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बीजेपी, एकनाथ शिंदे और अजित पवार इतनी सीटों पर लड़ेंगे चुनाव, महायुति में फाइनल हुआ सीटों का बंटवारा?

23-Oct-2024
मुंबई।   ( शोर संदेश ) महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए सत्ताधारी गठबंधन महायुति में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला लगभग फाइनल माना जा रहा है. सूत्रों की मानें तो बीजेपी इस बार 153 से 156  सीटों पर चुनाव लड़ेगी. वहीं, एकनाथ शिंदे की शिवसेना के खाते में 78 से 80 आएंगी. इसके अलावा, अजित पवार की एनसीपी को 53 से 55 सीटें मिलेंगी.
महाराष्ट्र में कुल 288 विधानसभा सीटें हैं. यहां बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी गठबंधन की सरकार है, जिसे महायुति गठबंधन कहा जाता है. साल 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सबसे ज्यादा 105 सीटें जीती थीं. मौजूदा समय में बीजेपी के 103 विधायक हैं. शिवसेना के पास 40 विधायक और एनसीपी के पास 43 विधायक हैं. 
एमवीए सीट शेयरिंग भी फाइनल
महाराष्ट्र के विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी में भी सीट शेयरिंग पर फाइनल फैसला लगभग आ गया है. हालांकि, अभी औपचारिक रूप से ऐलान होना बाकी है. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस 103-108 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी के खाते में 90-95 सीटें आ सकती हैं. इसके अलावा, शरद पवार गुट की एनसीपी (एसपी) 80-85 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. 
महाराष्ट्र चुनाव के लिए बीजेपी कैंडिडेट लिस्ट जारी
इस बीच बीजेपी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पहली उम्मीदवार सूची जारी करते हुए 99 कैंडिडेट के नाम का ऐलान किया है. रविवार (20 अक्टूबर) को जारी हुई लिस्ट में महिला उम्मीदवारों की भी काफी संख्या है. 
इसके अलावा, बीती रात ही एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 45 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा करते हुए अपनी पहली लिस्ट जारी की है. इसमें सीएम एकनाथ शिंदे का भी नाम है. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कोपरी पाचपाखाडी सीट से चुनावी मैदान में उतरने वाले हैं. 
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 
महाराष्ट्र की कुल 288 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान होने हैं. चुनाव आयोग द्वारा जारी शेड्यूल के मुताबिक, 20 नवंबर को सभी सीटों पर एक साथ वोटिंग होगी. इसके बाद 23 नवंबर को मतगणना के बाद चुनावी नतीजों की घोषणा की जाएगी.

 


आजसू को 10 सीट, जेडीयू को 2 और एलजेपी को 1... झारखंड एनडीए में हुआ सीटों का बंटवारा

18-Oct-2024

झारखंड। विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए के सीटों का बंटवारा हो गया है. आजसू 10 सीटों पर लड़ेगी जबकि जेडीयू को 2 सीट दी दी गई है. वहीं चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी को चतरा की एक सीट दी गई है बाकी 68 सीटों पर बीजेपी चुनाव लड़ेगी.

केंद्रीय मंत्री और झारखंड के लिए भाजपा के चुनाव प्रभारी शिवराज सिंह चौहान ने कहा, "झारखंड में भाजपा, ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (एजेएसयू), जनता दल (यूनाइटेड) और लोक जनशक्ति पार्टी मिलकर चुनाव लड़ेंगे. सीट बंटवारे पर भी सहमति बन गई है और जल्द ही उम्मीदवारों की घोषणा की जाएगी...
असम के मुख्यमंत्री और झारखंड बीजेपी चुनाव सह प्रभारी हेमंत बिस्व सरमा ने कहा कि चुनाव पीएम मोदी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा. बीजेपी 68 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और आजसू को 10 सीटें दी गई हैं.
दो चरणों में होगी वोटिंग
झारखंड में दो चरणों में मतदान होगा और 23 नवंबर को नतीजे आएंगे. पहले चरण में 13 नवंबर को 43 सीटों पर वोटिंग होगी और दूसरे चरण में 20 नवंबर को 38 सीटों पर मतदान होगा. इसके बाद 23 नवंबर को मतगणना होगी. चुनाव आयोग के मुताबिक, झारखंड में कुल मतदाता की संख्या 2,55,18,642 हैं, जिसमें पुरुष मतदाता की संख्या 1,29,97,325 है, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 1,25,20,910 है. यानी महिलाओं की सहभागिता बढ़ी है.
झारखंड में कितनी सीटों की फाइट
छोटा नागपुर के पठार पर जंगलों से आच्छादित झारखंड में विधानसभा की कुल 81 सीटों के लिए चुनाव होने हैं. विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा 42 सीटों का है. पिछले यानि 2019 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो 30 सीटें जीतकर जेएमएम सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी।

