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पीएम मोदी 27 फरवरी को बजट के बाद आयोजित होने वाले वेबिनार को करेंगे संबोधित

27-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) पीएम मोदी 27 फरवरी को लगभग 11:30 बजे “विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकी, सुधार और वित्त” विषय पर आयोजित बजट पश्चात वेबिनार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित करेंगे। इस वेबिनार में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देने, अवसंरचना विकास, बैंकिंग क्षेत्र में सुधार, वित्तीय क्षेत्र की संरचना को सुदृढ़ करने, पूंजी बाजारों को मजबूत बनाने तथा कर सुधारों के माध्यम से नागरिकों के जीवनयापन को अधिक सरल और सुगम बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की जाएगी।
यह वेबिनार केंद्रीय बजट 2026-27 से उभरने वाले प्रमुख विषयों पर आयोजित किये जा रहे बजट पश्चात वेबिनारों की श्रृंखला में पहला है। इन वेबिनारों का उद्देश्य पिछले अनुभवों से सीख लेना और प्रतिभागियों से संरचित प्रतिक्रिया प्राप्त करना है ताकि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट घोषणाओं के परिणामोन्मुखी कार्यान्वयन को सुदृढ़ और सुनिश्चित किया जा सके, जिसमें विभिन्न हितधारकों के व्यावहारिक अनुभव और अंतर्दृष्टि का लाभ उठाया जा सके। इनमें उद्योग, वित्तीय संस्थानों, बाजार प्रतिभागियों, सरकार, उद्योग नियामकों और शिक्षा जगत के हितधारकों को एक साथ लाया जाएगा ताकि प्रमुख बजट घोषणाओं के प्रभावी कार्यान्वयन मार्गों पर विचार-विमर्श किया जा सके।
 

बलिदान दिवस पर चंद्रशेखर आजाद को नमन, पीएम मोदी बोले—अडिग संकल्प ही सच्चा पराक्रम

27-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अमर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद का जीवन यह संदेश देता है कि अन्याय के खिलाफ अडिग रहने का संकल्प ही सच्चा पराक्रम है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “भारत माता के वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें मेरी आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से आजाद कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, जिसके लिए वे सदैव स्मरणीय रहेंगे।”
प्रधानमंत्री ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “अमर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद का जीवन बताता है कि अन्याय के खिलाफ अडिग रहने का संकल्प ही सच्चा पराक्रम है। मातृभूमि के लिए उनके बलिदान की गाथा देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी।”
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् भी साझा किया— “न हि शौर्यात्परं किञ्चित् त्रिषु लोकेषु विद्यते। शूरः सर्वं पालयति सर्वं शूरे प्रतिष्ठितम्।”— इसका आशय है कि तीनों लोकों में शौर्य से श्रेष्ठ कोई तत्व नहीं है। शौर्य ही वह आधारभूत शक्ति है जो चराचर जगत का पोषण और रक्षण करती है तथा समस्त लोक मर्यादा और कर्तव्य का आधार बनती है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संदेश में कहा कि चंद्रशेखर आजाद ने जीवन की अंतिम सांस तक ‘वंदे मातरम्’ का गान करते हुए अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध वीरतापूर्ण संघर्ष किया। उन्होंने काकोरी ट्रेन एक्शन, हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के गठन और क्रांतिकारियों के संगठन निर्माण में उनके योगदान को स्मरण किया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चंद्रशेखर आजाद के प्रसिद्ध वाक्य— “दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे।” — को साझा करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि उनका त्याग और तेजस्वी व्यक्तित्व युगों-युगों तक राष्ट्र सेवा की प्रेरणा देता रहेगा। 
 

 


‘विकसित भारत’ पर पीएम मोदी का फोकस, 27 फरवरी को बजट पश्चात वेबिनार को करेंगे संबोधित

27-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 फरवरी को प्रातः लगभग 11:30 बजे “विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकी, सुधार और वित्त” विषय पर आयोजित बजट पश्चात वेबिनार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित करेंगे। इस वेबिनार में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देने, अवसंरचना विकास, बैंकिंग क्षेत्र में सुधार, वित्तीय ढांचे को सुदृढ़ करने, पूंजी बाजारों को मजबूत बनाने और कर सुधारों के जरिए नागरिकों के जीवनयापन को अधिक सरल व सुगम बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी।
यह वेबिनार केंद्रीय बजट 2026-27 से उभरने वाले प्रमुख विषयों पर आयोजित बजट पश्चात वेबिनारों की श्रृंखला का पहला कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए प्रतिभागियों से संरचित प्रतिक्रिया प्राप्त करना और वित्त वर्ष 2026-27 के बजट घोषणाओं के परिणामोन्मुखी कार्यान्वयन को सुदृढ़ करना है।
वेबिनार में उद्योग, वित्तीय संस्थानों, बाजार प्रतिभागियों, सरकार, उद्योग नियामकों और शिक्षा जगत के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इन सभी हितधारकों के व्यावहारिक अनुभव और अंतर्दृष्टि के आधार पर प्रमुख बजट घोषणाओं के प्रभावी कार्यान्वयन मार्गों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। 

