
रेलवे लॉकडाउन के बीच धीरे-धीरे यात्री सेवाओं की बहाली की तरफ बढ़ रही है। श्रमिक स्पेशल और राजधानी स्पेशल ट्रेनें चलाने के बाद एक जून से गैर वातानुकूलित विशेष ट्रेनें भी दौडऩे जा रही हैं। साथ ही स्पेशल शताब्दी ट्रेन चलाने की भी तैयारी चल रही है। लॉकडाउन में बढ़ती रियायत के साथ यात्रियों का दबाव भी बढऩे लगा है। इसे देखते हुए छोटी दूरी की शताब्दी ट्रेन एवं अन्य यात्री ट्रेन के संचालन पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
वहीं देश में जारी कोरोना संकट के बीच भारतीय रेलवे ने श्रमिक ट्रेनों के अलावे 1 जून से 200 ट्रेनों को चलाने का फैसला किया है, जिसकी बुकिंग आज से ऑनलाइन शुरू हो रही है। इन ट्रेनों के टिकटों की बुकिंग 21 मई यानी आज सुबह 10 बजे से शुरू हो गई है। पहले रेलवे ने सिर्फ नॉन एसी ट्रेनें चलाने की बात की थी, मगर अब इन ट्रेनों में एसी और जनरल डिब्बे भी होंगे। रेलवे ने कहा है कि ये ट्रेनें पूरी तरह आरक्षित होंगी, जिनमें एसी और गैर एसी श्रेणियां होंगी। सामान्य डिब्बों में भी बैठने के लिए आरक्षित सीटों की सुविधा होगी। रेलवे ने एक जून से चलने वाली 200 ट्रेनों की सूची जारी की। टिकट की बुकिंग 21 मई , सुबह 10 बजे से शुरू होगी।

चक्रवाती तूफान अम्फान ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। इस तूफान का अब तक सबसे ज्यादा असर पश्चिम बंगाल में देखने को मिला है। वहीं ओडिशा में भी उस तूफान का असर दिख रहा है। इस तूफान से सबसे ज्यादा तबाही पश्चिम बंगाल में देखने को मिली है। यहां से खबर आ रही है कि यहां 12 लोगों की मौत हुई है। और पूरा एयरपोर्ट पानी से भर गया है। हजारों घरों को तहस-नहस कर दिया। इसके साथ-साथ हजार से अधिक पेड़ उखड़ गए और सैकड़ों बड़ी इमारतों को नुकसान पहुंचा है। बंगाल ने चक्रवात अम्फन का भारी खामियाजा उठाया. कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में हवा की रफ्तार 185 किलोमीटर प्रति घंटे की रही. जबकि दमदम में शाम 7 बजकर 20 मिनट पर हवा की रफ्तार 133 किमी प्रति घंटे रिकॉर्ड की गई।
आपको बता दें कि चक्रवात दोपहर में करीब ढाई बजे पश्चिम बंगाल में दीघा और बांग्लादेश में हटिया द्वीप के बीच तट पर पहुंचा। चक्रवात के कारण तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही हुई. चक्रवात की वजह से बड़ी संख्या में पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए वहीं कच्चे मकानों को भी खासा नुकसान हुआ. अधिकारियों के अनुसार चक्रवात आने से पहले पश्चिम बंगाल और ओडिशा में कम से कम 6.58 लाख लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था।

कोरोना संक्रमण को लेकर पूरे देश में अभी लॉकडाउन का चौथा चरण चल रहा है। वहीं कोरोना के नित नए सामने आ रहे मामलों ने छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश की चिंता बढ़ा दी है। वहीं कोरोना संक्रमण के चलते कई दिलचस्प मामले भी सामने आ रहे हैं। जिसने पुलिसवालों की भी नींद उड़ा दी है।
दरअसल, मीडिया में आ रही खबरों में बताया जा रहा है कि उड़ीसा के कुंभारपड़ा पुलिस थाने में पुलिस ने एक पॉकेटमार को पकड़ा था और थाने में ही उसकी जमकर खातिरदारी हो रही थी। इस बीच कोरोना संक्रमण को देखते हुए जब उसका टेस्ट किया गया तो वो पॉजिटिव निकला, फिर क्या था पूरा विभाग ही सकते में आ गया। फिर आनन-फानन में कोतवाल समेत पूरा थाने के तीस स्टॉफ को क्वारेंटाइन किया गया। इसके साथ ही थाने को सैनेटाइज किया जा रहा है।
आपको बता दें कि कोरोना संक्रमण के मामले देश में लगातार सामने आ रहे हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में भी मामले बढ़ रहे हैं।

