ब्रेकिंग न्यूज

देश-विदेश

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा*

18-Feb-2021

लन्दन (शोर सन्देश)। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट यूनियन की पहली भारतीय महिला प्रेसिडेंट चुनी गईं रश्मि सामंत ने पद से इस्तीफा दे दिया है। अपनी पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट्स के वायरल होने और खुद पर नस्लीय आधार पर भेदभाव करने के आरोपों के बाद रश्मि सामंत ने पद से इस्तीफा दिया है। पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट्स के आधार पर नस्लवादी और असंवेदनशील बताया जा रहा था। मलयेशिया घूमने के दौरान की अपनी एक तस्वीर को इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए रश्मि सामंत ने कैप्शन में चिंग चांग लिखा था। इसे यहूदी और चीनी छात्रों के लिए गलत माना जा रहा था। यही नहीं स्टूडेंट यूनियन की डिबेट्स के दौरान उनकी तुलना हिटलर जैसे तानाशाह से की जा रही थी। इस बात से रश्मि सामंत काफी आहत थीं और अंत में उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया। सामंत ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट्स के लिए एक खुला खत लिखते हुए माफी भी मांग ली थी। इसके बाद भी लगातार उनकी आलोचना की जा रही थी और अंत में उन्होंने पद से इस्तीफा ही दे दिया। रश्मि सामंत ने फेसबुक पर अपने इस्तीफे का ऐलान किया है। इस्तीफा देते हुए रश्मि सामंत ने लिखा, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट यूनियन के प्रेसिडेंट चुने जाने के बाद जिस तरह से कुछ घटनाएं हुई हैं। इससे मैं यह मानती हूं कि मेरे लिए यह इस्तीफा देने का सही समय है। आपने मुझे प्रेसिडेंट के तौर पर चुना यह मेरे लिए गर्व की बात है। कर्नाटक की मणिपाल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से पढ़ाई कर चुकीं रश्मि सामंत को बीते सप्ताह ही प्रेसिडेंट के तौर पर चुना गया था। उन्हें कुल पड़े 3,708 वोटों में से 1,966 मत मिले थे। वह उडुपी जिले के मणिपाल कस्बे की रहने वाली हैं। उनके पिता दिनेश सामंत एक कारोबारी हैं, जबकि मां वत्सला होममेकर हैं। सामंत ने उडुपी से ही स्कूल की पढ़ाई की है, जबकि 2020 में मेकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन कंप्लीट किया है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के चुनाव में रश्मि सामंत ने खुद को समावेशी कैंडिडेट के तौर पर पेश किया था। यही नहीं प्रचार के दौरान उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के सिलेबस से उपनिवेशवादी चीजों को हटाने की भी बात कही थी। 


महाभियोग मामले में डोनाल्ड ट्रंप की जीत कैपिटल हिल हिंसा भड़काने के आरोप से बरी*

14-Feb-2021

वाशिंगटन (शोर सन्देश)। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप महाभियोग मामले में एक बार फिर से बरी हो गए हैं। अमेरिकी सीनेट ने 6 जनवरी को कैपिटल हिल में हिंसा भड़काने के आरोप में डोनाल्ड ट्रंप को बरी कर दिया है। चार दिन के महाभियोग ट्रायल के बाद पांचवें दिन वोटिंग हुई और इस दौरान 57 सीनेटरों ने डोनाल्ड ट्रंप को दोषी पाया जबकि 43 सीनेटरों ने उन्हें दोषी नहीं पाया। 100 सदस्यों वाले सीनेट में ट्रंप को दोषी करार देने के लिए सीनेट को जरूरी दो तिहाई बहुमत यानी 67 वोटों की जरूरत थी, जो नहीं मिल सका। इसी दस वोटों की कमी की वजह से डोनाल्ड ट्रंप बरी कर दिए गए। डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के इतिहास में ऐसे पहले राष्ट्रपति रह चुके हैं जिन्होंने दो बार महाभियोग का सामना किया। इतना ही नहीं, वह पद से हटने के बाद महाभियोग ट्रायल का सामना करने वाले भी अमेरिका के पहले राष्ट्रपति का तमगा हासिल कर चुके हैं। बिल कैसिडी, रिचर्ड बर्र, मिट रोमनी और सुसान कोलिन्स सहित सात रिपब्लिकन सीनेटरों ने ट्रंप के खिलाफ महाभियोग चलाने के पक्ष में मतदान किया। बरी होने के तुरंत बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अपना बयान जारी किया और सबसे पहले अपने लीगल टीम को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा अमेरिका का कोई भी राष्ट्रपति कभी भी इस तरह से नहीं गुजरा है। बता दें कि 6 जनवरी को हुई कैपिटल हिल हिंसा में पांच लोगों की मौत हो गई थी और कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप लगे थे कि उन्होंने ही अपने समर्थकों को उकसाया था, जिसके बाद कैपिटल हिल पर हमला हुआ था और लोगों की जानें गई थीं।
 


