
रायपुर/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अजीत जोगी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए अपने ट्वीट किया कि लोकसेवा को लेकर अजीत जोगी उत्साही थे, यही उत्साह ब्यूरोक्रेट और राजनेता के तौर पर कठोर श्रम करने के लिए प्रेरित किया। वे गरीबों की, खासतौर से आदिवासी समुदाय के, जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए कार्य करते रहे, उनके निधन पर दुख है, उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदना।
00 त्रिपुरा के राज्यपाल रमेश बैस व बीजेपी के सभी दिग्गज नेताओं ने जोगी को दी श्रद्धांजलि।
छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री का शुक्रवार को रायपुर के नारायणा अस्पताल में निधन हो गया। अजीत जोगी के निधन पर त्रिपुरा के राज्यपाल रमेश बैस समेत छत्तीसगढ़ के तमाम बीजेपी नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। रमेश बैस ने कहा कि अजीत जोगी के निधन की खबर सुनकर सहसा यकीन नहीं हुआ, कि आज जोगी की जिजीविषा के आगे मौत जीत जाएगी। अजित जोगी का निधन छत्तीसगढ़ राज्य के एक अनमोल रत्न के खोने जैसा है। अजित जोगी के निधन की खबर सुनकर स्तब्ध हूं। इस दु:खद की घड़ी में ईश्वर से कामना करता हूं कि स्व. अजित जोगी को अपने परमधाम में स्थान दें व परिवार को सबल बनाए रखें।
00 जोगी ने योग्यता के दम पर हर वह मुकाम हासिल किया जिसके वे अधिकारी थे : विक्रम उसेंडी
भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के निधन पर गहन शोक व्यक्त किया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी ने कहा कि स्व. जोगी ने अपनी योग्यता के दम पर हर वह मुकाम हासिल किया जिसके वे अधिकारी थे, वे एक कुशल प्रशासक थे और यह गुण उनके राजनीतिक जीवन में तब बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ जब वे प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोनीत हुए थे। छत्तीसगढ़ का विकास और यहां के लोगों का सर्वतोमुखी कल्याण उनकी प्राथमिकताओं में था और इसके लिए वे सतत प्रयत्नशील रहे। उनके निधन से छत्तीसगढ़ को जो अपूरणीय क्षति हुई है, उसकी भरपाई संभव नहीं होगी। उसेंडी ने स्व. जोगी की आत्मा की चिरशांति की प्रार्थना करते हुए जोगी-परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रेषित की।
00 हम सबके लिए बड़ी क्षति : धरमलाल कौशिक
नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि अजीत जोगी ने भारतीय राजनीति व सामाजिक जीवन सर्वोच्च स्थान को प्राप्त किया था। हम सबके लिए बड़ी क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
00 प्रदेश के विकास की नींव रखी : बृजमोहन अग्रवाल
पूर्व मंत्री व विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास की नींव रखने वाले प्रथम मुख्यमंत्री आदरणीय अजित जोगी का निधन छत्तीसगढ़ के लिए अपूरणीय क्षति है। मेरी ईश्वर से प्रार्थना है की उनकी आत्मा को शान्ति तथा परिवार को यह दु:ख सहने की शक्ति प्रदान करें।
00 अजीत जोगी ने निधन से बहुत दुखी हूं : कवि सुरेंद्र दुबे
डॉक्टर सुरेंद्र दुबे ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के निधन से दुखी हूं। उन्होंने ही मुझे एक निजी अखबार के कवि सम्मेलन में रायपुर में सुनने के बाद मंत्रालय में अपना ओएसडी बनाकर नियुक्त किया था, उस समय मैं दुर्ग आयुर्वेदिक अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी था, वे मेरी कविताओं से प्रभावित हुए और मैंने उनसे बहुत सारे प्रशासनिक बातें सीखी जो मुझे जीवन भर याद रहेगी। आज मैं अजीत जोगी के निधन से अंदर से बहुत दुखी हूं।

छत्तीसगढ़ के पेंड्रा नाम की एक छोटी जगह से निकला एक साधारण बच्चा अजीत जोगी अगर असाधारण उपलब्धियां हासिल कर सका तो उसके पीछे उसका मस्तिष्क ही था।अजीत प्रमोद कुमार जोगी चले गए। हालांकि उनकी मृत्यु का तात्कालिक कारण बना हृदय गति का रुक जाना। लेकिन उनके मस्तिष्क ने पहले ही काम करना बंद कर दिया था। जिसे अंग्रेज़ी में कहते हैं, क्वब्रेन डेड`। अजीत जोगी को जो भी जानता है, वह समझ सकता है कि मस्तिष्क के बिना उनका कोई अस्तित्व नहीं हो सकता। बुद्धिमत्ता या बौद्धिकता उनकी ताकत रही, आजीवन रही। छत्तीसगढ़ के पेंड्रा नाम की एक छोटी जगह से निकला एक साधारण बच्चा अगर असाधारण उपलब्धियां हासिल कर सका तो उसके पीछे उसका मस्तिष्क ही था। कल्पना कीजिए कि कभी बिना चप्पलों के स्कूल जाने वाला बच्चा कहां तक पहुंच सकता है?
