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पंजाब दौरे से पहले अमित शाह का AAP पर हमला, बोले–‘आप-दा सरकार में कानून व्यवस्था खत्म’

14-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार को पंजाब के दौरे पर जाएंगे। इस दौरान वे मोगा जिले में आयोजित एक बड़ी रैली को संबोधित करेंगे। पंजाब पहुंचने से पहले उन्होंने सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि रिमोट कंट्रोल वाली ‘आप-दा सरकार’ में राज्य से कानून व्यवस्था और विकास दोनों ही नदारद हैं।
अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि पंजाब का हर व्यक्ति बदलाव चाहता है। उन्होंने लिखा कि जवानों, किसानों और मेहनतकश लोगों के लिए प्रसिद्ध पंजाब की पवित्र भूमि को ‘आप-दा सरकार’ ने करप्शन, ड्रग्स और अपराध में डुबो दिया है। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, “रिमोट कंट्रोल वाली आप-दा सरकार में पंजाब से लॉ एंड ऑर्डर और विकास नदारद हैं।”
गृह मंत्री ने आगे लिखा कि वह आज मोगा में भाजपा की ‘बदलाव रैली’ में पंजाब के बहनों-भाइयों से संवाद करने को लेकर उत्साहित हैं। पार्टी नेताओं के अनुसार यह रैली राज्य में बदलाव और नई राजनीतिक दिशा का संदेश देने का मंच बनेगी।
भाजपा नेताओं ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह मोगा के किल्ली चहल में आयोजित विशाल ‘बदलाव रैली’ को संबोधित करेंगे। इस दौरान पार्टी पंजाब को गुंडागर्दी, नशे और बेरोजगारी से मुक्त कर प्रगति के नए रास्ते पर ले जाने का अपना विजन साझा करेगी।
पंजाब में अमित शाह की रैली को लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां की गई हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह रैली राज्य में विकास, सुशासन और नई राजनीतिक दिशा का दृष्टिकोण प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण मंच साबित होगी।
इससे पहले पंजाब भाजपा के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को ढाका विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में फ्लैग मार्च निकाला। यह मार्च इलाके के कई प्रमुख बाजारों और सार्वजनिक स्थानों से होकर गुजरा, जहां लोगों को राज्य में बदलाव और विकास का संदेश दिया गया। साथ ही उन्हें किल्ली चहल में आयोजित रैली में बड़ी संख्या में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया। 














 

क्षमता विकास आयोग की दक्षिणी क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला, प्रशिक्षण संस्थानों के सहयोग पर जोर

