
कोण्डागांव (शोर सन्देश)। जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर स्थित ग्राम बोरगांव के 34 वर्षीय किशनु साहा की एक आम कृषक से एक सफल मत्स्य पालक होने की यात्रा चुनौतीपूर्ण रही और आज वे इस व्यवसाय की बदौलत प्रतिमाह लगभग 30 हजार रुपए की आमदनी अर्जित कर रहे हैं। मत्स्य पालन के व्यवसाय को अपनाने के संबंध में वे बताते हैं कि वे भी पहले एक आम कृषक की तरह लगभग अपने पांच एकड़ की जमीन में धान, मक्का एवं मिर्च, टमाटर की ही खेती करते थे परन्तु पिछले कुछ वर्षों में उन्हें अपेक्षित आमदनी नहीं हो रही थी, साथ ही सब्जी इत्यादि फसलों के लिए अधिक से अधिक मजदूरों की भी जरूरत पड़ती थी, फलस्वरूप फसलों की लागत निकल पाना भी मुश्किल हो जाता था। इसके अलावा सब्जी के बाजार भाव में उतार चढ़ाव होने से उनके सहीं मूल्य भी नही मिलते थे। अत: वर्ष 2017-18 में उन्होंने मछली पालन के क्षेत्र में उतरने का फैसला लिया, क्योकि मत्स्य पालन में अधिक मजदूरों की आवश्यकता नहीं होती साथ ही इसका बाजार भाव भी संतोषजनक रहता है। इस प्रकार उन्होंने अपने 2.5 एकड़ की जमीन में तालाब खुदवाया। शुरूवात में इस नए व्यवसाय में उन्हें कुछ दिक्कतें भी आई वे बताते हैं कि शुरू-शुरू में उन्हें तालाब के सूखने, मछलियों के मरने और उनकी बढ़ोत्तरी न होने जैसी समस्याएं भी आई परन्तु लगन और इच्छाशक्ति से इसका उन्होंने शीघ्र समाधान निकाला। इस संबंध में मत्स्य विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन से इस प्रकार की समस्याएं कम होने लगी। चूंकि इस विभाग की ओर से उन्हें तालाब खुदवाने के लिए 50 हजार रुपए का अनुदान दिया गया था, वे आज भी विभाग के बराबर संपर्क में रहते हैं। उनका यह भी मानना है कि मत्स्य विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने एक सहीं फैसला लिया है, वरना वे सीमित भूमि और अपर्याप्त आय में ही गुजारा करने के लिए विवश होते और विभाग की ओर से जो सहयोग दिया गया है उसके लिए वे सदैव कृतज्ञ रहेंगे। बारहवीं तक पढ़े किशनु साहा यह भी कहते हैं, कि भविष्य में वे पशुपालन के क्षेत्र में भी हाथ आजमाना चाहेंगे। मत्स्य पालन करने वाले इच्छुक किसानों को सलाह के संबंध में किशनु का कहना था, कि मत्स्य पालन में कुछ मूलभूत जानकारी के बारे में सावधानी रखना बहुत जरूरी है, जैसे जिस भूमि में तालाब खुदवाया जा रहा है, वहां मिट्टी और पानी की जांच करवाना बहुत जरूरी है क्योंकि अगर पानी सहीं नहीं रहेगा तो मछलियों की बढ़त पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा और दूसरा मुद्दा स्थानीय बाजार पर भी निर्भर करता है, क्योंकि जिस प्रजाति की मछली की खपत ज्यादा होती है, उसी का पालन करना चाहिए साथ ही मत्स्य पालन में आर्थिक पृष्ठभूमि प्रबंधन भी बेहतर होना चाहिए, क्योंकि मछलियों के चारे में 75 प्रतिशत का खर्च होता है, साथ ही मछलियों के डेटाबेस का रख-रखाव भी करना पड़ेगा, क्योंकि उनके चारे, उनके रख-रखाव के खर्चे, मत्स्य बीज की जीविता प्रबंधन के बाद ही हम अपना लाभ और नुकसान को देख सकते हैं। अगर किसान अपने एक एकड़ में मत्स्य फार्म प्रारंभ करते हैं, तो जैसे-जैसे मछलियों की खपत होगी तालाब भी बढ़ाना पड़ेगा। इस प्रकार इस व्यवसाय में दो-चार बातों का ध्यान रखा जाये तो यह एक सुरक्षित व्यवसाय है। किशनु साहा के तालाबों में तेलापिया, रोहू, इण्डियन कार्प, मृगल, कतला, आईएमसी डार्क जैसी प्रजातियों की मछलियों का पालन हो रहा है और इन मछलियों की बिक्री स्थानीय बाजारों के