00 अजीत जोगी की असाधारण यात्रा
और अब अजीत जोगी की यात्रा देखिए। पहले मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई। फिर इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाना। फिर डेढ़ साल आईपीएस और फिर १४ साल आईएएस। फिर दो बार राज्यसभा की सदस्यता, साथ में कांग्रेस का राष्ट्रीय प्रवक्ता होना। फिर एक बार लोकसभा। दूसरी बार लोकसभा हार भी गए तो नए राज्य छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री। यह अजीत जोगी की उड़ान की कहानी है। ऊंचाई तक पहुंचने की कहानी है।
बेहद साधारण कद काठी, अति साधारण नैन नक्श और गहरा सांवला रंग लेकिन आत्मविश्वास इतना गजब का था कि एकबारगी लोग चौंक जाते थे। प्रभावित हो जाते थे, नेतृत्व का गुण इतना सहज था कि छात्र जीवन से ही नेतागिरी करते रहे। चातुर्य इतना था कि हमेशा दूर तक देखते रहे और योजना बनाते रहे। जिन लोगों ने उन्हें आईएएस अधिकारी की तरह देखा है वे आज भी याद करते हैं, कि ऐसे प्रशासनिक अधिकारी कम ही होते हैं। आम तौर पर आईएएस अधिकारी क्वफील्ड पोस्टिंग` और मंत्रालयीन कार्यों के बीच झूलते रहते हैं, लेकिन अजीत जोगी लगातार 14 बरस तक कलेक्टरी करते रहे।
00 साधने में पारंगत :
वे दूर तक सोचते थे, यही कारण था कि वे न केवल लंबे समय तक कलेक्टर रहे बल्कि वे यह भी क्वजुगाड़` करते रहे कि वे कहां के कलेक्टर होंगे। यह उनकी क्वयोजना` या चातुर्य ही था, कि अविभाजित मध्यप्रदेश के हर उस शहर में कलेक्टर बने जहां उस समय के राजनीतिक क्षत्रप रहते थे, अफ्सरी करते हुए वे नेताओं को साधते रहे, विद्याचरण और श्यामाचरण शुक्ल से लेकर अर्जुन सिंह और माधवराव सिंधिया से प्रकाश चंद्र सेठी तक सब दिग्गज उनसे सधे हुए थे। खासकर तब तक, जब तक उन्होंने राजनीति में अपने क्वदांव` चलने शुरु नहीं किए। साधने में वे इतने पारंगत हो चुके थे, कि वे राजीव गांधी को तब साध चुके थे जब वे इंडियन एयरलाइन्स के पायलट थे। तब अजीत जोगी रायपुर के कलेक्टर हुआ करते थे। एयरपोर्ट पर निर्देश थे जब भी पायलट राजीव गांधी हों उन्हें सूचना दे दी जाएं। वे घर से नाश्ता और चाय लेकर हवाई जहाज से पहले हाजिर होते थे, तभी तो जब राज्यसभा में जाने की बारी आई और अर्जुन सिंह के कहने से दिग्विजय सिंह उन्हें राजीव गांधी से मिलवाने ले गए तो राजीव गांधी ने कहा था, आई नो दिस जेंटलमैन, ही इज फाइन।
साधने के लिए उन्होंने हर किसी के लिए अलग फॉर्मूला अपनाया, चाहे वो सोनिया गांधी हों या फिर सीताराम केसरी। ऐसा नहीं कि सब उनसे सध गए, वे लाख कोशिशों के बावजूद नरसिंह राव को नहीं साध पाए, वरना उनकी जीवनी में केंद्रीय मंत्री का पद भी जुड़ गया होता, लेकिन वे हार नहीं मानते थे, जिस समय देश यह नहीं जानता था कि छत्तीसगढ़ नाम का राज्य कभी अस्तित्व में आएगा भी या नहीं, उस समय भी उन्होंने ठान लिया था, कि वे छत्तीसगढ़ राज्य के पहले मुख्यमंत्री बनेंगे। माधवराव सिंधिया ने वर्ष 1998 में उनका परिचय इसी तरह से करवाया था। राज्य बना वर्ष 2000 में और वे मुख्यमंत्री बने।
00 तिकड़म और गलतियां :