 


'पांच करोड़ दो या बाबा सिद्दीकी जैसा हश्र भुगतो...', पुलिस को सलमान के लिए मिला धमकी भरा संदेश

18-Oct-2024
मुंबई। मैसेज भेजने वाले ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के हवाले से कहा है कि अगर सलमान खान जिंदा रहना चाहते हैं और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से दुश्मनी खत्म करना चाहते हैं तो उन्हें पांच करोड़ रुपये देने होंगे।
मुंबई ट्रैफिक पुलिस को सलमान खान के लिए लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से धमकी मिली है। लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने मुंबई ट्रैफिक पुलिस के व्हाट्सएप नंबर पर मैसेज भेजा है। इसमें सलमान खान से पांच करोड़ रुपये की मांग की गई है। मैसेज भेजने वाले ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के हवाले से कहा है कि अगर सलमान खान जिंदा रहना चाहते हैं और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से दुश्मनी खत्म करना चाहते हैं तो उन्हें पांच करोड़ रुपये देने होंगे। इसे हल्के में लेने की गलती न करें। मैसेज में कहा गया कि अगर उन्होंने पैसे नहीं दिए तो उनका हाल बाबा सिद्दीकी से बुरा होगा। मुंबई पुलिस ने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। मामले में मुंबई पुलिस ने वर्ली पुलिस स्टेशन में मुकदमा दर्ज किया है। 
पहले भी लॉरेंस बिश्नोई से मिल चुकी है सलमान को धमकी
अप्रैल महीने से ही सलमान लॉरेंस बिश्नोई गैंग के रडार पर हैं। इस मामले को लेकर अभिनेता 4 जून को मुंबई पुलिस के सामने एक बयान भी दर्ज करा चुके हैं। इस बयान के मुताबिक लॉरेंस बिश्नोई  ने अपने गिरोह के सदस्यों की मदद से उनके घर के बाहर गोलीबारी की घटना को अंजाम दिया। अभिनेता के मुताबिक वे उन्हें और उनके मेरे परिवार के लोगों को मारने की योजना बना रहे थे। मामले में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद पुलिस ने चार्जशीट में दावा किया था कि चलॉरेंस ने सलमान को मारने के लिए छह लोगों को 20 लाख रुपये दिए थे। गैंग ने अभिनेता सलमान खान को मारने के लिए 25 लाख रुपये की सुपारी ली थी। 

 


पाकिस्तान का टूट गया घमंड! नवाज शरीफ ने भारत से रिश्ते शुरू करने की लगाई गुहार, कहा- हमने 70 साल लड़ते बिता दिए...

