ब्रेकिंग न्यूज

जनप्रतिनिधि

महतारी वंदन योजना से मातृशक्ति को मिला आर्थिक संबल : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

09-Mar-2026
रायपुर,। ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बस्तर के लाल बहादुर शास्त्री मिनी स्टेडियम में आयोजित वृहद महतारी वंदन सम्मेलन–2026 में प्रदेश की माताओं-बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति समाज की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण ही विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव है और राज्य सरकार का हर निर्णय महिलाओं के कल्याण, सम्मान और आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर लिया जा रहा है। 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर महतारी वंदन योजना की 25वीं किश्त जारी करते हुए प्रदेश की 69 लाख 48 हजार महिलाओं के खातों में 641 करोड़ 58 लाख रुपये अंतरित किए। इसके साथ ही इस योजना के अंतर्गत अब तक महिलाओं को 16 हजार 237 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि माताओं-बहनों के आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने वाला जनकल्याणकारी अभियान बन चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें 10 मार्च 2024 का वह दिन याद है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महतारी वंदन योजना का शुभारंभ किया था। उसी समय यह संकल्प लिया गया था कि प्रदेश की प्रत्येक पात्र महिला के खाते में हर महीने निर्धारित तिथि पर एक हजार रुपये की राशि पहुंचेगी। पिछले 25 महीनों से यह संकल्प लगातार पूरा किया जा रहा है और इस किश्त के साथ अब तक प्रत्येक हितग्राही महिला को 25 हजार रुपये की राशि प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने जो वादा किया था, उसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाया है।
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि महतारी वंदन योजना को निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए राज्य सरकार ने इस वर्ष के बजट में 8 हजार 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि यह राशि माताओं-बहनों के जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव ला रही है। महिलाएं इस सहायता का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य, घरेलू जरूरतों, बचत और स्वरोजगार जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में कर रही हैं। इससे परिवारों में आर्थिक स्थिरता बढ़ रही है और समाज के समग्र विकास को नई दिशा मिल रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की माताएं-बहनें केवल परिवार का संचालन ही नहीं करतीं, बल्कि वे उत्कृष्ट वित्तीय प्रबंधक भी होती हैं। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि का महिलाओं ने अत्यंत समझदारी से उपयोग किया है। किसी ने बेटियों के भविष्य के लिए बचत की, किसी ने स्वरोजगार शुरू किया, किसी ने परिवार के छोटे व्यवसाय को बढ़ाया, तो किसी ने बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च कर घर की स्थिति को मजबूत बनाया। यह इस योजना की सबसे बड़ी सफलता है कि महिलाओं ने इसे स्वयं और परिवार की उन्नति का माध्यम बनाया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प तथा सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार ने 15 हजार आवास स्वीकृत किए हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर सहित दूरस्थ अंचलों में शांति, विकास और विश्वास का नया वातावरण बन रहा है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार अनेक स्तरों पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत पिछले दो वर्षों में 21 हजार 754 बेटियों के विवाह कराए गए हैं। महिलाओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और गरिमापूर्ण कार्यस्थल उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में 368 महतारी सदन बनाने की स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 137 महतारी सदन का निर्माण पूर्ण हो चुका है। ग्राम पंचायत स्तर पर इनका उपयोग महिलाओं की बैठकों, प्रशिक्षण, विपणन और सामुदायिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार लगातार पहल कर रही है। प्रदेश में अब तक 8 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया जा चुका है और अब सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 10 लाख लखपति दीदी बनाने का है। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब केवल सहभागी नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई नेतृत्वकारी शक्ति बनकर उभर रही हैं। इसी दिशा में महिला स्वसहायता समूहों के माध्यम से  रेडी टू ईट फूड निर्माण का कार्य पुनः प्रारंभ कराया गया है और इसे चरणबद्ध रूप से प्रदेश के शेष जिलों में भी लागू किया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर महिलाओं को व्यापक रोजगार के अवसर मिल सकें।