अलावा उड़ीसा राज्य के जिलों में भी होती है। इस कार्य के लिए उन्होंने दो व्यक्तियों को भी अपने मत्स्य फार्म में रोजगार उपलब्ध कराया है। कोण्डागांव जिले में मत्स्य पालन जैसी व्यवसायों के विकास के लिए आपार संभावनाएं है, क्योंकि वर्तमान दौर में परम्परागत कृषि के अलावा कुछ नये व्यवसायों को भी अपनाने की जरूरत है। इसके लिए जागरूकता, सहीं जानकारी और परिस्थितियों के समझने की आवश्यकता है, सहीं भी है कि जब हम जीवन में बदलाव नहीं करेंगे तो कुछ भी नही बदलेगा। किशनु साहा जैसे सफल मत्स्य पालक पर यह उक्ति सटीक बैठती है निश्चित ही उन्होंने बदलाव को अपनाया और इसका साकारात्मक परिणाम उनके जीवन में परिलक्षित हुआ।

रायपुर (शोर सन्देश)। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आज वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को एक पत्र भेजा है। पत्र में उनसे आग्रह किया है कि वे हाल के दिनों में जीएसटी नियमों में हुए सभी संशोधनों को टाल दें और 3 सिद्धांतों के आधार पर व्यापारियों से सीधा संवाद करें। केवल तीन ही है जिसमें (स) कर प्रणाली का सरलीकरण और एकीकरण जिससे व्यापारियों को राहत मीले (पप)जीएसटी कर आधार का विस्तार (पपप) केंद्र और राज्य सरकारों को पर्याप्त राजस्व पहुँचना, शामिल है। कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने बताया कि जीएसटी में किए गए विभिन्न संशोधन एवं परिवर्तन से जीएसटी लागू करने का मूल उद्देश्य ही खत्म होता जा रहा है। इसके कारण देश के व्यापारियों के लिए जीएसटी सबसे जटिल कराधान प्रणाली बन गई है। क्योंकि देश के अधिकांश व्यापारी इतने शिक्षित या कम्प्यूटरीकृत नहीं हैं जोन जो जीएसटी के नियमों की पालना सरल न होने के कारण व्यापारियों के लिए पालना आसान नहीं रह गई है।
कैट जीएसटी मुद्दों को हल करने के लिए टकराव के रास्ते का सहारा लेने के बजाय बातचीत की प्रक्रिया के लिए अधिक इच्छुक है और यही कारण है कि कैट ने वित्त मंत्री को हालिया अधिसूचना के कार्यान्वयन को स्थगित करने और बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने की अपील कर रहा है।

रायपुर (शोर सन्देश)। केंद्र सरकार की 22 दिसम्बर को जीएसटी नियमों में धारा 86-बी को जोड़ कर प्रत्येक व्यापारी जिसका मासिक टर्नओवर 50 लाख रुपए से ज्यादा है। व्यापारियों को अनिवार्य रूप से 1 प्रतिशत जीएसटी जमा कराना पड़ेगा। प्रावधान पर कड़ा एतराज जताते हुए कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र भेजकर माँग की है, कि इस नियम को तुरंत स्थगित किया जाए और व्यापारियों से सलाह कर ही इसे लागू किया जाए। कैट ने यह भी माँग की है की जीएसटी एवं आय कर में ऑडिट की रिटर्न भरने की अंतिम तारीख 31 दिसम्बर को भी तीन महीने के लिए आगे बड़ाया जाए । कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने निर्मला सीतारमण को भेजे पत्र में यह भी कहा कि अब समय आ गया है। जब एक बार सरकार को व्यापारियों के साथ बैठ कर अब तक जीएसटी कर प्रणाली की सम्पूर्ण समीक्षा की जाए। कर प्रणाली को सरलीकृत बनाया जाए और साथ ही किस तरह से कर का दायर बड़ाया जाए। केंद्र और राज्य सरकारों के राजस्व में किस तरह की वृद्धि की जाए। कैट ने इस मुद्दे पर सीतारमण से मिलने का समय माँगा है। कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने कहा कि नियम 86 बी देश भर के व्यापारियों के व्यापार पर विपरीत असर डालेगा। कोरोना के कारण व्यापार में आई अनेक प्रकार की परेशानियों से व्यापारी पहले ही