
सुकमा (शोर सन्देश)। प्रदेश के कुछ जिलों में ब्लैक फंगस के मरीजों के प्रकरण सामने आ रहें हैं। जिसे देखते हुए आम जनों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है। ब्लैक फंगस (म्युकरमाइकोसिस) एक फंगल संक्रमण है। यह उन लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है, जो दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रसित है और दवाईयां ले रहे हैं। इससे उनकी प्रतिरोधात्मक क्षमता प्रभावित होती है। यदि व्यक्ति के शरीर में यह फंगस सूक्ष्म रूप में शरीर के अन्दर चला जाता है, तो उसके साइनस या फेफड़े प्रभावित होंगे, जिससे गंभीर बीमारी हो सकती है। यदि इस बीमारी का इलाज समय पर नहीं किया गया तो यह घातक हो सकती है।
00 यह बीमारी किसे हो सकती है
यह बीमारी कोविड-19 मरीजों में जो डायबीटिक मरीज हैं या अनियंत्रित डायबीटिज वाले व्यक्ति को, स्टेरोईड दवाईयां ले रहे व्यक्ति को या आई.सी.यू. में अधिक समय तक भर्ती रहने से यह बीमारी हो सकती है।
00 बीमारी के लक्षण
आंख-नाक में दर्द और आंख के चारों ओर लालिमा, नाक का बंद होना, नाक से काला या तरल द्रव्य निकलना, जबड़े की हड्डी में दर्द होना, चेहरे में एक तरफ सूजन होना, नाक तालु काले रंग का होना, दांत में दर्द, दांतों का ढि़ला होना, धुंधला दिखाई देना, शरीर में दर्द होना, त्वचा में चकते आना, छाती में दर्द, बुखार आना, सांस की तकलीफ होना, खून की उल्टी, मानसिक स्थिति में परिवर्तन आना। ऐसे कोई भी लक्षण होने
00 बचाव के उपाय-
धूल भरे स्थानों में मास्क पहनकर, शरीर को पूरे वस्त्रों से ढंक कर, बागवानी करते समय हाथों में दस्ताने पहन कर और व्यक्तिगत साफ-सफाई रख कर इस इन्फेक्शन से बचा जा सकता है।
राज्य शासन की ओर से ब्लैक फंगस (म्युकरमाइकोसिस) पर एडवाइजरी जारी की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने पीडि़त मरीजों के उपचार के लिए राज्य के तकनीकी समिति के विशेषज्ञों की ओर से अनुशंसित स्टैन्डर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों को जारी किया है। राज्य में ब्लैक फंगस (म्युकरमाइकोसिस) का इलाज सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में किया जाएगा।

00 प्रदेश की औसत रिकवरी दर भी बढ़कर 92 प्रतिशत हुई
रायपुर (शोर सन्देश)। प्रदेश के सभी जिलों में पिछले एक सप्ताह में रिकवरी दर में बढ़ोतरी हुई है। सभी जिलों में कोरोना से स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रदेश की औसत रिकवरी दर में भी पिछले सप्ताह की तुलना में पांच प्रतिशत की वृद्धि हुई है। राज्य शासन द्वारा कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण और रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रभावी उपायों से अब रिकवरी दर बढ़कर 92 प्रतिशत पर पहुंच गई है। प्रदेश में पिछले सप्ताह 16 मई को रिकवरी दर 87 प्रतिशत थी, जो अब 23 मई की स्थिति में 92 प्रतिशत पर पहुंच गई है। राज्य में अब तक मिले कुल कोरोना संक्रमितों नौ लाख 49 हजार में से आठ लाख 70 हजार 640 स्वस्थ हो चुके हैं। पिछले एक सप्ताह में मुंगेली जिले की रिकवरी दर में सर्वाधिक बढ़ोतरी हुई है। पिछले सप्ताह मुंगेली की रिकवरी दर 77 प्रतिशत थी जो अब 11 प्रतिशत बढ़कर 88 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है। बीते सप्ताह के दौरान