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अहमदाबाद मेट्रो चरण-2(ए) को कैबिनेट की मंजूरी, एयरपोर्ट कनेक्टिविटी होगी बेहतर: प्रधानमंत्री मोदी

11-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के चरण-2(ए) को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे अहमदाबाद के शहरी परिवर्तन को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि परियोजना से विशेष रूप से एयरपोर्ट तक पहुंच बेहतर होगी और लोगों को तेज, सुगम तथा सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के चरण-2(ए) को मंजूरी मिलने से कनेक्टिविटी में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि यह विस्तार यातायात के दबाव को कम करेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा और सतत शहरी विकास को बढ़ावा देगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के चरण-2(ए) को मंजूरी दी थी। इस चरण के तहत करीब 6.032 किलोमीटर लंबे नए मेट्रो कॉरिडोर का विकास किया जाएगा। इसका उद्देश्य एयरपोर्ट तक निर्बाध कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना और उन प्रमुख आवासीय तथा व्यावसायिक क्षेत्रों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ना है, जहां वर्तमान में प्रभावी सार्वजनिक परिवहन सुविधा का अभाव है।
इस कॉरिडोर में कुल पांच स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें चार एलिवेटेड और एक अंडरग्राउंड स्टेशन शामिल होगा। चरण-2(ए) के पूरा होने के बाद अहमदाबाद-गांधीनगर कॉरिडोर में सक्रिय मेट्रो नेटवर्क की कुल लंबाई 77.63 किलोमीटर हो जाएगी। इस चरण के तहत आश्रम रोड, कोटेश्वर प्राचीन मंदिर, साबरमती नदी, सरदार नगर और एयरपोर्ट स्टेशन विकसित किए जाएंगे।
परियोजना की कुल लागत, जिसमें निर्माण अवधि के दौरान ब्याज (आईडीसी) भी शामिल है, 2,169.04 करोड़ रुपए आंकी गई है। यह विस्तार अहमदाबाद के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य प्रमुख आवासीय और वाणिज्यिक केंद्रों को अहमदाबाद-गांधीनगर मेट्रो कॉरिडोर से सुचारू रूप से जोड़ना है।
सरकार के अनुसार, यह परियोजना 2029 में प्रस्तावित विश्व पुलिस खेलों और 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों के मद्देनजर क्षेत्र में खेल सुविधाओं के विकास को भी बढ़ावा दे सकती है। इसके अलावा, बेहतर मेट्रो कनेक्टिविटी से पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे निवासियों और आगंतुकों दोनों को लाभ मिलेगा।
अहमदाबाद मेट्रो के चरण-2(ए) से निर्माण कार्य के चरम समय में लगभग 2,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। वहीं, परियोजना के संचालन और रखरखाव के दौरान करीब 500 लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। सरकार का मानना है कि यह परियोजना यातायात जाम कम करने, प्रदूषण घटाने और शहर में जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।







 

नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल बैठक 11 जून को, पीएम मोदी करेंगे अध्यक्षता

