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*Corona Vaccine की कमी दूर करने के लिए एक्सपर्ट ने दिए सुझाव*

17-Jun-2021

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। भारत में कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है, लेकिन इस बीच कई राज्यों ने टीके की कमी की शिकायत की है। इस बीच एक्सपर्ट्स ने कोरोना वैक्सीन की कमी दूर करने के लिए सुझाव दिया है और कहा है कि वैक्सीन को प्रोडक्शन बढ़ाए बिना टीका लगाने का तरीका बदलने से किल्लत दूर होगी।
एक डोज से पांच लोगों को लग सकेगी वैक्सीन
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर वैक्सीन को मांसपेशियों लगाने के बजाय त्वचा की दूसरी परत (डर्मल) में लगाई जाए तो इसमें वैक्सीन की मात्रा भी कम लगेगी और टीका का असर भी कम नहीं होगा। अभी वैक्सीन की एक डोज लगाने में जितनी मात्रा की जरूरत है, उतने में 5 लोगों को वैक्सीन लग सकेगी।
इंट्रामस्कुलर तरीके से दी जा रही है वैक्सीन
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल देश में कोरोना वैक्सीन इंट्रामस्कुलर तरीके से लगाई जा रही है यानी इंजेक्शन से वैक्सीन को गहराई में मौजूद मांसपेशियों में पहुंचाया जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर वैक्सीन इंट्राडर्मल तरीके दी जाए यानी त्वचा की दूसरी परत में लगाई जाए तो 0.5 ml के बजाय 0.1 ml मात्रा ही काफी होगी. इस तरह इंट्रामस्कुलर तरीके से एक डोज में वैक्सीन की जितनी मात्रा दी जाती है, उतने में इंट्राडर्मल तरीके से 5 लोगों टीका लगाया जा सकता है।
एक्सपर्ट ने रैबीज वैक्सीन का दिया हवाला
टेक्निकल एडवाइजरी कमिटी के चेयरमैन डॉक्टर एमके सुदर्शन ने रैबीज वैक्सीन का हवाला दिया है, जो रैबीज की वैक्सीन पर काफी काम कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि रैबीज वैक्सीन लगाने के लिए इंट्रामस्क्यूलर की जगह इंट्राडर्मल तरीके का उपयो किया गया और यह काफी कारगर रही।
अब तक दी गई वैक्सीन की 26.55 करोड़ डोज
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में अब तक (17 जून, सुबह 7 बजे तक) कोरोना वैक्सीन की 26 करोड़ 55 लाख 19 हजार 251 वैक्सीन की डोज दी गई है. देश में अब तक 21 करोड़ 58 लाख 48 हजार 80 पहली डोज लगाई गई है, जबकि 4 करोड़ 96 लाख 71 हजार 171 लोग टीके की दोनों डोज ले चुके हैं।