कबीरधाम और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की रिकवरी दर में आठ प्रतिशत, रायगढ़, जांजगीर-चांपा और जशपुर की रिकवरी दर में सात प्रतिशत, कोरबा, नारायणपुर बालोद और बलौदाबाजार-भाटापारा की रिकवरी दर में छह प्रतिशत तथा कोरिया, गरियाबंद, बिलासपुर और सरगुजा की रिकवरी दर में पांच प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्तमान में दुर्ग जिले की रिकवरी दर 96 प्रतिशत, राजनांदगांव और सुकमा की 97-97 प्रतिशत, बालोद की 94 प्रतिशत, बेमेतरा, कबीरधाम, कोरबा, गरियाबंद और कोंडागांव की 92-92 प्रतिशत, रायपुर की 96 प्रतिशत, धमतरी, बीजापुर, कांकेर और नारायणपुर की 91-91 प्रतिशत, बलौदाबाजार-भाटापारा, महासमुंद, रायगढ़, जांजगीर-चांपा और बस्तर की 90-90 प्रतिशत, बिलासपुर की 94 प्रतिशत, मुंगेली की 88 प्रतिशत, सरगुजा की 87 प्रतिशत, जशपुर की 86 प्रतिशत, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की 83 प्रतिशत, कोरिया की 81 प्रतिशत, सूरजपुर की 82 प्रतिशत, बलरामपुर-रामानुजगंज की 81 प्रतिशत तथा दंतेवाड़ा की 96 प्रतिशत है।

00 देश के सभी एम्स की अपेक्षा रायपुर एम्स में सर्वधिक मरीज
रायपुर (शोर सन्देश)। कोरोना संक्रमण के बाद अब प्रदेश में ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस) के प्रकोप फैला है। प्रदेश में अब तक 100 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए है,और 1 मरीज़ की मौत हो चुकी है। इनमे से अधिकांश मरीजों का इलाज एम्स में चल रहा है। वर्तमान में यहां 83 मरीजों का इलाज चल रहा है। देश भर के एम्स की बात करें तो रायपुर एम्स में म्यूकोरमाइकोसिस से सर्वाधिक मरीज भर्ती है। वहीं इलाज के मामले में भी रायपुर एम्स पहले स्थान पर है। यहां अब तक 24 मरीजों का सफल ऑपरेशन हो चुका है। रायपुर एम्स में बढ़ते मरीज़ों की अपेक्षा दवा और इंजेक्शन की कमी है। केंद्र से सप्लाई करने का आश्वासन दिया गया है। मामले की नोडल अधिकारी डॉक्टर अजय बेहरा ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ब्लैक फंगस मरीज़ों के इलाज और दवा आपूर्ति को लेकर केंद्रीय समीक्षा बैठक हुई, जिसमें देश के सभी एम्स और अन्य नेशनल स्तर के मेडिकल कॉलेज डायरेक्टर शामिल हुए। डॉक्टर अजय बेहरा ने बताया कि मरीज़ों के इलाज को लेकर प्रबंधन से चर्चा हुई। इसी दौरान रायपुर एम्स की ओर से दवा और इंजेक्शन सप्लाई की मांग की गई है। जितने तेज़ी से मरीज़ बढ़ रहे हैं, उतनी दवा की उपलब्धता नहीं है। बैठक में आश्वासन दिया गया है कि इस दवा की सप्लाई की जाएगी। डॉक्टर बेहरा ने मरीज़ों की स्थिति को लेकर कहा कि वर्तमान में 24 मरीज़ों के आंख, कान, नाक, गला और मस्तिष्क का ऑपरेशन किया जा चुका है। सभी मरीज़ों को नियमित डोज दी जा रही है। जो दवाएं दी जाती है, इसके साइड इफेक्ट भी ज़्यादा हैं। इसलिए नियमित निगरानी में मरीज़ों को रखा गया है।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। कोरोना वायरस के खिलाफ भारत की लड़ाई जारी है। इसी कड़ी में आज कोरोना महामारी से जंग में निर्णायक भूमिका निभाने के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की ओर से विकसित कोरोना की दवा 2-डीजी लॉन्च की गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने डीआरडीओ के मुख्यालय में सोमवार यानी आज सुबह 10:30 बजे कोरोना की देसी दवा की पहली खेप लॉन्च की। अब इन्हें मरीजों को दिया जा सकता है। इस दवा को सबसे पहले दिल्ली के डीआरडीओ कोविड अस्पताल में भर्ती मरीजों को दिया जाएगा।
