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कासरगोड (शोर संदेश)। केरल के कासरगोड जिले के एक होटल में खराब खाना खाने से एक 18 साल की लड़की की मौत हो गई है जबकि 15 से अधिक लोग गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती कराए गए हैं। सभी एक लोकल होटल से लोकप्रिय अरबी डिश शावरमा खाया था। पहली दृष्टि में मामला फूड प्वाइजनिंग का है। फिलहाल, अस्पताल में भर्ती अन्य लोगों की हालत स्थिर है। वहीं घटना के बाद जिला प्रशासन हाई अलर्ट पर है।
एक लड़की की गई जान
डॉक्टरों ने बताया कि कान्हांगड के जिला अस्पताल में इलाज के दौरान एक 18 साल की लड़की की मौत हो गई। जिला चिकित्सा अधिकारी ए वी रामदास ने कहा कि अस्पताल में भर्ती सभी की हालत स्थिर है और देर से अस्पताल लाए जाने के कारण डॉक्टर युवती की जान नहीं बचा सके। उन्होंने कहा कि अधिकांश संक्रमितों को तीन अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। ये सभी लोग एक होटल से स्पेशल डिश शवारमा खाए थे। सबको मेडिकल निगरानी में रखा गया है। वहीं बड़े पैमाने पर फूड प्वाइंजनिंग के मामले सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। लोकल होटल जहां इन लोगों ने शावरमा खाया था, उस होटल को बंद करा दिया गया है। जांच के दौरान यह पाया गया कि कूल बार-कम-बेकरी बिना फूड सेफ्टी लाइसेंस के चल रही थी।
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नई दिल्ली (शोर संदेश)। आजकल लोग अपनी सेहत को लेकर बहुत ही ज्यादा ही सावधान हो गए हैं और होना भी चाहिए। क्योंकि बदलते समय और मौसम की वजह से आपकी किसी भी वक्त किसी भी तरह की परेशानी हो सकती है। कई लोगों की आंखों (Eyes)में लगातार पानी आता रहता है, जिसकी वजह से उन्हें अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि आप भी आंखों में से पानी आने की समस्या को इग्नोर कर रहे है। तो ये आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है.यहां पर हम आपको बताएंगे आंख में पानी या आंसू (Tears) आने के क्या है कारण।
अधिकांश मामलों में आंखों से पानी आना बिना इलाज के बंद हो जाता है, लेकिन कभी-कभी ऐसी स्थिति भी होती हैं जिनके कारण लगातार आंखों से पानी आता रहता है। यह काफी कॉमन समस्या है। अगर आपके आंखों से लंबे समय से पानी आ रहा है और आंखें लाल हो रही हैं तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए। लगातार आंखों में आंसू आने के कुछ कारण हो सकते हैं। तो आइए उन कारणों के बारे में भी जान लीजिए जो आंखों में अधिक पानी या आंसू आने का कारण बनते है।
सूखी आंखें (Dry Eyes) :
अगर किसी की आंख में पर्याप्त आंसू नहीं बन रहे हैं तो आंख जल्दी सूख जाती है। ऐसे में आंख में पानी, तेल का सही बैलेंस नहीं बन पाता। हवा से लेकर मेडिकल कंडीशन तक इस स्थिति का कारण हो सकता है। इसलिए कभी-कभी आंख अचानक से अधिक पानी निकालकर आंख सूखने का संकेत देती है।
पिंकआई (Pinkeye/Conjunctivitis) :
बच्चों और वयस्कों दोनों की आंखों में पानी आने का यह एक सामान्य कारण है। इस स्थिति में आंख गुलाबी या लाल हो सकती हैं और उनमें खुजली-चुभन भी महसूस हो सकती है। बैक्टीरिया या वायरस से संक्रमण पिंकआई का सबसे अहम कारण है। वायरल संक्रमण के लिए उपचार की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन इसके लिए एंटीबायोटिक आई ड्रॉप की आवश्यकता हो सकती है।
एलर्जी (Allergie) :
पानी भरी हुई, खुजली वाली आंखें अक्सर खांसी, बहती नाक और अन्य एलर्जी के लक्षणों के साथ आती हैं, लेकिन किसी कारण से आंखों की एलर्जी होना भी काफी आम बात है। इसलिए आंखों की साफ-सफाई का खास ध्यान रखें।
