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हाथरस की जांच कर रही एसआईटी को सरकार ने दी 10 और दिन की मोहलत*

07-Oct-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) हाथरस गैंगरेप केस की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) को आज रिपोर्ट सौंपना था, ऐसे में एसआईटी को आज से और 10 दिन की मोहलत दी गई है। दरअसल, पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी को पहले सात दिन की मोहलत दी गई थी, जिसकी मियाद आज पूरी हो रही है। इस बीच एसआईटी टीम ने जांच के लिए और 10 दिन की मोहलत मांगी थी, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार ने मंजूरी दे दी है।

गौरतलब है कि गृह सचिव भगवान स्वरूप की अगुवाई में तीन सदस्यीय एसआईटी बनाई गई है, जिसने अपनी जांच 1 सितंबर से शुरू की थी। एसआईटी की टीम ने पीड़िता के परिवार से बात की और बयान दर्ज किया। साथ ही चश्मदीदों के साथ बातचीत और सीन को रिक्रिएट भी किया गया। कल एसआईटी वहां गई थी, जहां पर पीड़िता का अंतिम संस्कार किया गया था। 


कर्नाटक के मंत्री सीटी रवि ने सीरम येदियुरप्पा को सौंपा अपना इस्तीफ*

04-Oct-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) कर्नाटक की येदियुरप्पा सरकार में संस्कृति और पर्यटन मंत्री सीटी रवि ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। कर्नाटक के मंत्री सीटी रवि ने राज्य के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है। सीटी रवि ने मंत्री पद से इस्तीफा भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किए जाने के बाद दिया है। सीटी रवि सोमवार (5 अक्टूबर) को दिल्ली जाएंगे और संगठन के कामकाज की जिम्मेदारी लेंगे।

भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा ने हाल ही में पार्टी के पदाधिकारियों की नई सूची की घोषणा की थी। सीटी रवि भी इस नई सूची में शामिल थे। जबकि राम माधव, अनिल जैन, सरोज पांडे सहित कई राजनीतिक नेताओं के इस बार नाम नहीं हैं।
भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा की टीम में 12 उपाध्यक्ष, 9 महासचिव और 13 सचिव हैं। हालांकि पार्टी संविधान के अनुसार केंद्रीय संगठन में एक उपाध्यक्ष, एक महासचिव और दो सचिवों के पद खाली हैं। जेपी नड्डा ने अभी बीजेपी महिला मोर्चा के अध्यक्ष की घोषणा नहीं की है।

जेपी नड्डा को अभी राष्ट्रीय कार्यकारिणी का भी गठन करना है। इसके लिए 25 प्रतिशत बदलाव करने होते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ये सारे फैसले बिहार विधानसभा चुनाव के बाद लिए जाएंगे। 


डीएम पर भी कार्रवाई चाहता है हाथरस पीड़ित परिवार : राहुल गांधी*

04-Oct-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) उत्तर प्रदेश के हाथरस में कथित सामूहिक दुष्कर्म की दिवंगत पीड़िता के घर शनिवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा ने पहुंचकर उसके परिवार से मुलाकात की। राहुल ने कहा कि पीड़िता का परिवार न्यायिक जांच के साथ सुरक्षा और डीएम पर कार्रवाई चाहता है। पीड़िता के परिजनों से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने पत्रकारों से कहा, `पीड़िता के परिवार की आवाज दुनिया की कोई भी ताकत दबा नहीं सकती। जहां-जहां अन्याय होगा, हम जाएंगे, हमें जाने से कोई भी सरकार नहीं रोक सकती। परिवार न्यायिक जांच के साथ सुरक्षा और डीएम पर कार्रवाई चाहता है। जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल जाता, हम अन्याय के खिलाफ लड़ते रहेंगे, बेटी के साथ गलत बर्ताव हुआ, परिवार के साथ लगातार खड़ा रहूंगा। पीड़ित परिवार की रक्षा करना यूपी सरकार की जिम्मेदारी है।`

