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घरेलू मांग और सरकारी पूंजी निवेश से भारतीय कंपनियों का राजस्व होगा मजबूत: रिपोर्ट

01-Oct-2025
नई दिल्ली ( शोर संदेश ) । क्रिसिल की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत घरेलू खपत और सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार पूंजी निवेश (कैपेक्स) से चालू वित्त वर्ष में भारतीय कंपनियों के राजस्व में 8 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है।
क्रिसिल रेटिंग्स के सीनियर डायरेक्टर सोमशेखर वेमुरी ने कहा कि कुल मिलाकर कॉर्पोरेट क्रेडिट क्वालिटी आउटलुक मजबूत बना हुआ है और ईबीआईटीडीए 12 प्रतिशत पर स्थिर रहने की उम्मीद है। जीएसटी सुधार, आयकर में छूट, कम महंगाई और ब्याज दर घरेलू खपत को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं। सरकार का लगातार पूंजी निवेश और घरेलू मांग में सुधार इंफ्रास्ट्रक्चर और कंजप्शन-लिंक्ड सेक्टर्स के लिए क्रेडिट क्वालिटी आउटलुक को सपोर्ट करेंगे।
वेमुरी ने कहा, “इसके अलावा, बैलेंस शीट का लेवरेज पिछले दशक के निचले स्तर के करीब है, यानी वैश्विक चुनौतियां बढ़ती हैं तो स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि निर्यात से जुड़े क्षेत्र वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के प्रति संवेदनशील बने हुए हैं, लेकिन अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ द्विपक्षीय समझौतों सहित व्यापार वार्ता के सकारात्मक परिणामों और घरेलू नीतियों के समर्थन से इस प्रभाव को कम किया जा सकता है।”
इस वित्त वर्ष में बैंकों और गैर-बैंकों की क्रेडिट क्वालिटी आउटलुक स्थिर बना हुआ है। जीएसटी सुधार और आयकर में कटौती से खपत में सुधार, कम ब्याज दरें और नीतिगत दरों में कमी से दूसरे छमाही में क्रेडिट ग्रोथ बढ़ने की उम्मीद है। 
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि बैंक क्रेडिट पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 11-12 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा, जबकि गैर-बैंकों का एयूएम पिछले वित्त वर्ष की तरह 18 प्रतिशत की बेहतर दर से बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, सड़क, जल, सिंचाई और पावर सेगमेंट में विविध ऑर्डर बुक से कंस्ट्रक्शन सेक्टर को लाभ होगा। रिन्यूएबल एनर्जी, रोड एसेट्स, कमर्शियल रियल एस्टेट और डेटा सेंटर जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों के लिए मजबूत और अनुमानित कैश फ्लो से मदद मिलेगी।
वेकेशन और बिजनेस ट्रैवल में बढ़ती मांग से हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को लाभ होगा, क्योंकि मांग सप्लाई से अधिक है। इसी तरह, कम महंगाई, कर में राहत और प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती मांग से मजबूत लाभप्रदता के कारण एफएमसीजी सेक्टर को बढ़ती मांग से लाभ होगा।
हालांकि, अमेरिकी टैरिफ का असर कुछ एक्सपोर्ट से जुड़े सेक्टर की क्रेडिट क्वालिटी पर पड़ेगा, क्योंकि भारत के कुल सामान निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत है। डायमंड सेक्टर में, ऑपरेटिंग प्रॉफिट कम होगा क्योंकि टैरिफ की चुनौतियों से खासकर लैब ग्रोन डायमंड से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण मांग पर दबाव बढ़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में ऑर्डर मिलने के बावजूद, प्रतिस्पर्धा बढ़ने से झींगा एक्सपोर्ट करने वालों की कमाई में भी गिरावट आएगी।
 

इस साल भारत का फार्मा निर्यात 30 अरब डॉलर करेगा पार, घरेलू बाजार 2030 तक होगा दोगुना : जितेंद्र सिंह

