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देश-विदेश

*ज्वालामुखी फटने से अब तक 13 की मौत राहत कार्य में जुटे हैं बचावकर्मी*

05-Dec-2021

जावा/नई दिल्ली (शोर संदेश) इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर सेमरू ज्वालामुखी फटने के कारण यहां मरने वालों की संख्या 13 पहुंच गई है। इसकी पुष्टि रविवार को की गई। वहीं इंडोनेशिया के आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रवक्ता अब्दुल मुहरी ने बताया कि मरने वाले 13 लोगों में से दो की पहचान कर ली गई है। इस प्राकृतिक आपदा में कई लोग घायल भी हुए हैं, जिसमें कई अस्पताल में भर्ती हैं। सरकार का कहना है कि ज्यादातर लोग ज्वालामुखी फटने के कारण जल गए हैं। 

सुबह आया था भूकंप 
इंडोनेशिया के टोबेलो से 259 किमी की दूरी पर उत्तर दिशा की ओर आज सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। अमेरिका के जियोलॉजिकल सर्वे से मिली जानकारी के अनुसार, रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 6.0 दर्ज की गई है। हालांकि, नुकसान की कोई सूचना नहीं है।


अग्रिम मोर्चों पर तैनाती के लिए 3 लाख सैनिकों की होगी भर्ती, राष्ट्रपति ने दिए आदेश

30-Nov-2021

बीजिंग/नई दिल्ली (शोर संदेश)। जंग के दौरान अग्रिम मोर्चों पर तैनाती के लिए चीन जल्द ही तीन लाख और सैनिकों की भर्ती करने जा रहा है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने युद्धों में बढ़त बनाने के लिए सेना में नई  भर्ती का निर्देश दिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक तीन लाख और सैनिकों की आवश्यकता पड़ेगी।राष्ट्रपति जिनपिंग ने युद्ध में बढ़त बनाने के लिए अग्रिम मोर्चों पर नई तैनातियों का आदेश दियाचीनी सेनाओें के मुख्य कमांडर शी चिनपिंग ने सैन्य प्रतिभाओं के लिए हुए सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि प्रतिभाओं के पास सशस्त्र चीनी सेना में उच्च गुणवत्ता के विकास की कुंजी है। साथ ही सैन्य प्रतिस्पर्धा में विजयी होने के लिए और भावी युद्धों में बढ़त के लिए सैनिकों का प्रतिभावान होना जरूरी है। शी ने कहा कि नई प्रतिभाओं को समर्थन दिए जाने की जरूरत है, ताकि पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के वर्ष 2027 तक के लक्ष्यों को निर्धारित किया जा सके। 209 अरब डालर के सालाना सैन्य बजट के साथ चीनी सेना को अत्याधुनिक बनाने की कवायद जारी है। संगठनात्मक सुधारों के साथ ही उन्हें हाइपरसोनिक हथियारों समेत नए अस्त्र-शस्त्रों से लैस किया जा रहा है। अमेरिकी सेना के अनुसार, चीन ने हाल ही में लंबी दूरी की मिसाइल लांच की है जो पूरी दुनिया का फेरा लगा सकती है। इसे हाइपरसानिक वाहन से छोड़ा गया था और यह लक्ष्य को भेदते हुए चीन लौट आई थी।चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि लड़ने की क्षमता को और मजबूत करने व जीत को शुरुआती बिंदु बनाने की जरूरत है। इसके लिए सैन्य प्रतिभा को उभारना ही परम लक्ष्य है। युद्ध जीतने के लिए सैन्य अफसरों को वैज्ञानिक शिक्षा के साथ ही तकनीकी क्षमताओं को भी बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रथम श्रेणी के सैन्य स्कूलों को भी स्थापित करने की जरूरत है। ताकि सैन्य अफसरों को प्रथम श्रेणी का सैन्य प्रशिक्षण मिल सके।


