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आर्टेमिस II मिशन का चौथा दिन : मैनुअल पायलटिंग का सफल प्रदर्शन, फ्लाईबाई की तैयारी में जुटे एस्ट्रोनॉट्स

05-Apr-2026
नई दिल्ली।  शोर संदेश अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के आर्टेमिस II मिशन के चौथे दिन क्रू सदस्यों ने ओरियन यान में मैनुअल पायलटिंग का सफल प्रदर्शन पूरा कर लिया। यह मिशन चंद्रमा के चारों ओर घूमकर वापस पृथ्वी लौटने का परीक्षण है। क्रू ने मून फ्लाईबाई की योजना की भी समीक्षा की।
नासा की एस्ट्रोनॉट क्रिस्टीना कोच और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसेन ने बारी-बारी से ओरियन यान को नियंत्रित किया। 41 मिनट तक उन्होंने दो अलग-अलग थ्रस्टर मोड का परीक्षण किया। इस परीक्षण से इंजीनियर्स को यान की पायलटिंग क्षमताओं के बारे में ज्यादा जानकारी मिली। सोमवार, 6 अप्रैल को अपने छह घंटे के फ्लाईबाई के दौरान वे तस्वीरें लेंगे और विश्लेषण करेंगे। फ्लाईबाई की अवधि 6 अप्रैल को दोपहर 2:45 बजे शुरू होगी।
मिशन कमांडर रीड वाइसमैन और पायलट विक्टर ग्लोवर इस प्रदर्शन को उड़ान के आठवें दिन यानी 9 अप्रैल को दोहराएंगे। इससे जमीनी टीम को यान के प्रदर्शन के विभिन्न पहलुओं की बेहतर समझ मिल सकेगी।
क्रू ने चंद्र विज्ञान टीम द्वारा भेजी गई चंद्रमा की सतह की विशेषताओं की सूची की समीक्षा की। अब सोमवार 6 अप्रैल को छह घंटे की चंद्र फ्लाईबाई के दौरान वे इन स्थानों की तस्वीरें लेंगे और उनका विश्लेषण करेंगे। फ्लाईबाई दोपहर 2 बजकर 45 मिनट से शुरू होगी, इस दौरान ओरियन यान की मुख्य खिड़कियां चंद्रमा की ओर होंगी। इससे पहले क्रू ने ओरियन यान के सौर पैनल कैमरों का उपयोग करके कुछ सेल्फी लीं। ये तस्वीरें आने वाले दिनों में पृथ्वी पर भेजी जाएंगी।
आर्टेमिस II मिशन अपोलो के बाद पहली बार मानवयुक्त यान को चंद्रमा के पास ले जाने वाला है। चार सदस्यीय दल में रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन शामिल हैं। मिशन का उद्देश्य ओरियन यान की गहरे अंतरिक्ष में क्षमताओं का परीक्षण करना है, ताकि भविष्य में चंद्रमा पर मानव बस्ती बसाने की तैयारी हो सके।
आज 5 अप्रैल मिशन के पांचवें दिन तक धरती के गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव की वजह से कैप्सूल की रफ्तार धीमी हो जाएगी। जैसे ही यह चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में दाखिल होगा, इसकी गति फिर से बढ़ने लगेगी और चांद की ओर तेजी से बढ़ने लगेगा।

