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*दुनिया भर में कोरोना की तीसरी लहर भारत के पास अभी भी संभलने का वक्त : डॉ. पॉल*

14-Jul-2021

नई दिल्ली (शोर संदेश)। नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल का कहना है कि दुनिया भर में कोरोना की तीसरी लहर बढ़ी है। अब तक एक दिन में औसतन तीन लाख मामले सामने आ रहे थे जो बढ़कर नौ लाख से अधिक हो चुके हैं।पुरानी लहर की तुलना में कोरोना के करीब 40 फीसदी मामले बढ़ चुके हैं। भारत के पास अभी भी वक्त है। हम चाहें तो यह स्थिति नहीं आएगी। लोग अगर नियमों का पालन करते हैं तो अगली लहर देश में नहीं आएगी। मंगलवार को डॉ. पॉल ने कहा कि इस वक्त हर कोई अगली या तीसरी लहर की चर्चा कर रहा है लेकिन अभी इस पर कोई चर्चा नहीं कर रहा है कि यह लहर आएगी क्यों? अगर देश का हर व्यक्ति नियमों का पालन करेगा तो हम आगामी लहर को नहीं आने देंगे।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हवाला देते हुए बताया कि पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में पीएम ने काफी स्पष्ट संदेश दिए हैं। पीएम ने कहा है कि देश में अगली लहर आने का इंतजार नहीं किया जा सकता है। इस लहर को आने नहीं देना है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि तीसरी लहर कब आएगी की जगह इस लहर को कैसे रोका जाए? इस पर चर्चा होनी चाहिए। डॉ. पॉल ने यहां तक कहा है कि सतर्कता, सावधानी और सजगता का पीएम ने संदेश दिया है।उन्होंने यहां तक कहा है कि आज की स्थिति में असावधानी भारी उछाल ला सकती है। इसे रोकना बहुत जरूरी है। दो गज की दूरी, मास्क और टीकाकरण कोरोना को रोकने के लिए काफी हैं। इन शस्त्रों के जरिए महामारी को फिर से आने से रोका जा सकता है।
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लहर आने से पहले घूमना चाहते हैं लोग
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव कुमार अग्रवाल ने कहा कि कोरोना महामारी में भी लोग तरह तरह के बहाने निकाल रहे हैं। बहुत लोगों को लगता है कि अगली लहर आने से पहले वे घूम कर वापस आ जाएं। कई लोग कहते हैं कि दो साल से घर में है और अब घर जेल जैसा लगने लगा है।
इस तरह की बातें करते समय वे भूल रहे हैं कि कोरोना का असर अस्पतालों के आईसीयू तक का रास्ता है। अगर उस स्थिति से बचना है तो लोगों को सावधानी रखनी होगी। अन्यथा वह न सिर्फ खुद बल्कि औरों के लिए महामारी का स्रोत बन सकते हैं।
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अभी इन पांच राज्यों में सबसे ज्यादा कोरोना
संयुक्त सचिव ने बताया कि सात पूर्वोत्तर सहित 11 राज्यों में अब तक केंद्र सरकार की ओर से उच्च स्तरीय समितियों को भेजा जा चुका है। वर्तमान स्थिति देखें तो देश के पांच राज्यों में सबसे ज्यादा कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं।
रोजाना मिल रहे कोरोना मरीजों में 30.3 फीसदी अकेले केरल से हैं। जबकि 20.8 फीसदी महाराष्ट्र में मिल रहे हैं। इसी तरह तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा से क्त्रस्मश: 8.5, 7.3 और 6.5 फीसदी मामले राष्ट्रीय स्तर पर रोजाना जुड़ रहे हैं। 
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तीसरी लहर का आतंक
ब्रिटेन में अभी कोरोना की तीसरी लहर आ चुकी है। वहां दूसरी लहर में प्रतिदिन 59 हजार के आसपास मामले मिल रहे थे। जबकि अभी तीसरी लहर की शुरुआत में ही 34 हजार से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। बांग्लादेश में पहले सात हजार मामले मिल रहे थे लेकिन अब 13 हजार से अधिक मामले हर दिन मिल रहे हैं।
इसी तरह इंडोनेशिया में 12 से बढ़कर 40 हजार से अधिक मामले रोजाना मिल रहे हैं। इससे पता चल रहा है कि कोरोना की अगली लहर काफी गंभीर है। भारत में यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है क्योंकि दूसरी लहर के दौरान यहां कोरोना का पीक चार लाख संक्रमित मरीजों तक पहुंचा था जोकि प्रतिदिन मिल रहे थे।

