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देश-विदेश

पूर्व मंत्री पीसी शर्मा को कांग्रेस ने दी बड़ी जिम्मेदारी, इस राज्य की सौंपी कमान

09-Sep-2024
भोपाल।  ( शोर संदेश ) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा को आने वाले दिनों में आयोजित महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी की ओर से बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। जालना संसदीय क्षेत्र के विधानसभा क्षेत्रों के लिए एआईसीसी पर्यवेक्षक की कमान सौंपी गई है। पार्टी से मिली इस जिम्मेदारी को लेकर उन्होंने शीर्ष नेतत्व का आभार व्यक्त किया है।
इस संबंध में पीसी शर्मा ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा, ‘अखिल भारतीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, नेता विपक्ष राहुल गांधी और संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए जालना लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के विधानसभा क्षेत्रों के लिए एआईसीसी पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया है। इस बड़ी ज़िम्मेदारी के लिए शीर्ष नेतृत्व का आभार और धन्यवाद। पूरा प्रयास रहेगा कि शीर्ष नेतृत्व की उम्मीदों पर खरा उतर सकूं। परिवर्तन का संकल्प ,कांग्रेस ही विकल्प।’
कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे पीसी शर्मा
गौरतलब है की पीसी शर्मा पूर्व की कमलनाथ सरकार में जनसंपर्क मंत्री रहे हैं। हालांकि, पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन वो प्रदेश के कद्दावर नेता माने जाते हैं। उन्होंने अबतक पार्टी में कई महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी निभाई है।
 

मुहम्मद यूनुस ने पाकिस्तान को दिया जोर का झटका

09-Sep-2024
ढाका। ( शोर संदेश )   बांग्लादेश भारत के साथ अच्छे संबंध चाहता है। ये संबंध न्यायसंगत और औचित्यपूर्ण होने चाहिए। यह बात बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने छात्रों के साथ मुलाकात में कही है छात्रों के आंदोलन के चलते ही पांच अगस्त को शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद और देश छोड़ना पड़ा था। इस समय वह भारत में हैं। यूनुस ने कहा कि भारत के साथ अच्छे संबंध रखना हमारी जरूरत है लेकिन ये संबंध न्यायसंगत होने चाहिए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश अपने पड़ोसी देशों से सम्मानजनक और न्यायपूर्ण तरीके से अच्छे संबंध रखना चाहता है।

कानपुर में कालिंदी एक्सप्रेस को उड़ाने की साजिश, पटरी पर रखे एलपीजी सिलेंडर से टकराई ट्रेन

