
नई दिल्ली (शोर सन्देश)। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कोरोना, इकोनॉमी और चीन की घुसपैठ के मुद्दे पर एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। राहुल ने बुधवार को ट्वीट कर कहा कि कहा कि भारत मोदी मेड डिजास्टर्स (मोदी की बनाई हुई आपदाओं) के बीच फंसा हुआ है। राहुल ने ऐसे 6 मुद्दे गिनाए जिनमे जीडीपी में 23.9% की ऐतिहासिक गिरावट, 45 साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी, 1 करोड़ लोगों की नौकरियां गईं, केंद्र सरकार, राज्यों को उनका बकाया जीएसटी पेमेंट नहीं कर रही, कोरोना के हर रोज सबसे ज्यादा केस और मौतें तथा सीमाओं पर बाहरी घुसपैठ जैसे मुद्दों से केंद्र पर वार किया ।
3 दिन पहले भी साधा था सरकार पर निशाना
कांग्रेस नेता ने 30 अगस्त को एक वीडियो रिलीज कर कहा था `भारतीय अर्थव्यवस्था 40 वर्षों में पहली बार भारी मंदी में है। असत्याग्रही इसका दोष ईश्वर को दे रहे हैं। नोटबंदी, गलत जीएसटी और लॉकडाउन इन-फॉर्मल इकोनॉमी पर हमले के 3 बड़े उदाहरण हैं।`कांग्रेस में चल रहे कलह पर चुटकी लेते हुए भाजपा ने यह बात कही थी। जी-23 का मतलब कांग्रेस के उन 23 नेताओं से था, जिन्होंने पार्टी में बड़े बदलाव करने की जरूरत बताते हुए सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में अर्थव्यवस्था में नरमी का कारण दैवीय घटना बताया था। वित्त मंत्री की इसी टिप्पणी पर कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने तीखी आलोचना की है। उन्होंने सरकार के राहत पैकेज को एक `मजाक` बताया है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी में करीब 24 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। दरअसल निर्मला सीतारमण ने राज्यों की ओर से जीएसटी क्षतिपूर्ति की मांग करने पर राजस्व में कमी के लिए महामारी को जिम्मेदार ठहराया था, जिसके बाद उनकी आलोचना की गई थी। वित्त मंत्री ने कहा था, `इस साल हम असाधारण स्थिति का सामना कर रहे हैं। हम दैवीय घटना का सामना कर रहे हैं, जहां हमें अर्थव्यवस्था में गिरावट भी देखनी पड़ सकती है।
पी चिदंबरम ने कहा, `भगवान को दोष मत दो। असल में आपको तो भगवान को धन्यवाद कहना चाहिए। भगवान ने देश के किसानों को आशीर्वाद दिया है। कोरोना महामारी एक प्राकृतिक आपदा है, लेकिन आप इस प्राकृतिक महामारी को मनुष्य निर्मित आपदा से जोड़ रहे हैं। `दरअसल, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी परिषद 41वीं बैठक के बाद कहा था कि अर्थव्यवस्था असाधारण स्थिति का सामना कर रही है। यह दैवीय घटना है। इसके परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था में गिरावट तक आ सकती है।

चीनी सेना ने मेजर शैतान सिंह को बताया था `महान योद्धा`
नई दिल्ली (शोर सन्देश)। सामरिक रूप से चुशूल एक ऐसा इलाका है, जिसका इस्तेमाल युद्ध के दौरान लॉन्च पैड के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। 1962 की लड़ाई में भी चीन ने पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया था। ब्लैक टॉप से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर रेजांग ला में मेजर शैतान सिंह और उनके शूरवीरों ने चीनी फौजियों के मंसूबों को नेस्तनाबूद कर दिया था। 1300 से ज्यादा चीनी सैनिक रेजांग ला की लड़ाई में मारे गए। चीन आजतक उस लड़ाई की खौफनाक यादों से उबर नहीं पाया है।
पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारों पर खड़े ब्लैक टॉप की चोटी से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर रेजांल ला है। रेजांग ला शब्द सुनते ही चाइनीज आर्मी के जवान सन्नाटे में आ जाते हैं, उनके दिमाग में 1962 की जंग का वो मंजर याद आने लगता था जिसमें 1300 से ज्यादा चीनी सैनिक मारे गए थे। ब्लैक टॉप से कुछ किलोमीटर की दूरी पर रेजांग ला है। 20 किलोमीटर से भी कम की दूरी ब्लैक टॉप की चोटी ने 1962 की जंग देखी है। चुशूल घाटी में हुई भीषण जंग देखी है, चीन का धोखा देखा है और मेजर शैतान सिंह और उनके जवानों का अदम्य शौर्य देखा है।
लद्दाख घाटी की इसी चुशूल घाटी की सुरक्षा की जिम्मेदारी मेजर शैतान सिंह की यूनिट पर थी। बात 58 साल पुरानी है जब LAC पर चाइनीज आर्मी की हलचल बढ़ने लगी थी। लद्दाख में तैनात भारतीय फौज के जवानों को अंदाजा होने लगा था कि चीन इस इलाके में कुछ बड़ा करने की फिराक में है। भारतीय फौज भी चीन की हर हिमाकत का जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार थी। लेकिन भारतीय जवानों के पास उतने अत्याधुनिक हथियार नहीं थे, जितने चीन के पास थे। यहां तक की माइनस तापमान वाले इस इलाके में ठंड से बचाव के भी पूरे इंतजाम नहीं थे। हालांकि हिमालय जैसे बुलंद हौसलों के साथ भारतीय फौज के शूरवीर लद्दाख में अलग-अलग मोर्चों पर डटे हुए थे।
अक्टूबर 1962 में चीन ने भारत पर आक्रमण किया। 13वीं कुमाऊ बटालियन की C कंपनी लद्दाख में तैनात थी, जिसके कमांडर मेजर शैतान सिंह थे। बटालियन में 120 जवान थे। जब चीन ने भारत में हमला किया तो हमारे जवानों के पास ना बेहतर हथियार थे, न भीषण ठंड से बचने का मुकम्मल इंतजाम, लेकिन हौसलों के दम पर मेजर शैतान सिंह और उनके जवानों ने दुश्मनों पर प्रचंड प्रहार किया। हिंदुस्तान के 120 जवानों के सामने चीन के दो हजार जवान थे।
चुशूल घाटी, लद्दाख-
18 नवंबर 1962। 17 तारीख की रात से ही रेजांग ला पर तैनात भारतीय सेना की टुकड़ी का संपर्क अपने बेस से टूट गया। बेहद सर्द रात में 120 सैनिक पूरी मुस्तैदी से रात भर पहरेदारी करते रहे। सुबह की पहली किरण निकली तो पूरी चुशूल घाटी बर्फ से ढकी हुई थी। सब कुछ शांत था, लेकिन अचानक पूरी घाटी गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठी।
चाइनीज आर्मी के हजारों जवानों ने गोला-बारूद और तोप के साथ हमला बोल दिया। चुशूल घाटी की रक्षा की जिम्मेदारी मेजर शैतान सिंह और उनके 120 शूरवीरों के हाथों में थी। भारतीय फौज का पहले ही संपर्क टूट चुका था। इसलिए पीछे से मदद की भी कोई उम्मीद नहीं थी। भारतीय फौज के 120 जांबाजों ने तय किया कि आखिरी सांस तक लड़ेंगे। ये वो दौर था जब 1962 में चीनी सैनिक हिंदुस्तान पर भारी पड़े थे।
मेजर शैतान सिंह की जवानों से आखिरी बातचीत
पूरी तैयारी के साथ दुश्मन के प्रचंड हमले को देखते हुए मेजर शैतान सिंह ने अपने जवानों से कहा, `हम 120 है, दुश्मनों की संख्या हमसे ज्यादा हो सकती है। पीछे से हमें कोई मदद नहीं मिल रही है। हो सकता है कि हमारे पास मौजूद हथियार कम पड़ जाए, हो सकता है कि हमसे कोई न बचे और हम सब शहीद हो जाए। जो भी अपनी जान बचाना चाहते हैं वह पीछे हटने के लिए आजाद हैं, लेकिन मैं मरते दम तक मुकाबला करूंगा।`
