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जामा मस्जिद में लोगों ने अदा की ईद-उल-फितर की नमाज, देश में अमन और भाईचारे की मांगी दुआ

21-Mar-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )  ईद-उल-फितर के मौके पर शनिवार को जामा मस्जिद में काफी बड़ी तादाद में लोग इकट्ठा हुए और सबने मिलकर ईद की नमाज अदा की। सभी लोगों ने नमाज अदा करने के बाद एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।  
एक स्थानीय ने समाचार एजेंसी से बातचीत में बताया कि एक महीने के रोजे रखने के बाद ईद का दिन आता है, इसलिए इसका इंतजार हर किसी को रहता है। ये दिन अल्लाह की तरफ से एक खास इनाम होता है। पूरे महीने सब्र, इबादत और खुदा की बंदगी करने के बाद ये खुशी का दिन नसीब होता है। यही वजह है कि लोग इसे बहुत प्यार और इज्जत के साथ मनाते हैं।
उन्होंने कहा कि ईद का असली पैगाम मोहब्बत फैलाना है। सिर्फ अपने लिए खुश होना नहीं, बल्कि उन लोगों को भी खुशी देना है जो किसी वजह से खुशी नहीं मना पाते, जैसे गरीब लोग या जरूरतमंद लोग। उनकी मदद करना, उनके साथ बैठना, उन्हें भी अपने साथ शामिल करना यही असली ईद है। उन्होंने कहा कि हम सबको मिलजुल कर रहना चाहिए और समाज में प्यार और भाईचारा बढ़ाना चाहिए।
स्थानीय ने बताया कि आज के दिन सुरक्षा का भी खास ध्यान रखा गया है। पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है ताकि कोई दिक्कत न हो और लोग आराम से अपनी नमाज अदा कर सकें। खुशी की बात ये रही कि सब कुछ बहुत शांति और अच्छे तरीके से हो रहा है। कहीं कोई झगड़ा या परेशानी नहीं हुई, जिससे लोग और भी सुकून से अपनी ईद मना पा रहे हैं।
उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें अपने देश पर गर्व है, जहां सालों से गंगा-जमुनी तहजीब चली आ रही है। यहां अलग-अलग धर्मों के लोग मिलजुल कर रहते हैं और एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होते हैं। ईद के मौके पर भी हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सब एक-दूसरे को बधाई देते नजर आते हैं, जो इस देश की खूबसूरती को दिखाता है।
स्थानीय ने बताया कि नमाज के बाद लोगों ने अल्लाह का शुक्र अदा किया कि उन्होंने उन्हें रोजे रखने की ताकत दी और आज ईद की नमाज अदा करने का मौका दिया। कई लोगों ने कहा कि इंशाल्लाह अगले साल भी वो पूरे तीस रोजे रखेंगे। मौसम भी आज बहुत अच्छा था, जिससे माहौल और भी खुशनुमा हो गया। 





 

