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कश्मीर पर राग अलापने पर स्नेहा ने बंद की इमरान की बोलती…

25-Sep-2021

संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान को मिला करारा जवाब

न्यूयॉर्क/नई दिल्ली (शोर संदेश)। यूएनजीए की बैठक में पाकिस्तान ने कश्मीर के मसले पर एक बार फिर घड़ियाली आंसू बहाए हैं। इमरान खान ने कश्मीर पर रोना रोया तो भारत ने भी करारा पलटवार किया। पाकिस्तान के आरोपों पर भारत की ओर से फर्स्ट सेक्रेटरी स्नेहा दुबे ने उसकी क्लास लगाई।यूएनजीए की बैठक के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कश्मीर के मुद्दे पर एक के बाद एक गलत तथ्यों को रखा और भारत सरकार पर झूठे आरोप लगाए। अफगानिस्तान के मुद्दे पर भी हकीकत को नजरअंदाज करते हुए इमरान खान ने खुद को ही पीड़ित बता दिया।इमरान खान के झूठे आरोपों का जवाब देते हुए भारत ने कहा कि इमरान खान आंतकवाद के पीड़ित होने का ढोंग करते हैं। इमरान खान के भाषण के बाद राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के झूठे आरोपों की कलई खोल कर रख दी। भारत की ओर से फर्स्ट सेक्रेटरी स्नेहा दुबे पक्ष रखा।राजनयिक स्नेहा दुबे ने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था और रहेगा। इसमें कश्मीर का वो हिस्सा भी शामिल है जिस पर पाकिस्तान का कब्जा है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान को तुरंत पीओके को खाली करना चाहिए। स्नेहा दुबे ने कहा, ”जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग थे, हैं और रहेंगे। इसमें वे क्षेत्र शामिल हैं जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में हैं। हम पाकिस्तान से उसके अवैध कब्जे वाले सभी क्षेत्रों को तुरंत खाली करने का आह्वान करते हैं।वैश्विक मंच पर भारत ने पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाते हुए बेनकाब कर दिया। भारत ने कहा कि पाकिस्तान आंतकियों को पनाह देने के लिए हमेशा अपनी जमीन का इस्तेमाल करता रहा है। दुनिया जानती है कि आतंकी ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में पनाह मिली थी, लेकिन अमेरिका ने उसे मार गिराया। इसके अलावा एक नहीं सैकड़ों सबूत पाकिस्तान के खिलाफ सामने आ चुके हैं, फिर भी पाकिस्तान बेशर्म की तरह मुंह छुपाते हुए अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है। हालांकि, दुनिया जानती है कि आतंकवाद का सुरक्षित ठिकाना अगर कोई देश है तो वह पाकिस्तान है, जहां आतंकवाद और आंतकियों को बढ़ावा दिया जाता है।  


भारत को यूएनएससी में मिलनी चाहिए `स्थायी सीट` : जो बाइडन

25-Sep-2021

वाशिंगटन/नई दिल्ली (शोर संदेश)।भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने यूएनएससी (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता पर अमेरिकी समर्थन को लेकर बड़ी जानकारी दी है। श्रृंगला ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन को लगता है कि भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए।श्रृंगला ने कहा कि भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता की भी सराहना की गई, विशेष रूप से अफगानिस्तान मुद्दे पर। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत के प्रदर्शन को देखते हुए राष्ट्रपति जो बाइडन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में  स्थायी सीट देने का समर्थन किया 

00 भारत सात बार रह चुका है सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य  

बता दें कि भारत वर्ष 1950-1951, 1967-1968, 1972-1973, 1977-1978, 1984-1985 1991-1992 और 2011-2012 के दौरान 7 बार सुरक्षा परिषद के एक अस्थायी सदस्य के रूप में चुना जा चुका है। यूएनएससी में कुल 15 सदस्य देश होते हैं, जिनमें 5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य होते हैं। 193 सदस्यों वाली महासभा हर साल इन 10 अस्थायी देशों को चुनने के लिए चुनाव करती है। अस्थायी देशों का कार्यकाल दो साल का होता है। फिलहाल स्थायी सदस्यता अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस के पास है।