*अमेरिका से पहले भारत को मिल सकती है नोवावैक्‍स*

15-Jun-2021

00 कोरोना के खिलाफ 90 फीसदी असरदार
नई दिल्ली (शोर सन्देश)। काेरोना के खिलाफ जारी जंग में भारत के हाथ मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं। देश काे बहुत जल्द एक और वैक्सीन मिलने जा रही है, जिसमें नाम है नोवावैक्‍स। माना जा रहा है नोवावैक्‍स अमेरिका से पहले भारत में लॉन्‍च कर दी जाएगी। देश में अभी तीन वैक्सीन उपलब्ध हैं, जिसमें दो मेड इन इंडिया कोविशील्ड और कोवैक्सीन है और तीसरी ​रूस की स्पुतनिक-V है।
00 20 करोड़ डोज उपलब्ध होेने की उम्मीद
कोरोना वैक्‍सीन का उत्‍पादन कर रही सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) नोवावैक्‍स की मैनुफैक्‍चरिंग पार्टनर होगी। भारत आने पर इसका नाम `कोवावैक्‍स` होगा। फिलहाल SII इस वैक्‍सीन का 18 साल से ज्‍यादा उम्र के लोगों पर ट्रायल कर रही है। ऐसे में उम्मीद है कि नोवावैक्‍स की वैक्‍सीन को सबसे पहले भारत में इमर्जेंसी अप्रूवल मिल सकता है। भारत सरकार के अनुमान के मुताबिक सितंबर से दिसंबर महीने तक नोवावैक्स के 20 करोड़ डोज उपलब्ध हो सकते हैं। यह संख्या और बढ़ सकती है।
00 कोविड-19 के खिलाफ अत्याधिक प्रभावी नोवावैक्स
वहीं नोवावैक्स ने दावा किया है कि उसका टीका कोविड-19 के खिलाफ अत्याधिक प्रभावी है और यह वायरस के सभी स्वरूपों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। कंपनी ने कहा कि टीका कुल मिलाकर करीब 90 फीसदी असरदार है और शुरुआती आंकड़ें बताते हैं कि यह सुरक्षित है। हालांकि अमेरिका में कोविड-19 रोधी टीकों की मांग में कमी आई है, लेकिन दुनिया भर में अधिक टीकों की जरूरत बनी हुई है।
00 एक महीने में 10 करोड़ खुराकों का होगा उत्पादन
​नोवावैक्स टीके को रखना और ले जाने आसान है और उम्मीद की जा रही है कि यह विकासशील देशों में टीके की आपूर्ति को बढ़ाने में अहम किरदार निभाएगा। कंपनी ने कहा कि उसकी योजना सितंबर अंत तक अमेरिका, यूरोप और अन्य जगहों पर टीके के इस्तेमाल के लिए मंजूरी लेने की है और तबतक वह एक महीने में 10 करोड़ खुराकों का उत्पादन करने में सक्षम होगी।


टीकाकरण है सुरक्षा कवच कोरोना टीकाकरण से घटा संक्रमण का खतरा

26-May-2021

मुरादाबाद (शोर सन्देश)। कोरोना की दूसरी लहर की दहशत के बीच राहत देने वाली खबर ये है कि कोरोना से बचाव के लिए टीके की दोनों डोज लेने वाले 99.79 फीसदी लोग पूरी तरह से स्वस्थ हैं। इन्हें कोरोना नहीं जकड़ सका। जबकि पहली डोज लेने वाले 99.87 प्रतिशत लोगों को कोरोना नहीं हुआ। मंडल के पांचों जिलों में दोनों डोज लेने वाले महज 407 लोग संक्रमित हुए हैं। कोरोना से बचाव के लिए किए जा रहे टीकाकरण से संक्रमण का खतरा घटा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मिले15 जनवरी से 23 मई 2021 तक के आंकडे़ भी इसकी पुष्टि कर रहे हैं। मुरादाबाद मंडल में 1,91,850 लोगों ने कोरोना से बचाव के लिए इस अवधि में वैक्सीन की दोनों डोज लीं थीं। उनमें से सिर्फ 407 यानी 0.21 प्रतिशत लोग ही संक्रमित हुए। दोनों डोज लेने वालों में कुल 99.79 फीसदी लोग कोरोना के संक्रमण की चपेट से बाहर रहे। इसी तरह 6,67,727 लोगों ने पहली डोज ली थी। उसमें से 873 लोग संक्रमित हुए। यानी पहली डोज लेने वाले 99.87 प्रतिशत लोग पूरी तरह सुरक्षित रहे। पहली डोज लगवाने वाले लोगों में सिर्फ 0.13 प्रतिशत ही संक्रमित हुए। इन संक्रमितों में भी ज्यादातर केस मुरादाबाद में रिपोर्ट किए गए। आंकड़ों की मानें तो टीकाकरण एक सुरक्षा कवच जरूर है जिसके सहारे कोरोना को मात दी जा सकती है। यह आंकड़े उन लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित कर रहे हैं जो अब तक किसी वजह से टीकाकरण से परहेज करते रहे हैं। लोगों की गलतफहमी भी दूर हो रही हैं। अतीत में बहुत से लोगों में यह गलतफहमी थी कि टीकाकरण के बाद भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं, लेकिन इन आंकड़ों ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे केस न्यूनतम हैं। टीकाकरण कराने वाले एकप्रतिशत से भी कम लोग संक्रमित हुए हैं जबकि दूसरी लहर में कोरोना का वायरस बहुत ताकतवर हो गया है। अच्छी बात यह है कि अब लोग खुद टीकाकरण के लिए आगे आने लगे हैं। ऑनलाइन अपना पंजीकरण करा रहे हैं।