पूरी कंपनी ने दुश्मनों का आखिरी सांस तक मुकाबला करने का फैसला किया। रणनीति बनी कि एक भी गोली बर्बाद न जाए। एक गोली, एक दुश्मन। दुश्मन के मारे जाते ही उनसे बंदूक छीन ली जाए। जिससे हथियार और गोला-बारूद की कमी पूरी की जा सके।
भारतीय जवानों ने अदम्य शौर्य का परिचय देते हुए दुश्मनों का डट कर सामना किया। 13वीं कुमाऊं के वीर सैनिकों ने सही जवाबी कार्रवाई शुरू की। मेजर शैतान सिंह ने इस युद्ध में अहम भूमिका निभाई, उन्होंने गोलियों की बौछार के बीच एक प्लाटून से दूसरी प्लाटून तक जाकर सैनिकों का हौसला बढ़ाया। मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व और युद्धनीति से भारतीय जवानों का जोश उफान मारने लगा। एक-एक कर चाइनीज आर्मी के जवानों की लाशें गिरने लगी। 18 हजार फुट की ऊंचाई पर हुई इस भीषण लड़ाई की गवाही चुशूल घार्टी का जर्रा-जर्रा दे रहा है। चाइनीज आर्मी के मंसूबों को नाकाम करने के दौरान मेजर शैतान सिंह को कई गोलियां लगीं।
बुरी तरह से जख्मी मेजर शैतान सिंह का काफी खून बह चुका था। उनके दो साथी उठाकर ले जा रहे थे। इसी बीच चीनी सैनिकों ने उन पर मशीन गन से हमला कर दिया। मेजर शैतान सिंह ने अपने साथियों की जान खतरे में देखते हुए तुरंत पीछे जाने के लिए कहा, लेकिन साथी सैनिकों ने उन्हें एक पत्थर के पीछे छिपा दिया। बुरी तरह से जख्मी होने के बाद भी मेजर शैतान सिंह दुश्मनों पर हमला करते रहे। एक-एक कर चीनी सैनिक उनकी गोलियों ढेर होते रहे। रेजांग ला की इस लड़ाई में चीन को घुटने टेकने पड़े।
इस युद्ध में 1300 सैनिकों को 120 भारतीय सैनिकों ने मार गिराया जबकि 120 में से 114 भारतीय सैनिक भी शहीद हुए। खुद चीनी सेना ने शैतान सिंह को `महान योद्धा` बताया। मेजर शैतान सिंह और उनके शूरवीरों ने अपने प्राणों की आहूति देकर चीन के मंसूबों पर पानी फेर दिया। चुशूल घाटी में चाइनीज आर्मी की कब्र बना दी। 13वीं कुमाऊंनी बटालियन की इस पराक्रमी पलटन के शौर्य का अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि सिर्फ 14 भारतीय जवान ही जिंदा बचे। इस लड़ाई में 1300 से ज्यादा चीनी सैनिक मारे गए।
चुशूल में अदम्य शौर्य के लिए मेजर शैतान सिंह को मरणोपरांत देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार पदक परमवीर चक्र से अलंकृत किया गया, वहीं इस बटालियन के आठ अन्य जवानों को वीर चक्र, चार को सेना मेडल प्रदान किया गया। इस वीर गाथा की वजह से रेज़ांग ला को अहीर धाम भी कहा जाने लगा।
चाइनीज आर्मी के सामने जब भी परमवीर मेजर शैतान सिंह का जिक्र आता है, जब भी चुशूल घाटी में आज से 58 साल पहले हुई जंग का जिक्र आता है तो सन्नाटा पसर जाता है। क्योंकि हिंदुस्तान के मुट्ठी भर जवानों ने रेजांग ला में चीन को एहसास करा दिया था कि किसी भी हिमाकत का अंजाम कितना खतरनाक हो सकता है? हिंदुस्तान का एक-एक फौजी कैसे दुश्मन के 100 फौजियों पर भारी पड़ता है।

नई दिल्ली/रायपुर (शोर सन्देश)। देश में कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप के बीच इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिले के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षाकी शुरूआत बीते मंगलवार से हो गई है। मालूम हो कि ये परीक्षा कोरोना संकट के चलते अब तक दो बार स्थगित हो चुकी है। फिलहाल, जेईई मेन्स प्रवेश परीक्षा देशभर में 1 से 5 सितंबर के बीच निर्धारित है।