00 पीएम मोदी और राष्ट्रपति बाइडन के बीच रही दोस्ताना मुलाकात

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच व्हाइट हाउस में पहली मुलाकात काफी हंसी-मजाक के बीच हुई। दोनों ही नेताओं ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया। जहां बाइडन ने कहा कि वे फिर से व्हाइट हाउस में मोदी का स्वागत कर के खुश हैं, तो वहीं मोदी ने बेहतरीन स्वागत के लिए बाइडन का धन्यवाद किया। इस दौरान एक मजेदार वाकया भी घटा। दरअसल, जब मीडिया के सामने दोनों नेता बातचीत कर रहे थे, तब बाइडन ऑफ-स्क्रिप्ट चले गए। उन्होंने बीच में ही मोदी को अपने 2006 के मुंबई दौरे और वहां मीडिया से हुई बातचीत के बारे में बताना शुरू कर दिया। मोदी ने भी उनकी बात पर हाजिरजवाबी दिखाई। इसके बाद शुरू हुआ ठहाकों का दौर काफी देर तक चला। 

00 अफगानिस्तान मुद्दे पर हुई बातचीत

दोनों नेताओं ने अफगानिस्तान में आतंकवाद का मुकाबला करने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने तालिबान से संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 2593 के तहत अपनी सभी प्रतिबद्धताओं का पालन करने का आह्वान किया, जिसमें यह सुनिश्चित करना शामिल है कि अफगान क्षेत्र का उपयोग किसी भी देश को आतंकवादी समूहों को शरण देने या प्रशिक्षित करने के लिए धमकाने और हमला करने के लिए नहीं किया जाता है।


वाशिंगटन पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी, भीड़ की किया जोरदार स्वागत…

23-Sep-2021

 00 3 दिवसीय दौरे पर अमेरिका पहुंचे मोदी, आज उपराष्ट्रपति हैरिस से करेंगे मुलाकात

वाशिंगटन/नई दिल्ली (शोर संदेश)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को अमेरिका के दौरे के लिए रवाना हुए और भारतीय समयानुसार तड़के करीब 3.30 बजे वाशिंगटन पहुंचे। अपने इस अहम दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई अहम कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।अमेरिका पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि गर्मजोशी से स्वागत के लिए वाशिंगटन डीसी में भारतीय समुदाय का आभारी हूं। हमारे प्रवासी हमारी ताकत है। यह प्रशंसनीय है कि कैसे भारतीय लोगों ने दुनिया भर में खुद को प्रतिष्ठित किया है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब वाशिंगटन के ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर उतरे तो वहां बड़ी संख्या में मौजूद भारतीयों ने तिरंगा लहराकर जोरदार स्वागत किया। लोग मोदी-मोदी चिल्ला रहे थे। एयरबेस से पीएम मोदी का दल पेन्सिलवेनिया एवेन्यू स्थित होटल विलार्ड जाएगा।

00 पीएम मोदी का आज का कार्यक्रम

दो साल में पीएम मोदी की यह पहली अमेरिका यात्रा है, जिसमें वहां सत्ता भी बदल गई। पीएम मोदी कल शुक्रवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ पहली व्यक्तिगत द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसके बाद क्वाड लीडर्स शिखर बैठक होगी।पीएम मोदी आज गुरुवार को पांच बड़ी कंपनियों- क्वालकॉम, एडोब, फर्स्ट सोलर, जनरल एटॉमिक्स और ब्लैकस्टोन के सीईओ से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वह करीब 11 बजे विलार्ड होटल में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन से मुलाकात करेंगे।इसके बाद पीएम मोदी करीब 12:30 बजे अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से मिलने के लिए आइजनहावर एक्जक्यूटिव ऑफिस के लिए रवाना होंगे। शनिवार को पीएम मोदी यूएनजीए के 76वें सत्र को संबोधित करेंगे।

00 सफर के दौरान की फोटो पोस्ट की

अमेरिका पहुंचने से पहले पीएम ने विमान के अंदर की एक तस्वीर पोस्ट की जिसमें वह कुछ जरूरी फाइलों को पढ़ रहे हैं। खुद की तस्वीर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा, `लंबी उड़ान का मतलब पेपर्स और कुछ फाइल वर्क के माध्यम से जाने का अवसर।` अमेरिका में प्रवास के दौरान पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन संग द्विपक्षीय बातचीत, क्वाड सम्मेलन में हिस्सा लेंगे साथ ही UNGA में भाषण भी देंगे।अमेरिका की यात्रा से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, `22-25 सितंबर के बीच अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान मैं राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करूंगा और पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करूंगा।`पीएम मोदी ने अमेरिकी दौरे के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वह राष्ट्रपति बाइडेन, ऑस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मॉरिसन और जापान के पीएम योशीहिदे सुगा से भी मिलेंगे। क्वाड शिखर सम्मेलन के बारे में पीएम मोदी ने कहा, `यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए साझा दृष्टिकोण के आधार पर भविष्य के लिए प्राथमिकताओं की पहचान करने का अवसर प्रदान करता है।`


