ब्रेकिंग न्यूज

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दिल्ली एयरपोर्ट से शनिवार को मास्को जा रही एअर इंडिया की फ्लाइट बीच रास्ते से लौटा

30-May-2020

रायपुर/नई दिल्ली। दिल्ली एयरपोर्ट से शनिवार को मास्को जा रही एअर इंडिया की एक फ्लाइट को बीच से उस समय वापस लौटना पड़ा, जब पता चला कि उस फ्लाइट का पायलट कोरोना संक्रमित है। फ्लाइट को रास्ते में से ही दिल्ली वापस बुला लिया गया। दरअसल, शनिवार सुबह दिल्ली से मॉस्को के लिए रवाना हुई एक फ्लाइट पर सवार पायलटों में से एक पायलट कोरोना संक्रमित पाया गया है। इसके बाद फ्लाइट को वापस लौटाने का निर्णय लिया गया। 


भारतीय रेल के 167 साल के इतिहास में लिया ऐसा फैसला-अब टीटीई को नहीं पहनने होंगे काले कोट और टाई

30-May-2020

दिल्ली (शोर सन्देश) भारतीय रेल के 167 साल के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब रेलगाडिय़ों में टिकट की जांच करने वाले कर्मचारी अपने पारंपरिक काले कोट और टाई नहीं पहनेंगे. रेलवे ने एक जून से चलने वाली 200 एक्सप्रेस ट्रेनों के टीटीई के लिए शुक्रवार को गाइडलाइन जारी कर दी है. रेलवे की ओर से कोरोनावायरस के बचाव के लिए जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि, टीटीई अपने पारंपरिक काले कोट और टाई का इस्तेमाल ना करें. हालांकि, वह इस दौरान अपने नाम और पोस्ट वाला बैज पहने रहेंगे.

ट्रेनों में टिकटों की जांच करने वाले सभी टीटीई कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें पर्याप्त संख्या में मास्क, फेस शील्ड, दस्ताने, सिर ढंकने का कवर, सेनेटाइजर, साबुन समेत अन्य वस्तुएं मुहैया कराई जाएंगी. गाइडलाइंस में यह भी कहा है कि यह सुनिश्चित करने के लिए जांच की जा सकती है कि टीटीई वास्तव में सुरक्षात्मक उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं या नहीं. दिशा निर्देश में यह भी कहा गया है कि टिकटों की जांच करने वाले सभी कर्मचारियों की थर्मल स्क्रीनिंग तब की जाएगी जब वह ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करेंगे अगर कोई स्क्रीनिंग में फेल रहता है तो उन्हें ड्यूटी पर नहीं जाने दिया जाएगा. सभी कर्मचारियों से कहा गया है कि उन्हें सांस लेन में किसी तरह की परेशानी है तो वह इसके बारे में अधिकारियों को सूचित करें


छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्य अभी टिड्डी दल के आतंक से परेशान

30-May-2020

छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्य अभी टिड्डी दल के आतंक से परेशान हैं। वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण लागू लॉकडाउन के बीच देश के पश्चिमी राज्यों पर टिड्डी दलों ने धावा बोल दिया है। पिछले ढाई दशक में पहली बार महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी इनका जबरदस्त प्रकोप दिखाई दे रहा है। जलवायु परिवर्तन विषय पर काम करने वाले प्रमुख संगठन `क्लाइमेट ट्रेंड्सÓ के मुताबिक टिड्डियों के झुंड पैदा होने का जलवायु परिवर्तन से सीधा संबंध है। जलवायु परिवर्तन की वजह से करीब 5 महीने पहले पूर्वी अफ्रीका में अत्यधिक बारिश हुई थी। इसके कारण उपयुक्त माहौल मिलने से बहुत भारी मात्रा में टिड्डियों का विकास हुआ। उसके बाद वे झुंड वहां से 150 से 200 किलोमीटर रोजाना का सफर तय करते हुए दक्षिणी ईरान और फिर दक्षिण पश्चिमी पाकिस्तान पहुंचे। वहां भी उन्हें अनियमित मौसमी परिस्थितियों के कारण प्रजनन के लिए उपयुक्त माहौल मिला जिससे उनकी तादाद और बढ़ गई. वे अब भारत की तरफ रुख कर चुकी हैं। 