भारत के समुद्री क्षेत्र की अपार क्षमता का पूरा उपयोग करेंगे : पीएम मोदी

05-Apr-2026
नई दिल्ली।  शोर संदेश पीएम मोदी’नेशनल मेरीटाइम डे’ के अवसर पर रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत केंद्रीय मंत्रियों ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और समुद्री क्षेत्र से जुड़े लोगों के योगदान को सराहा।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि यह दिन भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को याद करने और इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के अमूल्य योगदान को सम्मान देने का अवसर है। समुद्री क्षेत्र से जुड़े लोगों की मेहनत और समर्पण देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार और कनेक्टिविटी को मजबूत बनाता है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत अपने समुद्री क्षेत्र की अपार संभावनाओं का उपयोग कर एक समृद्ध भविष्य की ओर बढ़ता रहेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक वीडियो संदेश भी साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा, “21वीं सदी में, भारत का समुद्री क्षेत्र तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। हमने सदियों पुराने औपनिवेशिक शिपिंग कानूनों की जगह 21वीं सदी के आधुनिक और भविष्योन्मुखी कानून लागू किए हैं। ये नए कानून राज्य समुद्री बोर्डों को सशक्त बनाते हैं, सुरक्षा और स्थिरता को मज़बूत करते हैं, और बंदरगाह प्रबंधन को डिजिटल बनाते हैं।”
उन्होंने बताया कि ‘मैरीटाइम इंडिया’ विज़न के तहत 150 से ज्यादा पहलें शुरू की गई हैं, जिसके बाद बड़े बंदरगाहों की क्षमता दोगुनी हो गई है, टर्नअराउंड समय कम हो गया है और क्रूज़ पर्यटन में तेजी आई है।
इससे पहले, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “राष्ट्रीय समुद्री दिवस के अवसर पर भारत के समुद्री क्षेत्र के कर्मियों को मेरी शुभकामनाएं।” उन्होंने कहा, “शांति के समय हो या मुश्किलों भरे दौर में, देश के विकास को आगे बढ़ाने में आपके पेशेवरपन और साहस ने अहम भूमिका निभाई है। देश आपकी निष्ठा को सलाम करता है।”
वहीं, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी इस मौके पर देश के नाविकों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को सलाम किया। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट के जरिए कहा कि भारत की समुद्री विरासत हमारी ताकत है और यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार को आगे बढ़ाने के साथ-साथ देश के तटीय इलाकों की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने एक मजबूत और टिकाऊ समुद्री भविष्य के लिए प्रतिबद्धता दोहराई।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “सदियों से भारत की समुद्री मार्गों के ज़रिए दुनिया से जुड़ने की एक गौरवशाली परंपरा रही है। राष्ट्रीय समुद्री दिवस के मौके पर मैं साहसी और दिलेर नाविकों को बधाई देता हूं।”
बता दें कि राष्ट्रीय समुद्री दिवस हर साल 5 अप्रैल को मनाया जाता है। यह दिन 1919 में भारत के पहले स्वामित्व वाले जहाज ‘एसएस लॉयल्टी’ की मुंबई से लंदन तक की पहली यात्रा की याद में मनाया जाता है। उस समय भारतीय शिपिंग ने ब्रिटिश एकाधिकार को चुनौती दी थी।
इस दिन का पहला आयोजन 1964 में किया गया था। भारत के विजन 2047 के तहत समुद्री क्षेत्र को और मजबूत बनाने की योजना है। वर्तमान में यह क्षेत्र देश की जीडीपी में लगभग 4 प्रतिशत का योगदान देता है, जिसे 2047 तक बढ़ाकर दो अंकों तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने और 1 करोड़ से ज्यादा नई नौकरियां पैदा करने का भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
 

होर्मुज को लेकर खाड़ी देशों का ‘विकल्पों’ पर जोर, बायपास करने की योजना में आई तेजी