ये परीक्षा देशभर के 660 केंद्रों पर आयोजित की जा रही हैं। परीक्षाओं के सफल आयोजन को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक राज्यों के मुख्यमंत्रियों से फोन पर बात भी कर चुके हैं। इस दौरान राज्य सरकारों ने परीक्षार्थियों के लिए कोरोना गाइडलाइंस को ध्यान में रखते हुए कई तरह की सुविधाओं का इंतजाम किए। वहीं दूसरी ओर भारतीय रेलवे ने उम्मीदवारों को परिवहन में हो रही दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए कई अहम फैसले लिए हैं।
00 20 जोड़ी स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला :
ऐसे में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर 40 ट्रेनों की लिस्ट साझा की। इसके साथ ही उन्होंने लिखा,`बिहार में जेईई-मेंन्स (JEE Mains), नीट (NEET) व एनडीए (NDA) में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों को परीक्षा सेंटर तक आने-जाने की सुविधा हेतु भारतीय रेलवे ने 2 से 15 सितंबर तक 20 जोड़ी MEMU/DEMU स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है।`
मालूम हो कि पीयूष गोयल पहले ही मुंबई में परीक्षार्थियों के लिए ट्रेन सेवा शुरू कर चुके हैं। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, `नीट और जेईई परीक्षाओं में शामिल होने जा रहे विद्यार्थियों का सहयोग करते हुए रेलवे ने उन्हें और उनके अभिभावकों को परीक्षा के दिन मुम्बई में विशेष उपनगरीय सेवाओं से यात्रा करने की अनुमति दी है। सामान्य यात्रियों से यात्रा नहीं करने का अनुरोध किया जाता है।
संयुक्त प्रवेश परीक्षा का कल यानी 1 सितंबर को पहले दिन आयोजित की गई थी। इस दौरान गुजरात, केरल, उत्तर प्रदेश, गोवा, तेलंगाना, जम्मू और दिल्ली में ज्वॉइंट एंट्रेंस एग्जाम की परीक्षा देने छात्र परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे। यहां छात्रों को थर्मल स्क्रीनिंग और हैंड सैनिटाइज के बाद ही परीक्षा में बैठने दिया गया।

वाशिंगटन/नई दिल्ली (शोर सन्देश)। चीन लगभग एक दर्जन देशों में अपनी सेना की तैनाती और अधिक दूरी पर अपनी शक्ति बनाए रखने के लिए सैन्य साजो सामान को तैनात करना चाह रहा है। इसमें तीन ऐसे देश हैं, जो भारत से सटे हुए हैं। पेंटागन की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया, भारत से सटे तीन देश जहां चीन अपने सैन्य साजो सामान को तैनात करना चाह रहा है, उसमें पाकिस्तान, श्रीलंका और म्यांमार शामिल हैं। इसके अलावा चीन थाईलैंड, सिंगापुर, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, केन्या, सेशेल्स, तंजानिया, अंगोला और तजाकिस्तान जैसे देशों में अपनी सेना का आधार बनाने पर विचार कर रहा है।
पेंटागन ने `मिलिट्री एंड सिक्योरिटी डेवलपमेंट्स इनवॉल्विंग द पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) 2020` की वार्षिक रिपोर्ट को अमेरिकी कांग्रेस को मंगलवार को सौंपा। इसमें कहा गया, ये संभावित चीनी सैन्य रसद सुविधाएं जिबूती में चीनी सैन्य अड्डे के अलावा हैं, जिसका उद्देश्य नौसैनिक, वायु और जमीनी बल का समर्थन करना है।
रिपोर्ट में कहा गया कि पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) का सैन्य लॉजिस्टिक्स नेटवर्क अमेरिकी सैन्य अभियानों में हस्तक्षेप कर सकता है और पीआरसी के वैश्विक सैन्य उद्देश्यों के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ आक्रामक अभियानों का समर्थन कर सकता है।