जैसा कि सुकरात ने कहा है कि उत्कृष्टता अपने आपमें कोई गुण नहीं होता, वह तो बार बार अच्छा या सही कार्य करते रहने से पैदा होने वाली पहचान है। अजीत जोगी की उड़ान की कहानी ऐसी दिखती है मानों वे ऐसे उत्कृष्ट व्यक्ति थे, जो हर बार सही निशाना लगाते रहे। लेकिन सुकरात की बात सही थी. उत्कृष्ट हो जाने का या अपने मस्तिष्क में उपजे तिकड़मों का भ्रम इतना बड़ा हो गया कि अजीत जोगी गलत फैसले लेते रहे। जिन समय वे शिखर की ओर बढ़ रहे थे उन दिनों भी उनसे गलतियां हुईं, लेकिन जब ग्राफ ऊपर की ओर जा रहा हो तो गलतियों को कौन याद रखता है? उनसे गलतियां प्रशासनिक अधिकारी के रूप में भी हुईं और राजनेता के रूप में भी, लेकिन दर्ज होनी शुरु हुईं जब वे राजनेता बनकर शिखर पर जा पहुंचे थे और सामने ढलान दिखने लगी थी।
छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री के रूप में वे लोकप्रिय मुख्यमंत्री के रूप में तो उभरे, लेकिन एक ऐसा एक बड़ा वर्ग भी तैयार हो गया जिनके मन में उनकी कार्यशैली से असुरक्षा की भावना उपजी। एक तरह का डर पैदा हो गया और इसी डर को आरएसएस-भाजपा ने अपनी चिरपरिचित शैली में बहुत बड़ा कर दिया, सच्चाई से बड़ी अफवाह हो गई और जिसे हीरो होना चाहिए था वह विलेन दिखने लगा और इस डर को भाजपा उनके कांग्रेस से निकन जाने तक भुनाती रही। वैसे ऐसा नहीं है कि अजीत जोगी एकदम बेदाग थे, उन्होंने डर तो पैदा किया ही और यह डर सामाजिक, कानून व्यवस्था के अलावा राजनीतिक भी था, उनकी राजनीति चालों ने पार्टी के नेताओं के मन में एक तरह की असुरक्षा भर दी।
00 निरंकुशता और अनैतिक सांठगांठ :
अजीत जोगी ने कांग्रेस के भीतर नेतृत्व की चुनौतियों को ख़त्म करने के लिए अपनी ही पार्टी के उन साथियों को हाशिए पर धकेलने का षडयंत्र रचना शुरू कर दिया। एक समय ऐसा भी आया जब वे प्रतिद्वंद्वियों को रास्ते से हटाने के लिए राजनीति की जगह दूसरे हथियारों का भी उपयोग करने लगे। यहां तक कि उनके सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी विद्याचरण शुक्ल के एक सहयोगी की सरेआम हत्या हो गई और इसमें उनके अपने बेटे का नाम शामिल हो गया। दूसरी बड़ी गलती अजीत जोगी ने यह कि कांग्रेस में अपने प्रतिद्वंद्वियों और ताकतवर जमीनी नेताओं के उभार को रोकने के लिए उन्होंने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी, खासकर मुख्यमंत्री रमन सिंह से सांठगांठ कर ली। राजनीति में बहुत से अनकहे समझौते होते रहे हैं, लेकिन यह दोस्ती ऐसी थी कि दोनों दलों के लोग जानते थे, कि अजीत जोगी का रहना रमन सिंह के लिए फायदेमंद है। कांग्रेस आलाकमान तक इसकी शिकायतें भी थी।
वे लगभग निरंकुश तो थे ही, समय के साथ वे और उच्चश्रृंखल होते गए। उन पर गंभीर आरोप हैं कि नवनियुक्त प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल को विफल साबित करने के लिए उन्होंने बस्तर के एक उपचुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी को पैसे ले-देकर मैदान से हटा दिया। इस खरीद फरोख़्त के ऑडियो टेप मीडिया में आने के बाद ही उनके बेटे अमित जोगी को पार्टी से हटाया गया और उन्हें पार्टी छोडऩे पर मजबूर होना पड़ा।
00 अशोक, अकबर और अंग्रेज :
