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एविएशन चेतावनी: एयरबस A320 बेड़े में संभावित जोखिम, भारत के 250 विमान दायरे में

29-Nov-2025
नई दिल्ली ( शोर संदेश )। एयरबस की ओर से ए320 एयरक्राफ्ट को लेकर सॉफ्टवेयर अपडेट की घोषणा पर एविएशन एक्सपर्ट्स ने शनिवार को कहा कि इस एयर क्राइसिस का प्रभाव पर्यटन और व्यापार पर भी पड़ सकता है।
एविएशन एक्सपर्ट सुभाष गोयल ने बताया कि “पूरी दुनिया में 6000 से अधिक एयरबस ए 320 एयरक्राफ्ट हैं, जो प्रभावित हो रहे हैं। भारत में केवल 250 के करीब एयरबस ए 320 एयरक्राफ्ट प्रभावित होंगे। नए मॉडल में सॉफ्टवेयर अपडेट को लेकर केवल 2 से 3 घंटों तक का ही समय लगेगा। लेकिन एयरबस ए 320 एयरक्राफ्ट के पुराने मॉडल में सॉफ्टवेयर अपडेट को लेकर 1 से 2 दिन का समय लगेगा। इस एयर क्राइसिस का प्रभाव पर्यटन के अलावा बिजनेस ट्रेड पर भी पड़ेगा।”
उन्होंने बताया कि यह परेशानी कुछ इस तरह डिटेक्ट की गई कि एक एयरबस ए 320 एयरक्राफ्ट अचानक से मिड एयर में डाउन हो गया और कंप्यूटर स्विच ऑफ नहीं हुआ। क्योंकि एक्स्ट्रा रेडिएशन की वजह से कंप्यूटर में हीटिंग की परेशानी आ जाती है। ये हाईली टेक्निकल एयरक्राफ्ट हैं, जिनका सॉफ्टवेयर अपडेट होना बेहद जरूरी है।
एयरबस ए 320 एयरक्राफ्ट में सोलर रेडिएशन के खतरे को लेकर एविएशन एक्सपर्ट सनत कौल ने एयरबस की ओर से सॉफ्टवेयर अपडेट को लेकर सभी एयरलाइंस को निर्देश दे दिए गए हैं। जिस पर इंडिगो और एयर इंडिया की ओर से जवाब भी दे दिया गया है कि वे इस पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा, भारत में कई दूसरी एयरलाइन कंपनियां हैं, जिनके पास ए320 एयरक्राफ्ट हैं, उन्हें भी इस निर्देश का पालन करना पड़ेगा।
कौल ने बताया कि “सोलर प्लाज्मा से एयरक्राफ्ट में स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम आ सकती है इसलिए एयरक्राफ्ट को सॉफ्टवेयर तुरंत अपडेट करवाना बेहद जरूरी हो जाता है।” इस बीच, विमानन नियामक डीजीसीए की ओर से भी एयरबस ए 318, ए 319,ए320 और ए 321 एयरक्राफ्ट के लिए जरूरी सेफ्टी गाइडलाइन जारी कर दी गई है। डीजीसीए की सेफ्टी गाइडलाइन में कहा गया है कि कोई भी एयरक्राफ्ट जरूरी सेफ्टी स्टैंडर्ड को पूरा किए बिना सर्विस में नहीं रहेगा।
नई दिल्ली (शोर संदेश)। 

भूटान में 17 दिनों की प्रदर्शनी के बाद पवित्र अवशेष भारत लौटे; भूटान नरेश ने की औपचारिक विदाई