*दुनिया को आगाह करने की मिल रही सजा मंडराने लगा प्रतिबंध का खतरा*

28-Nov-2021

 केप टाउन/नई दिल्ली (शोर सन्देश)। कोरोना के नए वेरिएंट की पहचान करने और दुनिया को आगाह करेने वाले देश पर अब प्रतिबंध का खतरा मंडराना लगा है। दरअसल ओमिक्रॉन वैरिएंट मिलने के बाद दुनिया के तमाम देशों ने दक्षिण अफ्रीका पर कई तरह के प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए हैं। पहले चरण में कई यूरोपियन देशों ने दक्षिणी अफ्रीकी देशों की हवाई उड़ानों को निलंबित कर दिया है। इस बीच दक्षिण अफ्रीका का बयान सामने आया है। देश के स्वास्थ्य मंत्री जो फाहला ने कहा है कि दक्षिण अफ्रीका के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, वह गलत है। हमें एडवांस जीनोम सीक्वेंसिंग के जरिए नए वैरिएंट को खोजने की सजा दी जा रही है।

दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रालय की ओर से एक बयान में कहा गया कि हमने कोरोना के नए वैरिएंट को जल्दी खोजकर दुनिया को आगाह करने का काम किया है। यह वैरिएंट डेल्टा से भी ज्यादा खतरनाक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे चिंताजनक श्रेणी में रखा है। हमारी अच्छी वैज्ञानिक तकनीकों की तारीफ होनी चाहिए, लेकिन दुनिया हमारे प्रति सौतेला व्यवहार कर रही है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कोरोना की रोकथाम के लिए हम भी उतने ही प्रयास कर रहे हैं, जितने कि कोई दूसरा देश। हमारे पास विश्वस्तरीय संसाधन मौजूद हैं। 

प्रतिबंधों से अर्थव्यवस्था को पहुंचेगी चोट

कोरोना की पहली व दूसरी लहर के दौरान लगभग सभी देशों ने अपनी-अपनी सीमाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया था। यहां तक कि आयात-निर्यात पर भी कई तरह के प्रतिबंध लागू कर दिए गए थे। इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था को धक्का लगा है। उत्पादन, कच्चे माल की भारी कमी हो रही है। इससे अभी तक देश उभर नहीं पाए हैं, इस बीच दक्षिण अफ्रीका पर एक बार फिर से प्रतिबंधों का खतरा मंडरा रहा है। 

तेजी से फैल रहा कोरोना का नया वैरिएंट 

ओमिक्रॉन का सबसे पहले पता दक्षिण अफ्रीका में लगा था। कोरोना वायरस का यह नया वैरिएंट, अब तक के सभी वैरिएंट से ज्यादा संक्रामक बताया जा रहा है। आलम यह है ओमिक्रॉन अब तक दक्षिण अफ्रीका के साथ ही साथ इजराइल, बोत्सवाना, हांगकांग, बेल्जियम व अन्य देशों तक पहुंच चुका है।


नए स्ट्रेन के चलते छह अफ्रीकी देशों से विमान सेवा रद्द

26-Nov-2021

लंदन/नई दिल्ली (शोर संदेश)। अफ्रीकी देशों में कोरोना वायरस के मिल रहे नए वैरिएंट ने फिर से चिंता बढ़ा दी है। इसी कड़ी में यूनाइटेड किंगडम ने गुरुवार को छह देशों से उड़ानों के अस्थायी निलंबन की घोषणा की है। यूके के स्वास्थ्य सचिव साजिद जाविद ने यह जानकारी दी है। यूके के स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी (यूकेएचएसए) की ओर से वैरिएंट बी.1.1.529 को जांच के तहत एक संस्करण (वीयूआई) घोषित करने के बाद विमान रद्द करने का फैसला लिया गया है। दक्षिण अफ्रीका में 30 से अधिक नए मामले मिले हैं, जो नए वेरिएंट के हैं।

डेल्टा से भी खतरनाक है यह वैरिएंट

बताया जा रहा है कि यह वैरिएंट डेल्टा और डेल्टा प्लस से भी ज्यादा खतरनाक है। यूके की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी ने एक बयान में कहा, `वैरिएंट में बड़ी संख्या में स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन के साथ-साथ वायरल जीनोम के अन्य हिस्सों में म्यूटेशन शामिल हैं। ये संभावित रूप से जैविक रूप से महत्वपूर्ण म्यूटेशन हैं जो टीके, उपचार और ट्रांसमिशन के संबंध में वायरस के व्यवहार को बदल सकते हैं। इसके लिए अधिक जांच और सावधानी बरतने की आवश्यकता है।स्वास्थ्य सचिव जावेद ने कहा, `हम सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए एहतियाती कार्रवाई कर रहे हैं। हम लगातार टीकाकरण अभियान को भी मजबूत कर रहे हैं। सर्दियों का मौसम आ रहा है, इसलिए हम स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं।`मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना में संभावित रूप से तेजी से फैल रहे सीओवीआईडी स्ट्रेन पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार को एक आपातकालीन बैठक बुला रहा है। इससे पहले, यूके की मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि यूके के वैज्ञानिकों ने बोत्सवाना में एक कोरोना वायरस स्ट्रेन की उपस्थिति की चेतावनी दी थी, जिसमें 32 उत्परिवर्तन होते हैं।


