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कोरोना अपडेट : पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 73,272 नए मामले, 926 मरीजों की मौत*

10-Oct-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) भारत में एक दिन में कोविड-19 के 73,272 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 69 लाख से अधिक हो गई है। वहीं वायरस के कारण पिछले 24 घंटे के दौरान 926 मरीजों की मौत हो गई है। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा दी गई।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार देश में कोविड-19 के कुल मामलों की संख्या 69,79,424 हो गई है। वहीं, पिछले 24 घंटे में 926 और लोगों की मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 1,07,416 हो गई। फिलहाल देश में 8,83,185 लोगों का कोरोना वायरस का इलाज जारी है।

भारत में कोविड-19 के मामले सात अगस्त को 20 लाख, 23 अगस्त को 30 लाख, पांच सितंबर को 40 लाख, 16 सितंबर को 50 लाख और 28 सितंबर को 60 लाख के पार चले गए थे। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसार देश में नौ अक्तूबर तक कोविड-19 के 8,57,98,698 नमूनों की जांच की गई, जिनमें से 11,64,018 नमूनों की जांच शुक्रवार को की गई। 


राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर कसा तंज, `जवानों के लिए नॉन बुलेटप्रूफ ट्रक और पीएम के लिए 8400 करोड़ का हवाई जहाज*

10-Oct-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को फिर एक वीडियो शेयर कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। इस वीडियो में कथित तौर पर एक ट्रक के भीतर बैठे कुछ जवान आपस में बात कर रहे हैं। उनसे में एक कहता है कि `नॉन बुलेटप्रूफ गाड़ी में भेजकर हमारी जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर इस वीडियो के साथ लिखा है, हमारे जवानों को नॉन-बुलेट प्रूफ ट्रकों में शहीद होने भेजा जा रहा है और पीएम के लिए 8400 करोड़ के हवाई जहाज! क्या यह न्याय है?`
राहुल की तरफ से लगातार चीन के साथ सीमा विवाद का मुद्दा उठाया जा रहा है। प्रधानमंत्री के लिए नया विमान आने से उन्हें एक और मुद्दा मिल गया है। दो दिन पहले, राहुल ने एक ट्वीट में कहा था, ``पीएम ने अपने लिए 8400 करोड़ का हवाई जहाज खरीदा। इतने में सियाचिन-लद्दाख़ सीमा पर तैनात हमारे जवानों के लिए कितना कुछ खरीदा जा सकता था। 30,00,000 गरम कपड़े, 60,00,000 जैकेट, दस्ताने, 67,20,000 जूते, 16,80,000 ऑक्सिजन सिलिंडर। पीएम को सिर्फ अपनी इमेज की चिंता है सैनिकों की नहीं।`
राहुल गांधी ने शुक्रवार को भी मोदी पर निशाना साधा था। एक वीडियो शेयर करते हुए राहुल ने कहा था कि `भारत के लिए वास्तविक खतरा यह नहीं है कि हमारे प्रधानमंत्री को समझ नहीं है। खतरा यह है कि उनके आसपास किसी में भी उन्हें कुछ बताने की हिम्मत नहीं है।` वीडियो में मोदी, वेस्टस के सीईओ हेनरिक एंडरसन से बातचीत कर रहे थे। वह हवा से पानी निकालने की तकनीक पर बात कर रहे थे जिसका राहुल ने मजाक बनाया। इसके बाद कई केंद्रीय मंत्रियों समेत भाजपा नेताओं ने राहुल के इस ट्वीट पर पलटवार किया।

पिछले हफ्ते पंजाब में राहुल गांधी ने कहा था कि मोदी सरकार ने `देश विरोधी नीतियों और कार्यों` से देश को कमजोर कर दिया है। कांग्रेस नेता ने कहा था, `चीन ने महसूस किया कि मोदी ने भारत को कमजोर कर दिया है और उसने हमारी जमीन के 1,200 किलोमीटर के क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित करने के लिए इसी बात का फायदा उठाया।` राहुल ने पूछा, `चीन ने आखिर हमारे क्षेत्र में प्रवेश करने की हिम्मत क्यों की? वे हमारे सैनिकों में से 20 को कैसे मार सकते हैं, जो एलएसी पर हमारी तरफ थे?` 


