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*कबीरधाम बना राज्य का पहला मोतियाबिंद दृष्टिहीनता मुक्त जिला*

26-Aug-2022

रायगढ़ (शोर संदेश) कबीरधाम राज्य का पहला मोतियाबिंद दृष्टिहीनता मुक्त जिला बन गया है। मोतियाबिंद दृष्टिहीनता मुक्त छत्तीसगढ़ कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के अन्य जिलों में भी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से मरीजों का सर्वे कर मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए ऑन स्पॉट मरीजों का पंजीयन कर यह ऑपरेशन किया जा रहा है। राज्य का पहला मोतियाबिंद दृष्टिहीनता मुक्त जिले के बारे में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कबीरधाम ने राज्य नोडल अधिकारी अंधत्व निवारण को पत्र भेजकर मोतियाबिंद दृष्टिहीनता मुक्त जिला होने की जानकारी दी है, जिसमें 23 अगस्त तक की स्थिति में जिले में मोतियाबिंद से दृष्टिहीन कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं होना बताया गया है। साथ ही सर्वे कर चिन्हांकित दोनों आंखों के दृष्टिहीन 1,128 मरीजों एवं एक आंख में मोतिाबिंद से दृष्टिहीन 2,124 मरीजों का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किए जाने संबंधी जानकारी भी साझा की गई है। इस संबंध में संचालक महामारी नियंत्रण एवं राज्य कार्यक्रम अधिकारी अंधत्व निवारण, डॉ. सुभाष मिश्रा ने बताया “योजना के तहत मोतियाबिंद से दृष्टिहीन हुए मरीजों का सर्वे राज्य के सभी जिलों में किया जा रहा है। प्रतिमाह सर्वे रिपोर्ट राज्य को सौंपकर मोतियाबिंद दृष्टिहीन लोगों और उनके ऑपरेशन की अद्धतन जानकारी दी जाती है, ताकि नया दृष्टिहीन मरीज ना मिले और सभी को आंखों की रोशनी मिल सके। इसी क्रम में कबीरधाम जिला राज्य का पहला  मोतियाबिंद दृष्टिहीनता मुक्त जिला बन गया हैI उन्होंने आगे बताया कि भी जिले चिन्हांकित मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन अपनी सुविधा के अनुसार कर रहे हैं।  इसी कड़ी में जुलाई 2022 तक दुर्ग में 90, कोरिया में 300, बीजापुर में 298, बलरामपुर में 280 तथा बेमेतरा में 227 चिन्हांकित पंजीकृत मरीजों की सूची भेजी है, जिनका सितंबर तक मोतियाबिंद ऑपरेशन किया जाएगा। वहीं बिलासपुर में 627 तथा  अंबिकापुर सरगुजा में 2,387 में मोतियाबिंद दृष्टिहीन अभी तक चिन्हांकित हुए हैं लेकिन वहां सर्वे कार्य अभी जारी है। जल्द ही चयनित मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन भी किया जाएगा। चिन्हांकित मरीजों में एक आंख में मोतियाबिंद और दोनों आंख में मोतियाबिंद के मरीज शामिल हैं। दृष्टिहीनता की स्थिति निर्मित ना हो इसलिए सर्वे - मोतियाबिंद दृष्टिहीनता मिटाने के लिए सभी जिलों में सर्वे चल रहा है। मितानिन, स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं नेत्र नेत्र सहायक अधिकारियों को अधिकृत किया गया है, ताकि सर्वे कर स्पॉट में ही सर्वेक्षित मरीजों का रजिस्ट्रेशन कर मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जा सके। सभी जिले सर्वेक्षित चिन्हांकित मरीजों का अपनी सुविधानुसार माह तय कर मोतियाबिंद ऑपरेशन कर रहे हैं। हालांकि अभी जिनको दोनों आंखों में मोतियाबिंद है, उनको प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही एक आंख में मोतियाबिंद वाले मरीजों का भी सर्वे कर ऑपरेशन किया जा रहा है जिससे की दृष्टिहीनता की स्थिति निर्मित ना हो सके।

 

 

 

*एक माह में कोरोना से मौतें 35 फीसदी बढ़ीं, डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने चेताया*

