
रायपुर (शोर संदेश)। विश्व किडनी दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में बच्चों के लिए पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी के विशेष क्लिनिक का शुभारंभ किया गया। जिसमें किडनी रोगों से पीड़ित बच्चों का इलाज किया जाएगा। अभी एम्स में प्रत्येक सप्ताह लगभग बीस बाल किडनी रोगी पीड़ित पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों ने किडनी रोगों से बचने के लिए जीवन शैली में आवश्यक परिवर्तन अपनाने को कहा है। विशेष क्लिनिक का उद्घाटन करते हुए निदेशक प्रो. (डॉ.) नितिन एम. नागरकर ने कहा कि इससे बच्चों में किडनी रोग के कारणों और इसके उपचार के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे भविष्य में किडनी रोग से पीड़ित बच्चों पर शोध भी संभव हो सकेगा। विभागाध्यक्ष डॉ. विनय राठौर ने बताया विशेष क्लिनिक प्रत्येक गुरुवार को नौ से एक बजे तक आयोजित होगा। वर्तमान में विभाग में 90 बाल किडनी रोगी रजिस्टर्ड हैं जिनमें से लगभग 10 को नियमित डायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है। इन्हें मुख्य रूप से चेहरे, पैर और पेट पर सूजन की शिकायत होती है।
उन्होंने बताया कि विभाग में औसतन 1500 किडनी रोगी प्रतिमाह आ रहे हैं। इनमें लगभग 100 रोगी नए होते हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ते किडनी रोग को रोकने के लिए जीवन शैली में आवश्यक परिवर्तन करने होंगे। इसके लिए प्रति दिन आठ से दस गिलास पानी पीने की आदत डालें जिससे डिहाइड्रेशन से बचा जा सके। कोई भी दवा खासतौर पर दर्द निवारक, बिना चिकित्सकीय परामर्श के न लें। इसके साथ ही अधिक नमक के सेवन से बचते हुए मौसमी सब्जियां और फलों को अपने नियमित आहार में शामिल करें। फास्ट फूड से भी स्वयं को बचाने की आवश्यकता है। शुगर और बीपी को भी नियमित चेक करवाते रहे। योग से भी किडनी रोगों से बचाव किया जा सकता है। इससे पूर्व विभाग की नर्सिंग ऑफिसर उर्मिला की याद में पौधारोपण किया गया। उर्मिला के परिजनों ने हाल ही में उसकी किडनी और कॉर्निया दान की थी। इसके साथ ही पोस्टर प्रजेंटेशन और वॉकाथान के माध्यम से परिसर के आसपास के लोगों को नियमित रूप से पैदल चलने और साइकलिंग करने का संदेश दिया गया जिससे किडनी और फेफड़े स्वस्थ रहे। कार्यक्रमों का आयोजन नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और नर्सिंग कालेज के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें प्रो. अनिल कुमार गोयल, डॉ. दिबाकर साहू, डॉ. रोहित ने भाग लिया।

रायपुर (शोर संदेश) ।मुख्यमंत्री बघेल ने रविवार को रायपुर में एम्स के समीप टाटीबंध में श्रीगहोई वैश्य समाज, रायपुर द्वारा बनवाए गए नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री बघेल ने इस अवसर पर राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त को नमन करते हुए कहा की एम्स में मरीजों के इलाज के दौरान मरीजों और उनके परिजनों के रुकने की व्यवस्था के लिए समाज द्वारा यह भवन बनवाया गया है। गहोई वैश्य समाज रायपुर ने सेवाभाव से यह बहुत ही प्रशंसनीय और पुनीत कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं आप सबको नवनिर्मित भवन के लोकार्पण की बधाई देता हूँ। सामाजिक भवनों, धर्मशालाओं में समाज के उत्थान और विकास की चर्चाएं भी होती हैं, दूसरे समाज के लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा। छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ के बाहर दूसरे राज्यों से आने वाले मरीजों के लिए यह भवन काफी उपयोगी होगा। कई बार इलाज के लिए काफी समय के लिए रुकना पड़ता है, ऐसे में इस भवन के माध्यम से मरीजों और उनके परिजनों की रुकने की समस्या का समाधान हो सकेगा और उन्हें काफी राहत प्रदान करेगा। अस्पताल के मरीजों के लिए आप कमरे उपलब्ध कराएंगे, इस कार्य को मरीज और उनके परिजन कभी नहीं भुला पाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज का यह कार्य उच्च कोटि की मानव सेवा है। समाज द्वारा नया रायपुर में सामाजिक भवन के लिए जमीन की मांग पर उन्होंने कहा कि कोई भी समाज जिसके पास जमीन नहीं है, उन्हें सामाजिक कार्यों के लिए निर्धारित राशि देने पर भू खण्ड दिया जा रहा है। कलेक्टर गाइडलाइन को भी हमने 30 प्रतिशत कम कर दिया है। बघेल ने कहा कि समाज के नाम से जमीन की रजिस्ट्री करा लें ,भवन बनाने के लिए सहायता दी जाएगी।
नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने कार्यक्रम का अध्यक्षता की। विशेष अतिथि के रूप में सांसद सुनील सोनी, संसदीय सचिव विकास उपाध्याय, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष एवं विधायक कुलदीप जुनेजा, विधायक बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर महापौर एजाज ढेबर भी उपस्थित थे।
गहोई समाज के अध्यक्ष अशोक बानी ने बताया कि अत्याधुनिक सुविधायुक्त यह भवन विशेष रूप से एम्स रायपुर के मरीजों के परिजनों के ठहरने के लिए बनाया गया है। सचिव संजय गुप्ता व कोषाध्यक्ष पंकज सरावगी ने बताया कि भवन के लोकार्पण समारोह में समाज के विभिन्न स्थानों से समाज के लोग एकत्रित हुए हैं।

रायपुर (शोर संदेश)। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन शुक्रवार को बिलासपुर में एम्स खोलने का मुद्दा उठा। कांग्रेस विधायक शैलेश पांडेय ने स्वास्थ्य मंत्री से पूछा कि बिलासपुर में एम्स के लिए राज्य शासन ने क्या कार्यवाही की। स्वास्थ्य मंत्री ने लिखित जवाब में कहा कि फिलहाल कोई कार्यवाही नहीं की गई है। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने चुटकी लेते हुए कहा कि बाबा कि चल रही है क्या अगर चलेगी तो ये ताजमहल बनवा देंगे वहीं जेसीसीजे विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा, आप शासकीय संकल्प ले आइए हम समर्थन करेंगे। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बिलासपुर संभाग में अच्छी शिक्षा का अभाव है, जब भी एम्स खुले बिलासपुर में खुले। मंत्री ने जवाब देते हुए कहा बिलासपुर में एम्स के लिए नई दिल्ली को पत्र लिखा जा चुका है। एम्स की स्थापना बड़ा कठीन निर्णय है। बहुत से ऐसे राज्य है जहां एक भी एम्स नहीं है। पहली प्राथमिकता तो ये होगी कि दूसरे एम्स की ज़रूरत कहा है, तो पहला विकल्प बस्तर और दूसरा सरगुजा आया था। छत्तीसगढ़ एम्स को लेकर अभी फ़िलहाल भारत सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। दूसरे एम्स को बिलासपुर में स्थापित करने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
