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00 66 प्रतिशत होगी कोरोना पर असरदार
नई दिल्ली (शोर संदेश)। कोवैक्सीन के बाद दूसरी स्वदेशी वैक्सीन जायडस कैडिला `जायकोव-डी` कोरोना पर 66 प्रतिशत तक असरदार होगी। वहीं डेल्टा प्लस वैरिएंट पर भी यह वैक्सीन 66 प्रतिशत असर करेगी। यह जानकारी जायडस ग्रुप के एमडी डॉ. शार्विल पटेल ने दी। उन्होंने बताया कि वैक्सीन को मंजूरी मिलने के बाद अब अगले सप्ताह तक इसकी कीमत का भी निर्धारण कर लिया जाएगा। सितंबर महीने में इसकी सप्लाई भी शुरू हो जाएगी। डॉ. शार्विल ने बताया कि अक्टूबर से वैक्सीन का उत्पादन एक करोड़ तक करने का लक्ष्य रखा गया है।
00 28 वें व 56वें दिन लगेगी दूसरी व तीसरी डोज
जायडस कैडिला की जायकोव-डी वैक्सीन तीन डोज में दी जाएगी। वैक्सीन की एक डोज लगने के बाद दूसरी डोज 28वें दिन व तीसरी डोज 56वें दिन लगाई जाएगी। यह वैक्सीन को 12 वर्ष से ज्यादा की उम्र के बच्चों को लगाई जाएगी।
00 डीएनए आधारित है वैक्सीन
खास बात यह है कि इस वक्त जहां दुनियाभर में आरएनए वैक्सीन की मौजूदगी सबसे ज्यादा है, वहीं जायडस कैडिला की ये वैक्सीन विश्व की पहली डीएनए आधारित वैक्सीन है। कोविड-19 संबंधी सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गनाइजेशन (CDSCO) की एक विशेषज्ञ समिति ने जायकोव-डी को मंजूरी देने के जॉयडस कैडिला के आवेदन पर गुरुवार को विचार किया था। इसके बाद इसने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) को इसे आपात इस्तेमाल की इजाजत देने की सिफारिश की। डीसीजीआई ने शुक्रवार को मंजूरी दे दी थी।
00 50 केंद्रों पर ट्रायल का दावा
जायडस कैडिला ने दावा किया है कि उसने भारत में वैक्सीन का सबसे बड़ा ट्रायल किया है। 50 से ज्यादा केंद्रों पर इस वैक्सीन का परीक्षण किया गया। अब तक सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड, भारत बॉयोटेक की कोवाक्सिन, रूस की स्पूतनिक-वी, अमेरिका की मॉडर्ना व जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है। भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोवाक्सिन देश की पहली स्वदेशी वैक्सीन है।
00 कई खासियत है इस वैक्सीन की
कई मामलों में इसे सबसे खास माना जा रहा है। जायकोव-डी वैक्सीन की सबसे खास बात यह है कि यह दुनिया की पहली डीएनए प्लाजमिड वैक्सीन होगी। देश में लग रही कोरोना की बाकी वैक्सीनों से अलग जायकोव-डी के तीन डोज देने की जरूरत होगी।
00 बगैर सुई के लगने से बच्चों को राहत मिलेगी\
जायकोव-डी बगैर सुई के दी जाएगी। इससे 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को यह आसानी से लगाई जा सकेगी। यह इंजेक्टर के जरिये दी जाएगी। दर्द न के बराबर होगा। यह 12-18 साल के वायु वर्ग वालों के साथ बड़ों को भी लग सकेगी। देश में अभी सिर्फ 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का ही टीकाकरण हो रहा था। जायकोव-डी से अब 12 से 18 साल तक के किशोरों को भी टीके लग सकेंगे। जायडस कैडिला की एक साल में 10 करोड़ से 12 करोड़ खुराक बनाने की तैयारी है।