*तानाशाह ने दागी क्रूज मिसाइल अमेरिका में बढ़ी टेंशन*

13-Sep-2021

प्योंगयांग/नई दिल्ली (शोर संदेश) अमेरिका से तनाव के बीच उत्तर कोरिया का सनकी तानाशाह किम जोंग उन ने लंबी दूरी तक मार करने वाली क्रूज मिसाइल का परीक्षण कर अन्य बड़े देशों को अपनी ताकत का एहसास करा दिया है। उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने इस परीक्षण की जानकारी दी है। जानकारी के अनुसार क्रूज मिसाइल विकसित करने का काम बीते दो वर्षों से चल रहा था और शनिवार तथा रविवार को परीक्षण के दौरान इसने 1,500 किलोमीटर दूर लक्ष्य सफलतापूर्वक मार की। उधर, मिसाइल टेस्ट के बाद उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। इस बीच संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना ने कहा कि रविवार को उत्तर कोरिया द्वारा सप्ताहांत में किए गए मिसाइल परीक्षणों से अन्य पड़ोसी देशों के लिए खतरा साबित हो सकता है। वहीं यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड ने एक बयान देते हुए कहा कि यह गतिविधि डीपीआरके के अपने सैन्य कार्यक्रम को विकसित करने और अपने पड़ोसियों एवं अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए खतरों को जारी रखने पर ध्यान केंद्रित करती है।


बता दें कि उत्तर कोरिया ने प्रतिबंधों को दरकिनार कर अपने एटमी हथियारों और बैलेस्टिक मिसाइलों का आधुनिकीकरण किया है। इससे पहले भी उत्तर कोरिया बहुत सी कम दूरी की नई मिसाइलों, मध्यम दूरी की और अंतरमहाद्वीपीय बैलेस्टिक मिसाइलों का परीक्षण कर चुका है। गौरतलब है कि अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच वार्ता में 2019 से गतिरोध बना हुआ है, जब अमेरिका ने पाबंदियों में बड़ी राहत देने का उत्तर कोरिया का अनुरोध ठुकरा दिया था। अब किम की सरकार बाइडन प्रशासन के वार्ता के अनुरोध को ठुकरा रही है, उसका कहना है कि पहले वाशिंगटन अपनीशत्रुतापूर्णनीतियों को पूरी तरह से छोड़े।


9/11 की बरसी को देखते हुए अंतरिम सरकार ने आज का शपथग्रहण समारोह किया रद्द

11-Sep-2021

काबुल/नई दिल्ली (शोर संदेश)। अफगानिस्तान पर संपूर्ण कब्जा करने के बाद तालिबान अपने सबसे बड़े दुश्मन अमेरिका के सबसे बड़े जख्म को कुरेदने की फिराक में था। बताया जा रहा है कि तालिबान अमेरिका के 9/11 आतंकी हमले की बरसी के मौके पर शपथ-ग्रहण समारोह आयोजित करने वाला था लेकिन सहयोगियों के दबाव के बाद इसे रद्द कर दिया है।ज्ञातव्य है कि अमेरिका में अब तक के हुए सबसे बड़े और भीषण आतंकी हमले 9/11 की आज बरसी है। इसी दिन वर्ष 2001 में अलकायदा के आतंकवादियों ने दो विमानों को न्यूयॉर्क शहर के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, ट्विन टावर्स के साथ टकरा दिया, जिससे विमानों पर सवार सभी लोग तथा भवनों के अंदर काम करने वाले अन्य अनेक लोग भी मारे गए थे। इन हमलों में लगभग 3,000 लोग तथा 19 अपहरणकर्ता मारे गए थे। इस घटना से पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था, और इसके बाद अमेरिका का आतंकवाद के खिलाफ सबसे बड़ा अभियान शुरू हुआ, जो अलकायदा के संरक्षक माने जाने वाले तालिबान के खिलाफ था, जो लगभग 20 साल तक चला।अफगान सरकार के सांस्कृतिक आयोग के सदस्य इनामुल्ला समांगानी ने ट्विटर पर जानकारी देते हुए कहा कि नई अफगान सरकार का शपथ ग्रहण समारोह कुछ दिन पहले ही रद्द कर दिया गया था। लोगों को और भ्रमित न करने के लिए हमने नई सरकार गठन का फैसला लिया था और यह अब काम करना शुरू कर दिया है।