चीन ने पहले ही नामीबिया, वनातू और सोलोमन द्वीपों के लिए पहले ही समझौते किए हुए हैं। इसमें कहा गया कि पीएलए की योजना `सील लाइन्स ऑफ कम्युनिकेशन` के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य, अफ्रीका और प्रशांत द्वीप समूहों तक अपने नेटवर्क को फैलाने की है।
पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है कि बीजिंग वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर) का उपयोग करते हुए अपने विकास के लिए पड़ोसी देशों के साथ-साथ दूर बसे देशों के साथ समझौते कर रहा है, ताकि अपने आर्थिक एकीकरण को गहरा किया जा सके।

रायपुर/नई दिल्ली (शोर सन्देश)। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी और कोरोना महामारी समेत कई मुद्दों को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने एक साथ 6 परेशानियों का नाम लेते हुआ साफ शब्दों में कहा है कि इसके लिए पीएम मोदी जिम्मेदार हैं। राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, `भारत मोदी निर्मित आपदाओं से जूझ रहा है:
1. जीडीपी में ऐतिहासिक गिरावट -23.9%
2. 45 साल में सबसे अधिक बेरोजगारी
3. 12 करोड़ लोगों की नौकरियां गईं
4. केंद्र अपने राज्यों को जीएसटी का बकाया नहीं चुका रहा
5. दुनिया में कोरोना के सबसे ज्यादा मामले और इससे हो रही मौत
6. हमारी सीमाओं पर बाहरी आक्रमण।`
राहुल गांधी ने जिन मुद्दों को ट्वीट कर जनता के सामने पेश किया है। वह इस समय के ज्वलंत मुद्दें हैं, जिनसे देश इस वक्त बुरी तरह से जूझ रहा है। जाहिर अर्थव्यवस्था की हालत खस्ता है। देश की जीडीपी में 23 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। राहुल गांधी ने जीडीपी में गिरावट के लिए पीएम मोदी को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने इस ट्वीट में नौकरियों का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि देश में पिछले 45 सालों में सबसे ज्यादा बेरोजगारी है। इस मुद्दे पर राहुल गांधी लगातार केंद्र की मोदी सरकार को घेरते रहे हैं।
राहुल गांधी ने इस ट्वीट के जरिए जीएसटी मुआवजे का मुद्दा भी उठा है। दरअसल कोरोना महामारी का हवाला देते हुए केंद्र ने यह कहते हुए राज्यों को जीएसटी का मुआवजा देने से इनकार कर दिया है कि उसके पास पैसे नहीं हैं। इस बीच लगातार राज्य अपने हिस्सा का पैसा मांग रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कोरोना के बेतहाशा बढ़ते मालमों का जिक्र किया है। उन्होंने इस ट्वीट में कहा है कि दुनिया में सबसे ज्यादा कोरोना के मामले भारत में आ रहे हैं और इससे मौत हो रही है। इस मोर्चे पर भी मोदी सरकार पूरी तरह से फेल हुई है।
राहुल गांधी ने इस ट्वीट में भारत-चीन के बीच सीमा विवाद का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि हमारी सीमाओं पर आक्रमण हो रहा है, लेकिन मोदी सरकार इसका हल नहीं निकाल पा रही है। राहुल गांधी ने इन सभी 6 परेशानियों के लिए सीधे तौर पर पीएम मोदी को जिम्मेदार ठहराया है। इन परेशानियों को कांग्रेस नेता ने मोदी निर्मित आपदा बताया है।

पटना (शोर सन्देश)। बिहार में होने वाले विधनासभा चुनाव को लेकर प्रदेश में राजनीतिक गर्मी बढ़ी हुई है। एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाना और दलों के गठबंधन को लेकर हर किसी की निगाह टिकी हुई है। इसी बीच काफी दिनों के बाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने एनडीए में जाने का फैसला कर लिया है। बता दें कि महागठबंधन से अलग हुए दो सप्ताह हो गए थे। लेकिन कई दिनों से वह अपना सियासी रास्ता तय नहीं कर पा रहे थे।