 


*खुशखबरी : जल्द लगेगा 12 से 18 साल के बच्चों को कोरोना का टीका*

12-Jul-2021

 00 इसी हफ्ते हो सकता है फैसला

नई दिल्ली (शोर संदेश)। तीसरी लहर को देखते हुए सरकार स्तनपान कराने वाली माताओं और गर्भवती महिलाओं के बाद अब बच्चों को टीका लगाने की योजना बना रही है। इसके तहत पहले 12 से 18 साल के बच्चों को टीका दिया जाएगा। बच्चों का दूसरे चरण का टीकाकरण सितंबर महीने के बाद होगा। इस योजना को शुरू करने के लिए फिलहाल सरकार जाइडस कैडिला की डीएनए वैक्सीन पर विशेषज्ञ कार्य समिति (एसईसी) की सिफारिशों का इंतजार कर रही है। वैक्सीन को आपात इस्तेमाल की अनुमति मिलने के बाद बच्चों को भी यह दी जा सकती है। इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि टीकाकरण में बच्चों को भी शामिल करने की योजना बन चुकी है। 
चूंकि जाइडस कैडिला की वैक्सीन परीक्षण में 12 साल तक के बच्चे शामिल थे। इसलिए वैक्सीन को आपात इस्तेमाल की अनुमति मिलने के बाद वयस्कों के साथ 12 साल तक वालों को वैक्सीन मिलेगी। यह पहला चरण होगा जोकि इसी माह शुरू होने के बाद सितंबर माह तक चलेगा।
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सितंबर में बच्चों पर कोवाक्सिन का परीक्षण पूरा 
सितंबर माह में कोवाक्सिन का परीक्षण भी पूरा हो जाएगा जोकि इन दिनों 2 से 18 साल तक की आयु वालों पर चल रहा है। इसके परिणाम सामने आने के बाद सितंबर-अक्तूबर माह में 12 साल से कम आयु वालों को भी टीकाकरण में शामिल कर लिया जाएगा। 
उन्होंने यहां तक बताया कि आपात इस्तेमाल की अनुमति मिलने के बाद ही राज्यों को दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय की टीकाकरण शाखा ने इस संदर्भ में तैयारी पूरी कर ली है।
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करोड़ से अधिक है आबादी 
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु वालों की कुल आबादी 94 करोड़ से अधिक है। जबकि 18 वर्ष से कम आयु वालों की आबादी करीब 30 से 32 करोड़ के आसपास है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि दो वैक्सीन के साथ बच्चों का टीकाकरण शुरू करने से फायदा होगा, क्योंकि भारत के पास बाल टीकाकरण का अनुभव काफी है। इसका असर कोरोना टीकाकरण पर सकारात्मक रहेगा।
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कंपनी ने शुरू कर दिया उत्पादन 
आपात इस्तेमाल की अनुमति से पहले जाइडस कैडिला ने वैक्सीन का उत्पादन शुरू कर दिया है। सरकार को कंपनी ने जानकारी दी है कि उनके पास अगले तीन माह में तीन से चार करोड़ खुराक उपलब्ध कराने की क्षमता है जिसे पूरा करने के लिए वैक्सीन का उत्पादन शुरू कर दिया है। इसकी पुष्टि करते हुए कंपनी के एक प्रतिनिधि ने बताया कि अगस्त माह तक एक करोड़ खुराक सरकार को उपलब्ध कराने पर काम चल रहा है।