00 रूस ने शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने से कर दिया था इनकार 

तालिबान ने उद्घाटन समारोह में रूस, ईरान, चीन, कतर और पाकिस्तान को आमंत्रित किया था। हालांकि रूस ने कथित तौर पर कतर को सूचित कर दिया है कि अगर यह 9/11 की बरसी पर आयोजित होता है तो वह उद्घाटन समारोह में भाग नहीं लेगा। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अमेरिका और उसके नाटो सहयोगी कतर सरकार पर तालिबान को उद्घाटन समारोह पूरी तरह से आयोजित करने के खिलाफ सलाह देने के लिए दबाव डाल रहे थे, क्योंकि इस दिन को चुनना एक अमानवीय कदम के रूप में सामने आएगा।बता दें कि तालिबान ने मंगलवार को अफगानिस्तान में एक अंतरिम सरकार की घोषणा की, जिसमें प्रमुख मंत्री पद शामिल हैं। एक समावेशी सरकार के उनके आश्वासन के बावजूद, नया मंत्रिमंडल पूरी तरह से कट्टरपंथी है और तालिबान की शरिया कानून की कठोर व्याख्या के अनुसार शासन करेगा।

00 तालिबान की 33 मंत्रियों की सरकार में 14 आतंकी 

तालिबान की 33 मंत्रियों की सरकार में 14 आतंकी हैं। कई उपमंत्री और गवर्नर भी इनमें शामिल हैं। प्रधानमंत्री मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद, उसके दोनों उप प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर और मौलवी अब्दुल सलाम हनफी जैसे कई नाम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की काली सूची में शामिल हैं। वहीं अमेरिकी इनामी  सूची में भी इनके नाम हैं। रक्षामंत्री मुल्ला याकूब, विदेश मंत्री मुल्ला अमीर खान मुत्तकी और डिप्टी शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई भी आतंकियों में हैं।

 


पीएचडी-मास्टर डिग्री बेकार, इनके बिना ही हमें मिली कामयाबी : शिक्षा मंत्री

08-Sep-2021

काबुल/नई दिल्ली (शोर संदेश)। अफगानिस्तान में तालिबान ने अपनी अंतरिम सरकार का एलान कर दिया है। मुल्ला मुहम्मद हसन अखुंद को जहां देश का नया प्रधानमंत्री बनाया गया है, वहीं शेख मौलवी नूरल्लाह मुनीर को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है। इस बीच सरकार गठन के साथ ही तालिबानी फरमान भी आने शुरू हो गए हैं जिसमें नए शिक्षा मंत्री नूरल्लाह मुनीर का विवादित बयान भी शामिल है। मुनीर ने कहा है कि आज के वक्त में पीएचडी या किसी दूसरी मास्टर डिग्री का कोई फायदा नहीं है। मुनीर ने कहा कि हमलोगों के पास कोई डिग्री नहीं है फिर भी हम सरकार चला रहे हैं। ऐसे में आज के वक्त में किसी तरह की पीएचडी या मास्टर डिग्री की जरूरत नहीं है।


मुल्ला बरादर को मिलेगी कमान, आज होगा सरकार का ऐलान…

04-Sep-2021

 काबुल/नई दिल्ली (शोर संदेश)। अमेरिकी सेना के जाने के बाद संकट में घिरे अफगानिस्तान में आज तालिबान सरकार का एलान होगा। तालिबान का सह-संस्थापक मुल्ला बरादर इस सरकार का नेतृत्व करेगा। हालांकि नई सरकार का गठन शुक्रवार को होना था, लेकिन इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया। तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि नई सरकार के गठन की घोषणा शनिवार को होगी। तालिबान सूत्रों ने बताया कि दोहा स्थित तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के चेयरमैन मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को सरकार का प्रमुख बनाने की सार्वजनिक घोषणा जल्द ही होगी। मुल्ला बरादर के साथ तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला मोहम्मद याकूब व शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई की भी सरकार में अहम भूमिका होगी। तालिबान के सूचना व संस्कृति आयोग के वरिष्ठ अधिकारी मुफ्ती इनामुल्लाह सामंगानी ने कहा कि सभी शीर्ष नेता काबुल पहुंच चुके हैं और नई सरकार का एलान करने की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। सरकार के गठन को लेकर आपसी सहमति बन चुकी है, और अब मंत्रिमंडल को लेकर कुछ आवश्यक बातचीत हो रही है।