इतने मजबूर वे संभवत: पहली बार ही हुए, वरना वे जिनको अपना आदर्श मानते रहे हैं उसमें मजबूरी शब्द कहीं आता ही नहीं। एक साक्षात्कार में उनसे पूछा गया था कि वे अपना आदर्श किसे मानते हैं तो उन्होंने तीन नाम लिए थे, अशोक, अकबर और अंग्रेज, बिना अधिक विश्लेषण किए भी यह समझा जा सकता है, कि तीनों में जो बात उभयनिष्ठ है, वह यह कि तीनों साम्राज्यवादी और विस्तारवादी थे और तानाशाह न भी हों तो स्वेच्छाचारी तो थे ही। अजीत जोगी की राजनीतिक पारी भी इसी के इर्दगिर्द घूमती रही। वैसे उनके इर्दगिर्द झूठ का महिमामंडन भी बहुत था, खासकर जब अपने राजनीतिक कद या वर्चस्व का बखान करना हो। राष्ट्रीय प्रवक्ता रहते हुए भी वे पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में छत्तीसगढ़ में अपने राजनीतिक रसूख को इस तरह बयान करते थे कि आश्चर्य होता था। सच बात यह थी कि मुख्यमंत्री बनने से पहले छत्तीसगढ़ में उनकी कोई राजनीतिक जमीन नहीं थी, जब वे मुख्यमंत्री चुने लिए गए तो एक पत्रकार ने आश्चर्य से उनसे पूछा, लेकिन आपके साथ तो कुल दो विधायक हैं उन्होंने ठहाका लगाया और कहा दो नहीं डेढ़ दूसरा जो है उसका एक पांव कहीं और है।
00 झूठ पर खड़ा रसूख :
झूठ का ही प्रताप था कि पूरा छत्तीसगढ़ जानता था कि वे आदिवासी नहीं हैं, लेकिन वे आजीवन आदिवासी बने रहे। अदालतों ने तकनीकी आधार पर उनको बरी कर दिया, लेकिन इस बार वे बुरी तरह फंस गए थे, भाजपा के मुख्यमंत्री से उनकी दोस्ती की एक ठोस वजह जाति का प्रमाण पत्र भी था। वे एक दूसरे की पीठ खुजा रहे थे। क्वतुम मुझे साथ दो, मैं तुम्हारा फैसला रोके रखूंगा` की नीति पर रमन सिंह ने अजीत जोगी का भरपूर दोहन किया। कम से कम उनके जीते जी कोई ठोस फैसला नहीं आया जिससे यह साबित हो सके कि उनके आदिवासी होने का प्रमाण पत्र झूठा है। एक ऐसा सच पर्दे में है, जिसके बारे में हर कोई जानता है। बरसों तक वे कांग्रेस के बड़े नेताओं को इस भ्रम में रखते रहे कि अगर उनके बिना छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का कोई भविष्य नहीं है। दिल्ली में संभवत: राहुल गांधी पहले नेता रहे जिन्होंने यह जोखिम उठाना स्वीकार किया कि अजीत जोगी के बिना भी कांग्रेस के भविष्य की तलाश हो सकती है।
कांग्रेस ने तो अपना भविष्य संभाल लिया, लेकिन अपनी एक नई पार्टी बनाने के बाद जिस करिश्मे का छद्म उन्होंने बना रखा था वह टूट गया। साथ में भ्रम टूटा उनके अभिन्न मित्र बन गए रमन सिंह का, भारतीय जनता पार्टी का, आरएसएस का और दिल्ली के कई नामधारी पत्रकारों का. लेकिन यह कहना गलत होगा कि अजीत जोगी को कभी इसे लेकर कोई भ्रम था। अगर होता तो वे मायावती के साथ चुनाव न लड़ते, मायावती से पहले नीतीश कुमार पर डोरे न डालते और कांग्रेस में वापसी की कोशिश न करते।
00 अथक प्रयास :
कोशिश एक ऐसी चीज थी, जो राजनीति के छात्रों को अजीत जोगी के जीवन से सीखनी चाहिए। उनके मस्तिष्क की उर्वरता की सबसे बड़ी ताकत थी उनका जुझारूपन और कोशिश करते रहने की उनकी जिद. कोई नकारात्मक परिणाम उन्हें निराश नहीं करती थी और यही एक बात थी जिससे उनके विरोधी भी ईष्र्या करते रहे हैं। ईष्र्या तो खैर उनकी जीजिविषा से भी होती है। वर्ष 2004 में जो सड़क दुर्घटना उनके साथ घटी उसके बाद किसी ने नहीं सोचा था कि वे बचेंगे भी, लोग सोचते थे कि अगर बचेंगे भी तो राजनीति नहीं कर पाएंगे। राजनीति कर भी पाएंगे तो लंबी पारी नहीं खेल पाएंगे, लंबी पारी खेलेंगे भी तो हाशिए पर पड़े होंगे, लेकिन हाशिए पर रहना अजीत जोगी तो कभी मंज़ूर नहीं हुआ। इसमें कोई संदेह नहीं कि वे अपने हमउम्र लोगों में वे सबसे विचारवान, ऊर्जावान और धारदार नेताओं में से एक थे, लेकिन उनके मस्तिष्क ने ही उनकी राजनीतिक के पन्ने उलट दिए। कहते हैं कि इतिहास निर्मम होता है, इस सवाल का जवाब अभी नहीं दिया जा सकता कि इतिहास के पन्नों पर अजीत जोगी कैसे दर्ज किए जाएंगे क्योंकि उन्होंने अपने जीते जी सारे सफेद पन्नों को स्याह करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, चाहे वो भाजपा के विधायकों को तोड़कर कांग्रेस में शामिल करने का मामला हो या चुनाव हारने के बाद जोड़तोड़ से सरकार बनाने की कोशिशों का, निश्चित तौर पर वो एक ऐसे राजनेता थे जो अपने ही रचे चक्रव्यूहों में एक के बाद एक फंसते रहे।

