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भारत-ईएफटीए व्यापार समझौता से अब भारतीय उत्पादों को मिलेगा यूरोपीय बाज़ार

13-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते (TEPA) पर 10 मार्च 2024 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे। 1 अक्टूबर 2025 से लागू यह समझौता भारत की विदेश व्यापार नीति में निर्णायक साबित होगा।
यूरोप के चार विकसित देशों स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन के साथ किया गया यह भारत का पहला मुक्त व्यापार समझौता है और आर्थिक दृष्टि से सबसे महत्वाकांक्षी समझौतों में से एक है। यह परिमाण और उद्देश्य के लिहाज से सबसे महत्वाकांक्षी समझौतों में से एक है। यह आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना और ईएफटीए की मजबूत और विविधीकृत साझेदारीयों की तलाश के रणनीतिक संमिलन का प्रतीक है
इस समझौते में 14 अध्याय शामिल हैं, जो मुख्य क्षेत्रों जैसे कि वस्तुओं की बाजार तक पहुंच, उत्पत्ति के नियम, व्यापार सुविधा, व्यापार में सुधार, स्वच्छता और पादप-स्वच्छता उपाय, व्यापार की तकनीकी बाधाएँ, निवेश प्रोत्साहन, सेवाएँ, बौद्धिक संपदा अधिकार, व्यापार और संवहनीय विकास और अन्य कानूनी और आपसी प्रतिस्पर्धा घटाने के प्रावधानों पर केंद्रित हैं।
इस समझौते का मुख्य लक्ष्य अगले पंद्रह वर्षों में भारत में 100 बिलियन डॉलर का निवेश लाना तथा दस लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करना है। यह देश के आर्थिक इतिहास में सबसे अग्रगामी व्यापार साझेदारीयों में से एक है।
अनुच्छेद 7.1 के अंतर्गत, ईएफटीए के चार सदस्य देशों ने पहले 10 वर्षों में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को 50 अरब डॉलर तक बढ़ाने और उसके अगले 5 वर्षों में अतिरिक्त 50 अरब डॉलर तक बढ़ाने का संकल्प लिया है।
पोर्टफोलियो आप्रवाह के विपरीत, ये दीर्घकालिक, क्षमता-निर्माण निवेश है जिसमें विनिर्माण, नवोन्मेष और अनुसंधान को केंद्र में रखा गया है। समय के साथ, इनसे दस लाख प्रत्यक्ष रोज़गार पैदा होने और भारत के कुशल कार्यबल और यूरोप के प्रौद्योगिकी परिवेश के बीच गहरे संबंध स्थापित होने की संभावना है।
फरवरी 2025 से निवेश सुविधा को सुव्यवस्थित करने के लिए, एक समर्पित भारत-ईएफटीए डेस्क शुरू किया गया है, यह संभावित निवेशकों के लिए सिंगल विंडो प्लेटफार्म के रूप में कार्य करता है। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा, जीवन विज्ञान, इंजीनियरिंग, और डिजिटल बदलाव पर विशेष ध्यान दिया गया है, इसके साथ ही यह संयुक्त उद्यमों और लघु और मध्यम उद्यमों के सहयोग को भी बढ़ावा देता है।
टीईपीए महत्वाकांक्षा और विवेक के बीच संतुलन बनाता है। ईएफटीए ने सीमा शुल्क की 92.2 प्रतिशत उत्पाद प्रविष्टियों पर रियायत की पेशकश की है, जिसके दायरे में भारत का 99.6 प्रतिशत निर्यात शामिल है। इससे सभी गैर-कृषि वस्तुएं और प्रसंस्करित कृषि उत्पाद रियायत के दायरे में आएंगे।
बदले में, भारत ने कड़े सुरक्षा उपायों के साथ 82.7 प्रतिशत उत्पाद प्रविष्टियां पर पहुँच दे दी है, जो ईएफटीए निर्यात का 95.3 प्रतिशत है। ईएफटीए से 80 प्रतिशत से ज़्यादा आयात सोने का आयात होता है जिसमें प्रभावी शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
डेयरी, सोया, कोयला, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण और चुनिंदा खाद्य उत्पादों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस सूची से अलग रखा गया है। मेक इन इंडिया और उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना जैसे प्रमुख कार्यक्रमों के तहत आने वाले उत्पादों के लिए, सीमा शुल्क में 5-10 वर्षों में चरणबद्ध कटौती की जा रही है। इससे घरेलू उद्योगों को स्पर्धा में उतरने से पहले मज़बूत होने का समय मिल जाता है।
भारत के सकल मूल्य वर्धन(जीवीए) में सेवाओं का योगदान 55% से अधिक है और टीईपीए ज्ञान और डिजिटल सेवाओं में अगली पीढ़ी के व्यापार के लिए एक मंच प्रदान करता है।
भारत ने 105 उप-क्षेत्रों में अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है, जबकि ईएफटीए के प्रस्तावों में स्विट्ज़रलैंड से 128, नॉर्वे से 114, आइसलैंड से 110 और लिकटेंस्टीन से 107 क्षेत्रों की पेशकश है। इसमें आईटी और व्यावसायिक सेवाएँ, शिक्षा, मीडिया, सांस्कृतिक और व्यावसायिक सेवाओं जैसे प्रमुख भारतीय क्षेत्र शामिल हैं।
टीईपीए का एक निर्णायक प्रावधान पेशेवर गतिशीलता को आसान बनाने की दिशा में एक कदम के रूप में, नर्सिंग, चार्टर्ड अकाउंटेंसी और वास्तुकला जैसे व्यवसायों में पारस्परिक मान्यता समझौतों (एमआरए) को शामिल करना है, जो कि सहज व्यावसायिक गतिशीलता की दिशा में एक कदम है।
टीईपीए से आईटी और व्यावसायिक सेवाओं, सांस्कृतिक और मनोरंजन, शिक्षा और दृश्य-श्रव्य सेवाओं जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारत से दी जाने वाली सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा मिलने की भी उम्मीद है।
मोड 1: सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी
मोड 2: व्यावसायिक उपस्थिति
मोड 3: कुशल पेशेवरों के प्रवेश और अस्थायी प्रवास के लिए निश्चितता