तत्कालीन वित्तीय वर्ष की जीडीपी 4.2 फीसदी पर रही, यह 11 साल का निचला स्‍तर

30-May-2020


रायपुर/नई दिल्‍ली (शोर सन्देश) मौजूदा हालात में देश की अर्थ व्यवस्था की चिंता तो हर कोई कर रहा है। आखिर क्यों ना करे, क्योंकि जिस विश्वव्यापी महामारी ने पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को संकट में जो डाल दिया है। मौजूदा जीडीपी कि यदि बात करें तो आज देश की जीडीपी 11 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई है। देश में कांग्रेस की मनमोहन सिंह की सरकार के वक्त वर्ष 2009 में आई मंदी जैसी निर्मित हो गई हैं, यहां यह कहना लाजमी होगा कि देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही चरमराई हुई थी जो अब महामारी की चपेट में आने से और ज्यादा चरमरा गई है। देश में तत्कालीन वित्तीय वर्ष की जीडीपी 4.2 फीसदी पर रही। यह करीब 11 साल का निचला स्‍तर है, इससे पहले 2009 में जीडीपी ग्रोथ इस स्‍तर के नीचे गई थी। इसके बाद भी 2009 में यूपीए वापस सत्ता पर आई थी जबकि वित्तीय वर्ष 2008-09 के जीडीपी आंकड़े 3.09 फीसदी पहुँच गए थे। जीडीपी के इन आंकड़ों पर वैश्‍विक मंदी का साया था।
दरअसल, साल 2008 में दुनियाभर में मंदी छाई हुई थी। इस मंदी ने भारतीय इकोनॉमी को भी प्रभावित किया। इसका असर जीडीपी आंकड़ों पर देखने को मिला.आज करीब 11 साल बाद देश की जीडीपी एक बार फिर उसी स्‍तर के करीब जा पहुंची है। वित्त वर्ष 2019-20 में जीडीपी की ग्रोथ 4.2 फीसदी पर रही. यह करीब 11 साल का निचला स्‍तर है. इससे पहले 2008- 09 में जीडीपी ग्रोथ इस स्‍तर तक पहुंची थी।
इन 11 साल में जीडीपी के चाल की बात करें तो ग्रोथ का सबसे उच्‍चतम स्‍तर वित्त वर्ष 2016-17 में रहा। इस वित्त वर्ष में देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 8.25 फीसदी पर रही। हालांकि, इसके बाद के 3 वित्त वर्ष में लगातार गिरावट का दौर देखने को मिल रहा है।
00 वित्त वर्ष 2019-20 के चारों तिमाही का हाल :
वित्त वर्ष 2019-20 की चौथी तिमाही यानी जनवरी से मार्च के बीच जीडीपी ग्रोथ रेट 3.1 फीसदी पर रही. इसी तरह, दिसंबर तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 4.7 फीसदी पर गई थी. इसके अलावा 2019-20 की पहली तिमाही के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट को संशोधित कर 5.6 फीसदी और दूसरी तिमाही के लिए 5.1 फीसदी कर दिया गया था.
00 ये साल और बुरा...:
कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए वित्त वर्ष 2020-21 का साल और बुरा होने की आशंका है. बीते दिनों भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने तो यहां तक कह दिया कि वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान देश के जीडीपी में ग्रोथ निगेटिव रहेगी यानी इसमें गिरावट आएगी.
00 राहत पैकेज का फायदा नहीं :

बीते दिनों कोरोना संकट को देखते हुए मोदी सरकार ने करीब 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया था. देश के सामने इस पैकेज का ब्यौरा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रख चुकी हैं, लेकिन तमाम रेटिंग एजेंसियों को अनुमान है कि इस राहत पैकेज से जीडीपी को कोई फायदा नहीं होगा। इस पैकेज का अधिकतर हिस्‍सा क्रेडिट स्‍कीम की तरह है। ऐसे में इससे इकोनॉमी में कोई उत्‍साह नहीं आएगा। 


ट्राई के प्रस्ताव पर बनी सहमति तो 11 अंकों का हो जाएगा मोबाइल नंबर

30-May-2020

जल्द ही हमारा 10 अंकों का मोबाइल नंबर 11 अंकों का हो सकता है। टेलिकॉम रेग्युलेटरी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने शुक्रवार को देश में 11 अंकों के मोबाइल नंबर को इस्तेमाल करने का प्रस्ताव जारी किया है। ट्राई के मुताबिक 10 अंकों वाले मोबाइल नंबर को 11 अंकों वाले मोबाइल नंबर से बदलने पर देश में ज्यादा नंबर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
ट्राई ने अपने प्रस्ताव में यह भी बताया कि देश में मोबाइल नंबर के पहला अंक अगर 9 रखा जाए तो 10 से 11 अंकों के मोबाइल नंबर पर स्विच होने से देश में कुल 1000 करोड़ नंबर्स की क्षमता हो जाएगी।

