ब्रेकिंग न्यूज

देश-विदेश

दृष्टिहीनता कम करने एआईओएस ने कॉर्निया दान का चलाया जागरूकता अभियान*

26-Aug-2020

पिछले साल के मुकाबले कॉर्निया दान में 84 फीसदी की कमी आई
नई दिल्ली/ रायपुर (शोर सन्देश)। जीवन जीने के तौर तरीकों में बदलाव और डिजिटल स्क्रीन का अत्यधिक इस्तेमाल के कारण सभी उम्र के बहुत सारे लोगों में दृष्टि की मामूली से लेकर गंभीर समस्या बढ़ रही है। हालांकि इससे बचा या छुटकारा पाया जा सकता है, बशर्ते कि लोग नेत्रदान यानी कॉर्निया के दान के लिए आगे आएं। इलाज योग्य दृष्टिहीनता के मामले कम करने के मकसद से ऑल इंडिया ऑप्थैल्मोलॉजी सोसायटी (एआईओएस) इस बारे में जानकारी को लेकर जागरूकता अभियान शुरू किया है। राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के तहत लोगों को दृष्टि/कॉर्निया दान के लिए प्रोत्साहित किया।

एआईओएस के अध्यक्ष और सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ हास्पिटल्स के चेयरमैन डॉ. महिपाल सिंह सचदेव ने कहा, कोविड 19 महामारी का असर इस साल भारत में नेत्रदान मुहिम पर भी पड़ा है। नेत्र बैंक में तीन महीने बाद कामकाज जून में शुरू भी हुआ तो नेत्रदान करने वालों की संख्या बहुत कम रही। इस वजह से देश में कॉर्निया के कारण दृष्टि गंवा देने वाले मरीजों की तादाद बहुत ज्यादा हो चुकी है। भारत में दृष्टिहीनता की समस्या कम करने के लिए तत्काल सुरक्षा के उपाय लागू करना बहुत जरूरी हो गया है। हाल के आंकड़े बताते हैं कि देश में अभी कॉर्निया के कारण दृष्टिहीनता के शिकार लगभग 11 लाख मरीज कॉर्निया प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं। पिछले साल ऐसे 26000 मरीजों की सर्जरी का कॉर्निया प्रत्यारोपण किया गया था। पिछले साल के मार्च से लेकर जून 2019 के दौरान 6991 कॉर्निया एकत्रित किए गए थे और इनमें से 2374 मामलों की सफल सर्जरी हुई। लेकिन इस साल इसी अवधि में सिर्फ 1125 कॉर्निया दान किए गए जबकि सिर्फ 515 मरीजों को ही इसका लाभ मिल पाया। ये आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल के मुकाबले इस साल कॉर्निया दान में 84 फीसदी की गिरावट आई है। 

यदि किसी व्यक्ति को कोई चीज देखने में धुंधला नजर आता है तो इसका मतलब है कि उसकी आंखों के ऊपर की परत यानी टिश्यू उसके कॉर्निया को घेर लेती है। यह किसी बीमारी, चोट, संक्रमण या खराब खानपान के कारण होता है। जो आगे चलकर दृष्टिहीनता की स्थिति तक पहुंच जाती है। इसका इलाज संभव है यदि किसी स्वस्थ व्यक्ति का कॉर्निया उसे प्रत्यारोपित किया जाए। समय से ऐसे मरीजों का इलाज होता रहे, तो देश से दृष्टिहीनता के मामले बहुत कम हो जाएंगे। यही वजह है कि कॉर्निया दान करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जाता है। 