05-Apr-2026
नई दिल्ली।  शोर संदेश पश्चिम एशिया संघर्ष चरम पर है। वर्तमान हालात काबू से बाहर हैं, और होर्मुज चोक प्वाइंट को लेकर फिक्र बढ़ गई है। खाड़ी देश इससे काफी परेशान हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज के विकल्प को लेकर योजना तैयार है! दरअसल, यह ऐसा अहम रास्ता है जिससे होकर रोज करीब 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता है। वहीं बढ़ते भूराजनीतिक जोखिम और हाल ही में जहाजों पर हुए हमलों ने पाइपलाइन और ओवरलैंड कॉरिडोर जैसे विकल्पों को लागू करने के लिए प्रेरित किया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात जैसे देश पहले से ही मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करके स्ट्रेट को थोड़ा बाईपास कर रहे हैं।सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, जिसे पेट्रोलाइन भी कहा जाता है, इस संकट के दौरान एक अहम संपत्ति के तौर पर उभरी है। किंगडम के पूर्वी तेल फील्ड से लाल सागर पोर्ट यानबू तक लगभग 1,200 किलोमीटर तक फैली इस पाइपलाइन की क्षमता लगभग 7 मिलियन बैरल प्रति दिन है और यह निर्यात प्रवाह बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रही है।
यूएई भी अपनी अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन का इस्तेमाल कर रहा है, जो ऑनशोर हबशान फील्ड को ओमान की खाड़ी में फुजैराह पोर्ट से जोड़ती है। हर दिन 1.8 मिलियन बैरल तक की कैपेसिटी वाली यह पाइपलाइन एक्सपोर्ट को होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करने में मदद करती है, हालांकि अभी इसका इस्तेमाल अपनी अधिकतम क्षमता से कम है।
विश्लेषकों ने बताया कि ये पाइपलाइन जरूरी ऑप्शन तो हैं, लेकिन ये गल्फ ऑयल शिपमेंट में किसी भी बड़ी रुकावट को थोड़ा ही ठीक कर सकती हैं। इसके जवाब में, दोनों देश अपनी एक्सपोर्ट फ्लेक्सिबिलिटी (निर्यात में थोड़ी नरमी) बढ़ाने के लिए एक्सपेंशन प्लान देख रहे हैं।
खबर है कि सऊदी अरब अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाने या और रूट बनाने पर विचार कर रहा है, साथ ही अपने लाल सागर तट पर नए एक्सपोर्ट टर्मिनल डेवलप कर रहा है, जिसमें बड़ा नियोम प्रोजेक्ट भी शामिल है। इस बीच, यूएई अपनी बायपास क्षमता को और मजबूत करने के लिए फुजैराह तक दूसरी पाइपलाइन बनाने की संभावना देख रहा है। इन विकल्पों को मुश्किल क्रॉस-बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की तुलना में ज्यादा सही माना जा रहा है।
देश भर में विस्तारीकरण के अलावा, खाड़ी देश लंबे समय तक चलने वाली मजबूती को बेहतर बनाने के मकसद से बड़े रीजनल पाइपलाइन नेटवर्क पर भी विचार कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि पूरे इलाके में आपस में जुड़े कॉरिडोर का एक नेटवर्क अलग-अलग रूट की तुलना में ज्यादा सुरक्षा दे सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इंडस्ट्री के जानकारों ने कहा कि मौजूदा संकट ने ऐसे प्रोजेक्ट्स के बारे में सोचने पर मजबूर किया है। 

LPG पर खुशखबरी! भारतीय ध्वज वाले जहाज Green Asha ने पार किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

05-Apr-2026
नई दिल्ली।  शोर संदेश एलपीजी के मोर्चे पर देश के लिए खुशखबरी है। भारतीय ध्वज वाले जहाज ग्रीन आशा (Green Asha) ने ईरान के पास मौजूद संकरे समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव शुरू होने के बाद, यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलने वाला भारत का नौवां जहाज है।
ईरान ने अमेरिका, इजरायल से युद्ध शुरू होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है। दुनिया के एनर्जी सेक्टर के लिए यह रास्ता काफी अहम है, क्योंकि विश्व में होने वाले पेट्रोलियम के कुल व्यापार में से 20 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्रीन आशा एक एलपीजी टैंकर है और बढ़ते जोखिमों के बावजूद इसका सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करना, इस क्षेत्र पर भारत की निरंतर निर्भरता को दर्शाता है।
दरअसल, इस तनाव ने वैश्विक ईंधन आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है, जिससे दुनिया के ऊर्जा बाजार कठिन चुनौती से गुजर रहे हैं। समुद्री आंकड़ों से पता चलता है कि इस मार्ग का उपयोग करने वाले लगभग 60 प्रतिशत मालवाहक जहाज या तो ईरान से आ रहे हैं या ईरान के लिए ही जा रहे हैं। इन चुनौतियों के बावजूद, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय जहाजों की गतिविधि अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है।
ग्रीन आशा की यात्रा से पहले, कम से कम आठ भारतीय जहाज इस मार्ग से गुजर चुके थे। इनमें एलपीजी वाहक बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम शामिल थे, जिन्होंने संघर्ष क्षेत्र से लगभग 94,000 टन माल का परिवहन किया। मार्च के अंत में, पाइन गैस और जग वसंत सहित चार भारतीय ध्वज वाले एलपीजी टैंकरों ने तीन दिनों की अवधि में 92,600 टन से अधिक एलपीजी की आपूर्ति की।
इससे पहले, एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी ने मार्च के मध्य में गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों तक लगभग 92,700 टन एलपीजी पहुंचाई थी।अन्य शिपमेंट में कच्चा और ईंधन शामिल थे। तेल टैंकर जग लाडकी ने संयुक्त अरब अमीरात से मुंद्रा तक 80,000 टन से अधिक कच्चे तेल का परिवहन किया, जबकि जग प्रकाश ने ओमान से अफ्रीकी बाजारों के लिए गैसोलीन ले जाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार किया। एक अन्य एलपीजी वाहक, ग्रीन सानवी ने भी हाल ही में लगभग 46,650 मीट्रिक टन कार्गो के साथ अपनी यात्रा पूरी की। 