रायपुर (शोर संदेश) प्रदेश में 24 अगस्त से 28 सितम्बर तक शिशु संरक्षण माह का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान प्रत्येक मंगलवार व शुक्रवार को शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच बच्चों के स्वास्थ्य संवर्धन संबंधी विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान बच्चों के स्वास्थ्य सुधार के लिए स्वास्थ्य केन्द्रों और आंगनबाड़ियों में विभिन्न गतिविधियों का आयोजना किया जाएगा, जिसमें स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा शिक्षा विभाग आपसी समन्वय से काम करेंगे।अभियान के तहत बच्चों को रतौंधी और एनीमिया से बचाव के लिए विटामिन-ए तथा आयरन फोलिक एसिड सिरप पिलाया जाएगा। बच्चों में कुपोषण के आंकलन के लिए उनका वजन लिया जायेगा और पालकों को बच्चों की आयु के अनुरूप पोषण आहार की जानकारी दी जाएगी। इस दौरान आंगनबाड़ियों में भी हितग्राहियों को पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही अति गंभीर कुपोषित बच्चों कोे चिन्हित कर पोषण पुनर्वास केन्द्रों में भेजा जाएगा, जिससे पुनर्वास केन्द्र में समुचित देखभाल, पोषण आहार और उपचार से बच्चे को कुपोषण मुक्त किया जा सके। शिशु संरक्षण माह के तहत एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा परिवार भ्रमण के दौरान गर्भवती माताओं एवं बच्चों को परामर्श भी दिया जायेगा।कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए नियमित टीकाकरण कार्यक्रम तथा शिशु संरक्षण माह हेतु गठित जिलास्तरीय टास्क फोर्स को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही इस दौरान आयोजित गतिविधियों में कोविड-19 से बचाव के लिए दिशा-निर्देशों का पालन करने कहा गया है।


00 वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद भी संक्रमित हो गई थी महिला
मुंबई (शोर संदेश)। महाराष्ट्र में डेल्टा प्लस वैरिएंट से मौत का दूसरा मामला सामने आया है। मुंबई के घाटकोपर में 63 वर्षीय महिला की मौत जुलाई में हुई थी। रिपोर्ट आने के बाद महिला में डेल्टा प्लस वैरिएंट की पुष्टि हुई है। इससे पहले महाराष्ट्र के रत्नागिरी में 13 जून को 80 वर्षीय महिला की मौत भी डेल्टा प्लस वैरिएंट की वजह से हुई थी।
खास बात यह है कि महिला वैक्सीन के दोनों डोज ले चुकी थी। इसके बाद भी उसे फेफड़ों व सांस लेने में समस्या हुई, जिसके बाद उसे घर में ही ऑक्सीजन लगाया गया। 21 जुलाई को उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई और 24 जुलाई को वह अस्पताल में भर्ती हुई, जहां तीन दिन बाद उसकी मौत हो गई। 11 अगस्त को राज्य स्वास्थ्य विभाग की ओर से महिला में डेल्टा प्लस वैरिएंट की जानकारी बृहन्मुंबई महानगर पालिका को दी गई।
00 महिला के संपर्क में सात लोगों में डेल्टा प्लस
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कुछ कोरोना संक्रमित मरीजों का जीनोम स्वीकेंस टेस्ट किया गया था। सामने आया है कि सात लोग डेल्टा प्लस वैरिएंट से संक्रमित हैं। इन सभी में यह वैरिएंट एक दूसरे के संपर्क से आया है। महानगर पालिका के अधिकारियों का कहना है कि वह महिला उन सात लोगों में से एक थी। अब, महिला के संपर्क में आने वाले दो लोगों में भी डेल्टा प्लस वैरिएंट की पुष्टि हुई है। बीएमसी के पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट के कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मंगला गोमरे ने बताया कि 63 वर्षीय जिस महिला की मौत डेल्टा प्लस वैरिएंट से हुई थी। उसके संपर्क में आने वाले सभी लोगों की जांच की जा रही है, जिसमें छह लोगों में कोरोना के लक्षण देखे गए हैं। सभी के सैंपल जीनोम स्वीकेंस के लिए भेजे गए हैं, जिसमें से दो में डेल्टा वैरिएंट की पुष्टि हुई है। वहीं अन्य चार लोगों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुंबई में डेल्टा प्लस वैरिएंट से मौत का यह पहला मामला सामने आया है।
