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शिक्षा

शिक्षकों को गतिविधि आधारित शिक्षण और टीएलएम उपयोग पर दिए निर्देश

20-Aug-2025
एमसीबी।  ( शोर संदेश )  कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देशानुसार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भरतपुर विकासखंड शिक्षा अधिकारी मो. इस्माइल खान ने विगत 19 अगस्त 2025 को क्षेत्र की शालाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने प्राथमिक शाला पड़ौली एवं माध्यमिक शाला जनुआ का भ्रमण कर शिक्षण-अध्यापन की स्थिति का आकलन किया। 
निरीक्षण के दौरान बीईओ ने बच्चों से सीधे संवाद कर उनकी शैक्षिक गुणवत्ता और सीखने की क्षमता की परख की। उन्होंने शिक्षकों को निर्देशित किया कि वे कक्षा-कक्षों में गतिविधि आधारित शिक्षण को प्राथमिकता दें तथा बच्चों की समझ बढ़ाने के लिए टीएलएम (शैक्षिक सामग्री) का प्रभावी उपयोग करें। शैक्षिक रूप से कमजोर बच्चों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि ऐसे विद्यार्थियों के लिए विशेष उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि कोई भी बच्चा पीछे न छूटे। उन्होंने सभी शिक्षकों को यह भी बताया कि बच्चों के सीखने के स्तर को बढ़ाने हेतु निरंतर प्रयासरत रहे और सकारात्मक वातावरण बनाए।
इसके साथ ही बीईओ ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा संचालित “मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान” के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने स्कूल प्रबंधन समिति  (SMC) के सदस्यों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पालकों के बीच इस अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर जोर दिया, ताकि अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सके। उन्होंने बताया कि शिक्षा गुणवत्ता अभियान केवल सरकारी प्रयास नहीं है, बल्कि इसमें समाज की सहभागिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सामूहिक सहयोग से ही बच्चों के लिए बेहतर सीखने का वातावरण तैयार किया जा सकता है।
 

