
इस्लामाबाद ( शोर संदेश ) पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख इमरान खान की गिरफ्तारी के एक दिन बाद बुधवार को पंजाब प्रांत के पूर्व गवर्नर उमर सरफराज चीमा को भ्रष्टाचार निरोधक प्रतिष्ठान (एसीई) ने उनके घर पर छापेमारी के दौरान हिरासत में ले लिया। खबर के मुताबिक, अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर पीटीआई नेता हम्माद अजहर ने पुष्टि की कि चीमा को बुधवार तड़के गिरफ्तार किया गया। उन्होंने प्रश्न किया, "पूर्व गवर्नर उमर सरफराज चीमा को.. कौन ले जा रहा है? कहां? किस आरोप में?" वीडियो में कथित अधिकारियों को सामान्य कपड़े पहने चीमा के घर के अंदर दिखाया गया है। खबर के मुताबिक, उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है कि पूर्व गवर्नर जब सीढ़ियों से नीचे उतर रहे थे तो वे उनका 'इंतजार' कर रहे थे। इससे पहले इस्लामाबाद हाई कोर्ट (आईएचसी) में मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को एक नाटकीय घटनाक्रम में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद देश में उथल-पुथल मच गई। उनकी पार्टी के आह्वान पर पाकिस्तान के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।

लंदन/नई दिल्ली (शोर संदेश)। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का अंतिम संस्कार सोमवार 19 सितंबर को लंदन में होगा। इस दौरान विश्व के कई नेता, रॉयल्टी और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल होंगे। लंदन में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले मेहमानों की एक लंबी लिस्ट है। लंदन में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले मेहमानों की एक लंबी लिस्ट है। महारानी के अंतिम संस्कार में तकरीबन 500 लोगों को आमंत्रित किया गया है। भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू महारानी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए लंदन पहुंच चुकी है।
महारानी के अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले अपेक्षित लोग:
रॉयल अटेंडीज
जापान के सम्राट नारुहितो और की महारानी मसाको
राजा विलेम-अलेक्जेंडर और नीदरलैंड की रानी मैक्सिमा
किंग फेलिप VI और स्पेन की रानी लेटिजिया
स्पेन के पूर्व राजा जुआन कार्लोस
बेल्जियम के राजा फिलिप और रानी मथिल्डे
डेनमार्क की रानी मार्गरेट द्वितीय, क्राउन प्रिंस फ्रेडरिक और क्राउन प्रिंसेस मैरी
किंग कार्ल सोलहवें गुस्ताफ और स्वीडन की रानी सिल्विया
राजा हेराल्ड वी और नॉर्वे की रानी सोनजा हैराल्डसन
भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक
ब्रुनेई के सुल्तान हसनल बोल्कियाह
जॉर्डन के राजा अब्दुल्लाह
कुवैत के क्राउन प्रिंस, शेख मेशल अल-अहमद अल-सबाही
लेसोथो के राजा, लेत्सी III
लिकटेंस्टीन के वंशानुगत राजकुमार एलोइस
लक्जमबर्ग हेनरी के ग्रैंड ड्यूक
पहांगी के मलेशियाई सुल्तान अब्दुल्ला
मोनाको के राजकुमार, अल्बर्ट II
मोरक्को के क्राउन प्रिंस मौले हसन
ओमान के सुल्तान, हैथम बिन तारिक अल-सैद
कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानीक
टोंगा के राजा, टुपो VI
विश्व के नेता
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रथम महिला जिल बाइडन
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो
ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो
त्रिनिदाद और टोबैगो के राष्ट्रपति पाउला-मे वीक्स
बारबाडोस के राष्ट्रपति सैंड्रा मेसन
जमैका के प्रधान मंत्री एंड्रयू होल्नेस
बेलीज के गवर्नर जनरल फ्लोयला तजालम
सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस के गवर्नर जनरल सुसान डौगन
यूरोप और मिडिल ईस्ट
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों
जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टीनमीयर
इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला
आयरलैंड के राष्ट्रपति माइकल डी. हिगिंस
आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन
पुर्तगाल के राष्ट्रपति मार्सेलो रेबेलो डी सूसा
ऑस्ट्रिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वान डेर बेलेन
हंगरी के राष्ट्रपति कैटलिन नोवाक
पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रेजेज डूडा