अमरीका ने म्‍यामां को दी जाने वाली एक अरब डॉलर की सहायता रोकी*

11-Feb-2021
वाशिंगटन (शोर सन्देश)। अमरीका ने म्‍यामां सरकार को दी जाने वाली एक अरब डॉलर की सहायता रोक देने की घोषणा की है। राष्‍ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि अमरीका म्‍यामां के सैनिक शासकों के खिलाफ कई कदम उठाने जा रहा है। उन्‍होंने बताया कि वे तख्‍ता पलट का निर्देश देने वाले नेताओं और उनके नजदीकी पारिवारिक सदस्‍यों के खिलाफ प्रतिबंधों की अनुमति देने वाले नये कार्यकारी आदेश पर पहले ही हस्‍ताक्षर कर चुके हैं। राष्‍ट्रपति बाइडन ने कहा कि म्‍यामां को किये जाने वाले निर्यात पर प्रतिबंध लगाया जायेगा लेकिन स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल, नागरिक संगठन और लोगों के हितों से जुड़ी मदद जारी रखी जायेगी। राष्‍ट्रपति बाइडन ने सेना से नेताओं और कार्यकर्ताओं को अविलंब रिहा करने, सत्‍ता छोड़ने और लोगों की इच्‍छाओं का सम्‍मान करने को कहा। म्‍यामां की सैनिक सरकार ने आन्‍ग सान सू ची के नेतृत्‍व वाली नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी-एन.एल.डी. के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। स्‍टेट काउंसलर ऑन्‍ग सान सू ची के निकट सहयोगी क्‍याव तिंत स्‍वे को कल सेना ने गिरफ्तार कर लिया। उन्‍होंने ऑन्‍ग सान सू ची के कार्यालय में मंत्री के रूप में काम किया था। एन.एल.डी. के एक अधिकारी ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार से जुड़े चार अन्‍य लोगों को भी कल रात उनके घरों से हिरासत में ले लिया गया। इस बीच, म्‍यामां की सैनिक सरकार के खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन के समर्थन में नेपीडौ की सड़कों पर कल छठे दिन भी कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन में बाहर आये। कुछ स्‍थानों पर बैंक कर्मचारियों और जातीय समूहों के भी विरोध प्रदर्शन की खबरें हैं।
 

  


भारत और पाकिस्तान के बीच किसी तरह का सैन्य टकराव दुनिया के लिए विनाशकारी होगा: गुतारेस*

