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रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 765 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी

10-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) भारतीय रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक को मजबूत करने के लिए सरकार ने 765 करोड़ रुपए की कई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य रेलवे संचालन को बेहतर बनाना, लाइन क्षमता बढ़ाना और नेटवर्क के महत्वपूर्ण हिस्सों में आधुनिक संचार प्रणाली विकसित करना है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, इन परियोजनाओं में दो व्यस्त माल और यात्री कॉरिडोर पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को अपग्रेड करना और वेस्टर्न रेलवे के वडोदरा और मुंबई सेंट्रल डिवीजनों में ऑप्टिकल फाइबर कम्युनिकेशन नेटवर्क का विस्तार शामिल है।
सरकार ने ईस्ट कोस्ट रेलवे के 106 किलोमीटर लंबे दुव्वाडा-विशाखापत्तनम-विजयनगरम सेक्शन में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए 318.07 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। रेल मंत्रालय ने बताया कि इस सेक्शन को मौजूदा 1×25 केवी सिस्टम से आधुनिक 2×25 केवी सिस्टम में अपग्रेड किया जाएगा, जिससे इस व्यस्त कॉरिडोर पर माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी, ट्रेनों की रफ्तार में सुधार होगा और संचालन अधिक भरोसेमंद बनेगा।
मंत्रालय ने कहा कि यह परियोजना रेलवे बजट 2024-25 में शामिल उस राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पूरे भारतीय रेलवे में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को आधुनिक बनाना है।इसके अलावा, सरकार ने साउथ सेंट्रल रेलवे के गुंटकल डिवीजन के तहत कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में स्थित 126 किलोमीटर लंबे रायचूर–गुंटकल सेक्शन में भी इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए 259.39 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है।
मंत्रालय के अनुसार, इस रूट पर भी मौजूदा 1×25 केवी सिस्टम को 2×25 केवी सिस्टम में बदला जाएगा। यह रूट मुंबई-चेन्नई कॉरिडोर का हिस्सा है और इसके अपग्रेड होने से मालगाड़ियों की आवाजाही आसान होगी और यात्री ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी। इससे वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी आधुनिक ट्रेनों के संचालन को भी मदद मिलेगी।
सरकार ने वेस्टर्न रेलवे के वडोदरा और मुंबई सेंट्रल डिवीजनों में कम्युनिकेशन नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 187.88 करोड़ रुपए की परियोजना को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना के तहत 4×48 कोर ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। इस योजना के तहत करीब 1,000 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जाएगी, जिसमें वडोदरा डिवीजन में 692 किलोमीटर और मुंबई डिवीजन में 308 किलोमीटर शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि इस आधुनिक संचार नेटवर्क से रेलवे में एलटीई आधारित ‘कवच’ प्रणाली को लागू करने में मदद मिलेगी। यह भारत में विकसित ट्रेन टक्कर रोकने वाली स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली है, जिससे रेलवे नेटवर्क पर सुरक्षा और संचालन दोनों में सुधार होगा।
 

भीषण बाढ़ से तबाह मोजाम्बिक को भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, राहत सामग्री और दवाइयों की बड़ी खेप भेजी