होर्मुज स्ट्रेट बंद करने पर 20 देशों ने जताई नाराजगी, ईरान से हमले रोकने की अपील

21-Mar-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) होर्मुज स्ट्रेट इलाके में हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। कई देशों ने मिडिल ईस्ट में ईरान की ओर से की जा रही कार्रवाई की घोर निंदा की और होर्मुज स्ट्रेट बंद करने को लेकर नाराजगी भी जाहिर की है। इसके साथ ही सभी देशों ने संयुक्त बयान जारी कर ईरान से हमले रोकने की अपील की।
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, जापान, कनाडा, रिपब्लिक ऑफ कोरिया, न्यूजीलैंड, डेनमार्क, लातविया, स्लोवेनिया, एस्टोनिया, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, चेकिया, रोमानिया, बहरीन और लिथुआनिया के नेताओं ने होर्मुज स्ट्रेट में हालात को लेकर संयुक्त बयान जारी किया है।
संयुक्त बयान में कहा गया, “हम खाड़ी में बिना हथियार वाले कमर्शियल जहाजों पर ईरान के हालिया हमलों, तेल और गैस इंस्टॉलेशन समेत सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों और ईरानी सेना द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को असल में बंद करने की कड़ी निंदा करते हैं। हम बढ़ते संघर्ष पर अपनी गहरी चिंता जताते हैं। हम ईरान से अपील करते हैं कि वह कमर्शियल शिपिंग के लिए स्ट्रेट को रोकने की अपनी धमकियों, माइन बिछाने, ड्रोन और मिसाइल हमलों और दूसरी कोशिशों को तुरंत बंद करे और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का पालन करे।”
बयान में आगे कहा गया कि नेविगेशन की आजादी अंतरराष्ट्रीय कानून का एक बुनियादी सिद्धांत है, जिसमें यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी भी शामिल है।
ईरान की हरकतों का असर दुनिया के सभी हिस्सों के लोगों, खासकर सबसे कमजोर लोगों पर पड़ेगा। यूएनएससी प्रस्ताव 2817 के मुताबिक, हम इस बात पर जोर देते हैं कि इंटरनेशनल शिपिंग में इस तरह की दखलअंदाजी और वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन में रुकावट अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है। इस बारे में हम तेल और गैस इंस्टॉलेशन समेत सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों पर तुरंत पूरी रोक लगाने की अपील करते हैं।
सभी देशों ने होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता निकालने की कोशिशों का आह्वान किया और कहा, “हम स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करने के लिए सही कोशिशों में मदद करने के लिए तैयार हैं। हम उन देशों की प्रतिबद्धता का स्वागत करते हैं जो तैयारी की योजना कर रहे हैं। हम स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को सहयोग के साथ रिलीज करने की मंजूरी देने के अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के फैसले का स्वागत करते हैं। हम एनर्जी मार्केट को स्थिर करने के लिए दूसरे कदम उठाएंगे, जिसमें कुछ प्रोड्यूस करने वाले देशों के साथ मिलकर आउटपुट बढ़ाना शामिल है।”
उन्होंने कहा, “हम संयुक्त राष्ट्र और आईएफआईएस के जरिए सबसे ज्यादा प्रभावित देशों को मदद देने के लिए भी काम करेंगे। समुद्री सुरक्षा और नेविगेशन की आजादी से सभी देशों को फायदा होता है। हम सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने और अंतरराष्ट्रीय खुशहाली और सुरक्षा के बुनियादी सिद्धांतों को बनाए रखने की अपील करते हैं।

 

असम, केरल और पुडुचेरी में ईवीएम-वीवीपैट का पहला रैंडमाइजेशन पूरा हुआ : चुनाव आयोग

21-Mar-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) चुनाव आयोग ने शनिवार को जानकारी दी कि असम, केरल और पुडुचेरी में पहला रैंडमाइजेशन पूरा हो गया है। आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव व 6 राज्यों में उपचुनावों का कार्यक्रम 15 मार्च को घोषित किया था।
ईवीएम को दो चरणों वाली रैंडमाइजेशन प्रक्रिया के माध्यम से उनके संबंधित मतदान केंद्रों को आवंटित किया जाता है। पहले चरण में जिला स्तर के गोदामों से विधानसभा क्षेत्रों को ईवीएम का रैंडम आवंटन किया जाता है जबकि दूसरे चरण में एसी स्तर से मतदान केंद्र स्तर तक ईवीएम का रैंडम आवंटन किया जाता है।
चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार, सभी चुनाव वाले राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) को प्रथम स्तरीय जांच (एफएलसी) पास कर चुकी ईवीएम-वीवीपैट मशीनों का पहला रैंडमाइजेशन पूरा करना होगा। असम, केरल और पुडुचेरी के आम चुनाव के साथ ही गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा में होने वाले उपचुनावों के लिए ईवीएम का पहला रैंडमाइजेशन पूरा कर लिया गया है।
पहला रैंडमाइजेशन राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में डीईओ की ओर से ईवीएम प्रबंधन प्रणाली (ईएमएस) के माध्यम से किया गया। निर्वाचन क्षेत्रवार रैंडमाइजेशन से चयनित ईवीएम और वीवीपैट की सूचियां सभी राष्ट्रीय और राज्य मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ उनके संबंधित जिला मुख्यालयों पर साझा की गई हैं।
इन ईवीएम और वीवीपैट को संबंधित विधानसभा के स्ट्रांग रूम में राष्ट्रीय और राज्य मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में सुरक्षित रखा जाएगा। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने के बाद, पहली और दूसरी रैंडमाइजेशन से चयनित ईवीएम और वीवीपैट की सूची भी सभी चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के साथ साझा की जाएगी।
 