00 कोरोना की दवा 2DG: कैसे कर सकते हैं इस्तेमाल
कोरोना के खिलाफ जंग में डीआरडीओ की नई दवा उम्मीद की किरण बनकर उभरी है। इस दवा का नाम 2-डीऑक्सि-डी-ग्लूकोज (2-DG) है। डीआरडीओ की यह दवा ऐसे समय में आई है, जब कोरोना की दूसरी लहर ने कोहराम मचा रखा है और तीसरी लहर की बात हो रही है। कोरोना की देसी दवा 2-डीजी पाउडर के रूप में पैकेट में आती है और इसे पानी में घोल कर पीना होता है।
00 डीसीजीआई ने दे दी आपात इस्तेमाल को पहले ही मंजूरी
रक्षा मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में बताया था कि कोविड-19 के माध्यम और गंभीर लक्षण वाले मरीजों पर इस दवा के आपातकालीन इस्तेमाल को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) की ओर से मंजूरी मिल चुकी है। आपको बता दें कि कोरोना के नए मामलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए डीसीजीआई ने इस दवा के आपात इस्तेमाल को मंजूरी दी थी। डीसीजीआई के मुख्यालय में सोमवार यानी 17 मई को कार्यक्रम में दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने इस दवा को लॉन्च किया।

रायपुर (शोर सन्देश) कल 9120 नए कोरोना पॉजिटिव मरीज़ों की पहचान हुई व 12810 मरीज़ स्वस्थ होने के उपरांत डिस्चार्ज/रिकवर्ड हुए।

00 शिकायतों के बाद कोविन पोर्टल में हुआ बड़ा बदलाव
नई दिल्ली (शोर सन्देश)। एक तरफ जहां लोगों को कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। वहीं, वैक्सीन की कमी और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी दिक्कतों ने लोगों को परेशान कर दिया है। हालांकि, सरकार दोनों ही मोर्चों पर व्यवस्था दुरुस्त करने में पूरी शिद्दत से लगी है। इसी क्रम में कोविन पोर्टल में अहम बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों के जरिए कुछ खामियों को दूर किया गया है, साथ ही कुछ ऐसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं, जिससे पंजीकरण को आसान बनाया जा सके। सरकार ने एक मई से 18+ वालों का टीकाकरण शुरू कर दिया है। इसके लिए कोविन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन किए जा रहे हैं। पहले दिन ही बड़ी संख्या में लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था। हालांकि, तभी से तमाम तरह की परेशानियां भी देखने को मिली है। लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी इन परेशानियों का खुलकर जिक्र किया है। इसे ध्यान में रखते हुए अब सरकार ने कोविन पोर्टल में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। कोविन पोर्टल पर किए गए बदलावों में सबसे बड़ा बदलाव है डिजीटल कोड फीचर। अब रजिस्ट्रेशन के समय यूजर के मोबाइल पर एक 4 अंकों का डिजिटल सिक्योरिटी कोड आएगा, जिसे उसे संभालकर रखना होगा। वैक्सीनेशन के बाद यह कोड वैक्सीनेटर को देना होगा। इसके बाद ही संबंधित व्यक्ति का वैक्सीन स्टेटस अपडेट किया जाएगा। यानी सीधे शब्दों में कहें तो इसके बाद ही यह माना जाएगा कि आपको टीका लग चुका है। दरअसल, कई लोगों ने शिकायत की थी कि वैक्सीन लगे बिना ही उन्हें वैक्सीनेशन पूरा होने के मैसेज