00 लगातार बिगड़ती गई तबीयत
एन वार्ड के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. महेंद्र खंडडे ने बताया कि पीड़ित महिला को गोदरेज मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन, यहां उसकी तबीयत बिगड़ती गई, जिसके बाद परिवार के लोग उसे ब्रीच कैंडी अस्पताल ले गए। यहां महिला की मौत हो गई।
डेल्टा प्लस वैरिएंट काफी संक्रामक है। इस कारण बुधवार को पूरे राज्य में 20 नए डेल्टा प्लस वैरिएंट मामलों की पुष्टि हुई है। इसमें सात मुंबई, पुणे व थाने में छह-छह मामले हैं। राज्य में डेल्टा प्लस वैरिएंट मामलों की संख्या 65 पहुंच गई है। इसमें से 33 मरीजों की उम्र 19 से 45 साल के बीच है। वहीं 17 मरीज 46 से 60 की उम्र के हैं।
00 कई देशों में आक्रामक दिख रहा डेल्टा
नई दिल्ली स्थित आईजीआईबी के डॉ. विनोद स्कारिया ने बताया कि डेल्टा के बाद अब जितने भी स्वरूप सामने आ रहे हैं उन सभी को डेल्टा प्लस की श्रेणी में ही रखा जा रहा है। अमेरिका सहित कई देशों में यह काफी आक्रामक दिख रहा है, लेकिन भारत में अभी तक ऐसा नहीं है। इन नए स्वरूपों की पहचान भारत में जरूर हुई है लेकिन उन मरीजों से अधिक लोगों के संक्रमित होने की जानकारी नहीं है लेकिन दूसरे देशों का उदाहरण लें तो यह स्थिति कभी भी भारत में आ सकती है। इसलिए सभी को लगातार सावधानी बरतनी होगी।
00 अमेरिका व ब्रिटेन में मिले हैं डेल्टा प्लस के नए स्वरूप
डॉ. विनोद ने बताया कि ज्यादातर डेल्टा प्लस के नए स्वरूप अमेरिका व ब्रिटेन में मिले हैं। भारत में अभी तक डेल्टा के अलावा डेल्टा प्लस, एवाई 2.0, एवाई 3.0 व एवाई 5 तक मिल चुका है। ब्रिटेन में भी एवाई 5 मिल चुका है। ऐसे में डेल्टा के नए स्वरूपों की वैश्विक स्तर पर काफी समानता भी देखने को मिल रही है।

00 अक्तूबर में हालात होंगे ज्यादा खराब
नई दिल्ली (शोर संदेश)। भारत में कोरोना की तीसरी लहर इस महीने से दस्तक दे सकती है। विशेषज्ञों ने कहा है कि अगस्त के महीने में कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है, जिसमें रोजाना एक लाख कोरोना के मामले सामने आएंगे। इस वक्त देश में हर दिन 40 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं। वहीं 550 से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है, जबकि रविवार को 39 हजार लोग स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगस्त के महीने में शुरू होने वाली तीसरी लहर अक्तूबर में अपने चरम पर जा सकती है। दूसरी लहर में कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था को देखते हुए केंद्र ने राज्यों से ऑक्सीजन, दवा समेत अन्य जरूरी सामानों को पहले ही उपलब्ध रखने का निर्देश दिया है। हालांकि, कोरोना की तीसरी लहर दूसरी लहर के मुकाबले ज्यादा खतरनाक नहीं होगी, विशेषज्ञों ने बताया कि दूसरी लहर में देश में हर रोज 4 लाख नए मामले देखने को मिले थे, लेकिन अब डरावनी तस्वीर नहीं दिखेगी। कोरोना की स्थित के बारे में अनुमान लगाने वाले विशेषज्ञों का आकलन एक गणितीय मॉडल पर आधारित था। मई में आईआईटी हैदराबाद के प्रोफेसर विद्यासागर ने कहा कि भारत के कोरोना वायरस का प्रकोप आने वाले दिनों में गणितीय मॉडल के आधार पर चरम पर हो सकता है।
00 केरल और महाराष्ट्र में बढ़ रहे मामले