परिवार से मुलाकात के बाद प्रियंका गांधी ने कहा `जहां-जहां अन्याय होगा, हम उसके खिलाफ लड़ेंगे। पीड़िता का परिवार बच्ची का चेहरा तक नहीं देख पाया, यह बहुत दुखद है। यह अन्याय है। परिवार की कुछ मांगें हैं। परिजन ने डीएम को हटाने और न्यायिक जांच की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने सुरक्षा की मांग की है।` परिवार से मुलाकात के बाद राहुल-प्रियंका हाथरस से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। दोनों के साथ आए लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि पीड़ित परिवार ने सुरक्षा की मांग की है। वह लोग बहुत डरे हुए हैं।

राहुल गांधी और प्रियंका दोनों ने मृतका के परिवार से उनके घर के अंदर जाकर बातचीत की। इस दौरान प्रियंका ने पीड़िता की मां को गले लगाकर ढाढस बढ़ाया। राहुल और प्रियंका से मिलकर पीड़िता का परिवार काफी भावुक हुआ और पूरे घटनाक्रम को सिलसिलेवार तरीके से दोनों को बताया। दोनों ने पीड़िता के परिवार के साथ बंद कमरे में बातचीत की। 


पायलट ने पत्र लिख पीएम मोदी से की पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना बनाने की मांग*

04-Oct-2020

जयपुर (शोर सन्देश) राजस्थान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जाए। पायलट ने पत्र में लिखा कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना एक तरह से पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों की जीवनरेखा है। इन 13 जिलों में कृषि और पशुपालन मुख्य व्यवसाय हैं, जबकि भूजल उपलब्धता में निरंतर कमी ने कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।

इसके अलावा, कई ब्लॉक खतरे के क्षेत्र के कारण विकसित नहीं होते हैं। नीति आयोग ने करौली और धौलपुर जैसे जिलों को भी पसंदीदा जिलों की सूची में शामिल किया है, क्योंकि यह अर्ध-विकसित है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने लिखा कि पानी की उपलब्धता किसी भी क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण है और इसलिए पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना की अवधारणा को केंद्र सरकार के समक्ष तैयार किया गया है और इसे जयपुर में आयोजित बैठक में भी अपनी ओर से विचार करने का आश्वासन दिया गया है। वर्ष 2018 दिया गया था।

पायलट ने लिखा कि राजस्थान का क्षेत्रफल भारत के क्षेत्रफल का 10 प्रतिशत है और यहाँ की जनसंख्या देश की जनसंख्या का 5.5 प्रतिशत है। इसके बावजूद, यहाँ का सतही जल पूरे देश का केवल 1.16 प्रतिशत है और भूजल का 1.72 प्रतिशत है, क्योंकि राजस्थान के 295 ब्लॉकों में से 245 ब्लॉक डार्क या क्रिटिकल घोषित किए गए हैं। इसलिए, राजस्थान सरकार ने झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, जयपुर, दौसा, करौली, अलवर, भरतपुर और धौलपुर के 13 जिलों की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान किया है और एक सिंचाई विकसित की है। पूर्वी राजस्थान में लगभग तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्र। पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना के उद्देश्य के लिए तकनीकी स्वीकृति और वित्तीय वित्तपोषण के लिए केंद्र सरकार को प्रस्तुत किया गया है। 


ट्रेनिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हुआ ग्लाइडर, नौसेना के 2 अधिकारियों की मौत*

04-Oct-2020

कोच्चि (शोर सन्देश) केरल में कोच्चि के पास रविवार को भारतीय नौसेना के दो अधिकारियों का ग्लाइडर दुघर्टनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में दोनों अधिकारियों की मौत हो गई। दुर्घटना का शिकार हुए अधिकारियों की पहचान लेफ्टिनेंट सुनील कुमार और नाविक अधिकारी राजीव झा के रूप में हुई है। आज सुबह ट्रेनिंग शेड्यूल के दौरान दोनों का ग्लाइडर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में अधिकारियों को गंभीर चोट आई थी, जिसके चलते कुछ समय बाद इन्होंने दम तोड़ दिया।