भारतीय मुसलमानों को लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कही ये बड़ी बात*

10-Oct-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक ने कहा है कि भारतीय मुसलमान दुनिया में सबसे अधिक संतुष्ट हैं और किसी तरह का अलगाववाद सिर्फ उन लोगों द्वारा फैलाया जाता है, जिनके निजी हित प्रभावित होते हैं। संघ प्रमुख भागवत ने कहा, मुगल शासक अकबर के खिलाफ मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप की सेना में कई मुस्लिम लड़ रहे थे। भारत की यह परंपरा रही है कि जब देश की संस्कृति पर हमला होता है, तो सभी धर्मों के लोग एकजुट हो जाते हैं। जब भारतीयता की बात आती है तो सभी धर्मों के लोग एक साथ हो जाते हैं।

भागवत ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि क्या दुनिया में कोई दूसरा उदाहरण है, जहां लोगों पर शासन करने वाले किसी विदेशी धर्म का अस्तित्व वर्तमान में बचा हुआ हो? उन्होंने कहा कि ऐसा कहीं नहीं है। ऐसा सिर्फ भारत में है। भारत के विपरीत पाकिस्तान ने अन्य धर्मावलंबियों को अधिकार नहीं दिया है।
भागवत ने कहा कि हमारा संविधान यह नहीं कहता है कि यहां सिर्फ हिंदू रह सकते हैं या यदि आपको यहां रहना है, तो हिंदुओं की श्रेष्ठता स्वीकार करनी होगी। यह हमारे राष्ट्र की प्रकृति है। यह अंतर्निहित स्वभाव ही हिंदू कहलाता है। हिंदू का इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि कौन किसकी पूजा करता है।
संघ प्रमुख ने कहा कि जब भी भारत और इसकी संस्कृति के लिए त्याग और इसके रक्षा की भावना जगती है... पूर्वजों के प्रति गौरव की भावना बलवती होती है तो सभी धर्मों के बीच की दूरी खत् हो जाती है। ऐसे में सभी धर्मों के लोग एक साथ उठ खड़े होते हैं। भागवत ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण केवल परंपरागत उद्देश्यों के लिए नहीं है। यह राष्ट्रीय मूल्यों और चरित्र का प्रतीक है। 

संघ प्रमुख ने कहा कि सच्चाई यह है कि इस देश के लोगों के मनोबल तोड़ने के लिए और सांस्कृतिक मूल्यों का दमन करने के लिए मंदिरों को तोड़ा गया। यही वजह है कि लंबे समय से हिंदू समाज मंदिरों का पुनर्निर्माण चाहता था। आक्रांताओं द्वारा हमारे जीवन को त्रस्त किया गया। हमारे आदर्श भगवान श्रीराम के मंदिर को गिराकर हमें अपमानित किया गया। आज हम फि से इसका पुनर्निर्माण करना चाहते हैं और विस्तार करना चाहते हैं, इसी के चलते भव्य मंदिर बनाया जा रहा है। 


सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आयी फिर भी भारत सबसे बड़ा उत्सर्जक*

09-Oct-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) भारत के सल्फर डाइऑक्साइड (एसओटू) उत्सर्जन में 2018 के मुकाबले 2019 में करीब छह फीसदी की उल्लेखनीय कमी आई है। बीते चार साल में एसओटी उत्सर्जन में आई यह सबसे बड़ी कमी है। एक रिपोर्ट में यह कहा गया। उत्सर्जन में कमी के बावजूद भारत लगातार पांचवे साल सबसे ज्यादा सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जन करने वाला देश बना हुआ है।

