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अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान ने अनुसंधान के लिए एमिटी विवि के साथ समझौता किया*

09-Oct-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) आयुष मंत्रालय की स्वास्थ्य सेवा की आयुष प्रणालियों को प्रोत्साहन देने और उनका विकास करने के लिए भागीदारी करने की आयुष मंत्रालय की नीति को आगे बढ़ाते हुए इस मंत्रालय के अधीन अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), नई दिल्ली ने एमिटी विश्वविद्यालय के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौता ज्ञापन में आयुर्वेद विज्ञान में अनुसंधान को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इस संस्थान का समझौता ज्ञापन एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन के साथ है, जिसकी स्थापना 2018 में एमिटी विश्वविद्यालय द्वाराभारतीय चिकित्सा पद्धति के बढ़ते महत्व को मान्यता देने के लिए की गई थी। इस समझौता ज्ञापन में आयुर्वेदिक दवाइयों की गुणवत्ता और मानकीकरण के साथ-साथ प्राकृतिक उत्पाद रसायन विज्ञान और फार्मेसी में पीएचडी कार्यक्रमों में सहयोग की कल्पना की गई है। इसमें फार्मास्युटिक्, फार्माकोडायनामिक्स एवं फार्माकोकाइनेटिक्स में अध्ययन की सहयोग के संभावित क्षेत्रों के रूप में पहचान की गई है। यह समझौता ज्ञापन संयुक्त परियोजनाओं और प्रकाशनों को भी बढ़ावा देगा। इस साझेदारी से आयुर्वेद में कुछ अत्याधुनिक अनुसंधान के साथ-साथ विश् स्तर पर आयुर्वेदिक विज्ञान के साथ जुड़े ज्ञान को बढ़ावा देने और उसका प्रसार करने में अच्छे परिणाम मिलने की उम्मीद है। इससे आधुनिक विज्ञान के साथ परम्परागत ज्ञान का एकीकरण करने और आयुर्वेद अनुसंधान में नये आयाम जोड़ने में मदद मिलेगी। आयुष मंत्रालय मौजूदा महामारी परिदृश्य में वैश्विक स्तर पर चिकित्सा की भारतीय पद्धति को शुरू करने और उसे बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। आयुर्वेद ने रोगनिरोधी समाधान उपलब् कराकर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। इन समाधानों की व्यवहार्यता वैज्ञानिक अध्ययनों के माध्यम से स्थापित हुई है। मंत्रालय ने जनता में उपलब्ध आयुष स्वास्थ् समाधानों की गहराई और उसके दायरे को बढ़ाने के लिए अपने जैसी सोच वाले जैसे हितधारक संस्थानों के साथ हिस्सेदारी करने की जरूरत को स्वीकार किया है। मंत्रालय ने आयुर्वेद क्षेत्र में संसाधनों के प्रवाह को बढ़ाने की रणनीति के रूप में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) को भी प्रोत्साहित किया है। मौजूदा समझौता ज्ञापन इसी दृष्टिकोण का परिणाम है। दोनों संस्थान ज्ञान और प्रक्रियाओं को विकसित करने के लिए मिलकर काम करेंगे, जिनका राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में उपयोग किया जाएगा और ये आबादी के पैमाने पर प्रासंगिक होंगे। 


प्रधानमंत्री ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एकजुट होने की अपील की*

09-Oct-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी लोगों से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एकजुट होने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सभी से एकजुट होने की अपील की। मास्क पहनें, बार-बार हाथ धोएं, सामाजिक दूरी का अनुपाल करें और दो गज की दूरी का अभ्यास करें के मुख्य संदेश को दोहराते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि हम एक साथ मिलकर सफल होंगे और कोविड-19 के खिलाफ जीत हासिल करेंगे। लोगों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इस अभियान को शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत सभी लोग कोविड-19 शपथ लेंगे। केंद्र सरकार के मंत्रालयों, राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा निम्नलिखित विशेषताओं के साथ एक ठोस कार्य योजना लागू की जाएगी -