रायपुर/नयी दिल्ली (शोर सन्देश)। सुप्रीम कोर्ट ने आज मजदूरों की अपने गृह प्रदेश वापसी पर बड़ा फैसला दिया है। बता दें कि सरकार की ओर से दलील रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार ने अब तक 3700 से ज्यादा श्रमिक एक्सप्रेस विशेष ट्रेन चलाई हैं, जिसके जरिए 95 लाख से ज्यादा यात्रियों का आवागमन हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने हर राज्यों से मांगी रिपोर्टसुप्रीम कोर्ट ने किराया न लेने को कहा कि प्रवासी मजदूरों के मसले पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अशोक भूषण की अगुवाई वाली बेंच ने गुरुवार को सुनवाई की। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 1 मई से 27 मई तक 3700 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई गई हैं, जिसके जरिए 95 लाख से ज्यादा यात्रियों का आवागमन हुआ है।
सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी कहा कि ट्रेन का किराया यात्रा शुरू करने या मंजिल वाले राज्य ने चुकाया है, मजदूरों पर इसका कोई बोझ नहीं था। शुरुआत में जिन्होंने किराया दे दिया था उनको बिहार सरकार ने भुगतान कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि किसी प्रवासी मजदूर से घर जाने के लिए यात्रा का एक पैसा भी किराया नहीं वसूला जाए। सारा व्यय राज्य वहन करें। जहां मजदूर रह रहा है या यात्रा शुरू हो रही है वो राज्य या जहां उसे जाना है वो राज्य ये राज्य आपस में तय कर लें। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने यह भी हिदायत दी है कि रास्ते में मजदूरों के खाने-पीने और आश्रय का इंतजाम राज्य सही ढंग से करें।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देशों में यह भी कहा है कि जहां से मजदूर रेल यात्रा शुरू करें, वहां की सरकार उनके भोजन, पानी और टिकट इत्यादि का इंतजाम करे। इसके अलावा रेल में भी उनके खाने-पीने का इंतजाम हो।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार सभी प्रवासी मजदूर यात्रियों का रजिस्ट्रेशन करे और उसके मुताबिक ही उनका ट्रेन में बैठना सुनिश्चित करे। सड़क पर पैदल जाता कोई भी मजदूर दिखे तो उसे शेल्टर होम में लाकर रखे फिर खाना-पीना देकर ट्रेन या बस से उसके गांव तक भेजने का इंतजाम करे।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की की दस्ती कॉपी केंद्र और सभी राज्य सरकारों को दे दी गई है। इसके साथ ही अगले शुक्रवार तक सभी राज्यों को कोर्ट में यह रिपोर्ट दाखिल कर देनी है जिसमें मजदूरों की संख्या, उनके ट्रांसपोर्टेशन का तरीका, रजिस्ट्रेशन का तरीका, उनको दी जा रही सुविधाओं का ब्यौरा सभी कुछ होंगे।

रायपुर (शोर सन्देश)। राजधानी का सबसे ज्यादा भीड़-भाड़ वाला इलाका रेलवे स्टेशन पर स्थित एक होटल में भीषण आग लग गई है। दमकल की गाडिय़ा घटना स्थल पर पहुंचकर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉम क्रमांक 1 पर स्थित होटल लि-रॉय में लगे आग पर काबू पाने का प्रयास कर रही है। मौके पर गंज थाना पुलिस की टीम, जीआरपीएफ और दमकल कर्मी जुटे हुए है।