मुख्यमंत्री ने बस्तर क्षेत्र के संदर्भ में कहा कि नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से नक्सल प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं पुनः प्रारंभ की गई हैं, बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू कराया गया है, बिजली पहुंची है, मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं तथा स्वच्छ पेयजल और बेहतर सड़कों की सुविधा दूरस्थ बसाहटों तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि केवल सड़कों का निर्माण ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री बस सेवा योजना के माध्यम से बस्तर और सरगुजा अंचल के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा भी मजबूत की गई है, जिससे लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुंचने में आसानी हो रही है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से धमतरी की नीतू साहू, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की मिथलेश चतुर्वेदी, जांजगीर-चांपा की सरस्वती केंवट, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की अनीता साहू तथा सरगुजा की निधि जायसवाल से संवाद किया। 
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की मिथलेश चतुर्वेदी ने बताया कि पति के निधन के बाद उनके सामने परिवार चलाने की बड़ी चुनौती थी। शासन से मिली सहायता राशि और महतारी वंदन योजना के संबल से उन्होंने ई-रिक्शा खरीदकर आजीविका का नया साधन शुरू किया, जिससे अब वे अपने परिवार का भरण-पोषण आत्मसम्मान के साथ कर पा रही हैं।
धमतरी की नीतू साहू ने बताया कि मजदूरी से होने वाली सीमित आय के कारण बेटियों के भविष्य के लिए बचत करना कठिन था, लेकिन महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि से उन्होंने अपनी दोनों बेटियों के नाम सुकन्या समृद्धि योजना के खाते खुलवाकर हर महीने बचत शुरू की है।
इसी तरह सरगुजा की निधि जायसवाल ने महतारी वंदन योजना से मिली राशि को बचाकर “निधि मेकओवर” नाम से ब्यूटी पार्लर शुरू किया, जबकि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की अनीता साहू ने सिलाई का कार्य प्रारंभ कर “अनीता सिलाई सेंटर” स्थापित किया। जांजगीर-चांपा की सरस्वती केंवट ने भी इस राशि को अपने परिवार के व्यवसाय में लगाकर आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह अनुभव अत्यंत सुखद है कि महतारी वंदन योजना की राशि महिलाओं के हाथों में पहुंचकर परिवारों की तरक्की का आधार बन रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की माताएं-बहनें दूरदर्शिता, परिश्रम और आत्मविश्वास की अद्भुत मिसाल हैं। जब महिलाओं को अवसर और संबल मिलता है, तो वे न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे समाज को आगे बढ़ाने की शक्ति बन जाती हैं।
इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से ‘लक्ष्मी सखी मिलेट कार्ट’ का शुभारंभ भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से पुनर्वासित महिलाओं को जोड़ा गया है, जिन्हें कृषि महाविद्यालय के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये महिलाएं मिलेट आधारित खाद्य सामग्री तैयार कर उसका विक्रय करेंगी, जिससे उन्हें सतत आजीविका और आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को पशुपालन, सूक्ष्म उद्यम, प्रसंस्करण और स्थानीय विपणन से जोड़कर विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बजट में भी प्रावधान किए गए हैं।
कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरकार गठन के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को लागू करने की दिशा में गंभीरता से कार्य किया गया और उसी क्रम में महतारी वंदन योजना शुरू की गई। उन्होंने कहा कि इस योजना से राज्य की लगभग 70 लाख माताएं-बहनें लाभान्वित हो रही हैं। यह योजना महिलाओं को घरेलू जरूरतों की पूर्ति के साथ आर्थिक संबल भी प्रदान कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ महिला कोष तथा सक्षम योजना के माध्यम से भी महिलाओं को स्वरोजगार स्थापित करने में सहयोग दे रही है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने  कहा कि महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रत्येक माह नियमित रूप से सहायता राशि प्रदान किया जाना सरकार की वचनबद्धता का प्रमाण है।विधायक जगदलपुर किरण देव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से माताएं-बहनें आज घर-परिवार को खुशहाल बनाने के साथ प्रदेश के विकास में भी अहम योगदान दे रही हैं। 
कार्यक्रम के आरंभ में महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने विभागीय योजनाओं की जानकारी दी ।
कार्यक्रम के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की सफलता की कहानियों पर आधारित एक पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। महतारी वंदन योजना की हितग्राही महिलाओं ने मुख्यमंत्री को फलों की टोकरी तथा धुरवा तुवाल भेंटकर योजना के लिए आभार व्यक्त किया। 
इस अवसर पर दंतेवाड़ा विधायक चैतराम आटामी, बेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, महापौर संजय पांडेय, राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, राज्य बीज विकास निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर, मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष भरत मटियारा, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बस्तर के अध्यक्ष दिनेश कश्यप, बस्तर संभाग के कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी., महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव  सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।
 