ब्लॉक आंसू वाहिनी (Blocked Tear Duct) :
आंसू आंख के ऊपर की आंसू ग्रंथियों से बाहर निकलते हैं। ग्रंथियों से निकलने के बाद आंसू पुतली की सतह पर फैलते हैं और कोने में बनी नलिकाओं में चले जाते हैं। अगर ये नलिकाएं बंद हो जाती हैं तो आंसू बनते तो हैं लेकिन बाहर नहीं निकल पाते। बहुत सी चीजें समस्या का कारण बन सकती हैं जैसे संक्रमण, चोट, यहां तक कि बुढ़ापा भी।
पलकों की समस्या (Blocked Tear Duct) :
हमारी पलकें विंडशील्ड वाइपर की तरह काम करती हैं। जब हम पलक झपकाते हैं तो वे आंखों में आंसू फैलाती हैं और जो अतिरिक्त नमी को बहा देती हैं, लेकिन कभी-कभी वे ठीक से काम नहीं कर पातीं। पलकें अगर अंदर की तरफ झुक जाती हैं तो उनके कारण आंंख की पुतली में रगड़ आने लगती है, जिसे एन्ट्रोपियन कहा जाता है। इसके कारण आंखों से पानी आने लगता है। यदि आपकी पलकें अंदर की ओर झुकी हुई हैं, तो इसके लिए सर्जरी की जरूरत हो सकती है।
आंख पर खरोंच :
गंदगी, धूल और कॉन्टैक्ट लेंस से पुतली और कॉर्निया में खरोंच लग सकती है। यदि ऐसा होता है तो आंखों में से पानी आने लगता है क्योंकि यह काफी संवेदनशील हिस्सा होता है। हालांकि, ये खरोंच आमतौर पर 1 या 2 दिनों में ठीक हो जाती है। अगर आपको कॉर्नियल खरोंच हो तो डॉक्टर को दिखना महत्वपूर्ण हो जाता है।
आईलैशेस की समस्या (Eyelash Problems) :
जिस तरह भौहों के बाल गलत दिशा में बढ़ते हैं, उसी तरह कभी-कभी आईलैशेस भी गलत दिशा में बढ़ सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो वे आंखों में रगड़ का कारण बनते हैं और उनसे आंसू आने लगते हैं।
ब्लेफेराइटिस (Blepharitis) :
यह स्थिति आपकी पलकों में सूजन का कारण बनती है. इस स्थिति में आँखों में चुभन होती है, पानी आता है, आंखें लाल होती हैं, पपड़ी बनने लगती है। इसका कारण एलर्जी और संक्रमण हो सकता है।
अन्य कारण (Other Benefits) :
बेल्स पाल्सी, सोजोग्रेन सिंड्रोम, क्रोनिक साइनस इन्फेक्शन, थायरॉइड की समस्या और रुमेटीइड आर्थराइटिस जैसी कई मेडिकल कंडीशन के कारण आंख में से पानी आ सकता है। अगर आपकी आंखों में से बार-बार पानी आता है तो डॉक्टर से मिलें


रायगढ़ (शोर संदेश) शरीर पर चोट लगने की स्थिति में खून का निकलना बंद ना हो रहा हो तो यह हीमोफीलिया रोग का लक्षण भी हो सकता है। यह लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए क्योंकि हीमोफीलिया के दौरान होने वाला आंतरिक रक्तस्राव अंगों और ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकता है और जीवन को खतरे में डाल सकता है।

नई दिल्ली (शोर संदेश)। विश्व के दक्षिण पूर्व एशिया और यूरोप के कुछ हिस्सों में कोरोना वायरस के फिर से मामले बढ़ने लगे हैं। इसका हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि वे इंफ्लूएंजा जैसी बीमारी और सांस संबंधी गंभीर संक्रमण की फिर से निगरानी शुरू करें, ताकि किसी भी तरह के शुरुआती संकेत नजरअंदाज नहीं हो सकें और कोविड नियंत्रण में रहे।
इंफ्लूएंजा-जैसी बीमारी और सांस संबंधी गंभीर संक्रमण के मामलों की जांच सरकार के लिए कोविड प्रबंधन के स्तंभ रहे हैं। बहरहाल, इसकी जांच हाल में रोक दी गई थी, क्योंकि भारत में कोविड-19 के मामले कम आ रहे हैं. निगरानी बढ़ाने के तहत आईएलआई और एसएआरआइ से पीड़ित अस्पताल में भर्ती मरीजों की कोविड जांच कराई जाएगी और संक्रमित नमूनों को जीनोम अनुक्रमण के लिए भेजा जाएगा। भूषण ने पत्र में कहा कि अगर मामलों के नए कलस्टर उभर रहे हैं तो प्रभावी निगरानी की जाए और ILI और SARI मामलों की नियमों के तहत जांच की जाए और उन पर नजर रखी जाए ताकि किसी भी तरह के शुरुआती संकेत नजरअंदाज न हों और कोविड संक्रमण का प्रसार नियंत्रण में रहे।