 


*छत्तीसगढ़ में कोरोना से बचाव के लिए अब तक 1.04 करोड़ टीके लगाए गए*

09-Jul-2021

 00 टीकाकरण में कई बड़े राज्यों से आगे, प्रदेश की करीब 30 प्रतिशत आबादी तक पहुंचा टीका

00 45 वर्ष से अधिक के 82 प्रतिशत और 18 से 44 आयु वर्ग के 23 प्रतिशत नागरिक लगवा चुके हैं पहला टीका
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प्रदेश में कोरोना संक्रमण की दर एक प्रतिशत
रायपुर (शोर सन्देश)। कोरोना से बचाव के लिए छत्तीसगढ़ में अब तक (8 जुलाई तक) एक करोड़ तीन लाख 84 हजार टीके लगाए गए हैं। आबादी के हिसाब से टीकाकरण कवरेज के मामले में छत्तीसगढ़ देश के कई बड़े राज्यों से आगे है। प्रदेश में तीन लाख नौ हजार स्वास्थ्य कर्मियों, तीन लाख 16 हजार फ्रंटलाइन वर्कर्स, 45 वर्ष से अधिक के 48 लाख 20 हजार और 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के 31 लाख 32 हजार नागरिकों को कोरोना से बचाव का पहला टीका लगाया जा चुका है। वहीं दो लाख 41 हजार स्वास्थ्य कर्मियों, दो लाख 15 हजार फ्रंटलाइन वर्कर्स, 45 वर्ष से अधिक के 12 लाख 68 हजार तथा 18 से 44 आयु वर्ग के 82 हजार 724 लोगों को दोनों टीके लगाए जा चुके हैं। प्रदेश में 91 प्रतिशत स्वास्थ्य कर्मियों, शत-प्रतिशत फ्रंटलाइन वर्कर्स, 45 वर्ष से अधिक के 82 प्रतिशत नागरिकों और 18 से 44 आयु वर्ग के 23 प्रतिशत युवाओं ने कोरोना से बचाव का पहला टीका लगवा लिया है। वहीं 71 प्रतिशत स्वास्थ्य कर्मियों, 73 प्रतिशत फ्रंटलाइन वर्कर्स और 45 वर्ष से अधिक के 22 प्रतिशत लोगों ने दोनों टीके लगवा लिए हैं।प्रदेश की करीब 30 प्रतिशत आबादी को कोरोना से बचाव का पहला टीका लगाया जा चुका है। छत्तीसगढ़ इस मामले में देश के कई बड़े राज्यों से आगे है। बिहार, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, ओड़िशा, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और राजस्थान की तुलना में छत्तीसगढ़ में टीकाकरण का कवरेज ज्यादा है। देश में टीकाकरण का राष्ट्रीय औसत करीब 22 प्रतिशत है। प्रदेश में 8 जुलाई को टीकाकरण के बाद अभी एक लाख 98 हजार 890 टीके उपलब्ध हैं। इनमें एक लाख 61 हजार 230 टीके कोविशील्ड के और 31 हजार 660 टीके कोवैक्सीन के हैं।छत्तीसगढ़ शासन ने कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण और रोकथाम के लिए किए गए प्रभावी उपायों से प्रदेश में संक्रमण अभी नियंत्रण में है। 8 जुलाई की स्थिति में संक्रमण की दर एक प्रतिशत है। मार्च के आखिरी सप्ताह में प्रदेश की पॉजिविटी दर 8.5 प्रतिशत, अप्रैल में 30 प्रतिशत तथा मई के अंतिम सप्ताह में 4 प्रतिशत थी। कोरोना संक्रमण की शुरूआत से लेकर अब तक प्रदेश में नौ लाख 78 हजार 654 लोग कोरोना से स्वस्थ हो चुके हैं। इनमें से आठ लाख 11 हजार 904 मरीजों ने होम आइसोलेशन में रहकर और एक लाख 66 हजार 750 मरीजों ने कोविड अस्पतालों और कोविड केयर सेंटर्स में इलाज कराकर कोरोना को मात दी है। प्रदेश में अभी कोविड-19 के सक्रिय मामलों की संख्या केवल 4914 है।