चन्द्रनाहू कुर्मी क्षत्रिय समाज के अधिवेशन में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

09-Mar-2026
रायपुर,। ( शोर संदेश ) जब समाज स्वयं अपने बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेता है, तब नई पीढ़ी और अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ती है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायपुर जिले के पारागांव में आयोजित चन्द्रनाहू कुर्मी क्षत्रिय समाज के दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन को संबोधित करते हुए यह बात कही।  
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने समाज के विकास के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 50 लाख रुपये देने की घोषणा की। साथ ही पारागांव में सीसी रोड निर्माण के लिए 20 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की।
मुख्यमंत्री साय ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उपस्थित सभी माताओं-बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज महतारी वंदन योजना को दो वर्ष पूर्ण हो गए हैं और इस अवसर पर प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं के खातों में योजना की 25वीं किश्त की राशि अंतरित की गई है। उन्होंने कहा कि यह योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि चन्द्रनाहू कुर्मी क्षत्रिय समाज का गौरवशाली इतिहास रहा है और इस समाज ने देश और प्रदेश को अनेक प्रतिभाशाली व्यक्तित्व दिए हैं। उन्होंने समाज द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समाज के माध्यम से 2000 से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षा का अवसर मिल रहा है, जो अत्यंत सराहनीय है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 
युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि  राज्य सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को देश का धान का कटोरा कहा जाता है और किसानों के हित में राज्य सरकार लगातार निर्णय ले रही है। उन्होंने कहा कि होली पर्व के पूर्व 25.28 लाख किसानों के खातों में कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत 10 हजार 324 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की गई है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रामलला दर्शन योजना के माध्यम से पिछले दो वर्षों में 42 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या जाकर भगवान श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना को भी पुनः प्रारंभ किया गया है, जिससे बुजुर्गों और श्रद्धालुओं को विभिन्न तीर्थस्थलों के दर्शन का अवसर मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 के बजट में राज्य के सभी वर्गों के विकास को ध्यान में रखते हुए प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने समाज के युवाओं से आग्रह किया कि जो बेटा-बेटी उद्यम करना चाहते हैं, वे राज्य की नई उद्योग नीति का अध्ययन करें। मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ को लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और इन निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने की दिशा में कार्य प्रारंभ हो चुका है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धि प्राप्त करने वाले प्रतिभावान व्यक्तियों को सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में दीपक चंद्राकर (सिविल जज में चयनित), कु. लक्ष्मी चंद्राकर (पीएससी में चयनित, वाणिज्यिक कर अधिकारी), डॉ. प्रीति करण चंद्राकर (हेड ऑफ डिपार्टमेंट, कंप्यूटर एंड साइंस, एनआईटी रायपुर), डॉ. करण चंद्राकर (आईआईटी दिल्ली से टेक्सटाइल एवं फाइबर इंजीनियरिंग में पीएचडी), कु. लक्ष्मी चंद्राकर (इंडो-नेपाल टेस्ट सीरीज बॉल बैडमिंटन में गोल्ड मेडल), डॉ. दिव्या चंद्राकर एवं डॉ. राहुल चंद्राकर (एमबीबीएस, शासकीय चिकित्सालय महासमुंद) शामिल हैं।
कार्यक्रम को केबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक ललित चंद्राकर तथा विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने भी संबोधित किया और समाज के संगठन, शिक्षा और सामाजिक विकास में योगदान की सराहना की।
इस अवसर पर समाज के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ की महिलाएं आत्मनिर्भरता और नवाचार से बना रही हैं नई पहचान – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