 


नरेंद्र मोदी ने इसाक हर्जोग से की मुलाकात, भारत-इजराइल साझेदारी पर चर्चा

27-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को यरुशलम में इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से मुलाकात की। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति हर्जोग से मुलाकात में भारत-इजराइल रणनीतिक साझेदारी, व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा सहयोग और पश्चिम एशिया में शांति व स्थिरता के प्रयासों पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री ने 2017 में अपनी इजराइल यात्रा और 2023 में दुबई में राष्ट्रपति हर्जोग के साथ हुई पिछली मुलाकातों को गर्मजोशी से याद किया। दोनों नेताओं ने कहा कि भारत-इजराइल संबंधों को “शांति, नवाचार और समृद्धि के लिए विशेष रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक ले जाना द्विपक्षीय संबंधों में एक नई शुरुआत है। यह दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और विशेष मित्रता को दर्शाता है।
दोनों नेताओं ने व्यापार और प्रौद्योगिकी, नवाचार एवं उद्यम, रक्षा और सुरक्षा तथा आतंकवाद-रोधी सहयोग के क्षेत्रों में जारी साझेदारी पर संतोष व्यक्त किया।
नेताओं ने आपसी हित के क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की। गाजा शांति योजना के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के लिए जारी प्रयासों की प्रगति पर संतोष जताया।
दोनों देशों के साझा पर्यावरणीय मूल्यों को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति हर्जोग और प्रथम महिला के साथ ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत राष्ट्रपति भवन के उद्यान में एक पौधा रोपा।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति हर्जोग को उनकी गर्मजोशी, आतिथ्य सत्कार और भारत-इजराइल साझेदारी के प्रति उनके निरंतर समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।

 


इजराइल की संसद ‘नेसेट’ को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी

26-Feb-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजराइल के दो दिवसीय दौरे के दौरान यरुशलम में इजराइल की संसद को संबोधित किया। इसके साथ ही वे नेसेट को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए।
इजराइल की संसद ‘नेसेट’ (Knesset) में अध्यक्ष अमीर ओहाना ने प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत किया। संबोधन से पहले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्ष के नेता यायर लापिड ने भी संसद को संबोधित किया और भारत-इजराइल संबंधों के प्रति मजबूत द्विदलीय समर्थन व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत स्पीकर को धन्यवाद देते हुए की और ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट’ मेडल से सम्मानित किए जाने पर आभार जताया। उन्होंने यह सम्मान दोनों देशों की स्थायी मित्रता और साझा लोकतांत्रिक परंपराओं को समर्पित किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इजराइल के संबंध प्राचीन सभ्यतागत जुड़ाव के साथ-साथ प्रौद्योगिकी, नवाचार, रक्षा, सुरक्षा और रणनीतिक समानताओं पर आधारित हैं। कृषि, ग्रामीण विकास, जल प्रबंधन, सतत विकास और उद्यमिता में सहयोग ने जन-से-जन रिश्तों को और सशक्त बनाया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इजराइल में भारतीय समुदाय और भारत में यहूदी प्रवासी समुदाय ने दोनों देशों की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और द्विपक्षीय संबंधों को गहराई दी है।
प्रधानमंत्री ने 7 अक्टूबर के आतंकी हमले के पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी क्रूरता का कोई औचित्य नहीं हो सकता। उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के प्रयासों के प्रति भारत के समर्थन की पुष्टि की और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा समर्थित गाजा शांति पहल के प्रति भारत के दृढ़ समर्थन का उल्लेख किया।
उन्होंने बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारे और आई2यू2 जैसे ढांचों में गहन सहभागिता की बात कही। प्रधानमंत्री ने व्यापार, निवेश, अवसंरचना, हरित विकास, स्टार्ट-अप, डिजिटल समाधान और उभरती प्रौद्योगिकियों में अधिक सहयोग की जरूरत पर बल दिया और महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने भारत में गठित इजराइल संसदीय मैत्री समूह का उल्लेख करते हुए दोनों लोकतंत्रों के बीच संसदीय संवाद बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत का “वसुधैव कुटुंबकम” और इजराइल का “टिक्कुन ओलम” एक समरस और जिम्मेदार विश्व व्यवस्था के प्रति साझा दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने नेसेट के सदस्यों का भारत-इजराइल संबंधों में योगदान के लिए आभार व्यक्त किया और आगामी पुरिम पर्व के लिए शुभकामनाएं दीं।