29-Jan-2021

संयुक्त राष्ट्र (शोर सन्देश) संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा है कि यह बहुत ही आवश्यक है कि भारत और पाकिस्तान एक साथ आएं तथा अपनी समस्याओं पर गंभीरता से बात करें। गुतारेस ने कहा कि दोनों देशों के बीच किसी प्रकार का सैन्य टकराव उनके लिए तथा पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी होगा। संरा प्रमुख ने कहा, मैंने जो वक्तव्य में कहा, दुर्भाग्य से वही बात मैं आज कह सकता हूं। मेरा मानना है कि तनाव कम होना, नियंत्रण रेखा पर तनाव कम होना बहुत ही आवश्यक है। गुतारेस कश्मीर में बने हालात को लेकर भारत तथा पाकिस्तान के बीच उपजे तनाव के संबंध में पाकिस्तान के पत्रकार द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे। पत्रकार ने गुतारस द्वारा अगस्त 2019 में दिए गए एक वक्तव्य का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर के हालात के संदर्भ में अधिकतम संयम बरतने की अपील की थी। गुतारेस ने बृहस्पतिवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा, मेरा खयाल है कि यह बहुत ही आवश्यक है कि दोनों देश एक साथ आएं और अपनी समस्याओं पर गहराई से बात करें। मेरा खयाल है कि जिनका भी आपने जिक्र किया है उन सभी क्षेत्रों में मानवाधिकारों का पूरा सम्मान हो। उन्होंने कहा, अब चीजें सही दिशा में बढ़ रही हैं। हमारे कार्यालय हमेशा उपलब्ध हैं और हम कहना चाहते हैं कि ऐसी समस्याएं जिनका कोई सैन्य समाधान नहीं है उनके शांतिपूर्ण समाधान इनके माध्यम से निकाले जाएं। भारत और पाकिस्तान के संदर्भ में यह साफ है कि दोनों के बीच कोई भी सैन्य टकराव दोनों देशों तथा पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी होगा। 


संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के मिशन में दो अहम पदों पर भारतवंशी महिलाओं की नियुक्ति*

29-Jan-2021

वाशिंगटन (शोर सन्देश) बाइडन प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के मिशन में दो महत्वपूर्ण राजनयिक पदों पर दो भारतीय अमेरिकी विशेषज्ञों सोहिनी चटर्जी तथा अदिति गोरूर को नियुक्त किया है। आधिकारिक वक्तव्य के मुताबिक चटर्जी संरा में अमेरिकी राजदूत की वरिष्ठ नीति सलाहकार होंगी जबकि गोरूर को मिशन में नीति सलाहकार नियुक्त किया गया है। चटर्जी वैश्विक विकास, संघर्ष तथा सामूहिक अत्याचार विषय की विशेषज्ञ हैं और हाल तक वह कोलंबिया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंटरनेशन ऐंड पब्लिक अफेयर्स में प्राध्यापक के पद पर थीं। इसे पहले उन्होंने अमेरिका की एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट के ब्यूरो ऑफ पॉलिसी, प्लानिंग ऐंड लर्निंग में काम किया था। नवंबर में दिए साक्षात्कार में चटर्जी ने कहा था कि संरा सुरक्षा परिषद जैसे बहुपक्षीय संस्थानों में भारत तथा अमेरिका के बीच बहुत अधिक सहयोग हो सकता है। उन्होंने कहा था कि बाइडन प्रशासन भारत के साथ और सोच-समझकर एवं विवेकपूर्ण भागीदारी करेगा तथा क्षेत्र में चीन के बढ़ते दबदबे को संतुलित करने की खातिर यह नई दिल्ली के साथ मिलकर काम करने का एक अवसर होगा। गोरूर संरा शांतिरक्षा की विशेषज्ञ हैं। उनका प्राथमिक अध्ययन आम नागरिकों के खिलाफ हिंसा रोकना तथा उसके लिए प्रतिक्रिया देने पर केंद्रित है। वह स्टीम्सन केंद्र से भी जुड़ी रह चुकी हैं और उससे पहले वह भारत में इंडियन इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन सैटलमेंट से जुड़ी थीं। 