*कोरोना वैक्सीन की 5 करोड़ खुराक देने फाइजर तैयार लेकिन रखी यह शर्त*

26-May-2021

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। भारत में कोरोना वैक्सीन की कमी के बीच अमेरिकी फार्मा कंपनी फाइजर-बायोएनटेक इस साल भारत को पांच करोड़ खुराक देने को तैयार हो गया है, लेकिन कंपनी केंद्र सरकार से नियमों में छूट चाहती है। भारत सरकार और फाइजर-बायोएनटेक के बीच वैक्सीन की डील को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है। कंपनी ने भी एक बयान जारी कर बताया था कि, भारत के साथ वैक्सीन को लेकर बातचीत चल रही है और जल्द ही इसके नतीजे सामने होंगे। सूत्रों के मुताबिक, वैक्सीन डील को लेकर मामला एक जगह फंसा हुआ है। दरअसल, फाइजर-बायोएनटेक ने अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई सरकारों से कानूनी सुरक्षा का भरोसा मांगा है, अब फाइजर यही मांग भारत में कर रही है। कंपनी यह चाहती है कि फाइजर की वैक्सीन लगने के बाद किसी भी प्रकार का कोई कानूनी पेंच फंसता है तो इसके लिए कंपनी जवाबदेह नहीं होगी। केंद्र सरकार को इसके लिए आगे आना होगा।
00 वैक्सीन की कमी से नहीं हो पा रहा वैक्सीनेशन
देश में वैक्सीन की भारी कमी है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश समेत कई बड़े एवं छोटे राज्यों में वैक्सीनेशन ड्राइव जिस गति से होनी चाहिए वो नहीं हो पा रही है। राज्यों को जितने कोटे की रोज जरूरत है, उतनी सप्लाई उन्हें नहीं मिल पा रही है। ऐसे में कई वैक्सीनेशन सेंटर्स बंद करने पड़े हैं। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र ने तो ग्लोबल टेंडर भी निकाला है, लेकिन अब किसी कंपनी से उन्हें वैक्सीन नहीं मिल सका है। वहीं दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों का कहना है कि वे खुद विदेशी वैक्सीन कंपनियों से बात कर चुके हैं, लेकिन इन कंपनियों ने उन्हें सीधे सप्लाई से मना कर दिया है। कंपनियां केंद्र सरकार से डील करना चाहती हैं।
00 देश में अभी तीन वैक्सीन का ही सहारा
देश में अभी कोवाक्सिन और कोविशील्ड के अलावा रूसी कंपनी स्पूतनिक-वी का इस्तेमाल किया जा रहा है। कोवाक्सिन और कोविशील्ड का प्रोडक्शन उस स्तर पर नहीं हो पा रहा, जितने में एक बड़ी आबादी को रोज टीका दिया जा सके। रूसी वैक्सीन ने अभी-अभी सप्लाई शुरू की है। जल्द ही तेलंगाना में इसका प्रोडक्शन शुरू होने वाला है। वहीं केंद्र सरकार ने एलान किया है कि इस साल अगस्त से दिसंबर के बीच पूरे देश के लिए वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी।