नौसेना ने अपने बयान में बताया कि अधिकारियों ने INS Garuda से रूटीन ट्रेनिंग सॉर्टी के लिए उड़ान भरी थी। रविवार सुबह 7:00 बजे के करीब ग्लाइडर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दुर्घटना में जान गंवाने वाले राजीव उत्तराखंड से थे। राजीव के घर पर पत्नी और उनके दो बच्चे हैं। वहीं, सुनील की अभी शादी नहीं हुई थी। 


कोरोना से ठीक हुए मरीजों में 90 दिनों तक मौजूद रहता है वायरस*

04-Oct-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) कोरोना संक्रमण का प्रकोप पूरी दुनिया में जारी है। इसी बीच इस वायरस से जुड़ी एक हैरान करने वाली जानकारी सामने आई है। अमेरिका में कई अस्पतालों के क्लिनिकल डाटा के विश्लेषण बताते हैं कि कोविड-19 बीमारी के लिए जिम्मेदार वायरस बेहद गंभीर अवस्था के बाद ठीक हुए मरीजों में 90 दिनों तक रहता है।

ऐसे में कई बार अगर आप कोरोना से हाल में ठीक हुए लोगों के साथ घूमते-फिरते हैं या समय व्यतीत करते हैं तो जरूरी है कि आप भी सावधानी बरतें।
बहरहाल, वायरस को लेकर आए इस नए विश्लेषण से ये आशंका है कि कोरोना से ठीक हुए लोग भी इस बीमारी को फैला सकते हैं। बता दें कि भारत में कोरोना संक्रमण के मामले 64 लाख के पार हो गए हैं। वहीं एक लाख से अधिक लोगों की मौत इस बीमारी से भारत में हो चुकी है।
अमेरिका के एटलांटा में सेंटर फॉर डिजिज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के द्वारा जुटाए गए डाटा के अनुसार बीमारी के दौरान सबसे ज्यादा गंभीर अवस्था से गुजरे लोग करीब 90 दिनों तक संक्रमण फैलाने की क्षमता रखते हैं। वहीं बहुत कम देर के लिए बीमार पड़े मरीज में ऐसी क्षमता केवल 10 दिनों तक रहती है। वहीं ऐसे मरीज जिनकी इम्यूनिटी कुछ कमजोर है संक्रमित होने के समय थो़ड़े बहुत लक्षण ही जिनमें नजर आए, वे ठीक होने के करीब 20 दिनों बाद कर संक्रमण फैला सकते हैं।
इस रिसर्च में साथ ही ये भी कहा गया है कि अगर 90 दिनों के बाद ठीक हुए मरीजों के संपर्क में आया कोई शख्स बीमार होता है तो वह कोविड-19 नहीं हो सकता। केयर अस्पताल के एक विशेषज्ञ डॉक्टर मुस्तफा अफजल के अनुसार, `ऐसे विश्लेषण से आईसोलेशन प्रक्रिया को समझने में मदद मिलती है।`

ये विश्लेषण भारत के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है जहां लगातार मामले बढ़ रहे हैं। साथ ही कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। भारत में लोगों में कोरोना को लेकर लापरवाही भी बढ़ रही है। कई लोग अब बिना मास्क के बाहर घूमते नजर आते हैं। 


कृषि बिल के विरोध में आज राहुल गांधी की ट्रैक्टर रैली*

04-Oct-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) कृषि संबंधी बिलों के विरोध में विपक्षी पार्टियांं लगातार केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। ऐसे में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी आज इस कानून के खिलाफ पंजाब में बड़ी ट्रैक्टर रैली करने जा रहे हैं। इस रैली में करीब 5 हजार से अधिक ट्रैक्टरों के शामिल होने की संभावना है। आज से शुरू हो रही ये रैली 6 अक्टूबर तक चलेगी।

कृषि कानून को विरोध में हो रही इस रैली में बड़ी तादात में कांग्रेस कार्यकर्ताओं, किसानों और नेताओं के एकत्रित होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यहां करीब 10 हजार से अधिक पुलिस बलों की तैनाती की गई है। राहुल गांधी की यह ट्रैक्टर रैली पंजाब के मोगा से शुरू होगी, जिसके बाद हरियाणा के रास्ते होते हुए यह दिल्ली में खत् होगी। 