14-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) भारत सरकार के क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) ने 13 मार्च 2026 को हैदराबाद स्थित प्रशासनिक कर्मचारी महाविद्यालय (एएससीआई) में सहयोगात्मक क्षमता विकास और संसाधन साझा करने पर दक्षिणी क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में दक्षिण भारत के 23 सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों (सीएसटीआई) के 47 प्रतिभागियों ने संकाय आदान-प्रदान, साझा शिक्षण सामग्री और बुनियादी ढांचे को साझा करने के लिए व्यावहारिक रूपरेखाओं पर विचार-विमर्श किया।
सीबीसी की अध्यक्ष एस. राधा चौहान के नेतृत्व में आयोजित परामर्श कार्यशाला का शुभारंभ सीबीसी की प्रधान सलाहकार चंद्रलेखा मुखर्जी के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने कहा कि सीएसटीआई के बीच सहयोग अब तक संरचित संस्थागत तंत्रों के बजाय गैर-संस्थागत कारकों पर अधिक निर्भर रहा है। उन्होंने आपूर्ति-आधारित प्रशिक्षण से मांग-आधारित क्षमता विकास की ओर मूलभूत बदलाव का आह्वान किया, जहां संस्थान व्यापक विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए शासन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करें।
इसके बाद एएससीआई के महानिदेशक डॉ. निम्मागड्डा रमेश कुमार ने संबोधित किया। उन्होंने लोक सेवक और सरकार के बीच आजीवन सीखने के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए सार्वजनिक नीति में नवाचार के लिए एएससीआई के केंद्र को इस बात का उदाहरण बताया कि कैसे संस्थान लोक प्रशासन में निरंतर सुधार की संस्कृति को बढ़ावा दे सकते हैं।
मुख्य सत्र का संचालन राष्ट्रीय संचार अकादमी-वित्त के उप महानिदेशक और विषयगत कार्य बल के अध्यक्ष डॉ. कमल कपूर ने किया। उन्होंने कई सप्ताहों के परामर्श के दौरान कार्य बल द्वारा किए गए सामूहिक विचार-विमर्श की जानकारी दी। उन्होंने साझा संसाधन निर्देशिका, विभिन्न संस्थानों में सामग्री की पुनरावृत्ति को दूर करने की आवश्यकता और संस्थागत सहयोग के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने संरचित सहयोग के लिए तीन प्रमुख स्तंभ बताए—संकाय साझा करना, सामग्री और ज्ञान साझा करना तथा अवसंरचना साझा करना।
इसके बाद प्रतिभागियों ने तीन विषयगत समूहों में संरचित चर्चाओं में भाग लिया। प्रत्येक समूह ने मौजूदा बाधाओं पर चर्चा की, सहयोग के लिए व्यवहार्य तंत्रों की पहचान की और संस्थागत, प्रणाली-संचालित ढांचों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए व्यावहारिक अनुशंसाएं कीं। प्रमुख परिणामों में केंद्रीकृत संकाय और संसाधन निर्देशिका, सामग्री खोज और प्रशिक्षण कैलेंडर के एकीकरण, तथा एनएससीएसटीआई मान्यता और क्रेडिट तंत्र से जुड़े डिजिटल अवसंरचना डैशबोर्ड के प्रस्ताव शामिल थे।
कार्यशाला का समापन समूह चर्चाओं के परिणामों को एकीकृत करते हुए आगे की राह पर टिप्पणियों के साथ हुआ, जिसके बाद चंद्रलेखा मुखर्जी ने समापन भाषण दिया। उन्होंने क्षेत्रीय अनुभवों को ठोस सिफारिशों में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि एक सहयोगात्मक, एकीकृत और भविष्य के लिए तैयार सिविल सेवा प्रशिक्षण तंत्र का निर्माण किया जा सके। 


 

प्रधानमंत्री मोदी का कांग्रेस पर तीखा हमला, बोले—जहां उनकी सोच खत्म होती है, वहां से हमारा काम शुरू होता है

14-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जहां कांग्रेस के नेताओं के दिमाग का ताला बंद होता है, वहां से उनकी सरकार का काम शुरू होता है। उन्होंने यह बात असम के सिलचर में शिलांग-सिलचर कॉरिडोर के भूमि पूजन के बाद कही।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आजादी के कई दशकों तक कांग्रेस की सरकारों ने नॉर्थ-ईस्ट को दिल्ली से भी दूर रखा और दिल से भी दूर रखा। उनके अनुसार कांग्रेस ने इस पूरे क्षेत्र को लगभग भुला दिया था, जबकि भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार ने नॉर्थ-ईस्ट को बेहतर तरीके से जोड़ा है और आज हर जगह इसकी चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि आज नॉर्थ-ईस्ट भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का केंद्र बन गया है और दक्षिण-पूर्व एशिया से भारत को जोड़ने वाला सेतु बन रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जैसे कांग्रेस ने पूरे नॉर्थ-ईस्ट को अपने हाल पर छोड़ दिया था, वैसे ही बराक घाटी को बेहाल करने में भी उसकी बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि आजादी के समय ऐसी सीमा खींची गई, जिससे बराक घाटी का समुद्र से संपर्क कट गया। जो क्षेत्र कभी व्यापार मार्ग और औद्योगिक केंद्र के रूप में जाना जाता था, उसकी ताकत ही छीन ली गई। आजादी के बाद भी लंबे समय तक कांग्रेस की सरकारें रहीं, लेकिन बराक घाटी के विकास के लिए कोई ठोस काम नहीं हुआ।
प्रधानमंत्री ने बताया कि क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए 24,000 करोड़ रुपए की लागत वाले शिलांग-सिलचर कॉरिडोर का भूमि पूजन किया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस तो यह गिन भी नहीं सकती कि ऐसे प्रोजेक्ट्स में कितने शून्य होते हैं। उनके अनुसार यह कॉरिडोर पूर्वोत्तर के लोगों के दशकों लंबे इंतजार को खत्म करेगा और इसके जरिए सिलचर, मिजोरम, मणिपुर और त्रिपुरा के बीच संपर्क मजबूत होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विकास की दौड़ में जो क्षेत्र पीछे रह गए, उन्हें प्राथमिकता देना भारतीय जनता पार्टी का मंत्र है। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारें सीमावर्ती क्षेत्रों को देश का अंतिम गांव मानती थीं, जबकि उनकी सरकार इन्हें देश का पहला गांव मानती है। इसी सोच के तहत कछार जिले से ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ का अगला चरण शुरू किया गया, जिससे बराक घाटी के कई गांवों में सुधार होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि डबल इंजन सरकार किसानों के कल्याण के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि हाल ही में गुवाहाटी से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की अगली किस्त जारी की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी के लंबे शासन के बावजूद किसानों को ऐसा सीधा लाभ नहीं मिला।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी ने असम के युवाओं को हिंसा और आतंकवाद के कुचक्र में उलझाए रखा और राज्य को ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति की प्रयोगशाला बना दिया। प्रधानमंत्री के अनुसार आज असम के युवाओं के सामने अवसरों का खुला आसमान है। 





