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बॉलीवुड के महानायक कहे जाने वाले दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन अपने पिता के कितने करीब रहे हैं ये तो किसी से छिपा नहीं है. अमिताभ ने कई बार अपने बचपन की तस्वीरें शेयर की हैं जिनमें वह अपने पिता के साथ नजर आते हैं. कई बार ऐसा होता है कि जब बिग बी अपने पिता की यादों में खो जाते हैं. हाल ही में उन्होंने एक बार फिर अपने पिता को याद किया और उनकी एक पुरानी कविता को शेयर किया जो आज के हालात पर काफी फिट बैठती है.
हरिवंश राय बच्चन की इस कविता का नाम है `अंधेरे का दीपक`. अमिताभ ने इस कविता को पढ़ने के बाद इसका अंग्रेजी अनुवाद भी किया है जिसे उन्होंने अपनी इंस्टा पोस्ट के कैप्शन में लिखा है. कविता उम्मीद की उस किरण के बारे में बात करती है जो मुश्किल हालातों में भी हमारे पास होती है लेकिन हम उस पर ध्यान नहीं देते. बस कई बार हम नकारात्मकता के अंधेरे में उसे देखने की कोशिश नहीं करते.
“बहुतेरे इलाज बतावें ,जन जनमानस सब ,
केकर सुनैं, केकर नाहीं, कौन बताए इ सब ;
केयु कहिस कलौंजी पीसौ, केयु आँवला रस
केयु कहस घर म बैठो, हिलो न ठस से मस
ईर कहेन औ बीर कहेन, की ऐसा कुछ भी Carona ,
बिन साबुन से हाथ धोई के ,केहू के भैया छुओ न ;
हम कहा चलो हमौ कर देत हैं , जैसन बोलैं सब
आवय देयो , Carona-फिरोना , ठेंगुआ दिखाऊब तब !` ~ अब
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रायपुर/नई दिल्ली (शोर सन्देश)। केरल में मानसून ने दस्तक दे दी है। मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मॉनसून केरल पहुंच गया है। उप महानिर्देशक आनंद कुमार शर्मा ने कहा कि सोमवार को केरल में मानसून का आगमन हुआ। कम दवाब के क्षेत्र की वजह से बने अवसाद के कारण 3-4 तारीख के बीच दादरा नगर हवेली, नॉर्थ कोंकण, नॉर्थ मध्य महाराष्ट्र, दमन दीव में भारी बारिश होगी। यहां लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ेगी।
केरल में भारी बारिश के बीच भारतीय मौसम विभाग ने राज्य के 9 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने केरल के तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पठानमथिट्टा, अलाप्पुझा, कोट्टायम, एर्नाकुलम, इडुक्की, मलप्पुरम और कन्नूर जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। केरल के ज्यादातर इलाकों में भारी बारिश हो रही है, जिसकी वजह से तापमान में काफी गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के मुताबिक तिरुवनंतपुरम में दिन का तापमान 25 डिग्री तक चला गया है। केरल के दक्षिण तटीय इलाकों और लक्षद्वीप में बीते चार दिनों से लगातार बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने शनिवार को इसे मानसून से पहले होने वाली बारिश बताया था। जबकि मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट ने दावा किया था, कि दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून ने केरल के तट पर दस्तक दे दी है। हालांकि, भारतीय मौसम विभाग ने स्काईमेट के दावे को खारिज करते हुए कहा था कि फिलहाल परिस्थितियां ऐसी घोषणा करने के अनुकूल नहीं हैं।
भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने रविवार को कहा था, कि अभी तक मानसून केरल नहीं पहुंचा है, हम नियमित रूप से इस पर नजर बनाए हुए हैं। 1 जून को केरल में मॉनसून के दस्तक देने का अनुमान है। गौरतलब है कि इससे पहले भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने अपने पूर्वानुमान में कहा था कि केरल में इस बार मॉनसून देर से पहुंचेगा। मौसम विभाग ने बताया था कि केरल में इस साल मॉनसून पांच जून तक आ सकता है। भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून हर साल जून से लेकर सितंबर तक 4 महीनों तक रहता है। आम तौर पर यह सबसे पहले केरल में दस्तक देता है। इसके बाद अलग-अलग वक्त पर यह देश की अलग-अलग जगहों पर पहुंचता है। पिछले साल अंडमान-निकोबार में मॉनसून अपनी तय तारीख से दो दिन पहले 18 मई को आ गया था, लेकिन गति धीमी पडऩे से केरल में कुछ देर से पहुंचा था, जबकि पूरे देश में मॉनसून की शुरुआत 19 जुलाई को हुई थी। विभाग के मुताबिक इस साल मॉनसून सामान्य रहेगा

कुछ लोगों का अनुभव है कि जब उनके कुत्ते किशोरावस्था में पहुंचते हैं तो वे अचानक उनके हुक्म मानना बंद कर देते हैं। यह भी कहा जाता है कि किशोर उम्र के कुत्तों का व्यवहार शिशु, वयस्क या वृद्ध कुत्तों से भिन्न होता है। और अब बायोलॉजी लेटर्स में प्रकाशित एक ताज़ा अध्ययन बताता है कि मानव किशोरों की तरह कुत्ते भी किशोरावस्था के दौरान अति संवेदनशील होते हैं।
न्यू कासल युनिवर्सिटी की जीव व्यवहार विज्ञानी लुसी एशर बताती हैं कि मनुष्यों के साथ कुत्तों के पिल्लों का लगाव बिल्कुल मानव शिशु जैसा होता है। लेकिन अधिकांश मालिकों को लगता है कि कुत्तों की उम्र 8 महीने की (श्वान-किशोरावस्था) होने पर उनके कुत्तों का व्यवहार बदल जाता है। मानव किशोरों की तरह किशोर कुत्ते भी अपने मालिकों की उपेक्षा और अवज्ञा करने लगते हैं। इस व्यवहार पर मालिक तरह-तरह की प्रतिक्रिया देते हैं: कुछ उन्हें सज़ा देते हैं, कुछ उपेक्षा करते हैं, तो कुछ उन्हें दूर भेज देते हैं।
किशोरावस्था कैसे कुत्तों का व्यवहार बदलती है, यह जानने के लिए एशर और उनकी टीम ने 70 कुत्तों पर नज़र रखी। अध्ययनकर्ताओं ने उनके मालिकों को उनके साथ लगाव और ध्यान खींचने वाले व्यवहार (जैसे मालिक से सटकर बैठना या किसी व्यक्ति के प्रति विशेष लगाव) और उपेक्षित होने पर व्यवहार (जैसे पीछे छूट जाने पर सिहरन या कंपकंपी) के आधार पर अंक देने को कहा। ये दोनों तरह के व्यवहार चिंता और भय के द्योतक हैं। जिन पिल्लों को दोनों में से किसी भी एक पैमाने पर अधिक अंक मिले थे उनकी किशोरावस्था भी जल्दी शुरू हुई (लगभग 5 माह की उम्र में) जबकि कम अंक वाले पिल्लों की किशोरावस्था 8 माह की उम्र यानी देर से शुरू हुई। यह देखा गया है कि जिन लड़कियों के अपने अभिभावकों से रिश्ते अच्छे नहीं होते उनकी किशोरावस्था जल्दी शुरू हो जाती है। मनुष्यों की तरह, जिन कुत्तों के उन्हें पालने वालों के साथ सम्बंध अच्छे नहीं थे उनके प्रजनन चक्र में अंतर आया। यह भी देखा गया कि जो किशोर कुत्ते अपने पालकों के विछोह से दुखी थे उन्होंने अपने पालकों की बात नहीं मानी जबकि अन्य व्यक्ति की बात मानी। यह व्यवहार मानव किशोरों की असुरक्षा की भावना से मेल खाता है।