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जशपुर (शोर सन्देश ) नया रायपुर के श्री सत्य साई संजीवनी हार्ट हॉस्पिटल में जिले के आरबीएसके टीम का 3 दिनों का इंटरएक्टिव प्रशिक्षण राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम आरबीएस भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है जिसका उद्देश्य बच्चों को व्यापक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना है। छत्तीसगढ़ में, आरबीएस कार्यक्रम को चिरायु कार्यक्रम कहा जाता है। इस कार्यक्रम के तहत, आंगनवाडियों और सरकारी स्कूलों में सभी बच्चों की जांच मोबाइल स्वास्थ्य टीमों द्वारा आयोजित की जाती है, जिसमें एक पुरुष एमओ, एक महिला एमओ, एक एएनएम, एक फार्मासिस्ट और एक प्रयोगशाला तकनीशियन शामिल हैं। जशपुर जिले के कलेक्टर डॉ रवि मित्तल ने जिले में चिरायु कार्यक्रम की समीक्षा की, जिसमें आरबीएसके कार्यान्वयन में कई कमियों को नोट किया गया था। जिला प्रशासन के अनुरोध के अनुसार, यूनिसेफ छत्तीसगढ़ कार्यालय ने एक तकनीकी भागीदार के रूप में सत्य साई अस्पताल को शामिल किया । जनवरी 2023 में 8 में से 6 टीमों का बेसलाइन मूल्यांकन किया गया था। इसके बाद, प्रत्येक 80 कर्मचारियों के 2 बैचों में टीमों का प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। डॉ. श्रुति प्रभु, प्रमुख, पब्लिक हेल्थ ने आरबीएस बेसलाइन मूल्यांकन और प्रशिक्षण कार्यक्रम का नेतृत्व किया। 3 दिनों में, प्रशिक्षण सत्र और डेमन्स्ट्रैशन सभी प्रमुख विषयों को कवर करते हुए आयोजित किए गए थे। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल के साथ आरबीएस टीम के सदस्यों को सुसज्जित करना था । डॉ. श्रुति प्रभु ने एंट्रोपोमेट्री और ग्रोथ चार्ट, ग्रुप सी के रोगों और किशोर स्वास्थ्य के बारे में चर्चा की। डॉ. पायल अरोड़ा ने आनुवांशिकी रोग, न्युरल ट्यूब दोष और समूह ए, बी और डी के रोगो को विस्तार से समझाया । डॉ.एम.एस. रवींद्र, सलाहकार बाल चिकित्सा कार्डियोलॉजिस्ट ने जन्मजात हृदय रोगों और मामलों के प्रदर्शन के बारे में बताया। डॉ. दीपशिखा अग्रवाल, निदेशक एमजीएम अस्पताल बाल चिकित्सा आंखों की स्थिति पर विस्तृत। डॉ. निखिल शुक्ला ने प्रतिभागियों को पब्लिक हेल्थ विभाग और इसकी विभिन्न गतिविधियों के बारे में सूचित किया। डॉ. मयंक चंद्रकर ने बच्चों में दंत रोगों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में इंटरैक्टिव सत्र, समूह चर्चा और व्यावहारिक प्रदर्शन शामिल थे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रतिभागी विषय वस्तु की गहन समझ हासिल करें। विलास भोस्कर, एमडी, एनएचएम और डॉ. भगत, डीडी, बाल स्वास्थ्य समापन के लिए मुख्य अतिथि थे। स्टेट आरबीएसके टीम के सदस्य डॉ. संगीता पाटनवार और अभिषेक ने चिरायु डेटा रिपोर्टिंग पर प्रशिक्षण प्रदान किया। आरबीएस प्रशिक्षण कार्यक्रम योजना के तहत बच्चों को प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि देश में प्रत्येक बच्चा सर्वोत्तम संभव स्वास्थ्य सेवा सेवाएं प्राप्त करता है और यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सभी प्रतिभागियों को अध्ययन सामग्री और जलपान सहित सभी आवश्यक संसाधनों के साथ प्रदान किया गया था। अंतिम वैलेडिक्टरी समारोह में श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल, नया रायपुर में सौभाग्यम में हुआ। इस कार्यक्रम के सफलतापूर्वक आयोजन में नर्सिंग ऑफिसर किरण वर्मा, प्रीती साहू, कॉउंसलर फरज़ाना, ललिता, नितेश, सुशीला का उल्लेखनीय योगदान रहा। प्रत्येक प्रतिभागियों ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि से प्रमाण पत्र प्राप्त किया। प्रतिभागियों को इस शानदार इंटरैक्टिव प्रशिक्षण से लाभ मिला। सरकार ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश में बाल स्वास्थ्य सेवाओं के समग्र सुधार हेतु भाग लेने के लिए सभी पात्र आरबीएस टीम के सदस्यों को आमंत्रित किया। देखा जाय तो श्री सत्य साई संजीवनी हॉस्पिटल और छत्तीसगढ़ हेल्थ डिपार्टमेंट की यह पहल देश में सभी बच्चों को स्वस्थ रखने की ओर पहला कदम है। अभी मीलों आगे जाना है।

