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इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मिला जबरदस्त समर्थन, 1.15 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव आए : अश्विनी वैष्णव

03-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को बताया कि सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को भारी समर्थन मिला है। इस योजना के तहत सरकार को 1.15 लाख करोड़ रुपए (1,15,351 करोड़) के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। यह स्कीम देश में इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों और कंपोनेंट्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई थी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि योजना की रूपरेखा तैयार करते समय जितना निवेश और रोजगार का लक्ष्य तय किया गया था, उससे कहीं अधिक प्रस्ताव सरकार के पास आए हैं। वैष्णव ने बताया कि इस योजना की एप्लीकेशन विंडो 30 सितंबर को बंद हो गई थी और अब तक मिले निवेश प्रस्ताव अनुमान से कई गुना ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने लगभग 59,000 करोड़ रुपए निवेश मिलने का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक प्रस्ताव इससे कहीं अधिक आए हैं। हालांकि कैपिटल इक्विपमेंट सेगमेंट के लिए एप्लीकेशन विंडो अभी भी खुली है।
मार्च 2025 में केंद्रीय कैबिनेट ने इस योजना को 22,919 करोड़ रुपए के बजट के साथ छह वर्षों के लिए मंजूरी दी थी। इस स्कीम का उद्देश्य-भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना, घरेलू मूल्य संवर्धन (DAV) बढ़ाना और भारतीय कंपनियों को ग्लोबल वैल्यू चेन (GVC) से जोड़ना है। सरकार ने इस योजना के तहत अनुमान लगाया था कि लगभग 59,350 करोड़ रुपए का निवेश, 4,56,500 करोड़ रुपए का उत्पादन, और करीब 91,600 प्रत्यक्ष रोजगार के साथ बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी। वहीं, कंपनियों ने अब तक दिए प्रस्तावों में 1.41 लाख रोजगार देने की प्रतिबद्धता जताई है, जो सरकार के शुरुआती लक्ष्य से कहीं ज्यादा है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी सचिव एस. कृष्णन ने भी पुष्टि की कि कंपनियों ने रोजगार सृजन के मामले में अपेक्षाओं से अधिक रुचि दिखाई है। उनका कहना था कि यह योजना भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाएगी और ‘मेक इन इंडिया’ के विजन को नई गति देगी।

सरकार ने ई-कचरे और कबाड़ की बिक्री से कमाए 3,296.71 करोड़ रुपए : डॉ. जितेंद्र सिंह

03-Oct-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )  केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने ई-कचरे और कबाड़ की बिक्री से 3,296.71 करोड़ रुपए की कमाई की है। पिछले चार वर्षों में सरकार ने 696.27 लाख वर्ग फुट से अधिक कार्यालय स्थान को साफ करके दोबारा इस्तेमाल में लाया है। यह जानकारी उन्होंने नई दिल्ली के नेहरू पार्क में “विशेष स्वच्छता अभियान 5.0” के शुभारंभ समारोह में दी।
डॉ. सिंह ने कहा कि इस अभियान ने शासन और सार्वजनिक सेवाओं में बड़ा बदलाव लाया है। उन्होंने बताया कि इसके पिछले चरणों में 137.86 लाख से ज्यादा पुरानी फाइलों को नष्ट किया गया और देश भर में 12.04 लाख से अधिक जगहों की सफाई की गई। उन्होंने प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) तथा अन्य विभागों की सक्रिय भूमिका की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने श्रमदान किया, “एक पेड़ मां के नाम” पहल के तहत वृक्षारोपण किया और पुरानी फाइलों की सफाई में हिस्सा लिया। उन्होंने स्वच्छता अभियान को स्वतंत्र भारत की “एक बड़ी सफलता की कहानी” बताते हुए कहा कि 2 अक्टूबर से शुरू हो रहा यह नया चरण स्वच्छता को संस्थागत बनाने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और सरकारी कार्यालयों की कार्यक्षमता बढ़ाने पर केंद्रित है।
डॉ. सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लाल किले से पीएम के आह्वान ने स्वच्छता को एक जन आंदोलन बना दिया है, जिसे देशभर में लोगों ने अपनाया है। उन्होंने सफाई मित्रों को सुरक्षा किट और मिठाई वितरित करके सम्मानित किया और उनकी अहम भूमिका को स्वीकार किया।
उन्होंने आगे बताया कि इस चरण के लिए मंत्रालयों और विभागों ने पहले ही महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। इनमें 6.9 लाख जन शिकायतों की समीक्षा, 26.9 लाख से अधिक भौतिक फाइलों का निपटान और 5.2 लाख ई-फाइलों की समीक्षा शामिल है।
डॉ. सिंह ने यह भी घोषणा की कि भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार 10 अक्टूबर को “सुशासन और अभिलेख” नामक प्रदर्शनी आयोजित करेगा, जिसमें पुराने विशेष अभियानों के दौरान मिले ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रदर्शित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विशेष अभियान 5.0 सरकार की पारदर्शिता, दक्षता और जनभागीदारी के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराता है और महात्मा गांधी की स्वच्छता तथा नागरिक जिम्मेदारी की प्रेरणा को आगे बढ़ाता है।
 