 


*कोवैक्सीन के अंतिम चरण का डाटा अच्छा जल्द मिल सकती है डब्ल्यूएचओ से मंजूरी : स्वामीनाथन*

09-Jul-2021

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की मुख्य वैज्ञानिक डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन ने गुरुवार को एक राहत भरी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि भारत बायोटेक की वैक्सीन `कोवाक्सिन` के अंतिम चरण का डाटा अच्छा है, जिससे कि वैक्सीन को डब्ल्यूएचओ से मंजूरी मिलने की उम्मीद और अधिक बढ़ गई है।उन्होंने कहा कि टीके की समग्र प्रभावकारिता कई वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी है। हालांकि डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ इसकी प्रभावशीलता उम्मीद से कम है लेकिन यह अभी भी काफी अच्छा है। वैज्ञानिक ने आगे कहा कि कोवाक्सिन की सुरक्षा प्रोफाइल अब तक डब्ल्यूएचओ के मानकों को पूरा करती है।स्वामीनाथन ने कहा कि हम उन सभी टीकों पर कड़ी नज़र रखते हैं जिन्हें आपातकालीन उपयोग सूची में शामिल किया गया है। हम अधिक से अधिक डाटा जुटाने की कोशिश करते हैं। स्वामीनाथन ने कहा कि अमेरिका को छोड़कर दुनिया के अधिकांश हिस्सों में कोरोना के मामलों में तेजी देखी गई है और मृतकों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। स्वामीनाथन ने भारत में कम से कम 60-70 फीसदी आबादी के प्राथमिक टीकाकरण का सुझाव दिया है।उन्होंने कहा कि भारत ब्रिटेन जैसे देशों से सीख सकता है जो बूस्टर शॉट्स की योजना बना रहे हैं। हालांकि, डब्ल्यूएचओ इतनी जल्दबाजी में बूस्टर शॉट्स की सिफारिश नहीं करेगा। स्वामीनाथन ने कहा कि प्राथमिक टीकाकरण के दायरे को व्यापक बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।स्वामीनाथन ने कहा कि अफ्रीका में मौतों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। इसके पीछे डेल्टा वेरिएंट को माना जा रहा है जो कि पहली बार भारत में पाया गया था। उन्होंने आगे बताते हुए कहा कि अगर मूल स्ट्रेन तीन लोगों को संक्रमित कर सकता है, तो डेल्टा वेरिएंट 6-8 लोगों को संक्रमित कर सकता है।शारीरिक दूरी बनाए रखने और मास्क पहनना जारी रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए स्वामीनाथन ने कहा कि भले ही 70 फीसदी आबादी का टीकाकरण हो लेकिन सावधानी बरतने से इससे बचा जा सकता है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि सरकार को परीक्षण और ट्रैकिंग जारी रखने की लगातार आवश्यकता है।

 