1 - अधिक मामले वाले जिलों में क्षेत्र निर्दिष् लक्षित संचार।
2 - प्रत्येक नागरिक तक पहुंचने के लिए सरल और आसानी से समझे जाने वाले संदेश।
3 - सभी मीडिया मंचों का उपयोग करते हुए पूरे देश में इस अभियान का प्रसार।
4 - फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के प्रयोजन वाले बैनर तथा पोस्टर सार्वजनिक स्थानों पर लगाना।
5 - सरकारी परिसरों में होर्डिंग्स/वॉल पेंटिंग और इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड लगाना।
6 - संदेश को घर-घर तक पहुंचाने के लिए स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली व्यक्तियों को शामिल करना।
7 - नियमित रूप से जागरूकता पैदा करने के लिए मोबाइल वैन का इस्तेमाल करना।
8 - जागरूकता के बारे में ऑडियो संदेश, पम्फ्लेट और ब्रोशर का प्रयोग।
9 - कोविड संदेशों के प्रसार के लिए स्थानीय केबल ऑपरेटरों की मदद लेना।

10 - इस अभियान की उपयोगी पहुंच और प्रभाव के लिए सभी मंचों पर समन्वित मीडिया अभियान चलाना। 


ब्याज दरों में बदलाव नहीं, आरबीआई गवर्नर ने कहा- मार्च तिमाही में जीडीपी पॉजिटिव हो जाएगी*

09-Oct-2020

मुंबई (शोर सन्देश) 7 अक्टूबर को शुरू हुई एमपीसी बैठक का फैसला गया है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली छह सदस्य वालों मौद्रिक नीति समिति (MPC-Monetary Policy Committee) ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है. रेपो रेट 4% पर बरकरार है. MPC ने सर्वसम्मति से ये फैसला किया है। रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी पर बरकरार है।

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, हाल में आए आर्थिक आंकड़ों से अच्छे संकेत मिल रहे है। ग्लोबल इकोनॉमी में रिकवरी के मजबूत संकेत मिल रहे हैं.मैन्युफैक्चरिग, रिटेल बिक्री में कई देशों में रिकवरी दिखी है. खपत, एक्सपोर्ट में भी कई देशों में सुधार दिखा है।
उन्होंने कहा, अर्थव्यवस्थआ में तेजी की उम्मीद बनी हुई है। हम बेहतर भविष्य के बारे में सोच रहे हैं। सभी सेक्टर में हालात बेहतर हो रहे है। ग्रोथ की उम्मीद दिखने लगी है। रबी फसलों का आउटलुक बेहतर दिख रहा है। महामारी के इस संकट अब कोविड रोकने से ज्यादा फोकस आर्थिक सुधारों पर है।
00 ब्याज दरों में नहीं हुआ कोई बदलाव

रेपो रेट 4 फीसदी पर बरकरार है। रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी बरकरार है। सभी 6 MPC सदस्यों ने ब्याज दरें स्थिर रखने के पक्ष में वोट किया। ब्याज दरों को लेकर अकोमोडेटिव रुख बरकरार है। फरवरी 2019 से अब तक MPC ने रेपो रेट में 2.50 फीसदी की बड़ी कटौती कर चुका है। 