अभिनेता मनोज बाजपेयी के भाई सीधी भर्ती से बने मंत्रालय में ज्वॉइंट सेक्रेटरी*

25-Aug-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। यूपीएसी ने सीधी भर्ती व्यवस्था के तहत पहली बार ज्वाइंट सेक्रेटरी पद के लिए प्राइवेट क्षेत्र से जिन 9 एक्सपर्ट्स को चुना हैं, उनमें से एक व्यक्ति अभिनेता मनोज बाजपेयी के भाई भी हैं। अभिनेता मनोज बाजपेयी के छोटे भाई सुजीत कुमार बाजपेयी को मिनिस्ट्री ऑफ एनवॉयरमेंट, फॉरेस्ट और क्लाइमेट चेंज का ज्वॉइंट सेक्रेटरी बनाया गया है। सरकार में ज्वॉइंट सेक्रेटरी वह पद है, जिस पर पहुंचने के लिए यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर आईएएस अफसर बने लोगों को कई-कई साल लग जाते हैं।

मनोज ने इस सिलसिले में बात करते हुए कहा, हम बेहद खुश हैं और सुजीत पर गर्व महसूस कर रहे हैं। हमें पहले से पता था कि सुजीत बहुत मेहनती और ईमानदार शख्स है। वो अपनी ड्यूटी के प्रति बेहद वफादार है और यही कारण है कि उसकी उन्नति देखकर मुझे जरा भी हैरानी नहीं हो रही है। हम छह भाई हैं और हम सभी अपने छोटे भाई की सफलता से बेहद खुश हैं।

गौरतलब है कि कार्मिक मंत्रालय ने पिछले साल जून में `सीधी भर्ती व्यवस्था के जरिए संयुक्त सचिव रैंक के पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। इन पदों के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 30 जुलाई 2018 थी। इससे संबंधित सरकारी विज्ञापन के सामने आने के बाद कुल 6,077 लोगों ने आवेदन किए थे। 


भारत, रूस में चीन और पाकिस्तान के साथ करेगा युद्धाभ्यास*

25-Aug-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। पाकिस्तान की सीमा नियंत्रण रेखा (एलओसी) और चीन की सीमा लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर दोनों देशों के बीच तनातनी चल रही है। इसके बावजूद भारत अगले महीने चीन और पाकिस्तान के साथ रूस में एक संयुक्त युद्धाभ्यास में हिस्सा लेगा।

दक्षिण रूस के अस्त्रखान क्षेत्र में 15 से 26 सितम्बर के बीच सैन्य अभ्यास आयोजित किया जाएगा। इसमें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य भारत, चीन, पाकिस्तान, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान के अलावा 11 अन्य देश हिस्सा लेंगे। इसके अलावा इस ड्रिल में मंगोलिया, सीरिया, ईरान, मिस्र, बेलारूस, तुर्की, आर्मेनिया, अबकाज़िया, दक्षिण ओसेतिया, अजरबैजान और तुर्कमेनिस्तान भी शामिल होंगे। अगले महीने होने वाले इस युद्धाभ्यास में मेजबान रूस सहित 19 काउंटी देश शामिल होंगे। सारे देशों को मिलाकर इस अभ्यास में 12 हजार 500 से अधिक सैनिक भाग लेंगे।
भारत और चीनी सेनाओं के बीच लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चार महीने से ज्यादा लंबे समय से गतिरोध बना हुआ है। बातचीत के कई स्तरों के बावजूद लद्दाख में तनाव कम करने में सफलता नहीं मिली है और चार महीने से गतिरोध जारी है। 15 जून को गलवान घाटी में बिना हथियारों के इस्तेमाल के भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कई झड़पें हुई थीं जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हुए थे जबकि चीन ने अपने मृत सैनिकों की संख्या सार्वजनिक नहीं की थी। इसके बाद से भारत और चीन के बीच लगातार सिर्फ टकराव ही नहीं बढ़ रहा है बल्कि लद्दाख से लेकर अरुणाचल, उत्तराखंड, सिक्किम में दोनों तरफ से सैनिकों और हथियारों का जमावड़ा बढ़ता ही जा रहा है। इस युद्धाभ्यास में चीन भी अपनी नौसेना के तीन जहाजों और सेना की एक टुकड़ी को वहां दिखावे के लिए भेजेगा।