स्थानांतरित संगठन ने 2 अक्टूबर से मांगों को लेकर अभियान छेड़ा*

03-Oct-2020

मुख्यमंत्री और पंचायत मंत्री को ट्वीट कर सभी जिलों में ज्ञापन सौंपेंगे
धमतरी (शोर सन्देश) मुख्यमंत्री पंचायत मंत्री को ट्वीट कर स्थानांतरित संगठन ने प्रथम नियुक्ति से , वरिष्ठता के पश्चात ही प्राचार्य, प्र.पाठक में पदोन्नति छग के सभी कर्मचारियों के लिए, ओपीएस की मांग का अभियान 2 अक्टूबर से शुरू किया गया। अन्य सभी मांगों पर इस माह सभी 27 जिलों में ज्ञापन सौंपा जाएगा।

रायपुर स्थानांतरित संगठन ने प्रांतीय निर्णय अनुसार अक्टूबर क्रांति का आगाज किया है। ट्विटर से मुख्यमंत्री अन्य मंत्री को संगठन की प्रमुख मांग समस्त स्थानांतरित की स्थानांतरण से वरिष्ठता प्रभावित हो, समस्त वर्ग के शिक्षक /एल बी संवर्ग ईटी के लिए जो गैर वित्तीय मामले हैं। प्रथम नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता का प्रावधान करने .प्र.में प्रथम नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता, क्रमोन्नति देने जारी राजपत्र की तरह छत्तीसगढ़ राजपत्र पर संसोधन करने दिशा निर्देश जारी करने के पश्चात ही प्राचार्य प्रधानपाठक के पदों पर शीघ्र पदोन्नति करने की मांग की गई। इसी प्रकार अन्य मांगों को भी रखा जा रहा है।

वरिष्ठता स्थानांतरित संगठन के प्रांतीय संचालक लालबहादुर साहू, भुवनेश्वर प्रताप महिला प्रांतीय संचालक शशि सिंघ, प्रांतीय संयुक्त सचिव सरोज यादव, संयोजक वी.एन.मंगेशकर, प्रांतीय सचिव महादेव साहू, प्रांतीय कोषाध्यक्ष किशोर साहू प्रांतीय उपाध्यक्ष लक्ष्मण सोरी , लावण्यता वर्मा , रजनीगंधा, सरिता त्रिपाठी, रामचंद्र साहू, शोभा तिवारी, तारामति वैद्य, सरिता शर्मा , खेन दीवान , रचना वर्मा, निरंजन साहू, शंकर वर्मा ,कृष्णा बिहारी, वीणा देवांगन और अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि अक्टूबर क्रांति के तहत राज्यपाल, मुख्यमंत्री उच्च अधिकारी को 27 जिले से ज्ञापन सौंप मांग पत्र सौप कर ध्यान आकर्षित करेंगे। लॉकडाउन के कारण यह कार्य पूरे अक्टूबर तक चलेगा। ट्वीट भी करते रहेंगे और अपनी सुविधा अनुसार ज्ञापन सौंपेगे। 


सामाजिक कार्यकर्ता पुष्पा भावे का निधन, काफी दिनों से थी बीमार*

03-Oct-2020

मुंबई (शोर सन्देश) जानी मानी सामाजिक कार्यकर्ता पुष्पा भावे का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 81 वर्ष की थीं, उनके परिचितों ने शनिवार को बताया कि भावे का शुक्रवार रात निधन हो गया। उनके परिचितों के अनुसार भावे के परिवार में उनके पति आनंद भावे हैं।

पत्रकार एवं कार्यकर्ता जतिन देसाई ने भावे को बहुआयामी शख्सियत बताया। उन्होंने कहा कि, भावे एक शिक्षाविद एवं बुद्धिजीवी थीं, जिन्होंने आम नागरिकों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
भावे ने संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन और गोवा मुक्ति आंदोलन में हिस्सा लिया था। उन्होंने आपातकाल के दौरान भूमिगत राजनीतिक कार्यकर्ता मृणाल गोरे को आश्रय के लिए अपने घर की पेशकश की थी।