नई दिल्ली (शोर संदेश)। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि ओमिक्रॉन को कोविड-19 का अंतिम वैरिएंट मानना खतरनाक साबित हो सकता है। संगठन ने कहा कि कोरोना वायरस के और अधिक वैरिएंट सामने आने की आशंका है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यकारी बोर्ड की बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक एधनॉम गेब्रियासिस ने कहा कि परीक्षण और वैक्सीन जैसे उपायों के व्यापक उपयोग से ही इस वर्ष महामारी के घातक दौर से उबरना सम्भव होगा। उन्होंने सूक्ष्मजीव रोधी उपचारों के खिलाफ प्रतिरोधी क्षमता से निपटना, मानव स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन के घातक असर और तम्बाकू का इस्तेमाल कम से कम करने जैसे वैश्विक स्वास्थ्य मुद्दो पर संगठन की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। लेकिन, कहा कि महामारी के घातक दौर से उबरना सामूहिक प्राथमिकता होगी। श्री गेब्रियासिस ने कोरोना संक्रमण से निपटने में अनुशासित और एकजुट प्रयासों की अपील की।

नई दिल्ली (शोर संदेश)। दुनियाभर में कहर ढा रहे कोरोना के ओमिक्रॉन वर्जन के बीच वायरस के एक और वैरिएंट का खतरा मंडराने लगा है। इस वैरिएंट को BA-2 नाम दिया गया है। मध्य प्रदेश के इंदौर में ओमिक्रॉन के सब वैरिएंट BA-2 ने दस्तक दे दी है। ओमिक्रॉन के नए स्ट्रेन से शहर में 16 लोग संक्रमित मिले हैं। इनमें 6 बच्चे भी हैं। वहीं, देशभर से 530 सैम्पल जांच के लिए भेजे गए है। UK, ऑस्ट्रेलिया और डेनमार्क में भी इसके केस सामने आए हैं। यह वैरिएंट ओमिक्रॉन की तरह ही तेजी से फैलता है। ऐसे में इसकी पहचान न होने पर इसके संक्रमण को रोक पाना बड़ी चुनौती है। चिंता की बात यह है कि टेस्ट किट की पकड़ में भी नहीं आ रहा है। इसी वजह से इसे ‘स्टेल्थ’ यानी छिपा हुआ वर्जन कहा जा रहा है। ब्रिटेन, स्वीडन और सिंगापुर में से हर एक देश ने 100 से ज्यादा सैम्पल जांच के लिए भेजे हैं।

नई दिल्ली (शोर संदेश)। कोरोना के इलाज को लेकर सरकार की ओर से नई गाइडलाइंस जारी की गई है। इसमें मरीजों को तीन श्रेणियों में बांटे जाने के साथ ही कई दवाओं के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। नई गाइडलाइन में कहा गया है कि इसका कोई प्रमाण नहीं मिला है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद कोरोना के जिन मरीजों को आक्सीजन की जरूरत नहीं होती है उन्हें इंजेक्शन के जरिये स्टेरायड देना लाभकारी है। एम्स, आइसीएमआर- कोविड-19 नेशनल टास्क फोर्स और स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त निगरानी समूह (डीजीएचएस) द्वारा ‘क्लीनिकल गाइडेंस फार मैनेजमेंट आफ एडल्ट कोविड-19 पेसेंट’ के नाम से संशोधित गाइडलाइंस जारी की गई है। इसमें कहा गया है कि संक्रमण के प्रारंभिक चरण में या ज्यादा मात्रा में या जरूरत से अधिक समय तक स्टेरायड जैसी ताकत बढ़ाने वाली दवाओं के इस्तेमाल से ब्लैक फंगस जैसे संक्रमण का खतरा रहता है। गाइडलाइंस के मुताबिक मध्यम स्तर के संक्रमण वाले मरीज को इंजेक्शन मिथाइलप्रेडनिसोलो 0.5 से एक एमडी प्रति केजी को दो समान डोज या इसके बराबर डेक्सामेथासोन की डोज आमतौर पर पांच से 10 दिन तक दी जा सकती है। गंभीर संक्रमण होने पर रोगी को यह दवा की एक से दो एमजी प्रति केजी को दो समान डोज में पांच से 10 दिन तक दिया जा सकता है। हल्के संक्रमण के मामले में बीमारी शुरू होने के पांच दिन बाद भी अगर बुखार रहता है और खांसी आती है तो बिडसोनाइड 800एसीजी की पांच दिन तक दो डोज ली जा सकती है। अगर खांसी दो से तीन हफ्ते तक लगातार बनी रहती है