लातविया के राष्ट्रपति एगिल्स लेविट्स
लिथुआनिया के राष्ट्रपति गीतानस नौसेदा
फिनलैंड के राष्ट्रपति सौली निनिस्टो
ग्रीस की राष्ट्रपति कतेरीना सकेलारोपोलू
माल्टा के राष्ट्रपति जॉर्ज वेला
साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस अनास्तासीदेस
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल
यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन
नाटो के महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग
इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग
फिलीस्तीनी प्रधानमंत्री मोहम्मद शतयेह
अफ्रीका
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा
नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति येमी ओसिनबाजो
घाना के राष्ट्रपति नाना अकुफो-एडो
गैबॉन के राष्ट्रपति अली बोंगो
एशिया
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
चीन के उपराष्ट्रपति वांग किशन
श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना
न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न
ऑस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री एंथोनी अल्बनीज
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति यूं सुक-योल
इन देशों को नहीं किया गया आमंत्रित
रूस
म्यांमार
बेलारूस
सीरिया
वेनेजुएला
अफगानिस्तान।

वाशिंगटन/नई दिल्ली (शोर संदेश)। संयुक्त राज्य अमेरिका के हवाई हमले में शनिवार को अल कायदा प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी मारा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने सोमवार इसकी पुष्टि की। बाइडन ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, "शनिवार को, मेरे निर्देश पर, संयुक्त राज्य अमेरिका ने अफगानिस्तान के काबुल में सफलतापूर्वक हवाई हमला किया और अल कायदा अमीर अयमान अल-जवाहिरी को मार गिराया।"अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि न्याय दिया गया है, "इसमें कितना भी समय लगे, चाहे आप कहीं भी छिप जाएं, अगर आप हमारे लोगों के लिए खतरा हैं, तो अमेरिका आपको ढूंढेगा और आपको बाहर निकालेगा।"बाइडन ने कहा, "जवाहरी 9/11 पर आतंकवादी हमलों के समय ओसामा बिन लादेन का नेता, उसका नंबर दो आदमी और उसका डिप्टी था। वह 9/11 की योजना में गहराई से शामिल था।" "जब मैंने लगभग एक साल पहले अफगानिस्तान में अपने सैन्य मिशन को समाप्त कर दिया, तो मैंने फैसला किया कि 20 साल के युद्ध के बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका को अब अफगानिस्तान में जमीन पर हजारों जूतों की जरूरत नहीं है, जो अमेरिका को उन आतंकवादियों से बचाने के लिए जो हमें नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। बाइडन ने कहा ने कहा, "मैंने अमेरिकी लोगों से वादा किया था कि हम अफगानिस्तान और उसके बाहर प्रभावी आतंकवाद विरोधी अभियान जारी रखेंगे। हमने बस यही किया है।"
अमेरिका ने अफगानिस्तान में जवाहिरी को ड्रोन हमले में मार गिराया। इसके बाद तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने हमले की पुष्टि की और कहा, "31 जुलाई को काबुल शहर के शेरपुर इलाके में एक रिहायशी मकान पर हवाई हमला किया गया।" उन्होंने कहा, "पहले घटना की प्रकृति स्पष्ट नहीं थी" लेकिन इस्लामिक अमीरात की सुरक्षा और खुफिया सेवाओं ने घटना की जांच की और "शुरुआती निष्कर्षों ने निर्धारित किया कि हमला एक अमेरिकी ड्रोन द्वारा किया गया था।"
मुजाहिद ने कहा कि अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात "किसी भी बहाने से इस हमले की कड़ी निंदा करते हैं और इसे अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों और दोहा समझौते का स्पष्ट उल्लंघन बताते हैं।" अमेरिकी विदेश विभाग ने सीधे जवाहिरी को पकड़ने वाली सूचना के लिए 2.5 करोड़ अमेरिकी डालर तक के इनाम की पेशकश की थी।