08-Mar-2026
रायपुर(शोर संदेश)। छत्तीसगढ़ की महिलाएं आत्मनिर्भरता, मेहनत और नवाचार के बल पर नई पहचान बना रही हैं और हमारी सरकार उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रायपुर के इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘लखपति दीदी संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। कार्यक्रम में प्रदेश भर से आई स्व-सहायता समूह की हजारों महिलाएं और लखपति दीदियां उत्साहपूर्वक शामिल हुईं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है और जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का निवास होता है। उन्होंने कहा कि पहले महिलाएं घरों तक सीमित रहती थीं, लेकिन आज प्रदेश की महिलाएं स्व सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासन का लक्ष्य लखपति दीदियों को और अधिक सशक्त बनाकर गांव की प्रत्येक महिला को लखपति बनाना और भविष्य में लखपति ग्राम का निर्माण करना है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर छत्तीसगढ़ में 10 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से वर्तमान में लगभग 8 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में 10 लाख से अधिक लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गांवों के लोगों के लिए 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कर चुकी है और इनके निर्माण में बिहान की दीदियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार द्वारा महतारी वंदन योजना प्रारंभ की गई है, जिसके तहत  लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को 24 किश्तों में 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है तथा इस वर्ष के बजट में इसके लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लखपति दीदी योजना से प्रदेश की 5 लाख से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और अब लखपति दीदी भ्रमण योजना शुरू कर उन्हें देश-प्रदेश के व्यावसायिक केंद्रों और शक्ति पीठों का भ्रमण कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि पंचायत विभाग द्वारा 250 महतारी सदनों का निर्माण, आंगनबाड़ी संचालन और पोषण योजनाओं के लिए भी इस वर्ष के बजट में प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए रानी दुर्गावती योजना शुरू की जाएगी, जिसके तहत 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर 1.5 लाख रुपये दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी लखपति दीदियों से पूरे प्रदेश की माताओं-बहनों को प्रेरणा मिल रही है और अब हमारा लक्ष्य लखपति दीदियों को करोड़पति दीदी बनाना है। उन्होंने कहा कि आज शुरू हुई बकरी पालन क्लस्टर परियोजना से प्रदेश में बकरी पालन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना और आईआईएम रायपुर के साथ एमओयू से स्व-सहायता समूहों की आमदनी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में माताओं-बहनों की बड़ी भूमिका होगी। आज महिलाएं गांवों में सेंट्रिंग प्लेट उपलब्ध कराने से लेकर ड्रोन उड़ाने तक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जहां नारियों की पूजा होती है, वहां देवताओं का वास होता है। एक नारी शिक्षित होती है तो दो परिवार और पूरा समाज शिक्षित होता है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने लखपति दीदी आधारित कॉफी टेबल बुक तथा छत्तीसकला आधारित ब्रांड बुक का विमोचन किया और लखपति दीदी ग्राम पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पोर्टल के माध्यम से ग्राम पंचायतों का मूल्यांकन कर उन्हें लखपति दीदी ग्राम घोषित किया जाएगा। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्व-सहायता समूह की महिलाओं, कैडर्स और लखपति दीदियों को सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले लोग कहते थे कि महिलाओं को लखपति बनाना संभव नहीं है, लेकिन आज प्रदेश में 8 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में ये महिलाएं लखपति से करोड़पति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगी। 
कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई महिलाओं ने अपनी प्रेरक कहानियां साझा कीं। बस्तर जिले के दरभा ब्लॉक की लखपति दीदी राजकुमारी कश्यप ने बताया कि एक समय ऐसा था जब उनके क्षेत्र में बाइक से आना-जाना भी कठिन था, लेकिन आज वह लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने बताया कि उनका परिवार खेती पर निर्भर है और मुर्गीपालन से उन्हें सालाना 6–7 लाख रुपये की आय हो रही है।
बालोद जिले की भुनेश्वरी साहू ने बताया कि उन्होंने 20 हजार रुपये का ऋण लेकर सिलाई मशीन से काम शुरू किया और बाद में उन्हें सरकार की पहल से ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग मिली। आज वह अपने क्षेत्र में ड्रोन दीदी के नाम से जानी जाती हैं।
जशपुर जिले की लखपति दीदी अनिता साहू ने बताया कि वह ईंट निर्माण का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि एक समय था जब समूह की साप्ताहिक बैठक में 10 रुपये जमा करने के लिए भी दूसरों पर निर्भर होना पड़ता था, लेकिन आज वह लखपति बन चुकी हैं।
कार्यक्रम में प्रमुख सचिव निहारिका बारीक ने बताया कि छत्तीसगढ़ में 8 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जिनमें से लगभग एक लाख महिलाएं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 10 लाख 26 हजार स्व-सहायता समूहों से जुड़कर 30 लाख 85 हजार महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक सुनील सोनी, सचिव भीम सिंह, रायपुर संभाग के आयुक्त महादेव कावड़े, कलेक्टर गौरव सिंह, मिशन संचालक अश्वनी देवांगन  सहित बड़ी संख्या में लखपति दीदियां और स्व-सहायता समूह की महिलाएं उपस्थित थी।