एक अन्य अध्ययन में अध्ययनकर्ताओं ने अन्य 69 गाइड कुत्तों का 5 महीने और 8 महीने की उम्र के दौरान अध्ययन किया। उन्होंने उनके मालिक और एक अजनबी को उन्हें ‘बैठने’ का आदेश देने को कहा। सभी पिल्ले जब पूर्व-किशोरावस्था में थे, तब वे दोनों व्यक्तियों के आदेश पर तुरंत बैठ गए। लेकिन जब यही पिल्ले किशोरावस्था में पहुंचे तो ‘बार-बार’ उन्होंने अपने पालक का आदेश मानने से इन्कार किया जबकि अनजान व्यक्ति की बात मान ली। जिन कुत्तों का अपने मालिकों से सुरक्षात्मक रूप से लगाव नहीं था उन्होंने अजनबियों के आदेश अधिक माने। यह व्यवहार भी मानव किशोरों की याद दिलाता है।
285 गाइड कुत्तों पर किए गए एक अध्ययन के डैटा के आधार पर शोधकर्ताओं का कहना है कि अन्य उम्र की तुलना में किशोर कुत्तों को ‘प्रशिक्षित’ करना अधिक मुश्किल होता है।
टीम का मानना है कि किशोर कुत्तों और मानव किशोरों के व्यवहार में समानता को देखते हुए मनुष्यों में किशोरावस्था के अध्ययन के लिए कुत्ते अच्छे मॉडल हो सकते हैं।

रायपुर/नई दिल्ली (शोर सन्देश)। भारत अब लॉकडाउन खत्म करने की ओर बढ़ रहा है। एम्स के डॉक्टरों की स्टडी में सुझाव दिया गया है कि भारत को अपना शिखर निकलने के बाद कुछ हफ्तों तक इंतज़ार करना चाहिए, जिससे लॉकडाउन के असल लाभों का फायदा उठाया जा सके।
स्टडी में कहा गया है, “लॉकडाउन को पूरी तरह हटाए जाने पर, तारीख चाहे कोई भी हो, हमने पाया कि परिवर्तनीय विलंब के बाद सक्रिय केसों की संख्या तेज़ी से बढ़ेगी। हमने ऑब्जर्व किया कि शिखर निकल जाने के बाद लॉकडाउन में ढील दिए जाने में देर करने से वो समय अंतराल बढ़ जाता है जो ढील की तारीख और सक्रिय केसों की नई बढ़ोतरी की तारीख के बीच होता है।”
स्टडी में आगाह किया गया है, “हालांकि, भारत अभी अपने शिखर तक नहीं पहुंचा है क्योंकि कोरोना वायरस केसों के दैनिक जुड़ाव की 7-दिन की रोलिंग औसत में अभी तक गिरावट नहीं देखी गई है. ऐसी स्थिति में, लॉकडाउन में ढील दिए जाने से कोरोना वायरस केस तेजी से बढ़ सकते हैं।’’
स्टडी के मुताबिक “देश भर में लॉकडाउन का अचानक और पूरी तरह से हटाया जाना व्यावहारिक विकल्प नहीं है। क्योंकि यह कदम ‘हर्ड इम्युनिटी’ (झुंड प्रतिरक्षा) की गैर मौजूदगी में केसों की संख्या में तेज बढ़ोतरी होते देखेगा। पर्याप्त लंबाई और असर वाला लॉकडाउन अंततः सक्रिय केसों को शिखर तक ले जाकर धीरे-धीरे नीचे लाना शुरू करता है।”
स्टडी में कहा गया है कि एक बार सक्रिय केस शिखर पर पहुंच जाते हैं तो लॉकडाउन का विस्तार करने से अतिरिक्त लाभ हो सकते हैं। जैसे कि आबादी में संक्रामक पूल की थकान जिसकी तुलना छूट से पहले Covid-19 के कम फैलाव से की जा सकती है।
लॉकडाउन का विस्तार सक्रिय केसों की नई बढ़ोतरी (या दूसरी लहर) में देरी के साथ आता है. संभावित दूसरी लहर में देरी करना अहम है क्योंकि यह सरकार को अपने हेल्थकेयर सिस्टम को तैयार करने के लिए और अधिक वक्त देगा। इसलिए इस मॉडल के मुताबिक कोई देश अगर लॉकडाउन में ढील देने में जितनी देर करता है तो उसे उतना ही तैयारी के लिए अधिक वक्त मिलता है।
चीन सख्त लॉकडाउन उपायों को लागू करने और उनमें ढील देने में देर करने की क्लासिक मिसाल है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक चीन 13 फरवरी को अपने शिखर पर पहुंचा, जब उसने एक ही दिन में 15,133 केस देखे. चीन ने 8 अप्रैल को महामारी के एपिसेंटर वुहान को शिखर पर पहुंचने के करीब दो महीने बाद बंदिशों से खोला और मौजूदा स्थिति में वो पूरे शहर की टेस्टिंग कर रहा है।