 

आईएनएस सुदर्शिनी वैलेटा पहुंचा, भारत-माल्टा समुद्री संबंधों को मिली मजबूती

14-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) भारतीय नौसेना का नौकायन प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी 12 मार्च 2026 को माल्टा के ऐतिहासिक बंदरगाह वैलेटा पहुंचा। यह उसके ऐतिहासिक समुद्री अभियान लोकायान-26 का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह यात्रा भारत और माल्टा के बीच गहरे समुद्री संबंधों को दर्शाती है और पोत की महत्वाकांक्षी 22,000 समुद्री मील की वैश्विक यात्रा का अहम चरण है। वैलेटा पहुंचने से पहले पोत ने स्वेज नहर को सफलतापूर्वक पार किया और हाल ही में अलेक्जेंड्रिया में भी ठहराव किया था।
आगमन के बाद पोत के कमांडिंग अधिकारी ने माल्टा गणराज्य में भारत की उच्चायुक्त रचिता भंडारी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में भारतीय नौसेना की भूमिका पर चर्चा हुई। उच्चायुक्त ने कहा कि माल्टा में आईएनएस सुदर्शिनी की उपस्थिति महासागर परियोजना की परिकल्पना का सशक्त प्रतीक है। यह समुद्री सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ जन-जन के संबंधों को भी बढ़ावा देती है।
इस यात्रा के दौरान पोत का चालक दल माल्टा के सशस्त्र बलों के साथ पेशेवर बातचीत और शिष्टाचार भेंट करेगा। इससे आपसी विश्वास और सहयोग को और बढ़ावा मिलेगा। पोत पर सामुदायिक गतिविधियों का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें माल्टा में रहने वाले स्कूली बच्चों और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों के लिए निर्देशित “ओपन शिप” कार्यक्रम शामिल है।
आईएनएस सुदर्शिनी फिलहाल अपनी यात्रा के दूसरे महीने में है। यह यात्रा 20 जनवरी 2026 को कोच्चि से शुरू हुई थी। माल्टा की यात्रा के बाद जहाज फ्रांस के तट की ओर रवाना होगा, जहां वह एस्केल आ सेट समुद्री उत्सव में भाग लेगा। इस उत्सव में वह दुनिया के कई प्रसिद्ध विशाल जहाजों के साथ भारत का प्रतिनिधित्व करेगा।  

