे देश में अभी लॉकडाउन का चौथा चरण चल रहा है। वहीं कोरोना के नित नए सामने रहे मामलों ने छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश की चिंता बढ़ा दी है। वहीं कोरोना संक्रमण के चलते कई दिलचस्प मामले भी सामने रहे हैं। जिसने पुलिसवालों की भी नींद उड़ा दी है।

दरअसल, मीडिया में रही खबरों में बताया जा रहा है कि उड़ीसा के कुंभारपड़ा पुलिस थाने में पुलिस ने एक पॉकेटमार को पकड़ा था और थाने में ही उसकी जमकर खातिरदारी हो रही थी। इस बीच कोरोना संक्रमण को देखते हुए जब उसका टेस्ट किया गया तो वो पॉजिटिव निकला, फिर क्या था पूरा विभाग ही सकते में गया। फिर आनन-फानन में कोतवाल समेत पूरा थाने के तीस स्टॉफ को क्वारेंटाइन किया गया। इसके साथ ही थाने को सैनेटाइज किया जा रहा है।
आपको बता दें कि कोरोना संक्रमण के मामले देश में लगातार सामने रहे हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में भी मामले बढ़ रहे हैं।


पहली बार मज़दूरों का घरों की ओर बदहवास निकल पडऩा, भूख शारीरिक शक्ति और बीमारी को चुनौती

17-May-2020

  मनोज त्रिवेदी

जान के डर से पहली बार मज़दूरों का घरों की ओर बदहवास निकल पडऩा, भूख शारीरिक शक्ति और बीमारी को चुनौती के उनके जज़्बे, कई सवाल भी खड़े करते है। पहला सवाल उन नियोक्ताओं पर जो इन्हें संभाल नही पाए, श्रम को फ़ायदे से जोडऩे के बजाय लाईबिलिटी के पैमाने में रख हाथ खड़े कर दिए गए। दूसरा उन राज्यों की सरकारों पर जिन्होंने उद्योगों के नुक़्ता नजऱ से वास्ता रख पल्ला झाड़ लिया। केंद्र सरकार से जो संघीय गणराज्य के क़ायदे से मुक्त दिखने लगी...? सवाल उन राज्यव्यापी राजनैतिक दलों से भी जो अपने वोट के लिए भीड़ को फ़ायदे के प्रबंधन में सिद्धहस्त है। सवाल उन सामाजिक- धार्मिक संगठनों से भी जो आत्मा के परमात्मा से मिलन के रास्ते में अपनी आत्मा की आवाज़ भूल चुके! सवाल सड़क के किनारे बसे गाँव, शहरों से जो भीड़ के इस प्रवाह के लिए अपने दरवाज़े बंद कर बैठे हैं। सवाल उस मीडिया से भी जो समस्या के उपाय को प्रेरित करने के बजाय विसंगतियों को हवा दे रहे हैं।
लॉकडाउन खुलने के बाद प्रॉडक्टिविटी की चिंता में पूरा देश रहेगा, आर्थिक मंदी से झूझने के बड़े खिलाड़ी ये मजदूर अपने परिवार के साथ अपने पैरों के छाले सेंकते अपने घरों में रहेंगे। अविश्वास, और भविष्य के डर के साथ और उधर उनके नियोक्ता उद्योग, ठेकेदार इनकी वापसी से अपने लाभ के गणित तय करेंगे। सरकारें मंदी से पार पाने के लिए इन उद्योगों पर निर्भर दिखती नजऱ आएगी और शायद श्रम के सार्थक महत्व को समझने का दावा करे। देशव्यापी पलायन को राज्यवार आंके तो ज़्यादातर मज़दूर महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र, तमिलनाडू, कर्नाटक से निकले और बिहार, उत्तरप्रदेश, झारखंड, ओडि़शा, मध्यप्रदेश, और छतीसगढ़ लौटने वाले हैं। जिन प्रदेशों की आबादी कम है वहाँ का उपलब्ध संसाधन इन्हें समेट सकता है रोजगार उपलब्ध करा कर जैसे छतीसगढ़, झारखंड। लेकिन बिहार, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, ओडि़शा के लिए बड़ी चुनौती चुकी है या आने वाली है, बड़ा संकट उन औद्योगिक विकसित राज्यों को ज़्यादा है जो इन्हें ना सम्भाल पाने की भयंकर चूक कर बैठे हैं।
अच्छा होता यदि ठेकेदार, उद्योग, निगम निकायों के साथ मिल कर एक मज़दूरों और उनके परिवार का प्रॉपर डाटा तैयार करते और आवश्यक ज़रूरते जैसे खाद्य सामग्री, दवाइयाँ, मानसिक साहस उसी स्थान पर उपलब्ध कराने की सारी क़वायद करते जहाँ ये मज़दूर कार्यरत है और रहते हैं। इनके सम्बंधित राज्य और उनकी सरकार, केंद्र, नियोक्ताओं के बीच सेतु के रूप में खड़े होते और मीडिया इसमें मदद करता सबसे आवश्यक भरोसा यदि पैदा होता तो ये जान पर खेलने का रिस्क ले कर पूरे देश को साँसत में डालने का रिस्क नही लेते।
मज़दूर अपने गाँव के अलावा जहाँ काम करता है उस संस्थान, शहर और राज्य के प्रति हमेशा अपनापन और आदरभाव लिए होता है कोशिशें की जानी थी उस भरोसे की जो उसे विलग करने के बजाय समेटने वाली होती, अच्छा होगा यदि सरकार और अथॉरिटी पलायन को प्रेरित करने वाले नियोक्ताओं को चिंहांकित भी करे, उनका बारीकी से मूल्यांकन करे और उद्योगों को दी जाने वाली रेवडिय़ाँ बाँटने से पहले जवाब तलब ज़रूर करे। सरकारों को अब स्वीकारना पड़ेगा कि श्रमिक अब भरोसा नहीं करेगा इसलिए साफ़ और पारदर्शी व्यवस्था मज़दूरों के लिए आवश्यक होगी, श्रम क़ानून को लचीला कर वैश्विक निवेश को आकर्षित करने की क़वायद में श्रमिक रूपी खंभे को मजबूत बनाना पड़ेगा, और फिर ईमारत की कल्पना की जाए।
(
ये लेखक के निजी विचार हैं। मनोज त्रिवेदी नवभारत के सीईओ, दैनिक भास्कर-नईदुनिया के जीएम भी रह चुके हैं)