अमेरिका की पहली महिला वित्तमंत्री बनीं जैनेट येलेन*

27-Jan-2021

वाशिंगटन/नई दिल्ली (शोर सन्देश) जैनेट येलेन अमेरिका की वित्त मंत्री बन गई हैं। वह अमेरिका के इतिहास की पहली महिला वित्त मंत्री हैं। सीनेट द्वारा नामांकन की पुष्टि के बाद उन्होंने मंगलवार को ट्रेजरी सेक्रेटरी ( वित्त मंत्री) के रूप में शपथ ग्रहण किया। गौरतलब है कि राष्ट्रपति जो बाइडेन की सरकार में कमला हैरिस के रूप में अमेरिका को पहली महिला उपराष्ट्रपति भी मिली हैं। जैनेट येलेन इसके पहले अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की प्रमुख रह चुकी हैं। साल 2014 में वह फेडरल रिजर्व की प्रमुख बनने वाली पहली महिला थीं।
उनके ऊपर राष्ट्रपति जो बाइडेन के 1.9 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी राहत प्लान को लागू करवाने की जिम्मेदारी होगी। इसके तहत लोगों को 1,400 डॉलर का स्टिमुलेस चेक दिया जाना है। इसी तरह कोविड -19 टीकाकरण और टेस्टिंग के लिए ज्यादा फंड की भी जरूरत है। येलेन ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता सभी अमेरिकियों को मकान और भोजन उपलब्ध कराने की होगी और साथ ही यह भी कि सभी लोग सुरक्षित तरीके से काम पर लौट आएं। येलेन ने अपने नामांकन के बाद पिछले हफ्ते इस विशाल राहत पैकेज के आकार को वाजिब बताते हुए कहा था कि मौजूदा सरकार की जिम्मेदारी सबसे पहले देश और इसके लोगों को महामारी के प्रभाव से बाहर निकालना है। उन्होंने कहा था, `फिलहाल ब्याज दरें ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गई हैं, इसलिए कुछ बड़ा करना होगा। सबसे पहले अल्पसंख्यक कामगारों, महिलाओं जैसे उन वर्गों को राहत देनी होगी जिन्हें सबसे ज्यादा जरूरत है।


राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद जाने कहाँ हैं इन दिनों ट्रम्प*

21-Jan-2021

वाशिंगटन (शोर सन्देश) व्हाइट हाउस छोड़ने के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कहां रहेंगे, इसको लेकर काफी चर्चा चल रही थी। आखिरकार ट्रंप बुधवार को वॉशिंगटन से निकलकर फ्लोरिडा में पाम बीच रिसॉर्ट मार--लागो पहुंच गए। फिलहाल राष्ट्रपति रिसॉर्ट होम में ही रहेंगे। मार--लागो फ्लोरिडा की एक ऐतिहासिक जगह है। इसका निर्माण 1927 में हुआ था। इसमें 126 कमरे हैं। मार--लागो के एक हिस्से में मार--लागो क्लब है, जिसमें मेंबरशिप के आधार पर एन्ट्री मिलती है। डोनाल्ड ट्रंप ने 1985 में मार--लागो को करीब 73 करोड़ रुपये में खरीदा था।


सत्ता में आते ही बाइडेन ने लिया बड़ा फैसला 1.1 करोड़ प्रवासियों को देंगे नागरिकता*