दृष्टिकोण और बाजारों के लिहाज से तेजी से बदल रहा है भारत : प्रधानमंत्री*

09-Oct-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कनाडा में इन्वेस्ट इंडिया कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत निर्विवाद रूप से एकमात्र ऐसा राष्ट्र है जो अपने सभी निवेश मानकों जैसे राजनीतिक स्थिरता, निवेश और व्यापार के अनुकूल नीतियां, शासन में पारदर्शिता, कौशल से परिपूर्ण प्रतिभाशाली समूहों और एक व्यापक बाजार के रूप में प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह संस्थागत निवेशकों, विनिर्माणकर्ताओं, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और बुनियादी उद्योगों सहित सभी के लिए एक अवसर है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड के दौर में, भारत ने दृढ़ता दिखाई और यह विनिर्माण, आपूर्ति श्रृंखलाओं आदि से संबंधित विभिन्न प्रकार की समस्याओं को दूर करने के मामले में एक समाधान देश के रूप में उभरा। उन्होंने कहा कि प्रचालन-तंत्र बाधित होने के बावजूद भी, कुछ ही दिनों के भीतर करीब 40 करोड़ किसानों, महिलाओं, गरीबों और जरूरतमंद लोगों के बैंक खातों में धनराशि सीधे पहुंचायी गयी। उन्होंने महामारी के कारण उत्पन्न संकट से उबरने के लिए सरकार द्वारा की गई विभिन्न पहलों की जानकारी देते हुए इस बात पर बल दिया कि यह पिछले कुछ वर्षों में स्थापित की गई शासन व्यवस्थाओं और उपायों की क्षमता एवं भरोसे को दर्शाती हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब पूरा देश कड़े लॉकडाउन में था, भारत लगभग 150 देशों को दवाईयाँ उपलब्ध करा रहा था और भारत ने दुनिया के लिए फार्मेसी की भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि इस वर्ष मार्च-जून के दौरान कृषि निर्यात में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि महामारी से पूर्व, भारत ने शायद ही पीपीई किट का निर्माण किया हो, लेकिन आज भारत केवल हर महीने लाखों पीपीई किट का निर्माण करता है बल्कि उनका निर्यात भी करता है। उन्होंने उत्पादन को बढ़ावा देने और पूरे विश्व की सहायता करने के लिए कोविड-19 के लिए वैक्सीन तैयार करने की प्रतिबद्ध जताई। प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे व्यापार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में सरकार की पहलों से भारत की स्थिति और भी मजबूत हो रही है। उन्होंने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से जुड़ी व्यवस्था को काफी उदार बनाने, सॉवरेन वेल्थ एंड पेंशन फंड्स के लिए अनुकूल कर प्रणाली को लागू करने और मजबूत प्रतिभूति बाजार के विकास के साथ-साथ प्रमुख क्षेत्रों के लिए प्रोत्साहन योजनाओं जैसी पहलों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फार्मा, चिकित्सा उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण जैसे क्षेत्र पहले से कार्य संचालन में हैं। उन्होंने कहा कि निवेशकों के लिए उच्च-स्तर पर ध्यान केन्द्रित करने और उनकी प्रभावी सहभागिता को सुनिश्चित करने के लिए सचिवों के एक समर्पित सशक्त समूह का गठन किया गया है। उन्होंने हवाईअड्डों, रेल, राजमार्गो, ऊर्जा पारेषण आदि जैसे क्षेत्रों में परिसंपत्तियों के अग्रसक्रिय मुद्रीकरण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट और बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट सार्वजनिक और निजी दोनों तरह की परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत दृष्टिकोण और बाजारों के लिहाज से तेजी से बदल रहा है। भारत ने कंपनी अधिनियम के तहत कई प्रावधानों के उल्लंघन को अविनियमित और गैर-अपराधिक सूची में रखा है। उन्होंने कहा कि भारत ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स रैंकिंग में 81 से 48वें स्थान पर और पिछले 5 वर्षों में विश्व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में 142 से 63वें पायदान पर पहुंच गया है।प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सुधारों के कारण, भारत को जनवरी 2019 से जुलाई 2020 के बीच संस्थागत निवेशकों से लगभग 70 बिलियन अमरीकी डॉलर प्राप्त हुए। यह 2013 से 2017 के बीच के चार वर्षों में प्राप्त धनराशि के लगभग बराबर हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक निवेशक समुदाय के भारत के प्रति निरंतर बढ़ते विश्वास को इस तथ्य के साथ देखा जा सकता है कि 2019 में भारत में प्रत्यक्ष विदशी निवेश में उस समय 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई जब वैश्विक प्रत्यक्ष विदशी निवेश के अंतर्प्रवाह में 1 प्रतिशत की गिरावट हुई थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष के प्रथम 6 महीनों के दौरान भारत को दुनिया भर से 20 बिलियन अमरीकी डालर से अधिक प्राप्त हुए हैं, जब वैश्विक स्तर पर कोविड-19 अपने चरम पर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने कोविड-19 महामारी से उत्पन्न स्थिति से निपटने के प्रति एक अद्वितीय दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने कहा कि गरीबों और छोटे व्यवसायों को राहत और प्रोत्साहन पैकेज दिए गए हैं और साथ ही साथ यह ढांचागत सुधार करने का अवसर है जो अधिक उत्पादकता और समृद्धि को भी सुनिश्चित करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने कृषि, श्रम और शिक्षा जैसे तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में व्यापक सुधार किए हैं। ये लगभग हर भारतीय को एक साथ प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने श्रम और कृषि के क्षेत्र में पुराने कानूनों में सुधार सुनिश्चित किए हैं। वे सरकार के सुरक्षा दायरे को मजबूत बनाते हुए निजी क्षेत्र की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करते हैं और इससे उद्यमियों के साथ-साथ हमारे परिश्रमी व्यक्तियों के लिए भी लाभ का मार्ग सुलभ होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार देश के युवाओं की प्रतिभा को आगे बढ़ाएगा और इसके लिए अधिक विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत आने के लिए एक मंच तैयार किया गया है। 


बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को अब भाजपा से आस...

08-Oct-2020

पटना (शोर सन्देश) बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के पद से वायलेंटरी रिटायरमेंट लेकर राजनीति में आए पूर्व आईपीएस गुप्तेश्वर पांडेय को फिलहाल निराशा हाथ लगी है। गुप्तेश्वर पांडेय की सियासी पारी शुरुआत में ही लड़खड़ा गई है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से उनको टिकट नहीं दिया गया है। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए राज्य के सत्तारूढ़ दल द्वारा बुधवार को जारी की गई 115 उम्मीदवारों की सूची में पूर्व डीजीपी का नाम नहीं है। पांडे पिछले महीने जदयू में शामिल हुए और कयास लगाए जा रहे थे कि वह आगामी बिहार चुनाव के दौरान अपने गृहनगर बक्सर से चुनाव लड़ेंगे। हालांकि, यह सीट भाजपा के परशुराम चतुर्वेदी को आवंटित की गई है। इस बीच, कयास लगाए जा रहे हैं कि पांडे को बाद में राज्य विधान परिषद भेजा जा सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार श्री पांडेय को भाजपा भी चुनाव मैदान में उतार सकती है। पांडे ने सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले पर अपनी टिप्पणी के लिए कड़ी आलोचना झेली थी। बिहार के पूर्व पुलिस प्रमुख ने 22 सितंबर को भारतीय पुलिस सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प चुना था, उन्होंने वीआरएस के लिए आवेदन दिया था जिसको तुरंत ही स्वीकृति मिल गई और तीन दिन बाद जद-यू में शामिल हो गए। 


सार्वजनिक जगहों-सड़कों पर नहीं हो सकता अनिश्चितकाल तक धरना : सुप्रीम कोर्ट*

07-Oct-2020

शाहीन बाग पर उच्चतम न्यायालय का फैसला
नई दिल्ली (शोर सन्देश) नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ दिल्ली के शाहीन बाग में हुए प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सार्वजनिक जगहों पर अनिश्चितकाल तक प्रदर्शन नहीं हो सकता है चाहे वो शाहीन बाग हो या कोई और जगह।

कोर्ट ने कहा कि निर्धारित जगहों पर ही प्रदर्शन किया जाना चाहिए। आने-जाने के अधिकार को रोका नहीं जा सकता है। विरोध और आने-जाने के अधिकार में संतुलन जरूरी है।
गौरतलब है कि दिसंबर 2019 में केंद्र सरकार ने संसद से नागरिकता संशोधन कानून पास किया था। जिसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया। इस कानून को धर्म के आधार पर बांटने वाला बताकर दिल्ली से शाहीन बाग से लेकर देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन किए गए। शाहीन बाग में दिसंबर से मार्च तक कोरोना लॉकडाउन लगने तक सड़कों पर प्रदर्शन चला था।
00 सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आने-जाने का अधिकार जरूरी
इसी मसले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं किया जा सकता है। केवल तय स्थानों पर ही प्रदर्शन होना चाहिए। कोर्ट ने ये भी कहा कि आवागमन का अधिकार अनिश्चितकाल तक रोका नहीं जा सकता।
कोर्ट ने ये भी कहा कि सार्वजनिक बैठकों पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है लेकिन उन्हें निर्धारित क्षेत्रों में होना चाहिए। संविधान विरोध करने का अधिकार देता है लेकिन इसे समान कर्तव्यों के साथ जोड़ा जाना चाहिए।