18-Aug-2022

नई दिल्ली (शोर संदेश)। कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है। पिछले चार सप्ताहों में दुनियाभर में इस महामारी से मौतों की संख्या में 35 फीसदी की चिंताजनक बढ़ोतरी हुई है। इसे देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख डॉक्टर टेड्रोस घेब्रेयसस ने दुनियाभर के लोगों के लिए वीडियो संदेश जारी कर फिर चेताया है। यह लगातार तीसरा साल है, जब कोविड-19 वायरस समूची दुनिया के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। कोरोना महामारी को लेकर महामारी विशेषज्ञ व नेता बार-बार कह रहे हैं कि हमें कोरोना के साथ जीना सीखना होगा। इस पर घेब्रेयसस ने कहा कि हम यह नहीं मान लें कि बीमारी खत्म हो गई है। हमें इससे खुद के और दूसरों के बचाव के लिए साधनों से हमेशा लैस रहना होगा। घेब्रेयसस ने अपने ताजा संदेश में कहा, हम सब कोरोना वायरस व महामारी से थक व उब गए हैं, लेकिन यह वायरस अभी नहीं थका है। कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट अब भी प्रमुख वैरिएंट  बना हुआ है। पिछले एक महीने में, BA.5 सब स्ट्रेन 90 फीसदी से अधिक नमूनों में मिला है। अपने वीडियो संदेश में डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा- 'एक चार सप्ताह में 15,000 लोगों ने कोविड से जान गंवाई। यह संख्या बर्दाश्त के बाहर है, क्योंकि हमारे पास संक्रमण को रोकने और लोगों की जान बचाने के लिए सारे संसाधन हैं। हम में से कोई भी असहाय नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति टीका लगवाए और जरूरत पड़ने पर बूस्टर (खुराक) लें। मास्क पहनें और सुरक्षित शारीरिक दूरी बनाए रखें।' उन्होंने निराश होकर यह भी कहा कि अस्पतालों की बढ़ती संख्या के बावजूद हम टीकों की असमान पहुंच के साथ नहीं रह सकते हैं। कोरोना महामारी से अब तक दुनियाभर में 59 करोड़ से अधिक संक्रमित हो चुके हैं। इस दौरान 64 लाख से अधिक मौतें हुई हैं। अमेरिका में सबसे ज्यादा 9.3 करोड़ से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं। भारत में लगभग 4.4 करोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं।


*टीबी न फैले, इसलिए शुरू किया टीबी प्रीवेंट ट्रीटमेंट*

05-Jul-2022

कवर्धा (शोर संदेश)। क्षय (टीबी) रोग पर नियंत्रण के लिए कबीरधाम जिले में नई शुरुआत की गई है। इसके अंतर्गत टीबी रोग से ग्रसित लोगों को दवा देने के साथ ही टीबी प्रीवेंट ट्रीटमेंट (टीपीटी) भी दिया जा रहा है ताकि खासकर फेफड़े वाली टीबी जैसी अन्य संक्रामक टीबी को फैलने से रोका जा सके। इस शुरुआत के साथ कबीरधाम छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा जिला बन गया है, जहां टीपीटी दिया जाना शुरू किया गया है। जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ. बीएल राज ने बतायाः टीबी रोग पर नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों के अंतर्गत टीबी ग्रस्त लोगों के उपचार के लिए उन्हें नियमित रूप से दवाई तो दी ही जा रही है। साथ ही अब इंफेक्शन मोड पर भी दवा शुरू की गई है और टीबी प्रीवेंट ट्रीटमेंट (टीपीटी) दिया जा रहा है, ताकि संक्रमण भविष्य में बीमारी का रूप न ले पाए। उन्होंने आगे बतायाः किसी न किसी के शरीर में बैक्टीरिया हो सकता है इसलिए टीपीटी उन घरों में विशेष रूप से दी जा रही है, जहां टीबी संचार का खतरा है-जैसे-फेफड़े वाली टीबी के मरीज के घर। इस पहल से टीबी रोग पर नियंत्रण करने में काफी हद तक सफलता मिल सकती है। टीबी रोग पर नियंत्रण के उद्देश्य से जिले के शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र में सघन सर्वे अभियान भी चलाया जा रहा है जिसके अंतर्गत टीबी के संभावित मरीज को चिन्हित करने के लिए सभी आयु वर्ग के लोगों की जांच की जा रही है। रोग की पुष्टि होने की स्थिति में नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र में पीड़ित का उपचार शुरू कराया जाएगा। जिला कार्यक्रम समन्वयक आनंद दास महंत ने बतायाः छत्तीसगढ़ को वर्ष 2023 तक टीबी मुक्त बनाने के उद्देश्य से किए जा रहे प्रयासों की कड़ी में कबीरधाम जिले में लगातार जन-जागरुकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसे प्राथमिकता में रखकर जिले की जेल, खदान, आश्रय गृह व अन्य संवेदनशील जगहों के साथ ही गांव तथा शहर की विशेषकर मलिन बस्तियों में टीबी रोगी के चिन्हांकन के लिए 25 मई से सघन सर्वे किया जा रहा है, जो कि 10 जुलाई तक चलेगा। इसी कड़ी में स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उन घरों के लोगों को टीबी प्रीवेंट ट्रीटमेंट (टीपीटी) दिया जा रहा हैए जहां टीबी के संचार का खतरा है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुजॉय मुखर्जी ने बतायाः टीबी रोग पर नियंत्रण करने हेतु जिले में पहली बार टीबी प्रीवेंट ट्रीटमेंट शुरू किया गया है। टीबी प्रीवेंट ट्रीटमेंट के लिए राज्य के 12 जिलों का चयन किया गया है जिनमें सबसे पहले कबीरधाम जिले में इसकी शुरुआत की गई है। यह सेवा चिन्हित टीबी ग्रस्त लोगों के घरों में दी जा रही है, ताकि लक्षण महसूस होने पर शुरुआत में ही टीबी रोग को फैलने से रोका जा सके।