इसके अलावा ट्राई ने फिक्स्ड लाइन से कॉल करते वक्त मोबाइल नंबर के आगे `0Ó लगाने की भी बात कही है। फिलहाल फिक्स्ड लाइन कनेक्शन से इंटर-सर्विस एरिया मोबाइल कॉल्स करने के लिए पहले `0Ó लगाना पड़ता है. जबकि मोबाइल से लैंडलाइन से बिना शुरुआत में `0Ó लगाए भी कॉल किया जा सकता है। इसके अलावा ने एक नया नेशनल नंबरिंग प्लान का भी सुझाव भी दिया है, जिसे जल्दी उपलब्ध कराना है। 


राष्ट्रपति कोविंद व प्रधानमंत्री मोदी व अन्य नेताओ ने दी अजीत जोगी को दी श्रद्धांजलि

30-May-2020

रायपुर/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अजीत जोगी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए अपने ट्वीट किया कि लोकसेवा को लेकर अजीत जोगी उत्साही थे, यही उत्साह ब्यूरोक्रेट और राजनेता के तौर पर कठोर श्रम करने के लिए प्रेरित किया। वे गरीबों की, खासतौर से आदिवासी समुदाय के, जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए कार्य करते रहे, उनके निधन पर दुख है, उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदना।
00 त्रिपुरा के राज्यपाल रमेश बैस बीजेपी के सभी दिग्गज नेताओं ने जोगी को दी श्रद्धांजलि।
छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री का शुक्रवार को रायपुर के नारायणा अस्पताल में निधन हो गया। अजीत जोगी के निधन पर त्रिपुरा के राज्यपाल रमेश बैस समेत छत्तीसगढ़ के तमाम बीजेपी नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। रमेश बैस ने कहा कि अजीत जोगी के निधन की खबर सुनकर सहसा यकीन नहीं हुआ, कि आज जोगी की जिजीविषा के आगे मौत जीत जाएगी। अजित जोगी का निधन छत्तीसगढ़ राज्य के एक अनमोल रत्न के खोने जैसा है। अजित जोगी के निधन की खबर सुनकर स्तब्ध हूं। इस दु:खद की घड़ी में ईश्वर से कामना करता हूं कि स्व. अजित जोगी को अपने परमधाम में स्थान दें परिवार को सबल बनाए रखें।
00 जोगी ने योग्यता के दम पर हर वह मुकाम हासिल किया जिसके वे अधिकारी थे : विक्रम उसेंडी
भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के निधन पर गहन शोक व्यक्त किया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी ने कहा कि स्व. जोगी ने अपनी योग्यता के दम पर हर वह मुकाम हासिल किया जिसके वे अधिकारी थे, वे एक कुशल प्रशासक थे और यह गुण उनके राजनीतिक जीवन में तब बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ जब वे प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोनीत हुए थे। छत्तीसगढ़ का विकास और यहां के लोगों का सर्वतोमुखी कल्याण उनकी प्राथमिकताओं में था और इसके लिए वे सतत प्रयत्नशील रहे। उनके निधन से छत्तीसगढ़ को जो अपूरणीय क्षति हुई है, उसकी भरपाई संभव नहीं होगी। उसेंडी ने स्व. जोगी की आत्मा की चिरशांति की प्रार्थना करते हुए जोगी-परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रेषित की।
00 हम सबके लिए बड़ी क्षति : धरमलाल कौशिक
नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि अजीत जोगी ने भारतीय राजनीति सामाजिक जीवन सर्वोच्च स्थान को प्राप्त किया था। हम सबके लिए बड़ी क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
00 प्रदेश के विकास की नींव रखी : बृजमोहन अग्रवाल
पूर्व मंत्री विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास की नींव रखने वाले प्रथम मुख्यमंत्री आदरणीय अजित जोगी का निधन छत्तीसगढ़ के लिए अपूरणीय क्षति है। मेरी ईश्वर से प्रार्थना है की उनकी आत्मा को शान्ति तथा परिवार को यह दु: सहने की शक्ति प्रदान करें।
00 अजीत जोगी ने निधन से बहुत दुखी हूं : कवि सुरेंद्र दुबे

