
नई दिल्ली (शोर सन्देश)। 38 कोयला खदानों की नीलामी प्रक्रिया के एक हिस्से के रूप में ऑनलाइन और ऑफलाइन बोली दस्तावेजों से युक्त तकनीकी बोलियां 30 सितंबर, 2020 को नई दिल्ली में बोलीदाताओं की उपस्थिति में शुरू की गईं। बोलीदाताओं को बैठक में व्यक्तिगत तौर पर या वर्चुअली शामिल होने का विकल्प प्रदान किया गया था। कोयले की बिक्री के लिए 38 कोयला खदानों की नीलामी प्रक्रिया 18 जून, 2020 को कोयला मंत्रालय द्वारा शुरू की गई थी। तकनीकी बोली जमा करने की अंतिम तिथि 29 सितंबर, 2020 को दोपहर 2:00 बजे थी। ऑनलाइन बोलियों को विकोड (डिक्रिप्ट) किया गया और बोलीदाताओं की उपस्थिति में इलेक्ट्रॉनिक रूप से खोला गया। इसके बाद, बोलीकर्ताओं की उपस्थिति में ऑफ़लाइन बोली दस्तावेजों वाले सीलबंद लिफाफे भी खोले गए। स्क्रीन पर बोली लगाने वालों के लिए पूरी प्रक्रिया प्रदर्शित की गई थी। 23 कोयला खदानों के लिए कुल 76 बोलियां प्राप्त हुई हैं। 19 कोयला खदानों के लिए दो या अधिक बोलियां प्राप्त हुई हैं। बोली का मूल्यांकन एक बहु-विषयक तकनीकी मूल्यांकन समिति द्वारा किया जाएगा और 19 अक्टूबर, 2020 से एमएसटीसीपोर्टल पर होने वाली इलेक्ट्रॉनिक नीलामी में भाग लेने के लिए तकनीकी रूप से योग्य बोलीदाताओं को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री डी.वी. सदानंद गौड़ा ने आंध्र प्रदेश में किसानों के लिए उर्वरकों की उपलब्धता आसान बनाने के लिए प्वाइंट ऑफ़ सेल (पीओएस) सॉफ्टवेयर के नए संस्करण 3.1, एसएमएस सेवा और घर पर उर्वरक पहुंचाने की सुविधा के तहत ऋतु भरोसा केन्द्रलु (आरबीके) का शुभारंभ किया। श्री गौड़ा ने कहा कि डीबीटी प्रणाली अखिल भारतीय स्तर पर 1 मार्च, 2018 को शुरू की गई थी। तब से लेकर अबतक यह प्रणाली बहुत अच्छी तरह से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि उर्वरक विभाग एकमात्र ऐसा विभाग है जिसने पूरे देश में उर्वरकों को सफलतापूर्वक गंतव्य तक पहुंचाने के लिए इस तरह की एक जटिल कंप्यूटर प्रणाली को लागू किया है। यह प्रणाली हमें राज्य, जिला और खुदरा बिक्री केन्द्रों पर वास्तविक समय के आधार पर उर्वरकों की उपलब्धता की जानकारी प्राप्त करने और उसकी निगरानी करने में सक्षम बनाती है। इस प्रणाली के माध्यम से ही पिछले दो वर्षों में उर्वरक सब्सिडी पूरी तरह से किसानों तक पहुंचाई गई है। यह निश्चित रूप से सशक्त डीबीटी प्रणाली का एक सफल प्रयास रहा है। ऋतु भरोसा केन्द्रलू (आरबीके) के माध्यम से उर्वरकों की होम डिलीवरी की नई पहल के तहत, राज्य सरकार ने सभी ग्राम पंचायतों में ऐसे 10,641 केन्द्र शुरु किए हैं ताकि किसानों को सभी तरह की गुणवत्ता युक्त सेवाएं प्रदान की जा सकें। इस प्रणाली के तहत, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बाद किसान अपने गाँव में ऐसे किसी भी केन्द्र पर उर्वरकों के लिए खरीद का ऑर्डर दे सकते हैं। इस ऑर्डर के आधार पर उवर्रक उनके घर पर पहुंचा दिया जाएगा।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए 28 अक्तूबर को मतदान किए जाएंगे। चुनाव आयोग पहले चरण के मतदान के लिए आज अधिसूचना जारी करेगा। वहीं, बिहार चुनाव के मद्देनजर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के आवास पर पहुंचे हैं।
बताया गया है कि दोनों नेताओं के बीच बिहार चुनाव की रणनीति को लेकर चर्चा होगी। इसके अलावा एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर भी बातचीत हो सकती है। बैठक के बाद एनडीए गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर अंतिम मुहर लगने की संभावना है। गौरतलब है कि बिहार में अक्तूबर-नवंबर महीने में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। पहले चरण के लिए 28 अक्तूबर को वोट डाले जाएंगे। कोरोना काल में हो रहे पहले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर आयोग चुनाव संबंधी दिशानिर्देश जारी कर चुका है।