विरोध के अधिकार को आवागमन के अधिकार के साथ संतुलित करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में ये भी कहा कि प्रसाशन को रास्ता जाम कर प्रदर्शन रहे लोगों को हटाना चाहिए, कोर्ट के आदेश का इंतजार नहीं करना चाहिए। 


खाली टनल में हाथ हिलाना छोड़िए, देश के सवालों का जवाब दीजिए : राहुल गांधी*

07-Oct-2020

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष का पीएम मोदी पर हमला
नई दिल्ली (शोर सन्देश) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने एक वीडियो साझा करके अलग-अलग मसलों पर मोदी सरकार को घेरा है। राहुल गांधी ने कहा कि पीएम जी, अकेले टनल में हाथ हिलाना छोड़ो, अपनी चुप्पी तोड़ो। सवालों का सामना करो, देश आपसे बहुत कुछ पूछ रहा है। राहुल गांधी ने जो वीडियो साझा किया है उसमे कोरोना संकट, देश की अर्थव्यवस्था, किसान बिल, भारत-चीन-विवाद, हाथरस की घटना को लेकर राहुल गांधी ने अलग-अलग समय पर जो बात कही है उसे संकलित किया गया है।

बता दें कि कृषि कानून के खिलाफ राहुल गांधी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। उन्होंने पंजाब में इस कानून के खिलाफ यात्रा निकाली और इसे वापस लिए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह कानून किसानों के खिलाफ है। इससे पहले राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के हाथरस पहुंचे थे, जहां एक लड़की के साथ कथित तौर पर गैंगरेप किया गया और इसके बाद उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद राहुल गांधी प्रियंका गांधी ने पीड़िता के परिवार से मुलाकात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि वह उनके साथ खड़े हैं और उन्हें जरूर इस मामले में न्याय दिलाएंगे

इससे पहले मंगलवार को राहुल गांधी ने हरियाणा में एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। चीन द्वारा भारत की जमीन हड़पे जाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी कि पूरी दुनिया में एक ही ऐसा भारत देश है जिसकी भूमि दूसरे देश ने हड़पी हैं और कायर पीएम कहते हैं कि हमारी जमीन किसी ने नहीं ली और पीएम खुद को `देशभक्त` कहते हैं। अगर हम सत्ता में होते तो 15 मिनट से भी कम समय में चीन को बाहर निकाल देते। 


आरोपी सांसदों-विधायकों को गिरफ्तार करने में पुलिस की अनिच्छा गंभीर मामला : सुप्रीम कोर्ट*

07-Oct-2020

आरोपित विधायकों और सांसदों पर लगे आजीवन प्रतिबंध
नई दिल्ली (शोर सन्देश) सुप्रीम कोर्ट ने बीते मंगलवार को आपराधिक मामलों में लिप्त सांसदों और विधायकों की गिरफ्तार करने और उन्हें पेश करने में पुलिस की अनिच्छा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने इसे एक `गंभीर` मामला करारा देते हुए कहा कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामले लंबित हैं क्योंकि पुलिस अधिकारी ऐसे जनप्रतिनिधियों के दबाव में आकर उन पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने से बचते हैं।

जस्टिस एन वी रमन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, `हमें बताया गया है कि कभी-कभी आरोपी सांसदों एवं विधायकों के दबाव में आकर पुलिस कानून का अनुपालन नहीं करती है, जोकि एक गंभीर मामला है।` बेंच ने आगे कहा कि विभिन्न हाई कोर्ट ऐसे मामलों को जल्द से जल्द निपटाने के लिए वीडि़यो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा मुहैया कराए जाने की मांग कर रहे हैं।
सुनवाई को दौरान बेंच में शामिल जस्टिस सूर्यकांत और अनिरुद्ध बोस ने भी विभिन्न हाई कोर्ट की मांग का समर्थन किया।उन्होंने कहा सांसदों और विधायकों के खिलाफ नए लंबित मामलों का वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा से जल्द निपटारा हो सकेगा। इसके साथ ही मामले में न्याय मित्र वकील विजय हंसारिया का कहना है कि निगरानी के बावजूद अदालतों में पूर्व वर्तमान विधायकों और सांसदों के खिलाफ लंबित मामले बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में इन मामलों की जल्द से जल्द सुनवाई कर निपटारा किया जाना बहुत जरूरी है।