नई दिल्ली (शोर संदेश)। आर्थिक परेशानी से श्रीलंका में जूझ रहे प्रदर्शनकारियों ने अंतत: आज सारी सीमाए लांघ दी और खुद ही निर्णय ले लिया। शनिवार को हिंसक भीड़ ने राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के आवास पर कब्जा कर लिया। इसके बाद राष्ट्रपति राजपक्षे अपने आवास को छोड़कर भाग निकले। इतना ही नहीं प्रदर्शनकारियों ने सांसद रजिता सेनारत्ने के घर पर भी हमला किया है। बता दें कि इससे पहले 11 मई को तत्कालीन प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे पूरी परिवार के साथ भाग गए थे। उग्र भीड़ ने कोलंबो में राजपक्षे के सरकारी आवास को घेर लिया था। बताया जा रहा है कि कोलंबो स्थित राष्ट्रपति आवास को प्रदर्शनकारियों ने दोपहर में घेर लिया था। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने राजपक्षे के आधिकारिक आवास पर जमकर तोड़फोड़ भी की और आवास पर कब्जा कर लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने राष्टपति भवन में तोड़फोड़ की। बेड और सोफा सेट पर लेटकर सेल्फी ली। कई बेड पर आराम फरमाते देखे गए। वहीं स्वीमिंग पूल में घूसकर नहाने लगे। बता दें कि श्रीलंका में बिगड़ते आर्थिक संकट के बीच राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग को लेकर आज सरकार विरोध रैली चल रही है। उधर, श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने स्थिति पर चर्चा करने और त्वरित समाधान के लिए पार्टी नेताओं की आपात बैठक बुलाई है। प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने स्पीकर से संसद सत्र बुलाने की अपील की है। श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना (एसएलपीपी) के 16 सांसदों ने एक पत्र में राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे से तत्काल इस्तीफा देने का अनुरोध किया है। उधर, रैली के दौरान श्रीलंका की पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हो गई। हिंसक झड़पों में 100 से अधिक प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबर है। घायलों को राष्ट्रीय अस्पताल कोलंबो ले जाया गया है। शुक्रवार को श्रीलंका में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया था। सेना को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है। पुलिस प्रमुख चंदना विक्रमरत्ने ने कहा कि राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में शुक्रवार रात नौ बजे से कर्फ्यू लगा दिया गया है। उन्होंने बताया कि हजारों सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को सत्ता से हटाने के लिए शुक्रवार को कोलंबो में प्रवेश किया था जिसके बाद कर्फ्यू का फैसला लिया गया।

नई दिल्ली (शोर संदेश)। अफगानिस्तान के पूर्वी इलाके पाकटिका में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। वहां की स्थानीय मीडिया के अनुसार, भूकंप के कारण 155 लोगों की मौत हो गई। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.1 मापी गई। आपदा प्रबंधन अधिकारियों की ओर से मिली जानकारी के अनुसार इस भूकंप में अधिक नुकसान पाकटिका में हुआ है। तालिबानी प्रशासन के आपदा प्रबंधन अथारिटी के प्रमुख मोहम्मद नसीम हक्कानी ने बताया कि प्रभावित इलाकों में राहत व बचाव कार्य जारी है।
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नई दिल्ली (शोर संदेश)। भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक डॉ. आरती प्रभाकर को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपना शीर्ष वैज्ञानिक सलाहकार नियुक्त किया है। डॉ. प्रभाकर व्हाइट हाउस के ‘ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (OSTP) की प्रमुख बनाई गई हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने मंगलवार को डॉ. प्रभाकर को ओएसटीपी के निदेशक के रूप में नामित किया। अमेरिकी सीनेट की पुष्टि के बाद वह पहली महिला, अप्रवासी और अश्वेत होंगी जो ओएसटीपी का नेतृत्व करेंगी। प्रभाकर की नियुक्ति करते हुए बाइडन ने कहा कि वह एक शानदार और बेहद सम्मानित इंजीनियर और व्यावहारिक भौतिक विज्ञानी हैं। हमारी संभावनाओं का विस्तार करने, हमारी सबसे मुश्किल चुनौतियों को हल करने और असंभव को संभव बनाने के लिए तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार का लाभ उठाने के लिए वह विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति कार्यालय का नेतृत्व करेंगी। प्रसिद्ध भौतिकी वैज्ञानिक डॉ. आरती प्रभाकर एरिक लैंडर का स्थान लेंगी। 34 वर्षीय डॉ. प्रभाकर इसके पूर्व 1993 में तत्कालीन क्लिंटन प्रशासन ने राष्ट्रीय मानक और प्रौद्योगिकी संस्थान (NIST) के प्रमुख के रूप में चुना था। इसके बाद ओबामा प्रशासन ने प्रभाकर को डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (DARPA) का प्रमुख बनाया था। सीनेट से पुष्टि के बाद डॉ. प्रभाकर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए राष्ट्रपति की सहायक, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए राष्ट्रपति के मुख्य सलाहकार और विज्ञान व प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रपति की सलाहकार परिषद की सह-अध्यक्ष तथा बाइडन मंत्रिमंडल की सदस्य होंगी।