ग्रीनपीस इंडियाऔरसेंटर फॉर रिसर्च ऑन एजर्नी ऐंड क्लीन एयर’ (सीआरईए) के विश्लेषण पर आधारित रिपोर्ट मंगलवार को जारी हुई। सल्फर डाइऑक्साइड विषैला वायु प्रदूषक होता है जो मस्तिष्काघात, ह्रदयरोग, फेफड़ों का कैंसर और असमय मौत की जोखिम बढ़ाता है। रिपोर्ट में कहा गया, भारत में 2019 हुआ मानवजनित एसओटू उत्सर्जन वैश्विक उत्सर्जन का 21 फीसदी था और यह दूसरे सबसे ज्यादा उत्सर्जन करने वाले देश रूस के मुकाबले दोगुना है। इसमें कहा गया कि चीन सर्वाधिक उत्सर्जन करने वाला तीसरा देश है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत मे एसओटू का सर्वाधिक उत्सर्जन सिंगरौली, नेवेली, सीपत, मुंद्रा, कोरबा, बोंडा, तमनार, तालचेर, झारसुगुडा, कच्छ, सूरत, चेन्नई, रामगुंडम, चंद्रपुर, विशाखापत्तन और कोराडी स्थित थर्मल पॉवर संयंत्रों से होता है। रिपोर्ट में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उन्नति करने के लिए भारत की प्रशंसा भी की गई।
ग्रीनपीस इंडिया केक्लाइमेट कैंपेनरअविनाश चंचल ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता भले बढ़ी हो लेकिन वायु गुणवत्ता अब भी सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा, भारत में, देखा जा सकता है कि कोयले के इस्तेमाल में कमी लाकर वायु गुणवत्ता तथा सेहत को किसी प्रकार प्रभावित किया जा सकता है। 2019 में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाई गई, कोयले पर निर्भरता घटाई गई जिसके परिणामस्वरूप हमने वायु गुणवत्ता में सुधार देखा। लेकिन हमारी वायु अब भी सुरक्षित नहीं है।


क्यों मनाया जाता है 10 अक्टूबर को भारतीय डाक दिवस, जाने भारतीय डाक का इतिहास*

09-Oct-2020

रायपुर (शोर सन्देश) चिट्ठियों का भी क्या जमाना था। कागज के टुकड़े पर लोग लम्हे-लम्हे के एहसास को समेट देते थे। एक मुकम्मल यादों का पिटारा हुआ करती थीं चिट्ठियां। मोबाइल और इंटरनेट के युग में भले ही चिट्ठियों का वजूद कम हो गया है, लेकिन डाक घरों की व्यस्तताएं और बढ़ गई हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि अब दस्तावेजों की हार्ड कॉपियां आती हैं, पहले दिलों के जज्बात शब्दों में पिरोकर भेजे जाते थे। कागज के टुकड़े पर शब्दों की जादूगरी के चिट्ठी युग को याद दिलाने के लिए हर साल नौ अक्टूबर को विश्व डाक दिवस मनाया जाता है, वहीं भारत में यह दिवस 10 अक्टूबर को मनाया जाता है।

भारतीय डाक का इतिहास डेढ़ सौ साल पुराना है। भारत में पहली बार वर्ष 1766 में डाक व्यवस्था की शुरुआत की गई। भारत में एक विभाग के रूप में इसकी स्थापना 1 अक्टूबर, 1854 को हुई। भारतीय डाक विभाग 9 से 14 अक्टूबर के बीच विश्व डाक सप्ताह मनाता है। वारेन हेस्टग्सिं ने कोलकाता में प्रथम डाकघर वर्ष 1774 को स्थापित किया।
भारत में सन 1852 में पहली बार चिट्ठी पर डाक टिकट लगाने की शुरुआत हुई तथा महारानी विक्टोरिया के चित्र वाला डाक टिकट 1 अक्टूबर 1854 को जारी किया गया। इंडिया पोस्ट की स्थापना 1854 में लॉर्ड डलहौजी ने की थी। यह संचार मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। मंत्री जिम्मेदार रविशंकर प्रसाद हैं। भारत में अब तक का सबसे बड़ा डाक टिकट पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर 20 अगस्त 1991 को जारी किया गया था। डाक दिवस मनाने का उद्देश्य है कि ग्राहकों को अच्छी जानकारी देना। डाक दिवस पर बेहतर काम करने वाले कर्मचारियों को पुरस्कृत भी किया जाता है।
पत्र लिखना -मेल और ऑनलाइन मैसेजिंग की शुरुआत से पहले संचार का एक महत्वपूर्ण रूप था। भारतीय डाक सेवा भारत का अभिन्न अंग है। भारत में डाक सेवाओं ने संस्कृति, परंपरा और कठिन भौगोलिक इलाकों में विविधता के बावजूद सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिया है।
00 भारत का पिन कोड सिस्टम