01-Oct-2025
नई दिल्ली । ( शोर संदेश ) केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत के फार्मास्यूटिकल्स निर्यात का वर्तमान मूल्य लगभग 27.8 अरब डॉलर है और यह साल के अंत तक 30 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश का घरेलू फार्मा बाजार, जो वर्तमान में 60 अरब डॉलर का है, 2030 तक 130 अरब डॉलर तक दोगुना होने की संभावना है। केंद्रीय मंत्री ने भारत के मेडटेक क्षेत्र में तेजी से विस्तार पर भी प्रकाश डाला। यह क्षेत्र वर्तमान में 15-20% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है और इसमें देशभर के लगभग 800 मेडिकल डिवाइस निर्माता शामिल हैं। उन्होंने यह बातें उत्तर प्रदेश सरकार और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के बीच फार्मा, बायोटेक और मेडटेक में नवाचार और निवेश बढ़ाने के लिए हुए समझौते (MoU) के अवसर पर कही। यह सहयोग डीबीटी के बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) और उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल (UPPPC) के माध्यम से केंद्र-राज्य साझेदारी मॉडल के तहत भारत के स्वास्थ्य और बायोटेक क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है।
इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य शोध, स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना, कौशल क्षमता निर्माण और छोटे और मध्यम उद्यमों (SME और MSME) के लिए मजबूत संबंध बनाना है। अधिकारियों ने कहा कि यह सहयोग उभरती तकनीकों में निवेश को तेज करेगा और उनके व्यावसायीकरण में मदद करेगा। डॉ. सिंह ने भारत में बायोटेक स्टार्टअप्स के तेजी से बढ़ते आधार पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि 2014 में स्टार्टअप्स की संख्या केवल 50 थी, जो आज 11,000 से अधिक हो गई है। उन्होंने इस वृद्धि के लिए सरकार की नीतियों और पूरे सरकार दृष्टिकोण को श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि भारत अब वैक्सीन का वैश्विक आपूर्तिकर्ता बन चुका है, जहां दुनिया की 60% से अधिक वैक्सीन का निर्माण होता है और 200 से अधिक देशों को भारतीय वैक्सीन डोज भेजे जाते हैं। डॉ. सिंह ने कहा कि DBT-UP समझौते जैसे सहयोग विकसित भारत 2047 के विजन को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।
वहीं उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों ने राज्य को फार्मा, बायोटेक और मेडटेक का केंद्र बनाने की महत्वाकांक्षा पर जोर दिया। उन्होंने लखनऊ में बायोटेक पार्क, ग्रेटर नोएडा में मेडिकल डिवाइस पार्क और ललितपुर में बल्क ड्रग और फार्मा पार्क जैसी परियोजनाओं का उल्लेख किया, जिन्हें नए सहयोग के तहत और विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि DBT-BIRAC का सहयोग स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने, शोध सहयोग को मजबूत करने और किफायती स्वास्थ्य नवाचारों के लिए मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में मदद करेगा।
भारत की बायोइकोनॉमी का मूल्य वर्तमान में लगभग 165 अरब डॉलर है। DBT के सचिव और BIRAC के अध्यक्ष डॉ. राजेश एस. गोखले ने कहा कि यह समझौता नवाचार पाइपलाइन को खोलने और किफायती तकनीकों को बढ़ाने में मदद करेगा। BIRAC के प्रबंध निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार ने कौशल विकास, इनक्यूबेशन और व्यावसायिकरण के महत्व पर जोर दिया, ताकि नवाचार तेजी से बाजार तक पहुंच सकें। MoU हस्ताक्षर समारोह में उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव अमित कुमार घोष सहित DBT, BIRAC और उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने निष्कर्ष में कहा कि केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से भारत किफायती और सुलभ स्वास्थ्य समाधान का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
 