हैदराबाद और कानपुर आईआईटी के प्रोफेसरों के नेतृत्व में शोधकर्ताओं का हवाला देते हुए एक रिपोर्ट में बताया गया कि कोविड -19 मामलों में हो रही बढ़ोतरी कोरोनो वायरस महामारी की तीसरी लहर को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने बताया कि यह अक्तूबर में अपने पीक पर पहुंच सकती है। विशेषज्ञों ने कहा कि केरल और महाराष्ट्र में जिस तरह कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं इससे स्थिति खराब हो सकती है। बता दें कि केरल में कोरोना के मामले रोजना 20 हजार से ज्यादा आ रहे हैं। वहीं, महाराष्ट्र में करीब 7 हजार मामले सामने आ रहे हैं। दोनों राज्यों में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
00 10 राज्यों में बढ़ रहा कोरोना
मंत्रालय के मुताबिक पिछले एक दिन में पांच राज्यों से 80.36 फीसदी नए कोरोना केस सामने आए हैं जिसमें अकेले केरल से 49.3 फीसदी केस हैं। वहीं मौत को लेकर बात करें तो सर्वाधिक महाराष्ट्र में 225 मरीजों ने बीते शनिवार को दम तोड़ दिया। केरल में 80 मरीजों की जान गई। फिलहाल जिन 10 राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं उनमें केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, ओडिशा, असम, मिजोरम, मेघालय, आंध्र प्रदेश और मणिपुर शामिल हैं।

00 4 करोड़ 97 लाख से अधिक राशि का वितरण
सूरजपुर (शोर संदेश)। कोरोना संक्रमण काल 2020-21 में भी पहली बार गर्भवती होने वाली जिले की 2418 महिलाओं को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में सहायता राशि दी गई है। जिले में कलेक्टर डॉ गौरव कुमार सिंह के निर्देशन एवं जिला पंचायत सीईओ राहुल देव के मार्गदर्शन में पहली बार गर्भवती व धात्री महिलाओं को तीन किस्तों में पांच हजार रुपये दिए जा रहे हैं, ताकि वे अपने स्वास्थ्य की बेहतर ढंग से देखभाल कर सकें। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से तीन अलग-अलग किश्तों में यह रकम खाते में भेजी गई। 2017 से अब तक करीब 13732 महिलाएं योजना का लाभ ले चुकी हैं। जिसमे करीब 4 करोड़ 97 लाख 90 हजार रुपये की राशि का वितरण किया जा चुका है। गर्भवती महिलाओं को जरूरी पोषण न मिलने से वह तमाम प्रकार की बीमारी से संक्रमित हो जाती हैं। जिससे उनके साथ गर्भ में पल रहे बच्चे भी बीमार एंव कुपोषित हो जाते हैं। ऐसी महिलाओं को कुपोषण से बचने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को लागू किया है। योजना में गर्भ धारण से बच्चे के जन्म लेने तक गर्भवती महिला को तीन किस्तो में पांच हजार रूपये दिया जाता है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी चंद्रबेश सिंह सिसोदिया ने बताया कि गर्भवती महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य की देखभाल के लिए यह अति महत्वाकांक्षी योजना है। जिले में यह योजना एक जनवरी 2017 से संचालित है। उन्हीने बताया कि अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक जिले में 2418 महिलाओं को योजना का लाभ दिया गया। योजना में पहली बार गर्भवती होने पर महिलाओं को उनके खाते में शासन पांच हजार रुपये तीन किस्तों में देती है। पहली बार गर्भधारण करने वाली महिला को पंजीकरण कराने पर प्रथम किस्त के रुप में एक हजार, प्रसव पूर्व जांच होने पर दो हजार और प्रसव होने पर बच्चे को सभी टीके लगने पर तीसरी किस्त में दो हजार रुपये मिलता है।