ईंधन संकट के बीच सरकार का बड़ा कदम: ATF कीमतों में बढ़ोतरी 25% तक सीमित

02-Apr-2026
नई दिल्ली।  शोर संदेश ) वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल के बीच केंद्र सरकार ने आम यात्रियों और घरेलू विमानन क्षेत्र को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने घरेलू एयरलाइंस के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में बढ़ोतरी को 25 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी कीमतों में 100 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही थी।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, यह फैसला वैश्विक ऊर्जा बाजार में असाधारण स्थिति को देखते हुए लिया गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है, जिससे एटीएफ की कीमतों में भारी उछाल की संभावना बन गई थी।
सरकार ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने नागर विमानन मंत्रालय के साथ मिलकर कीमतों में केवल आंशिक और चरणबद्ध वृद्धि लागू की है। इसके तहत घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ की कीमत में करीब 25 प्रतिशत यानी लगभग 15 रुपए प्रति लीटर की ही बढ़ोतरी की गई है, ताकि हवाई किराए में अचानक भारी वृद्धि से यात्रियों को बचाया जा सके।
हालांकि, सरकार ने यह भी साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर यह राहत लागू नहीं होगी। विदेशी रूट्स पर संचालित उड़ानों को एटीएफ की पूरी बढ़ी हुई वैश्विक कीमत का भुगतान करना होगा। 1 अप्रैल 2026 से लागू नई दरों के अनुसार, देश के प्रमुख महानगरों में एटीएफ की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिल्ली में इसकी कीमत बढ़कर 1,04,927 रुपए प्रति किलोलीटर हो गई है, जो मार्च में 96,638.14 रुपए थी।
नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे व्यावहारिक और दूरदर्शी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब वैश्विक ऊर्जा संकट के चलते एटीएफ की कीमतों में तेज उछाल का दबाव था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का आभार जताते हुए कहा कि यह कदम यात्रियों को महंगे हवाई किराए से बचाने, घरेलू एयरलाइंस पर दबाव कम करने और विमानन क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा।
मंत्री ने यह भी कहा कि इस फैसले का व्यापक आर्थिक असर भी सकारात्मक रहेगा, क्योंकि इससे माल ढुलाई और व्यापार के लिए जरूरी हवाई संपर्क सुचारु बना रहेगा। यह निर्णय पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आई तीव्र वृद्धि के बीच आया है। वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास व्यवधानों ने विश्व भर में ईंधन की लागत को बढ़ा दिया है। तेल कंपनी के अनुसार, एटीएफ की कीमतों में लगभग 8.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, न कि पहले बताए गए 115 प्रतिशत की। जेट ईंधन की मौजूदा कीमत लगभग 1.04 लाख रुपए प्रति किलोलीटर है।
 

किसान हित सर्वोपरि: योगी सरकार ने मुआवजा प्रक्रिया तेज करने के दिए निर्देश

02-Apr-2026
नई दिल्ली।  शोर संदेश ) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कई जनपदों में हुई बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों का हाल जाना और अधिकारियों को तुरंत राहत पहुंचाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने असमय बारिश से फसलों को हुए नुकसान पर जिलाधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए और किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए।
सीएम योगी ने अधिकारियों को अलर्ट मोड में रहने को कहा और स्पष्ट किया कि मौसम की मार झेल रहे किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि राजस्व, कृषि विभाग और बीमा कंपनियां मिलकर फसल नुकसान का तत्काल संयुक्त सर्वे करें। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाए, ताकि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा मिल सके।
उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी संवेदनशीलता के साथ कार्य करें और सुनिश्चित करें कि किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो। साथ ही फील्ड में जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करने के निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव (कृषि) और राहत आयुक्त को निर्देश दिया कि वे फील्ड अधिकारियों के साथ सीधा संपर्क बनाए रखें और सभी सूचनाएं समय पर एकत्र कर शासन तक पहुंचाएं, जिससे राहत कार्यों में तेजी लाई जा सके।
सीएम योगी ने कहा कि जैसे ही फसल नुकसान का आकलन पूरा हो, मुआवजा वितरण की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए। भुगतान समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को जल्द राहत मिल सके।