*बच्चों में गर्मी से होने वाली बीमारियों से रहे सावधान*

26-May-2022

रायगढ़ (शोर संदेश) जिले का तापमान बीते दो सप्ताह से लगातार बदल रहा है। हालांकि गर्मी में कमी नहीं आई है पर बीच-बीच मे हुई बारिश ने उमस को बढ़ा दिया है। बुधवार से नौतपे की भी शुरुआत हो गई है। यानी मौसम में अभी लगातार बदलाव होंगे। इसी के कारण मौसम संबंधित बीमारियों के बढ़ने की संभावना है। छोटे बच्चों में उल्टी-दस्त और बुखार की शिकायत ज्यादा आ रही है। जिला चिकित्सालय के बाल रोग विभाग में ऐसे बच्चों की तादाद ओपीडी में बढ़ी है। विदित हो कि बच्चों को बाहर का खाना बेहद पसंद होता है। बाहर के खाने से होने वाली बीमारियां गर्मियों के मौसम में आम हो जाती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि गर्मी में खाना आसानी से ख़राब हो जाता है। संक्रमित और अस्वच्छ खाना खाने से दस्त और उल्टियां शुरू हो सकती है, जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। यहां तक कि घर पर बने खाने को भी पुराना करके न खाने की सलाह डॉक्टर देते हैं। इसी तरह बच्चों को खुले मैदान या बाहर खेलना पसंद होता है। जिससे गर्म मौसम में उन्हें लू लग सकती है। हाइपरथर्मिया एक ऐसी स्थिति है जहां शरीर का तापमान असामान्य रूप से ऊंचा हो जाता है, यह संकेत देता है कि यह पर्यावरण से आने वाली गर्मी को नियंत्रित नहीं कर सकता है। गर्मी से थकावट और हीट स्ट्रोक चिकित्सा आपात स्थिति हैं जो हाइपरथर्मिया के अंतर्गत आती हैं। हाइपरथर्मिया से पीड़ित बच्चा सिर दर्द, बेहोशी, चक्कर आना, ज़्यादा पसीना आना, अकड़न जैसे लक्षणों का अनुभव कर सकता है।


*फूड पॉइजनिंग से 18 साल की छात्रा की मौत, 15 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती*

02-May-2022

कासरगोड (शोर संदेश)। केरल के कासरगोड जिले के एक होटल में खराब खाना खाने से एक 18 साल की लड़की  की मौत हो गई है जबकि 15 से अधिक लोग गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती कराए गए हैं। सभी एक लोकल होटल से लोकप्रिय अरबी डिश शावरमा खाया था। पहली दृष्टि में मामला फूड प्वाइजनिंग का है। फिलहाल, अस्पताल में भर्ती अन्य लोगों की हालत स्थिर है। वहीं घटना के बाद जिला प्रशासन हाई अलर्ट पर है। 