18-Oct-2024
इस्लामाबाद : भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर का पाकिस्तान का दौरा करने के बाद पाकिस्तान के सुर बदले नजर आ रहे हैं। पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी पीएमएल-एन के नेता नवाज शरीफ ने तो भारत के साथ रिश्तों को सुधारने की सार्वजनिक तौर पर अपील कर डाली। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने तो यहां तक कह दिया कि भारत और पाकिस्तान को अब अतीत को भुलाकर आगे की तरह देखना चाहिए और अच्छे पड़ोसियों की तरह रहना चाहिए। शरीफ की इस टिप्पणी को भारत से रिश्तों को सुधारने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
गुरुवार को भारतीय पत्रकारों के एक समूह के साथ बातचीत में तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके और सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) के अध्यक्ष ने जयशंकर की यात्रा को ‘अच्छी शुरुआत’ बताया। दिसंबर 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लाहौर की अचानक यात्रा की सराहना करते हुए शरीफ ने कहा कि वह दोनों देशों के बीच संबंधों में 'लंबे समय से जारी ठहराव' से खुश नहीं हैं और उम्मीद जतायी कि दोनों पक्षों को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना चाहिए। नवाज (74) ने कहा, 'हम अपने पड़ोसियों को नहीं बदल सकते, न ही पाकिस्तान और न ही भारत। हमें अच्छे पड़ोसियों की तरह रहना चाहिए।'
दोनों देश के बीच पुल बनना चाहते हैं नवाज
जब उनसे पूछा गया कि क्या दोनों देशों के बीच ‘सेतु’ बनाने की आवश्यकता है, तो उन्होंने कहा, 'मैं यही भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा हूं।' जयशंकर शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सम्मेलन में भाग लेने के लिए करीब 24 घंटे की यात्रा पर इस्लामाबाद पहुंचे। दोनों देशों के संबंधों में जारी तनाव के बीच पिछले नौ वर्षों में भारत के विदेश मंत्री का पाकिस्तान का यह पहला दौरा था।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बड़े भाई नवाज ने कहा, 'चीजें इसी तरह आगे बढ़नी चाहिए। हम चाहते थे कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आएं, लेकिन यह अच्छा हुआ कि भारतीय विदेश मंत्री आए। मैंने पहले भी कहा है कि हमें अपनी बातचीत के क्रम को आगे बढ़ाना चाहिए।'
'70 साल लड़ते हुए बिता दिए'
उन्होंने कहा, 'हमने 70 साल इसी तरह (लड़ाई करते हुए) बिताए हैं और हमें इसे अगले 70 सालों तक नहीं चलने देना चाहिए। हमने (पीएमएल-एन की सरकारों ने) इस रिश्ते को चलने देने के लिए कड़ी मेहनत की है। दोनों पक्षों को बैठकर चर्चा करनी चाहिए कि आगे कैसे बढ़ना है।' एससीओ सम्मेलन के दौरान भारतीय और पाकिस्तानी विदेश मंत्रियों के बीच कोई द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई। हालांकि, पाकिस्तानी प्रतिष्ठान के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जयशंकर की यात्रा से दोनों देशों के रिश्तों में लंबे समय से जमी बर्फ पिघली है।

ओबीसी से 5 मंत्री, दलितों को भी सम्मान; नायब सिंह सैनी की कैबिनेट में जाट की कितनी हिस्सेदारी

18-Oct-2024
नई दिल्ली। हरियाणा विधानसभा चुनाव की राजनीति में भाजपा ने जाट बनाम गैर जाट की लड़ाई के सहारे कांग्रेस को पछाड़ा। इसका असर नए नवेले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की कैबिनेट में भी देखने को मिल रही है। भाजपा ने 13 सदस्यीय नई कैबिनेट में जातिगत समीकरण और क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व को संतुलित करने की कोशिश की है। पार्टी के ओबीसी चेहरे सैनी के साथ भाजपा ने दलित, जाट, ब्राह्मण, अहीर, पंजाबी, गुर्जर, बनिया और राजपूत समुदायों से मंत्रियों को शामिल किया है।
सात बार के विधायक अनिल विज, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की बेटी आरती राव सिंह (अटेली विधायक) और पूर्व सीएम बंसीलाल की पोती श्रुति चौधरी (तोशाम विधायक) को मंत्री बनाकर हरियाणा के महत्वपूर्ण राजनीतिक खिलाड़ियों, परिवारों और क्षेत्रों को मंत्रिमंडल में जगह मिली है।
पांच ओबीसी मंत्रियों को कैबिनेट में जगह मिली है। नायब सिंह सैनी के अलावा अन्य ओबीसी मंत्रियों में बादशाहपुर विधायक राव नरबीर सिंह, बरवाला विधायक रणबीर सिंह गंगवा, तिगांव विधायक राजेश नागर और आरती राव सिंह शामिल हैं। रणबीर सिंह गंगवा कुम्हार समुदाय से हैं। वहीं, आरती और नरबीर अहीर हैं। राजेश नागर गुर्जर हैं।
आरती और नरबीर को कैबिनेट में शामिल करने को दक्षिण हरियाणा को अधिक प्रतिनिधित्व देने के भाजपा के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। इस इलाके ने 2014 से पार्टी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हरियाणा की आबादी का एक चौथाई हिस्सा जाट समुदाय का है। यह समुदाय कांग्रेस के पीछे मजबूती से खड़ा है। इस समुदाय से भी कैबिनेट में दो मंत्री हैं। श्रुति चौधरी और पानीपत ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा को मंत्री बनाया गया है। ढांडा और बल्लभगढ़ विधायक मूलचंद शर्मा पिछले सैनी कैबिनेट में मंत्री थे। उनमें से सिर्फ एक को रखा गया और नया चेहरा दिया गया।
दलितों को भी सम्मान
भाजपा को जब जाट ने नकार दिया तो भगवा पार्टी ने सारा ध्यान दलितों को साधने पर लगाया। नरवाना विधायक कृष्ण बेदी और इसराना विधायक कृष्ण लाल पंवार चुनाव जीतने में सफल रहे। दलितों भाजपा ने काफी तरजीह दी है। इसलिए भाजपा ने शपथ ग्रहण के लिए वाल्मीकि जयंती का दिन चुना। सैनी ने शपथ लेने से पहले पंचकूला में वाल्मीकि मंदिर का दौरा किया।
2014 में मनोहर लाल खट्टर के सीएम बनने के बाद से पंजाबी समुदाय, जो भाजपा के लिए एक प्रमुख वोट बैंक रहा है, को भी सात बार के विधायक अनिल विज के रूप में समायोजित किया गया है। उन्हें प्रमुख विभाग मिलने की संभावना है। कैबिनेट में गोहाना विधायक अरविंद शर्मा और पलवल विधायक गौरव गौतम के रूप में दो ब्राह्मण हैं। फरीदाबाद विधायक विपुल गोयल को कैबिनेट में शामिल करके एक बनिया को भी जगह मिली है। रादौर विधायक श्याम सिंह राणा को कैबिनेट में जगह मिली है, जो कि राजपूत हैं।