त्रस्त हैं। ऐसे में यह नया नियम व्यापारियों पर एक अतिरिक्त बोझ बनेगा। यह एक सर्व विदित तथ्य है कि पिछले एक वर्ष से व्यापारियों का पेमेंट चक्र बुरी तरह बिगड़ गया है। लम्बे समय तक व्यापारियों के बेचे गए माल का भुगतान और जीएसटी की रकम महीनों तक नहीं आ रही है। ऐसे में एक प्रतिशत का जीएसटी नकद जमा कराने का नियम व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगा जो न्याय संगत नहीं है। कैट ने कहा की जीएसटी विभाग के पास फर्जी बिलों से जीएसटी लेकर राजस्व को चूना लगाने वाले लोगों के खलिाफ शिकायत हैं। तो ऐसे लोगों को कानून के मुताबिक बहुत सख्ती से निबटना चाहिए। किंतु कुछ कथित लोगों को की वजह से सभी व्यापारियों को एक ही लाठी से हांकना न तो तर्क संगत है, न ही न्याय संगत। लिहाजा इस नियम को फिलहाल स्थगित किया जाए। श्री पारवानी ने यह भी कहा की पिछले समय में में जीएसटी के नियमों में आए दिन मनमाने संशोधन कर व्यापारियों पर पालना को बोझ लगातार बड़ाया जा रहा है। जो की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईज ऑफ डूइंग बिज्नेस के सिद्धांत के खलिाफ है। इससे जीएसटी कर प्रणाली बेहद जटिल हो गई है। यह बड़ा सवाल है की व्यापारी व्यापार करे या फिर करों सहित अन्य कानूनों की पालना ही करता रहे और उसका व्यापार बुरी तरह प्रभावित होता रहे। उन्होंने यह भी कहा की अनेक नियमों, अधिकारियों को असीमित अधिकार दिए जा रहे हैं जो भ्रष्टाचार को पनपाएँगे। जीएसटी का पंजीकरण रद्द करने और गिरफ्तार करने के नियम बेहद कठोर हैं, जिन पर चर्चा किया जाना आवश्यक है। यह बेहद खेद जनक है की जीएसटी के किसी भी मामले में व्यापारियों से कोई भी सलाह मशवरा कतई नहीं किया जाता। जिसके कारण से मनमाने नियम व्यापारियों के ऊपर लादे जा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा की एक बार जीएसटी की सम्पूर्ण कर प्रणाली कर व्यापक रूप से चर्चा होनी आवश्यक है। जिससे न केवल व्यापारियों को सुविधा हो बल्कि सरकार के राजस्व में भी वृद्धि हो। व्यापारी सरकार के साथ सहयोग करने को तैय्यार हैं किंतु कर प्रणाली जितनी सरल होगी और कर पालना जितनी आसान होगी, उतनी ही अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

दुर्ग (शोर सन्देश)। जिंदगी की यही रीत है ,हार के बाद ही जीत है गीत की ये पंक्तियां मतवारी की जागृति साहू पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। जिन्होंने शिक्षिका बनने की चाहत पूरी न होने के बाद फिर से कोशिश की हारने के बाद फिर उठीं और तय किया नया रास्ता और जीत भी हासिल की। पति का साथ और प्रोत्साहन मिला और 2 साल में जागृति साहू को मिला दुर्ग की ‘‘मशरूम लेडी’’ का खिताब। सफर आसान तो नहीं था मगर खुद को साबित करने के जुनून में जागृति ये मंजिल पाई है। सीईओ जिला पंचायत सच्चिदानंद आलोक ने उनके काम को देखकर यह उपमा उन्हें दी है। पति और बेटी को पसंद था मशरूम खाना,इसलिए शुरू किया उत्पादन- जागृति साहू बीएससी और एमए पास हैं। इसलिए उनकी इच्छा थी कि नौकरी करें। जागृति बताती है कि शिक्षाकर्मी के लिए चयनित होने के बाद भी कुछ तकनीकी कारणों से जागृति का शिक्षिका बनने का सपना अधूरा रह गया था। वह कुछ उदास रहने लगी थी । लेकिन कहते हैं ना जिंदगी ठहरने का नाम नहीं है। जागृति बताती है कि उनके पति और बच्ची को मशरूम खाना बहुत पसंद था। सप्ताह में करीब दो से तीन बार उनके घर मशरूम जरूर आता था। वे 200 रुपए प्रति किलो में मशरूम खरीदा करतीं। एक दिन उनके पति ने कहा कि