
नई दिल्ली (शोर सन्देश ) । लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा। गलवान झड़प के 75 दिन बाद फिर उसने यथास्थिति का उल्लंघन किया है। सेना के मुताबिक, 29 अगस्त की रात चीनी सेना ने पूर्वी लद्दाख के भारतीय इलाके में घुसपैठ की कोशिश की। भारतीय जवानों ने चीनी सैनिकों की इस कोशिश को नाकाम कर दिया। भारत ने इसे यथास्थिति का उल्लंघन बताया है। भारत ने यह भी कहा कि हमारी सेना बातचीत के जरिए शांति कायम करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन हम अपनी सीमाओं की सुरक्षा करना जानते हैं। इस मुद्दे को सुलझाने के लिए चुशूल में ब्रिगेड कमांडर लेवल की बातचीत भी हो रही है। 15 जून को लद्दाख के गलवान में चीन और भारत के सैनिकों में हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें हमारे 20 जवान शहीद हो गए थे। सेना के पीआरओ कर्नल अमन आनंद ने कहा कि भारतीय सैनिकों ने पैंगॉन्ग त्सो झील के दक्षिणी किनारे पर चीनी सैनिकों की गतिविधि को पहले से भांप लिया था और घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम कर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि सेना के जवानों ने भारतीय पोस्ट को मजबूत करने और जमीन पर तथ्यों को एकतरफा बदलने के लिए चीनी इरादों को विफल करने की कार्रवाई की।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर महीने के आखिरी रविवार को रेडियो पर मन की बात कार्यक्रम के जरिए लोगों से संवाद करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में पीएम पद का कार्यभार संभालने के बाद इस कार्यक्रम की शुरुआत की थी, जिसे काफी पसंद किया जाता है। देशभर में इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जाता है। लेकिन इस अगस्त माह के आखिरी रविवार को प्रधानमंत्री के रेडियो कार्यक्रम मन की बात कार्यक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने कुछ खास प्रतिक्रिया नहीं दी है। दरअसल भारतीय जनता पार्टी ने पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम को अपने यूट्यूब चैनल पर साझा किया था, जिसे 3.95 लाख से अधिक लोगों ने डिस्लाइक किया है।
सोमवार को भाजपा के यूट्यूब चैनल पर इस पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम के तकरीबन 21 घंटे बाद इस वीडियो को साझा किया गया। इस वीडियो को अबतक 13 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं, जबकि 52 हजार लोगों ने इस वीडियो को लाइक किया है। लेकिन इस वीडियो को डिस्लाइक करने वालों की संख्या 3.95 लाख को पार कर गई है। अहम बात यह है कि पार्टी के इस यूट्यूब चैनल पर तीन मिलियन सब्सक्राबर हैं। लगातार इस वीडियो को डिस्लाइक करने वालों की संख्या में हो रही बढ़ोतरी ने जरूर पार्टी के पदाधिकारियों की चिंता को बढ़ाया होगा।
दरअसल केंद्र सरकार ने देशभर में कोरोना संकट के बीच जेईई और नीट की परीक्षा कराने का फैसला लिया है, जिसका छात्र विरोध कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यही वजह कि एक बड़ा वर्ग सरकार के इस फैसले से नाराज है, शायद यही वजह है कि इसका असर पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम पर देखने को मिला हो। बता दें कि पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कोरोना से लोगों को सजग रहने को कहा। पीएम मोदी ने कहा कोरोना तभी हारेगा जब आप सुरक्षित रहेंगे, जब आप `दो गज की दूरी, मास्क जरुरी`, इस संकल्प का पूरी तरह से पालन करेंगे। कोरोना काल में नागरिकों में अपने दायित्वों का एहसास, हर तरह के उत्सवों में लोग संयम बरत रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा देश में हो रहे हर आयोजन में जिस तरह का संयम और सादगी इस बार देखी जा रही है, वो अभूतपूर्व है।

नई दिल्ली (शोर सन्देश ) । अवमानना मामले में दोषी पाए गए भगोड़े उद्योगपति विजय माल्या को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने विजय माल्या की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने अदालत की अवमानना मामले में 2017 में सुनाए गए आदेश पर पुनर्विचार का अनुरोध किया गया है। 27 अगस्त को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। दरअसल भगोड़े कारोबारी माल्या ने सुप्रीम कोर्ट के नौ मई 2017 के उस आदेश पर पुनर्विचार के लिए याचिका दायर की थी, जिसमें उसे न्यायिक आदेशों को दरकिनार कर अपने बच्चों के खातों में चार सौ मिलियन अमेरिकी डॉलर स्थानांतरित करने पर अदालत की अवमानना का दोषी करार दिया गया था।