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रायपुर (शोर संदेश)। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कोविड की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डाॅ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय में आज कोरोना प्रबंधन (कोविड मैनेजमेंट) प्रोटोकॉल का मॉक ड्रिल किया गया। शासन से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुरूप कोरोना प्रबंधन मॉक ड्रिल के दौरान एक प्रतीकात्मक मरीज के माध्यम से चिकित्सकीय, नर्सिंग, पैरामेडिकल स्टाफ के रैपिड रिस्पांस(त्वरित प्रतिक्रिया) को परखा गया। चिकित्सालय के विशेषीकृत कोरोना वार्ड में मॉक ड्रिल के दौरान इस बात की सुनिश्चितता की गई कि यदि भविष्य में कोरोना का कोई संभावित प्रकरण आता है तो किस तत्परता से उसका उपचार किया जाएगा। इस दौरान सभी तरह के जीवन रक्षक उपकरणों का प्रतीकात्मक रूप से उपयोग करते हुए उनकी क्रियाशीलता की जांच की गई। स्वास्थ्य मंत्री श्री टी. एस. सिंहदेव ने ऑनलाइन जुड़कर माॅकड्रिल को देखा और तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान चिकित्सा महाविद्यालय की अधिष्ठाता डाॅ. तृप्ति नागरिया, अम्बेडकर अस्पताल अधीक्षक डाॅ. एस. बी. एस. नेताम, अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डाॅ. विनित जैन, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ एवं कोरोना के आईसीयू इंचार्ज डाॅ. ओ. पी. सुंदरानी, रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डाॅ. आर. के. पंडा, नेत्र रोग विभाग से डाॅ. संतोष सिंह पटेल, जनरल सर्जरी से डाॅ. संदीप चंद्राकर समेत चिकित्सालय के नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ एवं तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहे। अस्पताल अधीक्षक डाॅ. एस. बी. एस. नेताम ने कोरोना की तैयारियों के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि कोरोना के संभावित प्रकरणों से निपटने के लिए अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था है। वर्तमान में चिकित्सालय में मेडिकल ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता है। ऑक्सीजन की उपलब्धता के लिए दो पीएसए ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट, एक क्रायोजेनिक टैंक के साथ ही साथ मैनिफोल्ड सिस्टम है। वर्तमान में 20 बेड का कोरोना आईसीयू तथा 12 बेड का ट्राइएज वार्ड तैयार है। इसके अलावा ऑक्सीजन युक्त 60 बेड की व्यवस्था है। जरूरत पड़ने पर बेड को बढ़ाया जाएगा। दवाईयों, पीपीई किट तथा जांच किट की उपलब्धता है। फिलहाल चिकित्सालय में कोरोना के कोई केस नहीं है। शासन के निर्देशानुसार कोविड से निपटने के लिए चिकित्सालय स्तर पर पूरी तैयारियां कर ली गई हैं।