10-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को लेकर केंद्र सरकार 11 जून को एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जून 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक की थीम “विकसित भारत @2047 के लिए समावेशी मानव विकास” रखी गई है।
बैठक में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल और प्रशासक, केंद्रीय मंत्री तथा नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेंगे। चर्चा का केंद्र बिंदु यह होगा कि देश के हर नागरिक तक विकास का लाभ कैसे पहुंचाया जाए और विकसित भारत के विजन को जमीनी स्तर पर कैसे लागू किया जाए।
नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल बैठक में समावेशी मानव विकास के चार प्रमुख स्तंभों पर विचार-विमर्श होगा। इनमें मजबूत मानव पूंजी और भविष्य के लिए तैयार कौशल, रोजगार, उद्यमिता और विकेंद्रीकृत विकास, स्वास्थ्य, पोषण और कल्याण, तथा समानता और गरिमा शामिल हैं।
बैठक में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने, कौशल विकास को मजबूत करने और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही शासन व्यवस्था, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), डेटा आधारित प्रणाली और विभिन्न सरकारी योजनाओं के बेहतर समन्वय के जरिए विकास के लक्ष्यों को हासिल करने की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
बैठक का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य राज्यों के विकास विजन को राष्ट्रीय विजन के साथ जोड़ना भी है, ताकि पूरे देश में संतुलित और समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सके।
इसके अलावा, दिसंबर 2025 में आयोजित मुख्य सचिवों के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन की सिफारिशों पर भी चर्चा होगी। सम्मेलन में प्रारंभिक बाल शिक्षा, स्कूली शिक्षा, स्किलिंग, उच्च शिक्षा और खेल एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों जैसे विषयों पर सुझाव दिए गए थे।
सरकार का मानना है कि यह बैठक विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को और मजबूत करेगी तथा मानव विकास से जुड़े क्षेत्रों में ठोस और मापनीय परिणाम सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।





 

इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने पीएम मोदी को दी बधाई, भारत-इटली साझेदारी को बताया भविष्य की राह

10-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करने का नया कीर्तिमान स्थापित करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इटली की उनकी समकक्ष जॉर्जिया मेलोनी ने शुभकामनाएं दी हैं। जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए बधाई दी। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं, जो एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि है।”
मेलोनी ने हाल ही में रोम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई मुलाकात का उल्लेख करते हुए आगे लिखा कि उनसे दोबारा मिलना बेहद सुखद रहा। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने मिलकर भारत और इटली के बीच एक “विशेष रणनीतिक साझेदारी” की शुरुआत की है, जो भविष्य को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों और उनके नागरिकों के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी।
ज्ञात हो, पीएम मोदी 19-20 मई 2026 को आधिकारिक यात्रा पर इटली गए थे। मेलोनी ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक खास संदेश भी पोस्ट किया था। उन्होंने लिखा, “रोम में आपका स्वागत है, मेरे दोस्त!”
दोनों देशों के बीच सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में लगभग 15 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए थे। वहीं, सांस्कृतिक आदान-प्रदान वर्ष 2027 के लिए भारत-इटली ‘ईयर ऑफ कल्चर एंड टूरिज्म’ शुरू करने का निर्णय लिया गया था।
इस दौरान एक मेलोडी क्षण भी काफी चर्चा में रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी इतालवी समकक्ष को मेलोडी टॉफी उपहार स्वरूप दी थी। खुशी का इजहार करते हुए मेलोनी ने कहा था कि ये उपहार बहुत अच्छा है।
दरअसल, पीएम मोदी ने बुधवार को उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में 4,399 दिनों का कार्यकाल पूरा किया। यही वजह है कि दुनिया के तमाम देशों से उन्हें बधाई दी जा रही है। इसमें मालदीव के राष्‍ट्रपति, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर, श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके, पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे, त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला-बिसेसर समेत कई नेता शामिल हैं। सभी देशों ने संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई और पीएम मोदी की इस उपलब्धि को ऐतिहासिक और अद्भुत करार दिया है।



















 

अमरावती में केंद्रीय सरकारी कार्यालय परिसर को CCEA की मंजूरी, 1,299 करोड़ रुपये की परियोजना