26-Nov-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष भूटान में 17 दिवसीय प्रदर्शनी के बाद भारत वापस आ गए हैं। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामले एवं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पवित्र अवशेषों की वापसी यात्रा में उनके साथ थे। उन्होंने भूटान के नेतृत्व एवं जनता के प्रति उनकी असाधारण गर्मजोशी, भक्ति और औपचारिक सम्मान के लिए गहरा आभार व्यक्त किया।
मंगलवार को पालम हवाई अड्डे पर पहुंचने पर पवित्र अवशेषों को आईबीसी के महानिदेशक अभिजीत हलदर, भिक्षुओं, संस्कृति मंत्रालय और राष्ट्रीय संग्रहालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्राप्त किया। संस्‍कृति मंत्रालय ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है।
केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा कि “भूटान में पवित्र बुद्ध अवशेषों की पवित्र प्रदर्शनी के बाद उन्हें भारत वापस लाकर मैं स्वयं गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। पवित्र अवशेषों के प्रति भूटान की गहरी श्रद्धा दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे सामंजस्य को अभिव्यक्त करती है। औपचारिक विदाई के दौरान भूटान नरेश की व्यक्तिगत देखभाल और अनुग्रहपूर्ण उपस्थिति से मैं अत्यंत अभिभूत हूं।”
रिजिजू ने पवित्र अवशेषों के लिए की गई सावधानीपूर्वक व्यवस्था और 11 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यादगार भूटान यात्रा के लिए भूटान के प्रधानमंत्री, भूटान के मंत्रिमंडल के सदस्यों, केंद्रीय मठ निकाय के लेत्सोग लोपेन, भिक्षुओं और भूटान की शाही सरकार को हार्दिक धन्यवाद दिया।
आपको बता दें, वैश्विक शांति प्रार्थना महोत्सव के अंतर्गत, पवित्र बुद्ध पिपरहवा अवशेषों को 8 से 25 नवंबर 2025 तक थिम्पू के त्राशिछोद्ज़ोंग के ग्रैंड कुएनरे हॉल में प्रतिष्ठित किया गया था, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने प्रार्थना की और आशीर्वाद प्राप्त किया।
मंगलवार सुबह, भूटान के नरेश ने ग्रैंड कुएनरे में विशेष प्रार्थना में भाग लिया, जिसके बाद अवशेषों को राजकीय जुलूस के रूप में पारो अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ले जाया गया, जहां से उन्हें सम्मानपूर्वक भारत वापस लाया गया। इस समारोह में भूटान के प्रधानमंत्री लेत्सोग लोपेन, गृह मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और भारत तथा भूटान के प्रतिष्ठित भिक्षुओं ने भाग लिया। भूटान नरेश ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से भी मुलाकात की, जो अवशेषों को स्वदेश लाने के लिए विशेष रूप से भूटान आए थे।
दरअसल, बौद्ध जगत की सर्वाधिक पूजनीय वस्तुओं में से एक, पवित्र बुद्ध अवशेष, भारत की ओर से मित्रता के एक विशेष प्रतीक के रूप में भूटान लाए गए थे। इनकी प्रदर्शनी ने पूरे भूटान में अपार श्रद्धा का संचार किया और उस सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक सेतु की पुष्टि की जो दोनों देशों को एक सूत्र में पिरोए हुए है।
 

नई चेतना 4.0 अभियान : महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए 11 मंत्रालयों ने शुरू की संयुक्त पहल

26-Nov-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने आज बुधवार को नई दिल्ली स्थित प्रवासी भारतीय केंद्र में ‘नई चेतना इनिशिएटिव फॉर चेंज’ के चौथे संस्करण ‘नई चेतना 4.0’ का शुभारंभ किया। यह राष्ट्रीय अभियान पूरे देश में लैंगिक समानता, महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान, डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी और ग्रामीण विकास सचिव शैलेश कुमार सिंह मौजूद रहे।
कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिए लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह अभियान अब एक जन आंदोलन बन चुका है और ग्रामीण भारत में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की आवाज समाज और सरकार के हर स्तर पर सुनी जानी चाहिए और इसे सुनिश्चित करना हमारा कर्तव्य है।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज में बेटियों को लेकर मौजूद भेदभावपूर्ण सोच को बदलना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि सरकार लगातार “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” जैसे प्रयासों को आगे बढ़ा रही है। चौहान ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि देश में 2 करोड़ से अधिक महिलाएं अब ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं और यह सफलता स्वयं सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्य का परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कोई भी बहन गरीब नहीं रहेगी और सरकार का प्रयास है कि किसी भी महिला की आंखों में आंसू न हों। उन्होंने कहा “हर महिला मुस्कुराए, हर महिला सक्षम बने यही हमारा लक्ष्य है”।
शिवराज सिंह चौहान ने आगे कहा कि बेटियों को नकारात्मक दृष्टि से देखने वाली मानसिकता को खत्म करना होगा और यदि आवश्यक हो तो ऐसे तत्वों का सामना भी करना चाहिए। उन्होंने घोषणा की कि देशभर में “हिंसा-रहित गांव” बनाने के लिए एक बड़े जन अभियान की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि महिलाओं के खिलाफ किसी भी परिस्थिति में हिंसा स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि नशा अधिकांश बुराइयों का कारण है और गांव-गांव में महिलाएं नशा-उन्मूलन के लिए जागरूकता फैलाएं।
यह अभियान लैंगिक आधारित हिंसा के खिलाफ जागरूकता पैदा करने, महिलाओं की सुरक्षित गतिशीलता सुनिश्चित करने, घरेलू कार्यों में साझा जिम्मेदारी को बढ़ावा देने और महिलाओं के आर्थिक योगदान को पहचान देने पर केंद्रित है। यह राष्ट्रीय अभियान ग्रामीण विकास मंत्रालय की DAY-NRLM (दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के तहत 23 दिसंबर 2025 तक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाया जाएगा। देशभर में फैले स्वयं सहायता समूहों का विशाल नेटवर्क इस अभियान का नेतृत्व कर रहा है।
कार्यक्रम में 11 मंत्रालयों/विभागों द्वारा एक संयुक्त सलाह जारी की गई, जिसमें : महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, गृह मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, युवा मामले एवं खेल मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा न्याय विभाग शामिल है। यह पहल ‘सम्पूर्ण सरकार दृष्टिकोण’ का उदाहरण है, जिसके माध्यम से सभी मंत्रालय मिलकर लैंगिक भेदभाव और हिंसा के उन्मूलन की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
 