एक लड़की की गई जान 

डॉक्टरों ने बताया कि कान्हांगड के जिला अस्पताल में इलाज के दौरान एक 18 साल की लड़की की मौत हो गई। जिला चिकित्सा अधिकारी ए वी रामदास ने कहा कि अस्पताल में भर्ती सभी की हालत स्थिर है और देर से अस्पताल लाए जाने के कारण डॉक्टर युवती की जान नहीं बचा सके। उन्होंने कहा कि अधिकांश संक्रमितों को तीन अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। ये सभी लोग एक होटल से स्पेशल डिश शवारमा खाए थे। सबको मेडिकल निगरानी में रखा गया है। वहीं बड़े पैमाने पर फूड प्वाइंजनिंग  के मामले सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। लोकल होटल जहां इन लोगों ने शावरमा खाया था, उस होटल को बंद करा दिया गया है। जांच के दौरान यह पाया गया कि कूल बार-कम-बेकरी बिना फूड सेफ्टी लाइसेंस के चल रही थी।


*अगर आपकी आंखों में भी आता है लगातार पानी ? तो है बड़ी गड़बड़ी का संकेत…*

29-Apr-2022

नई दिल्ली (शोर संदेश)। आजकल लोग अपनी सेहत को लेकर बहुत ही ज्यादा ही सावधान हो गए हैं और होना भी चाहिए। क्योंकि बदलते समय और मौसम की वजह से आपकी किसी भी वक्त किसी भी तरह की परेशानी हो सकती है। कई लोगों की आंखों (Eyes)में लगातार पानी आता रहता है, जिसकी वजह से उन्हें अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि आप भी आंखों में से पानी आने की समस्या को इग्नोर कर रहे है। तो ये आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है.यहां पर हम आपको बताएंगे आंख में पानी या आंसू (Tears) आने के क्या है कारण।

अधिकांश मामलों में आंखों से पानी आना बिना इलाज के बंद हो जाता है, लेकिन कभी-कभी ऐसी स्थिति भी होती हैं जिनके कारण लगातार आंखों से पानी आता रहता है। यह काफी कॉमन समस्या है। अगर आपके आंखों से लंबे समय से पानी आ रहा है और आंखें लाल हो रही हैं तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए। लगातार आंखों में आंसू आने के कुछ कारण हो सकते हैं। तो आइए उन कारणों के बारे में भी जान लीजिए जो आंखों में अधिक पानी या आंसू आने का कारण बनते है।

सूखी आंखें (Dry Eyes) :
अगर किसी की आंख में पर्याप्त आंसू नहीं बन रहे हैं तो आंख जल्दी सूख जाती है। ऐसे में आंख में पानी, तेल का सही बैलेंस नहीं बन पाता। हवा से लेकर मेडिकल कंडीशन तक इस स्थिति का कारण हो सकता है। इसलिए कभी-कभी आंख अचानक से अधिक पानी निकालकर आंख सूखने का संकेत देती है।

पिंकआई (Pinkeye/Conjunctivitis) :
बच्चों और वयस्कों दोनों की आंखों में पानी आने का यह एक सामान्य कारण है। इस स्थिति में आंख गुलाबी या लाल हो सकती हैं और उनमें खुजली-चुभन भी महसूस हो सकती है। बैक्टीरिया या वायरस से संक्रमण पिंकआई का सबसे अहम कारण है। वायरल संक्रमण के लिए उपचार की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन इसके लिए एंटीबायोटिक आई ड्रॉप की आवश्यकता हो सकती है।

एलर्जी (Allergie) :
पानी भरी हुई, खुजली वाली आंखें अक्सर खांसी, बहती नाक और अन्य एलर्जी के लक्षणों के साथ आती हैं, लेकिन किसी कारण से आंखों की एलर्जी होना भी काफी आम बात है। इसलिए आंखों की साफ-सफाई का खास ध्यान रखें।