09-Sep-2024
कानपुर।  ( शोर संदेश )  उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक महीने के अंदर ही एक और ट्रेन हादसे की साजिश सामने आई है. रविवार रात करीब 8.30 बजे प्रयागराज से भिवानी की ओर जा रही कालिंदी एक्सप्रेस रेलवे लाइन पर रखे भरे LPG सिलेंडर से टकरा गई. बीते 17 अगस्त की रात करीब 2.30 बजे साबरमती एक्सप्रेस के 22 डिब्बे पटरी से उतर गए थे. रेलवे ने इस हादसे में भी साजिश की बात कही थी.  
पुलिस की ओर से बताया गया है कि बीते 8 सितंबर की रात करीब 8.30 बजे अनवरगंज-कासगंज रेलवे लाइन पर बर्राजपुर और बिल्हौर के बीच कालिंदी एक्सप्रेस रेलवे ट्रैक पर रखे भरे एलपीजी सिलेंडर से टकरा गई. लोको पायलट ने बताया कि उसे ट्रैक पर कोई संदिग्ध चीज दिखाई दी जिसके बाद उसने ब्रेक मारी, लेकिन उसके बाद भी वह चीज ट्रेन से टकरा गई जिससे काफी तेज आवाज हुई. ड्राइवर ने ट्रेन रोककर गार्ड और बाकी लोगों को इसकी सूचना दी. 
वहीं इस घटना की जांच के लिए आतंकवाद विरोधी दस्ता (एटीएस) और अन्य एजेंसियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल शुरू कर दी है. ATS की कानपुर और लखनऊ यूनिट ने मौके पर पहुंचकर सबूत जुटाए हैं.
घटना की जानकारी मिलते ही अनवरगंज स्टेशन के रेलवे अधीक्षक, आरपीएफ और अन्य रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंच गए. मौके पर जांच की गई तो झाड़ियों में पुलिस को एक सिलेंडर, पेट्रोल की बोतल, माचिस और बारूद जैसे कई घातक पदार्थ भी मिले. ट्रेन को आधा घंटा रोकने के बाद रवाना कर दिया गया. मौके पर पुलिस और फॉरेंसिक टीमों ने आकर जांच पड़ताल की. सभी संदिग्ध वस्तुओं को जांच के लिए भेज दिया गया.  
मौके पर पहुंचे एडिशनल कमिश्नर हरीश चन्द्र ने बताया कि जिसने भी ये किया है उसे पकड़ने का काम किया जाएगा. फिलहाल सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है. हमारी फॉरेंसिक टीम भी डिटेल में समीक्षा कर रही है. 
साबरमती एक्सप्रेस के 22 डिब्बे हुए थे डीरेल
इससे पहले बीते 17 अगस्त की रात कानपुर-झांसी रूट साबरमती एक्सप्रेस (19168) के 22 डिब्बे इंजन समेत पटरी से नीचे उतर गए थे. ये ट्रेन वाराणसी से अहमदाबाद जा रही थी. हादसे का शिकार हुई ट्रेन के ड्राइवर ने बताया था कि बोल्डर के इंजन से टकराने के कारण हादसा हुआ क्योंकि जैसे ही बोल्डर इंजन से टकराया, वैसे ही इंजन का कैटल गार्ड बुरी तरह से मुड़ गया. इस हादसे की जांच की जा रही है. 
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया था कि इस हादसे की जांच इंटेलिजेंस ब्यूरो और यूपी पुलिस कर रही है. हादसे के एविडेंस सुरक्षित कर लिए गए हैं. इस घटना में यात्रियों या कर्मचारियों को कोई चोट नहीं आई है. पैसेंजर्स के लिए अहमदाबाद के लिए ट्रेन की व्यवस्था की गई है.
 

क्या अजीत डोभाल रुकवा पाएंगे रूस-यूक्रेन युद्ध? पीएम मोदी ने सौंपी जिम्मेदारी

08-Sep-2024
नई दिल्ली।   ( शोर संदेश )    राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रूस-यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने के उद्देश्य से चर्चा करने के लिए इस सप्ताह मास्को की यात्रा करेंगे. PM नरेंद्र मोदी पिछले दो महीनों में रूस और यूक्रेन दोनों का दौरा करने और वहां के नेताओं व्लादिमीर पुतिन और वलोडिमिर ज़ेलेंस्की से युद्धविराम को लेकर चर्चा की थी. दोनों देशों में शांति समझौता के लिए मध्यस्थता को लेकर दुनिया भारत की ओर देख रही है.
यूक्रेन की अपनी यात्रा और राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की से मुलाकात के तुरंत बाद, प्रधान मंत्री ने 27 अगस्त को राष्ट्रपति पुतिन से फोन पर बात की. रूसी दूतावास के एक बयान में कहा गया कि फोन कॉल के दौरान, प्रधान मंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को कीव की अपनी हालिया यात्रा के बारे में जानकारी दी और राजनीतिक और राजनयिक तरीकों से यूक्रेन के लिए समाधान लाने की भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया था.
सूत्रों के मुताबिक, इस फोन कॉल के दौरान नेताओं ने फैसला किया कि एनएसए डोभाल शांति वार्ता के लिए मॉस्को जाएंगे. इस यात्रा के कार्यक्रम के बारे में फिलहाल कोई विवरण उपलब्ध नहीं है.
रूसी दूतावास ने फोन कॉल के बारे में कहा, "व्लादिमीर पुतिन ने कीव अधिकारियों और उनके पश्चिमी संरक्षकों की विनाशकारी नीतियों के बारे में अपना सैद्धांतिक मूल्यांकन साझा किया, और इस संघर्ष को हल करने के लिए रूस के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला."
प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन संघर्ष पर विचारों का आदान-प्रदान किया. प्रधानमंत्री संघर्ष के स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान को प्राप्त करने के लिए बातचीत और कूटनीति के साथ-साथ सभी हितधारकों के बीच ईमानदार और व्यावहारिक जुड़ाव के महत्व को रेखांकित किया.
प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपने आधिकारिक हैंडल पर "संघर्ष के शीघ्र, स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान" का समर्थन करने के लिए भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई.
पिछले महीने, प्रधान मंत्री यूक्रेन में थे और वहां के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाकात की थी. बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने रूस-यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा की और प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ''भारत कभी तटस्थ नहीं रहा, हम हमेशा शांति के पक्ष में रहे हैं." 