21-Jan-2021

वाशिंगटन/नई दिल्ली (शोर सन्देश) अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति जो बाइडेन ने् बुधवार को अमेरिका की सत्ता संभाल ली है। सत्ता संभालते ही वो तगड़े ऐक्शन मोड में गए हैं। बाइडेन ने कुर्सी संभालते ही एक के बाद करके तेजी से फैसले लिए हैं। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर करके अपने उनके कई फैसलों को पलट दिया है। इसी बीच बाइडेन ने भारत वासियों के लिए एक बहुत ही बड़ा फैसला लिया है। बाइडेन ने अमेरिका के प्रवासियों को राहत देने वाले एक कार्यकारी आदेश पर भी हस्ताक्षर किया है। आपको बता दें कि इस आदेश से 1.1 करोड़ ऐसे प्रवासियों को फायदा होगा जिनके पास कोई कानूनी दस्तावेज नहीं है इन प्रवासियों में से लगभग 5 लाख लोग भारतीय है अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति जो बाइडेन ने शपथ लेने के बाद सबसे पहले अमेरिकी आव्रजन प्रणाली को पूरी तरह से बदल देने की शुरुआत कर दी है। उन्होंने अपने आदेशों के तहत पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कई ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए जो अमेरिका की आव्रजन नीतियों को बदलने वाले हैं। जो बाइडेन ने अमेरिकी कांग्रेस से अनुरोध किया है कि वह 1.1 करोड़ अवैध प्रवासियों को अमेरिका का स्थायी दर्जा उन्हें नागरिकता का रास्ता तय करने के लिए कानून बनाए। आपको बता दें कि इसमें से लगभग 5 लाख भारतीय मूल के लोग हैं जिनके पास अमेरिका की नागरिकता नहीं है उनके पास कोई भी कानूनी दस्तावेज नहीं है।
00 एक करोड़ से भी ज्यादा अवैध प्रवासियों को वैध बनाने का आदेश
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने सत्ता संभालने से पहले कहा था कि वह इस नुकसान की भरपाई करेंगे। आपको बता दें कि इस विधेयक के तहत एक जनवरी 2021 तक अमेरिका में बिना किसी कानूनी दर्जे के रह रहे लोगों की पृष्ठभूमि की जांच की जाएगी। यदि वे अपने डॉक्यूमेंट्स अमेरिका को जमा करते हैं साथ ही अमेरिका की अन्य बुनियादी अनिवार्यताएं पूरी करते हैं, तो उनके लिए 5 साल के अस्थायी कानूनी दर्जे का मार्ग प्रशस्त होगा या फिर उन्हें ग्रीन कार्ड दे दिया जाएगा। इस काम के बाद ऐसे लोगों को 3 सालों के लिए अमेरिका की नागरिकता मिल सकती है। अमेरिकी सीनेटर बॉब मेनेडेज लिंडा सांचेज कांग्रेस में पेश किए जाने वाले इस विधेयक को तैयार करने का काम शुरू कर दिया है।
00 अमेरिका की सेना सशक्त है, हर चुनौती के लिए तैयार है : जो बाइडेन
बाइडन ने आगे कहा कि, मैं जिन कार्यकारी आदेशों पर साइन करने जा रहा हूं वो कोरोना संकट से बदलाव लाने में मदद करेंगे। इसके अलावा उन्होंने ये भी कहा कि हम जलवायु परिवर्तन से इस तरह से निपटेंगे जैसा हमने पहले कभी नहीं किया। साथ ही सभी लोगों के साथ मिलकर एक जुट होकर काम करेंगे यह प्रयास करेंगे कि सभी समुदाय एक-दूसरे को समझें देश से नस्लभेद को खत्म करें। बाइडेन के इस आदेश के बाद अमेरिका में 100 दिनों के लिए मास् पहनना अनिवार्य कर दिया गया है।
00 घरेलू आतंकवाद को खत्म करने के लिए अमेरिकियों से की अपील

आपको बता दें कि जो बाइडन ने इससे पहले घरेलू आतंकवाद श्वेतों को श्रेष्ठ मानने वाली मानसिकता को हराने की लड़ाई में अमेरिका के सभी नागरिकों से शामिल होने का आह्वान किया। राष्ट्रपति जो बाइडन ने बुधवार को शपथ ग्रहण के बाद अपने पहले भाषण में कहा कि आज `ये जीत किसी एक उम्मीदवार की जीत का नहीं बल्कि लोकतंत्र के मक़सद लोकतंत्र की जीत है जिसका हम लोग आज जश्न मना रहे हैं। देश के 46वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के बाद 78 वर्षीय बाइडन ने ना सिर्फ अपने वैश्विक सहयोगियों के साथ संबंधों को दुरुस्त करने का वादा किया बल्कि देश के लोगों से `सच की रक्षा करने झूठ को हराने का भी आह्वान किया। 