10-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) पूर्वी अफ्रीका के देश मोजाम्बिक के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में आई भीषण बाढ़ का जनजीवन पर बुरा असर पड़ा है। हजारों लोग प्रभावित हुए हैं, और कई इलाकों में राहत एवं पुनर्वास की तत्काल जरूरत महसूस की जा रही है। इस कठिन परिस्थिति में भारत ने मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाते हुए बड़े पैमाने पर राहत सामग्री भेजी है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने विभिन्न सोशल प्लेटफॉर्म्स पर इसकी सूचना दी है। इसमें बताया है कि अपनी ह्यूमनिटेरियन असिस्टेंस और डिजास्टर रिलीफ (एचएडीआर) कोशिशों के तहत, भारत ने मोजाम्बिक को सहायता सामग्री पहुंचाई है। इस सहायता में 500 मीट्रिक टन चावल, अस्थायी आश्रय के लिए टेंट, हाइजीन किट और पुनर्वास कार्यों में उपयोगी कई अन्य आवश्यक सामान शामिल हैं।
इसके अलावा आपदा प्रभावित लोगों की तात्कालिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 10 मीट्रिक टन आवश्यक राहत सामग्री भी भेजी गई है। राहत अभियान के तहत भारतीय नौसेना के एक जहाज के माध्यम से लगभग 3 टन आवश्यक दवाइयां भी मोजाम्बिक पहुंचाई जा रही हैं, ताकि बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों से निपटने में स्थानीय प्रशासन को मदद मिल सके।
भारत पहले ही समुद्री मार्ग के जरिए 86 मीट्रिक टन जीवन रक्षक दवाइयों की खेप मोजाम्बिक भेज चुका है। इन दवाइयों का उद्देश्य आपदा-प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और पीड़ितों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बाद खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाएं सबसे बड़ी चुनौती बन जाती हैं। ऐसे में भारत द्वारा भेजी गई खाद्य सामग्री, स्वच्छता किट और दवाइयां राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
भारत ने हमेशा प्राकृतिक आपदाओं के समय अपने मित्र देशों की सहायता की है। हिंद महासागर क्षेत्र और अफ्रीकी देशों के साथ भारत के मजबूत संबंध रहे हैं, और आपदा के समय दी जाने वाली मानवीय सहायता इन संबंधों को और मजबूत करती है। भारत मानवीय, चिकित्सीय और लॉजिस्टिक सहायता देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस पहल के माध्यम से भारत न केवल संकट के समय मदद पहुंचा रहा है, बल्कि हिंद महासागर और अफ्रीका क्षेत्र में एक भरोसेमंद और जिम्मेदार साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को भी मजबूत कर रहा है।




 

प्रधानमंत्री मोदी ने सीआईएसएफ के स्थापना दिवस पर दी शुभकामनाएं

10-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के स्थापना दिवस पर बल के सभी कर्मियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में सीआईएसएफ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपने संदेश में कहा कि सीआईएसएफ अपने दृढ़ संकल्प, अनुशासन और समर्पण के लिए जानी जाती है। बल के जवान पूरे देश में महत्वपूर्ण संस्थानों और परिसंपत्तियों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सीआईएसएफ के कर्मियों की अटूट कर्तव्यनिष्ठा भारत की सुरक्षा और प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देती है। 
सीआईएसएफ देश के कई संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा में तैनात 
उल्लेखनीय है कि 1968 में संसद के 50वें अधिनियम के तहत केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) का गठन हुआ था। केवल 3,129 कर्मियों के साथ अपनी मामूली शुरुआत से, यह बल 2.20 लाख कर्मियों की एक विशाल शक्ति के रूप में विकसित हो गया है, जो देश के लगभग सभी राज्यों में तैनात है। यह बल देश के प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों, मेट्रो नेटवर्क, बंदरगाहों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाता है। वर्तमान में सीआईएसएफ देश के कई संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा में तैनात है। 

 