पाक हमलों के कारण 1 लाख से अधिक अफगानी बेघर : एनआरसी की रिपोर्ट

21-Mar-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) अंतर्राष्ट्रीय मानवीय राहत एजेंसी नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल (एनआरसी) की रिपोर्ट दावा करती है कि तालिबान-पाकिस्तान के बीच लड़ाई के कारण 1,15,000 (एक लाख 15 हजार) से अधिक अफगानी बेघर हो गए हैं।
अफगानिस्तान में एनआरसी के निदेशक जैकोपो कैरीडी ने कहा, “जिन परिवारों को अपना अस्तित्व खतरे में लग रहा था, उन्हें अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है। हजारों लोगों ने कामचलाऊ कैंपों और स्थानीय परिवारों की दया पर पनाह ली है। कइयों को घटिया घर किराए पर लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिसका खर्च उठाना भी मुश्किल है। उन्हें साफ पानी, हेल्थ सर्विस और बच्चों को स्कूली शिक्षा तक नहीं मिल पा रही है।”
एनआरसी के मुताबिक, फरवरी में अफगानिस्तान के कुनार और नंगरहार प्रांतों में पाकिस्तानी हमले शुरू होने के बाद से, 76 अफगान आम लोग मारे गए हैं और 213 घायल हुए हैं।
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक ड्रग रिहैबिलिटेशन हॉस्पिटल पर 16 मार्च को हुए पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक (जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे) को हाईलाइट करते हुए, मानवीय सहायता पहुंचाने वाली एजेंसी ने कहा कि शहरी इलाकों में बढ़ते हमले लड़ाई में बढ़ोतरी का इशारा करते हैं। एनआरसी ने कहा कि अफगानिस्तान में अब तक करीब 800 घरों को नुकसान पहुंचा है, और परिवारों को इस नुकसान से उबरने में वर्षों लग सकते हैं।
कैरीडी ने कहा, “यह बहुत जरूरी है कि लड़ाई में शामिल लोग अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करें। आम लोगों के इंफ्रास्ट्रक्चर को कभी भी निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।”
वहीं, अपनी तकलीफ बताते हुए, 65 साल के अफगान नागरिक बख्तियार ने कहा कि भारी गोलाबारी के बाद उन्हें छह बच्चों के साथ पाकिस्तान बॉर्डर के पास तोरखम में अपने घर से भागने पर मजबूर होना पड़ा। एनआरसी ने बख्तियार के हवाले से कहा, “रात के करीब 10 बज रहे थे जब हमने अचानक रॉकेट और गोलियों की आवाज सुनी। कुछ ही मिनटों में, हमले बहुत तेज हो गए। हमारे पास भागने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था।”
एजेंसी ने बताया कि मदद के लिए फंडिंग में कटौती से अफगानिस्तान पर बहुत बुरा असर पड़ा है और यह दुनिया भर में सबसे कम फंड पाने वाले मानवीय मदद में से एक बना हुआ है, लड़ाई की वजह से अब लोगों को जो थोड़ी मदद मिल रही है, वह भी नहीं मिल पा रही है।
कैरीडी ने कहा, “दुनिया में उथल-पुथल के बीच, अफगानों की चिंता की जानी चाहिए; उन्हें भूलना नहीं चाहिए। खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें और बंद बॉर्डर उन परिवारों के लिए मुश्किलें और ज्यादा खड़ी कर रहे हैं, जिनकी जिंदगी पहले ही लड़ाई की वजह से बर्बाद हो चुकी है।”
अफगानिस्तान ने 21 फरवरी को अफगान इलाके में पाकिस्तानी कार्रवाई के बाद 27 फरवरी को पाकिस्तानी मिलिट्री ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई शुरू की थी।
इससे पहले बुधवार को, अफगानिस्तान ने कहा कि वह सऊदी अरब, कतर और तुर्की जैसे बीच-बचाव करने वाले देशों के कहने पर ईद के लिए अपने ‘राद अल-ज़ुल्म’ डिफेंसिव ऑपरेशन रोक देगा।
पाकिस्तान ने भी ईद के लिए मिलिट्री ऑपरेशन में कुछ समय के लिए रोक लगाने का ऐलान किया, जिसमें इन्फॉर्मेशन मिनिस्टर अताउल्लाह तरार ने कहा कि यह फैसला इलाके के बीच-बचाव करने वालों के कहने पर लिया गया था।
हालांकि अफगानिस्तान का कहना है कि पाकिस्तान ने सीजफायरOver 100,000 Afghans Rendered Homeless Due to Pakistani Attacks: NRC Report
का मान नहीं रखा। शुक्रवार को सशस्त्र बलों के प्रमुख फसीहुद्दीन फितरत ने दावा किया कि पाक सेना ने डूरंड लाइन के पास सीज फायर नियमों का उल्लंघन किया।
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, बॉर्डर इलाकों में पाकिस्तानी सेना के हमलों में कई लोग मारे गए। फितरत ने कहा कि सीजफायर के बावजूद पाकिस्तान के लगातार हमले इस्लामाबाद की तरफ से “कमिटमेंट की कमी और धोखे को दिखाते हैं।” 