विशेष लेख : ‘महतारी गौरव वर्ष’ : महिला सशक्तिकरण के नवयुग की ओर अग्रसर छत्तीसगढ़

07-Mar-2026
रायपुर,। ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक दौर से गुजर रहा है। मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने इस वर्ष को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। यह पहल केवल एक औपचारिक घोषणा नहीं है, बल्कि महिलाओं को राज्य की विकास यात्रा के केंद्र में स्थापित करने का सशक्त संकल्प है।
मुख्यमंत्री साय ने अपने कार्यकाल के पहले वर्ष को ‘विश्वास वर्ष’ के रूप में शासन-प्रशासन और जनता के बीच भरोसे की पुनर्स्थापना को समर्पित किया। इसके बाद दूसरे वर्ष को भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में ‘अटल निर्माण वर्ष’ के रूप में मनाते हुए अधोसंरचना विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं को नई गति दी गई। अब तीसरा वर्ष ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में माताओं और बहनों को समर्पित किया गया है, जिसमें राज्य की अधिकांश योजनाओं का केंद्रबिंदु महिलाएं होंगी। यह क्रम सरकार की संवेदनशील और समावेशी विकास की सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना आज महिला सशक्तिकरण का मजबूत स्तंभ बन चुकी है। इस योजना के तहत प्रदेश की लगभग 70 लाख विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जा रही है। अब तक 15 हजार 595 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी के माध्यम से महिलाओं को दी जा चुकी है। हाल ही में 24वीं किस्त के रूप में 68 लाख से अधिक महिलाओं को 641 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई।यह नियमित आर्थिक सहयोग महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ ही उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है। कई महिलाएं इस राशि को केवल घरेलू खर्च तक सीमित न रखकर स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों में निवेश कर रही हैं।
बालोद जिले के ग्राम खैरडीह की रोहनी पटेल इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण हैं। पति की असमय मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। घर में वृद्ध सास की देखभाल और कॉलेज में पढ़ रहे दो बच्चों की पढ़ाई की चिंता उनके लिए बड़ी चुनौती थी।ऐसे कठिन समय में महतारी वंदन योजना उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर आई। योजना से मिलने वाली राशि को उन्होंने सावधानीपूर्वक बचत कर अपने खेत में सब्जी उत्पादन का कार्य शुरू किया। बीज, खाद और कृषि सामग्री की व्यवस्था कर उन्होंने पूरी मेहनत से खेती की।
आज रोहनी पटेल अपने खेत में उगाई गई ताजी सब्जियों को स्थानीय बाजारों में बेचकर नियमित आय अर्जित कर रही हैं। इस आय से वे अपने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा कर रही हैं और बच्चों की पढ़ाई भी निर्बाध रूप से जारी है। उनका यह प्रयास गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन चुका है।
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम कोरदा की माहेश्वरी यादव भी महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक मिसाल हैं। पहले उनका जीवन सामान्य गृहिणी की तरह घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित था। लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन आया।
समूह के सहयोग और परिवार के समर्थन से उन्होंने गांव में एक छोटी किराना दुकान शुरू की। अपनी मेहनत और बेहतर प्रबंधन के बल पर यह दुकान धीरे-धीरे गांव में भरोसेमंद केंद्र बन गई। आज इस दुकान से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये की आय हो रही है और वे ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। इससे उनके बच्चों की शिक्षा और परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
बिलासपुर जिले के मस्तूरी क्षेत्र की सीमा वर्मा ने भी यह साबित किया है कि अवसर और प्रशिक्षण मिलने पर महिलाएं आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में भी नई पहचान बना सकती हैं।
स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने पहले मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू किया और बाद में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। शासन की सहायता से उन्हें ड्रोन सेट, जनरेटर और ई-वाहन उपलब्ध कराया गया।
आज सीमा वर्मा किसानों के खेतों में ड्रोन के माध्यम से कीटनाशक छिड़काव कर रही हैं और इस कार्य से उन्हें सम्मानजनक आय प्राप्त हो रही है। गांव में लोग उन्हें स्नेहपूर्वक ‘ड्रोन दीदी’ के नाम से जानते हैं।
राज्य सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए 8 हजार 245 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है।
आंगनबाड़ी एवं पोषण योजनाओं के लिए 2 हजार 320 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए 120 करोड़ रुपये, मिशन वात्सल्य के लिए 80 करोड़ रुपये तथा रानी दुर्गावती योजना के लिए 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इसके अतिरिक्त 750 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए 42 करोड़ रुपये और 250 महतारी सदनों के निर्माण के लिए 75 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह बजटीय प्रावधान महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
महिला सुरक्षा के क्षेत्र में भी राज्य ने प्रभावी तंत्र विकसित किया है। वन स्टॉप सेंटर, 181 महिला हेल्पलाइन और डायल 112 के माध्यम से संकट की स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सुखद सहारा योजना के अंतर्गत 2 लाख 18 हजार से अधिक विधवा एवं परित्यक्ता महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
प्रदेश में 42 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों को रियायती ऋण प्रदान कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया है। रेडी-टू-ईट कार्य महिला समूहों को सौंपे जाने से उन्हें स्थायी आय का स्रोत मिला है। इसके साथ ही डिजिटल सखी, दीदी ई-रिक्शा, सिलाई मशीन सहायता, मिनीमाता महतारी जतन योजना और लखपति दीदी जैसी पहलें महिलाओं को नए आजीविका अवसर प्रदान कर रही हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के अनुसार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें सुरक्षित तथा सम्मानजनक वातावरण प्रदान करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ के माध्यम से राज्य को समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसमें महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को अनिवार्य तत्व माना गया है।
‘महतारी गौरव वर्ष’ केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का व्यापक अभियान है। यह वर्ष छत्तीसगढ़ में मातृशक्ति के सम्मान, आत्मविश्वास और नेतृत्व को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प लेकर आया है। आज प्रदेश की महिलाएं आत्मनिर्भरता, नवाचार और नेतृत्व के साथ विकास की नई कहानी लिख रही हैं। यही सशक्त मातृशक्ति विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत आधारशिला बनेगी।