यदि भारत शिखर को हिट करने के दो हफ्ते बाद लॉकडाउन में पूरी तरह से ढील देता है तो संभावना है कि सक्रिय केस पांच दिन में बढ़ सकते हैं, लेकिन अगर यह शिखर पर पहुंचने के एक महीने के बाद लॉकडाउन को रिलेक्स करता है, तो ऐसा करने से दूसरी लहर से निपटने के लिए तैयार होने में करीब एक हफ्ता और मिल जाएगा।
स्टडी से यह भी पता चलता है कि अगर शिखर हिट करने के बाद लॉकडाउन को आठ सप्ताह (या दो महीने) के लिए बढ़ाया जाता है, तो भारत को सक्रिय केसों में एक नई बढ़ोतरी की तैयारी के लिए लगभग 15-16 दिन का अतिरिक्त समय मिल सकता है। स्टडी के मुताबिक अगर लॉकडाउन को अचानक हटाने की जगह धीरे-धीरे उठाया जाता है तो इससे तैयारी के वक्त में और अधिक लाभ होता है क्योंकि सक्रिय केसों में नई बढ़ोतरी धीमी गति से होती है।
स्टडी में लॉकडाउन में ढील के बाद टेस्टिंग बढ़ाने के असर का भी विश्लेषण किया गया है। रिसर्च के मुताबिक लॉकडाउन में ढील के बाद सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बढ़ी हुई टेस्टिंग संक्रमण की कुल संख्या को खासी घटाने में मदद करती है।
स्टडी में कहा गया है, `ढील की हद, जो कि संक्रमण के असहनीय पलटाव के बिना संभव हो, बहुत ज्यादा की गई टेस्टिंग के स्तर पर निर्भर करती है, खास तौर पर लॉकडाउन के बाद छूट की स्थिति में, जबकि गहन सोशल डिस्टेंसिंग और बहुत महंगी टेस्टिंग दोनों का साथ होना गैर व्यावहारिक हो सकते हैं, लेकिन दोनों के असर को जहां तक संभव हो सके वहां तक ले जाने से महामारी को नियंत्रण में रखा जा सकता है।”
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रायपुर/मुंबई (शोर सन्देश)। मशहूर संगीतकार वाजिद खान की रविवार की देर रात को लम्बी बीमारी के बाद मौत हो गई। 43 वर्षीय वाजिद की मौत मुम्बई के चेम्बूर में स्थित अस्पताल में हुई, जहां वे किडनी और गले में इंफेक्शन होने के चलते पिछले ढाई-तीन महीने से भर्ती थे। पिछले तीन दिनों से वाजिद वेंटिलेटर में थे और उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी।
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रायपुर/नयी दिल्ली (शोर सन्देश)। देश में कोरोना संक्रमित मामलों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। सोमवार की सुबह तक ये आंकड़ा दो लाख के करीब पहुंच गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय से जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में अब कोरोना वायरस के कुल केस की संख्या 1 लाख 90 हजार से अधिक है। अबतक देश में इस महामारी की वजह से करीब 5400 लोगों की मौत हो गई है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल मामले 1 लाख 90 हजार 535 मामले ससमने आये हैं, जिंसमें से एक्टिव केस 93 हजार 322 है। अबतक 91 हजार 818 लोग इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं। देश में अब तक 5 हजार 394 लोगों की कोरोना संक्रमण से मौत भी हो चुकी है।
वहीं यदि छत्तीसगढ़ कि बात करें तो प्रदेश में 388 कोरोना के एक्टिव मरीजों का इलाज जारी है। प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या लगभग 500 पहुँच गई है। प्रदेश में 114 लोग इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि प्रदेश में कोरोना से अब एक एक मौत हुई है।