प्रीमियम फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी; सामान्य पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर

02-Apr-2026
नई दिल्ली।  शोर संदेश ) सरकारी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) ने राष्ट्रीय राजधानी में अपने प्रीमियम फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। एक्सपी 100 पेट्रोल की कीमत अब 160 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जो पहले 149 रुपए थी। यह हाई-ऑक्टेन फ्यूल मुख्य रूप से लग्जरी कारों और हाई-परफॉर्मेंस मोटरसाइकिलों में इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इंजन की क्षमता बेहतर होती है।
इसी तरह कंपनी ने एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल (प्रीमियम डीजल) की कीमत भी बढ़ा दी है। अब दिल्ली में इसकी कीमत 92.99 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जो पहले 91.49 रुपए थी। हालांकि, सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद, भारत के प्रमुख शहरों में ईंधन के दाम स्थिर बने हुए हैं।
तेल कंपनियों ने ऑटो फ्यूल की कीमतों को स्थिर रखा है, जबकि अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के दाम में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अभी भी 94.72 रुपए प्रति लीटर है, जबकि डीजल 87.62 रुपए प्रति लीटर पर बिक रहा है। वहीं मुंबई में पेट्रोल 103.44 रुपए और डीजल 89.97 रुपए प्रति लीटर है।
इस बीच, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 195.50 रुपए की बढ़ोतरी की गई है, जबकि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमत दोगुने से ज्यादा बढ़कर 2 लाख रुपए प्रति किलोलीटर के पार पहुंच गई हैं। वैश्विक स्तर पर, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिकी सेना अगले तीन हफ्तों में ईरान पर हमले रोक सकती है, जिससे तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके प्रमुख लोगों को निशाना बनाया जाता रहा, तो वह अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर सकता है। इससे क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है। वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव, खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति, के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं।
 

आठवें वेतन आयोग के सदस्य मुख्य मुद्दों पर सरकारी कर्मचारियों से मुलाकात करेंगे

02-Apr-2026
नई दिल्ली।  शोर संदेश आठवें वेतन आयोग प्रस्तावित वेतन वृद्धि से जुड़े मुख्य मुद्दों पर बातचीत के लिए जल्द सरकारी कर्मचारियों और वेतनभोगियों से मुलाकात करेगा। 24 अप्रैल को देहरादून में एक महत्वपूर्ण बैठक निर्धारित है, जिसमें कर्मचारी संघों, पेंशनभोगी संघों और अन्य पक्षकारों के प्रतिनिधि वेतन संरचना, भत्ते और पेंशन संबंधी मुद्दों पर अपने विचार 8वें वेतन आयोग के सदस्यों के सामने रखेंगे।
आयोग के सदस्य कर्मचारियों और वेतनभोगियों की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों का दौरा करेंगे और इसी तरह की बैठकें आयोजित करेंगे। इन बैठकों से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर आयोग यह तय करेगा कि भविष्य में वेतन, पेंशन और लाभों में कितना संशोधन किया जाना चाहिए। आयोग ने कहा कि यदि कोई समूह अपने विचार साझा करना चाहता है, तो उन्हें मिलने के लिए पहले समय का अनुरोध करना होगा।
30 मार्च को जारी नोटिस में लिखा था, “आठवें वेतन आयोग का एक दल 24 अप्रैल को देहरादून, उत्तराखंड का दौरा करेगा। केंद्र सरकार के संगठनों/संस्थानों और संघों/संगठनों सहित इच्छुक पक्षकार, जो देहरादून में आयोग के साथ बातचीत करना चाहते हैं, कृपया 10 अप्रैल या उससे पहले समय का अनुरोध प्रस्तुत करें।”
इसके बाद, आयोग चयनित प्रतिभागियों को बैठक के सटीक स्थान और समय के बारे में सूचित करेगा। बयान में कहा गया है, “स्थान का विवरण और बैठक का कार्यक्रम बाद में सूचित किया जाएगा।”
आठवें वेतन आयोग की बैठक में भाग लेने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति को 10 अप्रैल तक ईमेल द्वारा अनुरोध भेजना होगा। केवल इस समय सीमा से पहले आवेदन करने वालों पर ही बैठक के लिए विचार किया जाएगा।
इसके बाद, आयोग अनुरोधों की समीक्षा करेगा और चयनित प्रतिभागियों को सटीक स्थान और समय के बारे में सूचित करेगा। प्रक्रिया से संबंधित सभी आधिकारिक विवरण और अपडेट आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
कर्मचारी संघ, पेंशनभोगी संघ, संगठन और यहां तक ​​कि व्यक्ति भी वेतन, भत्ते, पेंशन और अन्य सेवा-संबंधी मुद्दों पर अपने विचार भेज सकते हैं। आयोग ने एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया है जहां लोग 30 अप्रैल तक ज्ञापन के रूप में अपने सुझाव प्रस्तुत कर सकते हैं। इन सुझावों को भेजने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल है। इसके बाद, आयोग अपनी सिफारिशें तैयार करने से पहले बैठकों और लिखित प्रस्तुतियों से प्राप्त सभी प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करेगा।
1.1 करोड़ से अधिक केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी 8वें वेतन आयोग के त्वरित कार्यान्वयन के संकेत की प्रतीक्षा कर रहे हैं। आयोग को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 18 महीने की समय सीमा दी गई है। 