शिक्षा विद्यार्थियों को विचारवान और समाजोपयोगी बनाती है” प्रो. राजीव प्रकाश

19-Aug-2025
रायपुर शोर संदेश  इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा सत्र 2025-26 में नव प्रवेशित स्नातक पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों को चार वर्षीय पाठ्यक्रम के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराने हेतु आयोजित 14 दिवसीय प्रेरण कार्यक्रम ‘‘दीक्षा आरंभ’’ का दिनांक 18 अगस्त 2025 को कृषक सभागार में शुभारंभ किया गया। शुभारंभ समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. राजीव प्रकाश, निदेशक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भिलाई, दुर्ग (छ.ग.) थे और कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने की। दीक्षा आंरभ कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर परिसर के अंतर्गत संचालित समस्त कृषि महाविद्यालयों के विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक ऑफलाइन अथवा ऑनलाइन शामिल हुए। 
दीक्षा आरंभ समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. राजीव प्रकाश, निदेशक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भिलाई, दुर्ग (छ.ग.) ने नव प्रवेशित विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश की स्वतंत्रता के कई वर्षों बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू कर विद्यार्थियों को गुरू शिष्य परंपरा से जोड़ने की पहल की गई है और इसी कड़़ी में विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में दीक्षा आरंभ कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। प्रो. राजीव प्रकाश ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री और नौकरी देने का साधन नहीं है बल्कि यह व्यक्तित्व के संपूर्ण विकास का माध्यम है। शिक्षा विद्यार्थियों को विचारवान तथा समाजोपयोगी बनाती है। शिक्षा विद्यार्थियों में जीवन मूल्यों का विकास करती है और उन्हें उत्कृष्टता प्राप्त करने की दृष्टि प्रदान करती है। प्रो. राजीव प्रकाश  ने कहा कि नवीन शिक्षा नीति से नवीन भारत के निर्माण की परिकल्पना साकार होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से आव्हान किया कि वे कृषि को अपना जीवनयापन का साधन बनायें।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत इस वर्ष सभी महाविद्यालयों में नव प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए दीक्षा आरंभ प्रेरण कार्यक्रम आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विगत वर्ष से नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया गया है तथा उसी के अनुरूप पाठ्यक्रमों तथा अध्ययन प्रणाली को विकसित किया गया है। यह विश्वविद्यालय प्रदेश का एक प्रमुख संस्थान है जो कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार में उत्कृतष्टता के लिए समर्पित है। कृषि महाविद्यालयों में हम कृषि में नवाचार, स्थिरता और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारे कार्यक्रम राष्ट्र और वैश्विक समुदाय दोनों की उभरती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सोच-समझकर डिजाइन किए गए हैं। अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधओं, व्यावहारिक शिक्षण अनुभवों और विशेषज्ञों के एक प्रतिष्ठित संकाय के साथ हम एक गतिशील वातावरण प्रदान करते हैं जो ज्ञान, रचनात्मकता और नेतृत्व को पोषित करता है। यह दीक्षारंभ कार्यक्रम हमारे विश्वविद्यालय की जीवंत शैक्षणिक और शोध संस्कृति की एक झलक प्रस्तुत करने हेतु आयोजित किया गया है। यह दीक्षारंभ कार्यक्रम आप सभी नव प्रवेशित छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालय के विभिन्न शैक्षणिक नियमों, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, छात्रवृत्ति/फेलोशिप, यूजीसी रैगिंग विरोधी नीति, उच्च शिक्षण संस्थानों में महिला कर्मचारियों और छात्राओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण, प्रधानमंत्री-विद्यालक्ष्मी योजना, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी), सांस्कृतिक गतिविधियों, खेलकूद एवं अंततः कृषि स्नातकों के लिए करियर के अवसर के विषय में जानकारी प्रदान करने हेतु आयोजित किया गया है। डॉ. चंदेल ने कहा कि नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए आयोजित 14 दिवसीय प्रेरण कार्यक्रम दीक्षा आरंभ के दौरान विद्यार्थियों को उनके द्वारा पढ़े जाने वाले पाठ्यक्रमों, कोर्स क्रेडिट प्रणाली, सूचना प्रणाली, परीक्षा प्रणाली, छात्र वृत्ति, विभिन्न शुल्क, हॉस्टल सुविधा, लाइब्रेरी सुविधा, कृषि अनुसंधान एवं विस्तार कार्य, व्यक्तित्व विकास, उद्यमिता विकास आदि के संबंध में विशेषज्ञों द्वारा जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही नवप्रवेशित विद्यार्थियों को विभिन्न विभागों, प्रयोगशालाओं, लाइब्रेरी तथा अनुसंधान प्रक्षेत्र का भ्रमण भी करवाया जाएगा। दीक्षा आरंभ कार्यक्रम के प्रभारी तथा कृषि महाविद्यालय रायपुर के अधिष्ठाता डॉ. आरती गुहे ने स्वागत भाषण देते हुए दीक्षा आरंभ कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की। दीक्षारंभ आयोजन के द्वितीय सत्र में डॉ. एस. बी. वेरूलकर, प्राध्यापक द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न प्रावधानों के बारे में विस्तृत व्याख्यान दिया गया एवं डॉ. आरती गुहे, अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय रायपुर, डॉ. एस.एस. सेंगर अधिष्ठाता खाद्य प्रौद्योगिकी, डॉ. विनय पाण्डेय अधिष्ठाता कृषि अभियांत्रिकी, एवं डॉ. ए.के. दवे निदेशक शिक्षण द्वारा दीक्षा आरंभ 2025 एवं विश्वविद्यालय की शिक्षण व्यवस्था की रूपरेखा रखी। इस अवसर पर संचालक अनुसंधान सेवाएं, निदेशालय विस्तार सेवाएं, निदेशक शिक्षण, अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय, रायपुर, अधिष्ठाता कृषि अभियांत्रिकी, अधिष्ठाता खाद्य प्रौद्योगिकी, प्राध्यापकगण तथा विद्यार्थी उपस्थित थे।
 