10-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने आंध्र प्रदेश की नई राजधानी अमरावती में सेंट्रल गवर्नमेंट जनरल पूल ऑफिस एकॉमोडेशन (CGGPOA) के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना विभिन्न केंद्रीय सरकारी कार्यालयों को एक ही परिसर में स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है, जिससे विभागों के बीच बेहतर समन्वय और प्रशासनिक कार्यों में दक्षता बढ़ाई जा सके।
यह कार्यालय परिसर 5.53 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा और इसमें दो प्रमुख ब्लॉक बनाए जाएंगे। एक ब्लॉक प्लॉट C-9 पर ग्राउंड प्लस 13 मंजिलों का होगा, जबकि दूसरा ब्लॉक प्लॉट C-8 पर ग्राउंड प्लस 10 मंजिलों का बनाया जाएगा। परियोजना का कुल निर्मित क्षेत्रफल लगभग 23.25 लाख वर्ग फुट (2,16,032 वर्ग मीटर) होगा।
सरकार के अनुसार, इस परिसर में करीब 8,000 अधिकारियों और कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा लगभग 1,800 कारों के लिए पार्किंग सुविधा भी विकसित की जाएगी।
परियोजना को पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा दक्ष बनाने के लिए इसे भारत के उच्चतम ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप डिजाइन किया जाएगा। परिसर को कम से कम GRIHA 4-स्टार रेटिंग प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ विकसित किया जाएगा और यह एनर्जी कंजर्वेशन एंड सस्टेनेबल बिल्डिंग कोड (ECSBC) 2024 का पालन करेगा।
कार्यालय परिसर में कर्मचारियों और आगंतुकों के लिए बैंक, एटीएम, डाकघर, क्रेच, मनोरंजन कक्ष, महिला विश्राम कक्ष, 100 सीटों वाला कॉन्फ्रेंस हॉल, 500 सीटों वाला बहुउद्देश्यीय हॉल और चार कैंटीन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। साथ ही, दिव्यांगजनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परिसर को पूरी तरह बैरियर-फ्री बनाया जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस परियोजना से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। निर्माण चरण के दौरान प्रतिवर्ष लगभग 7 लाख मानव-दिवस रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है, जबकि संचालन चरण में करीब 50 हजार मानव-दिवस रोजगार सृजित होंगे।
इस परियोजना की अनुमानित लागत 1,299.08 करोड़ रुपये है, जिसका वित्तपोषण केंद्र सरकार द्वारा बजटीय सहायता से किया जाएगा। परियोजना का क्रियान्वयन आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के तहत केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) द्वारा किया जाएगा। सरकार ने बताया कि निविदा प्रक्रिया की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और टेंडर दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं।





 

बिरसा मुंडा सामाजिक न्याय की खोज में राष्ट्र का मार्गदर्शन करते रहेंगे: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

09-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक बिरसा मुंडा को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। बिरसा मुंडा को भारत के सबसे प्रमुख आदिवासी नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों में से एक माना जाता है। 1875 में आज के झारखंड में जन्मे बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन और आदिवासी समुदायों पर थोपी गई शोषणकारी जमीन नीतियों के खिलाफ ऐतिहासिक ‘उलगुलान’ या ‘महान विद्रोह’ का नेतृत्व किया।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने एक्स पोस्ट में लिखा, “भगवान बिरसा मुंडा के शहादत दिवस पर मैं सम्मानित ‘धरती आबा’ को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिनका जीवन साहस, आत्म-सम्मान और न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक था। ऐतिहासिक ‘उलगुलान’ के माध्यम से उन्होंने दमन के खिलाफ प्रतिरोध की भावना जगाई और आदिवासी समुदायों को अपने अधिकारों, पहचान और सम्मान की रक्षा के लिए प्रेरित किया।”
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा, “यह मेरे लिए गहरे व्यक्तिगत सम्मान की बात है कि मुझे झारखंड के राज्यपाल के रूप में पदभार संभालने के पहले ही दिन और हाल ही में भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में उनके पवित्र जन्मस्थान ‘उलिहातू’ पर श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर मिला।”
उल्लेखनीय है कि अपने आंदोलन के जरिए बिरसा मुंडा ने हजारों आदिवासी लोगों को उनके अधिकारों, पहचान और पारंपरिक जमीन के मालिकाना हक के लिए लड़ने के लिए एकजुट किया। हालांकि उनका आंदोलन मुख्य रूप से छोटानागपुर क्षेत्र तक ही सीमित था, लेकिन बिरसा मुंडा की विरासत असम सहित कई राज्यों में भी काफी असरदार है। असम में बड़ी संख्या में आदिवासी आबादी और ‘टी ट्राइब’ (चाय बागान में काम करने वाले आदिवासी समुदाय) के लोग रहते हैं, जिनके पूर्वज औपनिवेशिक काल के दौरान छोटानागपुर पठार से वहां जाकर बस गए थे।
असम के चाय बागान समुदाय के कई लोगों की जड़ें उन इलाकों से जुड़ी हैं, जहां बिरसा मुंडा ने संघर्ष किया था और वे आज भी उन्हें प्रतिरोध, सम्मान और सशक्तिकरण का प्रतीक मानते हैं। हाल के वर्षों में आदिवासी अधिकारों के लिए उनके योगदान को काफ़ी पहचान मिली है।
केंद्र सरकार ने आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का सम्मान करने और भारत की समृद्ध आदिवासी विरासत का जश्न मनाने के लिए बिरसा मुंडा की जयंती यानी 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में घोषित किया है।
असम भर के राजनीतिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और आदिवासी समूहों ने भी इस महान नेता को श्रद्धांजलि दी और मूल निवासी तथा हाशिए पर रहने वाले समुदायों के अधिकारों की लड़ाई में उनकी भूमिका को याद किया।
9 जून 1900 को 25 साल की उम्र में ब्रिटिश हिरासत में बिरसा मुंडा का निधन हो गया था, लेकिन उनकी विरासत आज भी देश भर की पीढ़ियों को प्रेरित करती है। 