आरएसएस के शताब्दी समारोह में पीएम मोदी ने कहा– ‘संघ की 100 वर्षों की यात्रा त्याग, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की मिसाल’

02-Oct-2025
नई दिल्ली।  शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। समारोह को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा को त्याग, निःस्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण की अद्भुत मिसाल बताया। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि आरएसएस के शताब्दी समारोह का हिस्सा बनकर अत्यंत गौरवान्वित अनुभव कर रहा हूं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अपने गठन के बाद से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राष्ट्र निर्माण का विराट उद्देश्य लेकर चल रहा है। संघ ने व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण का रास्ता चुना। इस रास्ते पर सतत चलने के लिए नित्य और नियमित चलने वाली शाखा के रूप में कार्य पद्धति को चुना।
उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार जानते थे कि हमारा राष्ट्र तभी सशक्त होगा, जब हर व्यक्ति के भीतर राष्ट्र के प्रति दायित्व का बोध जागृत होगा। हमारा राष्ट्र तभी ऊंचा उठेगा, जब भारत का हर नागरिक राष्ट्र के लिए जीना सीखेगा। इसलिए वे व्यक्ति निर्माण में निरंतर जुड़े रहे। उनका तरीका अलग था। हमने बार-बार सुना है कि डॉ. हेडगेवार जी कहते थे कि जैसा है, वैसा लेना है। जैसा चाहिए, वैसा बनाना है।
उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “लोग संग्रह का उनका यह तरीका अगर समझना है तो हम कुम्हार को याद करते हैं। जैसे कुम्हार ईंट पकाता है तो जमीन की सामान्य-सी मिट्टी से शुरू करता है। वह मिट्टी लाता है और उस पर मेहनत करता है। उसे आकार देकर तपाता है। खुद भी तपता है और मिट्टी को भी तपाता है। फिर उन ईंटों को इकट्ठा करके भव्य इमारत बनाता है। ऐसे ही डॉ. हेडगेवार बहुत ही सामान्य लोगों को चुनते थे। फिर उन्हें सिखाते थे, विजन देते थे और उन्हें गढ़ते थे। इस तरह वे देश को समर्पित स्वयंसेवक तैयार करते थे।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संघ के बारे में कहा जाता है कि इसमें सामान्य लोग मिलकर असामान्य अभूतपूर्व कार्य करते हैं। व्यक्ति निर्माण की यह सुंदर प्रक्रिया आज भी हम संघ की शाखाओं में देखते हैं।
पीएम मोदी ने कहा, “संघ शाखा का मैदान एक ऐसी प्रेरणा भूमि है, जहां से स्वयंसेवक की ‘अहम् और वहम’ की यात्रा शुरू होती है। संघ की शाखाएं व्यक्ति निर्माण की यज्ञ वेदी हैं। उन शाखाओं में व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास होता है। स्वयंसेवकों के मन में राष्ट्र सेवा का भाव और साहस दिन प्रतिदिन पनपता रहता है।”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि स्वयंसेवकों के लिए त्याग और समर्पण सहज हो जाता है। श्रेय के लिए प्रतिस्पर्धा की भावना समाप्त हो जाती है। उन्हें सामूहिक निर्णय और सामूहिक कार्य का संस्कार मिलता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण का महान उद्देश्य, व्यक्ति निर्माण का स्पष्ट पथ और शाखा जैसी सरल व जीवंत कार्य पद्धति यही संघ की 100 वर्ष की यात्रा का आधार बनी हैं।
 