 


उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने ‘टाइड्स ऑफ टाइम’ पुस्तक का विमोचन किया

02-Apr-2026
नई दिल्ली।  शोर संदेश उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बुधवार को यहां संविधान सदन में राज्यसभा सदस्य सुधा मूर्ति द्वारा लिखित पुस्तक ‘टाइड्स ऑफ टाइम: संसद में भित्तिचित्रों के माध्यम से भारत का इतिहास’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने संसद में बने भित्ति चित्रों को भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत का जीवंत प्रतिबिंब बताया और भारत को “लोकतंत्र की जननी” कहा।
उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति राधाकृष्णन ने कहा कि संविधान सदन में स्थापित भित्ति चित्र केवल कला कृतियां नहीं हैं, बल्कि वे भारत की हजारों वर्षों पुरानी सभ्यतागत यात्रा को दर्शाने वाली दृश्य कथाएं हैं। उन्होंने लेखिका सुधा मूर्ति की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने इन चित्रों की “कालातीत सुंदरता और गहरे प्रतीकवाद” को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है, जिससे इतिहास को नई पीढ़ियों के करीब लाने में मदद मिलेगी।
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत में लोकतांत्रिक परंपराएं प्राचीन काल से ही निरंतर, समावेशी और समाज की जड़ों में गहराई तक समाई रही हैं। उन्होंने वैशाली से लेकर दक्षिण भारत की कुदावोलै प्रणाली तक के उदाहरण देते हुए कहा कि संवाद, सहमति और विविध विचारों के सम्मान की परंपरा भारत को “लोकतंत्र की जननी” बनाती है।
उन्होंने तमिल कवि सुब्रमण्यम भारती का उल्लेख करते हुए भारत की ज्ञान, उदारता और सांस्कृतिक समृद्धि की प्रशंसा की और कहा कि यही आधार देश में समावेशिता और सभी विचारों के सम्मान को मजबूती देता है।
उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में संसद भवन में पारंपरिक प्रतीकों के समावेश की भी सराहना की। उन्होंने राष्ट्रपति के संयुक्त सत्र संबोधन के दौरान चोल वंश के पवित्र ‘सेंगोल’ के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए इसे आधुनिक भारत और उसकी सभ्यतागत जड़ों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया।
उन्होंने कहा कि संसद एक जीवंत लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों संवाद, बहस, असहमति और चर्चा का प्रतिनिधित्व करती है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये सभी प्रक्रियाएं अंततः राष्ट्रीय हित में रचनात्मक निर्णय लेने की दिशा में होनी चाहिए।
पुस्तक की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह 124 भित्ति चित्रों के माध्यम से भारत के इतिहास को जीवंत करती है। इसमें सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर महर्षि वाल्मीकि, चाणक्य, महावीर और गौतम बुद्ध जैसे महान व्यक्तित्वों की शिक्षाओं तक का विस्तृत वर्णन है।
उन्होंने कहा कि पुस्तक में सम्राट अशोक और छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे शासकों की उपलब्धियों के साथ-साथ कोणार्क सूर्य मंदिर जैसी सांस्कृतिक धरोहरों और भक्ति आंदोलन का भी उल्लेख है। इसके अलावा स्वतंत्रता संग्राम, दांडी मार्च और महात्मा गांधी व सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं के योगदान को भी इसमें स्थान दिया गया है।
उपराष्ट्रपति ने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य का जिक्र करते हुए “विकास भी, विरासत भी” के सिद्धांत को दोहराया और कहा कि प्रगति और परंपरा एक-दूसरे के पूरक हैं। संसद के भित्ति चित्र इसी सोच को साकार रूप देते हैं।
सुधा मूर्ति की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि वे ज्ञान, विनम्रता और सामाजिक प्रतिबद्धता का अद्वितीय उदाहरण हैं। उन्होंने उनके कॉर्पोरेट जगत से सामाजिक सेवा और संसद तक के सफर को प्रेरणादायक बताया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भाषा, क्षेत्र और संस्कृति की विविधता के बावजूद भारत सदैव एक था और एक रहेगा। उन्होंने नागरिकों से “राष्ट्र प्रथम” की भावना अपनाने और समर्पण, ईमानदारी तथा गर्व के साथ देशसेवा करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और मनोहर लाल, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, लेखिका एवं राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति सहित कई सांसद और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। 