इसी तरह जम्मू-कश्मीर में भी सीमा पर पाकिस्तान के साथ हालात ठीक नहीं है। सीमा पर लगातार सीज फायर उल्लंघन और पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ की घटनाएं बढ़ रही हैं। भारत ने एलओसी पर लड़ाकू विमान तेजस तैनात कर रखा है और सीमा पर हाई अलर्ट रखा गया है। दनों देशों से `टू फ्रंट वार` की स्थिति के बीच दोनों देशों की सेनाओं के साथ भारत का रूस में होने वाले इस युद्धाभ्यास में शामिल होना का अहम माना जा रहा है। भारतीय सेना की एक पैदल टुकड़ी, तोपखाने, बख़्तरबंद गाड़ियों के साथ लगभग 180 सैनिक और अधिकारी इस युद्धाभ्यास में शामिल होंगे। इसमें भारत की तरफ से वायु सेना और सिग्नल कोर के जवान भी शामिल होंगे। 


सोनिया गांधी फिर एक साल तक कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी*

24-Aug-2020

दिल्ली (शोर सन्देश). कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में फैसला लिया गया है कि सोनिया गांधी फिलहाल पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी. सीडब्ल्यूसी में इस फैसले पर रजामंदी हुई है कि सोनिया गांधी एक और साल के लिए पार्टी के अंतरिम अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालती रहेंगी. बता दें कि कांग्रेस में नेतृत्व संकट के बीच आज कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक चल रही थी. इस दौरान नेतृत्व के सवाल पर खुलकर बात हुई. बैठक के दौरान पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा था कि वो अब आगे पार्टी अध्यक्ष नहीं बने रहना चाहती हैं. लेकिन कई नेताओं ने उन्हें पद पर बने रहने की अपील की थी.

गौरतलब है कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में सोनिया गांधी ने अंतरिम अध्यक्ष पद से इस्तीफे की बात कही थी. इसके साथ ही उन्होंने पार्टी को नया अध्यक्ष चुनने के लिए भी कहा था. हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, एके एंटनी समेत कई नेताओं ने सोनिया गांधी से पद पर बने रहने की अपील की थी.
इस वजह से बुलाई गई थी बैठक
जानकारी के मुताबिक CWC की ये बैठक सोनिया गांधी को करीब 2 हफ्ते पहले लिखी गई एक चिट्ठी की प्रतिक्रिया के तौर पर बुलाई गई थी. कम से कम 23 नेताओं जिनमें CWC के सदस्य, UPA सरकार में मंत्री रहे नेता और सांसदों ने सोनिया गांधी को संगठन के मसले पर चिट्ठी लिखी थी. चिट्ठी में सशक्त केंद्रीय नेतृत्व के साथ पार्टी को चलाने की सही रणनीति पर जोर दिया गया था. इसमें कहा गया था कि नेतृत्व ऐसा हो जो सक्रिय हो और जमीन पर काम करता दिखे.


भारत में इस हफ्ते से शुरू होगा ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन का सेकेंड फेस ट्रायल*

24-Aug-2020

भारत में कोविशील्ड नाम से होगा निर्माण
पुणे (शोर सन्देश)। भारत समेत दुनियाभर में अभी भी कोरोना वायरस वैक्सीन का इंतजार जारी है। कुछ हफ्तों पहले ही ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की ओर से विकसित की जा रही वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल की शुरुआत की गई थी। अब भारत में भी इसके दूसरे चरण के मानवीय परीक्षण की तैयारी हो चुकी है। भारत में इस हफ्ते से ये ट्रायल शुरू हो सकता है।