फिलीपींस में 6.7 तीव्रता के भूकंप ने मचाई भारी तबाही, 19 की मौत, कई शहरों की बिजली गुल

02-Oct-2025
नई दिल्ली। शोर संदेश ) फिलीपींस में भूकंप ने भारी तबाही मचा दी है। स्थानीय मीडिया ने बुधवार को बताया कि मध्य फिलीपींस के सेबू प्रांत में कल मंगलवार रात 6.9 तीव्रता के भूकंप से धरती हिली। इस घटना में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए।
वहीं, स्थानीय न्यूज पेपर सनस्टार सेबू ने प्रांतीय सूचना कार्यालय के हवाले से बताया कि भूकंप के केंद्र बोगो शहर में 13 लोग मारे गए, जबकि उत्तरी सेबू के सैन रेमिगियो शहर में चार अन्य की मौत हो गई।
सेबू के मेडेलिन नगरपालिका ने कम से कम एक व्यक्ति की मौत और कई लोगों के घायल होने की सूचना दी है, साथ ही दो पुलों को भी नुकसान पहुंचा। सनस्टार सेबू ने आगे बताया कि भूकंप के पीड़ितों का सेबू प्रांतीय अस्पताल (बोगो शहर) में आना जारी है। इसकी वजह से अस्पताल के मेडिकल स्टाफ की परेशानी भी बढ़ गई।
फिलीपींस के ज्वालामुखी और भूकंप विज्ञान संस्थान ने बताया कि स्थानीय समयानुसार मंगलवार को रात 9:59 बजे सेबू प्रांत में 6.7 तीव्रता का भूकंप आया। संस्थान ने बाद में तीव्रता को संशोधित कर 6.9 कर दिया और बताया कि भूकंप बोगो शहर से लगभग 19 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में, 5 किलोमीटर की गहराई पर आया।
भूकंप का झटका मध्य फिलीपींस के कई पड़ोसी प्रांतों के साथ-साथ दक्षिणी फिलीपींस के कुछ क्षेत्रों में भी महसूस किया गया। कई गांवों की सड़कों को भी नुकसान पहुंचा। भूकंप के कारण बिजली की लाइनें टूट गईं, जिससे सेबू और आसपास के मध्य द्वीपों में बिजली गुल हो गई। हालांकि, फिलीपींस के राष्ट्रीय ग्रिड निगम ने एक अपडेट में कहा कि सेबू और चार अन्य प्रमुख मध्य द्वीपों में आधी रात के तुरंत बाद बिजली बहाल कर दी गई।
फिलीपींस प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” पर स्थित है, जो भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधि के लिए संवेदनशील क्षेत्र है।

भारतीय रेलवे में तकनीकी बदलाव का युग : मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन से सफर होगा तेज, सुरक्षित और आरामदायक