डॉक्टर सुरेंद्र दुबे ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के निधन से दुखी हूं। उन्होंने ही मुझे एक निजी अखबार के कवि सम्मेलन में रायपुर में सुनने के बाद मंत्रालय में अपना ओएसडी बनाकर नियुक्त किया था, उस समय मैं दुर्ग आयुर्वेदिक अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी था, वे मेरी कविताओं से प्रभावित हुए और मैंने उनसे बहुत सारे प्रशासनिक बातें सीखी जो मुझे जीवन भर याद रहेगी। आज मैं अजीत जोगी के निधन से अंदर से बहुत दुखी हूं। 


छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का शुक्रवार को निधन हो गया।

30-May-2020

 

छत्तीसगढ़ के पेंड्रा नाम की एक छोटी जगह से निकला एक साधारण बच्चा अजीत जोगी अगर असाधारण उपलब्धियां हासिल कर सका तो उसके पीछे उसका मस्तिष्क ही था।अजीत प्रमोद कुमार जोगी चले गए। हालांकि उनकी मृत्यु का तात्कालिक कारण बना हृदय गति का रुक जाना। लेकिन उनके मस्तिष्क ने पहले ही काम करना बंद कर दिया था। जिसे अंग्रेज़ी में कहते हैं, क्वब्रेन डेड` अजीत जोगी को जो भी जानता है, वह समझ सकता है कि मस्तिष्क के बिना उनका कोई अस्तित्व नहीं हो सकता। बुद्धिमत्ता या बौद्धिकता उनकी ताकत रही, आजीवन रही। छत्तीसगढ़ के पेंड्रा नाम की एक छोटी जगह से निकला एक साधारण बच्चा अगर असाधारण उपलब्धियां हासिल कर सका तो उसके पीछे उसका मस्तिष्क ही था। कल्पना कीजिए कि कभी बिना चप्पलों के स्कूल जाने वाला बच्चा कहां तक पहुंच सकता है?
00 अजीत जोगी की असाधारण यात्रा
और अब अजीत जोगी की यात्रा देखिए। पहले मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई। फिर इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाना। फिर डेढ़ साल आईपीएस और फिर १४ साल आईएएस। फिर दो बार राज्यसभा की सदस्यता, साथ में कांग्रेस का राष्ट्रीय प्रवक्ता होना। फिर एक बार लोकसभा। दूसरी बार लोकसभा हार भी गए तो नए राज्य छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री। यह अजीत जोगी की उड़ान की कहानी है। ऊंचाई तक पहुंचने की कहानी है।
बेहद साधारण कद काठी, अति साधारण नैन नक्श और गहरा सांवला रंग लेकिन आत्मविश्वास इतना गजब का था कि एकबारगी लोग चौंक जाते थे। प्रभावित हो जाते थे, नेतृत्व का गुण इतना सहज था कि छात्र जीवन से ही नेतागिरी करते रहे। चातुर्य इतना था कि हमेशा दूर तक देखते रहे और योजना बनाते रहे। जिन लोगों ने उन्हें आईएएस अधिकारी की तरह देखा है वे आज भी याद करते हैं, कि ऐसे प्रशासनिक अधिकारी कम ही होते हैं। आम तौर पर आईएएस अधिकारी क्वफील्ड पोस्टिंग` और मंत्रालयीन कार्यों के बीच झूलते रहते हैं, लेकिन अजीत जोगी लगातार 14 बरस तक कलेक्टरी करते रहे।
00 साधने में पारंगत :
वे दूर तक सोचते थे, यही कारण था कि वे केवल लंबे समय तक कलेक्टर रहे बल्कि वे यह भी क्वजुगाड़` करते रहे कि वे कहां के कलेक्टर होंगे। यह उनकी क्वयोजना` या चातुर्य ही था, कि अविभाजित मध्यप्रदेश के हर उस शहर में कलेक्टर बने जहां उस समय के राजनीतिक क्षत्रप रहते थे, अफ्सरी करते हुए वे नेताओं को साधते रहे, विद्याचरण और श्यामाचरण शुक्ल से लेकर अर्जुन सिंह और माधवराव सिंधिया से प्रकाश चंद्र सेठी तक सब दिग्गज उनसे सधे हुए थे। खासकर तब तक, जब तक उन्होंने राजनीति में अपने क्वदांव` चलने शुरु नहीं किए। साधने में वे इतने पारंगत हो चुके थे, कि वे राजीव गांधी को तब साध चुके थे जब वे इंडियन एयरलाइन्स के पायलट थे। तब अजीत जोगी रायपुर के कलेक्टर हुआ करते थे। एयरपोर्ट पर निर्देश थे जब भी पायलट राजीव गांधी हों उन्हें सूचना दे दी जाएं। वे घर से नाश्ता और चाय लेकर हवाई जहाज से पहले हाजिर होते थे, तभी तो जब राज्यसभा में जाने की बारी आई और अर्जुन सिंह के कहने से दिग्विजय सिंह उन्हें राजीव गांधी से मिलवाने ले गए तो राजीव गांधी ने कहा था, आई नो दिस जेंटलमैन, ही इज फाइन।