संविधान दिवस पर पीएम मोदी ने संविधान निर्माताओं को नमन कर नागरिक कर्तव्यों के पालन की अपील की

26-Nov-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। संविधान दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संविधान निर्माताओं को नमन करते हुए कहा कि उनका दृष्टिकोण और दूरदर्शिता विकसित भारत के संकल्प को मजबूत आधार प्रदान करती है। भारतीय संविधान मानव सम्मान, समानता और स्वतंत्रता को सर्वोच्च स्थान देता है। नागरिकों को अधिकारों के साथ-साथ उनके कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा भी देता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर दो अलग-अलग पोस्ट में कहा कि संविधान राष्ट्र को मार्गदर्शन देता है और नागरिक कर्तव्य मजबूत लोकतंत्र की नींव हैं। उन्होंने संविधान दिवस पर सभी नागरिकों से अपने कर्तव्यों का स्मरण करते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि संविधानिक मूल्यों को आचरण में लाने का संकल्प दोहराना समय की आवश्यकता है।
एक अन्य पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने संविधान दिवस पर देशवासियों को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने संविधान की महानता मूल कर्तव्यों की भूमिका प्रथम बार मतदाता बनने की खुशी और नागरिक दायित्वों के महत्व जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए हैं। ये मूल्य नागरिक जीवन को सशक्त बनाते हैं और विकसित भारत के अभियान को गति देते हैं।

केंद्र सरकार ने आयुर्वेद क्षेत्र में शोध आधारित इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए SIDDHI 2.0 लॉन्च किया