02-Oct-2025
नई दिल्ली। शोर संदेश  मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन भारतीय रेल इतिहास में जल्द ही एक तकनीकी बदलाव के युग का शुरुआत करेगी। जिसमें नवीनतम हाई-स्पीड रेल तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जो एक सुरक्षित, आरामदायक और कुशल रेल यात्रा अनुभव को सुनिश्चित करेगी। ये ट्रेनें 320 किमी/घंटा तक की गति से चल सकेंगी, जिससे मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा में लगने वाले समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। भारत की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-सूरत यात्रा का समय घटाकर केवल 60 मिनट कर देगी। वर्तमान में, मुंबई और सूरत के बीच सबसे तेज ट्रेन 12951 नई दिल्ली तेजस राजधानी एक्सप्रेस है, जो 2 घंटे 43 मिनट का समय लेती है, हलांकि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव कहते हैं “इस तरह आप सूरत से लगभग एक घंटे में मुंबई जा सकते हैं, अपना काम निपटा सकते हैं और वापस आकर अपने परिवार के साथ समय बिता सकते हैं।” यह परियोजना मुंबई और अहमदाबाद के बीच हवाई यात्रा पर निर्भरता को भी कम करेगी, जो हवाई अड्डों पर भीड़भाड़ में योगदान करती है और इसकी पर्यावरणीय लागत भी अधिक होती है।
बुलेट ट्रेन यात्रियों के लिए एक अधिक किफायती और टिकाऊ विकल्प प्रदान करेगी, जिससे परिवहन से होने वाले उत्सर्जन में समग्र कमी आएगी। यह ट्रेन विद्युत कर्षण द्वारा संचालित होगी और बुलेट ट्रेनों में प्रयुक्त तकनीक यह सुनिश्चित करेगी कि ये न केवल तेज हों, बल्कि अत्यधिक ऊर्जा-कुशल भी हों। सुचारू संचालन और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्रेन प्रणाली अत्याधुनिक सिग्नलिंग और संचार तकनीकों से पूरी तरह एकीकृत होगी। इसके अलावा, ट्रेनें उन्नत सुरक्षा उपायों से लैस भी होंगी। पर्यावरणीय लाभ में बुलेट ट्रेन से पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। ट्रेनें, विशेष रूप से उच्च गति के लिए डिजाइन की गई, कारों और विमानों की तुलना में अधिक ऊर्जा-कुशल होती हैं। परिवहन के एक से अधिक टिकाऊ रूप की ओर यह बदलाव देश के परिवहन नेटवर्क के समग्र कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में योगदान देगा।
इसके अलावा, जैसे-जैसे परियोजना आगे बढ़ेगी, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करते हुए, ट्रेनों को ऊर्जा-कुशल बनाने पर अधिक जोर दिया जाएगा। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसकी व्यापक आर्थिक वृद्धि लाने की क्षमता है। परिवहन के एक उच्च-गति साधन के रूप में, बुलेट ट्रेन सड़कों और मौजूदा रेल नेटवर्क पर भीड़भाड़ को कम करेगी। यह कॉरिडोर गतिशीलता को बढ़ाएगा, निवेश आकर्षित करेगा और इससे जुड़े क्षेत्रों में व्यापार के नए अवसर खुलेंगे। दोनों शहरों के बीच यात्रा समय में कमी से विनिर्माण, खुदरा और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का मानना है कि मुम्बई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा। “यह वास्तव में एक बहुत ही महत्वपूर्ण परियोजना है। मुंबई, ठाणे, वापी, सूरत, बड़ौदा, आणंद और अहमदाबाद सहित सभी प्रमुख शहरों की अर्थव्यवस्थाएं एक ही अर्थव्यवस्था बन जाएंगी। इसलिए क्षेत्रीय विकास में भारी वृद्धि होगी।”
गौरतलब है कि 508 किलोमीटर लंबा मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (एमएएचएसआर) कॉरिडोर गुजरात, महाराष्ट्र और केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली से होकर गुजरता है। अहमदाबाद बुलेट ट्रेन पहल लोगों की यात्रा के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी, जो देश के दो सबसे जीवंत शहरों के बीच बेजोड़ गति, सुविधा और दक्षता प्रदान करेगी। उच्च गति कनेक्टिविटी पर केंद्रित डिजाइन के साथ, यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल यात्रा के समय को न केवल काफी हद तक कम करेगी, बल्कि व्यापारिक संपर्क और क्षेत्रीय वाणिज्य को बढ़ाकर आर्थिक समृद्धि को भी बढ़ावा देगी। अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके, बुलेट ट्रेन मौजूदा परिवहन नेटवर्क पर दबाव को कम करने का वादा करती है, साथ ही हवाई और सड़क यात्रा का एक टिकाऊ, पर्यावरण के अनुकूल विकल्प प्रदान करती है। मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर भारत भर में भविष्य की उच्च गति वाली रेल परियोजनाओं के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा, जिससे देश आधुनिक परिवहन बुनियादी ढांचे में वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित होगा और साथ ही एक हरित, अधिक परस्पर जुड़े भविष्य का मार्ग प्रशस्त होगा।

फिलीपींस में 6.9 तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही, पीएम मोदी ने जताया शोक