महिला सशक्तिकरण : आदिवासी और दलित महिलाओं की कहानियां आज समाज को कर रही प्रेरित

01-Oct-2025
नई दिल्ली ( शोर संदेश ) । पिछले गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जब राष्ट्रीय पुरस्कारों की घोषणा की, तो पुरस्कारों की लिस्ट में जोरशोर से महिला शक्ति दिखी। ग्रामीण पृष्ठभूमि के बाबजूद समाज में बदलाव की लड़ाई लड़ती महिलाओं को पद्मश्री लिस्ट में शामिल किया गया। रही सही कसर तब पूरी हो गई जब परेड में पहली बार तीनों सेनाओं की एक महिला टुकड़ी ने मार्च किया। महिला सशक्तिकरण की दिशा में ये पहली तस्वीर थी। फिर पद्म पुरस्कारों की एक से बढ़कर एक कहानियों ने ध्यान खींचा कि ये महिलाएं कौन हैं ? मसलन, हाथी की परी नाम से मशहूर पारबती बरुआ तमाम रूढ़िवादी विचारों को पीछे छोड़ देश की पहली महिला महावत बनीं। पारबती ने वैज्ञानिक तरीकों को अपनाते हुए मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की दिशा में डटकर काम किया। पारबती ने महज 14 वर्ष की आयु में अपने पिता से महावत बनने के गुर सीखने शुरू किए। जंगली हाथियों से निपटने और उन्हें पकड़ने में पारबती ने तीन राज्य सरकारों की मदद की।
उसी तरह सरायकेला की सहयोगी चामी मुर्मु झारखंड की रहने वाली पर्यावरण-वनरोपण के लिए तीन हजार से अधिक वृक्षारोपण के प्रयास को गति दी और तीन हजार महिलाओं के साथ पौधे लगाए। स्वयं सहायता समूह की मदद से 40 से ज्यादा गांवों की 30000 महिलाओं को सशक्त बनाया। ऐसे ही अंडमान की नारियल अम्मा ने 150 से अधिक किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया। एक ओर पूर्वी सियांग की हर्बल मेडिसिन विशेषज्ञ यानंग जमोह लेगो ने आदि जनजाति के पारंपरिक उपचार प्रणाली को पुनर्जीवित किया। यानंग ने 10000 से अधिक रोगियों को चिकित्सा देखभाल प्रदान की और औषधीय जड़ी-बूटियों के बारे में 1 लाख व्यक्तियों को शिक्षित किया।
वहीं स्मृति रेखा चकमा त्रिपुरा की रहने वाली हैं और लोनलूम शाॅल बुकर हैं। दुसाध समुदाय की शांति देवी पासवान ने अपने पति शिवन पासवान के साथ गोदना चित्रकारी को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया। गोदना कलाकृति का प्रदर्शन किया और 20 हजार से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित किया। ये सारी महिलाएं किसी एक राज्य के नहीं हैं। हलांकि इनमेंसे किसी ने भी सरकारी स्कीम के तहत प्रेरित नहीं हुई। सारी कहानियां बदलते भारत में महिलाओं के सुदृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए जैविक खेती, व्यवस्थित चावल गहनीकरण, जैविक खाद उत्पादन (गाय के गोबर और गोमूत्र का उपयोग करके), वृक्षारोपण, वन अधिकार अधिनियम के लिए पैरवी और जनजातियों के लिए सामुदायिक वन जैसी गतिविधियां मुख्य फोकस रही हैं।
325 से अधिक आदिवासी महिलाओं को उनके ब्लॉक के ग्राम प्रतिनिधि, पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के रूप में चुना गया है। 120,000 व्यक्तिगत वन भूमि के स्वामित्व उन महिलाओं को प्रदान किए गए हैं जो मुख्य प्राप्तकर्ता और स्वामी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से रोजगार सृजन में भी प्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं उड़ीसा में आदिवासी और दलित परिवारों के बीच 10.6 करोड़ व्यक्ति दिवस श्रम जुटाया है। इसके अलावा ‘अपना भोजन स्वयं उगाएं’ अभियान ने महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण सेवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। आदिवासी महिलाओं को अपने पर्यावरण-अनुकूल घर बनाने के लिए ब्लॉक ईंट बनाने और राजमिस्त्री कौशल का प्रशिक्षण दिया गया है। 5000 से अधिक आदिवासी महिलाओं को पर्माकल्चर और इकोविलेज डिजाइन शिक्षा में प्रशिक्षित किया गया है।
फिर भी ये कहना गलत होगा कि सरकार कुछ नहीं कर रही है। आये दिन लखपति दीदी और ड्रोन दीदी की चर्चा हम सुनते रहे हैं। पिछले कई वर्षों से मोदी सरकार रोजगार के अवसर प्रदान करने वाले पारंपरिक क्षेत्रों को सुदृढ़ कर रही है और साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा, अंतरिक्ष, ऑटोमेशन और रक्षा निर्यात जैसे नए क्षेत्रों में महिलाओं को भी बढ़ावा दे रही है। ड्रोन प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नए रास्ते खोले जा रहे हैं इस क्षेत्र में महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा आगे बढ़ाने के लिए लाखों ड्रोन दीदियों को प्रशिक्षित कर रोजगार दिया जा रहा है। वंदे भारत जैसी ट्रेनों में महिला लोको पायलट आसानी से देखे जा सकते हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत की महिलाओं के सशक्तिकरण, उनके सम्पूर्ण स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, सुरक्षा एवं रोजगार प्रशिक्षण के साथ सर्वांगीण विकास के लिए कार्यरत है। मंत्रालय “कुपोषण मुक्त भारत” के लिए अपनी प्रतिबद्धता और बच्चों के विकास के प्रति अपने समर्पण में एकजुट होकर प्रयासरत है, और न केवल महिलाओं के विकास के लिए, बल्कि वीमेन लेड डेवलपमेंट के माध्यम से विकसित राष्ट्र निर्माण की प्रेरक कहानियों में, सशक्त महिला नेतृत्व की भूमिका और योगदान का गौरवशाली इतिहास भी लिख रहा है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तीन मिशनों- महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए मिशन शक्ति बच्चों के विकास और सुरक्षा के लिए मिशन वात्सल्य और कुपोषण के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के माध्यम से भावी भारत की तस्वीर में समता, सक्षमता और सहभागिता के विविध रंग भरने के लिए प्रयासरत है। सरकारी योजना मिशन शक्ति का उद्देश्य महिलाओं को जीवन के सभी चरणों में सशक्त बनाना है। यह कार्यक्रम ‘वीमेन लेड डेवलपमेंट’ के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है, जो जीवन के प्रत्येक चरण में महिलाओं को प्रभावित करने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए उन्हें सक्षम बनाता है। इस मिशन का उद्देश्य महिलाओं को सार्वजनिक भागीदारी और रणनीतिक हस्तक्षेपों में शामिल करते हुए समन्वित दृष्टिकोण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में समान योगदानकर्ता बनाना है।
 