 

केंद्र ने जारी किए कोयला एक्सचेंज नियम-2026, ऊर्जा क्षेत्र में आएगा बड़ा सुधार

09-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्र सरकार ने कोयला क्षेत्र में पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए कोयला एक्सचेंज नियम, 2026 जारी कर दिए हैं। यह कदम विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने और ऊर्जा बाजारों को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कोयला मंत्रालय ने मंगलवार को जारी बयान में बताया कि नए नियमों से देश में कोयला एक्सचेंजों की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है। हाल ही में पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2025 के तहत खनिज एक्सचेंज की अवधारणा को कानूनी मान्यता दी गई थी।
– कोयला नियंत्रक संगठन (CCO) को कोयला एक्सचेंजों के पंजीकरण और विनियमन का जिम्मेदार प्राधिकरण बनाया गया है।
– पात्र संस्थाएं CCO से पंजीकरण लेकर कोयला एक्सचेंज स्थापित और संचालित कर सकेंगी।
– पंजीकरण 25 वर्ष की अवधि के लिए वैध होगा।एक्सचेंज बाजार नियम और उपनियम बनाने की भी छूट होगी।
नए कोयला एक्सचेंज के शुरू होने से कोयला व्यापार में “एक से अनेक” मॉडल की जगह “अनेक से अनेक” प्रतिस्पर्धी मंच बनेगा। इससे:
– पारदर्शी और बाजार-आधारित मूल्य निर्धारण संभव होगा
– कोयला उत्पादकों (वाणिज्यिक और कैप्टिव दोनों) को ज्यादा खरीदारों तक पहुंच मिलेगी
– सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनियों को भी बेहतर बाजार भागीदारी मिलेगी
– समग्र दक्षता बढ़ेगी और व्यापार करने में आसानी होगी
कोयला मंत्रालय ने कहा कि यह पहल व्यापार सुगमता, पारदर्शिता और आधुनिक ऊर्जा परितंत्र बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अधिक प्रतिस्पर्धी और कुशल कोयला बाजार के जरिए ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, औद्योगिक विकास को गति मिलेगी और सतत आर्थिक विकास के लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। यह सुधार भारत को आत्मनिर्भर और भविष्य-तैयार ऊर्जा क्षेत्र प्रदान करने की दिशा में एक अहम कदम है। 



 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 13 जून को डुंडीगल स्थित वायु सेना अकादमी में संयुक्त दीक्षांत परेड की समीक्षा करेंगे