रक्षा मंत्री ने भारतीय सेना के लिए ‘डिफेंस फोर्सेज विजन’ रोडमैप किया जारी

10-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को साउथ ब्लॉक में भारतीय सेना के लिए ‘डिफेंस फोर्सेज विजन’ रोडमैप जारी किया। यह बड़ा ब्लूप्रिंट हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ ने रक्षा बलों को आधुनिक, इंटीग्रेटेड और तकनीक से लैस सेना में बदलने के लिए तैयार किया है, जो 2047 तक भारत के विकसित देश बनने के सपने को पूरा करने में मदद कर सके। यह डॉक्यूमेंट भविष्य की युद्ध चुनौतियों के लिए ढलने वाली सेना बनाने के लिए इनोवेशन, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और मॉडर्न ट्रेनिंग फ्रेमवर्क के महत्व पर भी जोर देता है।
इस विजन डॉक्यूमेंट में सशस्त्र बलों में जरूरी सामरिक सुधारों, क्षमता बढ़ाने और संगठनात्मक बदलावों के बारे में बताया गया है, ताकि बदलते भू-रणनीतिक, तकनीकी और सुरक्षा माहौल से अच्छे से निपटा जा सके। इसमें सेना को एक इंटीग्रेटेड, मल्टी-डोमेन और फुर्तीली फोर्स में बदलने की सोची गई है, जो दुश्मनों को रोकने, हर तरह के झगड़े में जवाब देने और तेजी से बदलते ग्लोबल और रीजनल हालात के बीच बढ़ते स्ट्रेटेजिक हितों की रक्षा करने में काबिल हो। इस विजन का एक मुख्य हिस्सा सेनाओं के बीच तालमेल और तालमेल पर जोर देना है, जिससे प्लानिंग, ऑपरेशन और क्षमता विकास में ज़्यादा तालमेल को बढ़ावा मिलेगा।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस विजन में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर ध्यान केन्द्रित किया गया है, जो देश की खास सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से स्वदेशी तकनीक और समाधान अपनाने को बढ़ावा देता है। घरेलू रक्षा विनिर्माण और प्रौद्योगिकी क्षमताओं को मजबूत करने से ऑपरेशनल तैयारी बढ़ने और देश की ग्रोथ में योगदान देने की उम्मीद है। विजन डॉक्यूमेंट में शॉर्ट-टर्म, मिड-टर्म और लॉन्ग-टर्म टाइमलाइन में साफ तौर पर प्राथमिकता वाले क्षमता लक्ष्यों के साथ एक कैलिब्रेटेड रोडमैप अपनाया गया है। यह विश्व स्तरीय डिफेंस फोर्स बनाने के लिए जरूरी सैन्य क्षमताओं, संस्थागत सुधारों और रणनीतिक साझेदारी के विकास में सहयोग करेगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों की जटिलता को पहचानते हुए यह विजन डॉक्यूमेंट पूरे देश के नजरिए की जरूरत पर जोर देता है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा पक्की करने के लिए सैन्य ताकत को कूटनीतिक, तकनीकी और आर्थिक ताकत के साथ जोड़ा जाएगा। लगातार सुधारों, इनोवेशन और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के जरिए इसका मकसद यह पक्का करना है कि भारत की आजादी की सौवीं सालगिरह तक देश की सेना दुनिया भर में सम्मानित, टेक्नोलॉजिकली एडवांस्ड और लड़ाई के लिए तैयार मिलिट्री के तौर पर खड़ी हो, जो मजबूत विकसित भारत में योगदान दे।
इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। 





 

एलपीजी की जमाखोरी को रोकने के लिए बढ़ाई गई सिलेंडर बुकिंग की अवधि

10-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) वैश्विक अस्थिरता के समय में दुनिया में बढ़ती प्राकृतिक गैस की कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने सोमवार को बड़ा फैसला लेते हुए एलपीजी सिलेंडर बुकिंग की अवधि को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया। इसकी वजह जमाखोरी को रोकना है। अमेरिका, इजरायल- ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न अनिश्चितताओं के बीच बाजार में घबराहट में खरीदारी के संकेत मिलने के बाद केंद्र ने यह कदम उठाया है।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि देश में एलपीजी की पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है और स्टॉक को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के उपाय के रूप में एलपीजी सिलेंडरों की बुकिंग का समय बढ़ा दिया गया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के कारण आपूर्ति बाधित होने की आशंका से बुकिंग बढ़ने से मांग में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
एक अधिकारी ने बताया कि औसतन परिवार एक वर्ष में 14.2 किलोग्राम के 7-8 एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते हैं और सामान्यतः उन्हें 6 सप्ताह से कम समय में सिलेंडर रिफिल कराने की आवश्यकता नहीं होती है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की दरें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर होने के बावजूद फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं की जाएगी। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल विपणन कंपनियां फिलहाल मौजूदा लागत दबाव को वहन करेंगी।
उन्होंने कहा कि सरकार वैश्विक तेल बाजारों पर कड़ी नजर रख रही है, लेकिन फिलहाल खुदरा ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है। इसके अतिरिक्त, केंद्र ने सोमवार को संसद को सूचित किया गया कि भारत के पास वर्तमान में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण की कुल 74 दिनों की क्षमता है, जो भू-राजनीतिक संघर्ष जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में आपूर्ति में होने वाली रुकावटों से निपटने में सहायक हो सकती है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा को लिखित उत्तर में बताया, “सरकार ने 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) की कुल क्षमता वाली रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार सुविधाएं स्थापित की हैं, जो भू-राजनीतिक संघर्ष जैसे अल्पकालिक आपूर्ति संकटों के लिए एक बफर के रूप में कार्य कर सकती हैं। यह लगभग 9.5 दिनों की कच्चे तेल की आवश्यकता को पूरा करने के लिए है। इसके अतिरिक्त, देश में तेल विपणन कंपनियों के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण की 64.5 दिनों की क्षमता है। इसलिए, कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण की वर्तमान कुल राष्ट्रीय क्षमता 74 दिनों की है।”
 