2014-15 से रेल दुर्घटनाओं में 90 प्रतिशत की गिरावट आई: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव

20-Mar-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद को बताया कि भारतीय रेल से जुड़ी दुर्घटनाओं की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में भारी गिरावट आई है, और गंभीर दुर्घटनाओं में लगभग 90 प्रतिशत की कमी आई है। बुधवार को लोकसभा में लिखित जवाब में मंत्री ने कहा कि भारतीय रेल के लिए सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है, और निरंतर उपायों से परिचालन सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
उन्होंने कहा कि गंभीर रेल दुर्घटनाओं की संख्या 2014-15 में 135 से घटकर 2025-26 (28 फरवरी तक) में मात्र 14 रह गई है।
मंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़ों से पता चला कि 2004-05 से 2013-14 के दौरान 1,711 गंभीर रेल दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 904 लोगों की मौत हुई और 3,155 लोग घायल हुए। 2014-15 से 2023-24 के बीच यह संख्या घटकर 678 दुर्घटनाएं रह गई, जिनमें 748 लोगों की मौत हुई और 2,087 लोग घायल हुए।
उनके अनुसार, 2024-25 में ऐसी 31 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 18 लोगों की मौत हुई और 92 लोग घायल हुए, जबकि 2025-26 (फरवरी तक) में 14 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 16 लोगों की मौत हुई और 28 लोग घायल हुए।
वैष्णव ने यह भी बताया कि दुर्घटनाओं में कमी कई सुरक्षा पहलों का परिणाम है, जिनमें बेहतर ट्रैक रखरखाव, आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम और तकनीकी उन्नयन शामिल हैं। सुरक्षा संबंधी गतिविधियों पर व्यय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2013-14 में 39,200 करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में 1,17,693 करोड़ रुपए हो गया है, और 2026-27 के लिए 1,20,389 करोड़ रुपए का अतिरिक्त आवंटन किया गया है।
मानवीय त्रुटि को कम करने के लिए, 6,665 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जबकि 10,153 से अधिक लेवल क्रॉसिंग गेटों पर इंटरलॉकिंग की व्यवस्था की गई है। 6,669 स्टेशनों पर ट्रैक सर्किटिंग लागू की गई है, जो विद्युत माध्यम से ट्रैक पर यात्रियों की उपस्थिति की पुष्टि करने में सहायक है।
रेल मंत्री ने यह भी बताया कि स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (एटीपी) ‘कवच’ को 2020 में राष्ट्रीय प्रणाली के रूप में अपनाया गया था। कवच के नवीनतम संस्करण को 1,452 किलोमीटर मार्गों पर लागू किया गया है, जिसमें दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे प्रमुख व्यस्त मार्ग शामिल हैं। रेल मंत्री वैष्णव ने कहा कि प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश से भारतीय रेलवे को सुरक्षा बढ़ाने और दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिल रही है।