दरअसल, देश में नेताओं के खिलाफ कई गंभीर आरोप होने के बावजूद भी उन्हें चुनाव लड़ने की इजाजत मिल जाती है। ऐसे में मामले में याचिकाकर्ता और अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने खंडपीठ से अनुरोध किया कि गंभीर अपराधों में आरोपित विधायकों और सांसदों के खिलाफ आजीवन प्रतिबंध लगाया जाए। 


रेलवे ने टिकट आरक्षण नियमों में किया बड़ा बदलाव, अब यात्रियों को नहीं करना होगा परेशानियों का सामना*

07-Oct-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) कोरोना काल में स्पेशल ट्रेनें चलाकर रेलवे ने लोगों को बड़ी राहत दी। अब धीरे धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं और ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा रही है। दिवाली से पहले ट्रेनों की बढ़ती वेटिंग लिस्ट बता रही है कि लोग अब नए नियमों का पालन करते हुए सफर करने को तैयार हैं। अब रेलवे ने रिजर्वेशन के लिहाज से यात्रियों को बड़ी राहत दी है। यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान रखते हुए भारतीय रेलवे ने टिकट आरक्षण के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब ट्रेनों में टिकट आरक्षण का दूसरा चार्ट ट्रेन के स्टेशन से छूटने से आधे घंटे (30 मिनट) पहले भी जारी किया जाएगा। पता दें रेलवे आरक्षण का पहला चार्ट ट्रेन के स्टेशन से छूटने से चार घंटे पहले जारी करता है।

अधिकारियों के मुताबिक, रेलवे का यह फैसला अपने जोनल रेलवे के आग्रह पर किया गया है। दूसरा चार्ट जारी करने का उद्देश्य पहले वाले रिजर्वेशन चार्ट में खाली सीटों पर ऑनलाइन या टिकट खिड़की से टिकट बुक बंद करना है। जाहिर तौर पर इससे जहां वेटिंग लिस्ट यात्रियों को आखिरी वक्त तक मौका मिलेगा। वहीं ट्रेन में टीटीई की मनमानी भी खत्म होगी। कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में ट्रेनों के संचालन में बदलाव हो सकते हैं।

कोरोना महामारी के दौरान रेलवे की स्पेशल ट्रेनों के खुलने के 2 घंटे पूर्व दूसरा आरक्षण चार्ट जारी करने का अस्थाई निर्णय लिया था। भारतीय रेलवे ने 11 मई 2020 को स्पेशल ट्रेनों लिए दूसरा आरक्षण चार्ट जारी करने के नियमों में यह परिवर्तन किया था। जबकि श्रमिक ट्रेनों का संचालन 1 मई 2020 को शुरू किया गया था। यह व्यवस्था तात्कालिक सावधानी सतर्कता के मद्देनजर की गई थी। फिलहाल रेलवे की पटरियों पर केवल पौने पांच सौ ट्रेनें ही चलाई जा रही हैं। वहीं आम दिनों में कुल 13,000 से अधिक ट्रेनों का संचालन होता है। यात्री गाड़ियों को चलाने को लेकर रेलवे कई तरह के प्रयोग कर रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में रेलवे पूरी तरह एक व्यावसायिक संगठन के तौर पर ट्रेनों का संचालन करेगा, जिसमें राजनीतिक दखल घटेगा। 


मोदी राज्य और केंद्र सरकारों के प्रमुख के तौर पर आज कर रहे 20वें साल में प्रवेश, जानें उनकी उपलब्धियां*