संसद ने विधेयक को दी मंजूरी, अब सजा-ए-मौत के खिलाफ अपील करा सकेंगे जाधव

17-Nov-2021

इस्लामाबाद/नई दिल्ली (शोर संदेश)। पाकिस्तान की संसद ने `अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (समीक्षा और पुनर्विचार) विधेयक, 2020` को मंजूरी दे दी है। यह कुलभूषण जाधव को देश के उच्च न्यायालयों में अपनी सजा की अपील करने की अनुमति देगा।कानून बनने के बाद अब कुलभूषण जाधव को आईसीजे जैसी उच्च अदालतों में मौत की सजा के खिलाफ अपील करन की आजादी मिल जाएगी। जाधव को पाकिस्तान की मिलिट्री कोर्ट की तरफ से मौत की सजा मिली थी। इस विधेयक को पाकिस्तान के कानून और न्याय मंत्री फरोघ नसीम की तरफ से पेश किया गया था।भारतीय नौसेना के रिटायर्ड अधिकारी कुलभूषण जाधव की मौत की सजा मामले की सुनवाई कर रहे इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने भारत से कानूनी कार्यवाही में सहयोग करने के लिए कहा है। कोर्ट ने इसी साल पांच मई को पाकिस्तान के कानून एवं न्याय मंत्रालय की याचिका पर सुनवाई शुरू की थी, जिसमें जाधव के लिए वकील नियुक्त करने की मांग की थी।

क्या है मामला?

सेवानिवृत्त भारतीय नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव (50) को पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने अप्रैल, 2017 में जासूसी करने और आतंकवाद फैलाने के आरोप में फांसी की सजा सुनाई थी। भारत ने इसके खिलाफ इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) में अपील की थी।भारत का कहना है कि जाधव नौसेना से सेवानिवृत्ति के बाद व्यापार कर रहे हैं और उनके इसी सिलसिले में ईरान जाने पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ने उन्हें झूठे इल्जाम में फंसाने के लिए वहां से अगवा किया था। भारत ने पाकिस्तान पर जाधव तक राजनयिक पहुंच उपलब्ध नहीं कराने का भी आरोप लगाया था।आईसीजे ने जुलाई, 2019 में पाकिस्तान को जाधव मामले की दोबारा समीक्षा करने, उसे सैन्य अदालत के खिलाफ अपील का मौका देने और भारत को उस तक राजनयिक पहुंच उपलब्ध कराने का आदेश दिया था।


*टीका न लगवाने वालों को लॉकडाउन में बंद रखने का ऐलान*

13-Nov-2021

फिर महामारी का केंद्र बना यूरोप, पश्चिमी देश ज्यादा प्रभावित

विएना/नई दिल्ली (शोर संदेश) कोरोना का बढ़ते कहर के बीच ऑस्ट्रिया ने टीका लगवाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का फैसला किया है और उन्हें लॉकडाउन में घरों में रखने से जुड़ा ऐलान कर दिया। दरअसल यूरोप में कोरोना का कहर बढ़ता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने तो यहां तक कह दिया है कि यूरोप अब एक बार फिर महामारी का केंद्र बन गया है। कोरोना से फिलहाल सबसे ज्यादा प्रभावित पश्चिमी यूरोप है, जहां संक्रमितों की बढ़ती संख्या के चलते लॉकडाउन जैसे कदम उठाने पड़ रहे हैं।