 


हरियाणा में तीसरी बार बीजेपी सरकार, नायब सैनी ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

17-Oct-2024
पंचकूला ( शाेर संदेश ) ।नायब सिंह सैनी ने हरियाणा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है. हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. सीएम सैनी के साथ 13 विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली. इसी के साथ बीजेपी ने हरियाणा में लगातार तीसरी बार अपनी सरकार बना ली है. सैनी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा समेत एनडीए के कई नेता मौजूद थे.
हरियाणा में पिछले 10 साल से सत्ता पर काबिज बीजेपी ने इस बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई है. बीजेपी ने 48 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस के खाते में 37 सीटें गई हैं.
नायब सिंह सैनी के शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, मनोहर लाल खट्टर समेत बीजेपी के कई नेता शामिल थे. इसके अलावा कई राज्यों के सीएम और पार्टी के वरिष्ठ नेता भी मंच पर मौजूद थे. इसके लिए पंचकूला में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. नायब सिंह सैनी दूसरी बार हरियाणा के सीएम बने हैं. इससे पहले 12 मार्च 2024 को वह पहली बार हरियाणा के मुख्यमंत्री चुने गए थे.
हरियाणा में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत
पिछले 10 साल से सत्ता पर काबिज बीजेपी ने इस बार हरियाणा में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. राज्य की 90 में से 48 सीटों पर अपना परचम लहराया. वहीं, कांग्रेस को 37 सीटों पर जीत मिली. इसके अलावा दो सीटें इंडियन नेशनल लोक दल के खाते में गई.

दिवाली से पहले एलपीजी गैस सिलेंडर के दामों में भारी कटौती, सिर्फ 499 रुपए में पहुंचेगा घर!