केंद्र सरकार गन्ना अनुसंधान के लिए ICAR में विशेष टीम का करेगी गठन : केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

01-Oct-2025
नई दिल्ली ( शोर संदेश )। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को घोषणा की कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) में गन्ना अनुसंधान और नीति के लिए एक अलग टीम बनाई जाएगी। इस पहल का उद्देश्य किसानों और चीनी उद्योग के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना होगा। शिवराज सिंह ने गन्ने के विकास से जुड़ी एक सेमिनार में बताया कि गन्ने की 238 किस्म उच्च चीनी उत्पादन देती है, लेकिन यह लाल सड़न रोग के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने एकल फसल के खतरों की ओर भी ध्यान दिलाया, जैसे कि मिट्टी के पोषक तत्वों की कमी और नाइट्रोजन संधारण में कमी, और सुझाव दिया कि दाल और तिलहन जैसी फसलों के साथ इंटरक्रॉपिंग (साथ में उगाना) पर विचार किया जाए।
इसके अलावा केंद्रीय मंत्री ने उत्पादन लागत कम करने, मशीनरी बढ़ाने, चीनी वसूली दर सुधारने, “per drop, more crop” के सिद्धांत के तहत कुशल सिंचाई अपनाने, बायोप्रोडक्ट्स और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने, और प्राकृतिक खेती अपनाकर उर्वरक पर निर्भरता कम करने पर भी जोर दिया। उन्होंने किसानों को भुगतान में देरी जैसी पुरानी समस्याओं को भी उजागर किया और कहा कि चूंकि मिलों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसका मुख्य प्रभाव किसानों पर पड़ता है। उन्होंने कृषि मजदूरों की कमी पर भी चिंता जताई और प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और मशीनरी बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कृषि मंत्री ने कहा, “मैं ICAR से आग्रह करता हूं कि गन्ना अनुसंधान के लिए एक विशेष टीम बनाई जाए, जो व्यावहारिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करे। अनुसंधान का लाभ किसानों और उद्योग दोनों को मिलना चाहिए। ऐसा अनुसंधान जो किसानों के काम न आए, उसका कोई अर्थ नहीं है।” ICAR के महानिदेशक और DARE सचिव डॉ. एम.एल. जाट ने चार मुख्य अनुसंधान प्राथमिकताओं को उजागर किया। इसके तहत अनुसंधान एजेंडा तय करना, विकास और उद्योग से जुड़ी चुनौतियों से निपटना, और नीति संबंधी सुझाव देने पर चर्चा हुई। उन्होंने उर्वरक की दक्षता बढ़ाने, सूक्ष्म-सिंचाई (micro-irrigation) को बढ़ाने और फसल विविधीकरण पर जोर दिया, जिससे स्थिरता और किसानों की आय मजबूत हो।
वहीं डॉ. देवेंद्र कुमार यादव, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), ने कहा कि 238 किस्म प्रारंभ में लोकप्रिय थी, लेकिन इससे एकल फसल के खतरे बढ़ते हैं। उन्होंने नई किस्मों के लिए तीन साल के परीक्षण चक्र और पैदावार अंतर (yield gaps) का विश्लेषण करने की आवश्यकता पर बल दिया। ICAR के डॉ. राजबीर सिंह ने भी सेमिनार में अपने विचार साझा किए। सेमिनार के अंत में यह आश्वासन दिया गया कि भविष्य की गन्ना अनुसंधान रणनीतियों में किसान-केंद्रित सिफारिशों को शामिल किया जाएगा।
 