बिहार दौरे पर गृह मंत्री अमित शाह, सीमांचल में सुरक्षा और विकास की समीक्षा

26-Feb-2026
नई दिल्ली।   ( शोर संदेश ) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। बुधवार को उन्होंने किशनगंज में भारतीय भूमि बंदरगाह प्राधिकरण (एलपीएआई) की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
दौरे के पहले दिन किशनगंज में गृह मंत्री ने केंद्रीय राज्यमंत्री नित्यानंद राय, बिहार के गृह मंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय गृह सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। गृह मंत्रालय के आधिकारिक एक्स हैंडल से बैठक की तस्वीर साझा कर इसकी जानकारी दी गई।
अपने दौरे के दौरान अमित शाह सीमांचल क्षेत्र में सीमा सुरक्षा, प्रशासनिक तैयारियों और चल रही विकास योजनाओं की समीक्षा करेंगे। यह इलाका नेपाल और बांग्लादेश की सीमाओं के निकट स्थित है।
बिहार के मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि गृह मंत्री नेपाल और बांग्लादेश से लगी सीमाओं की समीक्षा के लिए आ रहे हैं। जद(यू) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि सीमांचल क्षेत्र में एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर कृषि कॉलेज, पूर्णिया एयरपोर्ट और वक्फ संपत्तियों के विकास सहित कई परियोजनाएं चल रही हैं। लोजपा विधायक राजू तिवारी ने दौरे का स्वागत करते हुए इसे सरकार की जिम्मेदारी का संकेत बताया। 

कैबिनेट ने केरल राज्य के नाम को बदलकर ‘केरलम’ करने को मंजूरी दी

25-Feb-2026
नई दिल्ली।   ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। कैबिनेट की मंजूरी के बाद, भारत के राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत विचार व्यक्त करने के लिए केरल राज्य विधान सभा को केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 नामक एक विधेयक भेजेंगे। केरल राज्य विधान सभा की राय प्राप्त होने के बाद, भारत सरकार आगे की कार्रवाई करेगी और संसद में ‘केरल’ राज्य का नाम ‘केरलम’ करने के लिए केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को पेश करने के लिए राष्ट्रपति की सिफारिश प्राप्त की जाएगी।
केरल विधानसभा ने 24.06.2024 को ‘केरल’ राज्य का नाम ‘केरलम’ करने का एक प्रस्ताव पारित किया, जो इस प्रकार है- “हमारे राज्य का नाम मलयालम भाषा में ‘केरलम’ है।
1 नवंबर, 1956 को भाषा के आधार पर राज्यों का गठन किया गया था। केरल पिरवी दिवस भी 1 नवंबर को है।
राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही मलयालम भाषा बोलने वाले लोगों के लिए संयुक्त केरल के गठन की एक मजबूत मांग रही है। लेकिन संविधान की पहली अनुसूची में हमारे राज्य का नाम ‘केरल’ दर्ज है। यह विधानसभा सर्वसम्मति से केंद्रीय सरकार से संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार नाम को ‘केरलम’ में संशोधित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील करती है।”
इसके बाद, केरल सरकार ने भारत सरकार से संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार राज्य का नाम ‘केरल’ से ‘केरलम’ करने के लिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है। संविधान का अनुच्छेद 3 मौजूदा राज्यों के नामों के परिवर्तन के लिए प्रदान करता है। अनुच्छेद 3 के अनुसार, संसद कानून द्वारा किसी भी राज्य का नाम बदल सकती है।
‘केरल’ राज्य का नाम ‘केरलम’ करने के मामले पर भारत सरकार के गृह मंत्रालय में विचार किया गया और अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय सहकारिता मंत्री की मंजूरी से, ‘केरल’ राज्य का नाम ‘केरलम’ करने के लिए कैबिनेट के लिए मसौदा नोट को टिप्पणियों के लिए कानून और न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग और विधि कार्य विभाग को प्रसारित किया गया था। विधि कार्य विभाग और विधायी विभाग, कानून और न्याय मंत्रालय ने ‘केरल’ राज्य का नाम ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव से सहमति व्यक्त की है। 
 