*ब्लैक फंगस की सामान्य जानकारी व उससे बचने के उपाय*

24-May-2021

सुकमा (शोर सन्देश)। प्रदेश के कुछ जिलों में ब्लैक फंगस के मरीजों के प्रकरण सामने आ रहें हैं। जिसे देखते हुए आम जनों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है। ब्लैक फंगस (म्युकरमाइकोसिस) एक फंगल संक्रमण है। यह उन लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है, जो दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रसित है और दवाईयां ले रहे हैं। इससे उनकी प्रतिरोधात्मक क्षमता प्रभावित होती है। यदि व्यक्ति के शरीर में यह फंगस सूक्ष्म रूप में शरीर के अन्दर चला जाता है, तो उसके साइनस या फेफड़े प्रभावित होंगे, जिससे गंभीर बीमारी हो सकती है। यदि इस बीमारी का इलाज समय पर नहीं किया गया तो यह घातक हो सकती है।
00 यह बीमारी किसे हो सकती है
यह बीमारी कोविड-19 मरीजों में जो डायबीटिक मरीज हैं या अनियंत्रित डायबीटिज वाले व्यक्ति को, स्टेरोईड दवाईयां ले रहे व्यक्ति को या आई.सी.यू. में अधिक समय तक भर्ती रहने से यह बीमारी हो सकती है।
00 बीमारी के लक्षण
आंख-नाक में दर्द और आंख के चारों ओर लालिमा, नाक का बंद होना, नाक से काला या तरल द्रव्य निकलना, जबड़े की हड्डी में दर्द होना, चेहरे में एक तरफ सूजन होना, नाक तालु काले रंग का होना, दांत में दर्द, दांतों का ढि़ला होना, धुंधला दिखाई देना, शरीर में दर्द होना, त्वचा में चकते आना, छाती में दर्द, बुखार आना, सांस की तकलीफ होना, खून की उल्टी, मानसिक स्थिति में परिवर्तन आना। ऐसे कोई भी लक्षण होने
00 बचाव के उपाय-
धूल भरे स्थानों में मास्क पहनकर, शरीर को पूरे वस्त्रों से ढंक कर, बागवानी करते समय हाथों में दस्ताने पहन कर और व्यक्तिगत साफ-सफाई रख कर इस इन्फेक्शन से बचा जा सकता है।
राज्य शासन की ओर से ब्लैक फंगस (म्युकरमाइकोसिस) पर एडवाइजरी जारी की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने पीडि़त मरीजों के उपचार के लिए राज्य के तकनीकी समिति के विशेषज्ञों की ओर से अनुशंसित स्टैन्डर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों को जारी किया है। राज्य में ब्लैक फंगस (म्युकरमाइकोसिस) का इलाज सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में किया जाएगा।


*छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में बढ़ी रिकवरी दर*

24-May-2021

 00 प्रदेश की औसत रिकवरी दर भी बढ़कर 92 प्रतिशत हुई
रायपुर (शोर सन्देश)। प्रदेश के सभी जिलों में पिछले एक सप्ताह में रिकवरी दर में बढ़ोतरी हुई है। सभी जिलों में कोरोना से स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रदेश की औसत रिकवरी दर में भी पिछले सप्ताह की तुलना में पांच प्रतिशत की वृद्धि हुई है। राज्य शासन द्वारा कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण और रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रभावी उपायों से अब रिकवरी दर बढ़कर 92 प्रतिशत पर पहुंच गई है। प्रदेश में पिछले सप्ताह 16 मई को रिकवरी दर 87 प्रतिशत थी, जो अब 23 मई की स्थिति में 92 प्रतिशत पर पहुंच गई है। राज्य में अब तक मिले कुल कोरोना संक्रमितों नौ लाख 49 हजार में से आठ लाख 70 हजार 640 स्वस्थ हो चुके हैं। पिछले एक सप्ताह में मुंगेली जिले की रिकवरी दर में सर्वाधिक बढ़ोतरी हुई है। पिछले सप्ताह मुंगेली की रिकवरी दर 77 प्रतिशत थी जो अब 11 प्रतिशत बढ़कर 88 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है। बीते सप्ताह के दौरान कबीरधाम और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की रिकवरी दर में आठ प्रतिशत, रायगढ़, जांजगीर-चांपा और जशपुर की रिकवरी दर में सात प्रतिशत, कोरबा, नारायणपुर बालोद और बलौदाबाजार-भाटापारा की रिकवरी दर में छह प्रतिशत तथा कोरिया, गरियाबंद, बिलासपुर और सरगुजा की रिकवरी दर में पांच प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्तमान में दुर्ग जिले की रिकवरी दर 96 प्रतिशत, राजनांदगांव और सुकमा की 97-97 प्रतिशत, बालोद की 94 प्रतिशत, बेमेतरा, कबीरधाम, कोरबा, गरियाबंद और कोंडागांव की 92-92 प्रतिशत, रायपुर की 96 प्रतिशत, धमतरी, बीजापुर, कांकेर और नारायणपुर की 91-91 प्रतिशत, बलौदाबाजार-भाटापारा, महासमुंद, रायगढ़, जांजगीर-चांपा और बस्तर की 90-90 प्रतिशत, बिलासपुर की 94 प्रतिशत, मुंगेली की 88 प्रतिशत, सरगुजा की 87 प्रतिशत, जशपुर की 86 प्रतिशत, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की 83 प्रतिशत, कोरिया की 81 प्रतिशत, सूरजपुर की 82 प्रतिशत, बलरामपुर-रामानुजगंज की 81 प्रतिशत तथा दंतेवाड़ा की 96 प्रतिशत है।