प्रवीर रंजन बने CISF के नए महानिदेशक, आधुनिकीकरण और पारदर्शिता पर जोर

01-Oct-2025
नई दिल्ली ( शोर संदेश )। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को नया प्रमुख मिल गया है। 1993 बैच के AGMUT कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रवीर रंजन ने आज मंगलवार को CISF के 32वें महानिदेशक (DG) का पदभार संभाला। CISF मुख्यालय में आयोजित समारोह में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और उन्होंने बल के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत भी की।
अप्रैल 2024 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत रंजन अब तक CISF में विशेष महानिदेशक (एयरपोर्ट सुरक्षा) के रूप में तैनात थे और देशभर के महत्वपूर्ण हवाई अड्डों की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे थे। 32 साल लंबे करियर में उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया है। दिल्ली पुलिस में स्पेशल पुलिस आयुक्त (क्राइम और EOW), CBI में DIG, और चंडीगढ़ में पुलिस महानिदेशक (2022-24) के रूप में वे अपनी दक्षता दिखा चुके हैं। CISF में आने से पहले वे ADG भी रह चुके हैं।
प्रवीर रंजन का शैक्षणिक बैकग्राउंड भी मजबूत है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में परास्नातक, उस्मानिया विश्वविद्यालय से पुलिस प्रबंधन में मास्टर, सिंगापुर नेशनल यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक मैनेजमेंट में मास्टर तथा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, दिल्ली से LLM की उपाधि प्राप्त की है। सेवाओं में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें 2009 में राष्ट्रपति पुलिस पदक (मेधावी सेवा) और 2016 में राष्ट्रपति पुलिस पदक (विशिष्ट सेवा) से सम्मानित किया गया था।
पदभार संभालने के बाद अपने पहले संबोधन में उन्होंने कहा कि CISF को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। इसके लिए बल में आधुनिकीकरण, कल्याणकारी दृष्टिकोण और पारदर्शी प्रशासन पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्रालय के निर्देशों को प्राथमिकता से लागू किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा और पुलिसिंग में उनके अनुभव और गहन शैक्षणिक पृष्ठभूमि के कारण CISF को नई दिशा और मजबूती मिलेगी। उम्मीद की जा रही है कि उनके कार्यकाल में CISF न केवल राष्ट्रीय स्थापनाओं की सुरक्षा को और मजबूत करेगा, बल्कि आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार होगा।
 

पीएम मोदी ने सीआर पार्क और काली बाड़ी मंदिर में की पूजा-अर्चना, यातायात पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

01-Oct-2025
नई दिल्ली । ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अष्टमी के अवसर पर दक्षिण दिल्ली के चित्तरंजन पार्क (सीआर पार्क) स्थित दुर्गा पूजा पंडाल और काली बाड़ी मंदिर में मां दुर्गा और मां काली के दर्शन किए। उन्होंने आरती उतारी, पूजा-अर्चना की और माथे पर तिलक लगाया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भी प्रधानमंत्री के साथ माता के दर्शन किए। राजधानी दिल्ली में हर साल सीआर पार्क की दुर्गा पूजा विशेष आकर्षण का केंद्र होती है। यहां भव्य पंडाल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जिनमें दिल्ली-एनसीआर सहित दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। सीआर पार्क स्थित काली मंदिर परिसर, जिसकी स्थापना 1970 के दशक में हुई थी, बंगाली समुदाय के लिए लंबे समय से आस्था और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी के आगमन से पहले विशेष सुरक्षा समूह (SPG) ने सोमवार को सुरक्षा व्यवस्थाओं का आकलन किया था। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत स्थानीय लोगों को पंडाल और मंदिर क्षेत्र की ओर जाने वाली मुख्य सड़कों पर खड़े सभी वाहनों को हटाने का निर्देश दिया गया। भीड़ और उत्सव के कारण दिल्ली यातायात पुलिस ने लोगों को पहले से सचेत किया है। पुलिस की एडवाइजरी के अनुसार, आउटर रिंग रोड (पंचशील से ग्रेटर कैलाश तक), लाल बहादुर शास्त्री मार्ग, जेबी टीटो मार्ग, इंद्र मोहन भारद्वाज मार्ग और सीआर पार्क मेन रोड पर भारी जाम की संभावना है। इसके अलावा, गुरुद्वारा रोड, बिपिन चंद्र पाल मार्ग और सीआर पार्क व ग्रेटर कैलाश-2 की कई आंतरिक सड़कों पर वाहनों की आवाजाही सीमित रहेगी। पंचशील, आईआईटी और नेहरू प्लेस फ्लाईओवर के नीचे से गुजरने वाले रास्तों को भी डायवर्ट किया गया है।
हल्के और भारी मालवाहक वाहनों को अन्य मार्गों से भेजा जाएगा। यात्रियों को असुविधा से बचने के लिए एमजी रोड, अरबिंदो मार्ग, मथुरा रोड, लाला लाजपत राय रोड और महरौली-बदरपुर रोड जैसी वैकल्पिक सड़कों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। ये यातायात प्रतिबंध 2 अक्टूबर तक प्रभावी रहेंगे।
 