जीतनराम मांझी ने जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार से मुलाकात की थी। बता दें कि आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन में लगातार उपेक्षा से खिन्न जीतन राम मांझी ने 22 अगस्त को अपनी पार्टी की कार्यसमिति की बैठक करके अपना रास्ता अलग कर लिया था। जीतन राम मांझी ने 27 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर नीतीश कुमार से मुलाकात की थी, जिसके बाद उनके एनडीए के सहयोगी के तौर पर चुनाव लड़ने के कयास लगाए जाने लगे थे।
एनडीए में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा था कि 30 अगस्त को पूरी पिक्चर साफ हो जाएगी। इसके बाद जीतनराम मांझी ने 30 अगस्त को तीसरे मोर्च की बैठक बुलाई थी, जिसे उन्होंने स्थागित करते हुए फिर 2 सितंबर की डेडलाइन तय कर दी है। बुधवार को होने वाली बैठक से एक दिन पहले मंगलवार को मांझी गया चले गए थे।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर नरमी बरतने के आरोपों पर फेसबुक कंपनी को आज जवाब देना है। इसके लिए फेसुबक अधिकारी संसदीय कमेटी के सामने पेश हो सकते हैं। कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर इस कमेटी के अध्यक्ष हैं। अब होनेवाली मीटिंग के बारे में लोकसभा सचिवालय को संसदीय कमिटी की तरफ से पहले ही जानकारी दे दी गई थी। इस मीटिंग में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रतिनिधि को भी मौजूद रहने को कहा गया है। मीटिंग से पहले फेसबुक की तरफ से सफाई भी आई है। बताया गया है कि उन्होंने गलत जानकारी देनेवाले 453 अकाउंट, 103 पेज, 78 ग्रुप और 107 इंस्टाग्राम अकाउंट जो कि पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहे थे उन्हें बंद किया है।
00 उठी थी शशि थरूर को पैनल से हटाने की मांग:
वॉल स्ट्रीट जनरल की वह रिपोर्ट आने के बाद शशि थरूर ने ट्वीट कर जानकारी दी थी कि संसदीय पैनल इसपर और सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल को रोकने के मुद्दे पर फेसबुक से बात करेगा। शशि थरूर का ऐसे ट्वीट कर जांच की बात करना भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को ठीक नहीं लगा था। कहा गया कि थरूर के ट्वीट से लगता है कि जांच में पक्षपात हो सकता है. थरूर को पैनल से हटाने की मांग भी उठी थी।

श्रीनगर सेक्टर में पहली बार सीआरपीएफ की आईजी बनी महिला आईपीएस
नई दिल्ली (शोर सन्देश)। ऐसा पहली बार हुआ है जब जम्मू-कश्मीर के सबसे आतंक प्रभावित इलाके श्रीनगर सेक्टर में एक महिला आईपीएस अधिकारी को सीआरपीएफ का इंस्पेक्टर जनरल (आईजी) नियुक्त किया गया है। 1996 बैच के तेलंगाना कैडर की आईपीएस अधिकारी चारू सिन्हा अब सीआरपीएफ के महानिरीक्षक (आईजी) के रूप में श्रीनगर सेक्टर की कमान संभालेंगी। यह पहली बार नहीं है जब उन्हें इतना कठिन काम सौंपा गया है, इससे पहले भी वह बिहार सेक्टर में सीआरपीएफ की आईजी के रूप में काम कर चुकी है और नक्सलियों से निपट चुकी हैं।
बिहार सेक्टर में उनके नेतृत्व में विभिन्न एंटी नक्सल ऑपरेशन चलाए गए। बाद में उन्हें सीआरपीएफ के आईजी के तौर पर जम्मू में ट्रांसफर कर दिया गया, जहां उन्होंने एक लंबा और सफल कार्यकाल बिताया। सोमवार को जारी किए गए एक ताजा आदेश में उन्हें श्रीनगर सेक्टर के आईजी के रूप में नियुक्त किया गया।