 


रेगिस्तान में ‘अग्नि वर्षा’: भारतीय सेना का हाई-टेक युद्धाभ्यास शुरू

25-Feb-2026
नई दिल्ली  ( शोर संदेश )। भारतीय सेना 24 फरवरी से ‘अग्नि वर्षा’ नामक व्यापक सैन्य युद्धाभ्यास शुरू कर रही है। इस अभ्यास में आधुनिक टैंक, तोप, ड्रोन, रोबोट, मिसाइल, हेलिकॉप्टर और हवाई शक्ति का समन्वित उपयोग किया जाएगा।
दरअसल ‘अग्नि वर्षा’ भारतीय सेना का एक बड़ा युद्धाभ्यास है, जिसे वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में अंजाम दिया जा रहा है। 24 फरवरी को दक्षिणी कमान के तत्वावधान में रेगिस्तानी क्षेत्र में यह महत्त्वपूर्ण सैन्य अभ्यास आयोजित किया जा रहा है।
इस व्यापक युद्धाभ्यास का उद्देश्य सेना की ऑपरेशनल तैयारी, संयुक्त युद्धक क्षमता और आधुनिक युद्ध प्रणाली की प्रभावशीलता का परीक्षण करना है। रेगिस्तान की कठिन परिस्थितियों में सेना की विभिन्न शाखाएं इसमें भाग ले रही हैं। इनमें पैदल सेना, बख्तरबंद कोर, तोपखाना, वायु रक्षा और संचार इकाइयां शामिल हैं। सभी इकाइयां एकीकृत रूप से युद्धाभ्यास में भाग लेंगी।
अभ्यास का मुख्य फोकस सभी हथियार प्रणालियों के समन्वित उपयोग पर है। इसमें लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता का परीक्षण किया जाएगा और नेटवर्क आधारित कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम को परखा जाएगा। रेगिस्तानी इलाके की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में तेज और निर्णायक कार्रवाई की रणनीति विकसित की जाएगी। इसके माध्यम से आधुनिक तकनीक और स्वदेशी हथियार प्रणालियों की प्रभावशीलता का भी मूल्यांकन होगा।
इस युद्धाभ्यास को 25 देशों के अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञ प्रत्यक्ष रूप से देखेंगे। इससे भारत की सैन्य क्षमता का वैश्विक प्रदर्शन होगा और रक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता व विश्वास निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। यह अभ्यास आधुनिक तकनीक के समावेश, स्वदेशीकरण और युद्धक क्षमता के निरंतर विकास की नीति को भी दर्शाता है।
सेना का उद्देश्य है कि भविष्य के युद्धक्षेत्र की चुनौतियों के अनुरूप उसकी रणनीति, संसाधन और प्रणालियां पूरी तरह सक्षम और अद्यतन रहें। यह अभ्यास राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के प्रति सेना की तत्परता का स्पष्ट संदेश देता है। आवश्यकता पड़ने पर त्वरित, सटीक और निर्णायक कार्रवाई की क्षमता सेना के पास मौजूद है।
‘अग्नि वर्षा’ केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि तकनीक-सक्षम और आत्मनिर्भर भारतीय सेना की शक्ति, तैयारी और संकल्प का व्यापक प्रदर्शन भी है।
 