साधने के लिए उन्होंने हर किसी के लिए अलग फॉर्मूला अपनाया, चाहे वो सोनिया गांधी हों या फिर सीताराम केसरी। ऐसा नहीं कि सब उनसे सध गए, वे लाख कोशिशों के बावजूद नरसिंह राव को नहीं साध पाए, वरना उनकी जीवनी में केंद्रीय मंत्री का पद भी जुड़ गया होता, लेकिन वे हार नहीं मानते थे, जिस समय देश यह नहीं जानता था कि छत्तीसगढ़ नाम का राज्य कभी अस्तित्व में आएगा भी या नहीं, उस समय भी उन्होंने ठान लिया था, कि वे छत्तीसगढ़ राज्य के पहले मुख्यमंत्री बनेंगे। माधवराव सिंधिया ने वर्ष 1998 में उनका परिचय इसी तरह से करवाया था। राज्य बना वर्ष 2000 में और वे मुख्यमंत्री बने।
00 तिकड़म और गलतियां :
जैसा कि सुकरात ने कहा है कि उत्कृष्टता अपने आपमें कोई गुण नहीं होता, वह तो बार बार अच्छा या सही कार्य करते रहने से पैदा होने वाली पहचान है। अजीत जोगी की उड़ान की कहानी ऐसी दिखती है मानों वे ऐसे उत्कृष्ट व्यक्ति थे, जो हर बार सही निशाना लगाते रहे। लेकिन सुकरात की बात सही थी. उत्कृष्ट हो जाने का या अपने मस्तिष्क में उपजे तिकड़मों का भ्रम इतना बड़ा हो गया कि अजीत जोगी गलत फैसले लेते रहे। जिन समय वे शिखर की ओर बढ़ रहे थे उन दिनों भी उनसे गलतियां हुईं, लेकिन जब ग्राफ ऊपर की ओर जा रहा हो तो गलतियों को कौन याद रखता है? उनसे गलतियां प्रशासनिक अधिकारी के रूप में भी हुईं और राजनेता के रूप में भी, लेकिन दर्ज होनी शुरु हुईं जब वे राजनेता बनकर शिखर पर जा पहुंचे थे और सामने ढलान दिखने लगी थी।
छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री के रूप में वे लोकप्रिय मुख्यमंत्री के रूप में तो उभरे, लेकिन एक ऐसा एक बड़ा वर्ग भी तैयार हो गया जिनके मन में उनकी कार्यशैली से असुरक्षा की भावना उपजी। एक तरह का डर पैदा हो गया और इसी डर को आरएसएस-भाजपा ने अपनी चिरपरिचित शैली में बहुत बड़ा कर दिया, सच्चाई से बड़ी अफवाह हो गई और जिसे हीरो होना चाहिए था वह विलेन दिखने लगा और इस डर को भाजपा उनके कांग्रेस से निकन जाने तक भुनाती रही। वैसे ऐसा नहीं है कि अजीत जोगी एकदम बेदाग थे, उन्होंने डर तो पैदा किया ही और यह डर सामाजिक, कानून व्यवस्था के अलावा राजनीतिक भी था, उनकी राजनीति चालों ने पार्टी के नेताओं के मन में एक तरह की असुरक्षा भर दी।
00 निरंकुशता और अनैतिक सांठगांठ :
अजीत जोगी ने कांग्रेस के भीतर नेतृत्व की चुनौतियों को ख़त्म करने के लिए अपनी ही पार्टी के उन साथियों को हाशिए पर धकेलने का षडयंत्र रचना शुरू कर दिया। एक समय ऐसा भी आया जब वे प्रतिद्वंद्वियों को रास्ते से हटाने के लिए राजनीति की जगह दूसरे हथियारों का भी उपयोग करने लगे। यहां तक कि उनके सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी विद्याचरण शुक्ल के एक सहयोगी की सरेआम हत्या हो गई और इसमें उनके अपने बेटे का नाम शामिल हो गया। दूसरी बड़ी गलती अजीत जोगी ने यह कि कांग्रेस में अपने प्रतिद्वंद्वियों और ताकतवर जमीनी नेताओं के उभार को रोकने के लिए उन्होंने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी, खासकर मुख्यमंत्री रमन सिंह से सांठगांठ कर ली। राजनीति में बहुत से अनकहे समझौते होते रहे हैं, लेकिन यह दोस्ती ऐसी थी कि दोनों दलों के लोग जानते थे, कि अजीत जोगी का रहना रमन सिंह के लिए फायदेमंद है। कांग्रेस आलाकमान तक इसकी शिकायतें भी थी।