कतर ने रास लफान औद्योगिक शहर पर हुए मिसाइल हमलों से नुकसान की जानकारी दी

20-Mar-2026
नई दिल्ली।   ( शोर संदेश ) ईरान की ओर से रास लफ्फान औद्योगिक शहर पर किए गए हमले के नुकसान के बारे में कतर ने जानकारी दी। कतर के मंत्री साद शेरिदा अल-काबी ने बताया कि मिसाइल हमलों के कारण कतर की एलएनजी निर्यात क्षमता में 17 प्रतिशत की कमी आई और वार्षिक राजस्व में लगभग 20 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।
मंत्री साद शेरिदा अल-काबी ने बताया कि हमारी उत्पादन फैसिलिटी को भारी नुकसान हुआ है। जिसकी मरम्मत में पांच साल तक का समय लगेगा और इसके चलते हमें दीर्घकालिक फोर्स मेज्योर घोषित करना पड़ेगा।
कतर एनर्जी का अनुमान है कि बुधवार 18 मार्च 2026 और गुरुवार 19 मार्च 2026 की सुबह हुए मिसाइल हमलों के कारण उसके रास लफान औद्योगिक शहर को हुए नुकसान से सालाना लगभग 20 अरब डॉलर का राजस्व नुकसान होगा और मरम्मत में पांच साल तक का समय लगेगा, जिससे यूरोप और एशिया के बाजारों में आपूर्ति प्रभावित होगी।
रास लफान औद्योगिक शहर में उत्पादन केंद्रों को हुए नुकसान के बारे में जानकारी देते हुए, ऊर्जा मामलों के राज्य मंत्री, कतर एनर्जी के अध्यक्ष और सीईओ, साद शेरिदा अल-काबी ने कहा कि मुझे यह पुष्टि करते हुए राहत मिली है कि इन अनुचित और संवेदनहीन हमलों में कोई भी घायल नहीं हुआ। ये हमले न केवल कतर राज्य पर, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता पर भी थे। यह हम सभी पर हमला था जो विकास और मानवीय प्रगति के लिए खड़े हैं, जो ऊर्जा तक निष्पक्ष, विश्वसनीय और सुरक्षित पहुंच पर आधारित है।
इन हमलों में द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) उत्पादन करने वाली छह ट्रेनें क्षतिग्रस्त हो गईं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 12.8 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) है, जो कतर के निर्यात का लगभग 17 प्रतिशत है। ट्रेन 4 कतर एनर्जी (66 प्रतिशत) और एक्सॉनमोबिल (34 प्रतिशत) का संयुक्त उद्यम है, और ट्रेन 6 कतर एनर्जी (70 प्रतिशत) और एक्सॉनमोबिल (30 प्रतिशत) का संयुक्त उद्यम है।
अल-काबी ने कहा कि एलएनजी संयंत्रों को हुए नुकसान की मरम्मत में तीन से पांच साल लगेंगे। इसका असर चीन, दक्षिण कोरिया, इटली और बेल्जियम पर पड़ रहा है। इसका मतलब है कि हमें कुछ दीर्घकालिक एलएनजी अनुबंधों पर पांच साल तक के लिए फोर्स मेज्योर घोषित करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
हमलों में शेल की ओर से संचालित उत्पादन-साझाकरण समझौते के तहत संचालित पर्ल जीटीएल (गैस-टू-लिक्विड्स) संयंत्र को भी निशाना बनाया गया, जो प्राकृतिक गैस को उच्च गुणवत्ता वाले स्वच्छ ईंधन में बदलता है और प्रीमियम इंजन तेल और स्नेहक, साथ ही पैराफिन और मोम बनाने में उपयोग होने वाले बेस ऑयल का उत्पादन करता है।
अल-काबी ने आगे कहा कि पर्ल जीटीएल के दो संयंत्रों में से एक को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है और इसके कम से कम एक साल तक बंद रहने की उम्मीद है।
कतर ने बताया कि 18.6 मिलियन बैरल कंडेनसेट की हानि होगी। यह कतर के निर्यात का लगभग 24 प्रतिशत है। 1.281 मीट्रिक टन एलपीजी की हानि होगी। यह कतर के निर्यात का लगभग 13 प्रतिशत है। 0.594 मीट्रिक टन नेफ्था की हानि होगी। यह कतर के निर्यात का लगभग छह प्रतिशत है। 0.18 मीट्रिक टन सल्फर का नुकसान होगा। यह कतर के निर्यात का लगभग छह प्रतिशत है और 309.54 एमसीएफए हीलियम का नुकसान होगा। यह कतर के निर्यात का लगभग 14 प्रतिशत है।
ऊर्जा मामलों के राज्य मंत्री, कतर एनर्जी के अध्यक्ष और सीईओ ने कतर की सैन्य और सुरक्षा बलों और ऊर्जा क्षेत्र की आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनके साहस और असाधारण व्यावसायिकता ने यह सुनिश्चित किया कि स्थिति को जल्दी और सुरक्षित रूप से नियंत्रित किया जा सके।
 