टीईपीए के आईपीआर प्रावधान ट्रिप्स (बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार-संबंधित पहलू) के प्रति प्रतिबद्ध हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और जेनेरिक दवाओं पर भारत के लचीलेपन को बनाए रखते हुए उच्च स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
वैश्विक नवाचार के केंद्र स्विट्ज़रलैंड के लिए, आईपीआर अध्याय भारत की नियामक शक्ति में विश्वास को दिखाता है। वहीं, पेटेंट एवरग्रीनिंग के खिलाफ भारत के सुरक्षा उपाय दवाओं तक किफ़ायती पहुँच सुनिश्चित करते हैं। यह संतुलन नवोन्मेष और समावेशन के बीच विश्वास-आधारित सहयोग का एक आदर्श मॉडल बनाता है।
टीईपीए संवहनीय विकास, समावेशी विकास, सामाजिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण पर ज़ोर देता है। यह व्यापार प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, दक्षता, सरलीकरण, सामंजस्य और निरंतरता को बढ़ावा देगा।
भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते से भारतीय उद्योंगों के लिए कई अवसर खुलते हैं। ईएफटीए में 92 प्रतिशत उत्पाद प्रविष्टियां शामिल होने से, मशीनरी, जैविक रसायन, कपड़ा और प्रसंस्करित खाद्य पदार्थ जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों की ईएफटीए के बाजारों तक पहुंच बढ़ेगी। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ने, लागत कम करने और वहाँ के बाजारों में भारतीय उत्पादों के प्रवेश में तेजी आने की संभावना है।
वित्त वर्ष 2024-25 में ईएफटीए देशों में भारत का निर्यात 72.37 मिलियन डॉलर का होगा, जिसमें ग्वार गम, प्रसंस्करित सब्जियाँ, बासमती चावल, दालें, फल और अंगूर प्रमुख हैं।
टीईपीए ने विशेष रूप से स्विट्जरलैंड और नॉर्वे में इन श्रेणियों में सीमाशुल्क को कम किया है या समाप्त कर दिया है, जिसमें ईएफटीए के साथ भारत के कृषि-व्यापार का 99% से अधिक हिस्सा है।
ईएफटीए देश मिलकर 175 मिलियन डॉलर मूल्य की कॉफ़ी का आयात करते हैं, जो वैश्विक व्यापार का लगभग 3% है। सभी कॉफी श्रेणियों पर शुल्क समाप्त होने से भारतीय उत्पादकों की स्विट्जरलैंड और नॉर्वे के प्रीमियम बाजारों तक पहुंच बढ़ेगी, यह छाया में उगाई गई और हाथ से चुनी गई भारतीय कॉफी के लिए एक आदर्श स्थान है।
चाय के लिए, ईएफटीए के छोटे लेकिन उच्च मूल्य वाले बाजार (लगभग 3 मिलियन किलोग्राम प्रतिवर्ष) में पहले ही लाभ दिखने लगा है, भारत का औसत निर्यात 2024-25 में बढ़कर 6.77 डॉलर प्रति किलोग्राम हो गया जबकि पिछले वर्ष यह 5.93 डॉलर प्रति किलोग्राम था।
वित्त वर्ष 2024-25 में ईएफटीए देशों को इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात 315 मिलियन डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 18% अधिक है। इस समझौते से इलेक्ट्रिक मशीनरी, तांबे के उत्पादों, ऊर्जा-कुशल प्रणालियों और इंजीनियरिंग के लिए बाजार पहुँच का विस्तार होगा।
कपड़ा और परिधान, जिनका मूल्य 0.13 बिलियन डॉलर है, तथा चमड़ा और जूते-चप्पल पर शुल्क स्थिर रखने और मानकों के सरलीकरण से लाभ मिलेगा, जबकि खेल के सामान और खिलौनों का ड्यूटी समाप्त करने और अनुरूपता मानकों की आपसी सहमति का लाभ होगा।
रत्न एवं आभूषणों को टीईपीए, सभी ईएफटीए देशों में शुल्क-मुक्त रखा गया है, जिससे हीरे, सोने और रंगीन रत्नों के निर्यातकों के लिए दीर्घकालिक पूर्वानुमान सुनिश्चित किया जा सकता है।
ईएफटीए ने भारत के 95% रासायनिक निर्यात पर सीमाशुल्क समाप्त कर दिया है या कम कर दिया है जिससे मुक्त व्यापार समझौते से पहले के शुल्कों में 54% तक की कटौती हुई है।
निर्यात 49 मिलियन डॉलर से बढ़कर 65-70 मिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, विशेष रूप से पालतू पशुओं के भोजन, रबर, सिरेमिक और कांच के बने पदार्थों में।
प्लास्टिक और से लाख से बने उत्पादों के लिए, टीईपीए उच्च-मूल्य वाले यूरोपीय बाजारों में विविधीकरण को सक्षम बनाता है, जिससे अमेरिका जैसे ज्यादा टैरिफ वाले देशों पर निर्भरता कम होती है।
टीईपीए भारत के लिए एक व्यापार समझौते से कहीं बढ़कर है, यह समान विचारधारा वाली अर्थव्यवस्थाओं के साथ रणनीतिक विश्वास का एक साधन है जो पारदर्शिता, नियम-आधारित व्यापार और नवोन्मेष को महत्व देते हैं।
यह व्यापार उदारीकरण के प्रति एक परिपक्व दृष्टिकोण को भी दर्शाता है, जो देश के हितों की रक्षा करते हुए भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में प्रस्तुत करता है। निवेश, रोजगार, प्रौद्योगिकी और संवहनीयता के द्वार खोलकर, टीईपीए एक आधुनिक आर्थिक साझेदारी का उदाहरण प्रस्तुत करता है, जो महत्वाकांक्षी, संतुलित और दूरदर्शी है।
भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए) एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो चार विकसित यूरोपीय देशों के साथ भारत का पहला मुक्त व्यापार समझौता है। इसके माध्यम से आने वाले 15 वर्षों में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजन की संभावनाएं जुड़ी हुई हैं। यह समझौता वस्तुओं और सेवाओं की बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाएगा, बौद्धिक संपदा अधिकारों को सशक्त करेगा और ‘मेक इन इंडिया’ व ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को आगे बढ़ाते हुए सतत और समावेशी विकास को प्रोत्साहित करेगा। 