रायपुर(शोर संदेश) डी.डी.नगर रायपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नई अतिरिक्त सुविधाओं के विस्तार एवं आधुनिक मशीनों के रखरखाव हेतु भवन निर्माण के लिए 61.96 लाख रुपए की राशि छत्तीसगढ़ शासन से स्वीकृति प्राप्त हुई है | आपको ज्ञात हो कि विगत 3 वर्ष पूर्व से भवन स्वीकृति के अभाव में पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को मोवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में संलग्न कर काम चलाया जा रहा था जिसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर की जुझारू वार्ड पार्षद श्रीमती मधु चंद्रवंशी ने पिछले वर्ष जनवरी 2020 में ही वार्ड वासीयों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर सेक्टर दो स्थित पानी टंकी के भवन को नवीनीकृत कर उसमें वार्ड वासियों की सुविधाओं के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा प्रारंभ कराई गई थी | पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर की स्थानीय वार्ड पार्षद श्रीमती मधु चंद्रवंशी ने कहा है कि वार्ड वासियों के जागरूकता एवं सभी वार्ड वासियों के सहयोग से 1 वर्ष में ही पानी टंकी वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को कोरोना वैक्सीनेशन एवं ओ.पी.डी. सुविधाओं की अपार सफलता के कारण से ही छत्तीसगढ़ की 3 स्वास्थ्य केंद्र जिसमें डी.डी. नगर विकास खंड धरसीवा जिला रायपुर भी शामिल है को छत्तीसगढ़ शासन की ओर से स्वास्थ्य केंद्र में अतिरिक्त सुविधाओं के विस्तार एवं आधुनिक मशीनों के रखरखाव हेतु हेतु भवन निर्माण करने के लिए 61.96 लाख की राशि स्वीकृत की गई है | पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर की वार्ड पार्षद श्रीमती मधु चंद्रवंशी ने इसके लिए सभी वार्ड वासियों को शुभकामनाएं एवं बधाई दी है एवं छत्तीसगढ़ शासन का भी इसके लिए आभार व्यक्त किया है एवं वार्ड पार्षद मधु चंद्रवंशी तथा उसके प्रतिनिधि आँशु चंद्रवंशी ने वार्ड में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भरपूर स्वास्थ्य लाभ लेने की अपील वार्ड वासियों से की है |

तामेश्वर सेन कबीरधाम (शोर संदेश)- कोरोना नामक वैश्विक महामारी के संभावित तीसरे लहर से बचने के लिए लोगों ने वैक्सीन लगवाना समझा जरूरी, ताकि संक्रमण से बचा जा सके। पंडरिया विकास खण्ड के समीपस्थ ग्रा.पं. सोमनापुर नया में 29जुलाई को स्थान- पू.मा.शाला टीकाकरण के सातवें कैंप में स्वास्थ्य टीम को मिली बड़ी सफलता। इस बार 70 डोज भेजा गया था, वेक्सीनेशन कराने वालों की बढ़ते संख्या को देखते हुए शाम 4 बजे 100 डोज फिर मंँगाना पड़ा।आज 18+ के 105 और 45+ के 47 लोगों को कोविशील्ड का डोज लगा। जिसमें 147 लोगों को पहला डोज एवं 05 लोगों को दूसरा डोज लगा। आज कुल 152 लोगों का वैक्सीनेशन किया गया। इससे पहले चार बार तक सिर्फ 10-10 लोग ही टीका लगवाए थे, पांचवें में 100, छठवें में 121 लोगों ने टीका लगवाए थे। आज की टीकाकरण अभियान में श्री रमेश पाटले(आर.एच.ओ.मेल), श्रीमती अर्चना श्रीवास्तव (ए.एन.एम.), श्री महेश जायसवाल, कार्तिक खुंटे,पुखराज सिंह (शिक्षक), श्रीमती अनिता सेन, दुर्गा पटेल (आंगनबाड़ी कार्यकर्ता), कजरी बाई, चंद्रिका पटेल ( स्वास्थ्य मितानिन), ग्रा.पं. सरपंच श्री भूपेंद्र पटेल,सचिव जितेंद्र लहरे एवं जागरूक ग्रामीणजनो के विशेष सहयोग से कार्यक्रम सफल रहा।

00 कोविशील्ड की 50 तो कोवाक्सिन की एक शीशी 180 रुपये अधिक महंगी हुई