भारत के पास तेल की कोई कमी नहीं, पर्याप्त भंडार मौजूद : केंद्र

13-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) भारत के रणनीतिक तेल भंडार और 40 तेल निर्यातक देशों से आपूर्ति ने यह सुनिश्चित करने में मदद की है कि देश वैश्विक ऊर्जा संकट जैसी स्थितियों का मजबूती से सामना कर पाए। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा गुरुवार को दी गई। सरकारी अधिकारी ने कहा कि कहा कि देश का व्यापक आर्थिक आधार काफी मजबूत है। हमारे पास 11-12 महीनों तक सामान को आयात करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। यह अगले पांच वर्षों के देश के तेल आयात के बिल चुकाने के लिए भी पर्याप्त है।
इसके साथ देश के पास 70 दिनों से अधिक की बाजार मांग को पूरा करने के लिए कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का भंडार मौजूद है। वहीं, देश ने कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए मध्य पूर्व से निर्भरता घटाई है। अधिकारी ने कहा कि यह सरकार की इस स्थिति से निपटने की बहुसंबद्ध नीति व्यावहारिक आर्थिक कूटनीति को दर्शाता है जिसमें रूसी कच्चे तेल की खरीद, आवश्यक वस्तु अधिनियम का प्रयोग और संप्रभुता से समझौता किए बिना आपूर्ति में विविधता लाना शामिल है। यह संकट मुद्रास्फीति की तुलना में विकास पर अधिक प्रभाव डालता है, जिससे सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए नीतिगत लचीलापन प्राप्त होता है।
भारत की मुद्रास्फीति दर लगभग 2.75 प्रतिशत है, जो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम है। रूस से कच्चे तेल के आयात, ईंधन कर में लचीलेपन और एलपीजी की विनियमित कीमतों के कारण उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें नियंत्रण में बनी हुई हैं। उदाहरण के लिए, जापान में मुद्रास्फीति दर 5 प्रतिशत है और यह सुदूर पूर्वी देश होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्यात होने वाले कच्चे तेल पर 75 से 90 प्रतिशत तक निर्भर है। दूसरी ओर, भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाली आपूर्ति पर अपनी निर्भरता को काफी कम करने के लिए अन्य देशों से ऊर्जा आयात में विविधता लाई है, जो पहले लगभग 50 प्रतिशत थी और बाद में घटकर 20 प्रतिशत हो गई।
पश्चिमी दबाव के बावजूद, भारत रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखे हुए है, जो कुल आयात का लगभग एक तिहाई है। अधिकारी ने बताया कि इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका जैसे अन्य देशों से भी तेल आयात किया जा रहा है, जो राजनीतिक गठबंधन के बजाय विविधीकरण को दर्शाता है।
भारत के पास दो महीने से अधिक का भंडार है, जबकि पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के पास केवल 30 दिन या उससे भी कम का भंडार है। परिणामस्वरूप, पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपए प्रति लीटर की भारी वृद्धि हुई है, वहीं श्रीलंका में भी घबराहट में खरीदारी के चलते ईंधन की कीमतें बढ़ा दी गई हैं और बांग्लादेश को ऊर्जा राशनिंग लागू करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
 

प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से क्षेत्रीय स्थिति पर की चर्चा

13-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन के साथ क्षेत्र की बढ़ती गंभीर स्थिति पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से समाधान की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर चिंता जताते हुए भारत की शांति, स्थिरता और सुरक्षित पारगमन के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ”ईरान के राष्‍ट्रपत‍ि डॉ. मसूद पेजेशकियन से इलाके के गंभीर हालात पर बात की। बढ़ते तनाव और आम लोगों की जान जाने के साथ-साथ सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान पर गहरी चिंता जताई। भारतीय नागरिकों की सेफ्टी और सिक्योरिटी, साथ ही सामान और एनर्जी के बिना रुकावट आने-जाने की जरूरत, भारत की टॉप प्रायोरिटी बनी हुई है।”
चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शांति और स्टेबिलिटी के लिए भारत का कमिटमेंट दोहराया और बातचीत और डिप्लोमेसी की अपील की। म‍िड‍िल ईस्‍ट में बढ़ते तनाव के बीच भी भारत सभी से अपने संबंध मधुर बनाए हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये बताचीत ऐसे समय हुई है जब ईरान बहुत ही संघर्ष की स्‍थ‍ित‍ि में है। इजरायल के साथ उसकी जंग अभी भी खतरनाक बनी हुई है।
गुरुवार को भी ईरान ने इजरायल पर म‍िसाइलों से हमला क‍िया। ईरान की ओर से इजरायल की राजधानी येरुशलम पर मिसाइलें दागी गईं। एक मिसाइल पुराने शहर, वेस्टर्न वॉल, अल-अक्सा मस्जिद और चर्च ऑफ द होली सेपुलकर से कुछ सौ मीटर दूर गिरी। इसी कारण आज नमाज़ कुछ समय के लिए रोक दी गई। वहीं, इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) ने गुरुवार की शाम को ईरान की ओर म‍िसाइलें दागने का दावा क‍िया।आईडीएफ का कहना है कि रक्षा प्रणाली सक्रिय होकर इन मिसाइलों को रोकने का प्रयास कर रही है। आईडीएफ ने लोगों को सुरक्षित स्‍थानों पर रहने की एडवाइजरी दी है।
आईडीएफ ने आध‍िकार‍िक सोशल मीड‍िया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा, ”रक्षा प्रणाली इन खतरों को रोकने के लिए काम कर रही है। पिछले कुछ मिनटों में फ्रंट कमांड ने संबंधित क्षेत्रों में मोबाइल फोन पर प्रारंभिक निर्देश जारी किए हैं। लोगों से अनुरोध है कि वे जिम्मेदारी से काम करें और दिए गए निर्देशों का पालन करें। अलर्ट मिलने पर सुरक्षित स्थान में प्रवेश करना आवश्यक है और नए निर्देश मिलने तक वहीं रहें।’
 