सोमवार या मंगलवार तक दी जा सकती है डोज.
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से भारत में वैक्सीन का ट्रायल और निर्माण कर रहे सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया 3-4 ऐसी जगहों (ट्रायल साइट्स) की पहचान कर ली है, जहां ट्रायल को लेकर सभी तरह की तैयारी दिख रही है। पुणे में 4 ट्रायल साइट का चयन किया गया है, जिनमे भारती विद्यापीठ डीम्ड यूनिवर्सिटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, जहांगीर क्लीनिकल डेवलपमेंट सेंटर, KEM हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर और बीजे मेडिकल कॉलेज और सैसन जनरल हॉस्पिटल शामिल है।
इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (ICMR) के अधिकारियों द्वारा जानकारी दी गई है कि इस वैक्सीन की डोज का इस हफ्ते सोमवार या मंगलवार तक परीक्षण शुरू हो सकता है। ICMR के अधिकारियों के मुताबिक इन ट्रायल साइट्स में एक साथ परीक्षण शुरू हो सकता है।
ब्रिटेन में इस वैक्सीन के मानवीय परीक्षण के अच्छे नतीजे दिखे थे और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद मिली थी। भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया इसका परीक्षण कर रहा है। इसे देश में कोविशील्ड (Covishield) नाम दिया जा रहा है।

वहीं सीरम इंस्टीट्यूट ने एक प्रेस रिलीज में कहा कि ट्रायल में सफलता मिलने और सभी तरह के रेगुलेटरी अप्रूवल हासिल करने के बाद ही वैक्सीन का व्यावसायिक निर्माण शुरू किया जाएगा। 


अरुण जेटली की प्रथम पुण्यतिथि, प्रधानमंत्री-गृहमंत्री समेत अन्य नेताओं ने दी श्रद्धांजलि*

24-Aug-2020

अपने दोस्त को बहुत याद करता हूं : पीएम मोदी
नई दिल्ली(शोर सन्देश)। भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं में से एक और देश के पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की आज पहली पुण्यतिथि है। पिछले साल 24 अगस्त को ही लंबी बीमारी के बाद दिल्ली के एम्स अस्पताल में जेटली का निधन हो गया था। जेटली की पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें याद किया और कहा कि उन्हें अपने दोस्त की बहुत याद आती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार 24 अगस्त को ट्वीट कर अपनी कैबिनेट में वित्त मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय जैसे अहम विभाग संभालने वाले जेटली को याद किया और श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम ने अपने ट्वीट में लिखा, `पिछले साल, आज ही के दिन हमने अरुण जेटली जी को खोया था। मुझे अपने दोस्त की। बहुत याद आती है। अरुण जी ने पूरी कर्मठता से देश की सेवा की। उनकी हाजिरजवाबी, बौद्धिकता, कानूनी समझ और शानदार व्यक्तित्व बेहद प्रसिद्ध थे।`
पीएम ने अपने ट्वीट के साथ एक वीडियो भी शेयर किया, जो पिछले साल जेटली के निधन के बाद आयोजित प्रार्थना सभा का है। इस प्रार्थना सभा में प्रधानमंत्री मोदी भी मौजूद थे और उन्होंने जेटली के व्यक्तित्व को याद किया था और उस वक्त भी कहा था कि उन्होंने बेहद करीबी दोस्त को खो दिया।
अरुण जेटली 2014 में बीजेपी की जीत के बाद मोदी सरकार में वित्त मंत्री बने थे। इस दौरान जेटली के नेतृत्व में वित्त मंत्रालय ने नोटबंदी से लेकर जीएसटी जैसे मोदी सरकार के अहम फैसलों को लागू किया था।
इस दौरान तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के गोवा का मुख्यमंत्री बनने के बाद जेटली ने कुछ वक्त के लिए रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाली थी। जेटली कई मौकों पर सरकार के संकटमोचक की भूमिका में दिखाई देते रहे।
हालांकि, 2019 में भाजपा की लगातार दूसरी जीत के बावजूद वह सरकार का हिस्सा नहीं बने। अपनी बीमारी का हवाला देते हुए उन्होंने पीएम मोदी से मंत्रिमंडल में शामिल न करने का आग्रह किया था। इसके 3 महीने बाद ही लंबी बीमारी के चलते जेटली का 24 अगस्त को निधन हो गया था।
गृह मंत्री अमित शाह ने लिखा `अरुण जेटली जी एक उत्कृष्ट राजनीतिज्ञ, विपुल वक्ता और एक महान इंसान थे, जिनकी भारतीय राजनीति में कोई समानता नहीं थी। वह बहुआयामी और मित्रों के मित्र थे। जो हमेशा अपनी विशाल विरासत, परिवर्तनकारी दृष्टि और देशभक्ति के लिए याद किए जाएंगे।`
प्रखर नेता, विचारक, पद्म भूषण से सम्मानित पूर्व वित्त मंत्री स्व. अरुण जेटली की प्रथम पुण्यतिथि पर उन्हें शत् शत् नमन। राष्ट्र निर्माण में उनकी जनकल्याणकारी नीतियों एवं योजनाओं का अप्रतिम योगदान सदैव याद किया जाएगा।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट कर कहा, `प्रखर नेता, विचारक, पद्म भूषण से सम्मानित पूर्व वित्त मंत्री स्व. श्री अरुण जेटली जी की प्रथम पुण्यतिथि पर उन्हें शत् शत् नमन। राष्ट्र निर्माण में उनकी जनकल्याणकारी नीतियों एवं योजनाओं का अप्रतिम योगदान सदैव याद किया जाएगा।` 