घर पर यूं ही खाली बैठने से अच्छा क्यों ना वह मशरूम का उत्पादन शुरू करें। जागृति को ये आइडिया जम गया पति की प्रेरणा के बाद उन्होंने मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लेने की सोची। जागृति पढ़ी लिखी तो थी हीं और लगन की पक्की भी। जब उनको पता चला कि जिला पंचायत द्वारा बिहान कार्यक्रम के तहत स्व सहायता समूह की महिलाओं को उनकी इच्छा अनुसार प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वह स्वरोजगार की स्थापना कर सकें। उन्होंने मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लेने की इच्छा व्यक्त की 2018 में पहले पीएनबी से 3 दिवसीय और देना बैंक के प्रशिक्षण कार्यक्रम में 10 दिवसीय प्रशिक्षण लिया। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा शुरुआत में 5 हजार रुपए से मशरूम उत्पादन शुरू किया। फिर बिहान योजना के तहत बैंक लिंकेज के माध्यम से 99 हजार रुपए का ऋण मिला। जिसमें से 50 हजार रुपए से उन्होंने अपनी मशरूम उत्पादन की यूनिट को बड़ा रूप दिया। बाकी के रुपए समूह की महिलाओं को कृषि कार्य के रूप में ऋण के रूप में दिया। जागृति न केवल खुद काबिल बनी बल्कि मतवारी गांव की दूसरी महिलाओं को भी उन्होंने अपने काम से जोड़ा। आज घर बैठे महिलाएं अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं।
अपनी मेहनत से गायत्री स्व सहायता समूह ने मशरूम उत्पादन कर 2 साल में 6 लाख रुपए कमाए - जागृति साहू बताती है कि उनके समूह में 12 महिलाएं हैं वर्ष 2018 से लेकर अब तक उन्होंने 6 लाख रुपए की आमदनी अर्जित की है। इस साल उनके इस समूह द्वारा 2 लाख 20 हजार रुपए का मशरूम बेचा गया है। जागृति ने बताया कि बताया कि मशरूम में लागत का दोगुना फायदा होता है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से 120 रु. प्रति किलो में मशरूम के बीज खरीदती हैं और 1 किलो बीज से 10 किलो मशरूम का उत्पादन होता है। सभी खर्चे निकाल कर भी अच्छी आमदनी हो जाती है।
बनीं मास्टर ट्रेनर, अब तक प्रदेश की 850 महिलाओं को दिया प्रशिक्षण 750 महिलाएं कर रहीं उत्पादन- जागृति ने मशरूम उत्पादन करना सीखा लेकिन उनकी यात्रा यही समाप्त नहीं हुई उनके कौशल को देखते हुए पीएनबी द्वारा राजधानी रायपुर में संचालित एकमात्र कृषक प्रशिक्षण केंद्र में मास्टर ट्रेनर के रूप में चयनित कर लिया गया। आज वह प्रदेश भर की महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही हैं। जागृति बताती है कि अब तक उन्होंने 850 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है जिसमें से 750 महिलाएं मशरूम उत्पादन कर आमदनी अर्जित कर रही हैं। जागृति दुर्ग जिले के तीनों जनपद पंचायतों एवं आसपास की सभी जिलों की महिलाओं को प्रशिक्षण दे चुकी हैं। जागृति कृषि विभाग की आत्मा योजना और बिहान योजना में भी प्रशिक्षण दे रही हैं। नेशनल लेवल के प्रशिक्षक के रूप में हुई चयनित- जागृति अब केवल प्रदेश में ही नहीं बल्कि प्रदेश के बाहर भी अपने गांव मतवारी और दुर्ग जिले का नाम रोशन करने वाली हैं रूरल सेल्फ एम्प्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट में प्रशिक्षण देने के लिए उनका चयन नेशनल लेवल ट्रेनिंग के लिए भी हुआ है।
मशरूम की डिमांड इतनी है कि लोग इंतजार करते हैं, सोशल मीडिया के माध्यम से करती हैं प्रचार- गायत्री स्व सहायता समूह द्वारा उत्पादित मशरूम की इतनी डिमांड है कि लोग कई दिन तक इंतजार करते हैं। समूह द्वारा ओयस्टर मशरूम का उत्पादन किया जाता है जुलाई 2020 से प्रोटीन रिच पिंक ओयस्टर मशरूम का उत्पादन शुरू किया है। जिसकी और भी डिमांड है। हर दिन कम से कम 4 से 5 किलो मशरूम का उत्पादन होता है इस लिहाज से यदि 200 प्रति किलो का हिसाब लगाएं तो 800 से 1000 रुपए की आमदनी ली जा सकती हैं।