भारत से पड़ोसी देशों ने किया अनुरोध, घरेलू आपूर्ति और क्षमता को संतुल‍ित रखते हुए भारत कर रहा पड़ोसी देशों की मदद

20-Mar-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )भारत ने गुरुवार को कहा कि वह ऊर्जा आपूर्ति आवश्यकताओं के मुद्दे पर बांग्लादेश और अन्य पड़ोसी देशों की सहायता कर रहा है, साथ ही घरेलू जरूरतों, रिफाइनिंग क्षमता और डीजल की उपलब्धता के बीच संतुलन भी बनाए रखे हुए है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए दोहराया कि नई दिल्ली को बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव और अन्य पड़ोसी देशों से ऊर्जा संबंधी अनुरोध प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने बताया कि भारत 2007 से बांग्लादेश को डीजल की आपूर्ति कर रहा है। साथ ही दूसरे पड़ोसी देशों की भी लगातार मदद कर रहा है। रणधीर जायसवाल ने कहा, “ऊर्जा के संबंध में हमें कई पड़ोसी देशों से अनुरोध प्राप्त हुए हैं। मैंने पहले भी इस बारे में बात की थी। हमें बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव और कुछ अन्य पड़ोसी देशों से अनुरोध मिले हैं। जैसा कि मैंने पहले संकेत दिया था, भारत 2007 से विभिन्न माध्यमों से बांग्लादेश को डीजल की आपूर्ति कर रहा है। हम वर्तमान में भी बांग्लादेश और अन्य पड़ोसी देशों की सहायता जारी रखे हुए हैं। यह कार्य हमारी अपनी आवश्यकताओं, रिफाइनिंग क्षमता और डीजल की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।”
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा शिपिंग मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे एलपीजी (एलपीजी) की आपूर्ति चिंता का विषय बनी हुई है। जायसवाल ने कहा, “हम सबसे पहले घरेलू खपत और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनकी जरूरतों का ध्यान रखा जाएगा, और उसके बाद हम यह तय करेंगे कि वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए एलपीजी आपूर्ति कैसे की जाए। हालांकि, आपूर्ति की कमी के कारण यह अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है।”
पिछले सप्ताह, एक प्रमुख रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक के रूप में भारत की भूमिका को रेखांकित करते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत सरकार को बांग्लादेश से डीजल आपूर्ति का अनुरोध प्राप्त हुआ है, जिसकी समीक्षा की जा रही है। मंत्रालय ने कहा था, “भारत अपने पड़ोसियों के लिए विशेष रूप से रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का एक प्रमुख निर्यातक है। बांग्लादेश के साथ हमारे संबंधों में लोगों को केंद्र में रखने और विकास-उन्मुख दृष्टिकोण को देखते हुए, हम 2007 से ही नुमालीगढ़ रिफाइनरी से अलग-अलग तरीकों से डीजल की सप्लाई कर रहे हैं, जिनमें जलमार्ग, रेल और बाद में भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन शामिल हैं।”
उन्होंने आगे कहा था, “अक्टूबर 2017 में नुमालीगढ़ रिफाइनरी और बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के बीच आपसी सहमति से तय शर्तों पर हाई-स्पीड डीजल की सप्लाई के लिए एक खरीद-बिक्री समझौता साइन किया गया था। यह बताना जरूरी है कि जहां 2017 से बांग्लादेश को डीजल का एक्सपोर्ट काफी हद तक जारी रहा है, वहीं फैसले लेते समय भारत की रिफाइनिंग क्षमता, हमारी अपनी जरूरतों और डीजल की उपलब्धता को भी ध्यान में रखा जाएगा।”
सरकार ने बार-बार कहा है कि उसे कई अन्य देशों से भी ऐसे अनुरोध प्राप्त हुए हैं, जिनकी जांच भारत की घरेलू ऊर्जा आवश्यकताओं और उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए की जा रही है।