700 साल में पहली बार यहां नहीं निकलेगा ताजियों का जुलूस*

24-Aug-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। दिल्ली में ताजिया रखने का सिलसिला मुगलकाल से ही चला आ रहा है। अब 700 साल में ऐसा पहली बार होगा कि मुहर्रम पर ताजिये तो रखे जाएंगे, लेकिन इनके साथ निकलने वाला जुलूस नहीं निकल सकेगा। यह बात हजरत निजामुद्दीन औलिया दरगाह शरीफ के प्रमुख कासिफ निजामी ने कही।
निजामी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, `भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय यानी 1947 में भी दरगाह से ताजियों के साथ निकालने वाले जुलूस पर पाबंदी नहीं लगी थी, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते दिल्ली और केंद्र सरकार से धार्मिक सामूहिक कार्यक्रम की अनुमति नहीं है। इसलिए मोहर्रम पर ताजिये के साथ जुलूस निकलने की अनुमति भी नहीं मिली है।`
उन्होंने बताया, `700 सालों से अधिक समय से दरगाह से कुछ ही दूरी पर स्थित इमामबाड़ा में सबसे बड़ा फूलों का ताजिया रखा जाता है। यहां और चार ताजिये रखे जाते हैं। 10वीं मोहर्रम पर दरगाह से ताजियों के साथ छुरी और कमां का मातमी जुलूस निकलता है। नौजवान हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करके अपने बदन से लहू बहाते हैं, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते इन सब पर पाबंदी लगी है। इसलिए इस बार कर्बला में सिर्फ ताजिये का फूल भेजा जाएगा।`
इमामबाड़ा में मजलिस का आयोजन :
दिल्ली के अलीगंज जोरबाग में शा-ए-मरदान दरगाह व अंजुमन कर्बला कमेटी के सदस्य गौहर असगर कासमी ने बताया, `हर साल मोहर्रम की पहली तारीख से ही मजलिसें शुरू हो जाती हैं। ज्यादा जगहों पर ताजिया भी रख दिए जाते हैं. दस तारीख को लगभग यहां 70 बड़ी ताजियों के साथ जुलूस पहुंचता है। यहां पर ताजियों को दफन किया जाता है। 12 तारीख को तीज पर मातम का जुलूस निकलता है, लेकिन इसबार प्रशासन से अनुमति नहीं मिली है।सिर्फ इमामबाड़ा में मजलिस का आयोजन हो रहा है। कोरोना वायरस के चलते हो रही मजलिस का सोशल डिस्टेंसिंग के साथ आयोजन में भाग लेने की अनुमति दी जा रही है।`
उन्होंने बताया, `जोरबाग की कर्बला सबसे पुरानी कर्बला है। यहां तैमूर लंग के शासनकाल से ताजिये रखने का सिलसिला चला आ रहा है। कर्बला में दिल्ली के आखिरी सुल्तान बहादुर शाह जफर की दादी कुदशिया बेगम की भी कब्र है।`
शोक का प्रतीक मोहर्रम :
मोहर्रम पर हर साल हिंदू-मुस्लिम एकता भी देखने को मिलती है। हजारों की संख्या में लोग मोहर्रम के मातमी जुलूस में शामिल होने के लिए पहुंचते थे। हजरत निजामुद्दीन औलिया दरगाह से जुड़े मोहम्मद जुहैब निजामी ने बताया, `आसपास के कई हिंदू परिवार भी आस्था के कारण कई सालों से ताजिये रखते चले आ रहे हैं। वहीं महरौली का एक हिंदू परिवार तो कई दशकों से ऐसा कर रहा है।`
मोहर्रम के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग हुसैन की शहादत में गमजदा होकर उन्हें याद करते हैं। शोक के प्रतीक के रूप में इस दिन ताजिये के साथ जूलूस निकालने की परंपरा है। ताजिये का जुलूस इमाम बारगाह से निकलता है और कर्बला में जाकर खत्म होता है।
भारत में ताजिये का इतिहास :
ताजिये का भारत में इतिहास के बारे में बताया गया है कि इसकी शुरुआत तैमूर लंग के दौर में हुई. ईरान, अफगानिस्तान, इराक और रूस को हराकर भारत पहुंचे तैमूर लंग ने यहां पर मुहम्मद बिन तुगलक को हराकर खुद को शहंशाह बनाया. साल में एक बार मुहर्रम मनाने वह इराक जरूर जाता था. लेकिन एक साल बीमार रहने पर वह मुहर्रम मनाने इराक नहीं जा पाया, दिल्ली में ही मनाया।
तैमूर के इराक नहीं जाने परे उसके दरबारियों ने अपने शहंशाह को खुश करने की योजना बनाई। दरबारियों ने देशभर के बेहतरीन शिल्पकारों को बुलवाया और उन्हें कर्बला में स्थित इमाम हुसैन की कब्र के जैसे ढांचे बनाने का आदेश दिया। बांस और कपड़े की मदद से फूलों से सजाकर कब्र जैसे ढांचे तैयार किए गए और इन्हें ताजिया नाम दिया गया और इन्हें तैमूर के सामने पेश किया गया।