मशरूम उत्पादन के साथ-साथ हर्बल फिनाइल हर्बल सोप डिटर्जेंट इत्यादि का उत्पादन भी करता है इनका समूह- जागृति बताती हैं कि उन्होंने केवल एक काम तक खुद को सीमित नहीं रखा है मशरूम उत्पादन के अलावा उनका समूह हर्बल फिनायल ,डिटर्जेंट इत्यादि का उत्पादन भी कर रहा है। जिसकी अच्छी खासी डिमांड है। इनको अच्छे ऑर्डर भी मिल रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित बिहान बाजार में भी गायत्री स्व सहायता समूह ने काफी अच्छी बिक्री की थी।

कोरबा (शोर सन्देश)। कोरबा जिले के पोड़ी-उपरोड़ा विकासखण्ड के सीपत गांव में रहने वाले किसान वीर सिंह की जिंदगी पानी की रानियों ने बदल दी है। कभी कर्जे में डूबे वीर सिंह ने राज्य शासन के मछली पालन विभाग की सरकारी योजनाओं और तकनीकी सलाह से मछलियों की खेती कर पहले अपना कर्जा चुकाया, फिर नई बाइक खरीदी। अपनी बेटियों को डोंगातराई के डीएव्ही स्कूल में दाखिल कराया और अब मछली पालन के व्यवसाय को आगे बढ़ाने की योजना बनाई हैं। मछली पालन से मिली आय ने वीर सिंह और उसके परिवार की जिंदगी में यू-टर्न ला दिया है। मछली पालन के साथ-साथ सब्जी की खेती, मुर्गी पालन भी वीर सिंह ने शुरू किया है। अब इस व्यवसाय को समन्वित रूप से आगे बढ़ाने के लिए पोल्ट्री और बतख पालन की भी बड़ी योजना वीर सिंह ने बना ली है। अपनी जुबानी वीर सिंह बताते हैं कि उनके पास अपने पुर्खों का 0.4 हेक्टेयर पुश्तैनी तालाब था जिस पर वे मछली पालन किया करते थे। इसके साथ ही सात एकड़ की जमीन थी जिस पर मानसून आधारित खेती भी होती थी। उत्पादन कम होने से आर्थिक तंगी थी। दो बेटों और दो बेटियों के परिवार की जरूरतें पूरी करने कई बार कर्जा लेना पड़ता था। ऐसे में मछली पालन विभाग के अधिकारियों से सलाह के बाद शासकीय अनुदान पर 0.5 हेक्टेयर का तालाब और तीन पोखर बनाकर वीर सिंह मछली पालन से जुड़ गये। विभागीय अधिकारियों ने तकनीकी सलाह दी और मछली पालन तथा मछली बीज उत्पादन से वीर सिंह का व्यवसाय चल निकला। पिछले दो सालों में वीर सिंह ने केवल मछलियों से ही लगभग तीन लाख रूपये की आय अर्जित कर ली है। वीर सिंह बताते हैं कि मछली पालन का व्यवसाय मेरे और मेरे परिवार के लिए वरदान साबित हुआ है। पिछले तीन सालों से चढ़े कर्जे को वीर सिंह ने इस आय से अब चुका दिया है। पिछले वर्ष ही 75 हजार रूपए की नई मोटर साइकिल और कुंए से पानी निकालने के लिए नया पंप भी खरीदा है। मोटर साइकिल व पम्प से मछली पालन के व्यवसाय में अच्छी मदद हो जा रही है। वीर सिंह ने अपनी दो बेटियों को डोंगातरई के डीएव्ही स्कूल में पढ़ाने के लिए कक्षा ग्यारहवीं और बारहवीं में दाखिल भी कर दिया है। इस वर्ष उन्होंने अपने खेत के पोखर के आसपास गोभी व टमाटर की खेती कर 30-40 हजार रूपये की अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त की है। वीर सिंह की योजना अब इस व्यवसाय को समन्वित खेती के रूप में विकसित करने की है। उन्हांेने इस दिशा में कदम भी बढ़ा दिये हैं। 