लॉकडाउन-4 को लेकर केंद्र सरकार की ओर से जारी होने वाली नई गाईडलाईन का इंतजार - क्या बंदिशें...क्या रियायतें...

17-May-2020

24 मार्च से पूरे देश में लागू लॉकडाउन का रविवार यानी 17 मई को तीसरा चरण भी समाप्त होने को है। इस बीच लोगों की निगाहें अब सोमवार 18 मई से शुरू होने वाली लॉकडाउन-4 पर टिकी हुई है। फिलहाल लॉकडाउन-4 को लेकर केंद्र सरकार की ओर से जारी होने वाली नई गाईडलाईन का इंतजार किया जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि केंद्र सरकार की ओर से लॉकडाउन-4 को लेकर आज नई गाईडलाईन जारी की जा सकती है। हो सकता है इसमें काफी लचीलापन देखने को मिले। और अब तक बंद पड़ी रेल सेवाओं, बस और ऑटो और कैब वालों को कुछ राहत मिल सकेगी, ऐसी संभावना है।

वहीं संभावना तो यहां तक जताई जा रही है कि राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों को अपने यहां हॉटस्पॉट को परिभाषित करने का अधिकार दिया जाएगा। लेकिन देश में कहीं भी स्कूल, कॉलेज, मॉल और सिनेमा घरों को खोलने की इजाजत नहीं होगी। लेकिन इतना जरूर है कि कोविड-19 निषिद्ध क्षेत्रों को छोड़कर सैलून, नाई की दुकानें और चश्मों की दुकानों को रेड जोन में खोलने की मंजूरी मिल सकती है।
मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक आधिकारिक सूत्र भी दावा कर रहे हैं कि लॉकडाउन-4 में पहले के चरणों की अपेक्षा लोगों को ज्यादा छूट मिलेगी और इस दौरान ग्रीन जोन को पूरी तरह खोल दिया जाएगा। ऑरेंज जोन में बेहद कम बंदिश होगी जबकि रेड जोन के निषिद्ध क्षेत्रों में ही सख्त पाबंदियां होंगी। अंतिम दिशा-निर्देश हालांकि राज्य सरकारों से मिले परामर्श का अध्ययन करने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी किये जाएंगे।




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