09-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) 217वें बैच की संयुक्त दीक्षांत परेड (सीजीपी) 13 जून, 2026 को वायु सेना अकादमी (एएफए) दुंडीगल, हैदराबाद में आयोजित की जाएगी। सैन्य दक्षता से परिपूर्ण यह समारोह भारतीय वायु सेना (आईएएफ) की विभिन्न शाखाओं के फ्लाइट कैडेटों के पूर्व-कमीशनिंग प्रशिक्षण के सफल समापन के उपलक्ष्य में मनाया जाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह परेड के समीक्षा अधिकारी (आरओ) होंगे।
इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भारतीय वायु सेना के सोशल मीडिया हैंडल के साथ-साथ डीडी नेशनल पर 13 जून, 2026 को सुबह 7 बजे से किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है।
समारोह के दौरान, आरओ राजनाथ सिंह स्नातक होने वाले प्रशिक्षुओं को ‘राष्ट्रपति कमीशन’ प्रदान करेंगे। समारोह में भारतीय वायु सेना के फ्लाइट कैडेटों और भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल तथा वियतनाम के अधिकारियों और प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने पर ‘विंग्स’ और ‘ब्रेवेट्स’ प्रदान किए जाते हैं।
इस सीजीपी में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), पुणे से 30 मई 2025 को उत्तीर्ण होने वाली और शाखा-विशिष्ट प्रशिक्षण के लिए एएफए में शामिल होने वाली महिला कैडेटों के पहले बैच को कमीशन भी दिया जाएगा।
आरओ राजनाथ सिंह फ्लाइंग, नेविगेशन स्ट्रीम और ग्राउंड ड्यूटी शाखाओं में समग्र योग्यता क्रम में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले फ्लाइट कैडेट्स को ‘राष्ट्रपति पट्टिका’ प्रदान करेंगे। इस कार्यक्रम में आकाश गंगा और एयर वॉरियर ड्रिल टीम (एडब्ल्यूडीटी) के प्रदर्शन के साथ सीजीपी का शुभारंभ किया जाएगा। इसमें वायु सेना प्रमुख (सीएएस) एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के नेतृत्व में फ्लाईपास्ट भी शामिल होंगे। फ्लाईपास्ट में चार प्रकार के प्रशिक्षण विमानों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिनमें पिलाटस पीसी-7 एमकेआईआई, हॉक, किरण और चेतक विमान शामिल हैं। एसयू-30 एमकेआई, सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम और सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम (एसकेएटी) का हवाई प्रदर्शन इस समारोह का मुख्य आकर्षण होगा। 

 

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने जोजिला सुरंग को भारत के अवसंरचना इतिहास का ‘स्वर्ण अध्याय’ बताया

09-Jun-2026

नई दिल्ली। (शोर संदेश)केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने जोजिला सुरंग परियोजना को भारत के अवसंरचना विकास के इतिहास में ‘स्वर्ण अध्याय’ बताया है। मंगलवार को जोजिला सुरंग से जुड़े कार्यक्रम के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में गडकरी ने कहा कि 14 किलोमीटर लंबी यह सुरंग लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लिए जीवन रेखा साबित होगी। यह सुरंग साल भर हर मौसम में निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करेगी, जो पहले बर्फबारी के कारण कई महीनों तक कट जाता था।