क्या राष्ट्रगान बदलेगा बांग्लादेश? कट्टरपंथी बोले- भारत ने हम पर थोपा

08-Sep-2024
ढाका।    ( शोर संदेश )   बांग्लादेश में हिंसा की आग थमने के बाद अब एक और नया मुद्दा गरमा गया है। अब बांग्लादेश में राष्ट्रगान 'आमार सोनार बांग्ला' को लेकर बवाल मचा है। दरअसल, जमात-ए-इस्लामी के पूर्व अमीर गुलाम आजम के बेटे अब्दुल्लाहिल अमान आजमी ने बांग्लादेश के राष्ट्रगान और संविधान में बदलाव की मांग की है।
जनरल अमान आजमी ने कहा, ''मैं राष्ट्रगान का मामला इस सरकार पर छोड़ता हूं। हमारा वर्तमान राष्ट्रगान हमारे स्वतंत्र बांग्लादेश के अस्तित्व के विपरीत है। यह बंगाल विभाजन और दो बंगालों के विलय के समय को दर्शाता है। दो बंगालों को एकजुट करने के लिए बनाया गया एक राष्ट्रगान एक स्वतंत्र बांग्लादेश का राष्ट्रगान कैसे हो सकता है?''
आजमी ने आगे कहा कि यह राष्ट्रगान 1971 में भारत द्वारा हम पर थोपा गया था। ऐसे कई गीत हैं जो राष्ट्रगान के रूप में काम कर सकते हैं। सरकार को एक नया राष्ट्रगान चुनने के लिए एक नया आयोग बनाना चाहिए। बता दें कि बांग्लादेश के राष्ट्रगान को प्रसिद्ध बंगाली रचनाकार रवीन्द्रनाथ टैगोर के लिखा था।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में धार्मिक मामलों के सलाहकार अबुल फैज मुहम्मद खालिद हुसैन ने शनिवार को कहा कि देश के राष्ट्रगान को बदलने की कोई योजना नहीं है। पद्मा नदी के उत्तरी तट पर राजशाही में इस्लामिक फाउंडेशन का दौरा करने के बाद स्थानीय मीडिया ने हुसैन के हवाले से कहा कि अंतरिम सरकार विवाद पैदा करने के लिए कुछ नहीं करेगी, हम सभी के सहयोग से एक सुंदर बांग्लादेश का निर्माण करना चाहते हैं। 
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय को निशाना बनाने वाले हमले अभी भी जारी हैं, इसपर हुसैन ने आश्वासन दिया कि जो लोग ऐसे जघन्य कृत्यों के लिए दोषी पाए जाएंगे, उन्हें मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार द्वारा दंडित किया जाएगा। जो लोग पूजा स्थलों पर हमला करते हैं, वे मानवता के दुश्मन हैं। वे अपराधी हैं और उन पर मौजूदा कानूनों के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।

पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की मुलाकात पर सस्पेंस, बांग्लादेश के अनुरोध के बाद भी भारत ने क्यों लटकाया फैसला