*अब सरकारी केंद्रों में भी उपलब्ध होगी स्पुतनिक-V*

06-Jul-2021

पुणे (शोर सन्देश)। देश में कोरोना महामारी पर काबू पाने के लिए लोगों का तेजी से टीकाकरण किया जा रहा है। टीकाकरण केंद्र पर फिलहाल कोविशील्ड और कोवाक्सिन ही उपलब्ध हैं। सरकारी टीकाकरण केंद्रों पर जल्द ही रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-वी भी उपलब्ध होगी। कोविड -19 कार्य समूह के अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा ने बताया कि टीकाकरण केंद्रों पर स्पूतनिक-वी वैक्सीन मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा, `अभी स्पूतनिक-वी केवल निजी अस्पतालों में ही उपलब्ध है। हम इसे हमारे मुफ्त टीकाकरण कार्यक्रम के तहत उपलब्ध कराना चाहते हैं, लेकिन यह वैक्सीन की सप्लाई पर निर्भर करेगा।`रूस की कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक-वी को -18 डिग्री सेल्सियस तापमान पर स्टोर करना होता है। अरोड़ा ने कहा कि पोलियो वैक्सीन रखने में काम आने वाली कोल्ड चेन फैसिलिटीज को स्पूतनिक-वी स्टोर करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि वैक्सीन देश के ग्रामीण इलाकों तक पहुंच सके।
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जुलाई के अंत तक लग जाएंगी 50 करोड़ डोज: डॉ. अरोड़ा
डॉ. अरोड़ा ने बताया कि पोलियो टीकाकरण के चलते कुछ इलाकों में कोविड वैक्सीनेशन की रफ्तार धीमी पड़ी है। कोविड वैक्सीनेशन प्रोग्राम आने वाले हफ्ते में स्ट्रीमलाइन हो जाएगा। टाइम्स ऑफ इंडिया ने डॉ. अरोड़ा के हवाले से बताया कि अब तक 34 करोड़ डोज लगाईं जा चुकी हैं। डॉ अरोड़ा ने जुलाई अंत तक 12 से 16 करोड़ डोज और लगने की संभावना जताई। जनवरी में केंद्र ने कहा था कि जुलाई अंत तक करीब 50 करोड़ डोज लगा दी जाएंगी ताकि प्राथमिकता वाले समूहों को कवर किया जा सके।
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रोजना एक करोड़ वैक्सीन का लक्ष्य
डॉ. एनके अरोड़ा ने बताया कि वैक्सीन की सप्लाई में बड़ा हिस्सा कोविशील्ड और कोवाक्सिन का ही है। इन दो वैक्सीन का प्रॉडक्शन बढ़ाने के अलावा, स्पूतनिक वी वैक्सीन का आना और मॉडर्ना व जायडस कैडिला की नई वैक्सीन का रोलआउट डेली कवरेज को 50 लाख से बढ़ाकर आने वाले हफ्तों में 80 लाख, यहां तक कि 1 करोड़ भी किया जा सकता है। 
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तीसरी लहर को डेल्टा प्लस से जोड़ना जल्दबाजी
सरकार का लक्ष्य इस साल के अंत तक 18 साल से ऊपर के हर व्यक्ति (करीब 93 करोड़) का टीकाकरण करने का है। डॉ. अरोड़ा ने कहा कि आईसीएमआर की एक ताजा रिपोर्ट अगले साल फरवरी या मार्च तक तीसरी लहर आने की भविष्यवाणी कर रही है, ऐसे में देश के बाद करीब 8 महीने का समय है। उन्होंने कहा कि तीसरी लहर की संभावना को डेल्टा प्लस वैरिएंट से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी। भारत में अभी इस वैरिएंट के 52 मामले सामने आए हैं।

 


*कोरोना के बढ़ते मामलों में छत्तीसगढ़ दूसरे स्थान पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम लेगी राज्य का जायजा*

05-Jul-2021

रायपुर (शोर सन्देश)। कोरोना के संभावित तीसरे लहर को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम सोमवार से छत्तीसगढ़ दौरे पर रहेगी। केंद्रीय स्वास्थ्य टीम में क्लीनिकल और पब्लिक हेल्थ के 2 विशेषज्ञ डाक्टर होंगे। इन 2 विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम 5 बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसमें टेस्टिंग, कांटेक्ट ट्रेसिंग, एक्टिव सर्विलांस, कंटेनमेंट जोन, अस्पताल और बिस्तरों की संख्या, डॉक्टर, एंबुलेस समेत टीकाकरण शामिल है। जांच की शुरुआत जांजगीर-चांपा, बिलासपुर से होगी। इसके अलावा प्रदेश के हर संभाग के जिलों में भी टीम जाकर स्थिति की पड़ताल करेगी। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 1 जुलाई को एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसके अनुसार देश के 6 राज्यों में कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है। इसमें छत्तीसगढ़ का भी नाम था। केंद्र सरकार की लिस्ट में केरल पहले और छत्तीसगढ़ दूसरे नंबर पर था।