दन्तेवाड़ा (शोर संदेश)। जिले के स्वास्थ्य विभाग से लगातार अंदरूनी ग्राम में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है। पूर्व में भी विभाग से पहुंचविहीन ग्राम पंचायतों का चिन्हांकन कर उन पंचायतों में स्वास्थ्य विभाग से हेल्थ कैंप के माध्यम से स्वास्थ्य शिविर और विभाग की योजनाओं अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाया जा रहा है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग कुआकोंडा विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत गुमियापाल के आश्रित ग्राम बेंगपाल में आज स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। उक्त शिविर में विभाग 22 चिकित्सक एवं पैरा मेडिकल स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई थी। रास्ता कठिन होने के कारण स्वास्थ्य कर्मियों को लगभग 10 किलोमीटर पैदल और पहाडि़यों का रास्ता तय कर बेंगपाल पहुंचना पड़ा। विभाग ने लगातार ऐसे ग्रामों में पहुंचकर स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाई जा रही है। 380 आबादी वाले इस गांव में स्वास्थ्य विभाग लगभग 108 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। जिसमें सभी लोगों का मलेरिया की भी जांच की गई लक्षण वाले मरीजों की लैब जांच के साथ ही निशुल्क दवाइयों का वितरण, मच्छरदानी का वितरण और स्वास्थ्य शिक्षा भी दिया गया। दो कुपोषित बच्चों का चिन्हांकन कर एनआरसी भेजने के लिए परिजनों को जानकारी दी गई। इतनी बड़ी संख्या में स्वास्थ्य दल को देखकर गांव वालों के चेहरों में खुशी नजर आई । आने वाले दिनों में विभाग से ऐसे ही और स्वास्थ्य के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाई जाएगी। उप स्वास्थ्य दल में उक्त स्वास्थ्य दल में आरएमए नीरज साहू, डॉक्टर रवि कोरी, खंड विस्तार प्रशिक्षण अधिकारी मालती नेताम, आर एच ओ राजेश बेहरा,समीम रजा, नैना कश्यप, संजय मरावी, ममता ठाकुर, महेश कुमार, मीना वेद, मनीषा देहरी, सुरेखा मंडावी, शिवेंद्र नाग,फार्मासिस्ट महेश पोर्ते,संतोष शामिल थे।

महासमुन्द (शोर संदेश)। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर आज जिला स्तरीय स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन जिला मुख्यालय महासमुंद के केन्द्रीय विद्यालय में नगर पालिका अध्यक्ष राशि महिलांग ने बच्चों को कृमिनाशक दवा एलबेन्डाजोल की गोली खिलाकर किया। इस दौरान नगर पालिका अध्यक्ष ने कहा कि कृमि के कारण थकान, खून की कमी, पढ़ाई में मन नहीं लगता इसीलिए सभी बच्चों को कृमिनाशक टेबलेट खाना चाहिए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.आर. बंजारे ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत जिले के समस्त ऑगनबाड़ी केन्द्रों एवं शासकीय विद्यालयों, शासकीय अनुदान प्राप्त शालाओं, केन्द्रीय विद्यालयो, नवोदय विद्यालय, मदरसों, निजी स्कूलोें, अनुदान प्राप्त निजी स्कूलों, महाविद्यालयों, तकनीकी शिक्षा संस्थानों के माध्यम से एक से 19 वर्षीय बच्चों, किशोर एवं किशोरियों को कृमिनाशक दवा की गोली का सेवन कराया गया है तथा छूटे हुए बच्चों के लिए मॉप-अप दिवस 14 सितम्बर को आयोजित किया जाएगा। वर्ष में 2 बार एलबेन्डाजोल की गोली का सेवन कराया जाता है। 