08-Sep-2024
नई दिल्ली।    ( शोर संदेश )   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के बीच न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान बैठक होगी या नहीं, इस बात पर संशय बरकरार है। सूत्रों की मानें तो, यूनुस के हालिया विवादास्पद बयानों के कारण यह बैठक मुश्किल लग रही है। उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश की यूनुस सरकार की तरफ से न्यूयॉर्क में पीएम मोदी के साथ बैठक की मांग की गई है।
बांग्लादेश ने इस हफ्ते की शुरुआत में औपचारिक रूप से अनुरोध किया था कि यूनुस और मोदी के बीच महीने के आखिर में न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान द्विपक्षीय वार्ता हो। हालांकि, भारतीय अधिकारियों ने बताया कि अभी तक इस अनुरोध पर कोई फैसला नहीं हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान होने वाली अन्य द्विपक्षीय बैठकों के कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
इससे पहले, मोहम्मद यूनुस ने एक भारतीय मीडिया को दिए इंटरव्यू में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि हसीना भारत में छिपी हैं, भारत को हसीना के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। इसके साथ ही यूनुस ने शेख हसीना को चुप रहने की भी सलाह दी थी। यूनुस ने यह भी आरोप लगाया कि भारत हसीना के प्रति अत्यधिक सहानुभूति दिखा रहा है और अन्य राजनीतिक पार्टियों को 'इस्लामवादी' के रूप में चित्रित कर रहा है। बताया जा रहा है कि यूनुस के यह बयान भारत को अच्छे नहीं लगे। यही वजह है कि भारत यूनुस के साथ द्विपक्षीय बैठक में हिस्सा लेना नहीं चाहता है।
बीते हफ्ते यूनुस ने अपने बयान में कहा, "यदि भारत हसीना को तब तक अपने पास रखना चाहता है जब तक बांग्लादेश उसे वापस नहीं लेता, तो यह शर्त होगी कि हसीना चुप रहे। भारत में रहते हुए हसीना बोल रही हैं और दिशा-निर्देश दे रही हैं, जो न तो बांग्लादेश के लिए अच्छा है और न ही भारत के लिए।" बांग्लादेश ने भारत से यह स्पष्ट कर दिया है कि हसीना को चुप रहना चाहिए, क्योंकि वह भारत में शरण प्राप्त कर चुकी हैं और वहीं से राजनीतिक गतिविधियां चला रही हैं।
भारतीय सरकार ने कहा है कि शेख हसीना को अगस्त 5 को पद छोड़ने के बाद तुरंत भारत में आने की मंजूरी दी गई थी। विदेश मंत्रालय ने हसीना के प्रत्यर्पण के लिए बांग्लादेश की संभावित मांग को एक काल्पनिक मामला बताते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

महाभारत के समय पांडवों ने द्रौपदी पर दांव लगाया था और अब...विनेश फोगाट मामले में बृजभूषण सिंह का बड़ा बयान

08-Sep-2024
नई दिल्ली।    ( शोर संदेश )   भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने एक बार फिर पहलवान विनेश फोगाट पर बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने रविवार को कहा कि जैसे महाभारत में द्रौपदी को दांव पर रखकर पांडवों ने जुआ खेला था, ठीक वैसे ही यहां महिला पहलवानों की प्रतिष्ठा को दांव पर लगा कर दांव खेला गया है. मेरे खिलाफ जिन महिला पहलवानों ने विरोध-प्रदर्शन किया वो सिर्फ उनका ही प्रदर्शन नहीं था बल्कि उन्हें आगे करके किसी और ने अपना दांव खेला था. इस पूरे खेल के पीछे भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा हैं. 
बृजभूषण सिंह ने आगे कहा कि कांग्रेस उनकी कुंडली में ही बैठ गई है. जब भी उनके या उनके परिवार के खिलाफ कुछ होता है तो उसके पीछे कांग्रेस का ही हाथ होता है. फिलहाल ये मामला मामला कोर्ट में है और मुझे पूरा भरोसा है कि मैं इससे निकलकर बाहर आऊंगा.
आपको बता दें कि बृजभूषण सिंह ने शनिवार को भी विनेश फोगाट पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा था कि विनेश फोगाट को ओलंपिक में क्वालीफाई करने से पहले बेईमानी करके जीताया गया था. और इसका परिणाम भगवान ने उन्हें ओलंपिक में दे दिया है. उन्होंने मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि एक खिलाड़ी दो वेट कैटेगरी में वजन नहीं दे सकता है. ये कुश्ती का नियम है. विनेश ने एक दिन में दो वेट कैटेगरी में ट्रायल दिया. वजन लेने के बाद पांच घंटे तक कुश्ती को रुकवाए रखा. पहली कुश्ती 53 किलोग्राम वर्ग में 10-0 से हार गईं. फिर 50 किलोग्राम में कुश्ती लड़ा. उस समय 5-0 स्कोर था. शिवानी पंवार कुश्ती जीत रही थी. इसके बाद हंगामा खड़ा किया गया. रेलवे के रैफरी ने बेईमानी करके विनेश को जीताया.
बृजभूषण सिंह ने आगे कहा था कि मेरे ऊपर जो आरोप लगे हैं फिलहाल उसकी जांच चल रही है. लेकिन मैं शुरू से ही कह रहा हूं कि मेरे ऊपर लगे आरोप झूठे हैं. इन पहलवानों ने मेरे ऊपर जो भी आरोप लगाए हैं वो कांग्रेस द्वारा प्रायोजित है. 