27 अगस्त को न्यायमूर्ति यू यू ललित और न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने मामले में दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। न्यायालय ने जून में अपनी रजिस्ट्री को यह बताने के लिए कहा था कि बीते तीन साल में विजय माल्या की पुनर्विचार याचिका को संबंधित अदालत के समक्ष सूचीबद्ध क्यों नहीं किया गया। उसने रजिस्ट्री को बीते तीन साल में याचिका से संबंधित फाइल को देखने वाले अधिकारियों के नामों समेत सभी जानकारी मुहैया कराने के लिए कहा था।
नौ हजार करोड़ रुपए से अधिक के बैंक कर्ज धोखाधड़ी मामले में आरोपी माल्या फिलहाल ब्रिटेन में है। शीर्ष अदालत ने 2017 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह की याचिका पर वह आदेश दिया था। याचिका में कहा गया था कि माल्या ने कथित रूप से विभिन्न न्यायिक आदेशों का ``खुलेआम उल्लंघन`` कर ब्रिटिश कंपनी डियाजियो से प्राप्त चार करोड़ अमेरिकी डॉलर अपने बच्चों के खातों में स्थानांतरित किए थे।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। देश में कोरोना संकट के कारण कलवारी और व्यक्तिगत कर्ज धारकों को पूंजी संकट से बचाने के लिए सरकार द्वारा अहम कदम उठाया गया है। कोरोना से प्रभावित कर्ज धारकों के लिए लोन मोरटोरियम की सुविधा 31 अगस्त यानी आज से समाप्त हो रही है। वहीं बकाया भुगतान पर कर्जधारकों को सहूलियत देने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 3 सितंबर को बैंक प्रमुखों के साथ बैठक करेंगी, जिसमें बैंक एनबीएफसी को योजना के संचालन के बारे में बताया जाएगा।
वित्त मंत्रालय द्वारा 3 सितंबर को होने वाले बैठक में नीतियों के अंतिम प्रारूप बनाने, बैंकों में इसे सही तरीके से लागू करने और योग्य कर्ज धारकों की पहचान करने के अलावा योजना को तेज और समग्र रूप देने जैसे मसलों पर चर्चा की जाएगी। मुद्दे पर इसके साथ ही वित्त मंत्री बैंकों में एनबीएफसी के शीर्ष प्रबंधन के साथ कोरोना संबंधी जोखिम वाले कर्ज के समाधान ढांचे और इसके बेहतर क्रियान्वयन पर भी चर्चा करेंगे।
वहीं आरबीआई की ओर से गठित की गई केवी कामत समिति का पुनर्गठन के मानक तय करने पर काम कर रही है, बता दें कि रिजर्व बैंक ने इसी महीने की शुरुआत में मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद बैंकों को कॉरपरेट और खुदरा कर्ज के पूर्ण गठन की मंजूरी दे दी थी।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर गोद लेने व संरक्षण के नियमों की `विसंगतियों` को दूर करने की अपील की गई है। भाजपा नेता व वकील अश्विनी उपाध्याय की तरफ से दाखिल याचिका में गोद लेने व संरक्षण के `भेदभावपूर्ण आधार` को संविधान के अनुच्छेद 14, 15 व 21 का उल्लंघन बताया गया है। साथ ही इस संबंध में `समान दिशा निर्देश` तैयार करने के लिए आदेश जारी करने की मांग की गई है। अनुच्छेद 14 के अंतर्गत कानून के समक्ष समानता, अनुच्छेद 15 के तहत भारतीयों में धर्म, नस्ल, जाति व लिंग आदि के आधार पर भेदभाव पर रोक तथा अनुच्छेद 21 के तहत जीने व निजी स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लेख है।
वकील अश्वनी कुमार दुबे के माध्यम से दाखिल याचिका में कहा गया है कि गोद लेने की मौजूदा प्रक्रिया भेदभावपूर्ण है। हिंदू कानून के तहत गोद लिए हुए बच्चे को खानदानी संपत्ति में अधिकार प्रदान किया गया है, जबकि मुस्लिम, ईसाई व पारसी कानून के तहत ऐसा नहीं है। ¨हदू द्वारा गोद लिया हुआ बच्चा कानूनी वारिस बन जाता है, जबकि मुस्लिम, ईसाई व पारसी धर्मो में ऐसा प्रावधान नहीं है। याचिका में कहा गया है कि गोद लेना व संरक्षण मानव जीवन का अहम हिस्सा हैं, लेकिन आजादी के 73 साल बाद भी भारत में गोद लेने व संरक्षण के मामले में लैंगिक व धार्मिक समानता वाला कानूनी नहीं है।