इस बार उम्मीदवार ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन दोनों तरह से चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे। लेकिन नामांकन को लेकर प्रत्याशियों में असमंजस की स्थिति है क्योंकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी दलों के महागठबंधन दोनों खेमे में फिलहाल सीट बंटवारे को लेकर कोई सहमति नहीं बन सकी है।
पहले चरण की 71 सीटों के लिए नामांकन की प्रक्रिया आज से शुरू हो रही है। लेकिन सीट बंटवारे को लेकर सत्ताधारी एनडीए और विपक्षी दलों के महागठबंधन में अब तक कोई समझौता नहीं हो सका है। ऐसे में नामांकन शुरू होने के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर चुके उम्मीदवारों में बेचैनी देखी जा रही है।
हालांकि महागठबंधन और एनडीए दोनों ही जल्द ही सीट बंटवारे की घोषणा की बात कर रहे हैं। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार की राजनीति को देखते हुए सीट बंटवारे का मुद्दा जल्द सुलझता नजर नहीं आ रहा।

नई दिल्ली (शोर सन्देशa) । भारत की प्रमुख पनबिजली कंपनी तथा भारत सरकार का एक अनुसूचित ‘ए‘ मिनी रत्न उपक्रम एनएचपीसी लिमिटेड ने वर्ष 2020-21 के लिए संपर्क विज्ञापन (डिटेलिंग) टार्गेट को लेकर बिजली मंत्रालय के साथ 29.09.2020 को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया। इस एमओयू पर भारत सरकार के बिजली मंत्रालय के सचिव संजीव नंदन सहाय और एनएचपीसी के सीएमडी एके सिंह ने बिजली मंत्रालय तथा एनएचपीसी के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किया गया। भारत सरकार के बिजली मंत्रालय के सचिव संजीव नंदन सहाय और एनएचपीसी के सीएमडी ए के सिंह ने नई दिल्ली में वर्ष 2020-21 के लिए भारत सरकार के बिजली मंत्रालय तथा एनएचपीसी के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया। बिजली मंत्रालय के संयुक्त सचिव (हाइड्रो) तन्मय कुमार, एनएचपीसी के निदेशक (टेक्निकल) वाई के चौबे तथा एनएचपीसी के कार्यकारी निदेशक हरीश कुमार भी इस अवसर पर उपस्थित थे। एनएचपीसी के लिए हस्ताक्षरित एमओयू में एक्सेलेंट रेटिंग के तहत उत्पादन लक्ष्य 27500 एमयू रखा गया है जबकि पिछले वर्ष 26000 एमयू का लक्ष्य था। परिचालनों से राजस्व (निवल) के लिए एक्सेलेंट टारगेट 8900 करोड़ रुपये रखा गया है, परिचालनों से राजस्व (निवल) की प्रतिशतता के रूप में प्रचालन लाभ 38.00 प्रतिशत रखा गया है तथा पीएटी/औसत नेटवर्थ 10.50 प्रतिशत रखा गया है।
इसके अतिरिक्त, एमओयू में बजट का ईष्टतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए कैपेक्स टारगेट, ट्रेड रिसीवेबल्स से संबंधित टारगेट, पिछले वर्ष के दौरान वस्तुओं एवं सेवाओं की कुल खरीद के मुकाबले जीईएम पोर्टल के जरिये वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद के समग्र आधार एवं प्रतिशतता पर पिछले वर्ष में कंपनी के विरुद्ध ऋण के रूप में न स्वीकारे गए दावों में कटौती आदि शामिल की गई है।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएफसी) ने वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान पीएफसी द्वारा अर्जित किए जाने वाले विभिन्न लक्ष्यों का विवरण देते हुए भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के साथ कार्य प्रदर्शन आधारित ‘समझौता ज्ञापन’ पर हस्ताक्षर किए। इस समझौता ज्ञापन पर सचिव (विद्युत), भारत सरकार संजीव नंदन सहाय और पीएफसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक आर. एस. ढिल्लों ने विद्युत मंत्रालय और पीएफसी के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए। भारत सरकार ने परिचालन से राजस्व के प्रतिशत के रूप में परिचालन लाभ, औसत नेटवर्थ की प्रतिशतता के रूप में पीएटी और आईपीडीएस संबंधित मानदंडों जैसे गैर-वित्तीय मानदंडों जैसे विभिन्न कार्य प्रदर्शन संबंधित मानदंडों के साथ 36,000 करोड़ रुपये का महत्वाकांक्षी राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया है। पीएफसी पिछले कुछ वर्षों से अनुकरणीय कार्य प्रदर्शन कर रहा है और भारत सरकार में इसकी रेटिंग स्वयं इसके कार्य प्रदर्शन की गवाही देती है।