उसके बाद शहंशाह तैमूर को खुश करने के लिए देशभर में ताजिये बनने लगे. ताजिये की यह परंपरा भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार में भी चली आ रही है। 


कोरोना से बचाव के लिए 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए मास्क जरूरी नहीं : डब्लूएचओ*

24-Aug-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। डब्लूएचओ ने कहा है कि 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि कोरोना से बचने के लिए 12 साल और उससे ज्यादा उम्र के बच्चों को बड़े लोगों की तरह ही मास्क पहनना चाहिए। छह से 11 साल की उम्र के बच्चे खतरे के आधार पर मास्क पहन सकते हैं। डब्ल्यूएचओ की वेबसाइट पर 21 अगस्त को जारी एक पोस्ट में संगठन के साथ ही संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने कहा है कि जिन क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण का फैलाव ज्यादा हो और जहां एक मीटर की दूरी बनाए रखना संभव नहीं है, वहां 12 साल से बड़े बच्चों को मास्क पहनना चाहिए। दोनों संगठनों ने कहा कि पांच साल और उससे कम उम्र के बच्चों के लिए, उनकी सेहत और हित को देखते हुए मास्क पहनना आवश्यक नहीं है। इनका कहना है कि कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि कोरोना संक्रमण छोटे बच्चों की अपेक्षा बड़े बच्चों से फैल रहा है। हालांकि, कोरोना संक्रमण के प्रसार में बच्चों और बड़ों की भूमिका को बेहतर ढंग से समझने के लिए आंकड़ों का विस्तृत अध्ययन आवश्यक है।
बच्चों के जरिये तेजी से फैलता है कोरोना :
पेडियाट्रिक जर्नल में छपे एक नए शोध में दावा किया गया है कि बच्चों के जरिये वैश्विक महामारी कोविड-19 का संक्रमण बेहद तेजी से फैलता है। यानी बच्चे कोरोना वायरस के वह संवाहक हैं, जिनमें इनके लक्षण नजर नहीं आते हैं। इस शोध से यह स्पष्ट है कि नोवल कोरोना वायरस के सामुदायिक प्रसार में बच्चों की भूमिका अनुमान से कहीं अधिक है। यह शोध 192 नाबालिगों पर किया गया, जिनमें कोरोना से 49 बच्चे कोरोना से संक्रमित थे। 
स्तनपान से नहीं होता कोविड-19 ; एक अन्य शोध में बताया गया है कि स्तनपान कराने से कोरोना के संक्रमण का प्रसार नहीं होता है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के सैनडियागो स्कूल ऑफ मेडिसिन के इस शोध को जामा के ऑनलाइन संस्करण पर जारी किया गया है। 