1 से 2 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों को आधी गोली चम्मच के द्वारा पानी में चुरा करके तथा 2 से 19 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों को 1 पूरी गोली चबाकर पानी के साथ दी जाएगी। शाला त्यागी 6 से 19 वर्षीय बालक-बालिकाओं को निकटतम चिन्हॉकित ऑगनबाड़ी केन्द्रों में एलबेन्डाजोल की गोली सेवन करायी जाएगी। एलबेन्डाजोल की गोली बच्चों और बड़ों के लिए सुरक्षित है। उन्होने बच्चों से कहा कि, अपने शरीर को स्वच्छ रखे साथ ही शौच जाने के पहले एवं बाद में साबुन या हैण्डवास से हाथ जरूर धोएं। केन्द्रीय विद्यालय के पूर्व प्राचार्य श्री अशोक चन्द्राकर ने कहा कि बच्चों को घर का बना हुआ स्वच्छ भोजन करना चाहिए। सब्जियों को अच्छी तरह धो कर ही उपयोग में लाना चाहिए। बच्चों को बाहर का बना हुआ फास्ट फूड एवं जंक फूड नहीं खाना चाहिए। इस अवसर पर जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. अरविंद गुप्ता, जिला कार्यक्रम प्रबंधक रोहित कुमार वर्मा, प्राचार्य केन्द्रीय विद्यालय एस.के. सिंग, आर.एम.एन.सी.एच.ए. सलाहकार डॉ. मुकुन्द राव, जिला समन्वयक नरेन्द्र चन्द्रकार सहित शिक्षक गण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

कांकेर (शोर संदेश)। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर आज जिले के आंगनबाड़ी केन्द्रों, स्कूलों व महाविद्यालयों में 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों व किशोर-किशोरियों को कृमि नाशक दवाई एलबेन्डाजोल की गोली खिलाई गई। संसदीय सचिव व कांकेर विधानसभा क्षेत्र के विधायक शिशुपाल शोरी ने आज स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय नरहरदेव कांकेर में विद्यार्थियों को एलबेन्डाजोल की गोली खिलाकर इस अभियान की शुरूआत किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कृमि से बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास रूक जाता है तथा स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, जिससे बचाव के लिए सरकार की ओर से 1 से 19 वर्ष के बच्चों को कृमि नाशक दवाई एलबेन्डाजोल की गोली खिलाई जा रही है। बच्चों को अच्छा पढ़ाई करने के लिए समझाईश देते हुए उन्होंने कहा कि स्वस्थ्य शरीर में स्वस्थ्य मस्तिष्क का विकास होता है, आप सब स्वस्थ्य रहकर अच्छा पढ़ाई करें और अच्छा नागरिक बनकर जिले के नाम रोशन करें। मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जे.एल. उईके ने बताया कि जिले में 1 लाख 82 हजार 669 बच्चों को कृमिनाशक दवाई एल्बेंडाजोल खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। आज जिले के सभी स्कूलों, आंगनबाड़ी केन्द्रों व महाविद्यालयों मेंं लक्षित वर्ग के बच्चों को कृमि नाषक दवाई खिलाई जा रही है तथा जो बच्चे उक्त दवाई खाने से छूट जाएंगे उन्हें मापअप दिवस 14 सितम्बर को एलबेन्डाजोल की गोली खिलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि शासन के निर्देषानुसार प्रत्येक छ: माह में अभियान चलाकर बच्चों को एलबेन्डाजोल की गोली खिलाई जाती है, ताकि वे कृमि मुक्त रहें। उन्होंने बताया कि 1 से 2 वर्ष के बच्चों को आधी गोली और 02 से 19 वर्ष के बच्चों को एक गोली का खुराक दिया जाता है। कार्यक्रम में जनपद पंचायत कांकेर के उपाध्यक्ष रोमनाथ जैन, नगरपालिका परिषद कांकेर के पूर्व अध्यक्ष जितेन्द्र ठाकुर, गफ्फार मेमन, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता एस.एल. मरकाम तथा संस्था के प्राचार्य रचना वास्तव व शिक्षक-शिक्षिकाएं व स्कूली बच्चे उपस्थित थे।