500 मुर्गी-चुजे से वीर सिंह ने मछली पालन के साथ-साथ कुक्कुट पालन का व्यवसाय भी शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में पोल्ट्री और बतख पालन को भी मछली पालन से जोड़कर प्रति हेक्टेयर मछली उत्पादन बढ़ाने की वीर सिंह की योजना है। वीर सिंह के अनुसार इस वर्ष उन्होंने अपने तालाबों में मछली पालन विभाग द्वारा मिली मेजर काॅर्प, काॅमन काॅर्प, ग्रास काॅर्प, पंगेशियस, मांगुर आदि मछलियों के बीज संवर्धन और पालन किया है। इस वर्ष मछली बीजों को बेचकर ही अभी तक वे 40 हजार रूपए कमा चुके हैं। कोरोना संक्रमण के कारण लाॅकडाउन के चलते मछली बीज बेचना प्रभावित हुआ है, तो वीर सिंह ने अब लगभग 10 हजार बीज को बड़ा कर टेबल फिश तैयार कर तीन लाख रूपये तक की आय प्राप्त करने की योजना पर भी अमल शुरू कर दिया है। उनकी इस योजना से अगले तीन वर्षों तक तीन-तीन लाख रूपए की आय की संभावना है।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। वैश्विक बाजार में कमजोरी के संकेतों और रुपये की विनिमय दर में सुधार के बीच दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना मंगलवार को 1,049 रुपये की गिरावट के साथ 48,569 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी सत्र में सोने का भाव 49,618 रुपये प्रति 10 ग्राम था। बिकवाली दबाव के कारण चांदी भी 1,588 रुपये की गिरावट के साथ 59,301 रुपये प्रति किलो ग्राम पर आ गयी। पिछले सत्र में इका बंद भाव 60,889 रुपये प्रति किग्रा था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव हानि के साथ 1,830 डॉलर प्रति औंस रह गया जबकि चांदी 23.42 डॉलर प्रति औंस पर लगभग अपरिवर्तित रही। कोविड-19 के टीके के संदर्भ में उम्मीद बढ़ने और बाइडेन के अमेरिकी राष्ट्रपति का कार्यभाव संभालने की तैयारियों के मद्देनजर सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई।`

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। अगले 10 दिनों में यानी दिसंबर से कैश ट्रांसफर से जुड़े बैंकों के नियम बदल जाएंगे। दरअसल, आरबीआई ने रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) को लेकर नियम में बदलाव किया है। अब लोग 24 घंटे आरटीजीएस सुविधा का लाभ उठा पाएंगे। ये व्यवस्था आरबीआई को दिसंबर से लागू करनी है। अभी ये सर्विस 24 घंटे काम नहीं करती। आरबीआई के इस फैसले से बड़ी ट्रांजेक्शन या फंड ट्रांसफर करने वाले लोगों और कारोबारियों को फायदा होगा। आरबीआई आरटीजीएस की 24 घंटे की सर्विस दिसंबर से शुरू करेगा। अभी आरटीजीएस की सर्विस सुबह 8 बजे से शाम 7:55 बजे तक ही मिलती है। आरबीआई ने अपनी पिछली मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय पहली बैठक के बाद जारी समीक्षा में कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर ऐसे गिने चुने देशों में होगा जहां 24 घंटे, सातों दिन, बारह महीने बड़े मूल्य के भुगतानों के तत्काल निपटान की प्रणाली होगी। आरटीजीएस फंड ट्रांसफर करने की एक तेज प्रक्रिया है। इस सिस्टम के जरिए आप एक बैंक अकाउंट से दूसरे में पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। आरटीजीएस में न्यूनतम 2 लाख रुपये फंड ट्रासफर कर सकते हैं। इसमें अधिकतम की कोई सीमा नहीं है। आरटीजीएस के जरिए तुरंत पैसा पहुंच जाता है। ये लगते हैं चार्जेस सुबह 8 बजे से 11 बजे तक आरटीजीएस करने पर कोई चार्ज नहीं लगता। 11 से 2 बजे तक 2 रुपये और शाम 6 बजे के बाद 10 रुपये चार्ज लगता है।

00 फिक्की और सीआईआई की चुप्पी पर भी कैट ने उठाये सवाल