00 अखुंदजादा बनाएगा इस्लामिक सरकार का ढांचा

एक वरिष्ठ तालिबान अधिकारी के मुताबिक, संगठन का सुप्रीम लीडर हैबतुल्लाह अखुंदजादा धार्मिक मामलों और इस्लाम के दायरे में ईरान की तर्ज पर राजव्यवस्था का ढांचा तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। मौजूदा जानकारी के मुताबिक नई तालिबानी सरकार में 12 मुस्लिम विद्वानों के सूरा या सलाहकारी परिषद के साथ 25 मंत्री होंगे।

00 छह से आठ महीन में लोया जिरगा बुलाने की योजना 

छह से आठ महीने के भीतर एक लोया जिरगा यानी महासभा बुलाने की भी योजना बनाई जा रही है, जिसमें संविधान और भविष्य की सरकार की संरचना पर चर्चा करने के लिए अफगान समाज के बुजुर्गों और प्रतिनिधियों को एक साथ लाया जाएगा।एक वरिष्ठ तालिबान अधिकारी के मुताबिक, संगठन का सुप्रीम लीडर हैबतुल्लाह अखुंदजादा धार्मिक मामलों और इस्लाम के दायरे में ईरान की तर्ज पर राजव्यवस्था का ढांचा तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।मौजूदा जानकारी के मुताबिक नई तालिबानी सरकार में 12 मुस्लिम विद्वानों के सूरा या सलाहकारी परिषद के साथ 25 मंत्री होंगे।छह से आठ महीने के भीतर एक लोया जिरगा यानी महासभा बुलाने की भी योजना बनाई जा रही है, जिसमें संविधान और भविष्य की सरकार की संरचना पर चर्चा करने के लिए अफगान समाज के बुजुर्गों और प्रतिनिधियों को एक साथ लाया जाएगा।

00 जानें कौन है मुल्ला अब्दुल गनी…

1968 में अफगानिस्तान के उरुजगान प्रांत में जन्मा बरादर शुरू से ही धार्मिक रूप से कट्टर था। वह तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर का साला है। बरादर ने 1980 के दशक में सोवियत संघ के खिलाफ लड़ाई लड़ी। 1992 में रूसी सेना को खदेड़ने के बाद अफगानिस्तान देश के प्रतिद्वंद्वी सरदारों के बीच गृहयुद्ध में घिर गया था। बरादर ने अपने पूर्व कमांडर मुल्ला उमर के साथ कंधार में एक मदरसा स्थापित किया था। इसके बाद मुल्ला उमर और मुल्ला बरादर ने तालिबान की स्थापना की।9/11 हमलों के बाद जब अमेरिका ने अफगानिस्तान पर धावा बोला तब तालिबान के सभी बड़े नेताओं को पाकिस्तान में पनाह मिली थी। इन नेताओं में मुल्ला उमर और अब्दुल गनी बरादर भी शामिल थे। बताया जाता है कि बरादर को पाकिस्तान ने फरवरी 2010 में पाकिस्तान के कराची में गिरफ्तार किया था। हालांकि, इसका खुलासा करीब एक हफ्ते बाद किया गया था। इसके बाद बरादर को अक्टूबर 2018 तक पाकिस्तान की जेल में रखा गया और बाद में अमेरिका के दखल पर उसे छोड़ दिया गया।

00 काबुल में अफगान महिलाओं ने किया प्रदर्शन

अफगानिस्तान में तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार में भागीदारी मांगने के लिए अफगान महिलाओं के एक समूह ने शुक्रवार को राजधानी काबुल में प्रदर्शन किया। सीएनएन के मुताबिक, वुमंस पॉलीटिक्ल पार्टिसिपेशन नेटवर्क नामक इस समूह ने अफगानिस्तान वित्त मंत्रालय के बाहर सड़कों पर हाथों में बैनर लेकर नारे लगाते हुए पैदल मार्च निकाला। मार्च में शामिल महिलाओं ने देश में अपने लिए निर्णय लेने वाली राजनीतिक भूमिका दिए जाने की मांग की। 