जगदलपुर (शोर संदेश )।कृमि संक्रमण से बचाव के लिए 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों के लिये आज कृमिमुक्ति दिवस के तहत कृमिनाशक दवा खिलाई जाएगी। इस दौरान बस्तर संभाग के 7 जिलों में सर्वाधिक बस्तर में 3.34 लाख, बच्चों को यह गोली खिलायी जाएगी जबकि कांकेर में 2.93 लाख, कोंडागांव में 2.31 लाख, दंतेवाड़ा में 1.12 लाख, बीजापुर में 95,118, सुकमा में 92,721, वहीं नारायणपुर में 55,715 से अधिक बच्चों को इसका लाभ मिलेगा। इस प्रकार बस्तर सम्भाग में 12.15 लाख बच्चों को कृमि नाशक एल्बेंडाजोल की गोली खिलाये जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस सम्बंध में सीएमएचओ डॉ.आर.के.चतुर्वेदी ने बताया: "कृमिमुक्ति अभियान के तहत 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों और किशोर-किशोरियों को पेट के कीड़ों से बचाने की दवा आज खिलाई जाएगी। किसी कारणवश दवा खाने से छूटे हुए बच्चों और किशोर-किशोरियों को 14 सितम्बर के दिन मॉपअप चरण में दवा खिलाई जाएगी। बस्तर जिले में इस वर्ष 3.34 लाख बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों, एवं शासकीय विद्यालयों/ शासकीय अनुदान प्राप्त शालाओं / केंद्रीय विद्यालयों/ नवोदय विद्यालय/ मदरसों/ निजी स्कूलों/ अनुदान प्राप्त निजी स्कूलों/ महाविद्यालयों/ तकनीकी शिक्षा संस्थानों में कृमिनाशक दवा खिलाई जाएगी।“ आगे जानकारी देते हुए उन्होंने बताया: " कृमि संक्रमण के पनपने से बच्चे के शरीर में खून की कमी हो जाती है। वह हमेशा थकान महसूस करते हैं और उनका शारीरिक, मानसिक विकास भी बाधित होता है। साथ ही बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। इसलिये 1 से 19 वर्ष के बच्चों, किशोर-किशोरियों को कृमि से बचाव के लिए एल्बेंडाजॉल की गोली खिलाया जाना आवश्यक है। कार्यक्रम के दौरान कोविड 19 संबंधित दिशा निर्देशों का पालन किया जाएगा । 1 से 2 वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली (200 एमजी) चूर्ण बनाकर पानी के साथ, 2 से 3 वर्ष तक के बच्चों को 1 गोली पूरी तरह से चूर्ण बनाकर पानी के साथ तथा 3 वर्ष से 19 वर्ष तक के बच्चों को एक पूरी गोली (400 एमजी) चबाकर के पानी के साथ सेवन कराया जाएगा। एल्बेंडाजोल की गोली बच्चों और बड़ों के लिए सुरक्षित है। दवा खाने के उपरांत यदि कोई प्रतिकूल प्रभाव हो तो प्रबंधन के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं उप स्वास्थ्य केन्द्रों पर उपचार की व्यवस्था भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा रहेगी। कृमि मुक्ति दिवस पर बीमार बच्चों या पहले से कोई अन्य दवाई ले रहे बच्चों को एल्बेंडाजोल की गोली नहीं दी जाएगी।" कृमिमुक्ति कार्यक्रम के नोडल अधिकारी सी.आर.मैत्री ने बताया: "एल्बेंडाजोल की दवा कृमि से मुक्ति की क्षमता रखती है। इससे स्वास्थ्य और पोषण में सुधार होता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है और एनीमिया नियंत्रण में रहता है। इसके साथ ही सीखने की क्षमता और कक्षा में उपस्थिति में सुधार होता है। कृमि संक्रमण चक्र की रोकथाम के लिए यह गोली बच्चों को देना आवश्यक है। कृमि से बचाव के लिये दैनिक जीवन में कुछ नियमों का पालन बहुत जरूरी है। नाखून साफ व छोटे रखें, हमेशा साफ पानी पिएं, आस-पास सफाई रखें, खाने को हमेशा ढककर रखें, साफ पानी से फल व सब्जियां धोएं, खुले में शौच न करें, हमेशा शौचालय का प्रयोग करें, हाथ साबुन और साफ पानी से धोएं विशेषकर खाने से पहले और शौच जाने के बाद।"