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। अगर आपके अंदर टैलेंट है और आप हार्डवेयर का काम जानते हैं तो आपके पास करोड़ों रुपए जीतने का मौका है। देश में स्टार्ट-अप, इनोवशन और रिसर्च को मजबूत बनाने के लिए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आत्मनिर्भर भारत के तहत `स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर चैलेंज` की शुरूआत की है। स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर चैलेंज के तहत स्मार्ट डिवाइस के लिए हार्डवेयर का निर्माण करना होगा। यह चैलेंज ऐप इनोवेशन चैलेंज जैसा ही है जिसमें कंपनियां हिस्सा ले सकती हैं। इस चैलेंज के तहत 25 विजेता टीमों को कुल एक करोड़ रुपए का इनाम मिलेगा। इसके लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उम्मीदवार mygov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर चैलेंज के माध्यम से विभिन्न प्रौद्योगिकी उत्पादों को विकसित करने के लिए SHAKTI (32 बिट) और VEGA (64 बिट) माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग करने के लिए इनोवेटर्स, स्टार्ट-अप और छात्रों को आमंत्रित करती है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के माइक्रोप्रोसेसर विकास कार्यक्रम के में ओपन सोर्स आ र्किटेक्चर का उपयोग करके, आईआईटी मद्रास और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (सीडीएसी) द्वारा क्रमशः SHAKTI और VEGA विकसित किए गए हैं। इस चैलेंज को भी मायजीओवी ने लॉन्च किया है और यह चैलेंज भी आत्मनिर्भर भारत अभियान का एक हिस्सा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह पहल भारत के रणनीतिक और औद्योगिक क्षेत्रों की भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से है।
इसमें सुरक्षा, लाइसेंसिंग, प्रौद्योगिकी अप्रचलन के मुद्दों को कम करने और सबसे महत्वपूर्ण रूप से आयात पर निर्भरता में कटौती करने की क्षमता है। MeitY हार्डवेयर प्रोटोटाइप को विकसित करने और स्टार्ट-अप (Start-up) शुरू करने के लिए चुनौती के विभिन्न चरणों में 4.30 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दे रहा है। यह 100 सेमी-फाइनलिस्टों को 1 करोड़ रुपए का पुरस्कार जीतने का अवसर प्रदान करेगा। बता दें, इस चैलेंज का समय 10 महीने तक है। 18 अगस्त से रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है और 15 सितंबर 2020 तक चलेगा। इसके बाद 16 सितंबर से 10 नवंबर 2020 के बीच क्वार्टर फाइनल, 1 जनवरी से 15 मार्च 2021 के बीच सेमी फाइनल होगा और 1 अप्रैल से 15 जून 2021 के बीच फाइनल होगा। फाइनल में 25 टीमों को चुना जाएगा और फिर 21 जुलाई को टॉप 10 टीमों को चुना जाएगा जिन्हें 2.30 करोड़ रुपये का सीड फंड मिलेगा और 12 महीने तक सरकार की ओर से मदद मिलेगी।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। केंद्रीय गृहमंत्री अब पूरी तरह स्वस्थ हो गए हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई है। सोमवार सुबह अमित शाह को 12 दिन बाद एम्स से छुट्टी मिल गई। कोरोना के बाद देखभाल के लिए (पोस्ट कोविड केयर) अमित शाह एम्स में बीते दिनों भर्ती हुए थे। अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान (एम्स) की ओर से सोमवार को यह जानकारी दी गई है। गृहमंत्री अमित शाह पिछले दिनों कोरोना संक्रमित पाए गए थे। मेदांता अस्पताल में इलाज के बाद थकान और शरीर में दर्द की शिकायत के बाद एम्स में भर्ती किए गए थे। अमित शाह का इलाज एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया की अगुवाई वाली टीम की देखरेख में चला।
केंद्रीय गृहमंत्री को 18 अगस्त को दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराया गया। उन्हें ओल्ड प्राइवेट वार्ड में रखा गया था। वह थकान और शरीर में दर्द महसूस कर रहे थे। एम्स के मीडिया और प्रोटोकॉल विभाग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार उनकी कोरोना जांच भी की गई, जो कि नेगेटिव आई।
55 वर्षीय शाह ने 2 अगस्त को ट्विटर के माध्यम से देश के बताया था कि वह कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं। इसके बाद उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उन्हें यहां से डिस्चार्ज किया गया था।

नई दिल्ली/रायपुर (शोर सन्देश)। कोरोना वायरस महामारी के कारण देशभर में लगाए गए लॉकडाउन को अनलॉक करने की प्रक्रिया अब भी जारी है। गृह मंत्रालय ने अनलॉक-4 (Unlock 4) के लिए गाइडलाइन्स जारी कर दी है। अनलॉक-4 की नई दिशा-निर्देशों में स्कूलों और छात्रों के लिए भी पढ़ना अति आवश्यक है। ऐसा इसलिए कि इस गाइलाइन्स में कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्रों के लिए भी जानकारी दी गई है। साथ पोस्ट ग्रेजुएट समेत तमाम प्रशिक्षण संस्थानों को लेकर नई जानकारी दी गई है, जिसे जानना बेहद आवश्यक है। फिलहाल ये गाइडलाइन्स 21 सितंबर से लागू किए जाएंगे।
00 अनलॉक-4 में स्कूलों और छात्रों के लिए 21 सिंतबर से लागू होंगे ये नए नियम.
- राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 50 फीसद तक शिक्षण और गैर-शिक्षण स्टाफ को ऑनलाइन टीचिंग, टेली काउंसलिंग और उससे संबंधित कार्यों के लिए एक समय में स्कूलों में बुलाया जा सकता है।
- कंटेनमेंट जोन के बाहर आने वाले स्कूलों में शिक्षकों से गाइडलाइन्स के लिए कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को स्कूल में आने की अनुमति दी जा सकती है. लेकिन इसके लिए उनके माता-पिता/अभिभावकों की लिखित सहमति होना जरूरी है।
- राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई), राष्ट्रीय कौशल विकास निगम या राज्य कौशल विकास मिशनों या भारत सरकार या राज्य सरकारों के अन्य मंत्रालयों के साथ पंजीकृत लघु प्रशिक्षण केंद्रों में कौशल या उद्यमिता प्रशिक्षण की अनुमति दी जाएगी।
- राष्ट्रीय उद्यमिता और लघु व्यवसाय विकास संस्थान (NIESBUD), भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE) और उनके प्रशिक्षण प्रदाताओं को भी अनुमति दी जाएगी।
- उच्च शिक्षा संस्थानों में केवल रिसर्च स्कॉलर्स (पीएचडी) और टेक्निकल और प्रोफेशनल प्रोग्राम के पोस्ट-ग्रेजुएट छात्रों के लिए प्रयोगशाला/प्रायोगिक कार्यों की आवश्यकता होती है. उच्च शिक्षा विभाग (डीएचई) द्वारा गृह मंत्रालय के परामर्श से, स्थिति के मूल्यांकन के आधार पर और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में COVID-19 की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए अनुमति दी जाएगी।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। प्रवर्तन निदेशालय ने भारत में काम कर रही चीनी कंपनियों पर शिकंजा कसते हुए एचएसबीसी बैंक के चार खातों को फ्रीज कर दिया है। इन खातों में 46.96 करोड़ रुपये जमा हैं। इन कंपनियों पर नियमों के उल्लंघन का आरोप है।
कार्रवाई से पहले प्रवर्तन निदेशालय ने इन कंपनियों पर छापा मारा था. ये कंपनियां ऑनलाइन जुए की एप्लीकेशन चला रही थीं। ED ने दिल्ली, गुरुग्राम, मुंबई और पुणे में 15 स्थानों पर छापा मारा था, इसके बाद ये कार्रवाई की गई है. इसके अलावा जांच एजेंसी ने इन कंपनियों के रजिस्टर्ड ऑफिसों, डायरेक्टर्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट के दफ्तरों पर भी छापा मारा। जुए की इन एप्लीकेशन्स को भारत से बाहर से होस्ट किया जाता था।
00 46.96 करोड़ रुपये जब्त :
इस कार्रवाई में ED ने 17 हार्ड डिस्क, 5 लैपटॉप, फोन, आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए थे, जबकि 4 बैंक खातों में जमा 46.96 करोड़ रुपये जब्त कर लिए गए। ED ने अब हैदराबाद पुलिस की शिकायत पर चीनी कंपनी डॉकीपे टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड और लिंकयून टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू कर दी है।
00 पेटीएम पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल :
ED ने डॉकीपे टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के 2 बैंक खातों के विश्लेषण से ये पाया कि पिछले साल इस खाते में 1,268 करोड़ रुपये का संग्रह था, जिसमें से 300 करोड़ रुपये पेटीएम पेमेंट गेटवे के जरिए आया और 600 करोड़ रुपये पेटीएम गेटवे के माध्यम से बाहर गया।
जांच एजेंसी का दावा है कि इन खातों से 120 करोड़ रुपये का अवैध भुगतान किया गया. ईडी ने कहा कि बड़े स्तर पर ऐसे वित्तीय लेन-देन का पता चला है, जिसका कोई आधार नहीं है। ये लेन-देन वैसी भारतीय कंपनियों के साथ हुए हैं, जो ऑनलाइन चाइनीज डेटिंग ऐप चलाती थीं। ईडी को शक है कि ये कंपनियां हवाला कारोबार में भी जुटी थीं। अब ईडी इस बारे में ऑनलाइन वैलेट कंपनियों और HSBC से जानकारी जुटा रही है।