02-Oct-2025
नई दिल्ली।  शोर संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को फिलीपींस में आए शक्तिशाली भूकंप में जान गंवाने वालों के प्रति गहरा दुख जताया और भारत की एकजुटता का संदेश दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि “फिलीपींस में आए भूकंप से जानमाल के नुकसान की खबर से गहरा दुख हुआ है। मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। भारत इस कठिन समय में फिलीपींस के साथ खड़ा है।” यह भूकंप मंगलवार देर रात फिलीपींस के केंद्रीय हिस्से में सेबू द्वीप के तट पर आया, जिसकी तीव्रता 6.9 दर्ज की गई और गहराई लगभग 10 किलोमीटर थी। वहीं बुधवार सुबह तक मौतों की संख्या बढ़कर 69 हो गई। फिलीपींस की क्षेत्रीय सिविल डिफेंस अधिकारी जेन अबापो ने बताया कि यह आंकड़ा स्थानीय आपदा एजेंसी के डाटा पर आधारित है और अभी सत्यापन जारी है। अधिकारियों के अनुसार यह पिछले एक दशक में देश में आया सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक है।
भूकंप के कारण कई इमारतें ढह गईं, बिजली आपूर्ति बाधित हुई और लोग अपने घरों से बाहर निकलने पर मजबूर हो गए। बोगो सिटी के अस्पताल में घायलों की भारी संख्या के कारण हालात बिगड़ गए, जिसके बाद तटरक्षक बलों ने डॉक्टरों और नर्सों की टीम तुरंत भेजी। राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर राहत और बचाव का आश्वासन दिया और कहा कि “हम नुकसान और ज़रूरतों का आकलन कर रहे हैं, राहत कार्यों में तेजी लाई जाएगी।” फिलीपींस के भूकंप विज्ञान संस्थान (Phivolcs) ने बताया कि अब तक करीब 800 आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए हैं, जिनमें से सबसे शक्तिशाली की तीव्रता 6 रही। हालांकि सुनामी का कोई खतरा नहीं है। प्रभावित इलाकों में लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
भूकंप में 100 साल पुराना एक चर्च भी ढह गया। सेबू द्वीप, जो फिलीपींस का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और लगभग 34 लाख लोगों का घर है, सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। हालांकि मकटान-सेबू अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा, जो देश का दूसरा सबसे व्यस्त हवाईअड्डा है, चालू रहा। फिलीपींस प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” क्षेत्र में स्थित है, जहां ज्वालामुखी और भूकंप अक्सर आते रहते हैं। इस साल जनवरी में दो बड़े भूकंप आए थे लेकिन उनमें कोई हताहत नहीं हुआ था। 2023 में 6.7 तीव्रता का समुद्री भूकंप आठ लोगों की मौत का कारण बना था। सरकार और राहत एजेंसियां अभी भी मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिश कर रही हैं और बचाव कार्यों में तेजी लाई जा रही है।

 


प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में BRCP फेज III को हरी झंडी, 12 साल का रोडमैप तैयार