00 भारत अपने पत्ते नहीं खोल रहा

तालिबान से औपचारिक बातचीत के बावजूद अफगानिस्तान की नई सरकार के मामले में भारत अपने पत्ते नहीं खोल रहा। तालिबान में कई गुटों के कारण भारत फैसला नहीं ले पा रहा। नई सरकार में मुल्ला बरादर गुट हावी रहा, तो भारत अफगानिस्तान से बातचीत की प्रक्रिया शुरू करेगा, लेकिन हक्कानी गुट प्रभावी रहा तो जांच-परख के बाद फैसला होगा।विदेश मंत्रालय ने कहा था कि दोहा बैठक को सरकार को मान्यता और बातचीत से नहीं जोड़ना चाहिए। हक्कानी गुट अधिक कट्टर है व उसके पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और अलकायदा से गहरे रिश्ते हैं। हक्कानी अपनी शर्तों पर भारत से रिश्ते चाहता है। इसके एजेंडे में कश्मीर भी है।


भारी बारिश बाढ़ में 40 लोगों की मौत

03-Sep-2021

00 दो शहरों में आपातकाल की घोषणा
न्यूयॉर्क/नई दिल्ली (शोर संदेश) अमेरिका के न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी सहित कई राज्यों में इडा तूफान ने कहर मचाया हुआ है। इस तूफान में अब तक 40 से अधिक लोगों की मौत हो गई। दोनों ही जगहों पर आपातकाल की घोषणा की गई है। वहीं तूफान और अधिक खतरनाक होते हुए न्यू इंग्लैंड की तरफ बढ़ गया है। न्यूयॉर्क शहर में पुलिस ने सात लोगों की मौत की पुष्टि की है जबकि न्यूजर्सी में एक व्यक्ति की मौत हुई है। न्यूयॉर्क एफडीआर ड्राइव, मैनहट्टन के पूर्व की ओर एक बड़े हिस्से और ब्रोंक्स नदी पार्कवे बुधवार देर शाम तक पानी में डूबे थे। सबवे स्टेशनों और रास्तों पर पानी भरने से मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्टेशन अथॉरिटी को सभी सेवाओं को निलंबित करना पड़ा। न्यूयॉर्क में राष्ट्रीय मौसम सेवा कार्यालय ने बुधवार रात बाढ़ को लेकर अचानक आपात स्थिति की पहली चेतावनी जारी की थी। यह चेतावनी विशेष परिस्थितियों में तब जारी की जाती है, जब बाढ़ से विनाशकारी क्षति हो रही हो या फिर होने वाली हो। बारिश की वजह से न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी दोनों ही जगह कई इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है। मूसलाधार बारिश के कारण बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसकी वजह से हजारों लोग घरों में बिजली से वंचित हैं।


तूफान और बारिश की वजह से न्यूजर्सी के सभी 21 काउंटियों में आपातकाल की स्थिति की घोषणा की हई है। लोगों को चेतावनी जारी कर बाढ़ वाली सड़कों से दूर रहने का आग्रह किया गया है। मौसम विज्ञानियों ने बाढ़ के और विकराल होने की चेतावनी जारी की है। अमेरिका में इडा चक्रवात का कहर अभी थमा नहीं है। सोमवार को लुइसियाना के तट से टकराने के बाद यहां के तटीय क्षेत्रों में हवाओं की रफ्तार 241 किमी प्रतिघंटा तक पहुंच गई थीं। इसे अमेरिका के सबसे ताकतवर तूफानों में से एक माना गया था। इसकी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चक्रवात के कमजोर पड़ने के दो दिन बाद भी अमेरिका के कई शहरों में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। आलम यह है कि न्यूयॉर्क, मिसिसिप्पी, अलाबामा और फ्लोरिडा जैसे राज्यों में तो सड़कों पर ही तालाब बन गए हैं और लोगों को बचाने के लिए राहत-बचावकर्मी नाव लेकर निकले हैं।

 