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पहुंचे बेलूर मठ, कहा-आयोग हिंसा मुक्त और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध

10-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार सुबह बेलूर मठ और दक्षिणेश्वर स्थित भवतारिणी मंदिर में दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य में हिंसा मुक्त और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
तीन दिन के पश्चिम बंगाल दौरे पर आए ज्ञानेश कुमार मंगलवार सुबह लगभग सात बजे बेलूर मठ पहुंचे। वहां उन्होंने मुख्य मंदिर में पूजा-अर्चना की और मठ के अध्यक्ष स्वामी गौतमानंद महाराज से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। वह लगभग 45 मिनट तक मठ परिसर में रहे।
बेलूर मठ से बाहर निकलने के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा कि इस बार के चुनाव में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो, इस पर विशेष नजर रखी जाएगी। चुनाव आयोग राज्य में शांतिपूर्ण और हिंसा मुक्त मतदान सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। 
बेलूर मठ से निकलने के बाद ज्ञानेश कुमार दक्षिणेश्वर स्थित भवतारिणी मंदिर भी पहुंचे। वहां जाते समय उन्हें काले झंडे दिखाए जाने का आरोप भी सामने आया है। इससे पहले सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ने राज्य के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की थी। 
इसके अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी उन्होंने चर्चा की। बैठक के बाद चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ ने माना कि कुछ स्थानों पर कुछ समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन राज्य में विधानसभा चुनाव कराने के लिए अनुकूल वातावरण मौजूद है।











 

शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल से बनेगा विकसित भारत: प्रधानमंत्री मोदी