17-Oct-2024
नई दिल्ली (शोर संदेश)। त्योहारी सीजन चल रहा है, ऐसे में घरों में सबसे ज्यादा यदि किसी चीज की जरूरत होती है तो वो है एलपीजी गैस. क्योंकि त्योहारी सीजन में हर घर में कुछ न कुछ पकवान व व्यंजन रोज बनाए जाते हैं. पेट्रोलियम कंपनी ने मौके को भांपते हुए एलपीजी गैस सिलेंडर के रेटों में बड़ी कटौती कर दी है. जी हां कंपोजिट गैस सिलेंडर अब आपको सिर्फ 499 रुपए में ही मिल जाएगा. हालांकि आपको बता दें कि 14 किग्रा वाले सिलेंडर के दाम अभी जस के तस ही बने हैं. आपको बता दें कि अप कंपोजिट गैस सिलेंडर को कई शहरों में अनुमति मिल चुकी है..
कई हैं विशेषताएं
आपको बता दें कि यह गैस सिलेंडर आम गैस सिलेंडर से पूरे 300 रुपए तक सस्ता मिल रहा है. यही नहीं इस गैस सिलेंडर की कई खासियत भी हैं. यह उठाने में हल्का होता है. साथ ही छोटे परिवारों के लिए  यह वरदान साबित हो रहा है. इसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए दो लोगों की जरूरत नहीं होती. बल्कि घर की महिलाएं भी इसी आराम से उठा सकती हैं. यही नहीं यह पारदर्शी होता है. यानि गैस खत्म होने पर आपको आराम से पता चल जाएगा ताकि आप गैस सिलेंडर भरवा लें
कम खर्च वालों के लिए बेहतर विकल्प
लोगों की समस्या को ध्यान में रखते हुए पेट्रोलियम कंपनीज ने कंपोजिट गैस सिलेंडर को विकल्प को तौर पर पेश किया है. जिसकी कीमत आम घरेलू सिलेंडर से पूरे 300 रुपए कम है. जी  हां इंडेन कंपनी का कंपोजिट सिलेंडर उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 499 रुपए में मिल रहा है.  आपको बता दें कि ये नया प्रकार का सिलेंडर है जिसे कंपोजिट सिलिंडर का नाम दिया गया है. फिलहाल इंडेन यानी इंडियन ऑयल ये सिलेंडर उपलब्ध करा रही है. जानकारी के मुताबिक इस सिलेंडर में 10 किग्रा ही एलपीजी गैस आती है.. साथ ही इस सिलेंडर की खासियत यह है कि ये पारदर्शी होते हैं. साथ ही ये उठाने में भी हल्का होता है.
अभी बदलाव की कोई उम्मीद नहीं
आपको बता दें कि कॅामर्शियल सिलेंडर के दाम तो हर माह कुछ न कुछ रिवाइज होते हैं. लेकिन घरेलू सिलेंडर के दामों में कोई बदलाव नहीं किया जाता है. इसलिए लोगों प्रतिमाह धर्य के सिवा कुछ नहीं मिलता. 14.2 किलो के घरेलू गैस सिलिंडरों के दामों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, वहीं आपको बता दें कि कंपोजिट गैस सिलेंडर अभी पूरी तरह से मार्केट में नहीं आया है. कुछ स्थानों पर ही यह मिल रहा है. बताया जा रहा है कि जिन घरों में गैस की कम खपत है ये सिलेंडर उनके लिए बहुत खास हो सकता है.

सिटीजनशिप एक्ट की धारा 6ए की वैधता बरकरार, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