मनोज त्रिवेदी
जान के डर से पहली बार मज़दूरों का घरों की ओर बदहवास निकल पडऩा, भूख शारीरिक शक्ति और बीमारी को चुनौती के उनके जज़्बे, कई सवाल भी खड़े करते है। पहला सवाल उन नियोक्ताओं पर जो इन्हें संभाल नही पाए, श्रम को फ़ायदे से जोडऩे के बजाय लाईबिलिटी के पैमाने में रख हाथ खड़े कर दिए गए। दूसरा उन राज्यों की सरकारों पर जिन्होंने उद्योगों के नुक़्ता ए नजऱ से वास्ता रख पल्ला झाड़ लिया। केंद्र सरकार से जो संघीय गणराज्य के क़ायदे से मुक्त दिखने लगी...? सवाल उन राज्यव्यापी राजनैतिक दलों से भी जो अपने वोट के लिए भीड़ को फ़ायदे के प्रबंधन में सिद्धहस्त है। सवाल उन सामाजिक- धार्मिक संगठनों से भी जो आत्मा के परमात्मा से मिलन के रास्ते में अपनी आत्मा की आवाज़ भूल चुके! सवाल सड़क के किनारे बसे गाँव, शहरों से जो भीड़ के इस प्रवाह के लिए अपने दरवाज़े बंद कर बैठे हैं। सवाल उस मीडिया से भी जो समस्या के उपाय को प्रेरित करने के बजाय विसंगतियों को हवा दे रहे हैं।
लॉकडाउन खुलने के बाद प्रॉडक्टिविटी की चिंता में पूरा देश रहेगा, आर्थिक मंदी से झूझने के बड़े खिलाड़ी ये मजदूर अपने परिवार के साथ अपने पैरों के छाले सेंकते अपने घरों में रहेंगे। अविश्वास, और भविष्य के डर के साथ और उधर उनके नियोक्ता उद्योग, ठेकेदार इनकी वापसी से अपने लाभ के गणित तय करेंगे। सरकारें मंदी से पार पाने के लिए इन उद्योगों पर निर्भर दिखती नजऱ आएगी और शायद श्रम के सार्थक महत्व को समझने का दावा करे। देशव्यापी पलायन को राज्यवार आंके तो ज़्यादातर मज़दूर महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र, तमिलनाडू, कर्नाटक से निकले और बिहार, उत्तरप्रदेश, झारखंड, ओडि़शा, मध्यप्रदेश, और छतीसगढ़ लौटने वाले हैं। जिन प्रदेशों की आबादी कम है वहाँ का उपलब्ध संसाधन इन्हें समेट सकता है रोजगार उपलब्ध करा कर जैसे छतीसगढ़, झारखंड। लेकिन बिहार, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, ओडि़शा के लिए बड़ी चुनौती आ चुकी है या आने वाली है, बड़ा संकट उन औद्योगिक विकसित राज्यों को ज़्यादा है जो इन्हें ना सम्भाल पाने की भयंकर चूक कर बैठे हैं।
अच्छा होता यदि ठेकेदार, उद्योग, निगम निकायों के साथ मिल कर एक मज़दूरों और उनके परिवार का प्रॉपर डाटा तैयार करते और आवश्यक ज़रूरते जैसे खाद्य सामग्री, दवाइयाँ, मानसिक साहस उसी स्थान पर उपलब्ध कराने की सारी क़वायद करते जहाँ ये मज़दूर कार्यरत है और रहते हैं। इनके सम्बंधित राज्य और उनकी सरकार, केंद्र, नियोक्ताओं के बीच सेतु के रूप में खड़े होते और मीडिया इसमें मदद करता सबसे आवश्यक भरोसा यदि पैदा होता तो ये जान पर खेलने का रिस्क ले कर पूरे देश को साँसत में डालने का रिस्क नही लेते।
मज़दूर अपने गाँव के अलावा जहाँ काम करता है उस संस्थान, शहर और राज्य के प्रति हमेशा अपनापन और आदरभाव लिए होता है कोशिशें की जानी थी उस भरोसे की जो उसे विलग करने के बजाय समेटने वाली होती, अच्छा होगा यदि सरकार और अथॉरिटी पलायन को प्रेरित करने वाले नियोक्ताओं को चिंहांकित भी करे, उनका बारीकी से मूल्यांकन करे और उद्योगों को दी जाने वाली रेवडिय़ाँ बाँटने से पहले जवाब तलब ज़रूर करे। सरकारों को अब स्वीकारना पड़ेगा कि श्रमिक अब भरोसा नहीं करेगा इसलिए साफ़ और पारदर्शी व्यवस्था मज़दूरों के लिए आवश्यक होगी, श्रम क़ानून को लचीला कर वैश्विक निवेश को आकर्षित करने की क़वायद में श्रमिक रूपी खंभे को मजबूत बनाना पड़ेगा, और फिर ईमारत की कल्पना की जाए।
(ये लेखक के निजी विचार हैं। मनोज त्रिवेदी नवभारत के सीईओ, दैनिक भास्कर-नईदुनिया के जीएम भी रह चुके हैं)