.jpg)
देश में इन दिनों लॉकडाउन-4 का दौर चल रहा है। इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज नई दिल्ली में वीडियो कांफ्रेंसिंग से चौथी बार मीडिया से बात की। राहुल गांधी ने कोरोना के संक्रमण को रोकने में केंद्र सरकार के लॉकडाउन पूरी तरफ असफल कहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि अब पीएम नरेंद्र मोदी से पूछना चाहता हूं कि मजदूरों और गरीबों के लिए सरकार के पास प्लान बी क्या है? उन्होंने मोदी सरकार के खास लोगों से अपनी बातचीत का हवाला देते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि रेटिंग खराब होने के डर से केंद्र गरीबों और मजूदरों को पैसा नहीं दे रही है। राहुल ने कहा कि आज हिंदुस्तान की शक्ति की रक्षा करने की जरूरत है। इसके लिए 50 फीसदी लोगों के डायरेक्ट कैश देना होगा। हर महीने साढ़े 7 हजार रुपये देना होगा।Ó
उन्होंने कहा, `थोड़ी बातचीत जो सरकार में डिसिजन मेकर्स हैं, उनसे इनडायरेक्टली होती रहती है। उनकी राय है कि अगर हमने बहुत सारा पैसा गरीब लोगों को दे दिया, मजदूरों को दे दिया तो बाहर के देशों में गलत इंप्रेशन चला जाएगा। हमारी रेटिंग खराब हो जाएगी।Ó उन्होंने कहा, `हिंदुस्तान की शक्ति बाहर से नहीं बनती है। हिंदुस्तान की शक्ति हिंदुस्तान के अंदर से बनती है। यह बाहर से नहीं बनती है। जब हिंदुस्तान मजबूत होता है तब हिंदुस्तान की शक्ति में शक्ति होती है।

रायपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ में लगातार सामने आ रहे कोरोना संक्रमितों से राज्य में पॉजीटिव की मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कल ही प्रदेश में 4 कोरोना पॉजिटिव स्वस्थ होकर डिस्चार्ज किए गए हैं। लेकिन फिर भी राज्य में कोरोना प्रभावित कुल 220 सक्रिय मरीज हैं। आपको बता दें कि सोमवार को प्रदेश में कोरोना के 31 नए मामले सामने आए हैं। इसमें मुंगेली से 26, धमतरी से 2, राजनांदगांव से 1, बलरामपुर से 1 और बिलासपुर से 1 कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले है। वहीं देश में कई दिनों से रोजाना 6 हजार से अधिक मरीज मिल रहे हैं। पिछले एक दिन में भी 6535 संक्रमित केस सामने आए हैं। इसी तरह देश में कुल मरीज 1 लाख 45 हजार 380 हो गई है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में 6 हजार 535 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 146 लोगों की मौत हुई है. सबसे अधिक महाराष्ट्र में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या है।

करीब दो महीने बाद हवाई सेवा शुरू हुई तो कई ऐसी खबरें भी निकलकर आने लगी, जिस पर एकबारगी विश्वास करना मुश्किल होगा। लेकिन ये सच भी है। अभी-अभी मीडिया में खबर आ रही है कि 5 साल का एक बच्चा अकेले दिल्ली से बैंगलूर पहुंच गया। हालांकि बेंगलुरू एयरपोर्ट पर बच्चे को मां ने रिसीव किया है। लेकिन यह अपने आप में बड़ी बात है।
मीडिया रिपोट्र्स में बताया जा रहा है कि दरअसल 5 साल का विवान नाम का लड़का दिल्ली में अपने दादा-दादी के घर आया था और लॉकडाउन के चलते यहीं फंस गया था। इसी 25 मई से शुरू की गई घरेलू उड़ान सेवा के कारण विशेष श्रेणी की यात्रा करते हुए विवान दिल्ली से बेंगलुरू अपने माता-पिता के पास पहुंच चुका है। सबसे खास बात ये है कि विवान अकेले ही दिल्ली से बेंगलुरू पहुंचा है, बेंगलुरू एयरपोर्ट पर विवान की मां ने उसे रिसीव किया है।

