
नई दिल्ली (शोर संदेश)। देश में हर दिन ऊपर-नीचे हो रही संक्रमितों की संख्या ने कोरोना महामारी की तीसरी लहर का खतरा सिर पर खड़ा कर दिया है। इससे बचाव के लिए देश में कोरोना टीकाकरण को तेज करने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन इससे पहले ही देश भर के अस्पतालों के आगे एक गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। यह चुनौती है केरल से लेकर उत्तर प्रदेश तक के अस्पतालों में बुखार के मरीजों की संख्या में कई गुना बढ़ोतरी की, जिसके असर हर जगह अलग-अलग तरह के मिल रहे हैं।दरअसल, केरल में निपाह वायरस, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में डेंगू, दिल्ली में वायरल और बिहार में मलेरिया के प्रसार के कारण बुखार के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और अस्पतालों में बिस्तरों का संकट पैदा हो गया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, कुछ राज्यों में 95 फीसदी तक अस्पतालों के बिस्तर अभी से भरे हुए हैं। इनमें 60 से 70 फीसदी तक मरीज बुखार या वायरल से संक्रमित हैं।नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया कि बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। खासतौर पर बच्चों में इन्फ्लूएंजा संक्रमण देखने को मिल रहा है। स्क्रब टाइफस व लेप्टोस्पिरोसिस जैसे जीवाणु संक्रमण (बैक्टीरियल इंफेक्शन) भी कमजोर इम्यूनिटी वाले बच्चों में जानलेवा साबित हो सकते हैं।
00 पहले ही दी गई थी चेतावनी
बुखार के कारण हालात बिगड़ने की चेतावनी पहले ही दे दी गई थी। नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि बुखार के अधिकांश मामले मच्छर जनित बीमारियों की वजह से देखने को मिल रहे हैं। अब हमारे आगे स्थिति ऐसी बन गई है कि कोरोना के अलावा हमें इन बीमारियों से भी लड़ने के लिए तैयार रहना पड़ेगा।
00 यूपी में रहस्यमयी बुखार के पीछे है डेंगू का डी-2 स्ट्रेन
पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) की वैज्ञानिक डॉ. प्रज्ञा यादव ने बताया कि उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में फैले रहस्यमयी बुखार के मरीजों की जीनोम सीक्वेंसिंग में हमें डेंगू वायरस का डी-2 स्ट्रेन मिला है, जो काफी जानलेवा है।
महाराष्ट्र और यूपी के अलावा दिल्ली से भी कुछ सैंपल मंगाए गए हैं, क्योंकि वहां वायरल बुखार के बाद लोगों को लंबे समय तक खांसी व कफ बने रहने की शिकायत मिल रही है।वहीं, कई मरीजों में बुखार का स्तर भी 102 डिग्री से अधिक मिल रहा है। डॉ. यादव ने बताया कि बुखार कई वजहों से हो सकता है। कोरोना में भी ऐसा लक्षण मिलता है, लेकिन बुखार होने का सही कारण जानना बहुत जरूरी है। तभी समय पर इलाज दिया जा सकता है।
00 महाराष्ट्र में रक्त की हो रही कमी
कोरोना के अलावा डेंगू के चलते महाराष्ट्र के अस्पतालों के ब्लडबैंकों में रक्त की कमी हो गई है। हालात ऐसे हैं कि मुंबई के टाटा अस्पताल को सोशल मीडिया पर रक्तदान के लिए लोगों से अपील करनी पड़ रही है। अस्पताल के अनुसार, रक्त की मांग कई महीने से पहले अधिक थी, लेकिन अब यह संकट और गहरा चुका है, क्योंकि कोरोना टीकाकरण भी इसका कारण है।
00 दिल्ली एम्स हो चुका है मरीजों से फुल
कोरोना की नई लहर से निपटने के लिए राज्य पर्याप्त तैयारियों का दावा कर रहे हैं, लेकिन सभी जगह अस्पताल 80 से 90 फीसदी तक भर चुके हैं। नतीजतन यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित कई राज्यों से मरीजों को दिल्ली एम्स रेफर किया जा रहा है।
एम्स प्रबंधन के अनुसार, उनके पास अब क्षमता से अधिक मरीजों का भार है। इसलिए नए मरीजों को सफदरजंग अस्पताल भेजा जा रहा है। लेकिन सफदरजंग अस्पताल प्रबंधन ने भी अपने यहां मेडिसिन सहित कई अहम विभागों में हाउसफुल की स्थिति बताई है।