ब्लॉक आंसू वाहिनी (Blocked Tear Duct) :
आंसू आंख के ऊपर की आंसू ग्रंथियों से बाहर निकलते हैं। ग्रंथियों से निकलने के बाद आंसू पुतली की सतह पर फैलते हैं और कोने में बनी नलिकाओं में चले जाते हैं। अगर ये नलिकाएं बंद हो जाती हैं तो आंसू बनते तो हैं लेकिन बाहर नहीं निकल पाते। बहुत सी चीजें समस्या का कारण बन सकती हैं जैसे संक्रमण, चोट, यहां तक कि बुढ़ापा भी।

पलकों की समस्या (Blocked Tear Duct) :
हमारी पलकें विंडशील्ड वाइपर की तरह काम करती हैं। जब हम पलक झपकाते हैं तो वे आंखों में आंसू फैलाती हैं और जो अतिरिक्त नमी को बहा देती हैं, लेकिन कभी-कभी वे ठीक से काम नहीं कर पातीं। पलकें अगर अंदर की तरफ झुक जाती हैं तो उनके कारण आंंख की पुतली में रगड़ आने लगती है, जिसे एन्ट्रोपियन कहा जाता है। इसके कारण आंखों से पानी आने लगता है। यदि आपकी पलकें अंदर की ओर झुकी हुई हैं, तो इसके लिए सर्जरी की जरूरत हो सकती है।

आंख पर खरोंच :
गंदगी, धूल और कॉन्टैक्ट लेंस से पुतली और कॉर्निया में खरोंच लग सकती है। यदि ऐसा होता है तो आंखों में से पानी आने लगता है क्योंकि यह काफी संवेदनशील हिस्सा होता है। हालांकि, ये खरोंच आमतौर पर 1 या 2 दिनों में ठीक हो जाती है। अगर आपको कॉर्नियल खरोंच हो तो डॉक्टर को दिखना महत्वपूर्ण हो जाता है।

आईलैशेस की समस्या (Eyelash Problems) :
जिस तरह भौहों के बाल गलत दिशा में बढ़ते हैं, उसी तरह कभी-कभी आईलैशेस भी गलत दिशा में बढ़ सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो वे आंखों में रगड़ का कारण बनते हैं और उनसे आंसू आने लगते हैं।

ब्लेफेराइटिस (Blepharitis) :
यह स्थिति आपकी पलकों में सूजन का कारण बनती है. इस स्थिति में आँखों में चुभन होती है, पानी आता है, आंखें लाल होती हैं, पपड़ी बनने लगती है। इसका कारण एलर्जी और संक्रमण हो सकता है।

अन्य कारण (Other Benefits) :
बेल्स पाल्सी, सोजोग्रेन सिंड्रोम, क्रोनिक साइनस इन्फेक्शन, थायरॉइड की समस्या और रुमेटीइड आर्थराइटिस जैसी कई मेडिकल कंडीशन के कारण आंख में से पानी आ सकता है। अगर आपकी आंखों में से बार-बार पानी आता है तो डॉक्टर से मिलें 


 


*खून का निकलना बंद न हो तो यह हीमोफीलिया का हो सकता है लक्षण*

16-Apr-2022

रायगढ़ (शोर संदेश) शरीर पर चोट लगने की स्थिति में खून का निकलना बंद ना हो रहा हो तो यह हीमोफीलिया रोग का लक्षण भी हो सकता है। यह लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए क्योंकि हीमोफीलिया के दौरान होने वाला आंतरिक रक्तस्राव अंगों और ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकता है और जीवन को खतरे में डाल सकता है।

 
इस आशय का प्रचार-प्रसार करने के लिए जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। हीमोफीलिया रोग के विषय में जनजागरुकता के उद्देश्य से हर साल 17 अप्रैल को विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर विभिन्न माध्यमों से यह प्रचारित करने का प्रयास किया जाता है कि हीमोफिलिया या पैतृक रक्तस्राव एक आनुवांशिक (माता-पिता से बच्चों में होने वाली) रोग है जो आमतौर पर पुरुष को होती है और महिला द्वारा फैलती है। हीमोफीलिया एक अनुवांशिक स्थिति है। यह स्थिति इलाज योग्य नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों को कम करने और भविष्य की स्वास्थ्य जटिलताओं को रोकने के लिए इसका इलाज किया जा सकता है।
 