*Corona Vaccine की कमी दूर करने के लिए एक्सपर्ट ने दिए सुझाव*

17-Jun-2021

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। भारत में कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है, लेकिन इस बीच कई राज्यों ने टीके की कमी की शिकायत की है। इस बीच एक्सपर्ट्स ने कोरोना वैक्सीन की कमी दूर करने के लिए सुझाव दिया है और कहा है कि वैक्सीन को प्रोडक्शन बढ़ाए बिना टीका लगाने का तरीका बदलने से किल्लत दूर होगी।
एक डोज से पांच लोगों को लग सकेगी वैक्सीन
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर वैक्सीन को मांसपेशियों लगाने के बजाय त्वचा की दूसरी परत (डर्मल) में लगाई जाए तो इसमें वैक्सीन की मात्रा भी कम लगेगी और टीका का असर भी कम नहीं होगा। अभी वैक्सीन की एक डोज लगाने में जितनी मात्रा की जरूरत है, उतने में 5 लोगों को वैक्सीन लग सकेगी।
इंट्रामस्कुलर तरीके से दी जा रही है वैक्सीन
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल देश में कोरोना वैक्सीन इंट्रामस्कुलर तरीके से लगाई जा रही है यानी इंजेक्शन से वैक्सीन को गहराई में मौजूद मांसपेशियों में पहुंचाया जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर वैक्सीन इंट्राडर्मल तरीके दी जाए यानी त्वचा की दूसरी परत में लगाई जाए तो 0.5 ml के बजाय 0.1 ml मात्रा ही काफी होगी. इस तरह इंट्रामस्कुलर तरीके से एक डोज में वैक्सीन की जितनी मात्रा दी जाती है, उतने में इंट्राडर्मल तरीके से 5 लोगों टीका लगाया जा सकता है।
एक्सपर्ट ने रैबीज वैक्सीन का दिया हवाला
टेक्निकल एडवाइजरी कमिटी के चेयरमैन डॉक्टर एमके सुदर्शन ने रैबीज वैक्सीन का हवाला दिया है, जो रैबीज की वैक्सीन पर काफी काम कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि रैबीज वैक्सीन लगाने के लिए इंट्रामस्क्यूलर की जगह इंट्राडर्मल तरीके का उपयो किया गया और यह काफी कारगर रही।
अब तक दी गई वैक्सीन की 26.55 करोड़ डोज
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में अब तक (17 जून, सुबह 7 बजे तक) कोरोना वैक्सीन की 26 करोड़ 55 लाख 19 हजार 251 वैक्सीन की डोज दी गई है. देश में अब तक 21 करोड़ 58 लाख 48 हजार 80 पहली डोज लगाई गई है, जबकि 4 करोड़ 96 लाख 71 हजार 171 लोग टीके की दोनों डोज ले चुके हैं।