 

वित्त मंत्रालय और पीएसबी समीक्षा बैठक करेंगे, जिसमें एमएसएमई पर अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव का आकलन किया जाएगा

13-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, वित्त मंत्रालय सोमवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के साथ एक रिव्यू मीटिंग करने जा रहा है, जिसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ वृद्धि के प्रतिकूल प्रभाव का आकलन किया जाएगा। साथ ही, उनकी क्रेडिट से जुड़ी जरूरतों को जानने की कोशिश की जाएगी। 
वित्त मंत्रालय का वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव एम नागराजू की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक का उद्देश्य यह समझना है कि बाहरी व्यापार दबाव एमएसएमई को कैसे प्रभावित कर रहे हैं और यह सुनिश्चित करना है कि मौजूदा सरकारी पहलों के तहत पर्याप्त ऋण सहायता जारी रहे।
इस उच्च-स्तरीय बैठक में सरकार की मुद्रा और ऋण गारंटी योजनाओं जैसी वित्तीय समावेशन पहलों के माध्यम से धन प्रवाह की समीक्षा की जाएगी। इंजीनियरिंग सेक्टर के एमएसएमई ने हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​से मुलाकात की थी और हाल ही में अमेरिकी टैरिफ के मद्देनजर इस क्षेत्र की कमजोरियों को उजागर किया था और निर्यातकों के लिए उधारी लागत कम करने में सहायता मांगी थी।
ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा के अनुसार, “भारत का अमेरिका को इंजीनियरिंग निर्यात औसतन लगभग 20 अरब डॉलर का है, जो अमेरिकी टैरिफ के अधीन भारत के कुल निर्यात का लगभग 45 प्रतिशत है। यह हमारे क्षेत्र की कमजोरी और सरकारी सहायता की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है। इस नुकसान को कम करने के लिए उद्योग को कुछ क्षेत्रों में तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता है।”
उन्होंने एक्सपोर्ट फाइनेंसिंग के लिए कोलेटेरल फ्री लोन के संबंध में एमएसएमई निर्यातकों के सामने आने वाली चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया। एमएसएमई को बैंकों और वित्तीय संस्थानों से वित्त प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जहां हाई-कोलेटेरल आवश्यकताएं बनी रहती हैं।इसके अतिरिक्त, बैंकों द्वारा कोलेटरल और ब्याज दरों का निर्धारण करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला क्रेडिट रेटिंग सिस्टम एमएसएमई को असमान रूप से प्रभावित करता है।
उन्होंने कहा कि परिणामस्वरूप, एमएसएमई को पर्याप्त कोलेटरल प्रदान करने के अलावा उच्च ब्याज दरों का भुगतान करना पड़ता है। ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष ने कहा कि इंजीनियरिंग निर्यातकों के अमेरिकी जोखिम ने उनकी क्रेडिट रेटिंग को प्रभावित किया है और सुझाव दिया कि रेटिंग एजेंसियों को कम से कम इस वर्ष के लिए क्रेडिट रेटिंग की गणना करते समय अमेरिकी जोखिम पर विचार नहीं करना चाहिए।