जशपुर जिले में बस दुर्घटना पर मुख्यमंत्री ने जताया गहरा दुःख, घायलों के समुचित उपचार के दिए निर्देश

06-Mar-2026
रायपुर। ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड अंतर्गत ग्राम गोडा अंबा के पास हुई बस दुर्घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने इस दुर्घटना में लोगों के असामयिक निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा है कि यह समाचार अत्यंत दुखद और हृदय विदारक है।
मुख्यमंत्री साय ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिजनों को इस कठिन घड़ी को सहन करने की शक्ति दें। उन्होंने दुर्घटना में घायल सभी लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि दुर्घटना में घायल सभी व्यक्तियों के उपचार में किसी भी प्रकार की कमी न रहने दी जाए तथा उन्हें हर संभव चिकित्सा सुविधा और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों की सतत निगरानी करते हुए प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।










 

 


सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

06-Mar-2026
रायपुर,। ( शोर संदेश )  प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ताहीन कार्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कहीं भी निर्माण कार्य में कमी पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी और दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने यह निर्देश आज मंत्रालय महानदी भवन में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कार्यों और गतिविधियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव  उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों से कहा कि सड़क निर्माण के बाद निरीक्षण करने के बजाय निर्माण के दौरान ही नियमित रूप से फील्ड में जाकर गुणवत्ता की निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि सड़कों का निर्माण केवल तकनीकी कार्य नहीं बल्कि आमजन की सुविधा से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण अधोसंरचनात्मक कार्य है और इससे सरकार की छवि भी बनती है। यदि सड़क बनने के कुछ वर्षों के भीतर ही खराब हो जाए तो इससे सरकार की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
बैठक में बागबहार–कोतबा सड़क की खराब स्थिति पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह सड़क कुछ वर्ष पहले ही बनी थी, लेकिन उसकी स्थिति तेजी से खराब हो गई है। यदि सड़क चार वर्ष भी नहीं चले तो इसका कोई औचित्य नहीं रह जाता। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस सड़क के निर्माण में हुई कमियों की गंभीरता से जांच की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो इसके लिए निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता की सख्त निगरानी की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण कार्य हो रहे हैं, लेकिन आमजन को इन कार्यों की जानकारी नहीं मिल पाती जिससे सकारात्मक नैरेटिव नहीं बनता। उन्होंने निर्देश दिए कि बड़ी सड़क परियोजनाओं के शिलान्यास और भूमिपूजन मुख्यमंत्री और मंत्रियों के हाथों से कराए जाएं तथा उन्हें व्यापक रूप से आमजन के सामने प्रस्तुत किया जाए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सड़क निर्माण के टेंडर जारी होने से लेकर कार्य आवंटन (अवॉर्ड) तक की पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए। उन्होंने कहा कि कई ठेकेदार बहुत कम दर यानी बिलो रेट पर टेंडर प्राप्त कर लेते हैं, जिसके कारण कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। यदि ठेकेदार बिलो रेट पर टेंडर लेता है तो यह उसकी जिम्मेदारी होगी कि वह कार्य को निर्धारित गुणवत्ता और समय-सीमा में पूरा करे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियमावली तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अन्य राज्यों में लागू बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में भी उपयुक्त प्रावधान लागू किए जाएं। साथ ही टेंडर और डीपीआर जैसे तकनीकी कार्यों के लिए एक अलग इकाई बनाने पर भी गंभीरता से विचार किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगभग 300 ऐसे गांव चिन्हित किए गए हैं, जहां बरसात के दौरान संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। ऐसे गांवों तक पहुंचने के लिए लोगों को कई बार बीमार मरीजों को खाट में उठाकर ले जाना पड़ता है, जो अत्यंत चिंता का विषय है। खाद्य विभाग से प्राप्त सूची के आधार पर चिन्हित इन गांवों को सड़कों और पुल-पुलियों के माध्यम से जोड़ने का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जाए।
मुख्यमंत्री साय ने लैलूंगा–कुंजारा–तोलगेपहाड़–मिलूपारा–तमनार मार्ग के निर्माण की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बड़ी आबादी निवास करती है और यहां सड़क का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। इस मार्ग के कुछ हिस्से में वन स्वीकृति की आवश्यकता होगी, लेकिन शेष हिस्सों में निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए।
बैठक में मनेंद्रगढ़–सूरजपुर–अंबिकापुर–पत्थलगांव–कुनकुरी–जशपुर–झारखंड सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-43 की प्रगति की भी समीक्षा की गई। लगभग 353 किलोमीटर लंबाई वाली इस सड़क परियोजना की स्थिति पर चर्चा की गई।पत्थलगांव-कुनकुरी खंड में भू-अर्जन का मुआवजा दिए जाने की जानकारी भी बैठक में साझा की गई। इसके अलावा अंबिकापुर–सेमरसोत–रामानुजगंज–गढ़वा मार्ग, गीदम–दंतेवाड़ा मार्ग, चांपा–सक्ती–रायगढ़–ओडिशा सीमा मार्ग, रायपुर–दुर्ग मार्ग तथा चिल्फी क्षेत्र की सड़कों सहित कई अन्य परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। 
बैठक में बस्तर में पुल-पुलिया निर्माण सहित 17 सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही राज्य द्रुतगामी सड़क संपर्क मार्ग की आगामी कार्ययोजना की विस्तृत रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई।
मुख्यमंत्री ने भवन निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में शासकीय भवनों के डिजाइन बहुत पुराने और एक जैसे दिखाई देते हैं। अब समय आ गया है कि शासकीय भवनों का निर्माण आधुनिक डिजाइन और तकनीक के आधार पर किया जाए। उन्होंने कहा कि भवनों का डिजाइन उनकी उपयोगिता के अनुरूप होना चाहिए और भूमि के बेहतर उपयोग के लिए हॉरिजॉन्टल की जगह वर्टिकल संरचना को बढ़ावा दिया जाए। मुख्यमंत्री ने राजभवन में बन रहे गेस्ट हाउस को भी आधुनिक और गरिमामय स्वरूप में तैयार करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें आमजन के जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं और लोग सड़क की गुणवत्ता को बहुत महत्व देते हैं। अन्य कई विकास कार्य भले दिखाई न दें, लेकिन सड़कें सीधे लोगों को दिखाई देती हैं और सरकार की छवि भी उसी के आधार पर बनती है। इसलिए लोक निर्माण विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है और इसमें होने वाले कार्यों को समयबद्धता और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाना अनिवार्य है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसा तंत्र विकसित किया जाए जिससे सड़कों में बनने वाले गड्ढों की जानकारी समय पर मिल सके और उन्हें तुरंत ठीक किया जा सके।
बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत तथा लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