26-Nov-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS), आयुष मंत्रालय ने विजयवाड़ा में SIDDHI 2.0 (Scientific Innovation in Drug Development, Healthcare & Integration) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य आयुर्वेदिक औषधि क्षेत्र में शोध-आधारित इनोवेशन को तेज करना है। यह दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (RARI), विजयवाड़ा और भारतीय उद्योग परिसंघ (CII), विजयवाड़ा जोन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। उद्घाटन सत्र में प्रो. वेद्य रबिनारायण आचार्य, महानिदेशक, CCRAS; के. दिनेश कुमार,आईएएस, निदेशक (आयुष), आंध्र प्रदेश सरकार; डॉ. एन. श्रीकांत, उप महानिदेशक, CCRAS; किरण भूपतिराजू उपस्थित रहे। इसी दौरान CCRAS ने अपनी मेडिको-हिस्टोरिकल पुस्तक “Evolution of Ayurveda, Siddha & Unani Drug Regulations in India” तथा नए ड्रग इन्वेंटरी मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल का भी लोकार्पण किया।
PRAGATI-2024 को आगे बढ़ाते हुए SIDDHI 2.0 का उद्देश्य शोध-आधारित उत्पाद विकास, स्वदेशी तकनीकी उन्नति, ट्रांसलेशनल रिसर्च और उद्योग साझेदारी को तेज करना है। कार्यक्रम में बोलते हुए महानिदेशक प्रो. रबिनारायण आचार्य ने कहा कि बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियों के बीच आयुर्वेद की वेलनेस-केंद्रित सोच अत्यंत महत्वपूर्ण होती जा रही है। उन्होंने CII द्वारा CCRAS और फार्मा उद्योग को जोड़ने में निभाई जा रही भूमिका की सराहना की। उन्होंने SPARK, SMART, PDF फेलोशिप और शोध-प्रणाली कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए उद्योग के साथ मिलकर उत्पन्न होने वाले IPR को समान रूप से साझा करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
आंध्र प्रदेश सरकार के आयुष निदेशक के. दिनेश कुमार ने कहा कि राज्य में आयुर्वेद कॉलेजों और फार्मा इकाइयों की संख्या कम है और एक राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की स्थापना लाभकारी होगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान ने जीवनकाल बढ़ाया है, लेकिन आयुर्वेद स्वस्थ जीवनकाल प्रदान करता है। CCRAS के उप महानिदेशक डॉ. एन. श्रीकांत ने बताया कि परिषद ने 150 से अधिक आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन जिनमें हर्बो-मिनरल प्रिपरेशन भी शामिल हैं, इनका परीक्षण और सत्यापन किया जा चुका है। उन्होंने उद्योग को CCRAS के गुणवत्ता, सुरक्षा और विषाक्तता संबंधी विशाल डेटा का उपयोग करने और IPR साझा करने वाली उद्योग-अनुकूल नीति का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
उद्योग की ओर से अपना विचार प्रस्तुत करते हुए CEO किरण भूपतिराजू ने कहा कि आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और फॉर्मूलेशन का आधुनिकीकरण उनके वैश्विक बाजार विस्तार के लिए आवश्यक है। CII विजयवाड़ा जोन की चेयरपर्सन डॉ. नागलक्ष्मी ने कहा कि आयुर्वेद की पूरी क्षमता का दोहन अभी बाकी है और शोध, शिक्षा, निर्माण तथा उद्योग के बीच तालमेल बढ़ने से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सम्मेलन के पहले दिन CCRAS वैज्ञानिकों और हिमालया वेलनेस कंपनी जैसी प्रमुख संस्थाओं के विशेषज्ञों ने तकनीकी सत्रों में अपनी शोध-सुविधाएं, विकसित प्रोडक्ट्स, तकनीकें और विकासाधीन फॉर्मूलेशन प्रस्तुत किए। उद्योग के साथ संभावित सहयोग क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई।
SIDDHI 2.0 में दक्षिण भारत की 25 से अधिक प्रमुख आयुर्वेदिक फार्मा कंपनियों-जैसे हिमालया वेलनेस कंपनी, औषधि, IMPCOPS, Laila Nutra Pvt. Ltd., और Imis Pharmaceuticals के प्रतिनिधियों सहित 100 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, राज्य आयुष अधिकारियों और डॉ. NRS आयुर्वेदिक कॉलेज, विजयवाड़ा के स्नातकोत्तर छात्रों ने सक्रिय भागीदारी की। राष्ट्रीय ट्रांसलेशनल एक्सेलरेटर के रूप में स्थापित SIDDHI 2.0 का उद्देश्य उद्योग द्वारा CCRAS तकनीकों को व्यापक रूप से अपनाना, संस्थागत सहयोग को मजबूत करना, गुणवत्ता और नियामक ढांचों को उन्नत बनाना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी आयुर्वेदिक औषधि उद्योग विकसित करना है।

पीएलआई स्कीम ग्लोबल मैन्युफैक्चरर को ‘मेक इन इंडिया’ की ओर कर रही आकर्षित : पीएम मोदी