राजमाता विजयाराजे सिंधिया राष्ट्र निर्माण की प्रेरणास्रोत — पीएम मोदी

13-Oct-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) ।   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनका सशक्त, सुरक्षित और समृद्ध भारत का सपना आत्मनिर्भर भारत के जरिये साकार होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि राजमाता ने जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई और उनके आदर्श आज भी राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “राजमाता विजयाराजे सिंधिया जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। समाज सेवा के उनके प्रयासों को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। उन्होंने जनसंघ और भाजपा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विजयाराजे सिंधिया जी हमारी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति गहरी आस्था रखती थीं और उन्हें संरक्षित व लोकप्रिय बनाने के लिए सदैव कार्यरत रहीं।”
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर 1 मिनट 19 सेकंड का एक वीडियो संदेश भी साझा किया। इसमें उन्होंने कहा, “पिछली शताब्दी में भारत को दिशा देने वाले कुछ चुनिंदा व्यक्तित्वों में राजमाता विजयाराजे सिंधिया शामिल थीं। वह केवल वात्सल्य मूर्ति ही नहीं, बल्कि एक निर्णायक नेता और कुशल प्रशासक थीं। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आजादी के बाद के दशकों तक राष्ट्रसेवा में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया।”
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “राजमाता राजपरिवार से थीं, उनके पास सब कुछ था, लेकिन उन्होंने अपना जीवन एक मां की तरह जनसेवा में खपा दिया। सशक्त, सुरक्षित और समृद्ध भारत उनका सपना था, और हम इस सपने को आत्मनिर्भर भारत के माध्यम से साकार करेंगे। राजमाता की प्रेरणा सदैव हमारे साथ रहेगी।” राजमाता विजयाराजे सिंधिया भारतीय राजनीति की प्रमुख हस्तियों में से एक थीं। उन्होंने जनसंघ से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और भाजपा की संस्थापक सदस्य के रूप में पार्टी को मजबूत नींव प्रदान की।
वहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, “अपने जीवन का हर क्षण लोककल्याण और अंत्योदय की उन्नति के लिए समर्पित करने वाली, सरलता, सहजता और संवेदनशीलता की त्रिवेणी, राजमाता विजयाराजे सिंधिया जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। पूज्य अम्मा महाराज जी स्नेह और वात्सल्य की प्रतिमूर्ति थीं। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे उनका स्नेह और आशीर्वाद मिला। जनसंघ और भाजपा को आपने मध्य प्रदेश में जिस सेवा और समर्पण से सींचा, वह हम सभी कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत है।”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, “राजसी वैभव का त्याग कर जनसेवा, लोकतंत्र और राष्ट्रवादी विचारधारा के सशक्तीकरण हेतु अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित करने वाली, भाजपा की संस्थापक सदस्य राजमाता विजयाराजे सिंधिया को विनम्र श्रद्धांजलि। त्याग, संघर्ष और सेवा की प्रतिमूर्ति राजमाता ने जो दिशा दी, वह भारत की एकता और अखंडता को सदैव बल देती रहेगी।” केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने भी श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “सेवा, त्याग और सादगी की प्रतिमूर्ति, भाजपा की संस्थापक सदस्य राजमाता विजयाराजे सिंधिया जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन जनकल्याण और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित किया। गरीबों और वंचितों के लिए उनके प्रयास सशक्त भारत के निर्माण के लिए प्रेरणादायक हैं।


 

धन धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन से आत्मनिर्भर भारत की नई खेती क्रांति — पीएम मोदी