02-Oct-2025
नई दिल्ली। शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट ने बायोमेडिकल रिसर्च करियर प्रोग्राम (BRCP) के तीसरे चरण (फेज III) को मंजूरी दे दी है। यह चरण 2025-26 से 2030-31 तक लागू होगा, और इसके बाद 2031-32 से 2037-38 तक जारी रखने के प्रस्ताव हैं, जिससे कुल 12 वर्षों में इस कार्यक्रम का संचालन होगा। इसका कुल लागत अनुमान 1,500 करोड़ रुपये है, जिसमें विभाग ऑफ़ बायोटेक्नोलॉजी (DBT) 1,000 करोड़ और यूनाइटेड किंगडम की वेलकम ट्रस्ट (WT) 500 करोड़ रुपये का योगदान देगा।
फेज III का उद्देश्य भारत में उच्च स्तरीय बायोमेडिकल रिसर्च के लिए बेहतरीन वैज्ञानिक प्रतिभा को विकसित करना, अंतर-विषयक शोध को बढ़ावा देना, और गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए सिस्टम को मजबूत करना है। यह चरण देश में वैज्ञानिक क्षमता के क्षेत्रीय अंतर को कम करने और वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालने वाली बायोमेडिकल रिसर्च को सशक्त बनाने पर केंद्रित होगा।
BRCP की शुरुआत DBT और Wellcome Trust, UK के साझेदारी में 2008-09 में हुई थी। इस कार्यक्रम ने भारत में विश्व स्तरीय बायोमेडिकल शोध के लिए शोध फेलोशिप और ग्रांट प्रदान की। इसके बाद, फेज II को 2018-19 में और अधिक विस्तार के साथ लागू किया गया था।
अर्ली करियर और इंटरमीडिएट रिसर्च फेलोशिप्स — बुनियादी, क्लिनिकल और पब्लिक हेल्थ रिसर्च के लिए, जो वैज्ञानिक करियर के प्रारंभिक चरणों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक की सुविधाएं प्रदान करेंगी।
कोलैबोरेटिव ग्रांट्स प्रोग्राम — इसमें करियर डेवलपमेंट ग्रांट्स और कैटालिटिक कोलैबोरेटिव ग्रांट्स शामिल हैं, जो मजबूत शोध रिकॉर्ड वाले भारतीय शोधकर्ताओं की टीमों के लिए होंगे।
फेज III में मेंटरशिप, नेटवर्किंग, जनसंवाद और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इस कार्यक्रम से 2,000 से अधिक छात्रों और पोस्टडॉक्टोरल फेलो को प्रशिक्षण मिलेगा, उच्च प्रभाव वाले शोध प्रकाशनों का निर्माण होगा, पेटेंट योग्य खोजें संभव होंगी, और महिलाओं के समर्थन में 10-15% वृद्धि होगी। साथ ही, 25-30% सहयोगी कार्यक्रम TRL4 और उससे ऊपर की स्थिति तक पहुंचेंगे।
फेज I और II ने भारत को बायोमेडिकल विज्ञान के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित किया है। फेज III इस दिशा में एक नई रणनीतिक पहल है, जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रतिभा, क्षमता और अनुवाद पर निवेश करेगी।

एनसीआरबी रिपोर्ट में यूपी में सांप्रदायिक दंगे शून्य, कानून-व्यवस्था बनी मिसाल

02-Oct-2025
नई दिल्ली। शोर संदेश राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ‘क्राइम इन इंडिया 2023’ रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति की तारीफ की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में यूपी में सांप्रदायिक और धार्मिक दंगों की संख्या शून्य रही। यह योगी आदित्यनाथ सरकार की 2017 से लागू जीरो टॉलरेंस नीति का परिणाम है। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में अपराध दर राष्ट्रीय औसत से 25 प्रतिशत कम रही। देश में कुल अपराध दर 448.3 थी, जबकि यूपी में यह केवल 335.3 दर्ज की गई। इससे स्पष्ट होता है कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश शांति और सामाजिक सद्भाव का गढ़ बन चुका है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2012-2017 के बीच यूपी में 815 दंगे हुए थे, जिनमें 192 लोग मारे गए। वहीं 2007-2011 में 616 घटनाओं में 121 मौतें हुईं। इसके विपरीत, 2017 के बाद कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ। बरेली और बहराइच में हुई दो हिंसक घटनाओं को भी सरकार ने 24 घंटे के भीतर नियंत्रित कर शांति बहाल कर दी।
एनसीआरबी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूपी में विभिन्न अपराधों में राष्ट्रीय औसत से उल्लेखनीय कमी आई है। उदाहरण के लिए, बलवा के मामलों में देश में 39,260 मामले (क्राइम रेट 2.8) दर्ज हुए, जबकि यूपी में केवल 3,160 मामले (क्राइम रेट 1.3) रहे। फिरौती के लिए अपहरण के मामलों में भारत में 615 घटनाएं हुईं, जबकि यूपी में मात्र 16 मामले दर्ज हुए। डकैती के मामलों में भारत में 3,792 मामले (क्राइम रेट 0.3) थे, जबकि यूपी में केवल 73 मामले दर्ज हुए, जिससे राज्य को ‘नियर जीरो’ क्राइम रेट का दर्जा मिला।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त नीतियों, त्वरित कार्रवाई और पारदर्शी शासन के चलते यूपी में अपराधों पर काबू पाया गया है। एनसीआरबी की रिपोर्ट साबित करती है कि यूपी में शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मामले में यह सरकार देश के लिए मिसाल बन गई है। 