वे लगभग निरंकुश तो थे ही, समय के साथ वे और उच्चश्रृंखल होते गए। उन पर गंभीर आरोप हैं कि नवनियुक्त प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल को विफल साबित करने के लिए उन्होंने बस्तर के एक उपचुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी को पैसे ले-देकर मैदान से हटा दिया। इस खरीद फरोख़्त के ऑडियो टेप मीडिया में आने के बाद ही उनके बेटे अमित जोगी को पार्टी से हटाया गया और उन्हें पार्टी छोडऩे पर मजबूर होना पड़ा।
00 अशोक, अकबर और अंग्रेज :
इतने मजबूर वे संभवत: पहली बार ही हुए, वरना वे जिनको अपना आदर्श मानते रहे हैं उसमें मजबूरी शब्द कहीं आता ही नहीं। एक साक्षात्कार में उनसे पूछा गया था कि वे अपना आदर्श किसे मानते हैं तो उन्होंने तीन नाम लिए थे, अशोक, अकबर और अंग्रेज, बिना अधिक विश्लेषण किए भी यह समझा जा सकता है, कि तीनों में जो बात उभयनिष्ठ है, वह यह कि तीनों साम्राज्यवादी और विस्तारवादी थे और तानाशाह भी हों तो स्वेच्छाचारी तो थे ही। अजीत जोगी की राजनीतिक पारी भी इसी के इर्दगिर्द घूमती रही। वैसे उनके इर्दगिर्द झूठ का महिमामंडन भी बहुत था, खासकर जब अपने राजनीतिक कद या वर्चस्व का बखान करना हो। राष्ट्रीय प्रवक्ता रहते हुए भी वे पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में छत्तीसगढ़ में अपने राजनीतिक रसूख को इस तरह बयान करते थे कि आश्चर्य होता था। सच बात यह थी कि मुख्यमंत्री बनने से पहले छत्तीसगढ़ में उनकी कोई राजनीतिक जमीन नहीं थी, जब वे मुख्यमंत्री चुने लिए गए तो एक पत्रकार ने आश्चर्य से उनसे पूछा, लेकिन आपके साथ तो कुल दो विधायक हैं उन्होंने ठहाका लगाया और कहा दो नहीं डेढ़ दूसरा जो है उसका एक पांव कहीं और है।
00 झूठ पर खड़ा रसूख :
झूठ का ही प्रताप था कि पूरा छत्तीसगढ़ जानता था कि वे आदिवासी नहीं हैं, लेकिन वे आजीवन आदिवासी बने रहे। अदालतों ने तकनीकी आधार पर उनको बरी कर दिया, लेकिन इस बार वे बुरी तरह फंस गए थे, भाजपा के मुख्यमंत्री से उनकी दोस्ती की एक ठोस वजह जाति का प्रमाण पत्र भी था। वे एक दूसरे की पीठ खुजा रहे थे। क्वतुम मुझे साथ दो, मैं तुम्हारा फैसला रोके रखूंगा` की नीति पर रमन सिंह ने अजीत जोगी का भरपूर दोहन किया। कम से कम उनके जीते जी कोई ठोस फैसला नहीं आया जिससे यह साबित हो सके कि उनके आदिवासी होने का प्रमाण पत्र झूठा है। एक ऐसा सच पर्दे में है, जिसके बारे में हर कोई जानता है। बरसों तक वे कांग्रेस के बड़े नेताओं को इस भ्रम में रखते रहे कि अगर उनके बिना छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का कोई भविष्य नहीं है। दिल्ली में संभवत: राहुल गांधी पहले नेता रहे जिन्होंने यह जोखिम उठाना स्वीकार किया कि अजीत जोगी के बिना भी कांग्रेस के भविष्य की तलाश हो सकती है।
कांग्रेस ने तो अपना भविष्य संभाल लिया, लेकिन अपनी एक नई पार्टी बनाने के बाद जिस करिश्मे का छद्म उन्होंने बना रखा था वह टूट गया। साथ में भ्रम टूटा उनके अभिन्न मित्र बन गए रमन सिंह का, भारतीय जनता पार्टी का, आरएसएस का और दिल्ली के कई नामधारी पत्रकारों का. लेकिन यह कहना गलत होगा कि अजीत जोगी को कभी इसे लेकर कोई भ्रम था। अगर होता तो वे मायावती के साथ चुनाव लड़ते, मायावती से पहले नीतीश कुमार पर डोरे डालते और कांग्रेस में वापसी की कोशिश करते।
00 अथक प्रयास :