12-Oct-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि बीते 11 वर्षों में भारत का कृषि निर्यात करीब-करीब दोगुना हो गया है। अनाज उत्पादन 900 लाख मीट्रिक टन और बढ़ गया। फल और सब्जियों का उत्पादन 640 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा बढ़ गया है। नई दिल्ली स्थित इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टिट्यूट में एक विशेष कृषि कार्यक्रम में किसानों के लिए दो नई योजनाओं ‘प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना’ और ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ को लॉन्च करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ये दो योजनाएं भारत के किसानों का भाग्य बदलने का काम करेंगी।
उन्होंने बताया कि इन योजनाओं पर सरकार करीब 35 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने वाली है। उन्होंने किसानों के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खेती और किसानी हमेशा से हमारी विकास यात्रा का एक प्रमुख हिस्सा रही है। यह बेहद जरूरी है कि बदलते समय के साथ खेती और किसान को सरकार का सहयोग मिलता रहे।
पीएम मोदी ने आगे कहा, “बीज से लेकर बाजार तक अनगिनत सुधार किए गए। जिसके परिणामस्वरूप आज दूध उत्पादन में भारत दुनिया में नंबर एक पर है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक है। भारत में शहद उत्पादन 2014 की तुलना में दोगुना हो गया है। देश में 6 बड़ी फर्टिलाइजर फैक्ट्रियां बनाई गई हैं। 25 करोड़ से ज्यादा सॉइल हेल्थ कार्ड किसानों को दिए गए हैं। 100 लाख हेक्टेयर में सूक्ष्म सिंचाई की सुविधा पहुंची है। पीएम फसल बीमा योजना से करीब 2 लाख करोड़ रुपए क्लेम के रूप में किसानों को मिले हैं। बीते 11 वर्षों में 10 हजार से ज्यादा किसान उत्पाद संघ एफपीओ बने।” उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में आने से पहले उनकी अनेक किसानों और मछुआरों से बात हुई। उन्हें कृषि क्षेत्र में काम कर रही महिलाओं के अनुभव सुनने का अवसर मिला।
पीएम मोदी ने कहा कि ऐसी अनेक उपलब्धियां हैं जो देश के किसानों ने बीते 11 वर्षों में अनुभव की हैं। उन्होंने कहा, “हमें विकसित बनने के लिए हर क्षेत्र में लगातार बेहतर करते ही रहना होगा। सुधार करना ही होगा। इसी सोच का प्रमाण पीएम धन-धान्य कृषि योजना है। इस योजना की प्रेरणा आकांक्षी जिला योजना का सफलता बनी है।”
आकांक्षी जिलों को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि जब वंचितों को वरीयता और पिछड़ों को प्राथमिकता मिलती है तो उसके नतीजे भी बहुत अच्छे मिलते हैं। आज आकांक्षी जिलों में माता मृत्यु दर घटी है। बच्चों का स्वास्थ्य और पढ़ाई का स्तर सुधरा है। ये जिले अब कई पैरामीटर्स को लेकर दूसरे जिलों से बेहतर कर रहे हैं।

भारत-ब्रिटेन साझेदारी ग्लोबल स्टेबिलिटी और आर्थिक प्रगति का आधार : पीएम मोदी

10-Oct-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर भारत दौरे पर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को मुंबई स्थित राजभवन में अपने समकक्ष कीर स्टारमर का स्वागत किया। इस दौरान, दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की प्रक्रिया के तहत एक बैठक की गई।
प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “प्राइम मिनिस्टर स्टारमर के नेतृत्व में भारत और ब्रिटेन के रिश्तों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इस साल जुलाई में मेरी ब्रिटेन यात्रा के दौरान हमने ऐतिहासिक ‘कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक और ट्रेड एग्रीमेंट’ पर सहमति बनाई। समझौते के कुछ ही महीनों में आपका (स्टारमर) यह भारत दौरा और आपके साथ आया अब तक का सबसे बड़ा बिजनेस डेलिगेशन, भारत-ब्रिटेन साझेदारी में आई नई ऊर्जा और व्यापक दृष्टि का प्रतीक है।”
उन्होंने कहा, “मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के दौर में भारत और ब्रिटेन के बीच यह बढ़ती हुई साझेदारी ग्लोबल स्टेबिलिटी और आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण आधार बन रही है।” 
प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान भारत और ब्रिटेन को ‘नेचुरल पार्टनर’ बताया। उन्होंने कहा, “हमारे संबंधों की नींव में डेमोक्रेसी, फ्रीडम और ‘रूल ऑफ लॉ’ जैसे मूल्यों में साझा विश्वास है।”
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह बहुत खुशी की बात है कि अब ब्रिटेन की 9 यूनिवर्सिटीज भारत में कैंपस खोलने जा रही हैं। साउथेम्प्टन यूनिवर्सिटी के गुरुग्राम कैंपस का हाल ही में उद्घाटन हुआ है और छात्रों का पहला बैच प्रवेश भी ले चुका है।”
पीएम मोदी ने बताया कि हमने मिलिट्री ट्रेनिंग में सहयोग पर समझौता किया है। इसके तहत भारतीय वायुसेना के ‘फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर’ ब्रिटेन की रॉयल एयरफोर्स में ट्रेनर्स के रूप में काम करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत की गतिशीलता और ब्रिटेन की विशेषज्ञता मिलकर एक अद्वितीय तालमेल बनाती है। हमारी साझेदारी भरोसेमंद है, टेलेंट और टेक्नोलॉजी ड्रिवन है। इससे पहले, भारतीय विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत-ब्रिटेन संबंधों को मजबूत बनाने के लिए हम एक साथ मिलकर काम करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई के राजभवन में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर का स्वागत किया।”

 


पीएम मोदी ने जताया उपराष्ट्रपति का आभार- ‘देश की सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात है’