विजयादशमी की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशवासियों को दीं शुभकामनाएं, सत्य के मार्ग पर चलने का किया आह्वान

02-Oct-2025
नई दिल्ली।  शोर संदेश राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विजयादशमी की पूर्व संध्या पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि विजयादशमी अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की जीत का पर्व है, जो भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय मूल्यों की गहरी झलक पेश करता है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह पर्व लोगों को सकारात्मकता अपनाने और समाज में प्रेम, भाईचारे तथा करुणा की भावना बढ़ाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने इस अवसर पर सभी नागरिकों से एकजुट होकर देश और समाज के लिए काम करने का आह्वान किया।
देशभर में नवरात्रि का पर्व उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है और अब लोग विजयादशमी की तैयारियों में जुटे हैं। उत्तर भारत में यह पर्व भगवान राम की रावण पर विजय की स्मृति में रावण दहन के रूप में मनाया जाता है, वहीं पूर्वी और दक्षिणी भारत में इसे दुर्गा पूजा के रूप में मां दुर्गा द्वारा महिषासुर वध की याद में मनाया जाता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि ये परंपराएं हमारे सांस्कृतिक वैविध्य और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करती हैं। उन्होंने कामना की कि विजयादशमी का यह पर्व देशवासियों को एक ऐसे समाज के निर्माण की दिशा में प्रेरित करे, जहां न्याय, समानता और सद्भाव सर्वोपरि हों।
इस वर्ष विजयादशमी का उत्सव 2 अक्टूबर को पूरे देश में मनाया जाएगा। दिल्ली, लखनऊ, अयोध्या समेत कई शहरों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन होगा, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

दिल्ली के विकास और पार्टी के सुशासन में वीके मल्होत्रा का योगदान अविस्मरणीय: पीएम मोदी

01-Oct-2025
नई दिल्ली ।( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली भाजपा के पहले अध्यक्ष प्रोफेसर विजय कुमार मल्होत्रा के घर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। विजय कुमार मल्होत्रा का मंगलवार सुबह निधन हो गया है। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।पीएम मोदी ने वीके मल्होत्रा को याद करते हुए कहा कि दिल्ली के विकास और हमारी पार्टी के सुशासन के एजेंडे को आगे बढ़ाने में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फोटो शेयर करते हुए लिखा, ”वीके. मल्होत्रा के आवास पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके परिवार के प्रति संवेदना भी व्यक्त की। दिल्ली के विकास और हमारी पार्टी के सुशासन के एजेंडे को आगे बढ़ाने में उनके योगदान को सदैव याद रखा जाएगा।”
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने वीके मल्होत्रा के निधन पर दुख जाहिर करते हुए एक्स पर लिखा,” विजय कुमार मल्होत्रा ने एक उत्कृष्ट नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई, उन्हें जनमानस से जुड़े मुद्दों की बहुत अच्छी समझ थी। उन्होंने दिल्ली में हमारी पार्टी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। संसदीय मामलों में उन्हें अपने कार्यकलापों के लिए भी याद किया जाएगा। उनके निधन से दुख पहुंचा है। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना।”
दिल्ली से 5 बार सांसद और 2 बार विधायक रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार मल्होत्रा का मंगलवार को निधन हो गया। भाजपा के दिग्गज नेताओं में शुमार विजय कुमार मल्होत्रा अपनी मजबूत छवि के लिए जाने जाते थे।
विजय कुमार मल्होत्रा की शख्सियत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनने से पहले 1999 के लोकसभा चुनाव में भारी मतों से हराया था। भारतीय राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल विजय कुमार मल्होत्रा ने 9वीं और 14वीं लोकसभा में दिल्ली सदर और दक्षिण दिल्ली निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया। 82 साल की उम्र में भी मोदी सरकार द्वारा कोई पद न दिए जाने के बावजूद वीके मल्होत्रा ने दिल्ली के लिए भाजपा का चुनाव अभियान अध्यक्ष बनने की पेशकश की और सभी 7 सीटें दिलाकर भाजपा को शानदार जीत दिलाई।



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