00 नई लहर का भार नहीं झेल सकेंगे
प्राइवेट हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एएचपीआई) के महानिदेशक डॉ. गिरधर ज्ञानी का कहना है कि देश भर के बड़े सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों के लिए यह समय काफी चुनौतियों से घिरा है। अलग-अलग तरह के बुखार ने इस कदर असर डाला है कि अगर कोरोना की अभी नई लहर आती है तो अस्पताल उसका भार नहीं झेल पाएंगे। खासतौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार के अस्पतालों के हालात ज्यादा खराब हैं, जहां मरीजों की संख्या काफी अधिक है।




0 वैक्सीन लेने के बाद भी डेल्टा वैरिएंट कर रहा संक्रमित
नई दिल्ली (शोर संदेश)। कोरोना वायरस से बचाव के लिए पूरे देश में स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीके की बूस्टर डोज लगाने पर विचार चल रहा है। केंद्र सरकार जल्द ही अंतिम निर्णय लेगी।मेडिकल जर्नल नेचर में प्रकाशित कई देशों के वैज्ञानिकों के संयुक्त अध्ययन में कहा गया है कि कोरोना टीका लेने के बाद भी स्वास्थ्य कर्मचारी डेल्टा वैरिएंट के चलते संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। हालांकि ज्यादातर स्वास्थ्य कर्मचारियों में दोबारा संक्रमण के बाद गंभीर लक्षण नहीं दिखे हैं, लेकिन उन्हें आइसोलेशन में जाना पड़ रहा है।अध्ययन में शामिल रहे नई दिल्ली स्थित आईजीआईबी के निदेशक डॉ. अनुराग अग्रवाल ने कहा है कि इस स्थिति के कारण स्वास्थ्य कर्मचारियों की संभावित कमी को रोकने के लिए उन्हें जल्द से जल्द बूस्टर डोज देना जरूरी है।



00 कॉर्बेवैक्स को मिली दूसरे-तीसरे ट्रायल को मंजूरी
हैदराबाद (शोर सन्देश)। देश में अब जल्द ही पांच साल से ऊपर के बच्चों को कोरोना वैक्सीन मिलने लगेगी। कॉर्बेवैक्स के दूसरे और तीसरे चरण के ट्रायल के लिए मंजूरी मिल गई है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने शुक्रवार को कहा कि जैविक ई को पांच साल से अधिक उम्र के बच्चों को कोविड-19 वैक्सीन कॉर्बेवैक्स के दूसरे और तीसरे चरण की परीक्षण के लिए डीजीसीआई से अनुमति मिली है। विशेष एक्सपर्ट समिति ने कॉर्बेवैक्स टीके के ट्रायल की सिफारिश की थी। विशेषज्ञों ने अंदेशा जताया है कि अगर कोरोना की तीसरी लहर आती है, तो उसमें बच्चों पर भी काफी प्रभाव पड़ सकता है। इसी महीने तीसरी लहर आने की संभावना है, ऐसे में बच्चों के लिए वैक्सीन कवच के तौर पर काम करेगी। बायोलॉजिकल ई लिमिटेड की प्रबंध निदेशक महिमा दतला ने कहा कि इन मंजूरी से विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ बातचीत करने में मदद मिलेगी।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, हैदराबाद स्थित दवा कंपनी बायोलॉजिकल ई की वैक्सीन कॉर्बेवैक्स के भारत में सितंबर के अंत तक आने की संभावना है। इससे पहले इसके पहले और दूसरे ट्रायल में इस वैक्सीन को लेकर बेहतर नतीजे आए हैं। बता दें कि केंद्र सरकार ने हैदराबाद स्थित बायोलॉजिकल-ई कंपनी के साथ 30 करोड़ वैक्सीन डोज का करार किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, वैक्सीन के उत्पादन के लिए कंपनी को 1,500 करोड़ रुपए की अग्रिम राशि दी जा चुकी है। बायोलॉजिकल-ई द्वारा वैक्सीन का उत्पादन और स्टोरेज सितंबर-दिसंबर 2021 के बीच किया जाएगा। भारत बायोटेक की ‘कोवाक्सिन’ के बाद देश में यह दूसरी स्वदेशी वैक्सीन होगी।


00 सबसे उच्च स्तर पर होंगे कोरोना के मामले
00 बच्चों-युवाओं के लिए खतरा बन सकती है तीसरी लहर