17-Oct-2024
नई दिल्ली (शोर संदेश) । सुप्रीम कोर्ट ने सिटीजनशिप एक्ट की धारा 6A की वैधता पर अपना फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने धारा 6A की वैधता को बरकरार रखा है. CJI डीवाई चंद्रचूड़ का कहना था कि 6ए उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जो संवैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आते हैं और ठोस प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आते हैं. 
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान, पता लगाने और निर्वासन के लिए असम में तत्कालीन सर्बानंद सोनोवाल सरकार में एनआरसी को लेकर दिए गए निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कहा है. सुप्रीम कोर्ट अब से इस पहचान और निर्वासन प्रक्रिया की निगरानी करेगा.
दरअसल, सिटीजनशिप एक्ट की धारा 6A को 1985 में असम समझौते को आगे बढ़ाने के लिए संशोधन के बाद जोड़ा गया था. असम समझौते के तहत भारत आने वाले लोगों की नागरिकता के लिए एक विशेष प्रावधान के रूप में नागरिकता अधिनियम में धारा 6ए जोड़ी गई थी. इस धारा में कहा गया है कि जो लोग 1985 में बांग्लादेश समेत क्षेत्रों से 1 जनवरी 1966 या उसके बाद लेकिन 25 मार्च 1971 से पहले असम आए हैं और तब से वहां रह रहे हैं, उन्हें भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए धारा 18 के तहत अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा. इस प्रावधान ने असम में बांग्लादेशी प्रवासियों को नागरिकता देने की अंतिम तारीख 25 मार्च 1971 तय कर दी.
इससे पहले दिसंबर 2023 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे दायर किया था और कहा था कि वो भारत में अवैध प्रवास की सीमा के बारे में सटीक डेटा नहीं दे पाएगा क्योंकि प्रवासी चोरी-छिपे आए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा...
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा, 6ए उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जो जुलाई 1949 के बाद प्रवासित हुए, लेकिन नागरिकता के लिए आवेदन नहीं किया. सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा, एस6ए उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जो 1 जनवरी 1966 से पहले प्रवासित हुए थे. इस प्रकार यह उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जो अनुच्छेद 6 और 7 के अंतर्गत नहीं आते हैं. 
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 6ए की वैधता बरकरार रखी और 4:1 के बहुमत से फैसला दिया. जस्टिस जे पारदीवाला ने असहमति जताई. जस्टिस पारदीवाला का कहना था कि यह संभावित प्रभाव से असंवैधानिक है.
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत, एमएम सुंदरेश और मनोज मिश्रा बहुमत में रुख रहा. नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 6ए को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. इन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने सुनवाई की और फैसला सुनाया.
कोर्ट का कहना था कि असम में 40 लाख प्रवासी हैं और पश्चिम बंगाल में 56 लाख प्रवासी हैं. लेकिन इसका प्रभाव असम में ज्यादा है. इसलिए असम को अलग करना वैध है. 1971 की कटऑफ तिथि तर्कसंगत विचार पर आधारित है. ऑपरेशन सर्चलाइट के बाद पूर्वी पाकिस्तान से पलायन बढ़ा है.
कोर्ट ने कहा, 6ए (3) का उद्देश्य दीर्घकालिक समाधान प्रदान करना है. असम समझौता वहां के निवासियों के अधिकारों को कमजोर करना था. बांग्लादेश और असम समझौते के बाद प्रावधान का उद्देश्य भारतीय नीति के संदर्भ में समझा जाना चाहिए. इसे हटाने से वास्तविक कारणों की अनदेखी होगी. भारत में नागरिकता प्रदान करने के लिए पंजीकरण व्यवस्था जरूरी नहीं है. एस 6ए को सिर्फ इसलिए अमान्य नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह पंजीकरण व्यवस्था का अनुपालन नहीं करता है. सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि संसद बाद की नागरिकता के लिए शर्तें निर्धारित करने के लिए अलग-अलग शर्तें निर्धारित करने में सक्षम है.
याचिका में क्या तर्क था...
याचिकाकर्ता का तर्क है कि 6ए असंवैधानिक है, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 6 और 7 की तुलना में नागरिकता के लिए अलग-अलग तारीखें निर्धारित करता है. अलग-अलग तारीख निर्धारित करने की संसद की क्षमता संविधान में है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, प्रत्येक नागरिक को अनिवार्य रूप से भारत के कानून और संविधान का पालन करना होगा. नागरिकता प्रदान करने से पहले निष्ठा की शपथ का स्पष्ट अभाव कानून का उल्लंघन नहीं है. कोर्ट ने कहा, हम हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं. S6A स्थायी रूप से संचालित नहीं होता है. 1971 के बाद प्रवेश करने वालों को नागरिकता प्रदान नहीं करता है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 1 जनवरी 1966 और 24 मार्च 1971 के बीच आए प्रवासियों के लिए नागरिकता नियम कानून के साथ सामंजस्यपूर्ण भूमिका के लिए बनाए गए थे. एएस6ए उन लोगों के निर्वासन की अनुमति देता है जो कट ऑफ तिथि के बाद अवैध रूप से प्रवेश करते हैं. यह नहीं कह सकते कि आप्रवासन ने असम के नागरिकों के वोट देने के अधिकार को प्रभावित किया है. याचिकाकर्ता किसी भी अधिकार का उल्लंघन साबित करने में विफल रहे हैं.
कोर्ट ने कहा, एस6ए को यह कहने के लिए प्रतिबंधात्मक तरीके से समझने की जरूरत नहीं है कि किसी भी व्यक्ति का पता लगाया जा सकता है और सिर्फ विदेशी अधिनियम के तहत निर्वासित किया जा सकता है. हमें कोई कारण नहीं दिखता कि विदेशियों का पता लगाने के उद्देश्य से आईएए के तहत वैधानिक पहचान का उपयोग 6ए के साथ संयोजन में क्यों नहीं किया जा सकता है. आईईएए और 6ए के बीच कोई विरोध नहीं है.आईईएए और धारा 6ए को सामंजस्य में पढ़ा जा सकता है.