दिल्ली में जन्मीं, टेक्सास में पली बढ़ीं
डॉ. आरती प्रभाकर का जन्म दिल्ली में हुआ था। उनका बचपन और शुरुआती पढ़ाई टेक्सास में हुई। 1984 में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से पीएचडी करने के बाद वह संघीय सरकार के लिए काम करने चली गईं। उन्होंने 30 जुलाई 2012 से 20 जनवरी 2017 तक यूनाइटेड स्टेट्स डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (DARPA)की प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली। वह एक गैर-लाभकारी संगठन एक्चुएट (Actuate) की संस्थापक और सीईओ हैं। उन्होंने 1993 से 1997 तक राष्ट्रीय मानक और प्रौद्योगिकी संस्थान (NIST) का नेतृत्व किया और इसकी प्रमुख बनने वाली पहली महिला रहीं।

जिनेवा (शोर संदेश)। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल विश्व व्यापार संगठन के आज से शुरू हो रहे बारहवें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए स्विट्जरलैंड के जिनेवा पहुंच गये हैं। यह सम्मेलन करीब पांच वर्षं के अंतराल के बाद हो रहा है। श्री गोयल सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। एक ट्वीट में, श्री गोयल ने कहा कि बारहवें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भारत का प्रयास रहेगा कि वार्ताओं के सकारात्मक और न्यायसंगत परिणाम प्राप्त हों। उन्होंने आशा व्यक्त कि सम्मेलन में समाज के कमजोर वर्गों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर भारत की चिंताओं का समाधान होगा।
इस वर्ष सम्मेलन में कई विषयों पर चर्चा और वार्ता होगी। इनमें कोविड महामारी पर विश्व व्यापार संगठन की प्रतिक्रिया, मत्स्य पालन सब्सिडी वार्ता और खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक भंडार व्यवस्था सहित कृषि से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

लंदन (शोर संदेश)। ब्रिटेन में पहली बार दिए जा रहे ‘वर्ल्ड्स बेस्ट स्कूल’ (विश्व के सर्वश्रेष्ठ स्कूल) पुरस्कारों की जारी शीर्ष 10 की सूची में पांच भारतीय स्कूलों को शामिल किया गया है। समाज की प्रगति के क्षेत्र में दिए गए योगदान के लिए ब्रिटेन में ढाई लाख डॉलर के इन पुरस्कारों की घोषणा की गई है। मुंबई स्थित एसकेवीएम के सीएनएम स्कूल और नयी दिल्ली के लाजपत नगर-3 के एसडीएमसी प्राथमिक स्कूल को ‘वर्ल्ड्स बेस्ट स्कूल प्राइज फॉर इनोवेशन’ श्रेणी के शीर्ष 10 की सूची के लिए चयनित किया गया है। इसके अलावा ‘कम्युनिटी कोलैबोरेशन’ (सामुदायिक सहयोग) श्रेणी के शीर्ष 10 की सूची में मुंबई के खोज स्कूल और पुणे के बोपखेल में स्थित पीसीएमसी इंग्लिश मीडियम स्कूल को शामिल किया गया है। हावड़ा के समारितन मिशन स्कूल (हाई) को विश्व के सर्वश्रेष्ठ स्कूलों की सूची में ‘ओवरकमिंग एडवर्सिटी’ श्रेणी की सूची में जगह मिली है। टी4 एजुकेशन और ‘वर्ल्ड्स बेस्ट स्कूल’ पुरस्कार के संस्थापक विकास पोटा ने कहा, कोविड के कारण स्कूल और विश्वविद्यालयों के बंद होने से डेढ़ अरब से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए। संयुक्त राष्ट्र ने महामारी से पहले ही चेतावनी दी थी कि वैश्विक शिक्षा संकट गहरा सकता है क्योंकि 2030 तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में पहले से ही विलंब हो रहा था। उन्होंने कहा, हमने व्यवस्थागत बदलाव लाने के उद्देश्य से जमीनी स्तर पर समाधान निकालने के लिए वर्ल्ड्स बेस्ट स्कूल पुरस्कारों की शुरुआत की है। छात्रों के जीवन में परिवर्तन लाने और प्रेरणा देने वाले स्कूलों की कहानी बताकर शिक्षा में बदलाव लाया जा सकता है। ब्रिटेन स्थित डिजिटल मीडिया मंच टी4 एजुकेशन द्वारा वर्ल्ड्स बेस्ट स्कूल पुरस्कारों की शुरुआत की गई है। संबंधित श्रेणियों में अंतिम विजेताओं की घोषणा इस साल अक्टूबर में की जाएगी। पांच पुरस्कार विजेताओं के बीच ढाई लाख डॉलर का पुरस्कार बराबर बांटा जाएगा और प्रत्येक विजेता को 50 हजार डॉलर का पुरस्कार मिलेगा।