नई दिल्ली (शोर संदेश)। गृह मंत्रालय की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट कमेटी ने तीसरी लहर की आशंका जाहिर की है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी है। इसके मुताबिक अक्तूबर में कोरोना की तीसरी लहर अपने पीक पर होगी। साथ ही कमेटी ने प्रधानमंत्री कार्यालय को बच्चों और युवाओं के लिए मेडिकल सुविधाओं का इंतजाम करने की सलाह भी दी है। विशेषज्ञों की कमेटी का मानना है कि तीसरी लहर बच्चों व युवाओं के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में बच्चों के लिए मेडिकल सुविधाएं, वेंटीलेटर, डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ, एंबुलेंस, ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था करनी होगी। क्योंकि, बड़ी संख्या में बच्चे व युवा कोरोना से संक्रमित होंगे।
00 प्राथमिकता के आधार पर करना होगा टीकाकरण \
गृह मंत्रालय ने यह रिपोर्ट उस समय जारी की है, जब बच्चों के लिए टीकाकरण भी शुरू होने वाला है। रिपेार्ट में कहा गया है कि बच्चों के बीच प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण करना होगा। इसके साथ ही कमेटी ने कोविड वार्ड को फिर से इस आधार पर तैयार करने की सलाह दी है, जिससे बच्चों के तीमारदारों को भी साथ रहने की अनुमति मिल सके।
00 हर दिन सामने आ सकते हैं पांच लाख केस
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट की रिपेार्ट के मुताबिक सितंबर अंत तक तीसरी लहर अपना असर दिखाना शुरू कर देगी। वहीं अक्तूबर में देश में हर दिन पांच लाख से भी ज्यादा मामले सामने आ सकते हैं। इस कारण करीब दो महीने तक देश को फिर से परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
00 केरल में सबसे ज्यादा संक्रमण
केरल, बंगलूरू, असम में तीसरी लहर की बानगी भी देखने को मिल रही है। यहां पिछले दो से तीन सप्ताह से बच्चों के संक्रमित होने की दर ज्यादा है। इस समय केरल में संक्रमण दर बढ़कर 17 प्रतिशत तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि केरल में ओणम के बाद कोरोना संक्रमण और भी ज्यादा बढ़ सकता है। वहीं डेल्टा प्लस वैरिएंट के भी मामले देश में बढ़ते जा रहे हैं। महाराष्ट्र में पिछले दिनों ही इससे कई मौतें हो चुकी हैं।
00 आईआईटी कानपुर ने किया था तीसरी लहर से इंकार
वहीं दूसरी तरफ आईआईटी कानपुर ने कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका को न के बराबर बताया है। वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने अपने गणितीय ‘मॉडल सूत्र’ के आधार पर नई स्टडी जारी की है। उनका दावा है कि अक्तूबर तक उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में केसों की संख्या इकाई अंक तक पहुंच जाएगी।
उनका कहना है कि वैक्सीनेशन ने इसका खतरा और कम कर दिया है। इससे संक्रमण लगातार कम होगा। उन्होंने बताया कि यूपी, बिहार, दिल्ली जैसे राज्य लगभग संक्रमण मुक्त होने की ओर हैं। हालांकि, देश में एक्टिव केस अक्तूबर माह तक भी 15 हजार के करीब रहेंगे क्योंकि तमिलनाडु, तेलंगाना, केरल समेत पूर्वोत्तर राज्यों में संक्रमण रहेगा।



.jpg)
00 66 प्रतिशत होगी कोरोना पर असरदार
नई दिल्ली (शोर संदेश)। कोवैक्सीन के बाद दूसरी स्वदेशी वैक्सीन जायडस कैडिला `जायकोव-डी` कोरोना पर 66 प्रतिशत तक असरदार होगी। वहीं डेल्टा प्लस वैरिएंट पर भी यह वैक्सीन 66 प्रतिशत असर करेगी। यह जानकारी जायडस ग्रुप के एमडी डॉ. शार्विल पटेल ने दी। उन्होंने बताया कि वैक्सीन को मंजूरी मिलने के बाद अब अगले सप्ताह तक इसकी कीमत का भी निर्धारण कर लिया जाएगा। सितंबर महीने में इसकी सप्लाई भी शुरू हो जाएगी। डॉ. शार्विल ने बताया कि अक्टूबर से वैक्सीन का उत्पादन एक करोड़ तक करने का लक्ष्य रखा गया है।
00 28 वें व 56वें दिन लगेगी दूसरी व तीसरी डोज