कोशिश एक ऐसी चीज थी, जो राजनीति के छात्रों को अजीत जोगी के जीवन से सीखनी चाहिए। उनके मस्तिष्क की उर्वरता की सबसे बड़ी ताकत थी उनका जुझारूपन और कोशिश करते रहने की उनकी जिद. कोई नकारात्मक परिणाम उन्हें निराश नहीं करती थी और यही एक बात थी जिससे उनके विरोधी भी ईष्र्या करते रहे हैं। ईष्र्या तो खैर उनकी जीजिविषा से भी होती है। वर्ष 2004 में जो सड़क दुर्घटना उनके साथ घटी उसके बाद किसी ने नहीं सोचा था कि वे बचेंगे भी, लोग सोचते थे कि अगर बचेंगे भी तो राजनीति नहीं कर पाएंगे। राजनीति कर भी पाएंगे तो लंबी पारी नहीं खेल पाएंगे, लंबी पारी खेलेंगे भी तो हाशिए पर पड़े होंगे, लेकिन हाशिए पर रहना अजीत जोगी तो कभी मंज़ूर नहीं हुआ। इसमें कोई संदेह नहीं कि वे अपने हमउम्र लोगों में वे सबसे विचारवान, ऊर्जावान और धारदार नेताओं में से एक थे, लेकिन उनके मस्तिष्क ने ही उनकी राजनीतिक के पन्ने उलट दिए। कहते हैं कि इतिहास निर्मम होता है, इस सवाल का जवाब अभी नहीं दिया जा सकता कि इतिहास के पन्नों पर अजीत जोगी कैसे दर्ज किए जाएंगे क्योंकि उन्होंने अपने जीते जी सारे सफेद पन्नों को स्याह करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, चाहे वो भाजपा के विधायकों को तोड़कर कांग्रेस में शामिल करने का मामला हो या चुनाव हारने के बाद जोड़तोड़ से सरकार बनाने की कोशिशों का, निश्चित तौर पर वो एक ऐसे राजनेता थे जो अपने ही रचे चक्रव्यूहों में एक के बाद एक फंसते रहे। 