बक्सर जिले में हादसे का शिकार हुई मगध एक्सप्रेस, देखते ही देखते दो हिस्सों में बंट गई ट्रेन

08-Sep-2024
बक्सर।   ( शोर संदेश )   नई दिल्ली से पटना होते हुए इस्लामपुर तक जाने वाली 20802 डाउन मगध एक्सप्रेस दानापुर रेल मंडल के डुमरांव रेलवे स्टेशन से चलने के करीब आठ मिनट बाद दो हिस्सों में बंट गई।
यह घटना बक्सर-आरा रेलखंड पर टुड़ीगंज और रघुनाथपुर रेलवे स्टेशनों के बीच हुई। टुड़ीगंज रेलवे स्टेशन से चलने के करीब एक मिनट बाद ही यह घटना हुई। करीब 200 मीटर के फासले पर ट्रेन के दोनों हिस्से अलग-अलग खड़े हो गए।
गेट संख्या 61 के पास हुई इस घटना में किसी यात्री को कोई नुकसान पहुंचने की जानकारी नहीं है। इस घटना के बाद स्लीपर श्रेणी के एस-6 से लेकर एस - 1 के अलावा दो जनरल और एक एसएलआरडी कोच पीछे छूट गया। जबकि अन्य कोच को लेकर इंजन आगे बढ़ गया था।
पाइप फटते ही स्वत: तरीके से ट्रेन रुक गई
घटना के दौरान एयर पाइप फटते ही स्वत: तरीके से ट्रेन रुक गई। इस घटना के बाद यात्रियों में अफरातफरी की स्थिति मच गई। ट्रेन के एक यात्री ने बताया कि अचानक तेज झटके के साथ आवाज हुई। इसके बाद ट्रैक के अगल-बगल की गिट्टी बिखरने और हवा में उड़ने लगी।
इससे कुछ यात्रियों को लगा कि ट्रेन शायद बेपटरी हो गई है। कुछ यात्रियों ने आग लगने की आशंका से इधर-उधर भागना शुरू कर दिया। हालांकि, इसके बाद ट्रेन की गति धीमी होती गई और कुछ ही दूर जाकर ट्रेन रुक गई। इसके बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली। 
 