पिनकोड में पिन पोस्टल इंडेक्स नंबर के लिए है। 6-अंकीय पिन प्रणाली को श्रीराम भीकाजी वेलणकर द्वारा 15 अगस्त 1972 को केंद्रीय संचार मंत्रालय में एक अतिरिक्त सचिव द्वारा पेश किया गया था। पिन कोड के पहले अंक में इस क्षेत्र के निशान हैं। दूसरा अंक उप-क्षेत्र को दर्शाता है। तीसरा अंक जिले को चिन्हित करता है। अंतिम तीन अंक डाकघर को दिखाते हैं जिसके तहत एक विशेष पता होता है। 


नवाचार वह इंजन है जो राष्ट्र की प्रगति को प्रदान करता है शक्ति : रमेश पोखरियाल*

09-Oct-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) केंद्रीय शिक्षा मंत्री, रमेश पोखरियाल `निशंक` ने यहां वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, श्री सिटी (चित्तूर), आंध्र प्रदेश मेंएक मेइती-वित्त पोषित प्रौद्योगिकी व्यापार इनक्यूबेटर ज्ञान सर्कल वेंचर्स (टीबीआई) का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। इस अवसर पर, श्री पोखरियाल ने कहा कि नवाचार वह इंजन है जो राष्ट्र की प्रगति को शक्ति प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि हमें नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता है जिसके द्वारा यह सुनिश्चित किया जा सके कि हम आत्मनिर्भर हैं और अत्याधुनिक स्तर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक लीडर के रूप में बने हुए हैं। यह`ज्ञान सर्कल वेंचर्स`उस प्रकार के केंद्र हैं, जिसमें युवाओं के मन में उद्यमशीलता उत्पन्न करने और उन्हें सफल नवप्रवर्तक बनने के लिए प्रबंधक करने की क्षमता मौजूद है। वर्ष 2020 मेंउद्यमिता की भावना को ध्यान में रखते हुए, आईआईआईटी श्री सिटी टीबीआई, ज्ञान सर्कल वेंचर्स की शुरूआत कर रहा है। श्री पोखरियाल ने बताया कि ज्ञान सर्कल वेंचर्स, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेइती) द्वारा अनुमोदित किए गए प्रौद्योगिकी इनक्यूबेशन एंड डेवलपमेंट ऑफ एंटरप्रेन्योर(टाइड 2.0) इनक्यूबेशन केंद्र के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि इनक्यूबेटर अपनी बौद्धिक पूंजी का उपयोग करके संस्थानों की उद्यमशीलता की भावनाओं का लाभ उठाएगा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ब्लॉक-चेन, साइबर भौतिक पद्धति (सीपीएस), साइबर सुरक्षा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), रोबोटिक्स आदि जैसी उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के उपयोग को संलग्न करेगा।

श्री पोखरियाल ने बताया कि ज्ञान सर्कल वेंचर्स निवेश, बुनियादी संरचना और सलाह के माध्यम से विभिन्न चरणों में सहायता प्रदान करके नवाचार और स्टार्टअप के लिए एक हब के रूप में कार्य करेगा। विशेष रूप से, टीबीआई में एक सलाहकार समिति होगी जिसमें प्रमुख उद्योगपति, उद्यमी और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह शिक्षा और उद्योग दोनों क्षेत्रों से इन विशेषज्ञों और नेटवर्क का लाभ प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा। मंत्री ने आशा व्यक्त किया कि इनक्यूबेटर समाज के प्रति सजग उद्यमिता और ईंधन रोजगार का सृजन करने की दिशा में उत्प्रेरक के रूप में काम करेगा। 


अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान ने अनुसंधान के लिए एमिटी विवि के साथ समझौता किया*