10-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की ओर से दी गई हार्दिक शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद किया है। पीएम मोदी ने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करना सम्मान की बात है।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके 24 वर्षों की समर्पित सेवा पूरी करने और 25वें गौरवशाली वर्ष में प्रवेश करने पर हार्दिक बधाई दी थी। उपराष्ट्रपति ने अपने संदेश में पीएम मोदी की ‘राष्ट्र प्रथम’ की दृष्टि को भी सराहा। इस पर गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रतिक्रिया दी और कहा, “उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन जी, आपके स्नेहपूर्ण शब्दों के लिए धन्यवाद।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “अपने देश की सेवा करना और 140 करोड़ भारतीयों के सपनों व आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में काम करना मेरे लिए सम्मान की बात है।”इससे पहले, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य स्तर पर पहले और अब भारत के प्रधान सेवक के रूप में देश की सेवा की है।
उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित सेवा के 24 साल पूरे करने और सरकार के मुखिया के रूप में (पहले राज्य स्तर पर और अब भारत के प्रधान सेवक के रूप में) 25वें गौरवशाली वर्ष में प्रवेश करने पर मेरी हार्दिक बधाई। ‘राष्ट्र प्रथम’ के आपके दृष्टिकोण ने भारत को 5 अर्थव्यवस्थाओं से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में बदल दिया है। इसने 25 करोड़ लोगों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकाला है।”
उपराष्ट्रपति ने आगे लिखा, “आपकी यात्रा लाखों लोगों को प्रेरित करती है, जो धर्म, कर्तव्यबोध और सेवा भाव पर आधारित है। गरीबों को सशक्त बनाने से लेकर ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा देने और भारत के सांस्कृतिक गौरव को पुनर्जीवित करने तक, आपका नेतृत्व ‘2047 तक विकसित भारत’ का मार्ग प्रशस्त करता है।”उन्होंने यह भी कहा कि आप (पीएम मोदी) शक्ति, दूरदर्शिता और समर्पण के साथ राष्ट्र का मार्गदर्शन करते रहें। 

भारत-ब्रिटेन उच्चस्तरीय वार्ता में प्रौद्योगिकी, शिक्षा और निवेश सहित 12 बिंदुओं पर सहमति

10-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )  भारत और ब्रिटेन के बीच गुरुवार को हुई उच्चस्तरीय वार्ता में प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, शिक्षा, व्यापार एवं निवेश, जलवायु, स्वास्थ्य और अनुसंधान के क्षेत्रों में 12 नई पहल और समझौतों की शुरुआत हुई। दोनों देशों ने इन समझौतों के माध्यम से द्विपक्षीय सहयोग को और गहराई देने तथा साझा विकास के अवसरों को मजबूत करने का संकल्प व्यक्त किया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार दोनों देशों के लोगों के लाभ के लिए एक मजबूत और स्थायी साझेदारी के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने आज मुंबई में व्यापक वार्ता की। दोनों पक्षों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की और आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने के नए अवसरों की पहचान की।https://x.com/MEAIndia/status/1976223071339151669
चर्चा में भारत-ब्रिटेन संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा हुई, जिसमें व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए), निवेश, शिक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार, हरित ऊर्जा और जलवायु कार्रवाई, रक्षा और सुरक्षा तथा लोगों के बीच संबंध शामिल थे। उन्होंने हिंद-प्रशांत, यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की स्थिति सहित प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर कहा कि भारत-यूके व्यापक आर्थिक व्यापार समझौता (सीईटीए) एक अभूतपूर्व पहल है। यह युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, व्यापार का विस्तार करेगा और हमारे उद्योगों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभान्वित करेगा। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री स्टारमर और उन्होंने आने वाले समय में हमारे देशों के बीच व्यापारिक संबंधों और आर्थिक संबंधों पर चर्चा की।
उन्होंने बताया कि हमारी बातचीत में प्रमुखता से शामिल हुए अन्य मुद्दों में प्रौद्योगिकी, रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सतत विकास, नवीकरणीय ऊर्जा आदि शामिल थे। विभिन्न ब्रिटिश विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से मिलकर भी हमें बहुत खुशी हुई। हम ब्रिटेन के साथ शैक्षिक और सांस्कृतिक संबंधों को और आगे बढ़ाते रहेंगे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत-यूके कनेक्टिविटी एवं इनोवेशन सेंटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबंधित संयुक्त केंद्र, महत्वपूर्ण खनिज उद्योग गिल्ड और आईआईटी-आईएसएम धनबाद में एक नए सेटलाइट परिसर की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला वेधशाला के दूसरे चरण और जैव-चिकित्सा अनुसंधान करियर कार्यक्रम के तीसरे चरण का शुभारंभ भी किया गया।
शिक्षा के क्षेत्र में बेंगलुरु में लैंकेस्टर विश्वविद्यालय का परिसर खोलने के लिए आशय पत्र सौंपा गया, जबकि गिफ्ट सिटी में सरे विश्वविद्यालय का परिसर स्थापित करने को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई। व्यापार एवं निवेश के क्षेत्र में पुनर्गठित भारत-यूके सीईओ फोरम की उद्घाटन बैठक हुई और संयुक्त आर्थिक व्यापार समिति का पुनर्गठन किया गया, जिससे सीईटीए के कार्यान्वयन में सहयोग मिलेगा तथा आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा, जलवायु प्रौद्योगिकी स्टार्टअप फंड में संयुक्त निवेश से जुड़ा एक नया समझौता हुआ, जो जलवायु प्रौद्योगिकी और एआई जैसे क्षेत्रों में नवाचारी उद्यमियों को प्रोत्साहन देगा। स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और ब्रिटेन की नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर रिसर्च (एनआईएचआर) के बीच आशय पत्र पर भी हस्ताक्षर किए गए।
इससे पहले मुंबई के राजभवन में अपने मित्र, प्रधानमंत्री कीर स्टारमर का स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हुई। उनकी पहली भारत यात्रा होने के कारण, यह निश्चित रूप से एक विशेष अवसर है। भारत में सबसे बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति इसे और भी खास बनाती है और भारत-ब्रिटिश संबंधों की प्रबल संभावनाओं को दर्शाती है। 
 