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसएन केसरी ने बतायाः “हीमोफीलिया दिवस के अवसर पर इस रोग के लक्षण, कारण की जानकारी देते हुए इससे बचाव संबंधी उपायों का प्रचार-प्रसार किया जाता है ताकि पीड़ित को इसके खतरे तथा सावधानीपूर्वक बचाव के प्रति सचेत किया जा सके। हीमोफीलिया रोग होने का खतरा नवजात शिशुओं पर भी रहता है। यह गर्भवती महिला से शिशु में फैलता है।”
 
इस तरह प्रभावित करता है हीमोफीलिया :
हीमोफीलिया एक ऐसी दुर्लभ स्थिति है, जिसमें रक्त का थक्का ठीक से नहीं जमता है। हीमोफीलिया पीड़ित लोगों में कुछ निश्चित प्रोटीन की कमी होती है जिसे क्लॉटिंग कारक कहा जाता है। ऐसे 13 प्रकार के क्लॉटिंग (रक्त स्कंदन) कारक हैं, जो चोट वाले स्थान पर खून के बहाव को रोकने के लिए प्लेटलेट्स के साथ काम करते हैं। प्लेटलेट छोटे रक्त कोशिकाएं हैं जो अस्थि-मज्जा में बनती हैं। स्कंदन कारक का अत्यधिक नुकसान रक्तस्राव को जन्म देता है। एक सहज या आंतरिक रक्तस्राव मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंग के भीतर होने पर जीवन के लिए घातक हो सकता है।
 
हीमोफीलिया के होते हैं लक्षण :
हीमोफीलिया के लक्षण अलग-अलग तरह से प्रकट होते हैं। यदि शरीर में क्लॉटिंग-कारक के स्तर में बहुत कम मात्रा में कमी हो तो शरीर में शल्य चिकित्सा या आघात (गंभीर चोट) के बाद ही खून बह सकता है और यदि क्लॉटिंग-कारक के स्तर में कमी गंभीर होती है तो सहज रूप में रक्तस्राव का अनुभव हो सकता है। रक्तस्राव बाहरी या आंतरिक रूप में भी हो सकता है।
 
सहज रक्तस्राव के लक्षण :
-कट या चोटों से ज्यादा खून बहना
– अस्पष्ट चोटें
– टीकाकरण के बाद असामान्य रक्तस्राव होना
– जोड़ों में दर्द, सूजन आना
-शरीर में नीले-नीले निशानों का बनना
-मसूढ़े से खून बहना
-कई बड़ी या गहरी चोटें उत्पन्न होना
-मूत्र या मल में खून निकलना
– शिशुओं में अस्पष्ट चिड़चिड़ाहट
– बार-बार नाक से खून आना
 
मस्तिष्क रक्तस्राव के लक्षण :
सिरदर्द, उल्टी, सुस्ती, व्यवहार में परिवर्तन, चक्कर आना, दृष्टि की समस्याएं, लक़वा और दौरे आदि समस्याएँ शामिल हो सकती हैं।
 
मामूली चोट के लिए प्राथमिक चिकित्सा :
दवा और पट्टी का उपयोग आमतौर पर रक्तस्राव को रोकने के लिए किया जाता है। त्वचा के निचले छोटे क्षेत्रों में खून बहने को रोकने के लिए एक बर्फ पैक का उपयोग किया जा सकता है।मुंह में मामूली रक्तस्राव को कम करने के लिए आइस पॉप का उपयोग किया जा सकता है।
 
राहत के अन्य उपाय : 
-नियमित व्यायाम
-दांत और मुंह को स्वच्छ रखना
-रक्त दान करते समय या रक्त स्थानांतरण के दौरान हीमोफीलिया रोग की जांच
-टीकाकरण सुनिश्चित कर लेना चाहिए।

*बड़ी खबर : कोरोना की फिर से आहट, केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा…*

18-Mar-2022

नई दिल्ली (शोर संदेश)। विश्व के दक्षिण पूर्व एशिया और यूरोप के कुछ हिस्सों में कोरोना वायरस के फिर से मामले बढ़ने लगे हैं। इसका हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि वे इंफ्लूएंजा जैसी बीमारी और सांस संबंधी गंभीर संक्रमण की फिर से निगरानी शुरू करें, ताकि किसी भी तरह के शुरुआती संकेत नजरअंदाज नहीं हो सकें और कोविड नियंत्रण में रहे।