24 मार्च से पूरे देश में लागू लॉकडाउन का रविवार यानी 17 मई को तीसरा चरण भी समाप्त होने को है। इस बीच लोगों की निगाहें अब सोमवार 18 मई से शुरू होने वाली लॉकडाउन-4 पर टिकी हुई है। फिलहाल लॉकडाउन-4 को लेकर केंद्र सरकार की ओर से जारी होने वाली नई गाईडलाईन का इंतजार किया जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि केंद्र सरकार की ओर से लॉकडाउन-4 को लेकर आज नई गाईडलाईन जारी की जा सकती है। हो सकता है इसमें काफी लचीलापन देखने को मिले। और अब तक बंद पड़ी रेल सेवाओं, बस और ऑटो और कैब वालों को कुछ राहत मिल सकेगी, ऐसी संभावना है।
वहीं संभावना तो यहां तक जताई जा रही है कि राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों को अपने यहां हॉटस्पॉट को परिभाषित करने का अधिकार दिया जाएगा। लेकिन देश में कहीं भी स्कूल, कॉलेज, मॉल और सिनेमा घरों को खोलने की इजाजत नहीं होगी। लेकिन इतना जरूर है कि कोविड-19 निषिद्ध क्षेत्रों को छोड़कर सैलून, नाई की दुकानें और चश्मों की दुकानों को रेड जोन में खोलने की मंजूरी मिल सकती है।
मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक आधिकारिक सूत्र भी दावा कर रहे हैं कि लॉकडाउन-4 में पहले के चरणों की अपेक्षा लोगों को ज्यादा छूट मिलेगी और इस दौरान ग्रीन जोन को पूरी तरह खोल दिया जाएगा। ऑरेंज जोन में बेहद कम बंदिश होगी जबकि रेड जोन के निषिद्ध क्षेत्रों में ही सख्त पाबंदियां होंगी। अंतिम दिशा-निर्देश हालांकि राज्य सरकारों से मिले परामर्श का अध्ययन करने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी किये जाएंगे।

लोग अपने सोना-चांदी या कीमती जेवरातों और रुपयों-पैसों को बेहद सुरक्षित माने जाने वाले बैंक लॉकर में रखवाते हैं। लेकिन जरा सोचिए यदि बैंक लॉकर भी सोना की जगह पत्थर उगलने लगे तो, लोगों के भरोसे का आखिर क्या होगा। जी हां, ऐसा ही कुछ मामला सामने आया है राजस्थान के जालौर जिले में। जहां एक व्यापारी ने पांच साल पहले सोना रखवाया था, लेकिन जब व्यापारी सोना लेने बैंक लॉकर पहुंचा तो सामने का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए। a
मीडिया रिपोट्र्स में बताया जा रहा है कि जालौर शहर निवासी पारसमल जैन उस समय चकित रह गए जब एसबीआई के बैंक में सुरक्षित रखा उनका सारा सोना पत्थर बन गया। बताया जा रहा है कि पारसमल जैन का महाराष्ट्र के भिवंडी में व्यापार है। वे लॉकडाउन के चलते 20 दिन पहले ही जालौर लौटे हैं. इसके बाद बैंक में जाकर उन्होंने अपना लॉकर खुलवाया. लॉकर खुलवाते ही पारसमल जैन को ऐसा झटका लगा कि वो चकित हो गए. उस लॉकर में पत्थर भरे पड़े थे। फिलहाल पारसमल ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट पेश कर मामला दर्ज करवाया है। शिकायत के मुताबिक उन्होंने करीब 800 ग्राम सोने के आभूषण बैंक लॉकर में रखे थे. लेकिन अब आभूषण के बजाय उसमें मार्बल पत्थर के टुकड़े मिले हैं. इस घटनाक्रम के बाद बैंक प्रशासन के में भी हड़कंप मच गया है।
कुल मिलाकर यह बड़ा ही दिलचस्प मामला है कि जब लॉकर में सोना रखा गया था तो वह पत्थर कैसे बना. बैंक अधिकारी कह रहे है कि बीच में लॉकर खुला नहीं जबकि उपभोक्ता ने शिकायत दर्ज करा दी है। इस मामले की आसपास के इलाकों में खूब चर्चा की जा रही है. मामले की संवेदनशीलता देखते हुए पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है।