भारत में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में तेज़ी, 2026 में डेटा सेंटर क्षमता 30% बढ़ने की उम्मीद

02-Apr-2026
नई दिल्ली। शोर संदेश भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2026 में सालाना आधार पर 30 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। इसकी वजह मजबूत मांग और इस सेक्टर में निवेशकों की रुचि बने रहना है। यह जानकारी बुधवार को जारी रिपोर्ट में दी गई। सीबीआरई के विश्लेषण के अनुसार, इस वर्ष लगभग 500 मेगावाट के नई डेटा सेंटर क्षमता जोड़े जाने का अनुमान है, जो 2025 में जोड़ी गई रिकॉर्ड 440 मेगावाट की क्षमता से अधिक है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक घरेलू डेटा सेंटर की कुल क्षमता लगभग 1,700 मेगावाट थी।इस सेक्टर ने नई पूंजी भी आकर्षित की है और 2025 में 56.4 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धताएं हासिल की हैं, जिससे कुल निवेश प्रतिबद्धताएं 126 अरब डॉलर तक पहुंच गई हैं। इन प्रतिबद्धताओं में इस वर्ष लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे यह राशि संभावित रूप से 180 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है।
सीबीआरई के अध्यक्ष और सीईओ अंशुमन मैगजीन ने कहा, “भारत में डेटा सेंटर की कहानी अब संभावनाओं के बारे में नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन के बारे में है।” उन्होंने आगे कहा कि विकास को गति देने में विदेशी पूंजी की प्रमुख भूमिका बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख राज्य निवेश में अग्रणी भूमिका निभाएंगे, हालांकि कम लेटेंसी, 5जी रोलआउट और डेटा स्थानीयकरण की बढ़ती मांग के कारण अहमदाबाद, विशाखापट्टनम, पटना और भोपाल सहित टियर-II शहरों में भी गतिविधि तेजी से फैल रही है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मुंबई सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है – भारत के कुल चालू डेटा सेंटरों में से 50 प्रतिशत से अधिक मुंबई में स्थित हैं। मुंबई, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु मिलकर कुल क्षमता का लगभग 90 प्रतिशत योगदान करते हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग से बढ़ती मांग के कारण बिजली के बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे ऑपरेटर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
भारत ने 2025 में रिकॉर्ड 44.5 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी। सीबीआरई के अनुसार, कर प्रोत्साहन, हरित पूंजीगत व्यय समर्थन और नियामकीय सरलीकरण सहित सहायक सरकारी नीतियों से निवेश में और तेजी आने और भारत के एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख डेटा सेंटर केंद्र के रूप में स्थापित होने की उम्मीद है।
 

 



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