अग्नि-4 मिसाइल का भारत ने किया सफल परीक्षण

07-Sep-2024
नई दिल्ली।    ( शोर संदेश )  भारत अपने दुश्मन को मार देने के लिए लगातार अपनी ताकत में इजाफा कर रहा है. इस बीच रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने एक बार फिर से अपनी बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया. जिसे इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 के नाम से जाना जाता है. डीआरडीओ ने करीब दो साल बर इस मिसाइल का परीक्षण किया है. मिसाइल का सफल परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित एपीजे अब्दुल कलाम आइलैंड पर शुक्रवार (6 सितंबर 2024) को किया गया. इससे पहले 6 जून 2022 को इस मिसाइल का परीक्षण किया गया था.
मिसाइल ने पूरे किए सभी तय मानक
अग्नि-4 मिसाइल ने परीक्षण के दौरान सभी तय मानकों को पूरा कर लिया. परीक्षण के बाद स्ट्रैटेजिक फोर्स कमांड ने जानकारी दी कि यह एक रूटीन ट्रेनिंग लॉन्च था. इस दौरान सभी ऑपरेशनल पैरामीटर्स की दोबारा से जांच की गई. बता दें कि भारत इस टेस्टिंग के जरिए ये बताना चाहता है कि वह अपने विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध क्षमता को बनाए रखने से पीछे नहीं हट रहा. बता दें कि अग्नि-4 मिसाइल देश के स्ट्रैटेजिक फोर्स कमांड की अग्नि मिसाइल सीरीज की चौथी सबसे खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइल है. जो अपनी रेंज की दुनिया के दूसरे देशों की मिसाइलों की तुलना में काफी हल्की है.
17000 किग्रा है इस मिसाइल का वजन
बता दें इस मिसाइल का वजह सिर्फ 17 हजार किलोग्राम है, जिसकी लंबाई 66 फीट है. इस मिसाइल को डीआरडीओ और भारत यनेमिक्स लिमिटेड ने संयुक्त रूप से बनाया है. इस मिसाइल में तीन तरह के हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकता है. जिनमें पारंपरिक, थर्मोबेरिक और स्ट्रैटेजिक न्यूक्लियर वेपन भी शामिल है.
3500 से 4000 किमी तक करती है मार
बता दें कि अग्नि-4 मिसाइल की एक्टिव रेंज 3500 से 4000 किलोमीटर है. जो अधिकतम 900 किमी की ऊंचाई तक सीधी उड़ान भर सकती है. जिसकी सटीकता 100 मीटर है, यानी ये हमले के वक्त 100 मीटर के दायरे में आने वाली सभी चीजों को नष्ट कर सकती है. जिससे दुश्मन का बचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है.
बता दें कि अग्नि-4 का पहला सफल परीक्षण 15 नवंबर 2011 को किया गया था. इस मिसाइल के अब तक कुल 8 सफल परीक्षण हो चुके हैं. इस मिसाइल में एक टन का हथियार लोड किया जा सकता है. यही नहीं अग्नि-4 मिसाइल 3000 डिग्री सेल्सियस का तापमान को छेलने की क्षमता रखती है. 

एमपी में सरकारी कर्मचारियों को बड़ी सौगात, बच्चों-परिजनों या आश्रितों की नियुक्ति पर लिया अहम फैसला

07-Sep-2024
भोपाल।   ( शोर संदेश )   मध्यप्रदेश में कर्मचारियों को सरकार ने बड़ी सौगात दी है। राज्य के सरकारी कर्मचारियों के बच्चों, परिजनों या आश्रितों की नियुक्ति पर प्रदेश सरकार ने लाभदायक फैसला लिया है। सरकारी कर्मचारियों की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार ने नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए पंचायत सचिवों के आश्रितों के लिए अवधि में शिथिलता की है। अब प्रदेशभर में पंचायत सचिवों के परिजनों को भी सामान्य कर्मचारियों के समान अनुकंपा नियुक्ति मिल सकेगी। अनुकंपा नियुक्ति के मामले में राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। प्रदेशभर में पदस्थ पंचायत सचिव की असामयिक मौत होने पर उनके आश्रितों को अब राज्य के अन्य कर्मचारियों के समान 7 साल की समय अवधि में अनुकंपा नियुक्ति दी जा सकेगी। अभी तक इसके लिए 3 साल की समय अवधि निर्धारित थी।
पंचायत सचिवों के परिजनों के लिए सामान्य कर्मचारियों के समान 7 साल तक अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पात्रता संबंधी नियमों में बदलाव कर दिया है। नवंबर 2017 में जारी किए गए नियमों के अनुसार पंचायत सचिव की असमय मौत पर उनके आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति के लाभ के लिए 3 साल की समय सीमा निर्धारित थी। इसे बदलकर अब 7 साल कर दिया गया है।
पंचायत सचिवों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ दिए जाने की समय सीमा बढ़ाने से आश्रितों को सुविधा होगी। वे अपना अध्ययन पूरा कर सकेंगे। आश्रित के बालिग नहीं होने या समुचित शैक्षणिक योग्यता नहीं होने की स्थिति में वह अपनी कमी पूरी कर सकेगा। 7 साल की अवधि में आश्रित उम्र या पढ़ाई पूरी कर सकेगा।
पंचायत सचिवों के लिए यह प्रावधान भी किया गया है कि उनके परिजनों या आश्रितों को अन्य जिलों में रिक्त पद पर नियुक्ति दी जा सकेगी। इसके लिए पंचायत अधिनियम के नियम 5 क में परिवर्तन किया गया है।



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