https://x.com/nitin_gadkari/status/2064289159183802401?s=20
जोजिला सुरंग की खासियतें
– देश की सबसे महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं में से एक
– 3,000 मीटर की ऊंचाई पर शून्य से नीचे तापमान में निर्माण
– लगभग 80% स्थानीय श्रमिकों की भागीदारी
– वैश्विक सुरक्षा मानकों के अनुरूप निर्माण
गडकरी ने परियोजना में लगे इंजीनियरों, श्रमिकों और एजेंसियों की सराहना करते हुए कहा कि यह सुरंग चुनौतीपूर्ण भू-भाग और कठिन मौसम में भी सफलतापूर्वक बनाई गई है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जोजिला सुरंग कश्मीर और लद्दाख के बीच निरंतर संपर्क सुनिश्चित करके पर्यटन, व्यापार, आर्थिक गतिविधियों और सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक आवागमन को मजबूती देगी।
इसी के साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने लद्दाख में कई नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की भी घोषणा की:
– लेह साउथ बाईपास (48 किमी) – ₹1,000 करोड़
– लेह नॉर्थ बाईपास (7.6 किमी) – ₹200 करोड़
– फातु ला ट्विन-ट्यूब सुरंग (2.6 किमी) – काम तीन महीने में शुरू
– टेला पास सुरंग – ₹3,500 करोड़, अंतिम DPR चरण में, अगले साल मार्च तक टेंडर संभावित
– श्रीनगर-गुमरी सड़क का चौड़ीकरण और उन्नयन
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हिमालयी क्षेत्र में अवसंरचना विस्तार और दूरस्थ सीमावर्ती इलाकों में साल भर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई। यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विजन के अनुरूप उत्तर भारत के दुर्गम क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।





 

 


सैपलिंग संवाद-2026 का उद्घाटन, दक्षिण एशिया में खाद्य प्रसंस्करण से रोजगार और सतत विकास पर जोर

09-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने मंगलवार को गुजरात के अहमदाबाद में सैपलिंग (उन्नत पोषण और विकास के लिए दक्षिण एशियाई नीति नेतृत्व) संवाद-2026 का उद्घाटन किया। “अन्लॉकिंग वैल्यू: दक्षिण एशिया में रोजगार सृजन और सतत विकास के लिए खाद्य प्रसंस्करण को आगे बढ़ाना” विषय पर आयोजित यह दो दिवसीय क्षेत्रीय उच्च-स्तरीय नीति संवाद भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और विश्व बैंक समूह के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण कृषि और समृद्धि के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में रोजगार सृजन, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने भारत की बढ़ती भूमिका को वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण केंद्र के रूप में रेखांकित करते हुए कहा कि मूल्यवर्धन, तकनीक अपनाने और क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से दक्षिण एशिया की खाद्य अर्थव्यवस्था में व्यापक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतिगत पहल और अवसंरचना विकास के प्रयास वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण में मदद कर रहे हैं।
दो दिवसीय इस संवाद में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, विकास भागीदारों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, नवप्रवर्तकों और दक्षिण एशियाई देशों के प्रतिनिधियों सहित लगभग 200 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण इकोसिस्टम को मजबूत करना और क्षेत्र में समावेशी, लचीली तथा टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के निर्माण पर विचार-विमर्श करना है।
गुजरात सरकार के कृषि मंत्री जीतूभाई वाघानी ने विभिन्न देशों की भागीदारी का स्वागत करते हुए खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को कृषि परिवर्तन का प्रमुख इंजन बताया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र रोजगार, मूल्यवर्धन और आर्थिक विकास को गति देने वाला महत्वपूर्ण माध्यम है। वाघानी ने कृषि और उद्योग के बीच की खाई को कम करने के लिए गुजरात में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान के परिसर की स्थापना का भी समर्थन किया।
संवाद में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े कई अहम विषयों पर चर्चा की जा रही है। इनमें दक्षिण एशिया में खाद्य प्रसंस्करण के अवसरों का विस्तार, कृषि आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाना, अनौपचारिक खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का औपचारिककरण, तकनीक आधारित नवाचार, खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता मानक, निवेश जुटाना और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है। इन सत्रों में नेस्ले, बायर, राबोबैंक, अजिनोमोटो, आईटीसी, नाबार्ड और फूड इंडस्ट्री एशिया सहित कई प्रमुख वैश्विक और भारतीय संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम के साथ आयोजित नवाचार मेले में कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स, डिजिटल ट्रेसिबिलिटी, टिकाऊ पैकेजिंग, स्मार्ट प्रोसेसिंग तकनीक और आधुनिक भंडारण प्रणालियों से जुड़े नवाचारों का प्रदर्शन किया गया। इसका उद्देश्य नवप्रवर्तकों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के बीच सहयोग को मजबूत करना है।
इस अवसर पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने “भारत में खाद्य प्रसंस्करण के स्तर का आकलन” शीर्षक से एक रिपोर्ट भी जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में खाद्य प्रसंस्करण का समग्र स्तर वर्ष 2016 के लगभग 10 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2023 में लगभग 17 प्रतिशत हो गया है। रिपोर्ट में फलों, सब्जियों और डेयरी उत्पादों जैसे नाशवान क्षेत्रों में मूल्यवर्धन की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया गया है। साथ ही अवसंरचना को मजबूत करने, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने के लिए नीतिगत सुझाव भी दिए गए हैं।
कार्यक्रम का उद्देश्य दक्षिण एशियाई देशों के बीच ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देना, क्षेत्रीय सहयोग मजबूत करना, निजी निवेश आकर्षित करना और एमएसएमई क्षेत्र को समर्थन देना है। आयोजकों को उम्मीद है कि यह संवाद खाद्य प्रसंस्करण आधारित विकास, रोजगार सृजन और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के निर्माण के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 