रायपुर (शोर सन्देश)। भारतीय कम्पनी फ्यूचर ग्रुप पर अमेजन के अनैतिक कब्जे की कोशिश पर कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने कहा की बेशक भारतीय कम्पनी फ्यूचर ग्रुप से व्यापारियों के मतभेद हैं लेकिन राष्ट्र हित में विदेशी कम्पनी और भारतीय कम्पनी की इस लड़ाई में कैट खुल कर भारतीय कम्पनी का साथ देगा। कैट ने इस मामले पर फिक्की और सीआईआई जैसे उद्योग संगठनों की चुप्पी पर भी सवाल खड़ा करते हुए कहा की ये संगठन अभी तक इस मामले पर क्यों नहीं बोले। ऐसा प्रतीत होता है की इसके पीछे कहीं इन संगठनों का निहित स्वार्थ तो नहीं छुपा हुआ है। कैट ने कहा की भारतीय कम्पनी के साथ हमारे मतभेद देश का अंदुरनी मामला है। इसे हम सुलझा लेंगे, किन्तु कोई विदेशी कम्पनी यदि भारतीय कम्पनी का अनैतिक तरीके से अधिग्रहण करेगी तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कैट ने 4 नवम्बर को केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीथारमन एवं केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल को सबूती दस्तावेज के साथ एक ज्ञापन भेजकर अमेजन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की है। कैट ने अपने ज्ञापन में अमेजन पर भारत सरकार की एफडीआई पालिसी एवं विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के उल्लंघनों में शामिल होने के लिए अमेजन पर सीधे आरोप लगाए थे और भारत में मल्टी ब्रांड रिटेल गतिविधियों चलाने के लिए सरकार की अनिवार्य अनुमति नहीं लेने का आरोप भी लगाया था।
कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने कहा की भारत के व्यापारी अमेजन द्वारा उनके व्यापार को नष्ट किये जाने को लेकर बेहद चिंतित हैं क्योंकि अमेजन उनका व्यापार नष्ट करने पर तुला है। इसीलिए अमेजन हर रास्ता अपना कर भारत के रिटेल कारोबार पर अपना कब्जा जमाने के लिए कुछ भी अधिकृत अथवा अनधिकृत रास्ता अपना कर मनमानी व्यापारिक गतिविधियां कर रहा है। यह तो फ्यूचर समूह और अमेजॅन के बीच लड़ाई है जिसके चलते अमेजॅन द्वारा सिंगापुर में स्तिथि आर्बिट्रेशन पैनल में जिरह के दौरान अमेजन ने इस बात को स्वीकार किया की वो फ्यूचर रिटेल जो की एक मल्टी ब्रांड रिटेल कम्पनी है को भी नियंत्रित कर रहा है जो सरकार की एफडीआई नीति के खिलाफ है दी गई।
श्री पारवानी ने कहा की अमेजॅन फ्यूचर ग्रुप में निवेश (एफसीएल के माध्यम से) फेमा 1999 अधिनियम की धारा 13 का उल्लंघन है। यह फेमा के नियम 23 के स्पष्टीकरण (डी) का भी उल्लंघन करता है, फेमा के अनुसूची -1 के तहत निर्धारित प्रवेश मार्ग का उल्लंघन करता है, अनुसूची -1 के खंड 15.4 का भी यह स्पष्ट उल्लंघन है। यह एफडीआई नीति के प्रेस नोट नंबर 2 के तहत निर्धारित शर्तों का भी घोर उल्लंघन करता है। अमेजन द्वारा फेमा का ऐसा उल्लंघन फेमा अधिनियम की धारा 13 में निर्दिष्ट जुर्माना लगाने के लिए एक प्रमाणित मामला है जिसके अनुसार मौद्रिक जुर्माना उल्लंघन में शामिल राशि का तीन गुना तक है जिसका अर्थ है कि अमेजन 1 लाख 20,000 करोड़ रुपये के मौद्रिक दंड के लिए उत्तरदायी है। इसके अतिरिक्त, प्रवर्तन निदेशालय यह निर्देश दे सकता है कि ष्किसी भी मुद्रा, सुरक्षा या अन्य धन या संपत्ति जिसके संबंध में उल्लंघन हुआ हैष् केंद्र सरकार जब्त कर सकती है। अंत में, सिंगापुर आर्बिट्रेटर द्वारा पारित अंतरिम पुरस्कार ने कथित तौर पर यह स्थापित किया है कि अमेजॅन के स्वयं के प्रवेश पर भी, इसका पूरा निवेश एफआरएल में अपने विशिष्ट नियंत्रण अधिकारों की ओर है। श्री पारवानी ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण से तत्काल कार्रवाई की मांग की। इस मुद्दे पर सरकार के कानूनों और नियमों में व्यापारियों का विश्वास बहाल करने के लिए कैट ने संबंधित अधिनियम और नियमों के तहत आरबीआई, सेबी और प्रवर्तन निदेशालय से अमेजॅन के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने की भी मांग की है।