ऑस्ट्रिया के चांसलर एलेक्जेंडर शालेनबर्ग ने शुक्रवार को एलान किया कि अपर ऑस्ट्रिया और साल्जबर्ग में टीके की खुराक लेने वाले लोग सोमवार से खास वजहों, जैसे जरूरत का सामान खरीदने, डॉक्टर से मिलने या नौकरी के लिए ही घरों से बाहर निकल पाएंगे। शालेनबर्ग ने कहा कि वे देशभर में ऐसे ही कदमों को लागू करने पर विचार कर रहे हैं। बताया गया है कि ऑस्ट्रिया के साथ पड़ोसी जर्मनी में भी संक्रमण की रफ्तार तेज हो गई है।
कोरोना महामारी के तकरीबन दो साल बाद भी यूरोप के पश्चिमी क्षेत्र में संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। यह काफी चौंकाने वाली बात है, क्योंकि इस क्षेत्र में टीकाकरण की दरें अधिक हैं और स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियां अच्छी हैं। इसके बावजूद अब कोरोना के लौटने की वजह से लॉकडाउन लगाने की नौबत आन पड़ी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि यूरोप में पिछले हफ्ते कोरोना वायरस से जान गंवाने वाले लोगों की संख्या 10 फीसदी तक बढ़ गई। एजेंसी ने पिछले हफ्ते आधिकारिक घोषणा में कहा कि यूरोप फिर से महामारी का केंद्र बनने जा रहा है।
वैक्सिनेशन की दर ज्यादा होने के बावजूद बढ़ रहे संक्रमित
पश्चिमी यूरोप के कुछ देशों जैसे कि जर्मनी और ब्रिटेन में दुनिया में संक्रमण के सबसे अधिक नए मामले रहे हैं जबकि वहां कोरोना टीके लगाने की दर ज्यादा है। पश्चिम यूरोप में सभी देशों में टीकाकरण की दर 60 प्रतिशत से अधिक है और पुर्तगाल-स्पेन जैसे देशों में टीकाकरण की दर और अधिक है।
एक्सेटर यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिसिन एंड हेल्थ में वरिष्ठ क्लिनिकल व्याख्याता डॉ. भारत पनखानिया ने कहा कि लॉकडाउन के बाद से व्यापक पैमाने पर सामाजिक गतिविधियां शुरू होने के साथ टीके की खुराक लेने वाले लोग और महीनों पहले टीके की खुराक ले चुके लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आना संक्रमण के बढ़ते मामलों के लिए जिम्मेदार है।
नीदरलैंड्स में महामारी फैलने के बाद से संक्रमण के रिकॉर्ड मामले दर्ज किए गए। अस्पतालों की ओर से चेतावनी दी गई है कि आगे हालात और बिगड़ सकते हैं। हालांकि, अधिकारी बहुत ज्यादा सख्ती बरतने से इनकार कर रहे हैं।
80% टीकाकरण करा चुके स्पेन में भी फैला कोरोना
एक समय यूरोप में कोरोना वायरस से सबसे अधिक प्रभावित रहे स्पेन ने संभवत: यह उदाहरण दिया है कि कैसे खतरे से निपटा जा सकता है। उसने अपनी 80 प्रतिशत आबादी को टीके की खुराक दे दी है और बाहर मास्क लगाना भी अनिवार्य नहीं किया। इसके बावजूद लोगों ने मास्क लगाना जारी रखा है। हालांकि, इसके बावजूद वहां संक्रमण के मामले थोड़े बढ़े हैं।

 


*मेटा का बड़ा फैसला फेसबुक में बंद किया यह सिस्टम*

03-Nov-2021

कैलीफोर्निया/नई दिल्ली (शोर संदेश) फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा ने अब फेस रिकग्निशन सिस्टम को बंद कर दिया है। कंपनी ने मंगलवार को इसकी जानकारी है। फेसबुक ने कहा कि वह इस बदलाव के चलते 1 अरब से अधिक लोगों के फेस रिकग्निशन टेम्पलेट को हटाएगा। कंपनी ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि फेसबुक के रोजाना सक्रिय यूजर्स में से एक तिहाई से अधिक या 600 मिलियन से अधिक अकाउंट ने फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने का विकल्प चुना।