09-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) बजट के बाद आयोजित वेबिनार श्रृंखला के चौथे सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “सबका साथ, सबका विकास – जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति” केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि सरकार का मूल ध्येय और संकल्प है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, कौशल, स्वास्थ्य, पर्यटन, खेल और संस्कृति जैसे मूलभूत क्षेत्र जन आकांक्षाओं को पूरा करने के बड़े माध्यम हैं। इसी उद्देश्य से बजट वेबिनार में इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर व्यापक चर्चा की जा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, विद्वानों, उद्यमियों और युवाओं के सुझाव बजट घोषणाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज प्रिवेंटिव और होलिस्टिक हेल्थ के लिए एक बड़े विजन पर काम कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में देश का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हुआ है और सैकड़ों जिलों में नए मेडिकल कॉलेज खुले हैं। आयुष्मान भारत योजना और आरोग्य मंदिरों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच गांव-गांव तक बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में देश में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या तेजी से बढ़ेगी और दुनिया के कई देशों में केयरगिवर्स की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में हेल्थ सेक्टर में युवाओं के लिए स्किल आधारित रोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। प्रधानमंत्री ने विशेषज्ञों से नए ट्रेनिंग मॉडल और साझेदारी विकसित करने के सुझाव देने का आग्रह किया।
पीएम मोदी ने टेली-मेडिसिन को भी स्वास्थ्य सेवाओं का अहम माध्यम बताते हुए कहा कि दूर-दराज के क्षेत्रों के लोग बड़ी संख्या में इसका लाभ उठा रहे हैं और इस पर भरोसा बढ़ रहा है। हालांकि उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अभी भी जागरूकता और सहजता बढ़ाने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में देश के युवाओं के माइंडसेट में बड़ा बदलाव आया है। आज गांव, कस्बों और शहरों से आगे बढ़कर हर युवा कुछ नया करने का सपना देख रहा है। उन्होंने कहा कि इस नई सोच को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा प्रणाली को लगातार आधुनिक और अपडेट रखना होगा। नई शिक्षा नीति ने इसके लिए मजबूत आधार तैयार किया है। अब जरूरी है कि पाठ्यक्रम बाजार की जरूरतों के अनुसार अपडेट हों और शिक्षा प्रणाली को रियल वर्ल्ड इकॉनमी से तेजी से जोड़ा जाए। उन्होंने AI, ऑटोमेशन, डिजिटल इकॉनमी और डिजाइन ड्रिवन मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में शिक्षा को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के लिए लगातार काम हो रहा है। यूनिवर्सिटी टाउनशिप जैसे नए मॉडल इसी सोच को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत एवीजीसी सेक्टर यानी एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स को बढ़ावा दे रहा है और देश इनोवेशन आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने शिक्षाविदों से आग्रह किया कि वे अपने कैंपस को इंडस्ट्री कोलैबोरेशन और रिसर्च ड्रिवन लर्निंग का केंद्र बनाने पर विचार करें, ताकि छात्रों को रियल वर्ल्ड एक्सपोजर मिल सके।
पीएम मोदी ने कहा कि विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित यानी STEM क्षेत्रों में बेटियों की रुचि लगातार बढ़ रही है, जो गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि भविष्य की तकनीकों के दौर में यह सुनिश्चित करना होगा कि अवसरों की कमी के कारण कोई भी बेटी पीछे न रह जाए। उन्होंने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और ऐसा रिसर्च इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर दिया, जहां युवा शोधकर्ताओं को नए प्रयोग और नवाचार करने के पर्याप्त अवसर मिलें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि युवा शक्ति तभी राष्ट्रीय शक्ति बनती है जब वह स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वासी हो। इसी कारण पिछले वर्षों में खेलों को राष्ट्रीय विकास की महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया जैसी पहलों से देश में स्पोर्ट्स इकोसिस्टम को नई ऊर्जा मिली है और खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने प्रतिभाओं की पहचान को बेहतर बनाने, खिलाड़ियों को संरचित आर्थिक सहायता देने और खेल संस्थाओं को अधिक प्रोफेशनल बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में देश में कॉमनवेल्थ गेम्स होने हैं और भारत ओलंपिक आयोजन के प्रयास में भी जुटा है। ऐसे में कम उम्र से ही प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें तराशना जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पर्यटन और संस्कृति रोजगार के नए अवसर पैदा करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। किसी स्थान पर पर्यटन बढ़ने से उस शहर की ब्रांडिंग और समग्र विकास भी तेज होता है। उन्होंने कहा कि भारत में ऐतिहासिक स्थलों की कमी नहीं है, लेकिन लंबे समय तक पर्यटन कुछ चुनिंदा स्थानों तक सीमित रहा। अब देश के कोने-कोने में नए पर्यटन स्थलों के विकास पर ध्यान दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के टूरिज्म इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए होलिस्टिक अप्रोच अपनानी होगी। प्रशिक्षित गाइड, हॉस्पिटैलिटी स्किल, डिजिटल कनेक्टिविटी, सामुदायिक भागीदारी और स्वच्छता जैसे विषयों पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब संस्थान, उद्योग और अकादमिक जगत मिलकर काम करते हैं तो परिवर्तन की गति तेज हो जाती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बजट के बाद आयोजित वेबिनार की परंपरा से नीति निर्माण और क्रियान्वयन को नई दिशा मिल रही है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष लाखों लोग इन वेबिनार से जुड़े, जिनमें विशेषज्ञ, लाभार्थी और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वेबिनार से बहुत व्यावहारिक सुझाव मिल रहे हैं, जो समस्याओं के समाधान के साथ नई ऊर्जा और गति भी प्रदान करते हैं। प्रधानमंत्री ने सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि ऐसे प्रयास विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार करेंगे।

सेशेल्स में शुरू हुआ भारत-सेशेल्स संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘लामितिये-2026’