युक्तियुक्तकरण नीति से बदली ग्रामीण स्कूलों की तस्वीर

14-Aug-2025
रायपुर,  शोर संदेश  14 अगस्त 2025 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की महत्वकांक्षी युक्तियुक्तकरण नीति ने ग्रामीण अंचलों के स्कूलों में शिक्षा की तस्वीर बदल दी है। जिन स्कूलों में पहले शिक्षक की कमी से पढ़ाई प्रभावित होती थी, वहां अब नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुचारू रूप से संचालित हो रही है।
दुर्ग जिले के हनोदा गांव का प्राथमिक स्कूल इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है। पहली से पांचवीं तक की कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों को पहले पर्याप्त शिक्षक नहीं मिलते थे। एक समय तो स्थिति यह थी कि एक मानदेय शिक्षक सभी विषय पढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रही थीं, जिससे सभी कक्षाओं में समान रूप से पढ़ाई कराना संभव नहीं हो पाता था। लेकिन युक्तियुक्तकरण के तहत इस स्कूल में तीन नए शिक्षकों की नियुक्ति होने के बाद हालात पूरी तरह बदल गए हैं। अब प्रत्येक कक्षा के लिए अलग-अलग शिक्षक उपलब्ध हैं और बच्चों को विषयवार पढ़ाई मिल रही है। स्कूल प्रभारी श्रीमती सरोजनी वर्मा ने बताया कि इस पहल से स्कूल में सकारात्मक बदलाव आए हैं। उन्होंने गर्व से कहा हनोदा स्कूल के तीन विद्यार्थियों का चयन नवोदय विद्यालय में हुआ है, जो यहां की गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था का प्रमाण है।
विद्यालय में कमजोर छात्रों के लिए विशेष कक्षाएं आयोजित की जाती हैं, जिनमें उनकी बुनियादी जानकारी को मजबूत किया जाता है। बच्चों की लगन और अनुशासन का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि वे नियमित रूप से होमवर्क पूरा कर लाते हैं। इतना ही नहीं, अभिभावक भी शिक्षा के प्रति सजग हैं और यदि बच्चों को होमवर्क नहीं दिया जाता तो स्वयं विद्यालय आकर कारण पूछते हैं। ग्रामीण अंचलों के कई स्कूलों में हनोदा की तरह हुए ये बदलाव इस बात का प्रमाण हैं कि युक्तियुक्तकरण केवल शिक्षक पुनर्वितरण का कदम नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के भविष्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प है।
 

युक्तियुक्तकरण से कोरकोमा मिडिल स्कूल में लौटी पढ़ाई की रफ्तार

12-Aug-2025
कोरबा ( शोर संदेश )।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दिशा-निर्देशन में लागू की गई शाला-शिक्षक युक्तियुक्तकरण नीति प्रदेश के विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस नीति के तहत अतिरिक्त और रिक्त पदों का संतुलन कर शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जा रही है, जिससे अब सुदूर अंचलों के विद्यार्थियों को भी नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल रहा है।
कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्र कोरकोमा का शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, जहां 319 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, इसका स्पष्ट उदाहरण है। पहले यहां शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होती थी और कई कालखंड खाली रह जाते थे। लेकिन युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के बाद दो शिक्षिकाओं रामेश्वरी रत्नाकर और पद्मा निषाद की पदस्थापना से अब सभी कक्षाएं नियमित रूप से संचालित हो रही हैं, और सतत अध्यापन, अध्ययन कार्य व्यस्थित रूप से चल रही है। 
प्रधानपाठक गोपाल प्रसाद साव ने बताया कि दर्ज संख्या के अनुसार यहां दो शिक्षकों की कमी थी, जो अब पूरी हो गई है। नई पदस्थ शिक्षिकाओं ने आते ही तुरंत कक्षाएं लेना प्रारंभ कर दिया है। रत्नाकर अंग्रेजी पढ़ा रही हैं, जबकि निषाद सामाजिक विज्ञान, विज्ञान और हिंदी विषय संभाल रही हैं।
विद्यार्थी सुनील, समीर, गुंजन, स्नेहा, राकेश और साहिल खुशी जताते हुए बताया कि अब कोई भी कालखंड खाली नहीं जाता और पढ़ाई निरंतर चल रही है। 5 से 7 किलोमीटर दूर से आने वाले बच्चों के लिए यह बदलाव विशेष रूप से राहत भरा है, क्योंकि अब उन्हें प्रत्येक विषय की नियमित शिक्षा मिल रही है।
यह बदलाव न केवल विद्यार्थियों की शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठा रहा है, बल्कि अभिभावकों का भी विद्यालय पर भरोसा बढ़ा रहा है। शासन की यह पहल शिक्षा के अधिकार को मजबूत करते हुए यह सुनिश्चित कर रही है कि राज्य का कोई भी बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न रहे।