26-Nov-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। पीएम मोदी ने बुधवार को कहा कि भारत ने दुनिया को संदेश दिया है कि देश निवेश और इनोवेशन का स्वागत करता है। उन्होंने कहा कि पीएलआई स्कीम ने ग्लोबल मैन्युफैक्चरर को ‘मेक इन इंडिया’ की ओर आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बीते 11 वर्षों में 40 हजार से अधिक अनुपालनों को कम किया गया है। नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम ने अनेकों अप्रोच को एक ही प्लेटफॉर्म पर ला दिया है।
पीएम ने कहा- ‘आज का भारत केवल बड़े सपने नहीं देख रहा, बड़े फैसले भी ले रहा है’ 
पीएम मोदी ने हैदाराबाद में सफ्रान एयरक्राफ्ट इंजन सर्विसेज इंडिया (एसएईएसआई) फैसिलिटी के उद्घाटन पर अपने वर्चुअल संदेश में कहा, “आज का भारत केवल बड़े सपने नहीं देख रहा, बड़े फैसले ले रहा है और उनसे भी बढ़कर बड़ी उपलब्धियां हासिल कर रहा है। भारत का फोकस ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर है।”उन्होंने कहा कि आज से भारत का एविएशन सेक्टर एक नई उड़ान भरने जा रहा है। सफ्रान की नई फैसिलिटी भारत को एक ग्लोबल एमआरओ हब के रूप में स्थापित करेगी। हाई टेक और एयरो स्पेस की दुनिया में युवाओं के लिए नए अवसरों को पेश करेगी।उन्होंने कहा कि वैश्विक निवेश और उद्योगों को आकर्षित करने के लिए स्वतंत्र भारत में कुछ बड़े सुधार किए गए हैं। अर्थव्यवस्था के दरवाजे खोले गए हैं, फंडामेंटल को मजबूत किया गया है और बिजनेस को आसान बनाया गया है।
पीएम मोदी के अनुसार, “डिफेंस जैसे सेक्टर जहां पहले प्राइवेट सेक्टर की जगह नहीं थी वहां भी अब 74 प्रतिशत तक एफडीआई ऑटोमेटिक रूट से संभव हो गया है। स्पेस सेक्टर में बड़ी अप्रोच अपनाई गई है।”
भारत के एविएशन सेक्टर में तेजी से विस्तार के चलते सुविधाओं की जरूरतें बढ़ रही
उन्होंने कहा, “भारत के एविएशन सेक्टर में तेजी से विस्तार के चलते मेनटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) की सुविधाओं की जरूरतें बढ़ रही हैं। भारत की एयरलाइन कंपनियों ने 1500 से ज्यादा एयरक्राफ्ट का ऑर्डर दिया है।”
उन्होंने बताया कि भारत का 85 प्रतिशत एमआरओ का काम देश की सीमाओं के बाहर हो रहा था। जिससे खर्च बढ़ता था, समय भी अधिक लगता था और एयरक्राफ्ट लंबे समय तक ग्राउंडेड रहते थे। यह स्थिति भारत जैसे विशाल एविएशन मार्केट के लिए सही नहीं थी। इसलिए भारत सरकार दुनिया के एक बड़े एमआरओ केंद्र को तैयार कर रही है।
उन्होंने कहा, “सफ्रान की ग्लोबल ट्रेनिंग और नॉलेज ट्रांसफर और भारत के संस्थानों के साथ साझेदारी से देश में एक ऐसा वर्कफोर्स तैयार होगा, जो आने वाले समय में पूरे एमआरओ इकोसिस्टम को नई गति और दिशा देगी। इस फैसिलिटी से दक्षिण भारत के नौजवानों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।”
देश शिपिंग से जुड़े एमआरओ, इकोसिस्टम पर भी एक बड़े पैमाने पर कर रहा काम 
पीएम मोदी ने बताया कि देश शिपिंग से जुड़े एमआरओ, इकोसिस्टम पर भी एक बड़े पैमाने पर काम कर रहा है।
भारत में एयरक्राफ्ट इंजन और कंपोनेंट डिजाइन की संभावनों की करें तलाश 
उन्होंने सफ्रान की टीम से आग्रह किया कि वे भारत में एयरक्राफ्ट इंजन और कंपोनेंट डिजाइन की संभावनों की भी तलाश करें। जिसमें एमएसएमई का बहुत बड़ा नेटवर्क और युवा टैलेंट पूल उनकी मदद करेगा।उन्होंने सफ्रान की टीम से कहा, “मैं चाहूंगा कि आप प्रपोल्शन डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग के लिए भी भारत के टैलेंट का इस्तेमाल करें।”
 

संविधान दिवस समारोह: राष्ट्रपति ने अनुच्छेद 370 हटाने और नारी शक्ति वंदन अधिनियम की सराहना की

26-Nov-2025

 नई दिल्ली (शोर संदेश)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को संविधान दिवस समारोह में कहा कि तीन तलाक की कुप्रथा पर लगाम लगाने, जीएसटी लागू करने, अनुच्छेद 370 हटाने और नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे कदमों ने देश में सामाजिक न्याय, आर्थिक एकीकरण और महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को नई दिशा दी है। 