07-Oct-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य और केंद्र सरकारों के प्रमुख के तौर पर आज बुधवार को 20वें साल में प्रवेश कर गए हैं। इस दौरान उन्हें कोई ब्रेक नहीं मिला है। इस तरह उन्होंने एक नेता के करियर के लिहाज से एक और मिसाल पेश कर दी है जिनकी लुभावनी अपील ने बीजेपी को राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ी प्रतिष्ठा दिलाई है। बीजेपी सूत्रों का मानना है कि मोदी ने लगातार 19 साल की अपनी सरकारी सेवा के दूसरे दौर में भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर आमजन को संतुष्ट करने में जबर्दस्त सफलता पाई है। वो चाहे चुनावी वादों को समयसीमा के अंदर प्रभावी तरीके से पूरा करने की बात हो या फिर कोविड-19 महामारी जैसी अप्रत्याशित आपदा से निपटने की, मोदी के फैसलों ने देश और देशवासियों के प्रति उनकी निष्ठा की भावना और मजबूत कर दी।

हमने अप्रत्याशित चुनौतियों के बीच ये सभी उपलब्धियां हासिल कीं और यह तो अभी शुरुआत है। एक बार स्थितियां सामान्य हो जाएं, फिर पता चलेगा कि क्या-क्या होने वाला है।
प्रधानमंत्री ने इस वर्ष 5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन किया। इसके साथ ही उन्होंने इस गंभीर विवाद के कानूनी समाधान का बीजेपी का पुराना वादा पूरा कर दिया। उससे पहले वो संविधान के अनुच्छेद 370 को जम्मू-कश्मीर से निष्प्रभावी करते हुए बीजेपी के एक और प्रमुख वादे को पूरा कर चुके थे। मोदी ने प्रधानमंत्री के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही एक साथ तीन तलाक की कुप्रथा से मुस्लिम महिलाओं को मुक्ति दिलाई। बीजेपी इसे मुस्लिम समाज में बड़े सुधार की नींव मानती है। साथ ही, उसे लगता है कि इस फैसले से `बीजेपी समाज के हर तबके के लिए चिंतित है` का प्रभावी संदेश गया है।
आत्मनिर्भर भारत अभियान की लॉन्चिंग, महामारी से प्रभावित वंचित तबके के करोड़ों लोगों को मुफ्त अनाज मुहैया कराने से लेकर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन को उसी की भाषा में जवाब देने और श्रम एवं कृषि क्षेत्र के लंबित सुधारों को अंजाम तक पहुंचाने तक, मोदी ने कई कड़े और बड़े कदम उठाए। बीजेपी के एक पदाधिकारी ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर कहा, `हमने अप्रत्याशित चुनौतियों के बीच ये सभी उपलब्धियां हासिल कीं और यह तो अभी शुरुआत है। एक बार स्थितियां सामान्य हो जाएं, फिर पता चलेगा कि क्या-क्या होने वाला है।` एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने कहा, `प्रधानमंत्री ने सुनिश्चित किया है कि चुनावी घोषणापत्र को सरकारी फैसलों का आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि चुनाव के दौरान किए गर वादों को गंभीरता से पूरा करना चाहिए।`
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री रहते राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के दो पुराने साथी शिवसेना और शिरोमणि अकाली दल ने अपना-अपना रास्ता अलग कर लिया। एक बीजेपी नेता ने कहा, `कृषि सुधार के लिए लाया गया कानून हमारे गठबंधन को बहुत महंगा पड़ा और एक पुराने साथी शिरोमणि अकाली दल ने हमारा साथ छोड़ दिया। हालांकि, पीएम अपने फैसले पर अडिग रहे क्योंकि यह कानून 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का मार्ग प्रशस्त करने वाला है।`

मोदी ने पहली बार गुजरात के मुख्यंत्री के पद की शपथ 7 अक्टूबर, 2001 को ली थी। उसके तुरंत बाद भुज में विनाशकारी भुकंप ने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया। हालांकि, `वाइब्रेंट गुजरात` जैसे मोदी के कुछ कदमों ने राज्य को फिर से उठ खड़ा होने में पूरी मदद की। बाद में गुजरात बिजली उत्पादन जैसे कई मोर्चों पर आत्मनिर्भर हो गया और इस तरह विकास के गुजरात मॉडल की चर्चा जोर पकड़ने लगी। गुजरात मॉडल ने नरेंद्र मोदी को इस तरह राष्ट्रीय स्तर की सुर्खियों में लाया कि बीजेपी ने उन्हें 2013 में अगले साल के लोकसभा चुनाव के लिए अपना प्रधानमंत्री कैंडिडेट घोषित कर दिया। 




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