09-Oct-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) आयुष मंत्रालय की स्वास्थ्य सेवा की आयुष प्रणालियों को प्रोत्साहन देने और उनका विकास करने के लिए भागीदारी करने की आयुष मंत्रालय की नीति को आगे बढ़ाते हुए इस मंत्रालय के अधीन अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), नई दिल्ली ने एमिटी विश्वविद्यालय के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौता ज्ञापन में आयुर्वेद विज्ञान में अनुसंधान को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इस संस्थान का समझौता ज्ञापन एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन के साथ है, जिसकी स्थापना 2018 में एमिटी विश्वविद्यालय द्वाराभारतीय चिकित्सा पद्धति के बढ़ते महत्व को मान्यता देने के लिए की गई थी। इस समझौता ज्ञापन में आयुर्वेदिक दवाइयों की गुणवत्ता और मानकीकरण के साथ-साथ प्राकृतिक उत्पाद रसायन विज्ञान और फार्मेसी में पीएचडी कार्यक्रमों में सहयोग की कल्पना की गई है। इसमें फार्मास्युटिक्, फार्माकोडायनामिक्स एवं फार्माकोकाइनेटिक्स में अध्ययन की सहयोग के संभावित क्षेत्रों के रूप में पहचान की गई है। यह समझौता ज्ञापन संयुक्त परियोजनाओं और प्रकाशनों को भी बढ़ावा देगा। इस साझेदारी से आयुर्वेद में कुछ अत्याधुनिक अनुसंधान के साथ-साथ विश् स्तर पर आयुर्वेदिक विज्ञान के साथ जुड़े ज्ञान को बढ़ावा देने और उसका प्रसार करने में अच्छे परिणाम मिलने की उम्मीद है। इससे आधुनिक विज्ञान के साथ परम्परागत ज्ञान का एकीकरण करने और आयुर्वेद अनुसंधान में नये आयाम जोड़ने में मदद मिलेगी। आयुष मंत्रालय मौजूदा महामारी परिदृश्य में वैश्विक स्तर पर चिकित्सा की भारतीय पद्धति को शुरू करने और उसे बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। आयुर्वेद ने रोगनिरोधी समाधान उपलब् कराकर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। इन समाधानों की व्यवहार्यता वैज्ञानिक अध्ययनों के माध्यम से स्थापित हुई है। मंत्रालय ने जनता में उपलब्ध आयुष स्वास्थ् समाधानों की गहराई और उसके दायरे को बढ़ाने के लिए अपने जैसी सोच वाले जैसे हितधारक संस्थानों के साथ हिस्सेदारी करने की जरूरत को स्वीकार किया है। मंत्रालय ने आयुर्वेद क्षेत्र में संसाधनों के प्रवाह को बढ़ाने की रणनीति के रूप में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) को भी प्रोत्साहित किया है। मौजूदा समझौता ज्ञापन इसी दृष्टिकोण का परिणाम है। दोनों संस्थान ज्ञान और प्रक्रियाओं को विकसित करने के लिए मिलकर काम करेंगे, जिनका राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में उपयोग किया जाएगा और ये आबादी के पैमाने पर प्रासंगिक होंगे। 


प्रधानमंत्री ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एकजुट होने की अपील की*

09-Oct-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी लोगों से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एकजुट होने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सभी से एकजुट होने की अपील की। मास्क पहनें, बार-बार हाथ धोएं, सामाजिक दूरी का अनुपाल करें और दो गज की दूरी का अभ्यास करें के मुख्य संदेश को दोहराते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि हम एक साथ मिलकर सफल होंगे और कोविड-19 के खिलाफ जीत हासिल करेंगे। लोगों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इस अभियान को शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत सभी लोग कोविड-19 शपथ लेंगे। केंद्र सरकार के मंत्रालयों, राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा निम्नलिखित विशेषताओं के साथ एक ठोस कार्य योजना लागू की जाएगी -


1 - अधिक मामले वाले जिलों में क्षेत्र निर्दिष् लक्षित संचार।
2 - प्रत्येक नागरिक तक पहुंचने के लिए सरल और आसानी से समझे जाने वाले संदेश।
3 - सभी मीडिया मंचों का उपयोग करते हुए पूरे देश में इस अभियान का प्रसार।
4 - फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के प्रयोजन वाले बैनर तथा पोस्टर सार्वजनिक स्थानों पर लगाना।
5 - सरकारी परिसरों में होर्डिंग्स/वॉल पेंटिंग और इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड लगाना।
6 - संदेश को घर-घर तक पहुंचाने के लिए स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली व्यक्तियों को शामिल करना।
7 - नियमित रूप से जागरूकता पैदा करने के लिए मोबाइल वैन का इस्तेमाल करना।
8 - जागरूकता के बारे में ऑडियो संदेश, पम्फ्लेट और ब्रोशर का प्रयोग।
9 - कोविड संदेशों के प्रसार के लिए स्थानीय केबल ऑपरेटरों की मदद लेना।