मुंबई (शोर सन्देश)। घरेलू शेयर बाजार के सकारात्मक रुख और अमेरिकी मुद्रा की कमजोरी के चलते रुपया शुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 12 पैसे मजबूत होकर 74.15 के स्तर पर आ गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 74.15 पर खुला, जो पिछले बंद के मुकाबले 12 पैसे की बढ़त दर्शाता है। रुपया गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 74.27 पर बंद हुआ था।
कारोबारियों ने कहा कि घरेलू शेयर बाजारों में विदेशी कोषों की लगातार आवक से स्थानीय मुद्रा को भी मदद मिली।
रिलायंस सिक्योरिटीज ने एक शोध टिप्पणी में कहा कि घरेलू इक्विटी और ऋण बाजार में इस महीने अभी तक छह अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश हो चुका है, जबकि महीने में अभी एक सप्ताह का कारोबार बाकी है। शोध टिप्पणी में आगे कहा गया कि केंद्रीय बैंक इस आवक को लगातार काबू में करने की कोशिश कर रहा है, जो रुपये की बढ़त को सीमित कर सकता है। बाजार का अनुमान है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व दिसंबर में मौद्रिक नीति में राहत दे सकता है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्ब की अगली बैठक 15 और 16 दिसंबर को होनी है।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। घरेलू सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने के हाजिर भाव में भारी गिरावट दर्ज की गई है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बुधवार को सोने के हाजिर भाव में 694 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट से दिल्ली में सोने का भाव 51,215 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। सिक्युरिटीज के अनुसार, भारतीय रुपये में मजबूती के चलते सोने के भाव में यह गिरावट दर्ज की गई है। गौरतलब है कि इससे पिछले सत्र में मंगलवार को सोना 51,909 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था।हालांकि, घरेलू सर्राफा बाजार में बुधवार को चांदी की कीमत में इजाफा हुआ है। सर्राफा बाजार में चांदी के भाव में 126 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोत्तरी हुई है। इस बढ़त से सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत बढ़कर 63,427 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है। गौरतलब है कि इससे पहले पिछले सत्र में मंगलवार को चांदी का भाव 63,301 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था। एचडीएफसी सिक्युरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (कमोडिटीज) तपन पटेल ने बताया कि दिल्ली में 24 कैरेट सोने के हाजिर भाव में भी बुधवार को भारतीय रुपये में मजबूती के चलते 694 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय रुपया बुधवार को घरेलू शेयर बाजारों के सकारात्मक रहने और विदेशी फंड की आवक के चलते एक डॉलर के मुकाबले 13 पैसे की मजबूती के साथ 73.33 पर बंद हुआ है। वहीं, अतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें, तो बुधवार को सोना बढ़त के साथ और चांदी स्थिर ट्रेंड करती दिखी। सोना बुधवार को 1892 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेंड करता दिखाई दिया। उधर चांदी 23.73 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेंड करती देखी गई।