 

 


भारत-बांग्लादेश सीमा पर ड्रग्स और हथियारों की तस्करी रोकने के लिए अमित शाह ने दिए जागरूकता शिविर लगाने के निर्देश

07-Jun-2026
भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ती नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध हथियारों की आवाजाही को रोकने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ा कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सीमा से सटे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जागरूक और प्रशिक्षित करने के लिए विशेष शिविर आयोजित करने को कहा है।
अमित शाह ने शनिवार को अगरतला के निकट शालबागान स्थित बीएसएफ त्रिपुरा फ्रंटियर मुख्यालय में सीमा क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों की समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा केवल सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसलिए लोगों की भागीदारी बढ़ाना बेहद जरूरी है।
गृह मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर रहने वाले लोगों के लिए विशेष प्रशिक्षण और जागरूकता शिविर लगाए जाएं। इन शिविरों में पटवारी, स्थानीय पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए।
बैठक में अमित शाह ने यह भी निर्देश दिया कि गृह मंत्रालय के सीसीटीवी मॉडल को सबसे पहले त्रिपुरा में लागू किया जाए। उन्होंने बीएसएफ के सभी कैमरों को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड कर जिला प्रशासन से जोड़ने का भी आदेश दिया, जिससे निगरानी व्यवस्था और मजबूत हो सके।
बैठक में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा, मुख्य सचिव जेके सिन्हा, पुलिस महानिदेशक अनुराग, और राज्य के सभी आठ सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक मौजूद रहे। बैठक में राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के साथ व्यापक सीमा प्रबंधन पर चर्चा हुई।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल बाड़ लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्थानीय प्रशासन, स्मार्ट तकनीक और बीएसएफ के समन्वय से ही पूरी तरह सुरक्षित और अभेद्य सीमा सुरक्षा तंत्र तैयार किया जा सकता है।
गृह मंत्री ने मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चलाने तथा इस अवैध कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क पर सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने सीमावर्ती जिलों में वित्तीय गतिविधियों, संदिग्ध लेन-देन, बड़ी इमारतों के निर्माण और संपत्ति की खरीद-बिक्री पर कड़ी नजर रखने को कहा।
उन्होंने पिछले पांच वर्षों के भूमि रिकॉर्ड की भी जांच कराने का निर्देश दिया। इसके अलावा अमित शाह ने कलेक्टरों और जीएसटी अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण देने तथा नकली मुद्रा के मामलों की जांच के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) से सर्वे कराने की भी बात कही।
 
 


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