कफ सिरप मामला: जांच से जुड़ी पीआईएल पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

10-Oct-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  कफ सिरप मामले में सुप्रीम कोर्ट अदालत की निगरानी में जांच की मांग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। याचिका में इस गंभीर मामले की जांच राष्ट्रीय न्यायिक आयोग या सीबीआई के माध्यम से विशेषज्ञों की समिति बनाकर कराए जाने की मांग की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने सुनवाई 10 अक्टूबर के लिए निर्धारित की।
वकील विशाल तिवारी की तरफ से दाखिल जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई कि मामले की निगरानी कोर्ट के रिटायर जज करें, ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा, याचिका में कफ सिरप में इस्तेमाल रसायन डायइथाइलीन ग्लाइकॉल और एथलीन ग्लाइकॉल की बिक्री और निगरानी के लिए सख्त नियम बनाए जाने की मांग भी की गई है। पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिए जाने और विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर को एक जगह ट्रांसफर कर संयुक्त जांच कराने की भी अपील की गई है।
याचिका में उन कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने, उन्हें तुरंत बंद करने और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है, जो विषैले कफ सिरप का उत्पादन कर रही हैं। साथ ही बाजार से संबंधित उत्पादों को वापस मंगाने और ड्रग्स रिकॉल पॉलिसी बनाने की भी गुजारिश की गई है।
इससे पहले, मध्य प्रदेश पुलिस ने छिंदवाड़ा में कफ सिरप पीने के कारण 20 से ज्यादा बच्चों की मौत के मामले में दवा कंपनी के मालिक को गिरफ्तार किया। तमिलनाडु की इस कंपनी के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ है।मामले में छिंदवाड़ा जिले के परासिया उप-मंडल के सिविल अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रवीण सोनी को निलंबित किया जा चुका है। जांच के लिए एसआईटी का भी गठन हुआ है।

भारत में जैव-चिकित्सा अनुसंधान को नई दिशा, 1,500 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुआ अनुसंधान करियर कार्यक्रम का तीसरा चरण