नई दिल्ली (शोर संदेश)। देश में कोरोना टीकाकरण को शुरू हुए छह महीने से अधिक समय निकल चुका है। ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही थी कि वैक्सीन का उत्पादन बढ़ने के साथ ही इनकी कीमतों में और भी अधिक गिरावट आ सकती है लेकिन ऐसा हुआ नहीं बल्कि केंद्र सरकार पर खर्चा पहले की तुलना में और अधिक बढ़ गया है।इस साल जनवरी में केवल जुलाई तक के लिए ही फार्मा कंपनियों के साथ सरकार ने कीमत तय की थी। उस दौरान कोविशील्ड की एक खुराक 200 और कोवाक्सिन की 206 रुपये कीमत तय हुई थी लेकिन अब नई कीमतों के तहत यह कीमत बढ़कर 205 और 215 हो चुकी है। यानी कोविशील्ड वैक्सीन की एक शीशी पर सरकार को 50 रुपये अधिक (एक शीशी में दस खुराक) देने पड़ रहे हैं। जबकि कोवाक्सिन की एक शीशी पर यह खर्चा 180 रुपये (एक शीशी में 20 खुराक) तक महंगा हो गया है।अब सरकार को इन्हीं कीमतों पर नया ऑर्डर देना पड़ा है। स्वास्थ्य मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार 16 जुलाई को केंद्र सरकार ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को कोविशील्ड वैक्सीन की 37.5 करोड़ खुराक का ऑर्डर दिया है। जबकि भारत बायोटेक को 28.5 करोड़ खुराक का ऑर्डर मिला है।इसके पीछे एक बड़ी वजह कुल वैक्सीन का 75 फीसदी आपूर्ति सरकारी केंद्रों में शामिल होना माना जा रहा है। हालांकि भारत बायोटेक की कोवाक्सिन स्वदेशी होने के बावजूद कोविशील्ड की तुलना में अभी भी महंगी है। एक लंबा वक्त गुजरने के बाद भी जहां एक तरफ कोवाक्सिन का उत्पादन अभी भी मंद गति से चल रहा है। वहीं दूसरी ओर इसकी महंगी दरें सरकार के साथ साथ आम आदमी के लिए भी ज्यादा हैं क्योंकि निजी टीकाकरण केंद्रों में इन दिनों सबसे महंगी वैक्सीन भी यही है।
00 कब-कब सरकार ने वैक्सीन का दिया ऑर्डर
केंद्र सरकार ने वैक्सीन खरीदने के लिए पहला ऑर्डर इस साल 10 जनवरी को दिया था। उस दौरान कोविशील्ड की 1.1 करोड़ और कोवाक्सिन 55 लाख डोज का ऑर्डर दिया गया लेकिन इसके बाद फरवरी में तीन बार ऑर्डर (3,10 और 24 फरवरी) दिया जिसके तहत कोविशील्ड को 4.50 करोड़ डोज शामिल थीं लेकिन कोवाक्सिन की केवल 45 लाख डोज ही शामिल रहीं। इसके बाद 12 मार्च, 5 मई और 16 जुलाई को क्रमश: 12, 16 और 66 करोड़ डोज का ऑर्डर दिया जा चुका है। अब तक सरकार 100 करोड़ डोज का ऑर्डर सिर्फ दो कंपनियों को दे चुकी है जिनमें अकेले सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के पास 64.1 करोड़ डोज का ऑर्डर है। जबकि भारत बायोटेक के पास केवल 36.5 करोड़ डोज का ऑर्डर है।
00 आईसीएमआर को मिल रहा पांच फीसदी का मुनाफा
भारत बायोटेक की कोवाक्सिन पहली स्वदेशी कोरोना वैक्सीन है। इसे नई दिल्ली स्थित इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने तैयार किया है। इस वैक्सीन को लेकर हुए एमओयू के अनुसार कोवाक्सिन की हर डोज पर पांच फीसदी का मुनाफा आईसीएमआर को मिलना तय है। यह मुनाफा साल में दो बार (हॉफ ईयर) में आईसीएमआर को मिलेगा।

पुडुचेरी (शोर संदेश)। भारत में कोरोना वायरस के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। वहीं तीसरी लहर भी बच्चों पर कहर बनकर टूट रही है। कई हिस्सों में बड़ी संख्या में बच्चे इसके शिकार हो रहे हैं। ताजा मामला पुड्डुचेरी का है। यहां 20 बच्चे एक साथ बीमार पड़ गए हैं। आनन-फानन में सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल सभी की हालत खतरे से बाहर है।पुडुचेरी में कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद 20 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सेवा निदेशक एस मोहन कुमार ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बच्चों को यहां के कादिरकामम स्थित इंदिरा गांधी सरकारी मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुमार ने बताया कि बच्चों की आयु का ब्योरा जुटाया जा रहा है।