*राजधानी के एम्स में जारी है ब्लैक फंगस के 83 मरीजों का इलाज*

22-May-2021

 00 देश के सभी एम्स की अपेक्षा रायपुर एम्स में सर्वधिक मरीज
रायपुर (
शोर सन्देश)। कोरोना संक्रमण के बाद अब प्रदेश में ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस) के प्रकोप फैला है। प्रदेश में अब तक 100 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए है,और 1 मरीज़ की मौत हो चुकी है। इनमे से अधिकांश मरीजों का इलाज एम्स में चल रहा है। वर्तमान में यहां 83 मरीजों का इलाज चल रहा है। देश भर के एम्स की बात करें तो रायपुर एम्स में म्यूकोरमाइकोसिस से सर्वाधिक मरीज भर्ती है। वहीं इलाज के मामले में भी रायपुर एम्स पहले स्थान पर है। यहां अब तक 24 मरीजों का सफल ऑपरेशन हो चुका है। रायपुर एम्स में बढ़ते मरीज़ों की अपेक्षा दवा और इंजेक्शन की कमी है। केंद्र से सप्लाई करने का आश्वासन दिया गया है। मामले की नोडल अधिकारी डॉक्टर अजय बेहरा ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ब्लैक फंगस मरीज़ों के इलाज और दवा आपूर्ति को लेकर केंद्रीय समीक्षा बैठक हुई, जिसमें देश के सभी एम्स और अन्य नेशनल स्तर के मेडिकल कॉलेज डायरेक्टर शामिल हुए। डॉक्टर अजय बेहरा ने बताया कि मरीज़ों के इलाज को लेकर प्रबंधन से चर्चा हुई। इसी दौरान रायपुर एम्स की ओर से दवा और इंजेक्शन सप्लाई की मांग की गई है। जितने तेज़ी से मरीज़ बढ़ रहे हैं, उतनी दवा की उपलब्धता नहीं है। बैठक में आश्वासन दिया गया है कि इस दवा की सप्लाई की जाएगी। डॉक्टर बेहरा ने मरीज़ों की स्थिति को लेकर कहा कि वर्तमान में 24 मरीज़ों के आंख, कान, नाक, गला और मस्तिष्क का ऑपरेशन किया जा चुका है। सभी मरीज़ों को नियमित डोज दी जा रही है। जो दवाएं दी जाती है, इसके साइड इफेक्ट भी ज़्यादा हैं। इसलिए नियमित निगरानी में मरीज़ों को रखा गया है।


*रक्षा मंत्री व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने लॉन्च की कोरोना की स्वदेशी दवा 2DG*

17-May-2021

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। कोरोना वायरस के खिलाफ भारत की लड़ाई जारी है। इसी कड़ी में आज कोरोना महामारी से जंग में निर्णायक भूमिका निभाने के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की ओर से विकसित कोरोना की दवा 2-डीजी लॉन्च की गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने डीआरडीओ के मुख्यालय में सोमवार यानी आज सुबह 10:30 बजे कोरोना की देसी दवा की पहली खेप लॉन्च की। अब इन्हें मरीजों को दिया जा सकता है। इस दवा को सबसे पहले दिल्ली के डीआरडीओ कोविड अस्पताल में भर्ती मरीजों को दिया जाएगा।
00 कोरोना की दवा 2DG: कैसे कर सकते हैं इस्तेमाल
कोरोना के खिलाफ जंग में डीआरडीओ की नई दवा उम्मीद की किरण बनकर उभरी है। इस दवा का नाम 2-डीऑक्सि-डी-ग्लूकोज (2-DG) है। डीआरडीओ की यह दवा ऐसे समय में आई है, जब कोरोना की दूसरी लहर ने कोहराम मचा रखा है और तीसरी लहर की बात हो रही है। कोरोना की देसी दवा 2-डीजी  पाउडर के रूप में पैकेट में आती है और इसे पानी में घोल कर पीना होता है।
00 डीसीजीआई ने दे दी आपात इस्तेमाल को पहले ही मंजूरी 
रक्षा मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में बताया था कि कोविड-19 के माध्यम और गंभीर लक्षण वाले मरीजों पर इस दवा के आपातकालीन इस्तेमाल को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) की ओर से मंजूरी मिल चुकी है। आपको बता दें कि कोरोना के नए मामलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए डीसीजीआई ने इस दवा के आपात इस्तेमाल को मंजूरी दी थी। डीसीजीआई के मुख्यालय में सोमवार यानी 17 मई को कार्यक्रम में दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने इस दवा को लॉन्च किया। 