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। हर माह एक भारतीय जवान दुश्मनों के हाथों नहीं, बल्कि खुद के खराब गोला-बारूद से घायल हो जाते हैं या शहीद भी हो जाते हैं।गोला-बारूद की आपूर्ति सरकारी आयुध फैक्ट्रियों से की जाती है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षाबलों में एक गोला-बारूद से जुड़ा हादसा औसतन प्रति सप्ताह रिपोर्ट किया जाता है। इससे जवान घायल या हताहत हो जाते हैं या उपकरणों को हानि पहुंचती है।
भारतीय सेना ने पिछले 6 साल में 960 करोड़ रुपये का घटिया खरीदा है। सेना की तरफ से की गई इस खरीद को लेकर सेना की एक आंतरिक रिपोर्ट में सवाल खड़े किए गए हैं। रिपोर्ट में खरीदे गए हथियारों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं।
सेना की तरफ से रक्षा मंत्रालय को सौंपी गई रिपोर्टृ में कहा गया है कि सरकारी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड से जितने रुपये में खराब गोला बारूद खरीदा गया है उतने में करीब 100 आर्टिलरी गन खरीदी जा सकती थी। रिपोर्ट के मुताबिक जिन हथियारों में कमियां बताई गईं हैं उनमें 23-MM के एयर डिफेंस शेल, आर्टिलरी शेल, 125 MM का टैंक राउंड समेत अलग-अलग कैलिबर की बुलेट्स शामिल हैं।
रिपोेर्ट में कहा गया है कि इन हथियारों की खरीद से न सिर्फ पैसों की बर्बादी हुई है बल्कि मानवीय क्षति भी हुई है। खराब साजो सामान के चलते घटनाओं के दौरान मानवीय क्षति की आवृत्ति एक हफ्ते में एक रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2014 के बाद से अनुचित गुणवत्ता के हथियारों के चलते 403 घटनाएं हुई हैं। राहत की बात यह है कि इन घटनाओं में कमी देखी गई है। साल 2014 में 114 घटनाएं हुई थी जबकि 2017 में 53, 2018 में 78 और साल 2019 में 16 ऐसी घटनाएं सामने आई थीं।
मुख्य आपूर्तिकर्ता आयुध फैक्ट्री बोर्ड द्वारा संचालित प्रतिष्ठान हैं। इनके खराब गोला-बारूद की वजह से दुर्घटनाएं होती हैं। इससे सशस्त्र बलों में आत्मविश्वास की कमी हो जाती है, जोकि वायुसेना या नौसेना से ज्यादा गोला-बारूद का प्रयोग करते हैं।
2020 में, त्रुटिपूर्ण गोला-बारूद से 13 जवान घायल हो गए, जबकि 2019 में 16 दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें 28 जवान घायल हो गए और तीन का निधन हो गया। 2018 में, 78 घटनाओं में कम से कम 43 जवान घायल हो गए और तीन ने अपनी जान गंवा दी। 2017 में इस बाबत 53 घटनाएं हुईं, जिसमें एक जवान की मौत हो गई और 18 अन्य घायल हो गए।
इस मामले में साल 2016 सबसे खराब रहा, जहां इस तरह की 60 घटनाओं में 19 जवान की मौत हो गई और 28 अन्य घायल हो गए।
इससे राजकोष को काफी क्षति पहुंचती है। अनुमान के मुताबिक, अप्रैल 2014 से अप्रैल 2019 के बीच इस वजह से 658.58 करोड़ रुपये के गोला-बारूद का शेल्फ लाइफ के बावजूद निस्तारण किया गया।
सूत्रों ने यह भी कहा कि 303.23 करोड़ रुपये के माइंस का भी उसके शेल्फ लाइफ के दौरान निस्तारण करना पड़ा। इससे पहले महाराष्ट्र के पलगांव में मई 2016 में माइंस दुर्घटना में 18 जवान शहीद हो गए थे।
सूत्रों ने कहा कि इससे 960 करोड़ रुपये की हानि हुई थी, जिससे 100, 155 एमएम मीडियम आर्टिलरी बंदूक खरीदा जा सकता था।
