
रायपुर ( शोर संदेश )। छत्तीसगढ़ के अधिकांश जिलों में इस समय कड़ाके की ठंड पड़ रही है. प्रदेश में तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे गिर चुका है, जिसके चलते लोग ठंड से बचने के लिए गरम कपड़ों और अलाव का सहारा लेने को मजबूर हैं. राजधानी रायपुर समेत अन्य प्रमुख शहरों में ठंड में और वृद्धि देखने को मिली है।
मौसम विभाग ने 17 दिसंबर को उत्तरी छत्तीसगढ़ के कुछ जिलों में शीतलहर चलने की संभावना जताई है।
मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार को प्रदेश के सभी जिलों में ठंड में और वृद्धि दर्ज की गई. राजधानी रायपुर में न्यूनतम तापमान 9.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि रायपुर के नजदीकी माना क्षेत्र में तापमान 7.7 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, जो सामान्य से 5.8 डिग्री कम है। इसके अतिरिक्त, बिलासपुर में पारा 10.6 डिग्री, पेंड्रारोड में 6.6 डिग्री, अंबिकापुर में 4.0 डिग्री, जगदलपुर में 8.5 डिग्री, दुर्ग में 7.2 डिग्री और राजनांदगांव में 9.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मौसम विभाग के अनुसार, आगामी 24 घंटों में प्रदेश में न्यूनतम तापमान में हल्की वृद्धि हो सकती है, हालांकि इस दौरान कोई विशेष बदलाव होने की उम्मीद नहीं है. अगले कुछ दिनों में तापमान में 3 से 5 डिग्री तक की क्रमिक वृद्धि होने की संभावना जताई गई है. राज्य में अब तक सबसे कम तापमान 3.3 डिग्री सेल्सियस बलरामपुर में दर्ज किया गया है।
मौसम विभाग ने यह भी बताया कि दक्षिण बंगाल की खाड़ी के मध्य भागों पर एक कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है. इस चक्रवाती परिसंचरण का प्रभाव औसत समुद्र तल से 3.1 किमी ऊपर तक फैला हुआ है. अगले दो दिनों के दौरान इसका असर और अधिक बढ़ सकता है और यह पश्चिम-उत्तर पश्चिम की दिशा में तमिलनाडु के तट की ओर बढ़ने की संभावना है।
रायपुर में अगले 24 घंटों के दौरान आकाश आंशिक रूप से मेघमय रहने की संभावना है. ऐसे में, प्रदेशवासियों को ठंड से बचने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
स्कूलों की टाइमिंग में बदलाव
कड़ाके की ठंड और शीतलहर की संभावना को देखते हुए कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को स्कूलों के समय में बदलाव करने का आदेश जारी किया है। आदेश सरकारी स्कूलों के साथ ही प्राइवेट स्कूलों पर भी लागू होगा.
जारी आदेश के अनुसार सुबह की पाली में सुबह 8.30 बजे से 11.30 बजे तक स्कूल लगाने कहा गया है. शिक्षा विभाग दो पालियों में लगने वाले स्कूल के समय में बदलाव करने के लिए कहा है. वहीं, दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक स्कूल लगाने का आदेश दिया गया है।


राजनांदगांव ( शोर संदेश )। निर्माणी श्रमिक संगीता साहू की बिटिया वंशिका साहू को 10वीं कक्षा में राज्य स्तर पर टॉप 10 के छठवां स्थान प्राप्त करने पर राज्य शासन की ओर से 1 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि मिला है। आर्थिक रूप में बेहद कमजोर परिवार से संबंध रखने वाली वंशिका को आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए राज्य शासन की मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना मददगार बनी है। वंशिका ने बताया कि वे राजनांदगांव जिले के छुरिया विकासखंड के दूरस्थ वनांचल ग्राम हालेकोसा में निवास करती हैं और शिक्षा भी स्थानीय शासकीय स्कूल में पढ़ाई कर रही है। उन्होंने बताया कि उनकी मां संगीता साहू भवन निर्माण कार्य में मजदूरी का कार्य करती है और उनके पिता तोरनलाल साहू की छोटी सी कपड़े की दुकान है। उनकी मां का छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में श्रमक पंजीयन कार्ड बना हुआ है। वंशिका ने बताया कि उनके माता-पिता मजदूरी करके दोनों भाई-बहन की पढ़ाई करा रहे हैं। वंशिका ने कहा कि प्राप्त राशि से शिक्षा के लिए मदद मिली है और मेरे माता-पिता के होने वाले खर्च का भार भी कम हुआ। माता-पिता के परिश्रम को ध्यान में रखते हुए वंशिका समर्पित भाव से पढ़ाई कर रही है। वंशिका डॉक्टर बनना चाहती हैं, जिसके लिए वह बॉयोलॉजी विषय लेकर पढ़ाई कर रही है। वंशिका ने 10वीं कक्षा में 97.83 प्रतिशत अंक प्राप्त कर राज्य की मेरिट सूची में छठवां स्थान प्राप्त किया है।