09-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) भारतीय सशस्त्र बलों का एक दल सेशेल्स रक्षा बलों के साथ आयोजित होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘लामितिये-2026’ के 11वें संस्करण में भाग लेने के लिए सेशेल्स पहुंच गया है। यह संयुक्त अभ्यास 9 मार्च से 20 मार्च 2026 तक सेशेल्स रक्षा अकादमी में आयोजित किया जा रहा है। क्रियोल भाषा में ‘लामितिये’ का अर्थ ‘मित्रता’ होता है। यह द्विवार्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम वर्ष 2001 से सेशेल्स में आयोजित किया जा रहा है।
इस संस्करण में भारतीय सशस्त्र बलों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संयुक्त सैन्य अभ्यास में असम रेजिमेंट के जवानों के साथ भारतीय नौसेना और वायु सेना के कर्मी भी शामिल हैं। इसके अलावा भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस त्रिकंद और भारतीय वायु सेना का सी-130 विमान भी इस अभ्यास का हिस्सा हैं।
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य अर्ध-शहरी वातावरण में अपरंपरागत अभियानों के संचालन में दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना है। साथ ही शांति स्थापना अभियानों के दौरान सहयोग और अंतर-संचालनीयता को मजबूत करना भी इसका अहम लक्ष्य है। इससे दोनों सेनाओं के बीच कौशल, अनुभव और बेहतर प्रथाओं का आदान-प्रदान होगा और द्विपक्षीय सैन्य संबंधों को भी मजबूती मिलेगी।
संयुक्त अभ्यास के दौरान दोनों देशों की सेनाएं अर्ध-शहरी वातावरण में संभावित खतरों से निपटने के लिए विभिन्न सामरिक अभ्यासों की श्रृंखला का संयुक्त रूप से प्रशिक्षण, योजना और क्रियान्वयन करेंगी। इसके साथ ही नई पीढ़ी के उपकरणों और आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग और प्रदर्शन पर भी जोर दिया जाएगा।
12 दिनों तक चलने वाले इस अभ्यास में क्षेत्र प्रशिक्षण अभ्यास, युद्ध संबंधी चर्चाएं, केस स्टडी, व्याख्यान और प्रदर्शन शामिल होंगे। अभ्यास का समापन दो दिनों के सत्यापन अभ्यास के साथ किया जाएगा।
यह संयुक्त अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी समझ बढ़ाने और रक्षा सहयोग को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 
 

ईरानी युद्धपोत के डॉकिंग के लिए ईरान ने भारत का किया धन्यवाद : विदेश मंत्री एस जयशंकर

09-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच भारत ने ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस लवन को कोच्चि बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति दी। इसे लेकर ईरान ने भारत के प्रति आभार व्यक्त किया है। ईरान ने भारत के इस कदम को “मानवीय” बताया। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान इसकी जानकारी दी।
पश्चिम एशिया संघर्ष में बदलते हालात पर राज्यसभा में जयशंकर ने कहा कि मौजूदा हालात में ईरान के साथ उच्च स्तरीय संपर्क बनाए रखना मुश्किल रहा है, हालांकि मौजूद चैनलों के जरिए डिप्लोमैटिक बातचीत जारी है। विदेश मंत्री ने कहा, “हालांकि कोशिशें की गई हैं, लेकिन इस समय नेतृत्व के स्तर पर ईरान के साथ संपर्क करना साफ तौर पर मुश्किल है। हालांकि, मैंने 20 फरवरी, 2026 और 5 मार्च, 2026 को विदेश मंत्री अराघची से बात की है। हम आने वाले दिनों में ये उच्च स्तरीय बातचीत जारी रखेंगे।”
इस दौरान उन्होंने कोच्चि में अभी डॉक किए गए ईरानी नेवी के जहाज का भी जिक्र किया। विदेश मंत्री ने उन हालातों के बारे में बताया जिनके तहत भारत ने जहाज को भारतीय पोर्ट में आने की इजाजत दी थी। बता दें, यह तब हुआ जब श्रीलंका के पास ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना के डूबने की घटना घटी। लगभग उसी समय, एक और ईरानी नौसेना का जहाज इस इलाके में काम करते समय तकनीकी दिक्कतों का सामना करने के बाद मदद मांगने के लिए भारत से संपर्क कर चुका था।
ईएएम जयशंकर ने कहा, “ईरानी पक्ष ने 20 फरवरी, 2026 को इस इलाके के तीन जहाजों को हमारे पोर्ट पर डॉक करने की इजाजत मांगी थी। यह 1 मार्च, 2026 को मिल गई। आईआरआईएस लवन असल में 4 मार्च, 2026 को कोच्चि में डॉक हुआ। क्रू अभी भारतीय नौसेना फैसिलिटी में है। हमारा मानना ​​है कि यह करना सही है। ईरानी विदेश मंत्री ने इस इंसानियत भरे काम के लिए हमारे देश का शुक्रिया अदा किया है।”
विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया में चल रही अस्थिरता के बीच भारत की एनर्जी सिक्योरिटी से जुड़ी चिंताओं पर भी बात की और कहा कि हालात को मैनेज करते हुए, सरकार ने भारतीय कंज्यूमर्स के हितों को “सबसे जरूरी प्राथमिकता” के तौर पर रखा है। उन्होंने कहा, “सबसे पहले, भारत शांति के पक्ष में है और बातचीत और डिप्लोमेसी पर लौटने की अपील करता है। हम तनाव कम करने, संयम बरतने और आम लोगों की सुरक्षा पक्का करने की वकालत करते हैं। दूसरी बात, इस इलाके में भारतीय समुदाय की भलाई और सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। हम इस दिशा में इलाके की सरकारों के साथ काम करते रहेंगे।”
राज्यसभा में अपने संबोधन के आखिर में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “आखिर में, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार सहित हमारा राष्ट्रीय हित हमेशा सबसे ऊपर रहेगा।”
 