 


बिहार के छपरा और सिवान में जहरीली शराब से 28 की मौत

17-Oct-2024

 

नई दिल्ली ( शोर संदेश ) । बिहार में जहरीली शराब पीने की वजह से 28 लोगों की मौत की खबर आ रही है. मिल रही जानकारी के अनुसार ये मौतें सिवान और छपरा में हुई हैं. पुलिस के अनुसार सिवान में जहरीली शराब से 20 लोगों की जबकि छपरा में 8 लोगों की मौत हिुई है. जहरीली शराब पीने की वजह से कई लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है. इन लोगों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है. कहा जा रहा है कि जहरीली शराब की वजह से मौत का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है.  
जहरीली शराब पीने से मरने वालों का आंकड़ा अभी और बढ़ने की आशंका है. डॉक्टरों के अनुसार जहरीली शराब पीने की वजह से जिन लोगों को अस्पताल में इलाज चल रहा है उनकी हालत बेहद खराब है. उधर, जहरीली शराब से मौत की खबर के बीच राज्य सरकार के मंत्री रत्नेश सादा का अजीबोगरीब बयान सामने आया है. जहरीली शराब पीने से इतनी मौत के बाद भी मंत्री यह नहीं मान रहे हैं कि यह प्रशासनिक विफलता का मामला है. उनका मानना है कि यह कोई प्रशासनिक विफलता नहीं है. अब ऐसे में सवाल ये है कि इतने लोगों की मौत का आखिर जिम्मेदार कौन है? 
हालांकि,मंत्री ने एक बड़ी घोषणा की है कि इस पूरे मामले में अब सभी शराब माफियाओं पर सीसीए लगाया जाएगा.इसको लेकर कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा और सीसीए का प्रस्ताव को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बातचीत की जाएगी और प्रशासनिक तैयारी के बाद शराब माफिया पर सीसीए जाने का निर्णय ले लिया गया है.
पटना मेडिकल कॉलेज में भी पांच की हुई है मौत
छपरा और सिवान से कई गंभीर मरीजों को पटना के मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया गया था. पटना मेडिकल कॉलेज के एमएस का कहना है कि हमारे पास जितने लोगों को रेफर किया गया था, उनमें से पांच लोगों की मौत हो चुकी है. पांच लोगों में चार की मौत तो अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो गई थी. सत्ता संरक्षण में ज़हरीली शराब के कारण 27 लोगों की हत्या कर दी गई है. दर्जनों की आंखों की रोशनी चली गई. बिहार में कथित शराबबंदी है लेकिन सत्ताधारी नेताओं-पुलिस और माफिया के गठजोड़ के कारण हर चौक-चौराहों पर शराब उपलब्ध है.इतने लोग मारे गए लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शोक-संवेदना तक व्यक्त नहीं की. जहरीली शराब से,अपराध से प्रतिदिन सैकड़ों लोग मारे जाते हैं लेकिन अनैतिक और सिद्धांतहीन राजनीति के पुरोधा मुख्यमंत्री और उनकी किचन कैबिनेट के लिए यह सामान्य सी बात है.कितने भी लोग मारे जाएं लेकिन मजाल है किसी वरिष्ठ अधिकारी पर कोई कारवाई हो? इसके विपरीत उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा? अगर शराबबंदी के बावजूद हर चौक-चौराहे व नुक्कड़ पर शराब उपलब्ध है. तो क्या यह गृह विभाग और मुख्यमंत्री की विफलता नहीं है? क्या मुख्यमंत्री जी होशमंद है? क्या सीएम ऐसी घटनाओं पर एक्शन लेने व सोचने में सक्षम और समर्थ है? इन हत्याओं का दोषी कौन?
बिहार सरकार का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा
जहरीली शराब से हुई मौतों को लेकर बिहार सरकार किस कदर संवेदनशील है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इस घटना के बाद ना तो कोई आला अधिकारी मौके पर पहुंचा है और न ही बिहार सरकार को कई मंत्री ने इन गांवों का दौरा किया है. बिहार में जहरीली शराब का यह कोई पहला मामला नहीं है. पहले भी इस तरह की घटनाएं हुई है. लेकिन हैरान करने की बात ये है कि राज्य सरकार ने कभी जहरीली शराब बनाने के पीछे जो बड़े प्लेयर हैं उन्हें कभी गिरफ्तार नहीं किया जाता है. 
पिछले साल भी सीतामढ़ी में हुई थी 6 लोगों की मौत
 बिहार में जहरीली शराब से मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है. पिछले ही साल सीतामढ़ी में जहरीली शराब पीने से 6 लोगों की मौत हो गई थी. मृतकों के परिवारों का कहना था कि जिन लोगों की उस घटना में मौत हुई थी उन सभी एक साथ बैठकर शराब पी थी. जहरीली शराब पीने के बाद इन लोगों की तबीयत बिगड़ गई थी.इसके बाद इन्हें इलाज के लिए पास के अस्पताल लेकर जाया गया था. जहां इलाज के दौरान एक-एक कर सभी की मौत हो गई थी.