फेसबुक की नयी पैरेंट (होल्डिंग) कंपनीमेटामें कृत्रिम बुद्धिमत्ता विभाग के उप प्रमुख जेरोम पेसेंटी द्वारा मंगलवार को पोस्ट किए गए ब्लॉग के अनुसार, ‘प्रौद्योगिकी के इतिहास में चेहरा पहचानने के उपयोग की दिशा में यह कदम सबसे बड़ा बदलाव होगा। हम फेसबुक पर फेस रिकग्निशन सिस्टम को बंद कर रहे हैं। जिन लोगों ने इसका चुनाव किया है उनकी अब फ़ोटो और वीडियो में ऑटोमेटिकली रिकॉग्नाइज नहीं किए जाएंगे और हम एक अरब से अधिक लोगों के व्यक्तिगत फेशियल रिकग्निश टेम्प्लेट को हटा देंगे।


हालांकि इस कदम से ऑटोमेटिक ऑल्ट टेक्स्ट टेक्नोलॉजी प्रभावित होगी, जिसका उपयोग कंपनी नेत्रहीन या नेत्रहीन लोगों के लिए फोटो का पहचानने के लिए करती है। फेस रिकग्निशन सिस्टम को फेसबुक से आने वाले हफ्तों में हटा दिया जाएगा। फेसबुक ने कहा, “समाज में फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी को लेकर कई चिंताएं हैं, और नियामक अभी भी इसके उपयोग को नियंत्रित करने वाले नियमों का एक क्लियर सेट प्रदान करने की प्रक्रिया में हैं। इस चल रही अनिश्चितता के बीच, हम मानते हैं कि रिकग्निशन टेक्नोलॉजी को इस्तेमाल के मामलों के एक नैरो सेट तक सीमित करना उचित है।फेस रिकग्निशन सिस्टम के उपयोग को समाप्त करना इस तरह की व्यापक पहचान से दूर एक कंपनी के हित में कदम का हिस्सा है।
अभी हाल ही में फेसबुक ने कंपनी की नाम बदलकर मेटा रख दिया। फेसबुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मार्क जुकरबर्ग ने कहा था कि भविष्य के लिए डिजिटल रूप से हो रहे बदलाव को शामिल करने के प्रयास के तहत उनकी कंपनी को अब नये नाममेटाके तौर पर जाना जाएगा। जुकरबर्ग इसे ‘‘मेटावर्स’’ कहते हैं। हालांकि आलोचक कहते हैं कि यह फेसबुक पेपर्स से दस्तावेज लीक होने से उत्पन्न विवाद से ध्यान भटकाने का एक प्रयास हो सकता है।


*8 से शुरू होगा 5 से 11 साल के बच्चों का वैक्सीनेशन इस टीके को मिले मंजूरी*

03-Nov-2021

वाशिंगटन/नई दिल्ली (शोर संदेश) 8 नवंबर से 5-11 साल के बच्चों का कोरोना वैक्सीनेशन शुरू होने जा रहा है। महामारी का कहर दुनिया में लगातार जारी है। व्यस्क लोगों की जिंदगी बचाने के लिए जहां लगातार टीकाकरण जारी है वहीं अब अमेरिका में बच्चों की वैक्सीन की उम्मीद लगाए बैठे अभिभावकों का इंतजार भी खत्म होने वाला है। दरअसल, अमेरिका में 8 नवंबर से 5-11 साल के बच्चों को फाइजर की वैक्सीन लगाई जाएगी।  वहीं इस सफलता पर राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि यह हमारे लिए एकटर्निंग प्वाइंटहै। राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि काफी समय से अमेरिका में बच्चों की कोरोना वैक्सीन के लिए लगाए बैठे अभिभावकों का इंतजार खत्म होने वाला है। अमेरिका का यह फैसला बच्चों द्वारा दूसरों को वायरस फैलाने की आशंकाओं को कम करेगा। बच्चों की सुरक्षा की दृष्टि से यह हमारे देश के लिए अहम कदम है। बता दें कि 29 अक्तूबर को अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) ने इसकी मंजूरी दे दी थी, इसके बाद अब इसे सरकार द्वारा भी हरी झंडी मिल गई है।