आईएमडी ने आज सौराष्ट्र, कच्छ, गुजरात, कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र में भारी वर्षा की दी चेतावनी

30-Sep-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने  सोमवार को सौराष्ट्र, कच्छ, गुजरात, कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने का अनुमान लगाया है। आईएमडी ने अगले 6 दिनों तक (30 सितंबर को छोड़कर) कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र में अधिकांश कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश तूफान की संभावना जताई है। वहीं, 30 सितंबर को सौराष्ट्र और कच्छ में अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश और बहुत भारी बारिश की संभावना है।
एक बयान में आईएमडी ने कहा 29 और 30 सितंबर को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में 2 से 4 अक्टूबर तक पश्चिम बंगाल और सिक्किम में, 1 से 4 अक्टूबर तक बिहार में 2 से 4 अक्टूबर तक झारखंड में, 5 अक्टूबर को पश्चिम मध्य प्रदेश में, 4 और 5 अक्टूबर को पूर्व मध्य प्रदेश, विदर्भ में, 29 सितंबर से 3 अक्टूबर तक छत्तीसगढ़ तथा ओडिशा में अधिकांश/कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश/तूफान के साथ अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है।
इसके अलावा, 2 अक्टूबर को गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में, 3 और 4 अक्टूबर को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में, 4 और 5 अक्टूबर को बिहार में बहुत भारी बारिश की संभावना है।
मौसम विभाग ने आज सोमवार को आंध्र प्रदेश, गुजरात, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ हिस्सों में गरज के साथ बारिश और बिजली गिरने की भविष्यवाणी की है। आने वाले 4-5 दिनों के दौरान इन क्षेत्रों में इसी तरह का मौसम रहने की उम्मीद है।
वहीं, उत्तर-पूर्व भारत में 30 सितंबर से 5 अक्टूबर तक असम और मेघालय में, 29 सितंबर से 2 अक्टूबर तक नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में, 1 से 5 अक्टूबर तक अरुणाचल प्रदेश में कई कुछ स्थानों पर हल्की व मध्यम बारिश तूफान के साथ अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। इसके अतिरिक्त 2 और 3 अक्टूबर को असम और मेघालय में बहुत भारी बारिश की संभावना है।
 

दिल्ली-एनसीआर बना देश का सबसे बड़ा थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स हब