73 दिनों में `कोरोना वैक्सीन आने का दावा, जाने किस कंपनी ने किया बड़ा दावा*

24-Aug-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। देश में जानलेवा कोरोना वायरस के मामले हर दिन रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रहे हैं। इस महामारी से हर दिन हजारों लोगों की मौत हो रही है। ऐसे में हर कोई जल्द से जल्द कोरोना वायरस की वैक्सीन के आने का इंतजार कर रहा है। दावा किया गया है कि सीरम इंस्टीट्यूट इंडिया की तरफ से बनाई जा रही `कविशिएल्ड` वैक्सीन 73 दिनों में आ जाएगी, लेकिन अब खुद सीरम इंस्टीट्यूट इंडिया ने इस दावे पर अपनी सफाई दी है।

सीरम इंस्टीट्यूट ने क्या कहा है ?
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ट्वीट करके जानकारी दी है, `` इंस्टीट्यूट स्पष्ट करता है कि मीडिया में `कोविशील्ड` की उपलब्धता पर वर्तमान दावे गलत हैं। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के लिए फेज -3 के ट्रायल चल रहे हैं। सरकार ने अभी हमें केवल वैक्सीन का निर्माण करने और भविष्य में उपयोग के लिए भंडार करने की अनुमति दी है।``
बता दें कि सीरम इंस्टीट्यूट को उम्मीद है कि वह इस साल के अंत तक कोरोना वैक्सीन तैयार कर ली जाएगी। सीरम इंस्टीट्यूट एस्ट्रजेनेका ऑक्सफोर्ड वैक्सीन पर काम कर रही है, जिसका तीसरे चरण का क्लिनिकल परीक्षण चल रहा है। इसका भारत में सितंबर में मानव परीक्षण शुरू होने की उम्मीद है।
सब कुछ ठीक रहा तो साल के अंत तक मिल जाएगा टीका : स्वास्थ्य मंत्री

वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो भारत को नोवेल कोरोना वायरस की रोकथाम वाला टीका इस साल के आखिर तक मिल जाएगा। भारत में कोरोना के तीन टीके विकास के विभिन्न स्तर पर हैं, जिनमें से दो टीके स्वदेश निर्मित हैं। दो स्वदेशी टीकों के मानवीय क्लीनिकल परीक्षण का पहला चरण पूरा हो गया है और परीक्षण दूसरे चरण में पहुंच चुका है। इनमें से एक टीके को भारत बायोटेक ने आईसीएमआर के साथ मिलकर विकसित किया है और दूसरा टीका जाइडस कैडिला लिमिटेड ने तैयार किया है। 


सीडीएस का बड़ा बयान `चीन के लिए सैन्य विकल्प भी खुले *

24-Aug-2020

नई दिल्‍ली (शोर सन्देश)। गलवान में चीनी सैनिकों से हुई झड़प के बाद तनाव को कम करने और विवाद को सुलझाने को लेकर दोनों देशों के बीच लगातार बैठकों का दौर जारी है। हालांकि चीन यहां पर भी चालबाजी दिखा रहा है, ऐसे में भारत के चीफ डिफेंस ऑफ स्‍टॉफ बिपिन रावत (सीडीएस) ने एक इंटरव्‍यू में बड़ा बयान दिया है। बिपिन रावत ने कहा है कि अगर चीन से बातचीत विफल रहती है और हमारे पास सैन्‍य विकल्‍प खुले हैं।

भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि लद्दाख में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी द्वारा किए गए बदलावों से निपटने के लिए एक सैन्य विकल्प खुले है, लेकिन दोनों देशों की सेनाओं और राजनयिक विकल्प के बीच बातचीत होने पर ही अभ्यास किया जाएगा।
जनरल रावत ने बताया, `एलएसी के साथ बदलाव अलग-अलग होते हैं। रक्षा सेवाओं को निगरानी करने और घुसपैठ में बदलने से रोकने का काम सौंपा जाता है। किसी भी ऐसी गतिविधि को शांतिपूर्वक हल करने और घुसपैठ को रोकने के लिए सरकार के संपूर्ण दृष्टिकोण को अपनाया जाता है। रक्षा सेवाएं हमेशा सैन्य कार्यों के लिए तैयार रहती हैं, एलएसी के साथ यथास्थिति को बहाल करने के प्रयास सफल नहीं होने दिए जाएंगे।`
उन्‍होंने कहा, `रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जिम्मेदार सभी लोग सभी विकल्पों की समीक्षा कर रहे हैं कि पीएलए लद्दाख में यथास्थिति बहाल करता है।`
सीडीएस बिपिन रावत 2017 में पीएलए के खिलाफ डोकलाम में 73-दिवसीय सैन्य गतिरोध के दौरान सेना प्रमुख थे, उन्‍होंने इस धारणा को भी खारिज कर दिया कि प्रमुख खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी है। उन्होंने कहा कि भारत की हिंद महासागर क्षेत्र के साथ-साथ उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर एक विशाल फ्रंट-लाइन है, जिसकी सभी को निरंतर निगरानी की आवश्यकता है।
उनके अनुसार, भारत अभी भी अपने क्षेत्रों की निगरानी के लिए चौबीसों घंटे क्षमताओं का अधिग्रहण करने की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन सूचनाओं के संग्रह और समाप्ती के लिए जिम्मेदार सभी एजेंसियों के बीच नियमित रूप से बातचीत होती है। शीर्ष मल्टी-एजेंसी केंद्र दैनिक आधार पर बैठक कर रहा है, वह लगातार लद्दाख या किसी अन्य क्षेत्र में जमीन पर स्थिति से सभी को अवगत कराते रहे।
शनिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एनएसए और तीन सेवा प्रमुखों के साथ लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ गतिरोध पर चर्चा की। चीन ने लद्दाख में LAC के साथ अपनी उपस्थिति का निर्माण किया है, जिसमें भारत अपने उत्तरी पड़ोसी से मेल खाने के लिए भारी तैनाती कर रहा है।
15 जून को दोनों पक्षों के बीच खूनी झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे और काफी संख्या में चीनी हताहत हुए। लेकिन बीजिंग बार-बार शांति की बात करता है और यहां पर अपनी उपस्थिति बनाए रखता है।

सुरक्षा एजेंसियां लगातार चीनी सेना के बारे में 3,488 किलोमीटर एलएसी के माध्यम से मानव और तकनीकी खुफिया जानकारी एकत्र कर रही हैं। भारतीय सेना को न केवल कब्जे वाले अक्साई चिन क्षेत्र में चीनी सैन्य क्षमता के बारे में पता है, बल्कि तकनीक-खुफिया और उपग्रह इमेजरी के माध्यम से गहराई वाले क्षेत्रों में भी जाना जाता है। भारतीय वायु सेना ने जे 20 स्टील्थ सेनानियों को हॉटन एयर बेस में ले जाकर और फिर उन्हें अलग स्थान पर ले जाकर चीनी मुद्रा पर ध्यान दिया। 



Feedback/Enquiry



Log In Your Account