पीएम मोदी ने जॉर्डन के शाह और क़तर के अमीर से बात की, पश्चिम एशिया में बातचीत और कूटनीति की ज़रूरत पर बल

20-Mar-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जॉर्डन के शाह किंग अब्दुल्ला द्वितीय और क़तर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के साथ फ़ोन पर बातचीत की। बातचीत के दौरान, ईद की शुभकामनाएं दीं तथा पश्चिम एशिया में बदलती सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री कार्यालय (सेवा तीर्थ) ने गुरुवार को एक बयान जारी कर बताया कि पीएम मोदी किंग अब्दुल्ला द्वितीय से बात की और उन्हें ईद की अग्रिम शुभकामनाएं दीं हैं। कल बातचीत के दौरान, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर चिंता प्रकट की। उन्होंने इस क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए बातचीत और कूटनीति की ज़रूरत पर बल दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले निंदनीय हैं और इनसे हालात और बिगड़ सकते हैं, जिन्हें टाला जा सकता है। उन्होंने दोहराया कि भारत और जॉर्डन, बिना किसी रुकावट के सामान और ऊर्जा के आवागमन का समर्थन करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस क्षेत्र में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी में सहायता करने के लिए जॉर्डन के प्रयासों की भी दिल से सराहना की।
पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “अपने भाई, जॉर्डन के शाह महामहिम किंग अब्दुल्ला द्वितीय को फ़ोन पर ईद की अग्रिम शुभकामनाएं दीं। हमने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर चिंता प्रकट की और इस क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं स्थिरता को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए बातचीत और कूटनीति की ज़रूरत पर बल दिया। पश्चिम एशिया में ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले निंदनीय हैं और इनसे हालात और बिगड़ सकते हैं, जिन्हें टाला जा सकता है। भारत और जॉर्डन, बिना किसी रुकावट के सामान और ऊर्जा के आवागमन का समर्थन करते हैं। इस क्षेत्र में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी में सहायता करने के लिए जॉर्डन के प्रयासों की दिल से सराहना की।”
प्रधानमंत्री मोदी ने क़तर के अमीर, शेख तमीम बिन हमद अल थानी के साथ भी बात की और उन्हें ईद की हार्दिक शुभकामनाएं दी तथा क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। पीएम मोदी ने शेख तमीम बिन हमद अल थानी से चर्चा के दौरान कतर के साथ भारत की एकजुटता को दोहराया और क्षेत्र के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की।
पीएम मोदी ने कतर में भारतीय समुदाय को दी गई देखभाल और सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया तथा क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम रहने की आशा व्यक्त की। दोनों नेताओं ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध आवागमन के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
इसके साथ ही पीएम मोदी ने कुवैत के क्राउन प्रिंस से ओमान के सुल्तान, फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों और मलेशिया के पीएम से पश्चिम एशिया संकट की गंभीर स्थिति पर चर्चा की और इसकी जानकारी सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर साझा की है। 
 