जायडस कैडिला की जायकोव-डी वैक्सीन तीन डोज में दी जाएगी। वैक्सीन की एक डोज लगने के बाद दूसरी डोज 28वें दिन व तीसरी डोज 56वें दिन लगाई जाएगी। यह वैक्सीन को 12 वर्ष से ज्यादा की उम्र के बच्चों को लगाई जाएगी।
00 डीएनए आधारित है वैक्सीन
खास बात यह है कि इस वक्त जहां दुनियाभर में आरएनए वैक्सीन की मौजूदगी सबसे ज्यादा है, वहीं जायडस कैडिला की ये वैक्सीन विश्व की पहली डीएनए आधारित वैक्सीन है। कोविड-19 संबंधी सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गनाइजेशन (CDSCO) की एक विशेषज्ञ समिति ने जायकोव-डी को मंजूरी देने के जॉयडस कैडिला के आवेदन पर गुरुवार को विचार किया था। इसके बाद इसने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) को इसे आपात इस्तेमाल की इजाजत देने की सिफारिश की। डीसीजीआई ने शुक्रवार को मंजूरी दे दी थी।
00 50 केंद्रों पर ट्रायल का दावा
जायडस कैडिला ने दावा किया है कि उसने भारत में वैक्सीन का सबसे बड़ा ट्रायल किया है। 50 से ज्यादा केंद्रों पर इस वैक्सीन का परीक्षण किया गया। अब तक सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड, भारत बॉयोटेक की कोवाक्सिन, रूस की स्पूतनिक-वी, अमेरिका की मॉडर्ना व जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है। भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोवाक्सिन देश की पहली स्वदेशी वैक्सीन है।
00 कई खासियत है इस वैक्सीन की
कई मामलों में इसे सबसे खास माना जा रहा है। जायकोव-डी वैक्सीन की सबसे खास बात यह है कि यह दुनिया की पहली डीएनए प्लाजमिड वैक्सीन होगी। देश में लग रही कोरोना की बाकी वैक्सीनों से अलग जायकोव-डी के तीन डोज देने की जरूरत होगी।
00 बगैर सुई के लगने से बच्चों को राहत मिलेगी\
जायकोव-डी बगैर सुई के दी जाएगी। इससे 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को यह आसानी से लगाई जा सकेगी। यह इंजेक्टर के जरिये दी जाएगी। दर्द न के बराबर होगा। यह 12-18 साल के वायु वर्ग वालों के साथ बड़ों को भी लग सकेगी। देश में अभी सिर्फ 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का ही टीकाकरण हो रहा था। जायकोव-डी से अब 12 से 18 साल तक के किशोरों को भी टीके लग सकेंगे। जायडस कैडिला की एक साल में 10 करोड़ से 12 करोड़ खुराक बनाने की तैयारी है।

रायपुर (शोर संदेश) प्रदेश में 24 अगस्त से 28 सितम्बर तक शिशु संरक्षण माह का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान प्रत्येक मंगलवार व शुक्रवार को शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच बच्चों के स्वास्थ्य संवर्धन संबंधी विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान बच्चों के स्वास्थ्य सुधार के लिए स्वास्थ्य केन्द्रों और आंगनबाड़ियों में विभिन्न गतिविधियों का आयोजना किया जाएगा, जिसमें स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा शिक्षा विभाग आपसी समन्वय से काम करेंगे।अभियान के तहत बच्चों को रतौंधी और एनीमिया से बचाव के लिए विटामिन-ए तथा आयरन फोलिक एसिड सिरप पिलाया जाएगा। बच्चों में कुपोषण के आंकलन के लिए उनका वजन लिया जायेगा और पालकों को बच्चों की आयु के अनुरूप पोषण आहार की जानकारी दी जाएगी। इस दौरान आंगनबाड़ियों में भी हितग्राहियों को पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही अति गंभीर कुपोषित बच्चों कोे चिन्हित कर पोषण पुनर्वास केन्द्रों में भेजा जाएगा, जिससे पुनर्वास केन्द्र में समुचित देखभाल, पोषण आहार और उपचार से बच्चे को कुपोषण मुक्त किया जा सके। शिशु संरक्षण माह के तहत एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा परिवार भ्रमण के दौरान गर्भवती माताओं एवं बच्चों को परामर्श भी दिया जायेगा।कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए नियमित टीकाकरण कार्यक्रम तथा शिशु संरक्षण माह हेतु गठित जिलास्तरीय टास्क फोर्स को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही इस दौरान आयोजित गतिविधियों में कोविड-19 से बचाव के लिए दिशा-निर्देशों का पालन करने कहा गया है।