वंशिका की मां संगीता ने बताया कि उनकी बेटी पढ़ाई में बहुत अच्छी है। वह शुरू से ही पढ़ाई में बहुत अच्छी थी। वह स्कूल से घर आने पर पढ़ाई में ज्यादा समय देती है। उन्होंने कहा कि उन्हें पता नहीं था कि श्रम विभाग में उनके श्रमिक पंजीयन कराने से उनकी बिटिया के श्रेष्ठ प्रदर्शन से 1 लाख रूपए की मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य शासन से प्राप्त राशि मेरी बिटिया के आगे की शिक्षा और डॉक्टर बनने के सपने के लिए बहुत मददगार होगी। वंशिका और उनकी मां संगीता साहू ने योजना के अंतर्गत उन्हें लाभान्वित करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को बहुत-बहुत आभार व्यक्त किया।
श्रमिकों के बच्चों को सरकार देती है राशि -
मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत छत्तीसगढ़ भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल की ओर से पंजीकृत निर्माणी श्रमिकों के मेधावी बच्चों की मदद की जाती है। कक्षा 10वीं से लेकर स्नातकोत्तर और व्यवसायिक पाठ्यक्रम में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक लाने पर 5 हजार रूपए से लेकर 12 हजार 500 रूपए तक की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इस योजना के तहत पंजीकृत निर्माणी श्रमिकों के बच्चे, जो छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की बोर्ड परीक्षा में टॉप-10 में स्थान प्राप्त करते हैं, उन्हें एक लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है, साथ ही दोपहिया वाहन खरीदने के लिए एक लाख रूपया दिया जाता है।







रायपुर ( शोर संदेश )। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर केन्द्र शासन द्वारा प्रस्तावित राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 छत्तीसगढ़ में भी लागू की जा चुकी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत देश भर में एक साथ राष्ट्रीय परख सर्वेक्षण 2024 का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय परख सर्वेक्षण 2024 में कक्षा तीसरी, छठवीं और नवमी की 3409 स्कूल से 81 हजार 179 विद्यार्थियों की दक्षताओं का समग्र मूल्यांकन किया गया।
इस परख सर्वेक्षण का उद्देश्य छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन के साथ-साथ शिक्षकों, स्कूलों और पूरी शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता का आकलन करना है। यह सर्वेक्षण राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों के अनुरूप छात्रों की बुनियादी और मध्य स्तर की क्षमताओं का आकलन करता है। प्राप्त परिणामों के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर राज्यों की शैक्षणिक गुणवत्ता की रैंकिंग की जाएगी।
छत्तीसगढ़ में किए गए सर्वेक्षण में कक्षा तीसरी के 1199 स्कूलों का सर्वेक्षण किया गया, जिसमें कुल 24 हजार 379 विद्यार्थी शामिल हुए। इसी प्रकार कक्षा छठवीं के 1065 स्कूल से 25 हजार 665 विद्यार्थी और कक्षा नवमी के 1145 स्कूल से 31 हजार 135 विद्यार्थी शामिल हुए। इस प्रकार कुल 3409 स्कूलों से कुल 81 हजार 179 विद्यार्थी परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 में शामिल हुए।
गौरतलब है कि इस बार परख (PARAKH- प्रदर्शन मूल्यांकन, समीक्षा एवं समग्र विकास के लिए ज्ञान का विश्लेषण) नाम दिया गया। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य बच्चों के समग्र शैक्षणिक प्रदर्शन का मूल्यांकन करना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत छात्रों के मूल्यांकन से संबंधित मापदंड स्थापित करना है। इस बार सर्वेक्षण कक्षा तीसरी, छठवीं और नवमी के छात्रों पर केंद्रित रहा, जो उनके पिछले कक्षाओं में अर्जित दक्षताओं पर आधारित था। परीक्षा में प्रश्न ओएमआर शीट के माध्यम से बहुविकल्पीय प्रारूप में रखा गया था।