पश्चिम एशिया संकट पर सरकार सतर्क, पीएम मोदी हालात पर रख रहे नजर: जयशंकर

09-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया में बदलते हालात पर करीब से नजर रख रहे हैं। उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं, इसलिए मौजूदा संघर्ष भारत के लिए विशेष चिंता का विषय है। ताजा हालात को देखते हुए वहां फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत लाने के लिए ऑपरेशन तेजी से चलाया जा रहा है।
विदेश मंत्री ने कहा कि गल्फ क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं और वहीं रहते हैं। ऐसे में क्षेत्र में जारी संघर्ष भारत के लिए गंभीर चिंता का कारण है। सरकार की प्राथमिकता वहां मौजूद भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित वापस लाना है।
राज्यसभा में सत्र शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने क्षेत्र में जारी संघर्ष के दौरान भारतीय नागरिकों की मौत का मुद्दा उठाने की कोशिश की, जिस पर सदन में विरोध शुरू हो गया। इसके बाद सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने खड़गे से अपना हस्तक्षेप समाप्त करने का आग्रह किया और विदेश मंत्री को स्थिति पर बयान देने के लिए आमंत्रित किया।
सदन में नारेबाजी के बीच जयशंकर ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद शुरू हुआ, जिसके परिणामस्वरूप व्यापक विनाश हुआ और कई वरिष्ठ नेताओं की मौत हुई। इसके बाद क्षेत्र में हालात और ज्यादा बिगड़ गए।
विदेश मंत्री ने बताया कि सरकार ने 28 फरवरी को बयान जारी कर गहरी चिंता जताई थी और सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ाने से बचने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की थी। भारत का मानना है कि तनाव कम करने और अंदरूनी मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाया जाना चाहिए। साथ ही क्षेत्र के सभी देशों की संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता का सम्मान भी जरूरी है।
जयशंकर ने बताया कि हालात की गंभीरता को देखते हुए 1 मार्च को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट सुरक्षा समिति (सीसीएस) की बैठक हुई। इसमें ईरान में हुए एयरस्ट्राइक और उसके बाद कई खाड़ी देशों में हुए हमलों की जानकारी दी गई। सीसीएस ने क्षेत्र में भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई और सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक और कमर्शियल गतिविधियों पर पड़ने वाले असर की भी समीक्षा की।
उन्होंने कहा कि समिति को इस क्षेत्र में आने-जाने वाले भारतीय यात्रियों और इन देशों में परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों को हो रही परेशानियों की भी जानकारी दी गई। इसके बाद सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों को इन समस्याओं से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए। प्रधानमंत्री लगातार नए घटनाक्रमों पर नजर रख रहे हैं और संबंधित मंत्रालय मिलकर प्रभावी प्रतिक्रिया देने के लिए काम कर रहे हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि संघर्ष लगातार बढ़ रहा है और क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति काफी खराब हो गई है। यह लड़ाई अब अन्य देशों तक भी फैलती दिखाई दे रही है, जिससे तबाही और मौतों की संख्या बढ़ रही है। पूरे क्षेत्र में सामान्य जीवन और आर्थिक गतिविधियों पर इसका स्पष्ट असर पड़ा है और कुछ जगहों पर गतिविधियां पूरी तरह रुक गई हैं।
जयशंकर ने कहा कि भारत ने 3 मार्च को एक बार फिर बातचीत और कूटनीति के जरिए संघर्ष समाप्त करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा है कि पूरा सदन भी जान-माल के नुकसान पर दुख व्यक्त करने में उनके साथ है।
 



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