00 चीनियों ने फर्जी कंपनियां बनाईं :
जांच के दौरान पता चला है कि कुछ भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदद से चीनी नागरिकों ने कई भारतीय कंपनियां बना लीं। इन कंपनियों में पहले डमी भारतीय डायरेक्टर तैनात किए और इन्हें पंजीकृत किया गया। कुछ दिनों बाद ये चीनी नागरिक भारत आए और इन कंपनियों की डायरेक्टरशिप अपने हाथों में ले ली।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पार्टी के 23 नेताओं ने ऊपर से नीचे तक बदलाव को लेकर पत्र लिखा। उनमें से एक पूर्व केंद्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल भी हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में उनके द्वारा जताई गई चिंताओं पर न तो बात हुई और न ही उसे साझा किया गया। इतना ही नहीं जब पत्र लिखने वाले नेताओं पर हमला हुआ तब कोई भी नेता बीच में नहीं आया। सिब्बल का कहना है कि कांग्रेस को एक अध्यक्ष की जरूरत है और पत्र में उल्लिखित चिंताओं का जल्द से जल्द समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा भाजपा पर संविधान का पालन नहीं करने और लोकतंत्र की नींव को नष्ट करने का आरोप लगाती है। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘हम क्या चाहते हैं? हम अपने (पार्टी के) संविधान का पालन करना चाहते हैं। उस पर आपत्ति कौन कर सकता है।’
कपिल सिब्बल ने कहा, `इस देश में राजनीति, मैं किसी पार्टी विशेष की बात नहीं करता, अब मुख्य रूप से वफादारी पर आधारित है। हमें वह चीज चाहिए जो वफादारी प्लस कहलाती है। वह प्लस क्या है? वह प्लस योग्यता, समावेशिता, कारण के प्रति प्रतिबद्धता और उस प्लस को सुनने और संवाद करने में सक्षम होने के बारे में है। यही राजनीति होनी चाहिए।’
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पत्र ने एक पूर्णकालिक और प्रभावी नेतृत्व, जो दिखाई दे और सक्रिय हो, सीडब्ल्यूसी के चुनाव और पार्टी के पुनरुद्धार के लिए सामूहिक रूप से संस्थागत नेतृत्व तंत्र की तत्काल स्थापना की मांग की। लेकिन पत्र के कारण पार्टी के अंदर एक बहस शुरू हो गई जो मुख्यमंत्रियों और राज्य इकाइयों के लिए निष्ठा परीक्षा हो गई। उन्होंने गांधीवाद के प्रति निष्ठा जताई और पत्र लिखने वालों को दरकिनार कर दिया।
सिब्बल ने कहा कि सीडब्ल्यूसी को इस बात से अवगत कराया जाना चाहिए था कि पत्र में क्या कहा गया है। उन्होंने कहा, ‘यह मौलिक चीज है जो होनी चाहिए थी। यही इन 23 लोगों ने लिखा है। यदि हमने जो कुछ भी लिखा है, उसमें आपको गलती मिलती है तो निश्चित रूप से, हमसे सवाल किए जाने चाहिए। बैठक में हमारी किसी भी चिंता, अनुरोध पर बात नहीं हुई। फिर भी हमें असंतुष्ट कहा गया है।’
00 आजाद बोले- पार्टी को करना चाहता हूं मजबूत :
इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि मेरा उद्देश्य गांधी परिवार को चुनौती देना या उनका निरादर करना नहीं है। मैं केवल पार्टी को और मजबूत करना चाहता हूं। उन्होंने कहा, `मंशा कांग्रेस को मजबूत करने की थी। मैं पिछले 34 साल से कार्य समिति में हूं। जिनको कुछ भी नहीं मालूम और अप्वाइंटमेंट वाला कार्ड मिल गया है वो सब विरोध करते हैं, वो सब बाहर जाएंगे।` उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस पार्टी को 50 वर्षों तक विपक्ष में बैठना है तो सीडब्ल्यूसी के चुनाव मत कराओ। मुझे इससे क्या फायदा है। हमारा रिश्ता गांधी परिवार से पारिवारिक है।`