आ रहे हैं। जिसके बाद यह फीचर जोड़ा गया है। ये बदलाव 8 मई यानी आज से लागू हो जाएंगे। इसके बाद बिना कोड के टीका नहीं लग पाएगा। बता दें कि कोविन सिस्टम पर लागू किया गया यह नया फीचर सिर्फ उन लोगों के लिए होगा, जिन्होंने वैक्सीनेशन के लिए ऑनलाइन बुकिंग की है। आरोग्य सेतु ऐप द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, वैक्सीनेशन सेंटर पर 4-अंकों वाला कोड दिखाने के बाद टीका लग जाएगा। इसके अलावा, यदि आप टीकाकरण के बाद डिजिटल सर्टिफिकेट जनरेट करना चाहते हैं, तो भी आपको पोर्टल पर अपना कोड दर्ज करना होगा। इसके बाद आपको मैसेज आएगा कि आपका टीकाकरण सफलतापूर्वक हो गया है। लेकिन यदि मैसेज नहीं आता है, तो इस बारे में सेंटर को बताना होगा।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। कोरोना महामारी के बीच देश में एक अच्छी खबर आ रही है। इस महामारी से लड़ने के लिए भारत को तीसरा हथियार आज मिलने वाला है। जानकारी के अनुसार रूस की कोरोना वैक्सीन स्पुतनिक-V की पहली खेप पहुँचने वाली है। स्पूतनिक-वी की पहली खेप आने के बाद से भारत में टीकाकरण की रफ्तार और तेज हो जाएगी। रूसी अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है कि आज यानी 1 मई को भारत में स्पूतनिक-वी वैक्सीन की पहली खेप आ जाएगी। बता दें कि स्पूतनिक-वी वैक्सीन को गमालया नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी द्वारा विकसित किया गया है। रूसी कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक-वी, एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन की तरह ही एक वायरल वेक्टर वैक्सीन है। मगर किसी भी अन्य कोरोना वैक्सीन के विपरीत, स्पूतनिक-वी वैक्सीन की दोनों खुराक एक दूसरे से अलग होती हैं। स्पूतनिक वी की दोनों खुराकों में अलग-अलग वैक्टरों का उपयोग SARS-CoV-2 के स्पाइक प्रोटीन को टारगेट करने के लिए किया गया है। बता दें कि कि सार्स-कोव-2 ही कोरोना वायरस का कारण बनता है। वैक्सीन की प्रकृति में भी स्पूतनिक वी की दो खुराक एक ही टीका के थोड़े अलग संस्करण हैं और इसका उद्देश्य कोरोना के खिलाफ लंबी सुरक्षा प्रदान करना है।

00 कोरोना के नए स्वरूप के दोनों बदलावों पर मिली जानकारी
00 वैज्ञानिकों ने कहा -डबल या ट्रिपल म्यूटेशन की थ्योरी गलत
नई दिल्ली (शोर सन्देश)। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में वायरस के नए स्वरूप काफी तेज हो चुके हैं। अलग-अलग राज्यों से डबल और ट्रिपल म्यूटेशन की खबरें आ रही हैं लेकिन वैज्ञानिकों ने इस थ्योरी को गलत बताते हुए कहा है कि समय के साथ-साथ वायरस में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। अगर वायरस के इन आनुवांशिक परिवर्तन को समझना है तो उसके लिए म्यूटेशन इत्यादि के बारे में जानना चाहिए। डबल या ट्रिपल म्यूटेशन के नाम से लोगों में काफी पैनिक भी है। हालांकि वैज्ञानिकों के अनुसार नए स्पाइक म्यूटेशन पहले की तुलना में काफी शक्तिशाली हैं। इनके तेजी से फैलने के साक्ष्य अधिक नहीं है लेकिन लोगों की इम्यूनिटी को तोड़ने में जरूर इनकी भूमिका रहती है। फेफड़ों पर तेजी से हावी होना, मरीज में उच्च संक्रमण की स्थिति बताना और तीन से चार दिन में ही सांस लेने में दिक्कतें पैदा करना इनके लक्षण हैं। हैदराबाद स्थित सीसीएमबी के दिव्य तेज सोवपति ने बताया कि जीनोम सीक्वेसिंग के जरिये उनके पास हर दिन जानकारी अपडेट हो रही है। अभी दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में नए स्पाइक म्यूटेशन देखने को मिल रहे हैं। इन्हीं पर किए अध्ययन में पता चला है कि कोवाक्सिन और कोविशील्ड वैक्सीन नए वेरिएंट्स पर असरदार हैं।