रायपुर (छत्तीसगढ़)। देश में कोरोना संक्रमण के आंकड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब संक्रमित मरीजों की संख्या 1 लाख 38 हजार 536 हो चुकी है। रविवार को देशभर में रिकॉर्ड 7 हजार 111 संक्रमित मिले। उधर, महाराष्ट्र में भी 24 घंटे में सबसे ज्यादा 3041 नए मरीज सामने आए।
वहीं छत्तीसगढ़ में अब में एक्टिव मरीजों की संख्या 185 पहुंच गई है। स्वास्थ्य विभाग ने संशोधित आंकड़ों के साथ रविवार को जो मेडिकल बुलेटिन जारी है, उसके मुताबिक कवर्धा जिले में रविवार को मरीज नहीं मिले हैं। छत्तीसगढ़ शासन स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग राज्य कन्ट्रोल एंड कमांड सेंटर ने 24 मई की शाम 5 बजे तक की स्थिति मेडिकल बुलेटिन जारी की थी। मेडिकल बुलेटिन में बताया गया कि प्रदेश में अब तक 52,878 संभावितों की सैम्पलिंग की गई है। इनमें 49,996 की रिपोर्ट निगेटिव आई है। वहीं 2631 की जांच हो रही है।

जगदलपुर में एशिया की सबसे बड़ी इमली मंडी है। यहां से इमली दूसरे राज्यों में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भेजी जाती है। दूसरे मुल्कों में जा रही बस्तर की इमली विदेशियों को अपने स्वाद से काफी लुभा रही है। इसका औसतन कारोबार 1000 करोड़ रूपये के आसपास है। बस्तर की आबोहवा इमली के लिए ज्यादा फायदेमंद है। यही वजह है कि हर साल इमली की बंपर पैदावार और कारोबार बस्तर में होता है। बस्तर में इमली की बड़ी तादाद में पैदावार होती हैं जिसके चलते यहां के व्यापारी बस्तर की इमली को दूसरे राज्यों में भेजते हैं। इसकी क्वालिटी और रंग है, जो विदेशों में अपनी पहचान बनाए हुए हैं। यहां की इमली की मांग आंध्रप्रदेश, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में तो है ही, वहीं सालाना करीब 200 करोड़ के इमली का निर्यात श्रीलंका, मलेशिया, पाकिस्तान और वियतनाम जैसे दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में भी किया जाता है। हालांकि पड़ोसी देशों में जाने वाली इमली सीधे बस्तर से वहां तक पहुंचती है। बस्तर के नारायणपुर से आने वाली इमली अपनी बेहतर क्वालिटी के लिए विख्यात है तो लोहड़ीगुड़ा की इमली अपने रंग को लेकर लोकप्रिय है।
वहीं दरभा की इमली गूदेदार और मीठे स्वाद की वजह से अन्य राज्यों के मुताबिक बस्तर की इमली को काफी ज्यादा पसंद किया जाता है। बस्तरिया इमली की मांग अन्य राज्यों में होने की वजह से स्थानीय व्यापारियों को इसकी कीमत अच्छी मिलने लगी है। वहीं दूसरे राज्यों के व्यापारी भी यहां आकर इमली खरीदने में काफी रूचि दिखा रहे हैं। यह न्यूनतम समर्थन मूल्य 2200 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। लेकिन इमली की मांग ऐसी है कि कई बार वनवासी व्यापारियों को समर्थन मूल्य से अधिक कीमत पर भी इमली बेच लेते हैं।