29 अक्तूबर को एफडीए ने दी थी मंजूरी
बता दें कि 29 अक्तूबर को अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) ने इसकी मंजूरी दे दी थी, इसके बाद अब इसे सरकार द्वारा भी हरी झंडी मिल गई है। फडीए ने छोटे बच्चों में फाइजर के टीके की 10-माइक्रोग्राम खुराक को अधिकृत किया है। वहीं, 12 साल और उससे ज्यादा उम्र वाले बच्चों के लिए मूल शॉट 30 माइक्रोग्राम है।
यूएई में भी मिली मंजूरी
अमेरिका के बाद संयुक्त अरब अमीरात(यूएई) ने भी अपने यहां 5 से 11 साल के बच्चों के लिए फाइजर की कोरोना वैक्सीन को मंजूरी दे दी है। बता दें कि यूएई में 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए फाइजर की वैक्सान को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। 
छोटे बच्चों का टीकाकरण हमें सामान्य स्थिति में लौटने के करीब लाएगा: एफडीए 
वहीं इससे पहले एफडीए के अधिकारी जेनेट वुडकॉक ने अपने बयान में कहा था कि कोविड-19 के खिलाफ छोटे बच्चों का टीकाकरण हमें सामान्य स्थिति में लौटने के करीब लाएगा। टीके की सुरक्षा और प्रभावशीलता से संबंधित डाटा के व्यापक और कठोर मूल्यांकन से माता-पिता और अभिभावकों को आश्वस्त करने में मदद मिलेगी कि यह टीका हमारे उच्च मानकों को पूरा करता है।


*कई देशों में जीरो हुआ संक्रमण यहां तेजी से सुधर रहे हालात*

03-Nov-2021

जिनेवा/नई दिल्ली (शोर संदेश) पिछले दो सालों में कोरोना ने कई देशों में जमकर कहर बरपाया। इस पीढ़ी ने सदी की सबसे बड़ी महामारी भी देखी तो मजबूत पक्ष यह भी रहा कि इस बीमारी ने कई देशों को आत्मनिर्भर भी बना दिया, और इन देशों ने स्वयं के टीके भी लांच किए। हालांकि, इस महामारी का मुकाबला करने में हमने दुनियाभर में  50 लाख लोगों को गंवा दिया। लड़ाई में 240 मिलियन लोग संक्रमित भी हुए। इन सब के बीच अच्छी खबर यह है कि एक दो देश छोड़ दें तो दुनिया के तमाम देशों में कोरोना संक्रमण धीरे-धीरे घट रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, कई ऐसे देश हैं जहां संक्रमण की दर काफी कम हो गई है। 
भारत में काबू में आया कोरोना  भारत में कोरोना वायरस फिलहाल काबू में रहा है। केंद्रीय आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 259 दिनों में देश में सबसे कम कोरोना संक्रमित व्यक्ति सामने आए हैं। पिछले 24 घंटे में देश में 10,423 कोरोनो के नए मामले सामने आए हैं। वहीं अब सक्रिय मामले भी घटकर 1,53,776 रह गए हैं, जो 250 दिनों में सबसे कम है। 
इन देशों में जीरो हुआ संक्रमण
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने उन देशों की सूची जारी की है, जहां संक्रमण की दर जीरो हो चुकी है। पिछले 24 घंटे में इन देशों में एक भी कोरोना संक्रमित व्यक्ति की पुष्टि नहीं हुई है। जिन देशों में एक भी संक्रमित नहीं आए हैं, उनमे कनाडा, अर्जेंटीना, स्पेन, बांग्लादेश, बेल्जियम, कोस्टा रिका, श्री लंका, इक्वाडोर, म्यांमार, होंडुरास, घाना, अल साल्वाडोर, कैमरून, मालदीव और लक्जमबर्ग शामिल हैं।
इन देशों में काफी कम हुआ संक्रमण 
डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के अनुसार, स्विट्जरलैंड में पिछले 24 घंटों में कोरोना के सिर्फ तीन नए मामले सामने आए हैं। इसी तरह, ओमान में आठ और जाम्बिया में पांच नए मामले दर्ज किए गए। मोज़ाम्बिक, कोसोवो, सेनेगल, मलावी, इस्वातिनी, बुरुंडी और मेडागास्कर में 10 या उससे कम नए कोविड के मामले दर्ज किए गए हैं। 