10 - इस अभियान की उपयोगी पहुंच और प्रभाव के लिए सभी मंचों पर समन्वित मीडिया अभियान चलाना। 


ब्याज दरों में बदलाव नहीं, आरबीआई गवर्नर ने कहा- मार्च तिमाही में जीडीपी पॉजिटिव हो जाएगी*

09-Oct-2020

मुंबई (शोर सन्देश) 7 अक्टूबर को शुरू हुई एमपीसी बैठक का फैसला गया है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली छह सदस्य वालों मौद्रिक नीति समिति (MPC-Monetary Policy Committee) ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है. रेपो रेट 4% पर बरकरार है. MPC ने सर्वसम्मति से ये फैसला किया है। रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी पर बरकरार है।

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, हाल में आए आर्थिक आंकड़ों से अच्छे संकेत मिल रहे है। ग्लोबल इकोनॉमी में रिकवरी के मजबूत संकेत मिल रहे हैं.मैन्युफैक्चरिग, रिटेल बिक्री में कई देशों में रिकवरी दिखी है. खपत, एक्सपोर्ट में भी कई देशों में सुधार दिखा है।
उन्होंने कहा, अर्थव्यवस्थआ में तेजी की उम्मीद बनी हुई है। हम बेहतर भविष्य के बारे में सोच रहे हैं। सभी सेक्टर में हालात बेहतर हो रहे है। ग्रोथ की उम्मीद दिखने लगी है। रबी फसलों का आउटलुक बेहतर दिख रहा है। महामारी के इस संकट अब कोविड रोकने से ज्यादा फोकस आर्थिक सुधारों पर है।
00 ब्याज दरों में नहीं हुआ कोई बदलाव

रेपो रेट 4 फीसदी पर बरकरार है। रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी बरकरार है। सभी 6 MPC सदस्यों ने ब्याज दरें स्थिर रखने के पक्ष में वोट किया। ब्याज दरों को लेकर अकोमोडेटिव रुख बरकरार है। फरवरी 2019 से अब तक MPC ने रेपो रेट में 2.50 फीसदी की बड़ी कटौती कर चुका है। 