बस्तर क्षेत्र में इमली का बंपर उत्पादन होने के कारण अब इमली से संबंधित विभिन्न संस्करण इकाइयां भी लगाई जा रही है। इमली के बीज और रेशे निकालकर चपाती बनाने का काम भी शुरू हो चुका है। यह कार्य मशीनों के जरिए किया जा रहा है। इससे महिलाओं का समय बचने के अलावा उन्हें मुनाफा भी अधिक मिल रहा है। कृषि विभाग द्वारा इमली के बीज और रेशे को निकालकर चपाती बनाने का प्रशिक्षण ट्राईफेड के क्षेत्रीय प्रबंधक पीके पंडा के मुताबिक 300 आदिवासी महिला समूहों को इमली चपाती बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण लेने के बाद महिलाओं ने इमली से जो भी उत्पाद बनाए इसकी मांग स्थानीय स्तर के साथ बाहर भी है। इसके अलावा बस्तर की इमली से बनाई जा रही खटटी-मीठी केण्डी तेजी से लोकप्रिय हो रही है, साथ ही ग्रामीणों को स्वरोजगार का एक अच्छा जरिया भी दे रही है।
वनोपज के संग्रहण से वनवासी ग्रामिणों के रोजगार के अवसर बढ़े है। वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि देश में सर्वाधिक मुल्य की लघु वनोपजो की खरीदी करने वाला छत्तीसगढ़ राज्य प्रथम स्थन पर है। तमाम चुनौतियों के बावजूद नक्सल प्रभावित नारायणपुर एवं बीजापुर तथा सुकमा जिले में वनोपज संग्रहण केन्द्र खोले गये। बस्तर कमीश्नर द्वारा भी इन संग्रहण केन्दों को देखा। उन्होंने नारायणपुर जिले के महिला समूहों को स्टीकर तथा फुल झाडु बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

रायपुर (छत्तीसगढ़ )। छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन के करीब दो महीने बाद सोमवार से घरेलू विमान सेवा की शुरूआत हो गई है। लेकिन 25 मई से शुरू हुई विमान सेवाओं को लेकर नियम और कड़े कर दिए गए हैं। वहीं रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर इंडिगो फ्लाइट क्रमांक 2757 दिल्ली से उड़ान भरकर करीब 9 बजे रायपुर पहुंच गई है। इसमें कुल 82 यात्री सवार थे। 25 मार्च के बाद लैंडिंग करने वाली यह पहली विमान है।
आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में विदेश से घरेलू उड़ान से पहुंच रहे राज्य के निवासियों को एसओपी (स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। विदेश से छत्तीसगढ़ लौटने के इच्छुक लोगों को संबंधित देश से प्रस्थान के पूर्व स्वयं को राज्य के पोर्टल पर पंजीकृत कराना होगा। राज्य नोडल अधिकारी के माध्य से एयरलाइन्स इत्यादि से समन्वय स्थापित कर संबंधित यात्रियों का ब्यौरा संकलित किया जाकर उक्त जानकारी को जिलेवार पृथक कर संबंधित जिला कलेक्टर को भेजा जाएगा। राज्य के बाहर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट (जैसे- नागपुर, इन्दौर आदि) पर रायपुर हेतु उड़ान सुविधा न होने की स्थिति में समूह के रूप में स्वयं के व्यय पर राज्य तक लाने हेतु परिवहन व्यवस्था हेतु राज्य नोडल अधिकारी वांछित सहायता प्रदान करेंगे। वाहन हेतु ई-पास गृह विभाग की अनुमति से नियमानुसार जारी किया जाएगा। भारत में पहुंचने के उपरांत यदि यात्री द्वारा 14 दिवस का क्वारेन्टाईन राज्य के बाहर पूर्ण किया जा चुका है और इस आशय का प्रमाण पत्र संबंधित के पास उपलब्ध हो तो राज्य में पहुंचने पर उन्हें होम क्वारेंटीन किया जाएगा। पूर्व में क्वारेंटीन न होने वाले यात्रियों को निर्धारित व्यवस्था अनुसार फेसिलिटी-पेड क्वारेंटीन किया जाएगा। सभी यात्रियों के हैण्ड बैगेज-चेकइन बैगेज पर नगर निगम द्वारा कीटाणुनाशक घोल का छिड़काव किया जाएगा। भारत की सीमावर्ती देशों (नेपाल, भूटान, इत्यादि) के सड़क मार्ग से आने वाले व्यक्तियों के छत्तीगसढ़ में प्रवेश से पूर्व संबंधित सीमावर्ती राज्य (उत्तर प्रदेश, बिहार इत्यादि) से उनका सम्पूर्ण ब्यौरा राज्य नोडल अधिकारी द्वारा संकलित किया जाएगा।