00 वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद भी संक्रमित हो गई थी महिला
मुंबई (शोर संदेश)। महाराष्ट्र में डेल्टा प्लस वैरिएंट से मौत का दूसरा मामला सामने आया है। मुंबई के घाटकोपर में 63 वर्षीय महिला की मौत जुलाई में हुई थी। रिपोर्ट आने के बाद महिला में डेल्टा प्लस वैरिएंट की पुष्टि हुई है। इससे पहले महाराष्ट्र के रत्नागिरी में 13 जून को 80 वर्षीय महिला की मौत भी डेल्टा प्लस वैरिएंट की वजह से हुई थी।
खास बात यह है कि महिला वैक्सीन के दोनों डोज ले चुकी थी। इसके बाद भी उसे फेफड़ों व सांस लेने में समस्या हुई, जिसके बाद उसे घर में ही ऑक्सीजन लगाया गया। 21 जुलाई को उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई और 24 जुलाई को वह अस्पताल में भर्ती हुई, जहां तीन दिन बाद उसकी मौत हो गई। 11 अगस्त को राज्य स्वास्थ्य विभाग की ओर से महिला में डेल्टा प्लस वैरिएंट की जानकारी बृहन्मुंबई महानगर पालिका को दी गई।
00 महिला के संपर्क में सात लोगों में डेल्टा प्लस
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कुछ कोरोना संक्रमित मरीजों का जीनोम स्वीकेंस टेस्ट किया गया था। सामने आया है कि सात लोग डेल्टा प्लस वैरिएंट से संक्रमित हैं। इन सभी में यह वैरिएंट एक दूसरे के संपर्क से आया है। महानगर पालिका के अधिकारियों का कहना है कि वह महिला उन सात लोगों में से एक थी। अब, महिला के संपर्क में आने वाले दो लोगों में भी डेल्टा प्लस वैरिएंट की पुष्टि हुई है। बीएमसी के पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट के कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मंगला गोमरे ने बताया कि 63 वर्षीय जिस महिला की मौत डेल्टा प्लस वैरिएंट से हुई थी। उसके संपर्क में आने वाले सभी लोगों की जांच की जा रही है, जिसमें छह लोगों में कोरोना के लक्षण देखे गए हैं। सभी के सैंपल जीनोम स्वीकेंस के लिए भेजे गए हैं, जिसमें से दो में डेल्टा वैरिएंट की पुष्टि हुई है। वहीं अन्य चार लोगों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुंबई में डेल्टा प्लस वैरिएंट से मौत का यह पहला मामला सामने आया है।
00 लगातार बिगड़ती गई तबीयत
एन वार्ड के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. महेंद्र खंडडे ने बताया कि पीड़ित महिला को गोदरेज मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन, यहां उसकी तबीयत बिगड़ती गई, जिसके बाद परिवार के लोग उसे ब्रीच कैंडी अस्पताल ले गए। यहां महिला की मौत हो गई।
डेल्टा प्लस वैरिएंट काफी संक्रामक है। इस कारण बुधवार को पूरे राज्य में 20 नए डेल्टा प्लस वैरिएंट मामलों की पुष्टि हुई है। इसमें सात मुंबई, पुणे व थाने में छह-छह मामले हैं। राज्य में डेल्टा प्लस वैरिएंट मामलों की संख्या 65 पहुंच गई है। इसमें से 33 मरीजों की उम्र 19 से 45 साल के बीच है। वहीं 17 मरीज 46 से 60 की उम्र के हैं।
00 कई देशों में आक्रामक दिख रहा डेल्टा
नई दिल्ली स्थित आईजीआईबी के डॉ. विनोद स्कारिया ने बताया कि डेल्टा के बाद अब जितने भी स्वरूप सामने आ रहे हैं उन सभी को डेल्टा प्लस की श्रेणी में ही रखा जा रहा है। अमेरिका सहित कई देशों में यह काफी आक्रामक दिख रहा है, लेकिन भारत में अभी तक ऐसा नहीं है। इन नए स्वरूपों की पहचान भारत में जरूर हुई है लेकिन उन मरीजों से अधिक लोगों के संक्रमित होने की जानकारी नहीं है लेकिन दूसरे देशों का उदाहरण लें तो यह स्थिति कभी भी भारत में आ सकती है। इसलिए सभी को लगातार सावधानी बरतनी होगी।