*अमेरिका से पहले भारत को मिल सकती है नोवावैक्‍स*

15-Jun-2021

00 कोरोना के खिलाफ 90 फीसदी असरदार
नई दिल्ली (शोर सन्देश)। काेरोना के खिलाफ जारी जंग में भारत के हाथ मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं। देश काे बहुत जल्द एक और वैक्सीन मिलने जा रही है, जिसमें नाम है नोवावैक्‍स। माना जा रहा है नोवावैक्‍स अमेरिका से पहले भारत में लॉन्‍च कर दी जाएगी। देश में अभी तीन वैक्सीन उपलब्ध हैं, जिसमें दो मेड इन इंडिया कोविशील्ड और कोवैक्सीन है और तीसरी ​रूस की स्पुतनिक-V है।
00 20 करोड़ डोज उपलब्ध होेने की उम्मीद
कोरोना वैक्‍सीन का उत्‍पादन कर रही सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) नोवावैक्‍स की मैनुफैक्‍चरिंग पार्टनर होगी। भारत आने पर इसका नाम `कोवावैक्‍स` होगा। फिलहाल SII इस वैक्‍सीन का 18 साल से ज्‍यादा उम्र के लोगों पर ट्रायल कर रही है। ऐसे में उम्मीद है कि नोवावैक्‍स की वैक्‍सीन को सबसे पहले भारत में इमर्जेंसी अप्रूवल मिल सकता है। भारत सरकार के अनुमान के मुताबिक सितंबर से दिसंबर महीने तक नोवावैक्स के 20 करोड़ डोज उपलब्ध हो सकते हैं। यह संख्या और बढ़ सकती है।
00 कोविड-19 के खिलाफ अत्याधिक प्रभावी नोवावैक्स
वहीं नोवावैक्स ने दावा किया है कि उसका टीका कोविड-19 के खिलाफ अत्याधिक प्रभावी है और यह वायरस के सभी स्वरूपों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। कंपनी ने कहा कि टीका कुल मिलाकर करीब 90 फीसदी असरदार है और शुरुआती आंकड़ें बताते हैं कि यह सुरक्षित है। हालांकि अमेरिका में कोविड-19 रोधी टीकों की मांग में कमी आई है, लेकिन दुनिया भर में अधिक टीकों की जरूरत बनी हुई है।
00 एक महीने में 10 करोड़ खुराकों का होगा उत्पादन
​नोवावैक्स टीके को रखना और ले जाने आसान है और उम्मीद की जा रही है कि यह विकासशील देशों में टीके की आपूर्ति को बढ़ाने में अहम किरदार निभाएगा। कंपनी ने कहा कि उसकी योजना सितंबर अंत तक अमेरिका, यूरोप और अन्य जगहों पर टीके के इस्तेमाल के लिए मंजूरी लेने की है और तबतक वह एक महीने में 10 करोड़ खुराकों का उत्पादन करने में सक्षम होगी।


टीकाकरण है सुरक्षा कवच कोरोना टीकाकरण से घटा संक्रमण का खतरा

26-May-2021

मुरादाबाद (शोर सन्देश)। कोरोना की दूसरी लहर की दहशत के बीच राहत देने वाली खबर ये है कि कोरोना से बचाव के लिए टीके की दोनों डोज लेने वाले 99.79 फीसदी लोग पूरी तरह से स्वस्थ हैं। इन्हें कोरोना नहीं जकड़ सका। जबकि पहली डोज लेने वाले 99.87 प्रतिशत लोगों को कोरोना नहीं हुआ। मंडल के पांचों जिलों में दोनों डोज लेने वाले महज 407 लोग संक्रमित हुए हैं। कोरोना से बचाव के लिए किए जा रहे टीकाकरण से संक्रमण का खतरा घटा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मिले15 जनवरी से 23 मई 2021 तक के आंकडे़ भी इसकी पुष्टि कर रहे हैं। मुरादाबाद मंडल में 1,91,850 लोगों ने कोरोना से बचाव के लिए इस अवधि में वैक्सीन की दोनों डोज लीं थीं। उनमें से सिर्फ 407 यानी 0.21 प्रतिशत लोग ही संक्रमित हुए। दोनों डोज लेने वालों में कुल 99.79 फीसदी लोग कोरोना के संक्रमण की चपेट से बाहर रहे। इसी तरह 6,67,727 लोगों ने पहली डोज ली थी। उसमें से 873 लोग संक्रमित हुए। यानी पहली डोज लेने वाले 99.87 प्रतिशत लोग पूरी तरह सुरक्षित रहे। पहली डोज लगवाने वाले लोगों में सिर्फ 0.13 प्रतिशत ही संक्रमित हुए। इन संक्रमितों में भी ज्यादातर केस मुरादाबाद में रिपोर्ट किए गए। आंकड़ों की मानें तो टीकाकरण एक सुरक्षा कवच जरूर है जिसके सहारे कोरोना को मात दी जा सकती है। यह आंकड़े उन लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित कर रहे हैं जो अब तक किसी वजह से टीकाकरण से परहेज करते रहे हैं। लोगों की गलतफहमी भी दूर हो रही हैं। अतीत में बहुत से लोगों में यह गलतफहमी थी कि टीकाकरण के बाद भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं, लेकिन इन आंकड़ों ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे केस न्यूनतम हैं। टीकाकरण कराने वाले एकप्रतिशत से भी कम लोग संक्रमित हुए हैं जबकि दूसरी लहर में कोरोना का वायरस बहुत ताकतवर हो गया है। अच्छी बात यह है कि अब लोग खुद टीकाकरण के लिए आगे आने लगे हैं। ऑनलाइन अपना पंजीकरण करा रहे हैं।