कोरोना महामारी के इलाज और वैक्सीन की खोज में 100 से ज्यादा देश जुटे हुए हैं लेकिन अभी तक किसी को सफलता नहीं मिली है। ऐसे में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में कोरोना वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन खोजने की जो टीम बनाई गई है उसमें एक भारतीय मूल की वैज्ञानिक चंद्रबली दत्ता भी शामिल हैं. दत्ता कोलकाता में पैदा हुई थीं। मूल तौर पर कोलकाता की रहने वाली चंद्रबली दत्ता विश्वविद्यालय के जेनर इंस्टीट्यूट में क्लिनिकल बायोमेनक्योरिंग फैसिलिटी में काम करती हैं. यहीं पर कोरोना वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है। अगर यह सफल रहता है तो कोरोना वायरस से लडऩे में दुनिया को अहम सफलता मिलेगी. ट्रायल सफल रहने पर यह कोरोना का संभावित वैक्सीन भी बन सकता है। उन्होंने कहा कि क्वालिटी एश्योरेंस मैनेजर के रूप में काम करने का मतलब यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षण के चरण में प्रगति होने से पहले सभी स्तरों के मानकों का अनुपालन पूरा किया जाए. दत्ता ने कहा, `Óहम सभी उम्मीद कर रहे हैं कि यह अगले चरण में काम करेगा, पूरी दुनिया इस टीके को देख रही है.ÓÓ
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चीन ने अब मान लिया है कि कोरोना वायरस वुहान के जंगली जीवों के मार्केट से नहीं फैला. ग्लोबल टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के डायरेक्टर गाओ फू ने कहा- `शुरुआत में हमने माना कि सी-फूड मार्केट में शायद वायरस रहा हो, लेकिन अब समझ आता है कि मार्केट विक्टिम बन गया. नॉवेल कोरोना वायरस काफी पहले से मौजूद था.Ó ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि कोरोना वायरस कहां से फैला, इसकी खोज जारी है। गाओ फू ने कहा कि वे जनवरी की शुरुआत में वुहान गए थे. लेकिन उन्हें किसी भी जीव के सैंपल में वायरस नहीं मिले। उन्होंने कहा कि चीनी वैज्ञानिक कड़ी मेहनत कर रहे हैं ताकि वायरस की उत्पत्ति का पता लगाया जा सके। कोरोना वायरस के मामले सामने आने के बाद से ही चीन ऐसा कहता रहा है कि यह जंगली जीवों की मार्केट से फैला. लेकिन अमेरिका सहित कई देश आरोप लगाते रहे हैं कि कोरोना वायरस वुहान की मार्केट से थोड़ी दूर पर स्थित वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट की लैब से लीक हुआ। कोरोना वायरस फैलने के बाद चीन ने वुहान के जंगली जीवों के मार्केट को बंद भी कर दिया था. हालांकि, दुनिया चीन को संदिग्ध नजरों से देख रही थी. चीन ने कथित तौर से जीवों में मिले वायरस का सैंपल या इससे जुड़ा डेटा दुनिया से साझा नहीं किया था। अब चीन के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के डायरेक्टर गाओ फू ने मान लिया है कि वुहान स्थित मार्केट के जीवों के सैंपल में कोई वायरस नहीं मिला था। गाओ फू न सिर्फ चीन के प्रमुख महामारी विशेषज्ञ हैं बल्कि देश के प्रमुख राजनीतिक सलाहकार समूह के सदस्य भी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने `मन की बात` रेडियो कार्यक्रम के 65वें भाग में एक बार फिर से देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि पिछली बार जब मैंने पिछली बार आपसे मन की बात की थी, तब यात्री ट्रेनें बंद थीं, बसें बंद थीं, हवाई सेवा बंद थी. इस बार, बहुत कुछ खुल चुका है. श्रमिक स्पेशल ट्रेन चल रही हैं, अन्य स्पेशल ट्रेनें भी शुरू हो गई हैं। तमाम सावधानियों के साथ, हवाई जहाज उडऩे लगे हैं, धीरे-धीरे उद्योग भी चलना शुरू हुआ है, यानी अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा अब चल पड़ा है, खुल गया है. ऐसे में, हमें और ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि देश में, सबके सामूहिक प्रयासों से कोरोना के खिलाफ लड़ाई बहुत मजबूती से लड़ी जा रही है. हमारी जनसंख्या ज़्यादातर देशों से कई गुना ज्यादा है, फिर भी हमारे देश में कोरोना उतनी तेजी से नहीं फैल पाया, जितना दुनिया के अन्य देशों में फैला। देश में सबके सामूहिक प्रयासों से कोरोना के खिलाफ लड़ाई बहुत मजबूती से लड़ी जा रही है. हमारी जनसंख्या कई देशों से ज्यादा है फिर भी हमारे देश में कोरोना उतनी तेजी से नहीं फैल पाया, जितना दुनिया के अन्य देशों में फैला। पीएम ने आगे कहा कि कोरोना से होने वाली मृत्यु दर भी हमारे देश में काफी कम है. जो नुकसान हुआ है, उसका दु:ख हम सबको है, लेकिन जो कुछ भी हम बचा पाएं हैं, वो निश्चित तौर पर देश की सामूहिक संकल्पशक्ति का ही परिणाम है। पीएम ने कहा, आपने देखा होगा कि दूसरों की सेवा में लगे व्यक्ति के जीवन में, कोई डिप्रेशन या तनाव कभी नहीं दिखता. उसके जीवन में, जीवन को लेकर उसके नजरिए में, भरपूर आत्मविश्वास, सकारात्मकता और जीवंतता प्रतिपल नजर आती है। साथियों, हमारे डॉक्टर्स,नर्सिंग स्टाफ, सफाईकर्मी, पुलिसकर्मी, मीडिया के साथी, ये सब जो सेवा कर रहे हैं, उसकी चर्चा मैंने कई बार की है. सेवा में अपना सब कुछ समर्पित कर देने वाले लोगों की संख्या अनगिनत है।

रायपुर/दिल्ली । कोरोना वायरस जैसी महामारी से बचाव के लिए देशव्यापी लॉकडाउन लागू है। चौथे चरण के लॉकडाउन को बढ़ाकर 31 मई तक के लिए किया गया है, जिसकी अवधि रविवार को समाप्त हो जाएगी। ऐसे में चर्चा है कि देश में लॉकडाउन का एक और चरण लागू होगा। हालांकि, लॉकडाउन 5.0 को लेकर अभी तक केंद्र सरकार की ओर से कोई बयान नहीं आया है।
गृहमंत्री अमित शाह ने लॉकडाउन समाप्त होने के एक दिन पहले यानी रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 7 लोक कल्याण मार्ग (पीएम आवास) पर मुलाकात की है। ऐसे में एक और लॉकडाउन की उम्मीद लगाई जा रही है। लॉकडाउन बढऩे को लेकर पहला संकेत गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने शुक्रवार दिया था, वहीं उन्होंने लॉकडाउन को और 15 दिनों तक बढ़ाने की मांग की है। गृह मंत्री अमित शाह से बात करने के बाद सीएम प्रमोद सावंत ने कहा कि कोरोना के ग्राफ बढ़ रहा है, ऐसे में और 15 दिनों तक लॉकडाउन बढ़ाने की जरूरत है। सभी राज्यों के सीएम से की थी चर्चा बता दें, कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार को लॉकडाउन 4.0 की खत्म हो रही अवधि को लेकर सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा भी की थी। गृहमंत्री ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से 31 मई के बाद लॉकडाउन पर उनके राज्यों की क्या राय है और आगे वह क्या सोचते हैं, इसपर उनसे चर्चा की थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को मन की बात भी करेंगे, वैसे अनुमान लगाया जा रहा है, कि दो हफ्ते के लिए लॉकडाउन का बढऩा लगभग तय है। वहीं, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू, पुणे, ठाणे, इंदौर, चेन्नई, अहमदाबाद, जयपुर, सूरत और कोलकाता में कोरोना के सबसे ज्यादा मरीज हैं। इन शहरों में देश के कुल कोरोना संक्रमित के 70 फीसदी मामले मिले हैं।