राष्ट्रपति ने संविधान का डिजिटल संस्करण नौ भाषाओं में किया जारी 
संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में बुधवार को आयोजित संविधान दिवस कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने संविधान का डिजिटल संस्करण नौ भाषाओं में जारी किया। इस दौरान उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, राज्यसभा उपसभापति हरिवंश, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, राज्यसभा में सदन के नेता जे.पी. नड्डा, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य सांसद उपस्थित थे। सभी ने मिलकर संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान उपनिवेशवादी मानसिकता छोड़कर राष्ट्रीय सोच अपनाने का मार्गदर्शक दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने नागरिकों के व्यक्तिगत और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा को सर्वोपरि माना। इसी के चलते आज महिलाएं, युवा, एससी, एसटी, किसान, मध्य वर्ग और नव-मध्य वर्ग लोकतंत्र को मजबूत बना रहे हैं। उन्होंने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर लाने को देश की बड़ी उपलब्धि बताया।
उल्लेखनीय है कि संविधान दिवस हर वर्ष 26 नवंबर को मनाया जाता है। इसी दिन 1949 में संविधान सभा ने इसी केंद्रीय कक्ष में भारत के संविधान को अंगीकृत किया था। 

भारतीय संविधान लोगों की उम्मीदों को जाहिर करने के लिए एक बहुत असरदार फ्रेमवर्क: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

26-Nov-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि संविधान को अपनाने के समय जो तर्क दिए गए थे, वे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। संविधान बनाने वालों का मकसद था कि इसके जरिए हमारी सामूहिक और व्यक्तिगत गरिमा और आत्म-सम्मान मजबूत बने। उन्होंने कहा कि हमें गर्व है कि हमारे सांसद और संसद ने पिछले दशकों में जनता की आवाज को प्रभावी तरीके से संसद में पहुंचाया।
राष्ट्रपति मुर्मु ने यह बात आज बुधवार को संसद के संविधान सदन में आयोजित 75वें संविधान दिवस कार्यक्रम के मौके पर कही। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में हमारा संविधान लोगों की उम्मीदों को जाहिर करने के लिए एक बहुत असरदार फ्रेमवर्क देता है। उन्होंने सभी को संविधान दिवस की बधाई दी। उन्होंने संविधान निर्माताओं की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए सांसदों की मेहनत की सराहना की।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि संविधान के आदर्श सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व के मूल्यों पर आधारित हैं। हमारे संसद सदस्यों ने इन आदर्शों को व्यवहार में उतारने का काम किया है। उन्होंने आगे कहा कि आज भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है और इसका श्रेय हमारी संस्कृति, संविधान और लोकतंत्र की मजबूत नींव को जाता है।
उन्होंने सभी सांसदों और नेताओं की भूमिका की सराहना की, जिन्होंने संविधान के आदर्शों को बनाए रखने में योगदान दिया।
वहीं, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि 26 नवंबर 1949 को आजाद भारत की संविधान सभा ने हमारे पवित्र संविधान को अपनाया था। उन्होंने सभी भारतवासियों को संविधान दिवस की शुभकामनाएं दी और बताया कि 2015 से इसे हर साल मनाया जाता है।
सी.पी. राधाकृष्णन ने डॉ. भीमराव अंबेडकर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, के.एम. मुंशी और संविधान सभा के अन्य सदस्यों को याद किया और कहा कि संविधान हर पेज पर हमारे देश की आत्मा को दर्शाता है। संविधान का ड्राफ्ट भारत माता के बेहतरीन नेताओं ने संविधान सभा में तैयार किया। यह लाखों देशवासियों की समझ, त्याग और सपनों का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि महान विद्वानों और संविधान सभा के सदस्यों ने करोड़ों भारतीयों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सोच-समझकर काम किया। उनके निस्वार्थ योगदान ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनाया। उन्होंने संविधान को समझ, अनुभव, त्याग और उम्मीदों से भरा बताया और कहा कि इसकी आत्मा ने यह साबित किया कि भारत एक है और हमेशा एक रहेगा।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी संविधान सभा के सदस्यों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि उनकी दूरदर्शिता, मेहनत और समझदारी का परिणाम इतना शानदार संविधान है, जो हर नागरिक को न्याय, बराबरी और सम्मान देता है। उन्होंने बताया कि संविधान सभा का यह केंद्रीय कक्ष वह पवित्र जगह है, जहां गहरी चर्चा और सोच-विचार के बाद संविधान को आकार दिया गया।
ओम बिरला ने कहा कि संविधान के मार्गदर्शन में पिछले सात दशकों में भारत ने सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और अच्छे शासन के लिए नीतियां बनाई हैं। संविधान दिवस हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है ताकि संविधान में निहित आजादी, बराबरी, भाईचारा और न्याय के सिद्धांतों का सम्मान किया जा सके।
इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, राज्यसभा एलओपी मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा एलओपी राहुल गांधी और कई अन्य नेता भी मौजूद थे।

भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान हाई-टेक वार सिमुलेशन में कर रहे हैं शानदार प्रदर्शन

26-Nov-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। फ्रांस व भारतीय वायु सेना द्विपक्षीय वायु अभ्यास ‘गरुड़ 25’ में भाग ले रही है। भारतीय वायुसेना और फ्रांस की एयर एंड स्पेस फोर्स के बीच यह संयुक्त युद्धाभ्यास अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। युद्धाभ्यास के दौरान भारतीय वायुसेना के सुखोई (एसयू-30 एमकेआई) लड़ाकू विमानों ने फ्रांस के बहुउद्देशीय लड़ाकू विमानों के साथ जटिल कृत्रिम हवाई युद्ध परिदृश्यों में उड़ान भरी। इस दौरान हवाई हमलों का जबरदस्त अभ्यास किया गया। हवा से हवा में युद्ध, वायु रक्षा और संयुक्त हमला अभियानों पर केंद्रित, प्रचालन को अंजाम दिया गया है।
भारत-फ्रांस वायुसेना अभियान में दोनों दल उच्च दक्षता से विभिन्न मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दे रहे हैं
वायुसेना का यह अभियान फ्रांस में चल रहा है। यहां फ्रांस में दोनों देशों के पायलट व तकनीकी दल अत्यंत उच्च स्तर की संचालन क्षमता बनाए हुए हैं। इस दौरान दोनों वायु सेनाओं के दल विभिन्न प्रकार के मिशन प्रोफाइल को सफलतापूर्वक अंजाम दे रहे हैं। इन मिशनों में एयर-टू-एयर कॉम्बैट, एयर डिफेंस, लंबी दूरी की स्ट्राइक मिशन, एयर-टू-ग्राउंड समन्वय और रणनीतिक एयर ऑपरेशंस शामिल हैं।
भारतीय और फ्रेंच वायुसेना ने अभ्यास में पूर्ण तालमेल, उच्च पेशेवर दक्षता और सटीक मिशन कौशल दिखाया
अभ्यास के दौरान भारतीय वायुसेना और फ्रेंच एयर एंड स्पेस फोर्स की टीमों ने पूर्ण तालमेल के साथ कार्य करते हुए असाधारण पेशेवर दक्षता और सटीकता का परिचय दिया। जटिल परिस्थितियों में भी दोनों देशों के पायलटों ने बेहतरीन निर्णय क्षमता और मिशन एक्सेक्यूशन कौशल प्रदर्शित किया। यह अभ्यास इंटरऑपरेबिलिटी अर्थात संयुक्त रूप से ऑपरेशन संचालित करने की क्षमता को और मजबूत बनाता है।
संयुक्त अभ्यास का उद्देश्य भारत-फ्रांस वायुसेनाओं में रणनीतिक समझ, आधुनिक तकनीक आदान-प्रदान और क्षमता वृद्धि करना है
भारतीय वायुसेना के अनुसार इस संयुक्त सैन्य अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच रणनीतिक समझ, आधुनिक युद्धक तकनीकों के आदान-प्रदान और संयुक्त ऑपरेशनल क्षमताओं को बढ़ाना है। अभ्यास के दौरान दोनों पक्षों ने उन्नत प्लेटफॉर्म, हथियार प्रणालियों और संचार नेटवर्क के उपयोग पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया, जिससे रियल-टाइम को-आर्डिनेशन और मिशन-प्लानिंग बेहद प्रभावी रही।
सहयोग सामरिक और रक्षा साझेदारी मजबूत करता है; फ्रांस ने भारतीय वायुसेना की दक्षता और तैयारी की प्रशंसा की
फ्रेंच दल के साथ यह सहयोग न केवल सामरिक स्तर पर महत्वपूर्ण है बल्कि दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को और मजबूती प्रदान करता है। वहीं फ्रांस की एयर एंड स्पेस फोर्स ने भी भारतीय वायुसेना की तैयारी, पेशेवर रवैये और आधुनिक क्षमताओं की प्रशंसा की है। यह द्विपक्षीय अभ्यास भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग की मजबूती, पारस्परिक विश्वास और व्यापक रणनीतिक साझेदारी का प्रमाण है।
गौरतलब है कि फ्रांस के मोंट-डे-मार्सन में भारतीय वायुसेना 16 नवंबर से यह अभ्यास कर रही है
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती यह समझ दोनों देशों की वायु सेनाओं को भविष्य के संयुक्त मिशनों और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में और सक्षम बनाएगी। गौरतलब है कि फ्रांस के मोंट-डे-मार्सन में भारतीय वायुसेना 16 नवंबर से यह अभ्यास कर रही है। यह अभ्यास 27 नवंबर तक जारी रहेगा। भारतीय वायुसेना की टुकड़ी यहां 10 नवंबर को फ्रांस पहुंची थी। अभ्यास के इंडक्शन और डी- इंडक्शन चरणों के लिए सी-17 ग्लोबमास्टर द्वारा एयरलिफ्ट सहायता प्रदान की गई।
गरुड़ 25 में दोनों वायु सेनाओं ने पेशेवर संवाद, ज्ञान और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां साझा कीं
अभ्यास में शामिल लड़ाकू विमानों के रेंज और स्थायित्व को बढ़ाने के लिए आईएल-78 हवा से हवा में ईंधन भरने वाले टैंकरों का उपयोग भी किया गया है। इस अभ्यास का उद्देश्य एक वास्तविक प्रचालन वातावरण में रणनीति और प्रक्रियाओं को परिष्कृत करना था। गरुड़ 25 अभ्यास के दौरान दोनों वायु सेनाओं के बीच प्रोफेशनल बातचीत, ज्ञान के आदान-प्रदान और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा किया गया है।