लॉकडाउन के बीच केंद्र की मोदी सरकार ने जिस आर्थिक पैकेज की घोषणा की है, उसकी आखिरी किस्त का ऐलान आज केंद्रीय वित्तमंत्री सीतारमण ने प्रेस कांफ्रेंस कर की। इसके मुताबिक पैकेज की आखिरी किस्त में शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर पूरा जोर रहा है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वित्तमंत्री ने हर जिले में संक्रामक रोग सेंटर बनाए जाने की बात कही, वहीं पहली से 12वीं तक के छात्रों के लिए कक्षा अनुसार अलग-अलग टीवी चैनल की बातें भी सामने आई है। इसके अलावा देश के 20 करोड़ जन-धन खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए 500-500 रुपये भेजे गए. उज्ज्वला योजना के तहत 6.81 करोड़ रसोई गैस धारकों को मुफ्त सिलेंडर दिया गया. इसके अलावा 2.20 करोड़ निर्माण मजदूरों को सीधे उनके खाते में पैसा दिया गया।
आपको बता दें कि देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण हर सेक्टर पर फोकस कर रही हैं। इसी कड़ी में रविवार को वित्त मंत्री ने आखिरी ऐलान में कहा कि लॉकडाउन के बीच कैसे बच्चे घर से पढ़ाई कर सकें, सरकार ने इसकी व्यवस्था की है. निर्मला सीतारमण ने बताया कि 12 नए चैनलों पर ई-क्लास होंगी. बच्चे अगले कुछ महीनों तक घर से बैठकर इन चैनलों के माध्यम से पढ़ाई कर पाएंगे।
शिक्षा क्षेत्र में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए मानव संसाधन मंत्रालय ने स्वयं प्रभा चैनल के जरिये शिक्षा गांवों तक पहुंचाने का फैसला किया है. तीन चैनलों को चिन्हित कर लिया है. लाइव टेलिकास्ट के जरिये भी शिक्षा उपलब्ध कराने पर फोकस है।
मुख्य बातें
-पहली से 12 वीं के छात्रों के लिए हर क्लास का अलग टीवी चैनल होगा।
-मनरेगा के लिए 40,000 करोड़ अतिरिक्त जारी किया गया।
-किसानों को 2 महीनें के लिए मुफ्त अनाज और दाल देने की घोषणा की गई, इसके अलावा 20 करोड़ लाभार्थियों के खातों में पैसे पहुंचाए गये।
-स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 15 हजार करोड़ रूपये की घोषणा की गई।
- कोरोना के बाद की तैयारियों पर भी रहेगी सरकार की नजर - मनरेगा, स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यापार और कोविड-19 पर दिया जाएगा जोर।
-देश में 300 से अधिक कंपनियां पीपीआई किट बना रही हैं। पहले एक भी कंपनियां नहीं थी। 1 लाख पीपीई किट एक दिन बनाए जा ही हैं।
- 200 नई पाठ्यपुस्तकें ई-पाठशाला में जोड़ी गईं।
-आज हम मनरेगा, हेल्थ, शिक्षा, बिजनेस, कंपनी एक्ट, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और राज्य सरकारों के रिसोर्स पर केंद्रित करेंगे।
-निर्माण कार्य में लगे मजदूरों तक भी मदद पहुंचाई गई है।
- प्रवासी मजदूरों के लिए चलाई गई ट्रेनें का किराया 85 फीसदी केंद्र सरकार ने दिया है। ट्रेन के अंदर खाना भी मुहैया करवाया गया।