दीर्घकालिक विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा राज्य नीति आयोग : मुख्यमंत्री साय

06-Mar-2026
रायपुर( शोर संदेश )।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय नवा रायपुर स्थित नीति भवन में छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा के पदभार ग्रहण समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने उन्हें इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य नीति आयोग प्रदेश के दीर्घकालिक विकास विज़न, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय के माध्यम से छत्तीसगढ़ के विकास को नई दिशा और गति देने वाला एक महत्वपूर्ण संस्थान है। उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विकास की योजनाएँ और रणनीतियाँ तैयार करने में आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी दृष्टि को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ में भी छत्तीसगढ़ विज़न डॉक्युमेंट 2047 तैयार किया गया है, जिससे प्रदेश के समग्र और दीर्घकालिक विकास की रूपरेखा तय की जा रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग के गठन का निर्णय दूरदर्शी सोच का परिणाम था। आज नीति आयोग द्वारा संचालित आकांक्षी जिलों का कार्यक्रम देश के पिछड़े क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिसका सकारात्मक प्रभाव छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिलों में भी देखने को मिला है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नीति आयोग की विशेषता यह है कि यह क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नीति और योजना निर्माण को बढ़ावा देता है। इसी सोच के साथ राज्यों में भी राज्य नीति आयोग का गठन किया गया है, जो विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जनभागीदारी के साथ प्रदेश में विकास को नई गति देने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि गणेश शंकर मिश्रा के प्रशासनिक अनुभव से राज्य नीति आयोग को नई दिशा और गति मिलेगी। आयोग की ओर से प्राप्त अच्छे सुझावों को राज्य सरकार गंभीरता से लेकर प्रभावी ढंग से लागू करने का प्रयास करेगी।
राज्य नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर और भविष्योन्मुखी नीतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को अधिक समृद्ध और विकसित बनाने की दिशा में सभी के साथ मिलकर कार्य किया जाएगा।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक लता उसेंडी, विधायक अमर अग्रवाल, महापौर धमतरी रामू रोहरा, राज्य नीति आयोग के सदस्य डॉ. के. सुब्रह्मण्यम, सदस्य सचिव शीष भट्ट, सचिव भुवनेश यादव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री निवास में होली के रंगों की बौछार: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों-कर्मचारियों संग खेली होली