भारत में लग्जरी घरों की कीमतें 40 प्रतिशत बढ़ीं, अफोर्डेबल होम 26 प्रतिशत महंगे हुए

26-Nov-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)।  भारत के शीर्ष सात शहरों में लग्जरी घरों की कीमतों ने पिछले तीन वर्षों में अन्य सेगमेंट से बेहतर प्रदर्शन किया है और औसत लग्जरी घर की कीमत अब बढ़कर 1.5 करोड़ हो गई है। वहीं, 2025 में प्रति स्क्वायर फीट दाम बढ़कर 14,530 रुपए हो गया है, जो कि 2022 में 20,300 प्रति स्क्वायर फीट था। यह जानकारी बुधवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
रियल एस्टेट सर्विसेज फर्म एनारॉक की रिपोर्ट में कहा गया कि देश के शीर्ष सात शहरों के लग्जरी आवासीय बाजार में न केवल आपूर्ति देखने को मिल रही है, जबकि बिक्री के साथ-साथ कीमतों में भी बढ़त हो रही है। लग्जरी सेगमेंट में दिल्ली-एनसीआर पहले पायदान पर है, जहां कीमतें 72 प्रतिशत बढ़कर 23,100 प्रति स्क्वायर फीट हो गई हैं। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) और बेंगलुरु में कीमतों में क्रमश: 43 प्रतिशत और 42 प्रतिशत का उछाल देखने को मिला है।
दूसरी तरफ अफोर्डेबल घरों (40 लाख रुपए से कम) की कीमत में केवल 26 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है। इस दौरान एनसीआर में अफोर्डेबल घरों की कीमत में 48 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है। मिड और प्रीमियम घरों (40 लाख रुपए से 1.5 करोड़ रुपए)तक के घरों की कीमत में 39 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है। बेंगलुरु में घरों की कीमतों में सबसे अधिक 62 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है।
एनारॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, “बेहतर स्थानों पर ब्रांडेड डेवलपर्स द्वारा बड़े घरों की निरंतर मांग के कारण लग्जरी घरों की मांग अन्य क्षेत्रों की तुलना में तेजी से बढ़ रही है।” उन्होंने आगे कहा, “हमारे आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी से सितंबर की अवधि में इन शहरों में लगभग 2.87 लाख यूनिट्स की कुल बिक्री में से लगभग 30 प्रतिशत लग्जरी सेगमेंट में थीं। पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी हुई लागत और मजबूत मांग के कारण देश भर में घरों की कीमतें बढ़ी हैं।”
शहरवार विश्लेषण से पता लगता है कि एमएमआर में औसत कीमत सबसे अधिक 40,200 प्रति स्क्वायर फीट है, जबकि किफायती घरों का दाम 6,450 प्रति स्क्वायर फीट है।
 


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