तो मरीज को टीबी यानी क्षयरोग या अन्य जांच करानी चाहिए। मध्यम या गंभीर तरह के संक्रमण पर आपात स्थितियों में रेमडेसिविर देने की अनुसंशा की गई है, लेकिन यह दवा सिर्फ अस्पताल में भर्ती मरीजों को ही दी जा सकती है और जो आक्सीजन पर नहीं हों। अगर किसी मरीज में संक्रमण के 24 से 48घंटे के भीतर ही गंभीर लक्षण दिखने लगते हैं तो उसे तोसिलिजुमैब देने की अनुमति दी गई है। आइसीयू वाले मरीजों को भी यह दवा दी जा सकती है। सरकार की ओर से बदली गई नई गाइडलाइंस में संक्रमितों की तीन श्रेणियां बनाई गई हैं। इनमें हल्का, मध्यम और गंभीर इंफेक्शन के रूप में मरीजों का वर्गीकरण किया गया है। नई गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि किसी भी श्रेणी के मरीजों के इलाज में एंटीवायरल दवा मोलनुपिराविर और मोनोक्लोनल एंडीबाडी काकटेल को शामिल नहीं किया गया है। समाचार एजंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक इसके अलावा आइवरमेक्टिन, फेविपिराविर और डाक्सीसाइक्लिन जैसी दवाइयों को भी गाइडलाइंस से बाहर रखा गया है।
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नई दिल्ली (शोर संदेश)। भारत में कोरोना टीकाकरण की रफ्तार तेजी से बढ़ती जा रही है। इस बीच केंद्र सरकार के कोविड-19 वर्किंग ग्रुप (NTAGI) के अध्यक्ष डॉक्टर एनके अरोड़ा ने एलान किया है कि भारत में 12 से 14 साल के बच्चों का टीकाकरण मार्च में शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा कि तब तक 15 से 18 साल के किशोरों का टीकाकरण पूरा हो जाने की उम्मीद है। ऐसे में अगले चरण में बच्चों को टीका लगाए जाने की उम्मीद है। डॉक्टर अरोड़ा के मुताबिक, देश में 15-18 आयु वर्ग के 7.5 करोड़ लोग हैं। इनमें से 3.45 करोड़ किशोरों को कोरोना की वैक्सीन लग चुकी है। चूंकि, किशोरों को कोवाक्सिन लगाई जा रही है, इसलिए 28 से 42 दिन के अंदर उन्हें टीके की दूसरी खुराक भी दे दी जाएगी। यानी 15-18 आयु वर्ग का वैक्सिनेशन मार्च तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद 12 से 14 साल वाले बच्चों का टीकाकरण पूरे जोर-शोर से शुरू किया जा सकेगा।

नई दिल्ली (शोर संदेश)। तीन महीने बाद दुनिया के छह देशों में ओमिक्रॉन स्वरूप के संक्रमण में यूटर्न देखने को मिलने लगा है। जिन देशों में गिरावट दिख रही है उनमें यूके, कनाडा, इटली,आयरलैंड, डेनमार्क और आइसलैंड शामिल हैं। इन देशों में संक्रमण प्रसार का ग्राफ अब नीचे की ओर बढ़ने लगा है। हालांकि भारत में अभी ऐसी स्थिति दिखाई नहीं दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अभी यूटर्न आना बाकी है। चूंकि दूसरे देशों में करीब एक महीने से भी अधिक समय पहले से ओमिक्रॉन के मामले मिलने शुरू हुए थे। ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर का पीक भारत में अगले कुछ सप्ताह में ही स्पष्ट हो पाएगा।
आंकड़ों के अनुसार देश में अभी कोरोना की तीसरी लहर चल रही है, जिसमें दैनिक संक्रमण दर 16 फीसदी पार चली गई है और साप्ताहिक संक्रमण भी 13 फीसदी पर आई है। बीते तीन दिन से देश में रोजाना दो लाख से अधिक मामले मिल रहे हैं। वहीं सात से 15 जनवरी के बीच देश में 17.50 लाख से भी ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं।
पांच फीसदी मरीज हो रहे अस्पतालों में भर्ती
विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में अभी पांच फीसदी से भी कम मरीजों को अस्पतालों में भर्ती करने की नौबत आ रही है। हालांकि एक आशंका यह भी कि अगले कुछ दिन में यह दर पांच से 10 फीसदी हो सकती है।