30-Sep-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) दिल्ली-एनसीआर देश में सबसे बड़ा थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स हब के रूप में उभरा है। 2021 से अब तक इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की कुल लीजिंग एक्टिविटी में इसका हिस्सा एक-चौथाई यानी 25 प्रतिशत है। यह जानकारी हाल ही में आई एक रिपोर्ट में दी गई। 
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के बाद 24 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ मुंबई और 16 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बेंगलुरु का स्थान आता है
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के बाद 24 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ मुंबई और 16 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बेंगलुरु का स्थान आता है। सीबीआरई की एक लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, “चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद सहित टॉप छह शहरों ने 2021 से इस वर्ष की पहली छमाही के बीच कुल 3पीएल लीजिंग एक्टिविटी का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा लिया।”
ये कंपनियां देश के लॉजिस्टिक्स रियल एस्टेट मार्केट में सबसे बड़ी मांग बढ़ाने वाले कारक के रूप में उभरी हैं
3पीएल कंपनियां अपने ग्राहकों की पूरी सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन संभालती हैं, जिससे वे अपने मुख्य व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। ये कंपनियां देश के लॉजिस्टिक्स रियल एस्टेट मार्केट में सबसे बड़ी मांग बढ़ाने वाले कारक के रूप में उभरी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 2021 और 2024 के बीच उन्होंने इस सेक्टर की कुल लीजिंग एक्टिविटी का 40-50 प्रतिशत हिस्सा लिया
रिपोर्ट के अनुसार, 2021 और 2024 के बीच उन्होंने इस सेक्टर की कुल लीजिंग एक्टिविटी का 40-50 प्रतिशत हिस्सा लिया। 2025 की पहली छमाही में इनका हिस्सा 30 प्रतिशत से अधिक था। सीबीआरई के इंडिया, साउथ-ईस्ट एशिया, मिडिल ईस्ट एंड अफ्रीका के चेयरमैन और सीईओ अंशुमन मैगजीन ने कहा, “दिल्ली-एनसीआर की रणनीतिक लोकेशन, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स सेक्टर ने इसे इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण हब बना दिया है।”
हालांकि, टियर-II और III शहर भी नए ग्रोथ हब के रूप में उभर रहे हैं
उन्होंने आगे कहा, “हालांकि, टियर-II और III शहर भी नए ग्रोथ हब के रूप में उभर रहे हैं। इन शहरों में बढ़ती खपत और कम जमीन की लागत से 3पीएल कंपनियों को मेट्रो शहरों से आगे विस्तार करने और खपत केंद्रों के पास स्थानीय हब बनाने के लिए प्रोत्साहित करने की संभावना है।”
रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे की गई 3पीएल कंपनियों में से लगभग 76 प्रतिशत अब अपने लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन में वेयरहाउस मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रही हैं। इसके अलावा, 3पीएल कंपनियां इंटरनेट ऑफ थिंग्स सेंसर, कन्वेयर एंड सॉर्टेशन सिस्टम और गुड्स-टू-पर्सन पिकिंग सिस्टम जैसी टेक्नोलॉजी अपना रही हैं, जो स्मार्ट, ऑटोमेटेड वेयरहाउस की ओर एक बड़े बदलाव को दर्शाता है।
2021 से 2025 की पहली छमाही के दौरान 3पीएल फर्म भारत में वैल्यू और वॉल्यूम को लेकर 1,00,000 वर्ग फुट से अधिक के ‘बिग-बॉक्स’ लीजिंग की मुख्य वजह थीं। यह ई-कॉमर्स, रिटेल और मैन्युफैक्चरिंग की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए स्केलेबल और फ्यूचर-रेडी वेयरहाउसिंग सॉल्यूशन की बढ़ती जरूरत को दर्शाता है। सीबीआरई इंडिया के लीजिंग सर्विसेज के मैनेजिंग डायरेक्टर राम चंदनानी ने कहा, “यह रणनीति कंपनियों को तेजी से स्केल करने के साथ-साथ लागत कम करने में मदद करती है।
 

यूपीआईटीएस : खादी सिर्फ कपड़ा नहीं, आत्मनिर्भरता और सतत जीवनशैली का प्रतीक बनकर उभरा

30-Sep-2025
‘नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो 2025’ में खादी का जादू छाया रहा। खादी न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनकर सामने आई, बल्कि फैशन की दुनिया में अपनी आधुनिक पहचान भी दर्ज कराई। शानदार फैशन शो में मॉडल्स ने खादी के परिधानों की ऐसी श्रृंखला प्रस्तुत की, जिसमें परंपरागत शिल्प कौशल और आधुनिक डिजाइन का अनोखा संगम देखने को मिला। इसने यह संदेश दिया कि खादी ‘ट्रेडिशन टू ट्रेंड’ की यात्रा तय कर चुकी है और अब वैश्विक फैशन का हिस्सा बन रही है।
वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार लोगों से स्वदेशी अपनाने की अपील कर रहे हैं। खादी भी स्वदेशी परिधानों का महत्वपूर्ण अंग है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को आत्मसात करते हुए उत्तर प्रदेश ने खादी और हैंडलूम को नई पहचान दी है। योगी सरकार खादी को सिर्फ परिधान तक सीमित नहीं मानती, बल्कि इसे आत्मनिर्भर भारत और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली का मजबूत आधार मानती है।
प्रदेश सरकार की ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) योजना और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना ने हजारों बुनकरों और कारीगरों को सीधा लाभ पहुंचाया है। सरकार का लक्ष्य है कि खादी को स्थानीय से वैश्विक स्तर तक ब्रांड बनाकर उत्तर प्रदेश को ‘हैंडलूम हब’ के रूप में स्थापित किया जाए। राज्य में खादी उत्पादों की खपत लगातार बढ़ रही है। युवाओं में टिकाऊ फैशन को लेकर बढ़ती जागरूकता ने खादी को आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा बना दिया है। यही वजह है कि आज खादी को ‘फैब्रिक ऑफ फ्यूचर’ कहा जाने लगा है।
‘यूपीआईटीएस 2025’ में खादी की प्रस्तुति ने यह स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश न केवल परंपरा को संजो रहा है, बल्कि भविष्य की जरूरतों के अनुरूप उसे वैश्विक मंच पर भी स्थापित कर रहा है।
सीएम योगी का कहना है कि सरकार का प्रयास है कि खादी को सिर्फ एक कपड़े के रूप में नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, कारीगरी और सतत विकास के प्रतीक के रूप में दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाए। सरकार का प्रयास इसी दिशा में है। उत्तर प्रदेश ने खादी को वैश्विक फैशन जगत में उतारकर दुनिया को यह दिखाया है कि स्थानीय शिल्प और आत्मनिर्भरता से भी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई जा सकती है।