दृष्टिकोण और बाजारों के लिहाज से तेजी से बदल रहा है भारत : प्रधानमंत्री*

09-Oct-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कनाडा में इन्वेस्ट इंडिया कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत निर्विवाद रूप से एकमात्र ऐसा राष्ट्र है जो अपने सभी निवेश मानकों जैसे राजनीतिक स्थिरता, निवेश और व्यापार के अनुकूल नीतियां, शासन में पारदर्शिता, कौशल से परिपूर्ण प्रतिभाशाली समूहों और एक व्यापक बाजार के रूप में प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह संस्थागत निवेशकों, विनिर्माणकर्ताओं, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और बुनियादी उद्योगों सहित सभी के लिए एक अवसर है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड के दौर में, भारत ने दृढ़ता दिखाई और यह विनिर्माण, आपूर्ति श्रृंखलाओं आदि से संबंधित विभिन्न प्रकार की समस्याओं को दूर करने के मामले में एक समाधान देश के रूप में उभरा। उन्होंने कहा कि प्रचालन-तंत्र बाधित होने के बावजूद भी, कुछ ही दिनों के भीतर करीब 40 करोड़ किसानों, महिलाओं, गरीबों और जरूरतमंद लोगों के बैंक खातों में धनराशि सीधे पहुंचायी गयी। उन्होंने महामारी के कारण उत्पन्न संकट से उबरने के लिए सरकार द्वारा की गई विभिन्न पहलों की जानकारी देते हुए इस बात पर बल दिया कि यह पिछले कुछ वर्षों में स्थापित की गई शासन व्यवस्थाओं और उपायों की क्षमता एवं भरोसे को दर्शाती हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब पूरा देश कड़े लॉकडाउन में था, भारत लगभग 150 देशों को दवाईयाँ उपलब्ध करा रहा था और भारत ने दुनिया के लिए फार्मेसी की भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि इस वर्ष मार्च-जून के दौरान कृषि निर्यात में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि महामारी से पूर्व, भारत ने शायद ही पीपीई किट का निर्माण किया हो, लेकिन आज भारत केवल हर महीने लाखों पीपीई किट का निर्माण करता है बल्कि उनका निर्यात भी करता है। उन्होंने उत्पादन को बढ़ावा देने और पूरे विश्व की सहायता करने के लिए कोविड-19 के लिए वैक्सीन तैयार करने की प्रतिबद्ध जताई। प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे व्यापार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में सरकार की पहलों से भारत की स्थिति और भी मजबूत हो रही है। उन्होंने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से जुड़ी व्यवस्था को काफी उदार बनाने, सॉवरेन वेल्थ एंड पेंशन फंड्स के लिए अनुकूल कर प्रणाली को लागू करने और मजबूत प्रतिभूति बाजार के विकास के साथ-साथ प्रमुख क्षेत्रों के लिए प्रोत्साहन योजनाओं जैसी पहलों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फार्मा, चिकित्सा उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण जैसे क्षेत्र पहले से कार्य संचालन में हैं। उन्होंने कहा कि निवेशकों के लिए उच्च-स्तर पर ध्यान केन्द्रित करने और उनकी प्रभावी सहभागिता को सुनिश्चित करने के लिए सचिवों के एक समर्पित सशक्त समूह का गठन किया गया है। उन्होंने हवाईअड्डों, रेल, राजमार्गो, ऊर्जा पारेषण आदि जैसे क्षेत्रों में परिसंपत्तियों के अग्रसक्रिय मुद्रीकरण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट और बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट सार्वजनिक और निजी दोनों तरह की परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत दृष्टिकोण और बाजारों के लिहाज से तेजी से बदल रहा है। भारत ने कंपनी अधिनियम के तहत कई प्रावधानों के उल्लंघन को अविनियमित और गैर-अपराधिक सूची में रखा है। उन्होंने कहा कि भारत ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स रैंकिंग में 81 से 48वें स्थान पर और पिछले 5 वर्षों में विश्व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में 142 से 63वें पायदान पर पहुंच गया है।प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सुधारों के कारण, भारत को जनवरी 2019 से जुलाई 2020 के बीच संस्थागत निवेशकों से लगभग 70 बिलियन अमरीकी डॉलर प्राप्त हुए। यह 2013 से 2017 के बीच के चार वर्षों में प्राप्त धनराशि के लगभग बराबर हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक निवेशक समुदाय के भारत के प्रति निरंतर बढ़ते विश्वास को इस तथ्य के साथ देखा जा सकता है कि 2019 में भारत में प्रत्यक्ष विदशी निवेश में उस समय 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई जब वैश्विक प्रत्यक्ष विदशी निवेश के अंतर्प्रवाह में 1 प्रतिशत की गिरावट हुई थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष के प्रथम 6 महीनों के दौरान भारत को दुनिया भर से 20 बिलियन अमरीकी डालर से अधिक प्राप्त हुए हैं, जब वैश्विक स्तर पर कोविड-19 अपने चरम पर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने कोविड-19 महामारी से उत्पन्न स्थिति से निपटने के प्रति एक अद्वितीय दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने कहा कि गरीबों और छोटे व्यवसायों को राहत और प्रोत्साहन पैकेज दिए गए हैं और साथ ही साथ यह ढांचागत सुधार करने का अवसर है जो अधिक उत्पादकता और समृद्धि को भी सुनिश्चित करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने कृषि, श्रम और शिक्षा जैसे तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में व्यापक सुधार किए हैं। ये लगभग हर भारतीय को एक साथ प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने श्रम और कृषि के क्षेत्र में पुराने कानूनों में सुधार सुनिश्चित किए हैं। वे सरकार के सुरक्षा दायरे को मजबूत बनाते हुए निजी क्षेत्र की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करते हैं और इससे उद्यमियों के साथ-साथ हमारे परिश्रमी व्यक्तियों के लिए भी लाभ का मार्ग सुलभ होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार देश के युवाओं की प्रतिभा को आगे बढ़ाएगा और इसके लिए अधिक विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत आने के लिए एक मंच तैयार किया गया है। 




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