00 पिछले साल ही मिल था बी.1.618
उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल में बी.1.618 की पुष्टि पिछले साल अक्तूबर में हुई थी लेकिन मार्च में यहां से आए सभी सैंपल में यह मिला है। इससे अधिक चिंता की बात यह है कि इस नए वेरिएंट में डीईएल145-146 और ई484के दोनों म्यूटेशन एकसाथ देखने को मिल रहे हैं। इन दोनों ही म्यूटेशन की पहचान इम्युनिटी को कमजोर करने में हुई है।
00 एक ही स्ट्रेन में 15 से ज्यादा स्पाइक म्यूटेशन
ई484के म्यूटेशन इससे पहले बी1.351नामक स्ट्रेन में भी मिल चुका है। इनके अलावा यह बी1.617 में भी मिला था लेकिन इसे डबल या ट्रिपल नहीं कहा जा सकता है। उन्होंने बताया कि बी1.617 नामक यह स्ट्रेन कुछ समय पहले सामने आया था जिसमें अब तक 15 से भी ज्यादा म्यूटेशन हम देख चुके हैं। महाराष्ट्र के विदर्भ में इसे सबसे पहले तलाशा गया था उस दौरान इसका नाम डबल म्यूटेशन इसलिए रखा गया क्योंकि इसमें एल452आर और ई484क्यू स्पाइक म्यूटेशन मिले थे। लेकिन कुछ ही दिन बाद बी1.617 से एल452आर गायब हो गया और अब ई484क्यू स्पाइक म्यूटेशन ही मिल रहा है। इसलिए अब इसे डबल म्यूटेशन का नाम नहीं दिया जा सकता है।
00 ट्रिपल म्यूटेशन की थ्योरी भी है गलत
पश्चिम बंगाल में मिले बी1.618 को ट्रिपल म्यूटेशन बोलना भी गलत है क्योंकि इसमें एल452आर और ई484क्यू के अलावा वी382एल स्पाइक म्यूटेशन मिला है। एल452आर म्यूटेशन तो पहले ही गायब हो चुका है। वहीं ई484क्यू के साथ इसकी मौजूदगी के अब तक बहुत अधिक साक्ष्य नहीं मिले हैं। इसलिए अभी हमें वी382एल स्पाइक म्यूटेशन पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

हैदराबाद (शोर सन्देश)। देश में सीरम इंस्टिट्यूट की कोविशील्ड के बाद अब भारत बायोटेक की कोरोना वैक्सीन `कोवैक्सीन` की कीमत भी तय हो गई है। भारत बायोटेक ने कहा कि भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार हमने कोवैक्सीन डोज की कीमतों की घोषणा की है। इसके तहत राज्य सरकार के लिए प्रति डोज 600 रुपये और निजी अस्पतालों के लिए 1,200 रुपये प्रति डोज दिया जाएगा। वैक्सीन निर्माता ने कहा कि कोवैक्सीन का निर्यात मूल्य 15 से 20 डॉलर रखा है यानी कि यह 1,123 रुपये से लेकर 1,498 रुपये के बीच होगा। भारत बायोटेक के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कृष्णा एम एल्ला ने कहा कि उनकी कंपनी केंद्र सरकार को 150 रुपये प्रति खुराक की दर से कोवैक्सीन की आपूर्ति कर रही है और केंद्र अपनी ओर से यह वैक्सीन मुफ्त वितरित कर रहा है। एल्ला ने कहा कि हम यह बताना चाहते हैं कि कंपनी की आधी से अधिक उत्पादन क्षमता, केंद्र सरकार को आपूर्ति के लिए आरक्षित की गई है। उन्होंने कहा कि कोविड चिकनगुनिया, जीका, हैजा और अन्य संक्रमणों के लिए वैक्सीन विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है कि वैक्सीन की लागत वसूल हो। बता दें कि इससे पहले सीरम इंस्टिट्यूट की वैक्सीन कोविशील्ड के दाम तय किए गए थे। कोविशील्ड और कोवैक्सीन की तुलना करें तो भारत बायोटेक की वैक्सीन महंगी है। जहां निजी अस्पतालों के लिए कोविशील्ड की कीमत 600 रुपये है और राज्यों के लिए 400 रुपये है। वहीं कोवैक्सीन वैक्सीन की कीमत की बात करें तो निजी अस्पतालों को यह 1200 रुपये और और राज्य सरकार को यह 600 रुपये में मिलेगी।