कतर से 700 भारतीयों की घर वापसी, रियाद के लिए भारतीय एयरलाइंस की उड़ानें शुरू

13-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) पश्चिम एशिया में जारी हालात के बीच भारत सरकार नागरिकों की सुरक्षित वापसी में लगी हुई है। कतर से करीब 700 नागर‍िक देश पहुंचे, तो वहीं रियाद के लिए भारतीय एयरलाइंस की उड़ानें शुरू कर दी गईं।
कल गुरुवार को कतर में भारतीय दूतावास की जारी अपडेट एडवाइजरी के अनुसार, आज लगभग 700 भारतीय नागरिक दो कतर एयरवेज की उड़ानों से रवाना हुए। एक उड़ान दिल्ली और दूसरी मुंबई के लिए थी, जबकि कुछ यात्री अन्य गंतव्यों पर गए। आने वाले दिनों में कतर एयरवेज की रोजाना एक-दो उड़ानें भारत के लिए चलने की संभावना है।
जो भारतीय नागरिक कतर से बाहर जाना चाहते हैं, उनके पास कतर एयरवेज की सीमित उड़ानों से यात्रा करने का विकल्प है। इसके अलावा, यदि उनके पास सऊदी अरब का वैध वीजा है, तो वे सलवा बॉर्डर के जरिए सऊदी अरब होकर भी जा सकते हैं।
एडवाइजरी के अनुसार, हम उन भारतीय नागरिकों के लिए सऊदी अरब का 96 घंटे का अस्थायी ट्रांजिट वीजा जारी कराने में मदद कर रहे हैं जो कतर में विजिट वीजा पर थे और सऊदी अरब के रास्ते बाहर जाना चाहते हैं। इसके लिए रजिस्ट्रेशन हमारे सोशल मीडिया चैनलों पर दिए गए लिंक के माध्यम से किया जा सकता है।
जानकारी के अनुसार, दूतावास शुक्रवार-शनिवार (13-14 मार्च) को भी खुला रहेगा, ताकि विशेष रूप से तत्काल आधार पर पासपोर्ट नवीनीकरण जैसी जरूरतों में मदद की जा सके।
दूतावास की ओर से कहा गया कि भारतीय समुदाय से अनुरोध है कि कतर के अधिकारियों की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करें। इन एडवाइजरी में बताया गया है कि देशभर में बाजार स्थिर हैं और खुदरा दुकानों पर सभी जरूरी सामान उपलब्ध है। सभी से जिम्मेदारी से व्यवहार करने, अफवाहों से बचने और अनावश्यक सामान जमा न करने की अपील की गई है। केवल उतना ही सामान खरीदें जितना वास्तव में जरूरी हो।
वहीं, पश्चिम एशिया में हवाई यात्रा की स्थिति पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय (एमओसीए) भी नजर बनाए हुए है।
12 मार्च 2026 से भारतीय एयरलाइंस की रियाद से आने-जाने वाली उड़ानें फिर से शुरू हो गई हैं। पहले दिन एयर इंड‍िया और इंड‍िगो की तीन उड़ानें मुंबई के लिए और एयर इंड‍िया एक्‍सप्रेस की एक उड़ान कोझिकोड (कालीकट) के लिए संचालित की जा रही हैं। इससे भारत और रियाद (सऊदी अरब) के बीच अहम हवाई संपर्क फिर बहाल हो गया है।
एमओसीए के अनुसार, 28 फरवरी से 11 मार्च के बीच खाड़ी देशों से कुल 1,50,457 यात्री हवाई मार्ग से भारत पहुंचे।
इसके अलावा 12 मार्च 2026 को पश्चिम एशिया के कई शहरों जैसे अबू धाबी, दुबई, फुजैरा, जेद्दा, मस्कट, रस अल खैमाह, रियाद और शारजाह से भारत के लिए आने वाली 57 उड़ानें तय की गई हैं। हालांकि यह संचालन परिस्थितियों और तकनीकी स्थिति पर निर्भर करेगा।
मंत्रालय एयरलाइंस और अन्य संबंधित पक्षों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है, ताकि यात्रियों की आवाजाही सुचारू रूप से हो सके। हवाई किराए पर भी नजर रखी जा रही है, ताकि टिकट की कीमतें उचित बनी रहें और इस दौरान अनावश्यक बढ़ोतरी न हो।
यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे उड़ानों के समय और यात्रा से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए अपनी एयरलाइन से संपर्क में रहें। मंत्रालय स्थिति की लगातार समीक्षा करता रहेगा और जरूरत पड़ने पर आगे की जानकारी जारी करेगा। 