दूरस्थ अंचलों तक पहुँची शिक्षा की नई किरण – युक्तियुक्तकरण नीति का असर

12-Aug-2025
रायपुर,  ( शोर संदेश )। 12 अगस्त 2025 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर लागू शाला-शिक्षक युक्तियुक्तकरण नीति ने प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की नई इबारत लिखी है। इस नीति के तहत प्रदेशभर के शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षकों का संतुलित वितरण सुनिश्चित किया गया है, जिससे अब कोई भी विद्यालय शिक्षक विहीन नहीं है और बच्चों को समान व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल रहा है।
गौरतलब है कि युक्तियुक्तकरण से पूर्व प्रदेश के कुल 453 विद्यालय शिक्षक विहीन थे। युक्तियुक्तकरण के पश्चात एक भी विद्यालय शिक्षक विहीन नहीं है। इसी प्रकार युक्तियुक्तकरण के बाद  प्रदेश के 4,728 एकल-शिक्षकीय विद्यालयों में अतिरिक्त शिक्षकों की पदस्थापना की गई है। इस कदम से न केवल कक्षाओं का संचालन नियमित हुआ है, बल्कि बच्चों की उपस्थिति और पढ़ाई के प्रति उत्साह में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इसका सकारात्मक असर सरगुजा जिले के मैनपाट विकासखंड स्थित प्राथमिक शाला बगडीहपारा में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जहां हाल ही में दो शिक्षकों की पदस्थापना की गई है। नवपदस्थ शिक्षक रंजीत खलखो ने बताया कि युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया में उन्हें अपनी पसंद के विद्यालय चुनने का अवसर मिला और उन्होंने दूरस्थ बगडीहपारा को इसलिए चुना क्योंकि वे ग्रामीण अंचलों के बच्चों को शिक्षित करना अपना दायित्व और सौभाग्य मानते हैं। दो शिक्षकों की उपलब्धता से विद्यालय में सभी विषयों की पढ़ाई नियमित रूप से हो रही है, जिससे बच्चों की सीखने की गति तेज हुई है और अभिभावकों का भरोसा भी बढ़ा है। अब वे बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेज रहे हैं, जिससे उपस्थिति में निरंतर सुधार हो रहा है।
इसी प्रकार मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के मानपुर विकासखंड का ग्राम कमकासुर इसका ताजा उदाहरण है। जिला मुख्यालय से 65-70 किलोमीटर दूर स्थित इस नक्सल प्रभावित वनांचल में 14 बच्चों की दर्ज संख्या वाली प्राथमिक शाला पिछले एक वर्ष से शिक्षक विहीन थी। शासन की युक्तियुक्तकरण पहल से यहां प्रधान पाठक की पदस्थापना हुई, जिससे बच्चों की पढ़ाई फिर से शुरू हुई और ग्रामीणों में शिक्षा को लेकर नया उत्साह लौट आया।
इसी तरह सक्ती जिले के ग्राम भक्तूडेरा में भी युक्तियुक्तकरण से बड़ा बदलाव आया। वर्षों से एकल शिक्षक पर निर्भर यह प्राथमिक शाला अब दो शिक्षकों से संचालित हो रही है। इससे बच्चों की पढ़ाई व्यवस्थित हुई, उपस्थिति बढ़ी और अभिभावकों का भरोसा मजबूत हुआ।
राज्य शासन की यह पहल न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार कर रही है, बल्कि यह सुनिश्चित कर रही है कि प्रदेश के सबसे सुदूर और पिछड़े क्षेत्रों के बच्चे भी उज्ज्वल और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर अग्रसर हों।

निःशुल्क बस सेवा शुरू, कॉलेज छात्रों ने खुशी जाहिर की

11-Aug-2025

कवर्धा (शोर संदेश)। पंडरिया विधानसभा की महाविद्यालय में पढ़ने वाली बेटियों के लिए निःशुल्क बस सेवा आज से प्रारम्भ हो गई है। विधायक भावना बोहरा ने बताया कि कवर्धा, पिपरिया,सहसपुर लोहारा, पांडातराई एवं पंडरिया महाविद्यालय हेतु कुल 8 बसों के विभिन्न ग्राम व क्षेत्रों में आगमन पर भव्य स्वागत किया गया।