इंफ्लूएंजा-जैसी बीमारी और सांस संबंधी गंभीर संक्रमण के मामलों की जांच सरकार के लिए कोविड प्रबंधन के स्तंभ रहे हैं। बहरहाल, इसकी जांच हाल में रोक दी गई थी, क्योंकि भारत में कोविड-19 के मामले कम आ रहे हैं. निगरानी बढ़ाने के तहत आईएलआई और एसएआरआइ से पीड़ित अस्पताल में भर्ती मरीजों की कोविड जांच कराई जाएगी और संक्रमित नमूनों को जीनोम अनुक्रमण के लिए भेजा जाएगा। भूषण ने पत्र में कहा कि अगर मामलों के नए कलस्टर उभर रहे हैं तो प्रभावी निगरानी की जाए और ILI और SARI मामलों की नियमों के तहत जांच की जाए और उन पर नजर रखी जाए ताकि किसी भी तरह के शुरुआती संकेत नजरअंदाज न हों और कोविड संक्रमण का प्रसार नियंत्रण में रहे।


*ओमिक्रॉन को कोविड-19 का अंतिम वैरिएंट मानना साबित हो सकता है खतरनाक : WHO*

26-Jan-2022

 नई दिल्ली (शोर संदेश)। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने चेतावनी दी है कि ओमिक्रॉन को कोविड-19 का अंतिम वैरिएंट मानना खतरनाक साबित हो सकता है। संगठन ने कहा कि कोरोना वायरस के और अधिक वैरिएंट  सामने आने की आशंका है।

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के कार्यकारी बोर्ड की बैठक के दौरान संयुक्‍त राष्‍ट्र स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के महानिदेशक एधनॉम गेब्रियासिस ने कहा कि परीक्षण और वैक्‍सीन जैसे उपायों के व्‍यापक उपयोग से ही इस वर्ष महामारी के घातक दौर से उबरना सम्‍भव होगा। उन्‍होंने सूक्ष्‍मजीव रोधी उपचारों के खिलाफ प्रतिरोधी क्षमता से निपटना, मानव स्‍वास्‍थ्‍य पर जलवायु परिवर्तन के घातक असर और तम्‍बाकू का इस्तेमाल कम से कम करने जैसे वैश्विक स्‍वास्‍थ्‍य मुद्दो पर संगठन की उपलब्धियों का भी उल्‍लेख किया। लेकिन, कहा कि महामारी के घातक दौर से उबरना सामूहिक प्राथमिकता होगी। श्री गेब्रियासिस ने कोरोना संक्रमण से निपटने में अनुशासित और एकजुट प्रयासों की अपील की।


*भारत में मिला ओमिक्रॉन का नया वैरिएंट BA-2 इंदौर में 4 बच्चों समेत 16 मरीजों में पुष्टि*

24-Jan-2022

 नई दिल्ली (शोर संदेश)। दुनियाभर में कहर ढा रहे कोरोना के ओमिक्रॉन वर्जन के बीच वायरस के एक और वैरिएंट का खतरा मंडराने लगा है। इस वैरिएंट को BA-2 नाम दिया गया है। मध्य प्रदेश के इंदौर में ओमिक्रॉन के सब वैरिएंट BA-2 ने दस्तक दे दी है। ओमिक्रॉन के नए स्ट्रेन से शहर में 16 लोग संक्रमित मिले हैं। इनमें 6 बच्चे भी हैं। वहीं, देशभर से 530 सैम्पल जांच के लिए भेजे गए है। UK, ऑस्ट्रेलिया और डेनमार्क में भी इसके केस सामने आए हैं। यह वैरिएंट ओमिक्रॉन की तरह ही तेजी से फैलता है। ऐसे में इसकी पहचान न होने पर इसके संक्रमण को रोक पाना बड़ी चुनौती है। चिंता की बात यह है कि टेस्ट किट की पकड़ में भी नहीं आ रहा है। इसी वजह से इसे ‘स्टेल्थ’ यानी छिपा हुआ वर्जन कहा जा रहा है। ब्रिटेन, स्वीडन और सिंगापुर में से हर एक देश ने 100 से ज्यादा सैम्पल जांच के लिए भेजे हैं।




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