देश में फिर से रोजाना 40 हजार से ज्यादा मामले सामने आने लगे हैं। इससे 15 दिन पहले कोरोना की रफ्तार कम हो गई थी, लेकिन देश के कई हिस्सों में कोरोना पैर पसारना शुरू कर दिया है। इसकी मुख्य वजह वायरस में लगातार हो रहे बदलाव है। कोरोना के वैरिएंट लगातार स्वरूप बदल रहे हैं। पहले डेल्टा, बीटा, एल्फा और अब लैंब्डा ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। बता दें कि अब तक करीब सौ देशों में डेल्टा और 30 देशों में लैंब्डा के मामले सामने आ चुके हैं। लैंब्डा को डेल्टा से भी अधिक खतरनाक बताया जा रहा है।

पुणे (शोर संदेश)। कोरोना वैक्सीन को लेकर फॉर्मा कंपनियों के लंबे-चौड़े दावे अभी भी सामने आ रहे हैं। बीते छह महीने में भी देश को पर्याप्त कोविशील्ड खुराक उपलब्ध नहीं कराने वाले सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने अब दावा किया है कि आने वाले महीनों में लाखों की संख्या में वे स्पूतनिक वैक्सीन भी उपलब्ध कराएंगें। इसके लिए आगामी सितंबर में पहला बैच भी लाया जा सकता है।दरअसल भारत में स्पूतनिक वैक्सीन बनाने के लिए छह कंपनियों से करार हुआ है। इसमें से एक सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भी है। करीब एक महीने पहले ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने सीरम कंपनी को स्पूतनिक बनाने की अनुमति भी दी थी लेकिन इसके बाद अभी तक यह मामला पूरा तकनीक स्थानांतरण के नाम पर अटका हुआ है।वर्तमान स्थिति देखें तो स्पूतनिक वैक्सीन केवल निजी अस्पतालों में उपलब्ध है। एक मई को भारत में स्पूतनिक वैक्सीन का पहला बैच आया था लेकिन इसके 70 दिन गुजरने के बाद भी यह वैक्सीन अभी भी विदेशों से भारत आ रही है। स्थिति यह है कि निजी अस्पतालों में भी इस वैक्सीन की मांग सबसे अधिक है।अब रूसी निर्माता रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) के अनुसार भारत में हर साल 30 करोड़ डोज तैयार करने का लक्ष्य है। इन्होंने फिर बयान दिया है कि वैक्सीन बनाने के लिए तकनीकी को ट्रांसर्फर किया जा रहा है। इस पर सीरम इंस्टिट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने यहां तक कहा, मुझे स्पूतनिक वैक्सीन के लिए (आरडीआईएफ) के साथ साझेदार बनने की बहुत खुशी है।हमें आने वाले महीनों मे लाखों की संख्या में डोज तैयार कर लेने की उम्मीद है। ट्रायल बैच की शुरुआत सितंबर में होगी। स्पूतनिक वैक्सीन के अधिक प्रभावी होने और सेफ्टी को देखते हुए यह जरूरी है कि पूरे भारत और दुनिया में इसकी उपलब्धता हो। इसके साथ ही संक्रमण के मद्देनजर सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को मिलजुलकर काम करना होगा।
00 एक साल से चल रहे सीरम के दावे
पिछले साल कोविशील्ड के जब दो चिकित्सीय परीक्षण परिणाम सामने आए थे। उस दौरान सीईओ अदार पूनावाला ने जून-जुलाई 2021 से भारतीय बाजारों में कोविशील्ड उपलब्ध होने का दावा किया था। इसके बाद तीन जनवरी को आपात इस्तेमाल की अनुमति मिलने के बाद भी उन्होंने छह महीने बाद इतनी वैक्सीन बनाने का दावा किया था कि देश के अस्पतालों के साथ साथ बाजारों में भी इसे उपलब्ध करा देंगे लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार सीरम कंपनी के पास पहले पांच करोड़ खुराक बनाने की क्षमता थी जोकि अब बढ़कर 10 से 11 करोड़ तक हुई है लेकिन 16 जनवरी से अब तक कंपनी ने किसी भी महीने में सात करोड़ से अधिक खुराक उपलब्ध नहीं कराई हैं।