सभी बेटियों और उनके परिजनों को बधाई; बेटियों को शिक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का हमारा प्रयास निरंतर जारी रहेगा। पूर्व में 3 बसें संचालित थीं, अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के करकमलों से 5 नई बसों को जोड़ते हुए कुल 8 बसें पूरे विधानसभा क्षेत्र की बेटियों को महाविद्यालय आने-जाने की सुरक्षित और निःशुल्क सुविधा प्रदान कर रही है। हमारा लक्ष्य है कि 1000 से अधिक बेटियां इस सेवा से लाभान्वित हों और शिक्षा के माध्यम से अपने सपनों को साकार करें।
 

कक्षा 9वीं से 12वीं के विद्यार्थियों के लिए केन्द्रीय छात्रवृत्ति पंजीयन व सत्यापन की प्रक्रिया शुरू

11-Aug-2025
सुकमा (शोर  संदेश)।  कक्षा 9वीं से 12वीं के विद्यार्थियों के लिए केन्द्र प्रवर्तित छात्रवृत्ति (सीएसएस) योजना के तहत पंजीयन एवं सत्यापन कार्य प्रारंभ हो गया है। राज्य कार्यालय द्वारा छात्रवृत्ति पोर्टल 4 अगस्त 2025 से विद्यार्थियों के नवीनीकरण व सत्यापन हेतु उपलब्ध करा दिया गया है। इस संबंध में विद्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

विद्यालयों को पहले जियो टैगिंग, कक्षावार एवं जातिवार सारांश प्रतिवेदन (निर्धारित प्रारूप) तथा एनएसपी  से ई-केवाईसी  का कार्य पूर्ण करना होगा। इसके बाद ही विद्यार्थी अपने लॉगिन से नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।

विद्यार्थी पंजीकृत कोड/मोबाइल नंबर और जन्मतिथि का उपयोग कर पोर्टल पर लॉगिन कर पाएंगे। सीएसएस  योजना के विद्यार्थियों के लिए ओटीआर नंबर अनिवार्य है। यदि ओटीआर नंबर पूर्व में विद्यालय लॉगिन से भरकर सत्यापित हो चुका है, तो विद्यार्थी लॉगिन में यह जानकारी स्वतः उपलब्ध होगी, अन्यथा इसे दर्ज करना होगा। ओटीआर नंबर भरते समय विद्यार्थी का नाम, जन्मतिथि, लिंग और आधार नंबर ओटीआर से मेल खाना जरूरी है। साथ ही, विद्यार्थी लॉगिन पर अपार आईडी पंजीयन का वैकल्पिक प्रावधान भी उपलब्ध है। निर्धारित पात्रता के अनुसार सभी विद्यार्थियों का पंजीयन और सत्यापन कार्य 10 सितंबर 2025 तक अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा।

यूपीएससी के प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले एसटी, एससी अभ्यर्थियों को मिलेगा एक लाख का प्रोत्साहन राशि

11-Aug-2025


रायपुर (शोर संदेश)। राज्य शासन के आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग रायपुर द्वारा संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा वर्ष 2025 में सफल होने वाले अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रदेश के अभ्यर्थियों को एक लाख की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।  आदिम जाति विकास विभाग द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 उत्तीर्ण करने वाले पात्र अभ्यर्थी 12 अगस्त 2025 तक आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास, ब्लाक-डी. भूतल, इन्द्रावती भवन, नवा रायपुर अटल नगर छ.ग. में स्पीड पोस्ट रजिस्टर्ड डाक या स्वयं उपस्थित होकर अपना आवेदन जमा कर सकते है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी एवं आवेदन का प्रारूप वेबसाईट
www.tribal.cg.gov.in  से प्राप्त की जा सकती है। 