भारतीय डिस्कॉम का परिचालन घाटा वित्त वर्ष 26 में एक तिहाई कम होने का अनुमान: रिपोर्ट

30-Sep-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) राज्य बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) का परिचालन घाटा चालू वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 26) में एक तिहाई घटकर लगभग 8,000-10,000 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 12,000-15,000 करोड़ रुपए था। यह जानकारी सोमवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई।  
परिचालन दक्षता में सुधार, कुछ प्रमुख राज्यों में टैरिफ वृद्धि की मंजूरी और औसत बिजली खरीद लागत (एपीपीसी) में मामूली कमी, घाटा कम होने की प्रमुख वजह हैं
परिचालन दक्षता में सुधार, कुछ प्रमुख राज्यों में टैरिफ वृद्धि को मंजूरी और औसत बिजली खरीद लागत (एपीपीसी) में मामूली कमी घाटा कम होने की वजह है। क्रिसिल रेटिंग्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “परिचालन घाटे में कमी आने से डिस्कॉम्स के लिए ऋण वृद्धि की गति धीमी हो गई है, जिससे उनके ऋण मैट्रिक्स में कुछ सुधार हुआ है।” हालांकि, राज्य सब्सिडी पर उनकी निर्भरता बनी हुई है, कुल ऋण भार अभी भी ऊंचा बना हुआ है और ऋण चुकाने हेतु नकदी संचय के उच्च स्तर तक पहुंचने के लिए औसत राजस्व प्राप्ति (एआरआर) में और सुधार की आवश्यकता होगी।
इसके अलावा, वाणिज्यिक और औद्योगिक (सीएंडआई) यूजर्स द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा की खरीद के लिए ओपन एक्सेस को अपनाने में वृद्धि से उत्पन्न जोखिमों के प्रति डिस्कॉम अभी भी संवेदनशील हैं। क्रिसिल रेटिंग्स के उप मुख्य रेटिंग अधिकारी मनीष गुप्ता ने कहा, “इस वित्तीय वर्ष में, परिचालन अंतर पिछले वित्तीय वर्ष के 12 पैसे से घटकर 5-10 पैसे और वित्तीय वर्ष 20 के 60 पैसे से काफी कम होने की उम्मीद है।”
उन्होंने आगे कहा कि इस वित्तीय वर्ष में सुधार हमारे सैपंल सेट में शामिल 11 राज्यों में से 4 में स्वीकृत टैरिफ वृद्धि और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) युक्तिकरण के तहत कोयले पर क्षतिपूर्ति उपकर को हटाने से प्रेरित होगा, जिससे एपीपीसी में 4-6 पैसे प्रति यूनिट की कमी आएगी। परिचालन दक्षता में सुधार पिछले वित्त वर्ष में कुल तकनीकी और वाणिज्यिक (एटीएंडसी) घाटे में 15 प्रतिशत की कमी से स्पष्ट दिखता है, जो वित्त वर्ष 20 में 19 प्रतिशत था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सुधार बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश के बाद आया है, जिसमें कंडक्टरों और ट्रांसफार्मरों का प्रतिस्थापन, फीडर पृथक्करण और केबलों को भूमिगत करना शामिल है। पिछले पांच वित्त वर्षों में, परिचालन अंतर लगातार कम हुआ है, जो उच्च सब्सिडी प्राप्ति और कुछ राज्यों द्वारा ईंधन और बिजली खरीद मूल्य समायोजन तंत्र को अपनाने के कारण एआरआर में 110 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि से प्रेरित है। क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक गौतम शाही ने कहा, “हालांकि 30 राज्य डिस्कॉम का कर्ज पिछले वित्त वर्ष के 6.5 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर इस वित्त वर्ष में 6.7-6.8 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा, लेकिन उनका ब्याज कवरेज पिछले वित्त वर्ष के 1.2 गुना से बढ़कर 1.3 गुना हो जाएगा।”



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