आगे कई चुनौतियां हैं इनसे निपटना आसान नहीं होगा : कमला हैरिस*

20-Jan-2021

वाशिंगटन (शोर सन्देश) अमेरिका की नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने सोमवार को माना कि 20 जनवरी को जो बाइडन के अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेने के बाद सरकार के सामने आगे कई चुनौतियां होंगी और उन सबसे निपटना आसान नहीं होगा। बाइडन 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद व्हाइट हाउस में प्रवेश करेंगे। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती कोविड-19 महामारी के कारण चरमरा रही अर्थव्यवस्था को दुरूस्त करने की होगी। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण देश में 3,98,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग आर्थिक दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। मार्टिन लूथर किंग जूनियर की जयंती पर मनाये जाने वाले डे ऑफ सर्विसके मौके पर सोमवार को एनाकोस्टिया में गैर सरकारी संगठन मार्थाज टेबल में आयोजित कार्यक्रम में हैरिस ने पत्रकारों से कहा, हमें बहुत सारा काम करना है। इन चुनौतियों से निपटना इतना आसान नहीं होगा। हर साल जनवरी के तीसरे सोमवार को मार्टिन लूथर किंग जूनियर की जयंती आयोजित की जाती है। मार्टिन लूथर किंग ने 1950 और 60 के दशक में अश्वेतों के अधिकारों के लिए अहिंसक प्रदर्शन किए थे। हैरिस ने कहा, हमने पहले भी चर्चा की है। जो (बाइडन) ने टीकाकरण, कामकाजी लोगों और परिवारों को राहत देने के लिए योजना बतायी है। बहुत कुछ करना है। कुछ लोग कहते हैं कि हमारा महात्वाकांक्षी लक्ष्य है। लेकिन हमारा मानना है कि कड़ी मेहनत और अमेरिकी संसद के सदस्यों की मदद से हम लोग इसे कर पाएंगे। उन्होंने कहा, मैं अमेरिका की अगली उपराष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेने का इंतजार कर रही हूं। मैं फख्र के साथ सिर बुलंद कर वहां जाऊंगी और शपथ ग्रहण में हिस्सा लूंगी। कमला हैरिस और उनके पति डगलस एमहॉफ सोमवार को एनाकोस्टिया मेंमार्थाज टेबलके कार्यक्रम में मौजूद थे। इस दौरान दंपति ने लोगों के लिए खाद्य सामग्री पैक किया। हैरिस ने कहा, हमलोग यहां सेवा कर रहे कार्यकर्ताओं की मदद के लिए आए हैं।डे ऑफ सर्विसके मौके पर यहां जैक एंड जिल से कई स्कूली छात्र आए हैं। इस दिन हम लोग डॉ. मार्टिन लूथर किंग जूनियर को श्रद्धांजलि देते हैं और उनके योगदान को याद करते हैं।