04-Mar-2026
रायपुर, 4 मार्च 2026 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पूरे उत्साह और उमंग के साथ होली का पर्व मनाया। पारंपरिक फाग गीतों और हर्षोल्लास के वातावरण में रंग और उल्लास से सराबोर इस अवसर पर सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएँ दीं। अधिकारियों और कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री साय को गुलाल लगाकर उन्हें बधाई दी, वहीं मुख्यमंत्री साय ने भी आत्मीयता के साथ सभी को गुलाल लगाकर रंगोत्सव की शुभकामनाएँ दीं और स्नेह, विश्वास तथा आपसी भाईचारे का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सद्भाव और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व समाज में एकता, भाईचारे और सकारात्मकता की भावना को सुदृढ़ करता है तथा जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के पर्व हमें आपसी मतभेद भुलाकर मिल-जुलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज मुख्यमंत्री निवास में आयोजित होली मिलन समारोह में सभी से आत्मीय भेंट कर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, साथियों और प्रदेशवासियों के साथ स्नेह, विश्वास और अपनत्व के रंग साझा करना इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों का स्नेह और आशीर्वाद ही जनसेवा के उनके संकल्प को और अधिक सशक्त बनाता है।
मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए सभी को होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि रंगों का यह पावन पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और नई ऊर्जा का संचार करे तथा हमारा छत्तीसगढ़ निरंतर विकास और खुशहाली के नए आयाम स्थापित करता रहे। 
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित कुमार, रायपुर के पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला सहित मुख्यमंत्री सचिवालय एवं निवास कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।





 

प्रेम और सद्भाव के रंगों से सराबोर हो होली : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएँ

03-Mar-2026
रायपुर( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कामना की है कि यह उल्लास, उमंग और आत्मीयता का महापर्व सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और नई ऊर्जा का संचार करे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि यह आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे को सशक्त बनाने का अवसर है। यह पर्व समाज में समरसता, सद्भाव और एकता की भावना को प्रगाढ़ करता है तथा हमें सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में होली का विशेष महत्व है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय, अहंकार पर विनम्रता की जीत और वैमनस्य पर प्रेम की प्रधानता का संदेश देता है। होली के रंग हमें स्मरण कराते हैं कि विविधताओं से परिपूर्ण हमारे समाज की वास्तविक शक्ति परस्पर विश्वास, अपनत्व और सामूहिक सहयोग में निहित है।
मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस पर्व को हर्षोल्लास, संयम और पारंपरिक मर्यादाओं के साथ मनाएँ। प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दें तथा समाज के वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों के साथ भी इस उत्सव की खुशियाँ साझा करें। 
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के रंगों से सजी यह होली छत्तीसगढ़ की एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव को और अधिक सुदृढ़ करेगी।

विष्णु देव साय ने संघ की 100 वर्षों की गौरवगाथा पर आधारित फिल्म ‘शतक’ को छत्तीसगढ़ में किया टैक्स-फ्री

27-Feb-2026
रायपुर।   ( शोर संदेश ) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित जोरा मॉल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गौरवशाली 100 वर्षों की यात्रा पर आधारित फिल्म ‘शतक’ देखी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय के साथ मंत्रिमंडल के सदस्य तथा जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री साय ने फिल्म के प्रदर्शन के बाद कहा कि ‘शतक’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, जनसेवा और समर्पण की सतत साधना का सजीव चित्रण है। 
उन्होंने कहा कि संघ की प्रेरक गाथा जन-जन तक पहुँचे और नई पीढ़ी को राष्ट्र सेवा की भावना से प्रेरणा मिले, इस उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में इस फिल्म को टैक्स-फ्री करने का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पूजनीय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी के तप, त्याग और दूरदर्शी विचारों से प्रारंभ हुई इस यात्रा को पूजनीय माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर जी ने नई दिशा और संगठनात्मक शक्ति प्रदान की। एक शताब्दी का यह इतिहास लाखों स्वयंसेवकों के अनुशासन, समर्पण और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना का जीवंत प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने शिक्षा, सेवा और सामाजिक समरसता के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने का कार्य किया है। आपदा, संकट और सामाजिक आवश्यकताओं के समय संघ कार्यकर्ताओं की सेवा भावना ने समाज को सशक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनसेवा और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की यही प्रेरणा शासन के कार्यों में भी मार्गदर्शक बनती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि फिल्म ‘शतक’ युवाओं सहित समाज के सभी वर्गों को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करेगी।




 

 



Feedback/Enquiry



Log In Your Account