सुप्रीम कोर्ट ने आज मजदूरों की अपने गृह प्रदेश वापसी पर किया बड़ा फैसला

28-May-2020

रायपुर/नयी दिल्ली (शोर सन्देश) सुप्रीम कोर्ट ने आज मजदूरों की अपने गृह प्रदेश वापसी पर बड़ा फैसला दिया है। बता दें कि सरकार की ओर से दलील रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार ने अब तक 3700 से ज्यादा श्रमिक एक्सप्रेस विशेष ट्रेन चलाई हैं, जिसके जरिए 95 लाख से ज्यादा यात्रियों का आवागमन हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने हर राज्यों से मांगी रिपोर्टसुप्रीम कोर्ट ने किराया लेने को कहा कि प्रवासी मजदूरों के मसले पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अशोक भूषण की अगुवाई वाली बेंच ने गुरुवार को सुनवाई की। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 1 मई से 27 मई तक 3700 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई गई हैं, जिसके जरिए 95 लाख से ज्यादा यात्रियों का आवागमन हुआ है।
सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी कहा कि ट्रेन का किराया यात्रा शुरू करने या मंजिल वाले राज्य ने चुकाया है, मजदूरों पर इसका कोई बोझ नहीं था। शुरुआत में जिन्होंने किराया दे दिया था उनको बिहार सरकार ने भुगतान कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि किसी प्रवासी मजदूर से घर जाने के लिए यात्रा का एक पैसा भी किराया नहीं वसूला जाए। सारा व्यय राज्य वहन करें। जहां मजदूर रह रहा है या यात्रा शुरू हो रही है वो राज्य या जहां उसे जाना है वो राज्य ये राज्य आपस में तय कर लें। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने यह भी हिदायत दी है कि रास्ते में मजदूरों के खाने-पीने और आश्रय का इंतजाम राज्य सही ढंग से करें।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देशों में यह भी कहा है कि जहां से मजदूर रेल यात्रा शुरू करें, वहां की सरकार उनके भोजन, पानी और टिकट इत्यादि का इंतजाम करे। इसके अलावा रेल में भी उनके खाने-पीने का इंतजाम हो।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार सभी प्रवासी मजदूर यात्रियों का रजिस्ट्रेशन करे और उसके मुताबिक ही उनका ट्रेन में बैठना सुनिश्चित करे। सड़क पर पैदल जाता कोई भी मजदूर दिखे तो उसे शेल्टर होम में लाकर रखे फिर खाना-पीना देकर ट्रेन या बस से उसके गांव तक भेजने का इंतजाम करे।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की की दस्ती कॉपी केंद्र और सभी राज्य सरकारों को दे दी गई है। इसके साथ ही अगले शुक्रवार तक सभी राज्यों को कोर्ट में यह रिपोर्ट दाखिल कर देनी है जिसमें मजदूरों की संख्या, उनके ट्रांसपोर्टेशन का तरीका, रजिस्ट्रेशन का तरीका, उनको दी जा रही सुविधाओं का ब्यौरा सभी कुछ होंगे। 


लि-रॉय होटल में भीषण आग

27-May-2020

रायपुर (शोर सन्देश) राजधानी का सबसे ज्यादा भीड़-भाड़ वाला इलाका रेलवे स्टेशन पर स्थित एक होटल में भीषण आग लग गई है। दमकल की गाडिय़ा घटना स्थल पर पहुंचकर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉम क्रमांक 1 पर स्थित होटल लि-रॉय में लगे आग पर काबू पाने का प्रयास कर रही है। मौके पर गंज थाना पुलिस की टीम, जीआरपीएफ और दमकल कर्मी जुटे हुए है।


केंद्र सरकार के लॉकडाउन पूरी तरफ असफल -राहुल गांधी

26-May-2020

देश में इन दिनों लॉकडाउन-4 का दौर चल रहा है। इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज नई दिल्ली में वीडियो कांफ्रेंसिंग से चौथी बार मीडिया से बात की। राहुल गांधी ने कोरोना के संक्रमण को रोकने में केंद्र सरकार के लॉकडाउन पूरी तरफ असफल कहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि अब पीएम नरेंद्र मोदी से पूछना चाहता हूं कि मजदूरों और गरीबों के लिए सरकार के पास प्लान बी क्या है? उन्होंने मोदी सरकार के खास लोगों से अपनी बातचीत का हवाला देते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि रेटिंग खराब होने के डर से केंद्र गरीबों और मजूदरों को पैसा नहीं दे रही है। राहुल ने कहा कि आज हिंदुस्तान की शक्ति की रक्षा करने की जरूरत है। इसके लिए 50 फीसदी लोगों के डायरेक्ट कैश देना होगा। हर महीने साढ़े 7 हजार रुपये देना होगा।Ó
उन्होंने कहा, `थोड़ी बातचीत जो सरकार में डिसिजन मेकर्स हैं, उनसे इनडायरेक्टली होती रहती है। उनकी राय है कि अगर हमने बहुत सारा पैसा गरीब लोगों को दे दिया, मजदूरों को दे दिया तो बाहर के देशों में गलत इंप्रेशन चला जाएगा। हमारी रेटिंग खराब हो जाएगी।Ó उन्होंने कहा, `हिंदुस्तान की शक्ति बाहर से नहीं बनती है। हिंदुस्तान की शक्ति हिंदुस्तान के अंदर से बनती है। यह बाहर से नहीं बनती है। जब हिंदुस्तान मजबूत होता है तब हिंदुस्तान की शक्ति में शक्ति होती है। 




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