 

महाराष्ट्र में तेंदुओं को अनुसूची 2 की प्रजाति के रूप में पुनः वर्गीकृत किया जाएगा

13-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) महाराष्ट्र में अपने प्राकृतिक आवास के नष्ट होने के कारण तेंदुए के मानव बस्तियों में प्रवेश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए वन मंत्री गणेश नाइक ने विधानसभा में घोषणा की कि महाराष्ट्र कैबिनेट ने तेंदुओं को अनुसूची 1 से अनुसूची 2 में पुनर्वर्गीकृत करने को मंजूरी दे दी है।
कल गुरुवार को उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र वर्तमान में इस बदलाव को औपचारिक रूप देने के लिए केंद्रीय वन्यजीव विभाग से आवश्यक अनुमति मांग रहा है। उन्होंने कहा, “एक बार तेंदुए को अनुसूची 2 में स्थानांतरित कर दिया गया तो यदि कोई तेंदुआ मानव बस्ती में प्रवेश कर जाए और किसी की रक्षा या आत्मरक्षा में मारा जाए तो उस व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।” यह जवाब उन्होंने सदस्य सत्यजीत देशमुख द्वारा प्रस्तुत कॉलिंग अटेंशन मोशन पर दिया।
देशमुख ने अपने क्षेत्र में तेंदुओं की बढ़ती उपस्थिति को रेखांकित किया और उनकी अनुसूची 2 में शामिल करने की मांग की। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि मानव-पशु संघर्ष को कम करने के लिए कौन-कौन से विशेष उपाय किए जा रहे हैं। वन मंत्री गणेश नाइक ने पुनर्वर्गीकरण के फैसले की पुष्टि की और कहा कि उन तेंदुओं को जो मानव बस्तियों में प्रवेश कर मानव जीवन को खतरा पहुंचाते हैं, औपचारिक रूप से ‘मानवहारी’ घोषित करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण उपायों पर भी जानकारी दी। राज्य ने केंद्रीय सरकार को 150 तेंदुओं के नसबंदी प्रस्तावित किए थे। जवाब में केंद्र ने पांच मादा तेंदुओं को प्रयोगात्मक रूप से पकड़कर नसबंदी की अनुमति दी है। साथ ही उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में वन कर्मियों द्वारा नियमित गश्त बढ़ा दी गई है, जहां मानव-तेंदुआ संघर्ष की घटनाएं अधिक होती हैं। जिन क्षेत्रों में तेंदुओं के लगातार बाहर आने की घटनाएं अधिक होती हैं, वहां छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूल कार्यक्रमों को लचीला रखने के निर्देश दिए गए हैं।
पकड़े गए जानवरों के प्रबंधन के लिए सरकार टाइगर, तेंदुआ और अन्य जंगली शिकारी प्रजातियों के मौजूदा रेस्क्यू सेंटर्स की क्षमता बढ़ा रही है। साथ ही, केंद्रीय जू प्राधिकरण की अनुमति मिलने पर पकड़े गए तेंदुओं को अन्य राज्यों के चिड़ियाघर और वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर्स में स्थानांतरित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इस बीच, राज्य मंत्री आशीष जायसवाल ने महाराष्ट्र परिषद में कहा कि राज्य के विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने जोर दिया कि समाज के हर वर्ग को ग्रह की सुरक्षा के लिए अपने जीवनशैली में मूलभूत बदलाव अपनाने होंगे। यह उत्तर उन्होंने सदस्य अमोल मिटकरी द्वारा नियम 92 के तहत उठाई गई आधे घंटे की चर्चा पर दिया।
मंत्री आशीष जायसवाल ने कहा कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सीमेंट-कंक्रीट घर और नई सड़कें विकास प्रक्रिया का एक अविराम हिस्सा हैं, लेकिन इसके साथ ही प्रदूषण के खिलाफ कड़े उपाय भी जरूरी हैं।
उन्होंने कहा, “हम विकास को रोक नहीं सकते, लेकिन हमें जल, वायु और शोर प्रदूषण को कम करने के लिए व्यापक जन जागरूकता अभियान शुरू करना होगा।” उन्होंने सुझाव दिया कि पर्यावरणीय अध्ययन को स्कूल स्तर से अनिवार्य किया जाए, ताकि छात्रों में शुरुआती उम्र से ही पर्यावरण चेतना विकसित हो। मंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में खराब होते कचरा प्रबंधन और प्लास्टिक उपयोग में खतरनाक बढ़ोतरी पर भी चिंता जताई। उन्होंने नागरिकों से रोजमर्रा के घरेलू काम, धार्मिक अनुष्ठान और शादियों में प्लास्टिक छोड़कर पर्यावरण-मित्र विकल्प अपनाने की अपील की।