 


आज फिर बम की धमकी, दिल्ली में अकासा के विमान की इमरजेंसी लैंडिंग

16-Oct-2024
नई दिल्ली ,  ( शोर संदेश ) राजधानी दिल्ली से बेंगलुरु जा रही विमान में बम की सूचना के बाद उसकी इमरजेंसी लैंडिग (Emergency landing) दिल्ली में करवायी गयी है. विमान के उड़ान भरने के बाद बम की अफवाह फैली फिर उसे वापस इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर लाया गया. बताते चलें कि इससे पहले मुंबई से दिल्ली जाने वाली इंडिगो की उड़ान में बम होने की सूचना के बाद विमान का मार्ग परिवर्तित कर उसे अहमदाबाद भेजा गया था. एक अधिकारी बुधवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि जांच के दौरान विमान में कुछ नहीं मिला और बम होने की सूचना गलत निकली थी. 
इधर एअर इंडिया और इंडिगो विमानन कंपनी के विमानों में बम होने की अफवाह के मामले में मुंबई पुलिस छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले पहुंची और एक नाबालिग, उसके पिता तथा कुछ अन्य लोगों से पूछताछ की. 
7 विमानों को बम से उड़ाने की मिली थी धमकी
देश में मंगलवार को सात विमानों को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी. इस धमकी के बाद हड़कंप मच गया और सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आ गईं. विमानों को नजदीकी एयरपोर्ट पर उतारा गया और उसके बाद गहन जांच की गयी. इस दौरान बहुत से यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को परेशानी का सामना करना पड़ा. सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर पोस्ट के माध्यम से यह धमकी दी गई थी.  इसके बाद साथ ही सुरक्षा एजेंसियों ने धमकी देने वाले का पता लगाने के लिए कोशिश तेज कर दी. साथ ही एहतियात के लिए कई कदम उठाए गए. 
सिंगापुर आर्म्ड फोर्सेस ने मंगलवार को एअर इंडिया एक्सप्रेस के एक विमान में बम की धमकी मिलने के बाद उसे आबादी वाले क्षेत्रों से दूर ले जाने के लिए दो लड़ाकू विमानों को भेजा, जिसके बाद विमान को सिंगापुर के चांगी हवाई अड्डे पर सुरक्षित रूप से उतार लिया गया. मदुरै से सिंगापुर जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान संख्या आईएक्स 684 में बम होने की धमकी मिली थी. 
संसदीय समिति के सामने उठा थ्रेट कॉल और एयर फेयर का मुद्दा
राज्यसभा की संसदीय समिति की बैठक में सिविल फ्लाइट को लेकर थ्रेट कॉल और एयर फेयर का मुद्दा उठा.  सरकार की ओर से बताया कि हॉक्स कॉल को लेकर कुछ कदम उठाए गए है. ऐसे लोगों की कुछ पहचान भी हुई है. मीटिंग में सांसदों को कुछ जानकारी दी गई. सरकार थ्रेट कॉल को लेकर गंभीर है.ऐसे कॉल को रोकने के लिये हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं.



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