यह निश्चित है कि खराब गुणवत्ता वाले गोला-बारूद का जवानों पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। दुर्घटना से जानमाल की हानि होती है और साथ ही उपकरणों को प्रयोग से बाहर कर दिया जाता है।

कोट (शोर सन्देश)। प्रख्यात समाज सेवी व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पिता श्रीकृष्ण बिरला का निधन हो गया। 92 वर्षीय श्रीकृष्ण बिरला ने कल रात अंतीम सांस ली। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित देश-प्रदेश के कई दिग्गज नेताओं ने उनके निधन पर संवेदना जताई। आज किशोरपुरा मुक्तिधाम में उनके पुत्र राजेश बिरला, ओम बिरला ने उन्हें मुखाग्नि दी। श्रीकृष्ण बिड़ला कोटा के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता थे और 108 अधिकारियों की विधानसभा में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। उन्हें सहकारी क्षेत्र के दादा के रूप में जाना जाता था।
श्रीकृष्ण का जन्म 12 जून 1929 को कानवा, कोटा में हुआ था। उन्होंने पाटनपोल स्कूल में अपनी पढ़ाई पूरी की और 7 फरवरी 1949 को उनका विवाह इकलेरा निवासी शकुंतला देवी से हुआ। 1950 में मैट्रिक पास करने के बाद, उन्होंने संक्षिप्त रूप से कंवास तहसील में एक अंग्रेजी क्लर्क के रूप में काम किया, लेकिन फिर उन्हें कोटा के कस्टम उत्पाद शुल्क में कनिष्ठ लिपिक के रूप में नियुक्त किया गया। 1976 में विभाग के अधीक्षक के पद पर अपनी पदोन्नति के बाद, वह जयपुर में स्थानांतरित हो गए, जहाँ उन्हें OS फर्स्ट ग्रेड में पदोन्नत किया गया। 1986 में, वह फिर से कोटा के वाणिज्यिक कर मंत्रालय चले गए जहाँ उन्होंने 1988 तक काम किया।
श्रीकृष्ण बिड़ला अपनी सेवा के दौरान कर्मचारियों के हितों के प्रति सजग सैनिक रहे हैं। 1958 से 1961 तक, उन्होंने कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई और 1963, 1971 और 1980 में भी कर्मचारियों के हितों के लिए लड़ते हुए जेल में रहे। राज्य सेवा में व्यस्त होने के बाद भी उनका सामाजिक क्षेत्र से गहरा जुड़ाव था। वे 3 बार माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष रहे और लगभग 15 वर्षों तक कोटा जिला माहेश्वरी सभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
श्रीकृष्णा ने कोटा में सहकारी क्षेत्र को अग्रणी और सक्षम नेतृत्व प्रदान करके सहकारी को मजबूत किया। वह वर्ष 1963 से कोटा अधकारी सहकारी समिति लिमिटेड 108 आर के सचिव थे और लगभग 26 वर्षों तक समिति के अध्यक्ष के रूप में काम करने के बाद, वे कोटा कर्मचारी सहकारी समिति को राजस्थान में एक नई पहचान दिलाने में सफल रहे। इसी कारण से, उन्हें पूरे राजस्थान में सहकार पुरुष के रूप में भी जाना जाता था।

सीएम योगी ने गठित की तीन सदस्यीय एसआईटी टीम
गोरखपुर (शोर सन्देश)। हाथरस की 19 साल की दलित लड़की के साथ गैंगरेप और फिर उसकी मौत की घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात की है। ये जानकारी योगी आदित्यनाथ की ओर से दी गई। सीएम योगी के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया कि पीएम ने उनसे इस पूरी घटना पर बात कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है। हाथरस गैंगरेप मामले में मंगलवार को पीड़िता की मौत और उसके बाद परिवार की मर्जी के खिलाफ जबरन अंतिम संस्कार पर चौतरफा घिरी उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले पर चुप्पी तोड़ी है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मामले में एसआईटी गठित करने का ऐलान किया है। साथ ही फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाने की बात कही है।
उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी किए गए बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस की घटना के लिए दोषी व्यक्तियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाने और प्रभावी पैरवी करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हाथरस की घटना पर जांच हेतु तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है। एसआईटी अपनी रिपोर्ट 7 दिन में प्रस्तुत करेगी। सीएम ने पूरे घटनाक्रम पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए टीम को घटना की तह तक जाने के निर्देश दिए हैं।
पीड़िता की मौत के बाद अब यूपी में सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधा है। वहीं, इससे पहले समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती समेत कई विपक्षी पार्टियों ने योगी सरकार को घेरा।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। दिल्ली पुलिस ने हाल ही में संसद द्वारा पारित किए गए कृषि कानून के विरोध में इंडिया गेट के पास ट्रैक्टर जलाने की घटना के मामले में पंजाब युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बरिंदर सिंह ढिल्लों सहित चार और लोगों को गिरफ्तार किया है। जिन तीन अन्य को गिरफ्तार किया गया है, वे हरीश पंवार और अब्राहम रॉय मणि दोनों अखिल भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव) और एआईवाईसी के सचिव व पंजाब युवा कांग्रेस के प्रभारी बंटी ऋषिकेश) शेल्के हैं। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में पहले छह लोगों को गिरफ्तार किया था।
पुलिस के अनुसार, तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में कानून की विभिन्न धाराओं के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसमें सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत गैर-जमानती धारा भी शामिल है। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों पर आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 188, महामारी रोग अधिनियम और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, कृषि विधेयकों के विरोध में कथित रूप से पंजाब युवा कांग्रेस के लगभग 15-20 अज्ञात व्यक्ति सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में इंडिया गेट से कुछ दूरी पर ट्रैक्टर लेकर पहुंचे और इसे आग के हवाले कर दिया। बाद में आग पर काबू पा लिया गया और ट्रैक्टर को पुलिस ने मौके से हटा दिया।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार को एक बार फिर कृषि संबंधी कानूनों को लेकर सरकार पर हमला बोला और कहा कि भारत के भविष्य के लिए इन कानूनों का विरोध करना होगा। राहुल गांधी ने किसानों के साथ डिजिटल बातचीत के दौरान यह भी दावा किया कि नोटबंदी और जीएसटी की तरह, इन कानूनों का उद्देश्य किसानों और श्रमिकों को कमजोर करना भी है।
इस डिजिटल संवाद में, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार और कई अन्य राज्यों के किसानों ने इन कानूनों के बारे में बताया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राहुल ने दावा किया, `यह विमुद्रीकरण के समय कहा गया था कि यह काले धन के खिलाफ युद्ध है।` यह सब झूठ था। इसका उद्देश्य किसान-मजदूर को कमजोर करना था। इसके बाद जीएसटी का वही लक्ष्य था। `उन्होंने कहा,` कोरोना महामारी के दौरान, किसानों, श्रमिकों और गरीबों को पैसा नहीं दिया गया था। केवल कुछ सबसे बड़े उद्योगपतियों को पैसा दिया गया था। कोरोना के दौरान, इन उद्योगपतियों की आय में वृद्धि हुई और किसानों की आय में कमी आई। उसके बाद भी उन्हें पैसे दिए गए। ``
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इन तीन कानूनों और नोटबंदी और जीएसटी में बहुत अंतर नहीं है। फर्क सिर्फ इतना है कि कुल्हाड़ी को पहले आपके पैर में और अब सीने में चाकू से वार किया गया था। राहुल गांधी ने आगे कहा, `मेरा मानना है कि इन कानूनों का विरोध देश के भविष्य के लिए करना होगा, किसानों के लिए नहीं।`