ईरान-इजरायल तनाव के बीच महाराष्ट्र सरकार अलर्ट, एलपीजी सप्लाई सुचारु रखने के लिए राज्यभर में बने कंट्रोल रूम

13-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच देश के कई हिस्सों में गैस व ईंधन संकट को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने रसोई गैस यानी एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने पूरे महाराष्ट्र में कंट्रोल रूम स्थापित करने और जिला स्तर पर विशेष समितियां गठित करने का फैसला किया है, ताकि घरेलू व व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रहे।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिल डिग्गीकर ने सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि राज्यभर में एलपीजी वितरण की लगातार निगरानी की जाए और आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। सरकार ने साफ कहा है कि राज्य में घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है और नागरिकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता पिछले छह महीनों के मुकाबले अधिक है। मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए सभी एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि गैस की सप्लाई किसी भी स्थिति में बाधित न होने दी जाए।
गैस सप्लाई में संभावित व्यवधान को रोकने और किसी भी आपात स्थिति में बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी। इन समितियों में जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला आपूर्ति अधिकारी और सभी सरकारी गैस कंपनियों के अधिकारी शामिल होंगे।
इन समितियों की मुख्य जिम्मेदारियों में एलपीजी सप्लाई चेन की निगरानी, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और रोजाना स्थिति की रिपोर्ट सरकार को भेजना शामिल होगा। मुंबई-ठाणे राशनिंग क्षेत्र में एक अलग समिति बनाई जाएगी, जो राशनिंग कंट्रोलर के नेतृत्व में काम करेगी। इस समिति में पुलिस के डिप्टी कमिश्नर और डिप्टी कंट्रोलर (राशनिंग) शामिल होंगे। मुंबई और ठाणे के सभी डिप्टी कमिश्नरों के साथ समन्वय का काम जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (प्रशासन) करेंगे।
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि जरूरत पड़ने पर कोयला या केरोसिन जैसे वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग की संभावना पर विचार किया जाए। हालांकि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी नियमों का पूरी तरह पालन हो। जिला स्तर की समितियां होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशनों के साथ बैठकें भी करेंगी, ताकि जहां संभव हो वहां वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा सके।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों, सरकारी छात्रावासों, सरकारी स्कूल और कॉलेजों की मेस, मिड-डे मील योजना और सरकार संचालित आश्रम स्कूलों जैसी जरूरी सेवाएं देने वाले संस्थानों को एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। ऐसे संस्थानों की सूची तैयार की जाएगी और उनके लिए अलग प्राथमिकता आदेश लागू किया जाएगा ताकि इन सेवाओं में किसी तरह की बाधा न आए।
गैस सप्लाई को लेकर किसी भी तरह की अफवाह या घबराहट फैलने से रोकने के लिए सरकार ने सूचना प्रसार की विशेष व्यवस्था भी की है। रेडियो, एफएम चैनल, टेलीविजन और प्रिंट मीडिया के जरिए रोजाना सही जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाएगी।
इस काम की जिम्मेदारी सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशालय और जिला समितियों को दी गई है। साथ ही, सोशल मीडिया पर फैलने वाली फर्जी या भ्रामक खबरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
तेल कंपनियों को गैस बुकिंग ऐप और मिस्ड कॉल सेवाओं में आने वाली तकनीकी समस्याओं को तुरंत दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा राज्य, संभाग, जिला और तालुका स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे। नागरिकों की शिकायतों के समाधान के लिए व्हाट्सऐप सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि लोग आसानी से अपनी समस्या दर्ज करा सकें।
आने वाले त्योहारों को देखते हुए सार्वजनिक संस्थानों को एलपीजी की आपूर्ति को विशेष प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्राम पंचायत सदस्यों से भी सहयोग लिया जाएगा, ताकि गैस सप्लाई को लेकर नागरिकों में किसी तरह की घबराहट न फैले। एलपीजी सिलेंडर लेकर जाने वाले वाहनों और गैस एजेंसियों को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन को सौंपी गई है। जिला प्रशासन, राशनिंग कंट्रोलर और तेल कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे रोजाना गैस स्टॉक की स्थिति और आपूर्ति से संबंधित अपडेट राज्य स्तर के कंट्रोल रूम को भेजें।
महाराष्ट्र में एलपीजी की औसत दैनिक मांग लगभग 9,000 मीट्रिक टन है। इस मांग को पूरा करने के लिए पिछले दो दिनों में रिफाइनरियों में एलपीजी उत्पादन को 9,000 मीट्रिक टन से बढ़ाकर लगभग 11,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन कर दिया गया है। सरकार ने साफ कहा है कि राज्य में घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है और मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त उत्पादन व स्टॉक उपलब्ध है।
व्यावसायिक एलपीजी के मामले में केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्राथमिकता के आधार पर आवंटन किया जा रहा है। अस्पतालों, स्कूलों की मिड-डे मील योजना, आश्रम स्कूलों, सामुदायिक रसोई और सरकारी शैक्षणिक संस्थानों की मेस को प्राथमिकता दी जा रही है।
इसके अलावा घरेलू उपयोग के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) का भी पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। राज्य में पेट्रोल और डीजल की भी पर्याप्त उपलब्धता है। महाराष्ट्र की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और बाजार की मांग को पूरा करने के लिए प्रतिदिन लगभग 15,000 किलोलीटर पेट्रोल और 38,000 किलोलीटर डीजल का उत्पादन कर रही हैं।
वहीं, सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे ईंधन की आपूर्ति को लेकर घबराएं नहीं और किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें क्योंकि राज्य में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी तरह से सुनिश्चित की गई हैं।