10-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) केंद्र सरकार ने जैव-चिकित्सा अनुसंधान करियर कार्यक्रम के तीसरे चरण को मंजूरी दे दी है। यह कार्यक्रम 2025-26 से 2030-31 तक चलेगा और 2037-38 तक विस्तारित सेवा अवधि में लागू रहेगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश में जैव-चिकित्सा विज्ञान, क्लिनिकल और जनस्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में विश्व स्तरीय अनुसंधान इकोसिस्टम तैयार करना है। इसके तहत कुल 1,500 करोड़ रुपये का खर्च किया जाएगा, जिसमें भारत सरकार के जैव-प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) की ओर से 1,000 करोड़ रुपये और ब्रिटेन के वेलकम ट्रस्ट की ओर से 500 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
इस कार्यक्रम के तहत 2,000 से अधिक शोधकर्ताओं को प्रशिक्षित करने, उच्च प्रभाव वाले प्रकाशन तैयार करने, पेटेंट योग्य खोजों को बढ़ावा देने और 25-30% परियोजनाओं को तकनीकी तैयारी स्तर (TRL-4) या उससे ऊपर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, महिलाओं वैज्ञानिकों के लिए 10-15% अधिक सहायता देने की योजना है ताकि वैज्ञानिक अनुसंधान में समावेशिता को बढ़ावा दिया जा सके। यह कार्यक्रम आत्मनिर्भर भारत, स्वस्थ भारत, स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे प्रमुख राष्ट्रीय मिशनों से जुड़ा हुआ है। बता दें कि जैव-प्रौद्योगिकी विभाग ने 2008 में वेलकम ट्रस्ट (यूके) के साथ मिलकर “जैव-चिकित्सा अनुसंधान करियर कार्यक्रम” की शुरुआत की थी। इसके पहले दो चरणों में 2,388 करोड़ रुपये का निवेश किया गया और 721 शोध अनुदान प्रदान किए गए। कार्यक्रम के दूसरे चरण में भारत और विदेशों के 90 वैज्ञानिकों को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ था।
तीसरे चरण में ‘अर्ली करियर’ और ‘इंटरमीडिएट फेलोशिप’, सहयोगात्मक अनुदान कार्यक्रम और अनुसंधान प्रबंधन कार्यक्रम जैसी योजनाओं के माध्यम से विभिन्न स्तरों पर वैज्ञानिकों को सहायता दी जाएगी। इसके तहत नए अनुसंधान फेलोशिप, सहयोगात्मक अनुदान और क्षमता-विकास की पहलें की जाएंगी। यह कार्यक्रम न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को मजबूत करेगा बल्कि अनुसंधान प्रबंधन, विज्ञान प्रशासन और नियामक मामलों में भी प्रशिक्षण प्रदान करेगा। “जैव-चिकित्सा अनुसंधान करियर कार्यक्रम” का प्रभाव पहले ही कई क्षेत्रों में दिख चुका है। कोविड-19 महामारी के दौरान इस कार्यक्रम के अंतर्गत 70 से अधिक अनुसंधान परियोजनाओं को वित्तपोषित किया गया, जिसमें 10 वैक्सीन उम्मीदवार, 34 डायग्नोस्टिक उपकरण और 10 उपचार विधियां विकसित की गईं। डीबीटी-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स (NIBMG) ने विश्व का पहला मौखिक कैंसर जीनोमिक वैरिएंट डेटाबेस (dbGENVOC) विकसित किया, जिसमें 2.4 करोड़ से अधिक वैरिएंट शामिल हैं।
इसके साथ ही, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से ‘राष्ट्रीय एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस मिशन’ भी शुरू किया गया है ताकि दवा प्रतिरोधक संक्रमणों से निपटने के लिए अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा दिया जा सके। भारत में बायो-रिपॉजिटरी और क्लिनिकल ट्रायल नेटवर्क भी स्थापित किए गए हैं जो अनुसंधान को प्रयोगशाला से रोगियों तक पहुंचाने में सहायक हैं। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए ‘बायोकेयर’, ‘जानकी अम्माल अवार्ड’ और ‘वुमन इन इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप रिसर्च जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। साथ ही, ‘विमेन लीडर्स इन ग्लोबल हेल्थ’ सम्मेलन के माध्यम से महिला वैज्ञानिकों को वैश्विक मंच पर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
भारत का जैव-चिकित्सा अनुसंधान मानव जीनोमिक्स, संक्रामक रोग जीवविज्ञान, वैक्सीन, डायग्नोस्टिक्स, थेराप्यूटिक्स, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, स्टेम सेल रिसर्च, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, समुद्री जैव प्रौद्योगिकी और जनस्वास्थ्य पोषण जैसे क्षेत्रों में केंद्रित है। इन पहलों के माध्यम से भारत ने न केवल सस्ती और स्वदेशी स्वास्थ्य तकनीक विकसित की है, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य नवाचार में अग्रणी भूमिका भी निभाई है। यह कार्यक्रम भारत को 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाने का एक बड़ा कदम है। जैव-चिकित्सा अनुसंधान अब केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भारत के हर नागरिक तक सस्ती, सुलभ और नवाचारी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का माध्यम बन गया है।

भारत-यूके व्यापार समझौता बनेगा नई आर्थिक साझेदारी की आधारशिला : पीएम मोदी

10-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच हो रहा व्यापार समझौता दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साझा विकास और समृद्धि का रोडमैप है। यह समझौता न केवल मार्केट एक्सेस को बढ़ाएगा बल्कि दोनों देशों के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को मजबूती देगा और लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आयोजित भारत-यूके सीईओ फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि वर्तमान में भारत और यूके के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 56 अरब डॉलर का है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने इस व्यापार को 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि यह लक्ष्य निर्धारित समय से पहले ही पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत राजनीतिक स्थिरता और व्यापक मांग के साथ निवेश के लिए आदर्श स्थान है, जहां इन्फ्रास्ट्रक्चर, वित्त, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य कई क्षेत्रों में बड़े अवसर मौजूद हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था निरंतर सुधारों की दिशा में बढ़ रही है और स्थिरता व आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य के व्यापार और विकास के लिए रेयर अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ खनिज) जैसे रणनीतिक सेक्टर्स बहुत महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि ये औद्योगिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ब्रिटिश समकक्ष कीर स्टार्मर ने संयुक्त रूप से सीईओ फोरम में भाग लिया। इस बैठक में दोनों देशों के प्रमुख व्यापारिक और वित्तीय नेता एक साथ उपस्थित थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उद्योग जगत के नेताओं और नीति निर्माताओं के अथक प्रयासों से भारत और ब्रिटेन ने व्यापार और आर्थिक सहयोग की एक मजबूत नींव तैयार की है।
प्रधानमंत्री मोदी ने महाराष्ट्र राजभवन में प्रधानमंत्री कीर स्टारमर से मुलाकात के बाद कहा, “भारत और ब्रिटेन स्वाभाविक साझेदार हैं। हमारी बढ़ती साझेदारी वैश्विक स्थिरता और आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।” दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत और पश्चिम एशिया क्षेत्र में शांति और स्थिरता पर भी चर्चा की। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में शांति बहाल करने के लिए बातचीत और कूटनीति ही सर्वोत्तम रास्ता है।
 



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