फेसबुक ने बदला अपना नाम

29-Oct-2021

मेंलो पार्क/नई दिल्ली (शोर संदेश)। फेसबुक के को-फाउंडर और सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कंपनी के नए नाम की घोषणा कर दी है। फेसबुक को अब नए नाम Meta (मेटा) से जाना जाएगा, जबकि जिसके लिए फेसबुक ने अपना नाम बदला है, उसे मेटावर्स के नाम से जाना जाएगा। मेटावर्स एक अलग ही दुनिया है जो कि पूरी तरह से इंटरनेट पर निर्भर है। मेटावर्स के लिए फेसबुक लगातार निवेश भी कर रहा है। फेसबुक के अलावा कई अन्य कंपनियां भी मेटावर्स बनने पर विचार कर रही हैं। मार्क जुकरबर्ग ने कंपनी के नए नाम के एलान के दौरान कहा, `हमने सामाजिक मुद्दों से जूझने और काफी करीबी प्लेटफॉर्म पर एक साथ रहते हुए बहुत कुछ सीखा है और अब समय आ गया है कि हमने जो कुछ भी सीखा है उसके अनुभव से एक नए अध्याय की शुरुआत करें। मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि आज से हमारी कंपनी अब मेटा है। हमारा मिशन वही है। हमारे एप्स और ब्रांड के नाम नहीं बदल रहे हैं। आज हम एक सोशल मीडिया कंपनी के नाम से जाने जाते हैं, लेकिन डीएनए के हिसाब से हम एक ऐसी कंपनी हैं जो लोगों को जोड़ने वाली टेक्नोलॉजी विकसित करती हैं।`आपके लिए यह जानना सबसे जरूरी है कि फेसबुक के नए एलान के बाद क्या-क्या बदला है और क्या नहीं बदला है। कंपनी की सिर्फ ब्रांडिंग बदली है यानी फेसबुक कंपनी को अब मेटा (Meta) के नाम से जाना जाएगा। कंपनी के हेडक्वॉटर पर मेटा लिखा जाएगा न कि फेसबुक। फेसबुक एप का नाम नहीं बदल रहा है और न ही इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और फेसबुक मैसेंजर का नाम बदल रहा है। कंपनी के विभिन्न पदों में भी कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है, लेकिन 1 दिसंबर से कंपनी के स्टॉक का स्टिकर MVRS के नाम से होगा। कंपनी के हेडक्वॉटर में अंगूठा वाला (लाइक) लोगो अब हट गया है और उसकी जगह नए लोगो ने जगह ले ली है जो कि इनफिनिटी जैसा है।

मार्क जुकरबर्ग की नजर में मेटा क्या?

मार्क जुकरबर्ग ने मेटावर्स को एक वर्चुअल एनवायरमेंट (आभासी वातावरण) कहा है। जुकरबर्क के मुताबिक आप महज स्क्रीन पर देखकर एक अलग दुनिया में जा सकते हैं जहां आप लोगों से वर्चुअल रियलिटी हेडसेट, आग्युमेंट रियलिटी चश्में, स्मार्टफोन एप आदि के जरिए जुड़ सकेंगे, गेम खेल सकेंगे, शॉपिंग कर सकेंगे और सोशल मीडिया इस्तेमाल कर सकेंगे। मेटावर्स में आप आभासी रूप से वो सारे काम कर सकेंगे जो आप आमतौर पर करते हैंं। जुकरबर्ग ने कहा है कि मेटावर्स टेक्नोलॉजी के जरिए लाखों लोगों को नौकरी मिलेगी।मेटावर्स क्या है?मेटावर्स भले ही आज अचानक से चर्चा में आया है लेकिन यह काफी पुराना शब्द है। 1992 में नील स्टीफेंसन ने अपने डायस्टोपियन उपन्यास `स्नो क्रैश` में इसका जिक्र किया था। स्टीफेंसन के उपन्यास में मेटावर्स का मतलब एक ऐसी दुनिया से था जिसमें लोग गेम में डिजिटल दुनिया वाले गैजेट जैसे हेडफोन और वर्चुअल रियलिटी की मदद से आपस में कनेक्ट होते हैं। मेटावर्स का इस्तेमाल पहले से गेमिंग के लिए भी हो रहा है। मेटावर्स में क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल होता है। सीधे शब्दों में कहें तो मेटावर्स इंटरनेट की एक नई दुनिया है जहां लोग उपस्थित ना होते हुए भी मौजूद रहेंगे, हालांकि मेटावर्स के पूरा होने में अभी लंबा वक्त लगेगा।




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