अमेरिकी इतिहास का काला दिन संसद में घुसे ट्रम्प समर्थक*

07-Jan-2021

00 गोलीबारी में महिला समेत 4 की मौत, वॉशिंगटन में लगा आपातकाल
वाशिंगटन/नई दिल्ली (शोर सन्देश) अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हजारों समर्थक अमेरिकी कैपिटल में घुस गए और पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई। इन घटनाओं में एक महिला समेत चार लोगों की मौत हो गई और कई घायल हैं। साथ ही नए राष्ट्रपति के रूप में जो बाइडन के नाम पर मुहर लगाने की संवैधानिक प्रक्रिया बाधित हुई। बुधवार को कांग्रेस के सदस्य इलेक्टोरल कॉलेज वोटों की गिनती कर रहे थे, इसी दौरान बड़ी संख्या में ट्रंप के समर्थक सुरक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करते हुए कैपिटल बिल्डिंग में घुस गए। पुलिस को इन प्रदर्शनकारियों को काबू करने में काफी मश्क्कत करनी पड़ी। इन हालातों में प्रतिनिधि सभा और सीनेट तथा पूरे कैपिटल को बंद कर दिया गया। उपराष्ट्रपति माइक पेंस और सांसदों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। बिगड़ते हालात के बीच राष्ट्रीय राजधानी में कर्फ्यू लगा दिया गया। लेकिन बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी कर्फ्यू का उल्लंघन करते हुए सड़कों पर उतर आए। अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन स्थित कैपिटोल परिसर के बाहर निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसके बाद परिसर कोलॉक्ड डाउन” (प्रवेश एवं निकास बंद) कर दिया गया। वॉशिंगटन की कैपिटल बिल्डिंग में अमेरिकी कांग्रेस इलेक्टोरल कॉलेज को लेकर बहस कर रही थी और इसी दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने हजारों की तादाद में प्रदर्शन शुरू कर दिया।  वहीं, टि्वटर ने ट्रंप के कुछ ट्वीट्स के बाद उनके अकाउंट को 12 घंटे के लिए बंद कर दिया है। इस हिंसा में सुरक्षा कर्मियों को फायरिंग करना पड़ी है, वहीं एक महिला की गोली लगने से मौत हुई है।  कैपिटोल के भीतर यह घोषणा की गई कि बाहरी सुरक्षा खतरे के कारण कोई व्यक्ति कैपिटोल परिसर से बाहर या उसके भीतर नहीं जा सकता। जब नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन की जीत को प्रमाणित करने के लिए सांसद संसद के संयुक्त सत्र के लिए कैपिटल के भीतर बैठे थे, तभी यूएस (अमेरिका) कैपिटोल पुलिस ने इसके भीतर सुरक्षा के उल्लंघन की घोषणा की। दरअसल, इसी बहस के बाद प्रेसिडेंट इलेक्ट जो बाइडेन की जीत की आधिकारिक और कानूनी पुष्टि की जानी थी। कैपिटोल परिसर यह प्रदर्शन तब शुरू हुए, जब ट्रंप ने अपने समर्थकों को दिन में संबोधित करते हुए उनसे कैपिटल बिल्डिंग की तरफ मार्च करने की अपील की। लेकिन, जब समर्थक हिंसक हो गए तो ट्रंप ने अपने समर्थकों से शांति की अपील की। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि हमारी पुलिस का सहयोग कीजिए, वो वास्तव में हमारे साथ हैं। आप लोग शांति बनाए। कैपिटोल बिल्डिंग के बाहर पुलिस और ट्रंप समर्थकों के बीच झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों ने कैपिटोल की सीढ़ियों के नीचे लगे बैरिकेड्स तोड़ दिए। ट्रंप के समर्थक कैपिटल बिल्डिंग के भीतर घुस गए गए और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव रद्द करने की मांग करते हुए वे हिंसक हो गए। नेशनल गार्ड्स को ट्रंप समर्थकों को रोकने के लिए एक्शन में आना पड़ा।
कैपिटल बिल्डिंग में प्रदर्शन के दौरान एक महिला को गोली लग गई, जिसकी अस्पताल में मौत हो गई। कैपिटल के सुरक्षा कर्मियों के मुताबिक, कैपिटल बिल्डिंग के पास एक विस्फोटक डिवाइस भी मिली है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संसद का संयुक्त सत्र शुरू होने से ठीक पहले कहा कि वह चुनाव में हार को स्वीकार नहीं करेंगे। ट्रंप ने आरोप लगाया कि इसमें धांधली हुई है और यह धांधली उनके डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी जो बाइडन के लिए की गई, जो नवनिर्वाचित राष्ट्रपति हैं। ट्रंप ने वॉशिंगटन डीसी में अपने हजारों समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, ”जब धांधली हुई हो तब आपको अपनी हार स्वीकार नहीं करनी चाहिए।ट्रंप ने एक घंटे से अधिक के अपने भाषण में दावा किया कि उन्होंने इस चुनाव में शानदार जीत हासिल की है।
ट्रंप ने पहले मार्च और फिर शांति की अपील की ट्रंप ने पहल तो अपने भाषण में समर्थकों से मार्च के लिए कहा लेकिन बाद में, “मैं अमेरिका की राजधानी में मौजूद हर शख्स से शांत रहने की अपील करता हूं। हम कानूनों को मानने वाली पार्टी हैं।हंगामें के दौरान ट्रंप समर्थकों ने बिल्डिंग के भीतर दाखिल होने के लिए पुलिस के साथ हाथापाई भी।
हिंसा के बीच प्रेसिडेंट इलेक्ट जो बाइडेन ने ट्रंप से अपील की कि वो नेशनल टेलीविजन पर आएं और संविधान की रक्षा करें। बाइडेन ने कहा कि ट्रंप को नेशनल टेलिविजन पर जाकर इस उपद्रव को खत्म करने की अपील करना चाहिए। हिंसक प्रदर्शनों के बाद कैपिटल बिल्डिंग को अब सुरक्षित कर लिया गया है। एहतियातन वॉशिंगटन में कर्फ्यू लगाने की घोषणा की गई है। यह कर्फ्यू गुरुवार सुबह तक लागू रहेगा। 




kalyan chart

Feedback/Enquiry



Log In Your Account