*कोरोना वैक्सीन की 5 करोड़ खुराक देने फाइजर तैयार लेकिन रखी यह शर्त*

26-May-2021

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। भारत में कोरोना वैक्सीन की कमी के बीच अमेरिकी फार्मा कंपनी फाइजर-बायोएनटेक इस साल भारत को पांच करोड़ खुराक देने को तैयार हो गया है, लेकिन कंपनी केंद्र सरकार से नियमों में छूट चाहती है। भारत सरकार और फाइजर-बायोएनटेक के बीच वैक्सीन की डील को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है। कंपनी ने भी एक बयान जारी कर बताया था कि, भारत के साथ वैक्सीन को लेकर बातचीत चल रही है और जल्द ही इसके नतीजे सामने होंगे। सूत्रों के मुताबिक, वैक्सीन डील को लेकर मामला एक जगह फंसा हुआ है। दरअसल, फाइजर-बायोएनटेक ने अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई सरकारों से कानूनी सुरक्षा का भरोसा मांगा है, अब फाइजर यही मांग भारत में कर रही है। कंपनी यह चाहती है कि फाइजर की वैक्सीन लगने के बाद किसी भी प्रकार का कोई कानूनी पेंच फंसता है तो इसके लिए कंपनी जवाबदेह नहीं होगी। केंद्र सरकार को इसके लिए आगे आना होगा।
00 वैक्सीन की कमी से नहीं हो पा रहा वैक्सीनेशन
देश में वैक्सीन की भारी कमी है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश समेत कई बड़े एवं छोटे राज्यों में वैक्सीनेशन ड्राइव जिस गति से होनी चाहिए वो नहीं हो पा रही है। राज्यों को जितने कोटे की रोज जरूरत है, उतनी सप्लाई उन्हें नहीं मिल पा रही है। ऐसे में कई वैक्सीनेशन सेंटर्स बंद करने पड़े हैं। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र ने तो ग्लोबल टेंडर भी निकाला है, लेकिन अब किसी कंपनी से उन्हें वैक्सीन नहीं मिल सका है। वहीं दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों का कहना है कि वे खुद विदेशी वैक्सीन कंपनियों से बात कर चुके हैं, लेकिन इन कंपनियों ने उन्हें सीधे सप्लाई से मना कर दिया है। कंपनियां केंद्र सरकार से डील करना चाहती हैं।
00 देश में अभी तीन वैक्सीन का ही सहारा
देश में अभी कोवाक्सिन और कोविशील्ड के अलावा रूसी कंपनी स्पूतनिक-वी का इस्तेमाल किया जा रहा है। कोवाक्सिन और कोविशील्ड का प्रोडक्शन उस स्तर पर नहीं हो पा रहा, जितने में एक बड़ी आबादी को रोज टीका दिया जा सके। रूसी वैक्सीन ने अभी-अभी सप्लाई शुरू की है। जल्द ही तेलंगाना में इसका प्रोडक्शन शुरू होने वाला है। वहीं केंद्र सरकार ने एलान किया है कि इस साल अगस्त से दिसंबर के बीच पूरे देश के लिए वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी।




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