वर्तमान सीआरपीएफ महानिदेशक एपी माहेश्वरी ने भी 2005 में आईजी के रूप में श्रीनगर सेक्टर का नेतृत्व किया है। 2005 में शुरू हुए इस सेक्टर में कभी भी आईजी स्तर की महिला अधिकारी नहीं रही। ऐसा पहली बार होगा जब चारू सिन्हा यह पद संभालेंगी। इस सेक्टर का काम आतंक विरोधी अभियानों को सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस की मदद से अंजाम देना है।
सीआरपीएफ ने कहा के मुताबिक सीआरपीएफ के श्रीनगर सेक्टर में जम्मू-कश्मीर के तीन जिले बडगाम, गांदरबल और श्रीनगर और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख आता है। इस सेक्टर में 2 रेंज, 22 कार्यकारी यूनिट और तीन महिला कंपनी आती हैं। इसके अलावा श्रीनगर सेक्टर का ग्रुप सेंटर-श्रीनगर पर प्रशासनिक कंट्रोल भी है। इन इलाकों में होने वाले सभी ऑपेशन में चारू सिन्हा हेड करेंगी।
आईपीएस अफसर चारू सिन्हा अप्रैल 2018 में सीआरपीएफ बिहार सेक्टर की नई आईजी बनी थीं। इससे पहले तेलंगाना पुलिस में निदेशक एसीबी के पद पर तैनात थीं। आईपीएस अधिकारी और बिहार सेक्टर के आईजी रहे एमएस भाटिया से उन्होंने बिहार सेक्टर का प्रभार ग्रहण किया था।

आर्थिक पैकेज को बताया हाथी का दांत
नई दिल्ली (शोर सन्देश)। कोरोना संकट के बीच जरी हुए पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़ों को लेकर विपक्ष मोदी सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने आज अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार को निशाने पर लिया है। प्रियंका गांधी ने कोरोना संकट के दौर में जारी पैकेज की तुलना हाथी के दांत से की है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने अर्थव्यवस्था को डुबा दिया।
प्रियंका गांधी ने ट्विटर पर लिखा, ``आज से 6 महीने पहले राहुल गांधी ने आर्थिक सुनामी आने की बात बोली थी। कोरोना संकट के दौरान हाथी के दांत दिखाने जैसा एक पैकेज घोषित हुआ। लेकिन आज हालत देखिए। जीडीपी @ -23.9% जीडीपी। भाजपा सरकार ने अर्थव्यवस्था को डुबा दिया।``
नेता अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने भी जीडीपी को लेकर सरकार पर तंज कसा है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ``जिस तरह हमने सकल घरेलू उत्पाद के 23 फीसदी गिरने की दिल तोड़ने वाली खबर सुनी। दुरभाग्य से यह 40 सालों में सबसे खराब गिरावट रही है। उम्मीद है और दुआ भी करता हूं कि इसे भी `ईश्वर के कदम` का जिम्मेदार न ठहराया जाए।`
00 पहली तिमाही में जीडीपी गिरकर -23.9 फीसदी पर आई
कोविड-19 संकट के बीच देश की अर्थव्यवस्था में चालू वित्त वर्ष 2020-21 की अप्रैल-जून तिमाही में 23.9 प्रतिशत की भारी गिरावट आयी है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े आज जारी किए। इन आंकड़ों में जीडीपी में भारी गिरावट दिखी है। सकल घरेलू उत्पाद में इससे पिछले वर्ष 2019-20 की इसी तिमाही में 5.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
बता दें कि अलग-अलग रेटिंग एजेंसियों और इंडस्ट्री के जानकारों ने पहली तिमाही में जीडीपी में गिरावट आने के अनुमान दिए थे। इसकी साफ तौर पर वजह बताई गई कि कोरोना वायरस महामारी और उसको रोकने के लिये लगाए `लॉकडाउन` के चलते औद्योगिक उत्पादन गिरा है, देश में सकल घरेलू उत्पाद में बेतहाशा कमी आई है और रोजगार के आंकड़ों में भी बड़ी गिरावट है।