अत्याधुनिक टर्मिनल के साथ श्रीनगर बनेगा प्रमुख हवाई केंद्र

24-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर 1,677 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से सिविल एन्क्लेव के बृहत् विस्तार को मंजूरी दे दी है। नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में लिए गए इस निर्णय से जम्मू-कश्मीर में विमानन अवसंरचना और कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
यह हवाई अड्डा श्रीनगर शहर से लगभग 12 किमी दूर स्थित है और भारतीय वायु सेना के बडगाम एयरबेस के तहत संचालित होता है, जबकि नागरिक संचालन भारतीय विमानन प्राधिकरण द्वारा किया जाता है। परियोजना के अंतर्गत सुरक्षा कर्मियों के लिए बैरकों का निर्माण भी शामिल है।
73.18 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाले नए सिविल एन्क्लेव में 71,500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाला अत्याधुनिक टर्मिनल भवन होगा, जिसमें वर्तमान 20,659 वर्ग मीटर का ढांचा भी शामिल रहेगा। इसे व्यस्ततम समय में 2,900 यात्रियों की सेवा और प्रति वर्ष 10 मिलियन यात्रियों की क्षमता के अनुरूप डिजाइन किया गया है।
विस्तारित एप्रॉन में 15 विमान पार्किंग बे विकसित किए जाएंगे, जिनमें 1 वाइडबॉडी (कोड ई) विमान के लिए स्थान शामिल होगा। 3,658 मीटर x 45 मीटर का रनवे भारतीय वायु सेना द्वारा संचालित होता रहेगा। परियोजना में 1,000 कारों की क्षमता वाली मल्टी-लेवल कार पार्किंग सुविधा भी विकसित की जाएगी।
नया टर्मिनल आधुनिक डिजाइन और कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत का संतुलित मिश्रण प्रस्तुत करेगा। इसमें लकड़ी की पारंपरिक कारीगरी और स्थानीय शिल्प कौशल को शामिल किया जाएगा। साथ ही यात्री प्रसंस्करण क्षेत्र, विशाल लाउंज और उन्नत सुरक्षा व चेक-इन सुविधाओं से संचालन क्षमता को मजबूत किया जाएगा।
परियोजना में जल संचयन प्रणाली, प्राकृतिक प्रकाश का अधिकतम उपयोग और स्थानीय पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका लक्ष्य 5-स्टार जीआरआईएचए रेटिंग प्राप्त करना है।
इस परियोजना से डल झील, शंकराचार्य मंदिर और मुगल गार्डन जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर होगी। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और भारत में क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
सिविल एन्क्लेव का विकास विश्व स्तरीय अवसंरचना, बेहतर यात्री सुविधाओं और बढ़ी हुई हवाई संपर्क क्षमता की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम माना जा रहा है। यह परियोजना कश्मीर की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



 

पर्यटन नेतृत्व शिखर सम्मेलन 2026, उपराष्ट्रपति ने सतत और तकनीक-आधारित पर्यटन पर दिया जोर

24-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में आयोजित ‘पर्यटन नेतृत्व शिखर सम्मेलन 2026’ को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यटन संस्कृतियों के बीच सेतु, आर्थिक अवसरों का चालक और सॉफ्ट कूटनीति का शक्तिशाली साधन है। उन्होंने पर्यटन विकास को पर्यावरणीय लक्ष्यों के अनुरूप आगे बढ़ाने और एआई जैसी उभरती तकनीकों के एकीकरण पर बल दिया।
यह सम्मेलन यूएस-इंडिया पार्टनरशिप फोरम द्वारा संकला फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित किया गया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह मंच पर्यटन की संभावनाओं को रेखांकित करने के साथ भारत-अमेरिका आर्थिक गलियारे को मजबूत करने का रणनीतिक रोडमैप भी प्रस्तुत करता है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन लोगों के बीच गहरे संबंध, साझा मूल्यों और भारतीय प्रवासी समुदाय की जीवंतता को दर्शाता है। यह वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक संवाद और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है।
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में घोषित पर्यटन विजन 2029 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य प्रत्येक राज्य में विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल विकसित करना है। यह पहल केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं, बल्कि बेहतर कनेक्टिविटी, स्मार्ट सुविधाएं, सुरक्षा, सततता और डिजिटल एकीकरण पर आधारित समग्र पर्यटन इको-सिस्टम के निर्माण पर केंद्रित है।
उन्होंने भारत की सभ्यतागत विरासत और विविध भूदृश्यों को वैश्विक पर्यटन की नई पहचान बताते हुए यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण और उन्नयन पर जोर दिया। बेहतर आगंतुक सुविधाएं, व्याख्या केंद्र, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी और डिजिटल कहानी-वाचन को उन्होंने आवश्यक बताया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि पर्यटन विकास जलवायु-सचेत अवसंरचना और समुदाय आधारित मॉडल पर आधारित होना चाहिए। प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण को पर्यटन नीति का अभिन्न हिस्सा बनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने अंतरिक्ष, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों को नए युग के पर्यटन आकर्षण के रूप में विकसित करने की बात कही। साथ ही पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाने के लिए एआई आधारित समाधानों के व्यापक उपयोग पर बल दिया।
पर्यटन को रोजगार सृजन का प्रमुख स्रोत बताते हुए उन्होंने प्रशिक्षण, उद्यमिता और महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि यह शिखर सम्मेलन सततता, नवाचार और साझा समृद्धि पर आधारित भारत-अमेरिका सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत करेगा।

 



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