00 सीरम की कोविशील्ड वैक्सीन की कीमत को लेकर उठने लगे थे सवाल, कंपनी ने दी सफाई
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोरोना वैक्सीन `कोविशील्ड` निजी अस्पतालों को 600 रुपये प्रति खुराक की दर पर बेची जाएगी जो कि दुनिया के निजी अस्पतालों में मिलने वाली सबसे महंगी कोरोना वैक्सीन बताई जा रही है। वहीं अब इसपर सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने सफाई देते हुए कहा है कि अग्रिम वित्त पोषण के चलते दुनिया भर में कोरोना वैक्सीन की शुरुआती कीमत कम थी, अब उत्पादन बढ़ाने के लिए निवेश करना होगा।
बता दें कि पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने इस सप्ताह की शुरुआत में वैक्सीन की कीमत राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के साथ किसी नए करार के लिए 400 रुपये प्रति खुराक और निजी अस्पतालों के लिए 600 रुपये प्रति खुराक तय की थी।
एसआईआई एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन कोविशील्ड का विर्निमाण करती है। वह इस समय केंद्र सरकार को 150 रुपये प्रति खुराक की दर से वैक्सीन की आपूर्ति कर रही है। एसआईआई ने कहा कि भारत वैक्सीन की कीमत और वैश्विक कीमतों के बीच एक गलत तुलना की गई है। कोविशील्ड आज बाजार में उपलब्ध कोविड-19 की सबसे सस्ती वैक्सीन है।
00 कोवैक्सीन 78 फीसदी तक प्रभावी : भारत बायोटेक
भारत बायोटेक ने बुधवार को कहा था कि उसका टीका कोवैक्सीन तीसरे चरण के अंतरिम विश्लेषण के तहत कोविड-19 संक्रमण के हल्के, मध्यम, और गंभीर लक्षण वाले मामलों में 78 फीसदी तक प्रभावी पाया गया है। कंपनी ने कहा कि तीसरे चरण के अध्ययन का दूसरा अंतरिम आंकड़ा यह बताता है कि कोवैक्सीन टीका लेने के बाद संक्रमित व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती होने जरूरत 100 फीसदी तक कम हो जाती है (यानी अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत नहीं आती)।
भारत बॉयोटेक ने एक बयान में कहा था कि हाल में कोरोना संक्रमण के बढ़े मामलों के बीच 127 कोविड संक्रमण लक्षण वाले मामले दर्ज किए गए। इसमें हल्के, मध्यम और गंभीर लक्षण वाले कोविड19 संक्रमण के प्रति यह टीका 78 फीसदी तक प्रभावी पाया गया।

धमतरी (शोर सन्देश)। कोरोना संक्रमण की रोकथाम और निगाह रखने के लिए कलेक्टर जय प्रकाश मौर्य ने संयुक्त दल गठित किया है। इसके मद्देनजर राजस्व, पुलिस और नगरपालिक निगम धमतरी की टीम विभिन्न प्रतिष्ठानों में अधिक दाम पर वस्तुओं की बिक्री, आवश्यक वस्तुओं के अवैध भण्डारण करने सहित लाॅकडाउन के नियमों का पालन नहीं करने वालों की जांच कर कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में 21 अप्रैल को दल ने धमतरी शहर के पांच प्रतिष्ठानों में दबिश देकर आठ हजार रूपए की चालानी कार्रवाई की । इनमें सिहावा रोड स्थित धमतरी चिकन सेंटर, सूरज मेडिकल स्टोर घड़ी चौक, शांति कालोनी स्थित न्यू ओम किराना स्टोर, आकृति प्रोविजन और कामद डेयरी शामिल है।