देश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 24 घंटे में कोरोना के लगभग 5 हजार मामले सामने आए हैं, जो 24 घंटे में अब तक आए मामले में सबड़ा बड़ा है। वहीं इस दौरान 120 मरीजों की जान गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से रविवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में कोरोना वायरस से अब तक 2872 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि संक्रमितों की संख्या 90927 हो गई है। वहीं, पिछले 24 घंटों में कोरोना के 4987 नए मरीज़ मिले हैं और 120 लोगों की जान गई है। बीते 24 घंटे में अब तक सबसे ज्यादा नए मामले सामने आए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि 34109 मरीज कोरोना को मात देने में सफल रहे हैं। रिकवरी रेट सुधर कर 37.51 प्रतिशत पर पहुंच गया है।
आपको बता दें कि कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों के मद्देनजर देश में लगाए गए लॉकडाउन-3 का आज अंतिम दिन है। सोमवार से देश में ज्यादा रियायतों के साथ लॉक 4.0 लागू होगा। कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित महाराष्ट्र में शुक्रवार को कोविड-19 के 1606 नए मामले सामने आने के बाद राज्य में वायरस के मामले बढ़कर 30000 के पार हो गए हैं।

छत्तीसगढ़ (शोर सन्देश)कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पत्रकारों से चर्चा की। इस दौरान राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार की ओर से जारी आर्थिक पैकेज को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से देश के सामने कठिन संकट है। इस हालात से निपटने सरकार पूरी तरह विफल साबित हो रही है। साथ ही उन्होंने मोदी सरकार की ओर से जारी किए गए आर्थिक पैकेज को लेकर कहा कि सरकार लोगों को और जरूरतमंदों को सीधा मदद देने के बजाय उन्हें कर्ज के दलदल में फंसा रही है। जो प्रवासी मजदूर इस समय सड़क पर आ गए हैं, उनको कर्ज नहीं पैसे की जरूरत है। यही हाल किसान का भी है। उसे कर्ज नहीं पैसे चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा, `सड़क पर चलने वाले प्रवासी मजदूरों को कर्ज नहीं पैसे की जरूरत है. बच्चा जब रोता है तो मां उसे लोन नहीं देती, उसे चुप कराने का उपाय निकालती है, उसे ट्रीट देती है. सरकार को साहूकार नहीं, मां की तरह व्यवहार करना होगा.
राहुल गांधी ने कहा- लॉकडाउन को हमें धीरे-धीरे समझदारी से उठाना होगा. क्योंकि यह हमारे सभी समस्याओं का समाधान नहीं है. हमें बुजुर्गों, बच्चों सभी का ख्याल रखते हुए धीरे-धीरे लॉकडाउन उठाने के बारे में सोचना होगा. जिससे कि किसी को कोई खतरा ना हो।
राहुल ने कहा कि मेरे हिसाब से सरकार को तीन टर्म शॉट, मिड और लॉन्ग टर्म में काम करना चाहिए। शॉर्ट टर्म में डिमांड बढ़ाइए। इसके तहत आप हिंदुस्तान के छोटे और मंझोले व्यापारियों को बचाइए। मिड टर्म में छोटे और मझोले व्यापार को मदद कीजिए।

(शोर सन्देश),अब तक पूरे देश में कोरोना संक्रमण को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। इस बीच महाराष्ट्र से बड़ी खबर आ रही है। यहां बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र में अबतक 1061 पुलिसकर्मी कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। वहीं अबतक 9 पुलिसकर्मियों की मौत हुई है और 174 पुलिसवाले डिस्चार्ज हो चुके हैं।
आपको बता दें कि महाराष्ट्र में कोरोना वायरस संक्रमित पुलिस कर्मियों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। राज्य में पिछले 24 घंटों में 60 पुलिस कर्मियों को कोरोना का संक्रमण पाया गया है। इसके साथ ही बीते एक दिन में एक और पुलिसकर्मी की मौत इस घातक वायरस की वजह से हुई है। महाराष्ट्र पुलिस की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य में अब तक 1061 पुलिस कर्मी कोरोना वायरस की चपेट में पाए गए हैं। जिसमें से 112 ऑफिसर श्रेणी के हैं वहीं शेष 949 पुलिस के जवान हैं। राज्य में अभी तक 9 पुलिस कर्मियों की मौत इस घातक वायरस के चलते हो चुकी है। इसके अलावा एक्टिव केस की संख्या 878 है। इसमें भी 90 अधिकारी और 788 पुलिस के जवान शामिल हैं। अभी तक 22 आफिसर और 152 जवानों के साथ ही कुल 174 पुलिस कर्मी कोरोना को मात दे चुके हैं। वहीं अब तक महाराष्ट्र पुलिस के 9 जवानों की मौत हुई है।