00 अमेरिका व ब्रिटेन में मिले हैं डेल्टा प्लस के नए स्वरूप
डॉ. विनोद ने बताया कि ज्यादातर डेल्टा प्लस के नए स्वरूप अमेरिका व ब्रिटेन में मिले हैं। भारत में अभी तक डेल्टा के अलावा डेल्टा प्लस, एवाई 2.0, एवाई 3.0 व एवाई 5 तक मिल चुका है। ब्रिटेन में भी एवाई 5 मिल चुका है। ऐसे में डेल्टा के नए स्वरूपों की वैश्विक स्तर पर काफी समानता भी देखने को मिल रही है।

00 अक्तूबर में हालात होंगे ज्यादा खराब
नई दिल्ली (शोर संदेश)। भारत में कोरोना की तीसरी लहर इस महीने से दस्तक दे सकती है। विशेषज्ञों ने कहा है कि अगस्त के महीने में कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है, जिसमें रोजाना एक लाख कोरोना के मामले सामने आएंगे। इस वक्त देश में हर दिन 40 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं। वहीं 550 से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है, जबकि रविवार को 39 हजार लोग स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगस्त के महीने में शुरू होने वाली तीसरी लहर अक्तूबर में अपने चरम पर जा सकती है। दूसरी लहर में कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था को देखते हुए केंद्र ने राज्यों से ऑक्सीजन, दवा समेत अन्य जरूरी सामानों को पहले ही उपलब्ध रखने का निर्देश दिया है। हालांकि, कोरोना की तीसरी लहर दूसरी लहर के मुकाबले ज्यादा खतरनाक नहीं होगी, विशेषज्ञों ने बताया कि दूसरी लहर में देश में हर रोज 4 लाख नए मामले देखने को मिले थे, लेकिन अब डरावनी तस्वीर नहीं दिखेगी। कोरोना की स्थित के बारे में अनुमान लगाने वाले विशेषज्ञों का आकलन एक गणितीय मॉडल पर आधारित था। मई में आईआईटी हैदराबाद के प्रोफेसर विद्यासागर ने कहा कि भारत के कोरोना वायरस का प्रकोप आने वाले दिनों में गणितीय मॉडल के आधार पर चरम पर हो सकता है।
00 केरल और महाराष्ट्र में बढ़ रहे मामले
हैदराबाद और कानपुर आईआईटी के प्रोफेसरों के नेतृत्व में शोधकर्ताओं का हवाला देते हुए एक रिपोर्ट में बताया गया कि कोविड -19 मामलों में हो रही बढ़ोतरी कोरोनो वायरस महामारी की तीसरी लहर को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने बताया कि यह अक्तूबर में अपने पीक पर पहुंच सकती है। विशेषज्ञों ने कहा कि केरल और महाराष्ट्र में जिस तरह कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं इससे स्थिति खराब हो सकती है। बता दें कि केरल में कोरोना के मामले रोजना 20 हजार से ज्यादा आ रहे हैं। वहीं, महाराष्ट्र में करीब 7 हजार मामले सामने आ रहे हैं। दोनों राज्यों में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
00 10 राज्यों में बढ़ रहा कोरोना
मंत्रालय के मुताबिक पिछले एक दिन में पांच राज्यों से 80.36 फीसदी नए कोरोना केस सामने आए हैं जिसमें अकेले केरल से 49.3 फीसदी केस हैं। वहीं मौत को लेकर बात करें तो सर्वाधिक महाराष्ट्र में 225 मरीजों ने बीते शनिवार को दम तोड़ दिया। केरल में 80 मरीजों की जान गई। फिलहाल जिन 10 राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं उनमें केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, ओडिशा, असम, मिजोरम, मेघालय, आंध्र प्रदेश और मणिपुर शामिल हैं।

00 4 करोड़ 97 लाख से अधिक राशि का वितरण