दोपहर की नमाज के बाद होगी नई सरकार की घोषणा…

03-Sep-2021

 00 तैयारी में जुटे तालिबानी अधिकारी

काबुल/नई दिल्ली (शोर संदेश)। अमेरिकी सेना के कब्जे से मुक्त होने के बाद अफगानिस्तान में अब तालिबान प्रशासन नई सरकार की घोषणा करने तैयारी कर रहा है। सोशल मीडिया पर तालिबान के एक अधिकारी अहमदुल्ला मोत्ताकी ने कहा कि आज काबुल के प्रेसिडेंशियल पैलेस में एक समारोह आयोजित किया जा रहा है।पंजशीर प्रांत को छोड़कर अफगानिस्तान के लगभग सभी हिस्सों पर कब्जा करने के बाद, तालिबान ने दुनिया के सामने खुद को एक उदारवादी व्यक्ति के रूप में पेश करने की कोशिश की है। तालिबान के सूत्रों ने एएफपी को बताया कि एक नए प्रशासन की घोषणा शुक्रवार दोपहर की नमाज के बाद की जा सकती है। नए शासकों ने 1996 से 2001 तक सत्ता में अपने पहले कार्यकाल की तुलना में अधिक मिलनसार होने का वादा किया है। अब, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या तालिबान युद्धग्रस्त अर्थव्यवस्था का प्रबंधन करने में सक्षम कैबिनेट प्रदान कर सकता है और अधिक `समावेशी` सरकार के आंदोलन के वादों का सम्मान कर सकता है।तालिबान के एक प्रवक्ता ने शुक्रवार तड़के ट्वीट किया कि चीन के विदेश मंत्रालय ने अफगानिस्तान में अपने दूतावास को खुला रखने और संबंधों और मानवीय सहायता को `सुदृढ़` करने का वादा किया है।वेस्टर्न यूनियन और मनीग्राम ने कहा कि वे धन ट्रांसफर फिर से शुरू कर रहे हैं, जिस पर कई अफगान जीवित रहने के लिए विदेशों में रिश्तेदारों से भरोसा करते हैं। कतर ने कहा कि यह काबुल में हवाई अड्डे को फिर से खोलने के लिए काम कर रहा है।समूह ने मानवाधिकारों का सम्मान करने और अपने विरोधियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने से परहेज करने की कसम खाई है, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य ने संदेह व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा तालिबान के नेतृत्व वाली नई सरकार की मान्यता समूह के प्रदर्शन पर निर्भर करती है।


20 साल और 2461 सैनिकों की शहादत के बाद अफगानिस्तान में ख़त्म हुआ अभियान

31-Aug-2021

वाशिंगटन/नई दिल्ली (शोर संदेश)। अफगानिस्तान में अमेरिका का अभियान खत्म हो चुका है। इस अभियान में कई सैनिकों ने जान गंवाई है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने एक फोटो शेयर की है। इसमें मेजर जनरल क्रिस डोनह्यू अफगानिस्तान के काबुल एयरपोर्ट पर अमेरिकी विमान पर चढ़ते दिखाई दे रहे हैं। रक्षा मंत्रालय ने लिखा है अफगानिस्तान से विदा होता आखिरी अमेरिकी सैनिक।आतंकवाद के खिलाफ 20 साल तक चली अमेरिका की लड़ाई आखिरकार खत्म हो गई है। पराए मुल्क में चला यह अभियान जितना जोखिम भरा था उतरा ही दिलचस्प भी। अमेरिका की अफगानिस्तान में लड़ाई ऐसी थी, जैसे अंधेरे में तीर चलाना। करोड़ों डॉलर का खर्च, कई हजार सैनिकों की जान गंवाने के बाद अब वह खौफनाक मंजर अमेरिका के लिए बीती बात हो गई है।इस अभियान के खत्म होने के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन का बयान आया है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में आतंक के खिलाफ युद्ध में 2,461 अमेरिकी सैनिकों ने अपनी जान गंवाई। इसके अलावा भी हमने बहुत कुछ ऐसा सहन किया, जिसको बयां कर पाना नामुमकिन है।लॉयड ऑस्टिन ने कहा कि आतंक के खिलाफ हमने कई लड़ाईयां लड़ी हैं। हमारे लिए अमेरिकी नागरिक सबसे पहले हैं। दुनिया में उनको आतंक से बचाने के लिए हम कुछ भी करने को तैयार हैं। आगे कहा कि हम आतंक के खिलाफ कड़ी मेहनत करेंगे और आतंक को जड़ से खत्म करके रहेंगे।

00 छह हजार अमेरिकी समेत 1 लाख 23 हजार लोगों को निकाला

अभियान खत्म होने के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने कहा कि हमने तालिबान के खतरे के बीच अपने छह हजार नागरिकों को अफगानिस्तान से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। कुल 1,23,000 लोगों को बाहर निकाला गया है, जिसमें अफगानी व अन्य लोग भी शामिल हैं।




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