छत्तीसगढ़ में कोविड-19 की, 09 मई 2021 तक की स्थिति का पूरा ब्यौरा आप सब के साथ साझा कर रहा हूँ।

10-May-2021

रायपुर (शोर सन्देश) कल 9120 नए कोरोना पॉजिटिव मरीज़ों की पहचान हुई व 12810 मरीज़ स्वस्थ होने के उपरांत डिस्चार्ज/रिकवर्ड हुए।


*अब डिजिटल सिक्योरिटी कोड के बिना नहीं लगेगी कोरोना वैक्सीन*

08-May-2021

 00 शिकायतों के बाद कोविन पोर्टल में हुआ बड़ा बदलाव
नई दिल्ली (शोर सन्देश)। एक तरफ जहां लोगों को कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। वहीं, वैक्सीन की कमी और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी दिक्कतों ने लोगों को परेशान कर दिया है। हालांकि, सरकार दोनों ही मोर्चों पर व्यवस्था दुरुस्त करने में पूरी शिद्दत से लगी है। इसी क्रम में कोविन पोर्टल में अहम बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों के जरिए कुछ खामियों को दूर किया गया है, साथ ही कुछ ऐसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं, जिससे पंजीकरण को आसान बनाया जा सके। सरकार ने एक मई से 18+ वालों का टीकाकरण शुरू कर दिया है। इसके लिए कोविन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन किए जा रहे हैं। पहले दिन ही बड़ी संख्या में लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था। हालांकि, तभी से तमाम तरह की परेशानियां भी देखने को मिली है। लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी इन परेशानियों का खुलकर जिक्र किया है। इसे ध्यान में रखते हुए अब सरकार ने कोविन पोर्टल में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। कोविन पोर्टल पर किए गए बदलावों में सबसे बड़ा बदलाव है डिजीटल कोड फीचर। अब रजिस्ट्रेशन के समय यूजर के मोबाइल पर एक 4 अंकों का डिजिटल सिक्योरिटी कोड आएगा, जिसे उसे संभालकर रखना होगा। वैक्सीनेशन के बाद यह कोड वैक्सीनेटर को देना होगा। इसके बाद ही संबंधित व्यक्ति का वैक्सीन स्टेटस अपडेट किया जाएगा। यानी सीधे शब्दों में कहें तो इसके बाद ही यह माना जाएगा कि आपको टीका लग चुका है। दरअसल, कई लोगों ने शिकायत की थी कि वैक्सीन लगे बिना ही उन्हें वैक्सीनेशन पूरा होने के मैसेज आ रहे हैं। जिसके बाद यह फीचर जोड़ा गया है। ये बदलाव 8 मई यानी आज से लागू हो जाएंगे। इसके बाद बिना कोड के टीका नहीं लग पाएगा। बता दें कि कोविन सिस्टम पर लागू किया गया यह नया फीचर सिर्फ उन लोगों के लिए होगा, जिन्होंने वैक्सीनेशन के लिए ऑनलाइन बुकिंग की है। आरोग्य सेतु ऐप द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, वैक्सीनेशन सेंटर पर 4-अंकों वाला कोड दिखाने के बाद टीका लग जाएगा। इसके अलावा, यदि आप टीकाकरण के बाद डिजिटल सर्टिफिकेट जनरेट करना चाहते हैं, तो भी आपको पोर्टल पर अपना कोड दर्ज करना होगा। इसके बाद आपको मैसेज आएगा कि आपका टीकाकरण सफलतापूर्वक हो गया है। लेकिन यदि मैसेज नहीं आता है, तो इस बारे में सेंटर को बताना होगा।




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