युक्तियुक्तकरण नीति से गाँव-गाँव तक पहुँची गुणवत्ता शिक्षा

07-Aug-2025
रायपुर शोर संदेश  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को सशक्त बनाने की दिशा में राज्य शासन द्वारा प्रारंभ की गई शाला-शिक्षक युक्तियुक्तकरण नीति अब प्रभावी रूप से धरातल पर अपने सकारात्मक परिणाम दे रही है। इस पहल का प्रभाव सरगुजा संभाग के मैनपाट विकासखंड अंतर्गत प्राथमिक शाला बगडीहपारा में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जहां अब दो शिक्षक नियमित रूप से पदस्थ हैं और बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं।
पूर्व में यह शाला सीमित शिक्षक के भरोसे संचालित हो रही थी, जिससे बच्चों को सभी विषयों की पढ़ाई नहीं मिल पाती थी। लेकिन युक्तियुक्तकरण के तहत हाल ही में पदस्थ किए गए शिक्षक रंजीत खलखो ने न केवल विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था को सशक्त किया, बल्कि स्वयं ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्र में सेवा देना अपना सौभाग्य भी माना। खलखो पहले प्राथमिक शाला बड़वापाट में अतिशेष शिक्षक के रूप में कार्यरत थे। शासन द्वारा आरंभ की गई पारदर्शी और आवश्यकता आधारित युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत उन्हें अपनी प्राथमिकता के आधार पर नई शाला चुनने का अवसर मिला, जिसे उन्होंने सुदूर बगडीहपारा शाला के रूप में चुना।
इस विद्यालय में दो शिक्षकों की मौजूदगी से नियमित कक्षाएँ संचालित हो रही हैं। बच्चों की उपस्थिति में बढ़ोत्तरी हुई है और शिक्षा के प्रति अभिभावकों का भरोसा भी मजबूत हुआ है। गाँव में शिक्षा को लेकर नया विश्वास पैदा हुआ है और यह सब संभव हो पाया है राज्य शासन की दृढ़ इच्छाशक्ति और योजनाबद्ध क्रियान्वयन से।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर शुरू की गई यह नीति केवल व्यवस्थागत सुधार नहीं, बल्कि हर बच्चे तक शिक्षा के अधिकार को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि राज्य के सुदूरवर्ती इलाकों के बच्चे भी गुणवत्तापूर्ण और समुचित शिक्षा से वंचित न रहें। शाला-शिक्षक युक्तियुक्तकरण नीतिगत दृष्टि से न केवल शिक्षकों के संतुलित वितरण का माध्यम बन रही है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की नींव को गाँव-गाँव तक मजबूत कर रही है।

















 

गरियाबंद ने शिक्षा में रचा इतिहास: बोर्ड परीक्षा में राज्य में चौथा स्थान

07-Aug-2025
गरियाबंद  ( शोर संदेश ) शैक्षणिक सत्र 2024-2025 में घोषित कक्षा 10वीं एवं 12वीं के परीक्षा परिणाम गरियाबंद शिक्षा के क्षेत्र मे एक और अभूतपूर्व उपलब्धियों वाला रहा। जहां कक्षा 12 वीं के परीक्षा परिणाम में जिले ने राज्य मे चौथा रैंक हासिल किया। इसी प्रकार पुनर्मूल्यांकन रिजल्ट के बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल बोर्ड द्वारा स्थाई मेरिट लिस्ट जारी किया गया है। जिसमें कक्षा 10वीं मे जिले के सरस्वती शिशु मंदिर हायर सेकेंडरी स्कूल, देवभोग के भूपेश कुमार नागेश ने 98.80 प्रतिशत अंक प्राप्त कर राज्य स्तर पर तीसरा रैंक प्राप्त किया है।  
शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार बोर्ड द्वारा प्रतिवर्ष विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग के छात्रों के लिए अलग से मेरिट लिस्ट जारी किया जाता है, इसमें भी जिले के छात्रों ने अपने प्रतिभा का अच्छा प्रदर्शन किया है। इस वर्ष हायर सेकेंडरी स्कूल, सडक परसुली के शैलेन्द्र कुमार शोरी ने इस संवर्ग मे प्रथम स्थान प्राप्त कर मेरिट में अपना स्थान बनाया है। दूरस्थ ग्रामीण अंचल के छात्र भूपेश नागेश ने राज्य में तृतीय रैंक, तथा विशेष पिछड़ी जनजाति के छात्र शैलेन्द्र शोरी ने संवर्ग में राज्य मंे प्रथम स्थान प्राप्त किया है।











 



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