कोरोना और बढ़ने की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि जहां ओमिक्रॉन की वजह से संक्रमण की नई लहर बीती लहर से ज्यादा असरदार दिखाई दी है। ऐसे में अगर भारत में दूसरी लहर से तुलना करें तो अभी कोरोना का प्रसार और अधिक होने की आशंका है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि ब्रिटेन में जब पहली बार ओमिक्रॉन वैरिएंट का पता चला तब वहां करीब छह फीसदी मरीज भर्ती हो रहे थे।
कई गुना बढ़ी सक्रिय मरीजों की संख्या
स्वास्थ्य मंत्रालय की ही एक रिपोर्ट के अनुसार बीते 12 जनवरी तक कई राज्यों में पिछले हफ्ते की तुलना में सक्रिय केस की संख्या कई गुना तक बढ़ गई। उत्तर प्रदेश में कोरोना के सक्रिय मामले 14 गुना 3,173 से बढ़कर 44,466 तक पहुंच गए हैं। जबकि पंजाब में 8.65, मध्य प्रदेश में 10.95 और बिहार में 11.27 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कोरोना से ठीक होने की दर अब 94.83 फीसदी
पश्चिम बंगाल के कोलकाता और हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति जिले में हर दूसरा नमूना संक्रमित मिला है। जबकि सबसे अधिक अरुणाचल प्रदेश के दो जिलों में 77 फीसदी तक संक्रमण दर पहुंच गई है। बहरहाल शनिवार को लगातार तीसरे दिन देश में दो लाख से अधिक लोग कोरोना संक्रमित मिले हैं। देश में कोरोना की रिकवरी दर में लगातार कमी आ रही है।
फिलहाल यह 95 से कम होकर 94.83 फीसदी तक पहुंच गई है। इनके अलावा कोरोना की दैनिक संक्रमण दर 16.66 फीसदी और साप्ताहिक संक्रमण दर 12.84 फीसदी दर्ज की गई है। पिछले एक दिन में 16,13,740 सैंपल की जांच हुई है। हर दिन संक्रमित रोगियों की संख्या बढ़ने की वजह से कोरोना की सक्रिय दर 3.85 फीसदी तक पहुंच गई है। देश में अभी 14,17,820 कोरोना मरीज उपचाराधीन हैं।
आंकड़ों के अनुसार, 3 से 9 जनवरी तक देश के 29 राज्यों में 129 जिले गंभीर श्रेणी में थे लेकिन बीते छह दिन में लगातार बढ़ते मामलों के चलते अब 32 राज्यों में इन गंभीर जिलों की संख्या 236 तक पहुंच गई है। इतना ही नहीं देश के 154 जिलों में भी हालात सामान्य नहीं है। यहां कोरोना की साप्ताहिक संक्रमण दर पांच से 10 फीसदी के बीच है। इसलिए सरकार ने इन सभी जिलों को चिंताजनक श्रेणी में रखा है। हालांकि एक राहत यह भी है कि देश के 344 जिलों में अभी भी संक्रमण दर पांच फीसदी से नीचे है।

हैदराबाद (शोर संदेश)। भारत की पहली स्वदेशी वैक्सीन कोवाक्सिन को लेकर एक बड़ा एलान हुआ है। इस टीके को बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने दावा किया है कि कोवाक्सिन का बूस्टर डोज कोरोनावायरस के ओमिक्रॉन और डेल्टा वैरिएंट को निष्क्रिय कर देता है। कंपनी ने बूस्टर पर जारी शोध के शुरुआती नतीजे आने के बाद यह दावा किया है। इससे पहले भारत बायोटेक ने कहा था कि कोवाक्सिन बूस्टर डोज के उसके परीक्षणों में बिना किसी गंभीर प्रतिकूल घटना के लंबी अवधि के लिए सुरक्षित दिखाया। कोवाक्सिन निर्माता कंपनी ने कहा कि डोज लेने वालों से 90 फीसदी में कोरोना के खिलाफ (दूसरी खुराक के 6 महीने बाद) मजबूत एंटीबॉडी प्रतिक्रिया देखी गई।
15-18 साल के किशोरों के टीकाकरण में भी कोवाक्सिन का इस्तेमाल
भारत बायोटेक की कोवाक्सिन से ही 15 से 18 साल के किशोरों का टीकाकरण किया जा रहा है। हाल ही में भारत बायोटेक ने कहा था कि दूसरे और तीसरे चरण के अध्ययन में उसकी कोवाक्सिन दो से 18 वर्ष आयुवर्ग में सुरक्षित, अच्छी तरह सहन करने योग्य और इम्युनिटी बढ़ाने वाली पाई गई है। भारत बायोटेक के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कृष्णा इल्ला की मानें तो बच्चों और किशोरों पर कोवैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल के डाटा बेहद उत्साहजनक हैं।