भावे ने 1990 के दशक में दादर निवासी रमेश किनी की संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत के बाद बिल्डरों एवं नेताओं के बीच साठगांठ के खिलाफ आवाज उठाई थी और जांच की मांग की थी। उनका अंतिम संस्कार शनिवार सुबह शिवाजी पार्क में उनके परिवार और साथी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में विद्युत शवदाह गृह में किया गया। 


अब सड़क हादसों में मदद से घबराएं नहीं, पुलिस नहीं करेगी परेशान*

03-Oct-2020

सड़क हादसे के नियमों में बड़े बदलाव

नई दिल्ली (शोर सन्देश) अक्सर देखने में आता है कि सड़क किनारे कोई दुर्घटना हो जाती है और कोई मदद के लिए आगे नहीं आता। इसकी वजह यह होती है कि ऐसे मामलों में मदद करने वाले को पुलिस द्वारा परेशान किया जाता है। लेकिन अब सरकार ने ऐसे `नेक आदमी` के संरक्षण के लिए नियम बना दिए हैं। इसके चलते पुलिस अब ऐसे लोगों पर पहचान जाहिर करने का दबाव नहीं बना सकेगी।

सरकार ने गुरुवार को मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम- 2019 में एक नई धारा 134 () को जोड़ा है. यह धारा सड़क हादसों के दौरान पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने वाले `नेक आदमी` को सुरक्षा देती है।
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ऐसे लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार`
सड़क किनारे दुर्घटना होने पर मदद करने वालों को राहत दी गई है। सरकार ने ऐसे `नेक आदमी` के संरक्षण के नियम बना दिए हैं।
इसके चलते पुलिस अब ऐसे लोगों पर पहचान जाहिर करने का दबाव नहीं बना सकेगी। सरकार ने मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम-2019 में एक नई धारा 134 () को जोड़ा है। यह धारा सड़क हादसों के दौरान पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने वाले `नेक आदमी` को संरक्षण प्रदान करती है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ऐसे लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए।
उनके साथ धर्म, राष्ट्रीयता, जाति और लिंग को लेकर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। बयान के मुताबिक, ``कोई भी पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति ऐसे मददगार पर उनकी पहचान, पता या अन्य निजी जानकारी साझा करने का दबाव नहीं बना सकेगा। हालांकि, यदि व्यक्ति चाहे तो स्वैच्छिक आधार पर जानकारी दे सकता है
इसके अलावा हर सरकारी और निजी अस्पताल को ऐसे `मददगार` के संरक्षण से जुड़े अधिकारों को अपनी वेबसाइट, परिसर के प्रवेश द्वार और अन्य स्थानों पर प्रदर्शित करना होगा। उनके अधिकार हिंदी, अंग्रेजी या अन्य स्थानीय भाषाओं में प्रदर्शित करने होंगे। इतना ही नहीं यदि सड़क दुर्घटना के किसी मामले में मदद करने वाला व्यक्ति स्वैच्छिक रूप से गवाह बनना चाहता है तो उसके बयान इत्यादि इन्हीं नियमों के आधार पर दर्ज करने होंगे।
इसके आलावा सड़क हादसे में अगर किसी की मौत हो जाती है तो अब सीधे तौर पर कंपनी को जुर्माना देना होगा। मोदी सरकार ने इस कानून में बड़ा बदलाव करते हुए यह फैसला लिया है। अब सड़क हादसे में किसी की मौत पर रोड़ बनाने वाली कंपनी को दोषी माना जाएगा। इसके साथ ही निर्माण कंपनी-ठेकेदार पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लिया जाएगा। हादसे में संबंधित इंजीनियर, कंसल्टेंट, हितधारकों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
बता दें कि मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2020 के सेक्शन 198- में इसका प्रावधान किया गया है। हालांकि, ये नियम फिलहाल नेशनल हाईवे के लिए है।




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