अयोध्या में राष्ट्रपति मुर्मु: राम मंदिर में करेंगी ‘श्री राम यंत्र’ की स्थापना

19-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु गुरुवार को अयोध्या का दौरा करेंगी। वे राम जन्मभूमि मंदिर में आयोजित कई धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। इसको लेकर प्रशासन की ओर से बड़े स्तर पर तैयारियां और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम पहले ही पूरे कर लिए गए हैं।
अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मंदिर परिसर की दूसरी मंजिल पर ‘श्री राम यंत्र’ और ‘श्री राम नाम मंदिर’ की स्थापना करेंगी। इस अवसर पर एक भव्य वैदिक अनुष्ठान का आयोजन भी किया जाएगा। यह अनुष्ठान दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के 51 वैदिक विद्वानों द्वारा पुजारी गणेश्वर शास्त्री के मार्गदर्शन में संपन्न कराया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु उन करीब 400 कार्यकर्ताओं को सम्मानित करेंगी, जिन्होंने राम मंदिर निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके अलावा, वे मंदिर परिसर के बाहरी हिस्से ‘परकोटा’ में स्थित एक मंदिर पर ध्वजारोहण भी करेंगी।
अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति का काफिला सुबह करीब 11 बजे मंदिर परिसर पहुंचेगा और वे वहां लगभग चार घंटे तक रुकेंगी। इस दौरान वे विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेंगी।
इस कार्यक्रम में कई धार्मिक और सामाजिक नेताओं के शामिल होने की संभावना है। आयोजन के लिए करीब 5,000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। इनके लिए सुरक्षा, बैठने की व्यवस्था, परिवहन और आवास की व्यापक तैयारियां की गई हैं।
राष्ट्रपति की यात्रा से पहले अयोध्या शहर को भव्य रूप से सजाया गया है। मंदिर की ओर जाने वाली सड़कों पर भगवा झंडे और आकर्षक बैनर लगाए गए हैं। बुधवार को शहर के विभिन्न हिस्सों में ऐसे बैनर लगाए गए, जिन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें देखी गईं।
तैयारियों को लेकर अयोध्या के जिलाधिकारी निखिल टिकाराम फुंडे ने बताया कि कार्यक्रम को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव ग्रोवर ने कहा कि सुरक्षा को लेकर विस्तृत योजना तैयार की गई है और हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया गया है।
प्रशासन के अनुसार, राष्ट्रपति की यात्रा के दिन ‘वीआईपी दर्शन’ बंद रहेंगे। हालांकि आम श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति रहेगी, लेकिन उस समय दर्शन रोके जाएंगे जब राष्ट्रपति स्वयं मंदिर परिसर में मौजूद होंगी। अधिकारियों ने यह भी आश्वासन दिया है कि आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।









 

नववर्ष पर्वों पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की शुभकामनाएं

19-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) देशभर में नववर्ष और आस्था के विभिन्न पर्वों का उल्लास एक साथ देखने को मिल रहा है। गुरुवार को चैत्र शुक्लादि, उगादी, गुड़ी पड़वा, चेती चांद, नवरेह और साजिबु चेरोबा जैसे पर्व मनाए जा रहे हैं। इस अवसर पर द्रौपदी मुर्मु और सीपी राधाकृष्णन ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।
द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि ये सभी पर्व भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता के प्रतीक हैं। उन्होंने कामना की कि ये त्योहार सभी के जीवन में समृद्धि और नई आशाओं का संचार करें।
राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में मनाए जाने वाले ये उत्सव नववर्ष के आगमन का स्वागत करते हैं और ‘विविधता में एकता’ की भावना को मजबूत करते हैं।
सीपी राधाकृष्णन ने भी नव संवत्सर, चैत्र शुक्लादि, उगादी, गुड़ी पड़वा, चेती चांद, नवरेह, साजिबु चेरोबा और चैत्र नवरात्रि के अवसर पर देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ये पर्व नई शुरुआत, नवीनीकरण और वसंत ऋतु के आगमन के प्रतीक हैं।
उपराष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि ये उत्सव भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं और लोगों के जीवन में नई ऊर्जा, आशा और सकारात्मकता का संचार करते हैं।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अलग-अलग पोस्ट के माध्यम से नवरात्रि और गुड़ी पड़वा सहित विभिन्न पर्वों पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी थीं। उन्होंने मां दुर्गा से सभी के सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
देश के अलग-अलग राज्यों में मनाए जाने वाले ये पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को भी मजबूत करते हैं। हर क्षेत्र में अलग-अलग परंपराओं के साथ नववर्ष का स्वागत किया जा रहा है, जो भारत की विविधता को दर्शाता है। 

 


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