वियतनाम (शोर संदेश)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को वियतनाम को 12 तेज गति वाली तटरक्षक नौकाएं सौंपी। इन नौकाओं का निर्माण भारत द्वारा वियतनाम को दी गई 10 करोड़ डॉलर की ऋण सहायता के तहत किया गया है। राजनाथ ने अपने वियतनाम दौरे के दूसरे दिन होंग हा पोत कारखाने में आयोजित एक समारोह में यह अत्याधुनिक तटरक्षक नौकाएं(हाई-स्पीड गार्ड बोट) सौंपीं। यह नौकाएं ऐसे समय में वियतनाम को सौंपी गयी हैं जब दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में बीजिंग की बढ़ती सैन्य गतिविधियों से निपटने के लिए दोनों पक्षों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ रहा है।
रक्षा मंत्री आठ से 10 जून तक वियतनाम के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर कहा, भारत द्वारा 10 करोड़ अमेरिकी डालर की रक्षा ऋण सहायता के तहत 12 अत्याधुनिक तटरक्षक नौकाओं के निर्माण की परियोजना के सफल समापन के अवसर पर इस ऐतिहासिक समारोह में शामिल होकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। शुरुआती पांच नौकाओं का निर्माण भारत में एलएंडटी शिपयार्ड में किया गया था जबकि शेष सात को होंग हा पोत कारखाने में बनाया गया था। सिंह ने कहा, मुझे विश्वास है कि यह सहयोग भारत और वियतनाम के बीच कई और सहकारी रक्षा परियोजनाओं का अग्रदूत साबित होगा।

न्यूयॉर्क/नई दिल्ली (शोर संदेश)। अमेरिका में एक अध्ययन के दौरान इम्यूनोथेरेपी की नई दवा से रेक्टल कैंसर के सभी 18 मरीज पूरी तरह ठीक हो गए। छह महीने के कोर्स के बाद किसी भी मरीज की जांच में ट्यूमर सामने नहीं आया। कुछ मरीजों को दो साल का समय हो चुका है और अब तक कैंसर का कोई लक्षण नहीं उभरा है। न्यूयॉर्क स्थित एमएसके कैंसर सेंटर के डा. लुइस ए डियाज जूनियर के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन के नतीजे न्यू इंग्लैंड जर्नल आफ मेडिसिन में प्रकाशित किए गए हैं।
विज्ञानियों का कहना है कि भले ही 18 मरीजों पर किया गया यह अध्ययन छोटा है, लेकिन इसके नतीजे बहुत उत्साहजनक हैं। भविष्य में इससे विभिन्न प्रकार के कैंसर के सटीक इलाज की राह निकल सकती है। अध्ययन के दौरान सभी मरीजों को चेकप्वाइंट इनहिबिटर कही जाने वाली दवा डोस्टारलिमैब दी गई। छह माह तक हर तीसरे हफ्ते एक खुराक दी गई। डोज पूरी होने के बाद जब जांच की गई तो किसी भी मरीज में कैंसर का लक्षण नहीं बचा था। अध्ययन से पहले यह माना जा रहा था कि शायद कुछ मरीजों को बाद में कीमोथेरेपी या अन्य दवा की जरूरत पड़े, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अध्ययन में शामिल किए गए सभी मरीजों का कैंसर शुरुआती स्टेज में था, यानी उसका शरीर के दूसरे अंगों तक फैलना शुरू नहीं हुआ था।
दवा ऐसे करती है काम
कैंसर कोशिकाएं स्वयं को शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) से छिपाने में सक्षम होती हैं। उनकी इसी खूबी के कारण शरीर में ट्यूमर बनता है। यह दवा कैंसर की कोशिकाओं से उस पर्दे को हटा देती हैं और हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें आसानी से देख पाती है। इसके बाद हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली ही उन कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर देती है। इसीलिए इस प्रक्रिया को इम्यूनोथेरेपी कहा जाता है।
पांच साल पहले एक परीक्षण से बंधी थी उम्मीद
2017 में फार्मा कंपनी मर्क ने डा. लुइस डियाज के नेतृत्व में ही अपनी चेकप्वाइंट इनहिबिटर दवा पेमब्रोलिजुमैब का परीक्षण किया था। उस दौरान ऐसे मरीजों को शामिल किया गया था, जिनमें मेटास्टेटिक कैंसर था यानी कैंसर शरीर के कई अंगों में फैल चुका था। दो साल तक दवा लेने से करीब आधे मरीजों में ट्यूमर छोटा हो गया या उसका प्रसार रुक गया था। 10 प्रतिशत मरीजों में कैंसर खत्म हो गया था। इसी नतीजे को देखकर डा. डियाज ने सोचा था कि यदि एक ही अंग में फैले कैंसर पर दवा का प्रयोग करें, तो क्या नतीजा मिलेगा? इसी विचार के साथ उन्होंने फार्मा कंपनी ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन के साथ मिलकर अध्ययन को पूरा किया।