प्राकृतिक आपदा प्रभावित 6 राज्यों को 1,912 करोड़ की अतिरिक्त केंद्रीय सहायता

13-Mar-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति (एचएलसी) ने वर्ष 2025 के दौरान आई बाढ़, फ्लैश फ्लड, बादल फटने, भूस्खलन और चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ से प्रभावित छह राज्यों के लिए 1,912.99 करोड़ रुपये की अतिरिक्त केंद्रीय सहायता को मंजूरी दी है। यह सहायता राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) से दी जाएगी।
गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि इस राशि में आंध्र प्रदेश को 341.48 करोड़ रुपये, छत्तीसगढ़ को 15.70 करोड़, गुजरात को 778.67 करोड़, हिमाचल प्रदेश को 288.39 करोड़, नगालैंड को 158.41 करोड़ और केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को 330.34 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। यह सहायता राज्यों के राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) में उपलब्ध वर्ष के शुरुआती बैलेंस के 50 प्रतिशत के समायोजन के अधीन होगी।
सरकार प्राकृतिक आपदाओं के समय राज्यों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और हर संभव मदद प्रदान कर रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार ने एसडीआरएफ के तहत 28 राज्यों को 20,735.20 करोड़ रुपये और एनडीआरएफ के तहत 21 राज्यों को 3,628.18 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके अलावा राज्य आपदा न्यूनीकरण कोष (एसडीएमएफ) से 23 राज्यों को 5,373.20 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय आपदा शमन कोष (एनडीएमएफ) से 21 राज्यों को 1,189.56 करोड़ रुपये भी जारी किए गए हैं। 



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