सूरजपुर (शोर संदेश)। कोरोना संक्रमण काल 2020-21 में भी पहली बार गर्भवती होने वाली जिले की 2418 महिलाओं को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में सहायता राशि दी गई है। जिले में कलेक्टर डॉ गौरव कुमार सिंह के निर्देशन एवं जिला पंचायत सीईओ राहुल देव के मार्गदर्शन में पहली बार गर्भवती व धात्री महिलाओं को तीन किस्तों में पांच हजार रुपये दिए जा रहे हैं, ताकि वे अपने स्वास्थ्य की बेहतर ढंग से देखभाल कर सकें। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से तीन अलग-अलग किश्तों में यह रकम खाते में भेजी गई। 2017 से अब तक करीब 13732 महिलाएं योजना का लाभ ले चुकी हैं। जिसमे करीब 4 करोड़ 97 लाख 90 हजार रुपये की राशि का वितरण किया जा चुका है। गर्भवती महिलाओं को जरूरी पोषण न मिलने से वह तमाम प्रकार की बीमारी से संक्रमित हो जाती हैं। जिससे उनके साथ गर्भ में पल रहे बच्चे भी बीमार एंव कुपोषित हो जाते हैं। ऐसी महिलाओं को कुपोषण से बचने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को लागू किया है। योजना में गर्भ धारण से बच्चे के जन्म लेने तक गर्भवती महिला को तीन किस्तो में पांच हजार रूपये दिया जाता है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी चंद्रबेश सिंह सिसोदिया ने बताया कि गर्भवती महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य की देखभाल के लिए यह अति महत्वाकांक्षी योजना है। जिले में यह योजना एक जनवरी 2017 से संचालित है। उन्हीने बताया कि अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक जिले में 2418 महिलाओं को योजना का लाभ दिया गया। योजना में पहली बार गर्भवती होने पर महिलाओं को उनके खाते में शासन पांच हजार रुपये तीन किस्तों में देती है। पहली बार गर्भधारण करने वाली महिला को पंजीकरण कराने पर प्रथम किस्त के रुप में एक हजार, प्रसव पूर्व जांच होने पर दो हजार और प्रसव होने पर बच्चे को सभी टीके लगने पर तीसरी किस्त में दो हजार रुपये मिलता है।

रायपुर(शोर संदेश) डी.डी.नगर रायपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नई अतिरिक्त सुविधाओं के विस्तार एवं आधुनिक मशीनों के रखरखाव हेतु भवन निर्माण के लिए 61.96 लाख रुपए की राशि छत्तीसगढ़ शासन से स्वीकृति प्राप्त हुई है | आपको ज्ञात हो कि विगत 3 वर्ष पूर्व से भवन स्वीकृति के अभाव में पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को मोवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में संलग्न कर काम चलाया जा रहा था जिसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर की जुझारू वार्ड पार्षद श्रीमती मधु चंद्रवंशी ने पिछले वर्ष जनवरी 2020 में ही वार्ड वासीयों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर सेक्टर दो स्थित पानी टंकी के भवन को नवीनीकृत कर उसमें वार्ड वासियों की सुविधाओं के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा प्रारंभ कराई गई थी | पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर की स्थानीय वार्ड पार्षद श्रीमती मधु चंद्रवंशी ने कहा है कि वार्ड वासियों के जागरूकता एवं सभी वार्ड वासियों के सहयोग से 1 वर्ष में ही पानी टंकी वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को कोरोना वैक्सीनेशन एवं ओ.पी.डी. सुविधाओं की अपार सफलता के कारण से ही छत्तीसगढ़ की 3 स्वास्थ्य केंद्र जिसमें डी.डी. नगर विकास खंड धरसीवा जिला रायपुर भी शामिल है को छत्तीसगढ़ शासन की ओर से स्वास्थ्य केंद्र में अतिरिक्त सुविधाओं के विस्तार एवं आधुनिक मशीनों के रखरखाव हेतु हेतु भवन निर्माण करने के लिए 61.96 लाख की राशि स्वीकृत की गई है | पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर की वार्ड पार्षद श्रीमती मधु चंद्रवंशी ने इसके लिए सभी वार्ड वासियों को शुभकामनाएं एवं बधाई दी है एवं छत्तीसगढ़ शासन का भी इसके लिए आभार व्यक्त किया है एवं वार्ड पार्षद मधु चंद्रवंशी तथा उसके प्रतिनिधि आँशु चंद्रवंशी ने वार्ड में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भरपूर स्वास्थ्य लाभ लेने की अपील वार्ड वासियों से की है |